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Odisha has pledged to get rid of its ineffective government: PM Modi in Odisha
The Opposition parties like Congress and BJD have no vision to lead the country into 21st century: PM Modi
Only a BJP government can ensure stability, security and growth for our country in a transparent manner: Prime Minister Modi

जय जगन्नाथ, जय जगन्नाथ।

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ महानुभाव, मुझे फिर एक बार आपके बीच आने का अवसर मिला है। बक्शी जगबंधु, श्री जय राजगुरू, वीर सुरेंद्र साई समेत ओडिशा के सभी वीर बेटे-बेटियों को मेरा नमन। संबलपुर, देवगढ़ और अंगुल के सभी साथियो का भी बहुत-बहुत अभिनंदन।

भाइयो-बहनो, इतनी भीषण गर्मी में ये इतना बड़ा जन सैलाब, इतना जोश, ऐसी ही तस्वीरें जब टीवी के माध्यम से देश के दूसरे हिस्से में पहुंच रही है तब कई लोगों के होश उड़ रहा है। बड़े-बड़े महामिलावटियों को इस चौकीदार के लिए आपका स्नेह उनको समझ ही नहीं आ रहा है की देश चौकीदार को इतना प्यार क्यों कर रहा है। और ऊपर से पहले चरण की वोटिंग में ओडिशा से जो संकेत आए हैं, उससे साफ है की दिल्ली में फिर एक बार मोदी सरकार और ओडिशा में भाजपा सरकार। साथियो, ये समर्थन देश इसलिए दे रहा है क्योंकि सभी एक मजबूत और ईमानदार सरकार चाहते हैं।

भाइयो-बहनो, हमारे देश में साधनों और संसाधनों की कमी नहीं रही, कमी रही है जनता के पैसे के सही इस्तेमाल की। पहले की सरकारों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया की जितने पैसे दिल्ली से भेजे जा रहे हैं उसका लाभ आप तक पहुंच रहा है की नहीं पहुंच रहा है। आप मुझे बताइए 100 पैसे भेजने पर अगर सिर्फ 15-16 पैसे का ही काम होगा तो यहां विकास हो पाएगा? 100 पैसे में से 85 पैसे कोई दलाल अपनी तिजोरी में भर लेगा तो क्या यहां सड़कें बन पाएंगी, पुल बन पाएंगे, अस्पताल बन पाएंगे? आजादी के इतने साल तक ये भ्रष्टाचार चल रहा था इसे कोई रोकने वाला नहीं था। अब मोदी की सरकार ने, आपके इस चौकीदार की सरकार ने ये व्यवस्था बनाई है की सरकार अगर 100 पैसे भेजे तो पूरे 100 पैसे गरीब पर खर्च हो, 100 के 100 पैसे।

भााइयो-बहनो, इन पांच सालों में अगर आप इस चौकीदार के साथ ना होते तो ये संभव ही नहीं था। आपके इसी आशीर्वाद की वजह से भाजपा की मजबूत सरकार, लोक कल्याण और राष्ट्र कल्याण से जुड़े बड़े-बड़े काम कर पाई है। वरना इससे पहले आपने दिल्ली में एक मजबूर सरकार और भ्रष्ट सरकार भी देखी है। ये वो सरकार थी जो आपकी मिलने वाली चीनी में घोटाला कर जाती थी, ये वो सरकार थी जो आपको मिलने वाले राशन में घोटाला कर जाती थी। ये वो सरकार थी जो किसानों को मिलने वाले यूरिया में घोटाला कर जाती थी, ये वो सरकार थी जो जमीन से निकलने वाले खनिज और कोयले तक में घोटाला कर जाती थी। गरीब के लिए बनी हर योजना पर कुछ लोगों की नजर गिद्धों की तरह रहती थी, जैसे ही पैसा आया ये लोग आपका पैसा लूटने में लग जाते थे। क्या आपका चौकीदार इसे ऐसे ही देखता रहता क्या? मैं तो ठान कर आया था इन दलालों से, इन भ्रष्टाचारियों का मुकाबला करूंगा।

साथियो, जब इस चौकीदार ने इनके भ्रष्टाचार के कारोबार पर प्रहार किया तो इनको इतना कष्ट हुआ है की अब ये मुझे रास्ते से हटा देने पर तुले हुए हैं। भाइयो-बहनो, ये पहले की भ्रष्ट और कमजोर सरकारों का परिणाम है। आजादी के इतने वर्ष बाद भी संपन्न ओडिशा की जनता गरीब ही गरीब होती गई। क्षेत्र के आधार पर भेदभाव, जात-पात के आधार पर भेदभाव यही कांग्रेस और BJD की उपलब्धि रही है। यही कारण है की जहां महानदी और हीराकुंड जैसे बांध हैं वहां का किसान बूंद-बूंद पानी के लिए तरसता है। धान के खेत, किसान के परिश्रम से लहलहाते हैं लेकिन धान को बीमारी से बचाने के लिए सरकार समय पर कार्रवाई नहीं करती। केंद्र सरकार ने तय किया की धान की फसल की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य किसान को मिले लेकिन यहां की सरकार ने खरीदने के इंतजाम ही नहीं किए। किसानों को बिचौलियों के भरोसे छोड़ दिया गया। 

साथियो, स्थिति ये है की इस चौकीदार ने जो पीएम किसान सम्मान योजना बनाई है, यहां की सरकार के कारण उसका पूरा लाभ आपको नहीं मिल पा रहा है। वजह ये है क्योंकि यहां की सरकार ने किसानों के नाम की जो लिस्ट भेजी है वो भी आधी-अधूरी है जिसकी वजह से सिर्फ साढ़े आठ लाख किसानों के खाते में ही पहली किश्त जा पाई है बाकी लिस्ट यहां की सरकार नहीं दे पा रही है। इन लोगों ने जो खुद एक योजना बनाई उसमें जो घोटाले और घपले हो रहे हैं वो भी आप जानते हैं। भाइयो-बहनो, देश के किसानों को उनकी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए, बैंक में सीधे पैसा ट्रांसफर करने के लिए ये चौकीदार प्रतिबद्ध है बल्कि हमने तो इसका दायरा बढ़ाने का संकल्प लिया है। 23 मई को जब फिर एक बार मोदी सरकार आएगी तब ओडिशा के सभी किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद की व्यवस्था हम करने वाले हैं। याद रखिए ओडिशा के हर किसान के खाते में सीधे पैसा आएगा। कोई दलाल आपके पैसे पर पंजा नहीं मार पाएगा। साथियो, ऐसा ही एक और संकल्प है जिसका लाभ संबलपुर सहित पूरे ओडिशा को होने वाला है। भाजपा की सरकार बनने पर, दिल्ली में नई सरकार बनने पर अलग से एक जल-शक्ति मंत्रालय बनाया जाएगा, सिर्फ पानी के लिए अलग मिनिस्ट्री। इसके तहत देश भर की नदियों के, समंदर के बारिश के पानी को जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंचाने का मिशन चलाया जाएगा। इससे, इस क्षेत्र की पानी की समस्या कम हो पाएगी।

भाइयो-बहनो, इस इलाके के लोगों का कल्याण, देश के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों का कल्याण हमारी प्राथमिकताओं में है। जब अटल जी की सरकार थी तब आदिवासियों के लिए अलग से एक मंत्रालय बनाया गया था। अब हमने फैसला किया है की नई सरकार बनने के बाद एक और मंत्रालय बनाएंगे, मछली पालन से जुड़े भाई-बहनों के लिए अलग फिशरीज मंत्रालय बनाया जाएगा। मछुआरों की छोटी-छोटी जरूरत पर ध्यान देने के लिए बीजेपी की सरकार मत्स्य संपदा योजना भी शुरू करेगी, जिस पर 10 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। मछुआरे भाइयों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा का भी विस्तार किया जा चुका है। लेकिन भाइयो और बहनो, जिनकी प्राथमिकता सिर्फ पीसी की रही हो, कट की रही हो, मलाई खाने की रही हो उनको आपकी चिंता कैसे होगी। चिटफंड और खनन माफिया को ही अगर संरक्षण सरकार देती रहेगी तो सामान्य मानवी की चिंता कैसे संभव है। कोल ब्लॉक घोटाले में किस तरह उंगलियां उठी हैं ये भी ओडिशा के लोग भली-भांति जानते हैं।

साथियो, जमीन के नीचे की संपदा, यहां के जंगलों की समृद्धि ओडिशा की शक्ति है। ओडिशा की यही शक्ति भारत को ताकत दे रही है लेकिन इन जंगलों में रहने वालों की पूछ नहीं बल्कि उनके साथ लूट हुई लूट। आपके इस चौकीदार ने बरसों पुराना खनन कानून बदला, ये तय किया की जो भी संपदा यहां निकलती है उसका एक निश्चित हिस्सा यहां के विकास के लिए लगना चाहिए। भाइयो-बहनो, इस तरह जो डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड बना, उसके तहत ओडिशा को 6 हजार करोड़ रुपए मिले। इससे आपके लिए अस्पताल बनने थे ताकि आपको इलाज के लिए परेशान ना होना पड़े। इससे वनवासियों की बस्तियों में शुद्ध पीने के पानी का इंतजाम होना था ताकि गंदे पानी की वजह से उनके बच्चे बीमार ना पड़ें। इससे स्कूल बनने थे ताकि आदिवासी बच्चों को शिक्षा के लिए भटकना ना पड़े। लेकिन साथियो, ये आप जानकर के हैरान हो जाएंगे की यहां की बीजेडी सरकार ने 6 हजार करोड़ में से सिर्फ एक हजार करोड़ ही खर्च किया है बाकी पैसे पड़े हुए हैं और आप बहुत छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए परेशान हो रहे हैं। जब सरकारों की नीयत ऐसी हो तो उनको बदलना जरूरी है। 20 साल आपने आंख बंद कर इन पर बहुत भरोसा कर लिया अब ओडिशा की धरती परिवर्तन का मन बना चुकी है। भाइयो-बहनो, यहां की सरकार किस तरह चालाकी से काम कर रही है, ये भी मैं आपको बताता हूं। बताऊं, ये कैसी चालाकी करती है सुनना है आपको? ये गांव के लोगों को पता नहीं है, आपको बताना पड़ेगा, बताएंगे?

देखिए अभी भी जो एक रुपए के चावल गरीबों को यहां मिलता है वो केंद्र की सरकार, ये यहां बताते नहीं हैं। भारत सरकार, दिल्ली में चौकीदार की सरकार 19 रुपया, 30 रुपए में चावल खरीदती है और वो चावल यहां पर पहुंचाती है। यहां की सरकार ज्यादा से ज्यादा, उसमें उसको 2 रुपया डालना पड़ता है, ये चौकीदार की सरकार 25,27,29 रुपए डालती है। ये सिर्फ 2 रुपया डालते हैं और कहते हैं कि यहां पर ओडिशा सरकार ये चावल सस्ते में गरीबों को दे रही है। बताइए झूठ है की नहीं है, ये धोखा है की नहीं है? ये आपके साथ झूठ बोला जाता है की नहीं बोला जाता है? अब मुझे बताइए की अगर आपका बेटा दिल्ली में रहता है और वो आपको मनी ऑर्डर भेजता है और पोस्टमैन आपके घर में आकर के मनी ऑर्डर देता है तो ये पैसा पोस्टमैन देता है की दिल्ली में बैठा आपका बेटा देता है। बताइए कौन देता है? ये पैसा पोस्टमैन देता है की दिल्ली में बैठा आपका बेटा देता है? अब ये कहते है पोस्टमैन देता है, ये आपके गले उतरेगा क्या? मान लीजिए आपका बेटा दिल्ली में बैठा है और पिताजी के लिए एक शर्ट भेजना है, वो कपड़ा खरीद के ले आता है, दर्जी को ढूंढता है नाप देता है, धोबी को देता है प्रेस करवाता है और पैकिंग करके यहां भेजता है और यहां जो लाने वाला एजेंट है उसके जिम्मे है की उसमें बटन लगा दे। और फिर शर्ट आपके यहां पहुंचा देता है, बताइए शर्ट बेटे ने भेजा या बटन लगाने वाले ने भेजा, शर्ट किसने भेजा? ये ऐसा आधा-अधूरा झूठ बोलकर के आपको गुमराह करते हैं।

साथियो, ये मैं नहीं कहता की ओडिशा सरकार इसको पहुंचाने के लिए मेहनत नहीं करती, करते हैं लेकिन ये भी तो बताओ ये चावल चौकीदार भेजता है तब सस्ते में आता है लेकिन नहीं बताते। साथियो, हमारा ये भी संकल्प है की 23 मई को जब फिर एक बार मोदी सरकार आएगी तब गरीबों को घर देने की स्पीड और बढ़ाई जाएगी। बीते पांच वर्षों में ओडिशा के गांवों में लगभग 12 लाख से अधिक पक्के घर मिल चुके हैं। साल 2022 तक याद रखिए, ये मोदी का वादा है 2022 तक ओडिशा के हर गरीब को, वंचित को, पिछड़े को आदिवासी के पास उसका अपना पक्का घर हो और ये मैं दे कर रहूंगा। और घर भी मामूली नहीं, पक्का घर और घर ऐसा बनेगा जिसमें उज्जवला की गैस हो, सौभाग्य की बिजली हो, उजाला का बल्ब हो और एक शौचालय भी हो। ये कोई वादा नहीं है, ऑलरेडी काम चल रहा है, तेज गति से चल रहा है, ये सभी सुविधाएं गांव-गांव में आज मिल रही हैं। किसी को ये सब-कुछ मिल चुका है और किसी को आने वाले दिनों में मिलने वाला है और ये वादा मैं करने आया हूं। इतना ही नहीं यहां जो नई बीजेपी सरकार बनेगी, ओडिशा में जब नई बीजेपी की सरकार बनेगी, दिल्ली में फिर एक बार भाजपा सरकार बनेगी तो ओडिशा में आयुष्मान भारत योजना भी लागू करेगी। ये योजना लागू होने के बाद यहां के गरीब परिवार को पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज पूरे देश के अस्पतालों में हो सकेगा।

साथियो, आपके आशीर्वाद का ही परिणाम है की पूर्वी भारत को विकास का इंजन बनाने का अभूतपूर्व प्रयास हुआ है। झारसुगुडा में भी वीर सुरेंद्र साई एयरपोर्ट, संबलपुर-तालचेर, संबलपुर-टिटलागढ़, बालांगीर, खोर्धा, राउरकेला, झारसुकरा ऐसे अनेक रेलवे प्रोजेक्ट्स से यहां की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। संबलपुर आईआईएम का परमानेंट कैंपस भी इसी चौकीदार के प्रयास का हिस्सा है। याद करिए, कब से यहां आईआईएम जैसे अच्छे संस्थान की मांग हो रही थी लेकिन यहां की सरकारों ने उन पर ध्यान नहीं दिया। आपके इस चौकीदार ने जनता की आवाज को सुना और आज देश का एक प्रतिष्ठित संस्थान यहां की पहचान से जुड़ा है। इसके पास ही खैरगढ़ में 2जी ऐथेनॉल प्लांट का काम भी चल रहा है और मैं आपको ये भी कहूंगा, ये तो अभी शुरूआत है। आने वाले वर्षों में यहां अनेक संस्थान विकसित करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। साथियो, ये सभी संकल्प तभी पूरे होंगे जब आपका एक-एक वोट कमल के फूल पर पड़ेगा, लोकसभा चुनाव में भी कमल और विधानसभा चुनाव में भी कमल, ऊपर के लिए भी कमल और नीचे के लिए भी कमल। डबल कमल छाप इंजन से भुवनेश्वर में और दिल्ली में विकास के डबल इंजन वाली सरकार बनेगी।

भाइयो-बहनो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, आप जब कमल पर बटन दबाएंगे ना, जैसे ही कमल पर बटन दबाएंगे, ये आपका वोट सीधा-सीधा मोदी के खाते में जाएगा।
भारत माता की… जय, भारत माता की… जय, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text to PM’s interaction with beneficiaries of Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana in Gujarat
August 03, 2021
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Earlier, the scope and budget of cheap ration schemes kept on increasing but starvation and malnutrition did not decrease in that proportion: PM
Beneficiaries are getting almost double the earlier amount of ration after Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana started: PM
More than 80 crore people people are getting free ration during the pandemic with an expenditure of more than 2 lakh crore rupees: PM
No citizen went hungry despite the biggest calamity of the century: PM
Empowerment of the poor is being given top priority today: PM
New confidence of our players is becoming the hallmark of New India: PM
Country is moving rapidly towards the vaccination milestone of 50 crore: PM
Let's take holy pledge to awaken new inspiration for nation building on Azadi ka Amrit Mahotsav: PM

नमस्‍कार! गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, उप-मुख्यमंत्री श्री नितिन भाई पटेल जी, संसद में मेरे साथी और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष श्रीमान सी. आर. पाटिल जी, पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के सभी लाभार्थी, भाइयों और बहनों!

बीते वर्षों में गुजरात ने विकास और विश्वास का जो अनवरत सिलसिला शुरु किया, वो राज्य को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। गुजरात सरकार ने हमारी बहनों, हमारे किसानों, हमारे गरीब परिवारों के हित में हर योजना को सेवाभाव के साथ ज़मीन पर उतारा है। आज गुजरात के लाखों परिवारों को पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत एक साथ मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है। ये मुफ्त राशन वैश्विक महामारी के इस समय में गरीब की चिंता कम करता है, उनका विश्वास बढ़ाता है। ये योजना आज से प्रारंभ नहीं हो रही है, योजना तो पिछले एक साल से करीब-करीब चल रही है ताकि इस देश का कोई गरीब भूखा ना सो जाए।

मेरे प्‍यारे भाईयों और बहनों,

गरीब के मन में भी इसके कारण विश्‍वास पैदा हुआ है। ये विश्वास, इसलिए आया है क्योंकि उनको लगता है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी हो, देश उनके साथ है। थोड़ी देर पहले मुझे कुछ लाभार्थियों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला, उस चर्चा में मैंने अनुभव भी किया कि एक नया आत्‍मविश्‍वास उनके अन्‍दर भरा हुआ है।

साथियों,

आज़ादी के बाद से ही करीब-करीब हर सरकार ने गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कही थी। सस्ते राशन की योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन उसका जो प्रभाव होना चाहिए था, वो सीमित ही रहा। देश के खाद्य भंडार बढ़ते गए, लेकिन भुखमरी और कुपोषण में उस अनुपात में कमी नहीं आ पाई। इसका एक बड़ा कारण था कि प्रभावी डिलिवरी सिस्टम का ना होना और कुछ बिमारियाँ भी आ गईं व्‍यवस्‍थाओं में, कुछ cut की कंपनियाँ भी आ गईं, स्‍वार्थी तत्‍व भी घुस गये। इस स्थिति को बदलने के लिए साल 2014 के बाद नए सिरे से काम शुरु किया गया। नई technology को इस परिवर्तन का माध्यम बनाया गया। करोड़ों फर्ज़ी लाभार्थियों को सिस्टम से हटाया। राशन कार्ड को आधार से लिंक किया और सरकारी राशन की दुकानों में digital technology को प्रोत्साहित किया गया। आज परिणाम हमारे सामने है।

भाइयों और बहनों,

सौ साल की सबसे बड़ी विपत्ति सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी दुनिया पर आई है, पूरी मानव जाति पर आई है। आजीविका पर संकट आया, कोरोना लॉकडाउन के कारण काम-धंधे बंद करने पड़े। लेकिन देश ने अपने नागरिकों को भूखा नहीं सोने दिया। दुर्भाग्य से दुनिया के कई देशों के लोगों पर आज संक्रमण के साथ-साथ भुखमरी का भी भीषण संकट आ गया है। लेकिन भारत ने संक्रमण की आहट के पहले दिन से ही, इस संकट को पहचाना और इस पर काम किया। इसलिए, आज दुनियाभर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की प्रशंसा हो रही है। बड़े-बड़े expert इस बात की तारीफ कर रहे हैं कि भारत अपने 80 करोड़ से अधिक लोगों को इस महामारी के दौरान मुफ्त अनाज उपलब्ध करा रहा है। इस पर 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक ये देश खर्च कर रहा है। मकसद एक ही है- कोई भारत का मेरा भाई-बहन, मेरा कोई भारतवासी भूखा ना रहे। आज 2 रुपए किलो गेहूं, 3 रुपए किलो चावल के कोटे के अतिरिक्त हर लाभार्थी को 5 किलो गेहूं और चावल मुफ्त दिया जा रहा है। यानि इस योजना से पहले की तुलना में राशन कार्ड धारकों को लगभग डबल मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ये योजना दीवाली तक चलने वाली है, दिवाली तक किसी गरीब को पेट भरने के लिये अपनी जेब से पैसा नहीं निकालना पड़ेगा। गुजरात में भी लगभग साढ़े 3 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन का लाभ आज मिल रहा है। मैं गुजरात सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा करूंगा कि उसने देश के दूसरे हिस्सों से अपने यहां काम करने आए श्रमिकों को भी प्राथमिकता दी। कोरोना लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए लाखों श्रमिकों को इस योजना का लाभ मिला है। इसमें बहुत सारे ऐसे साथी थे, जिनके पास या तो राशन कार्ड था ही नहीं, या फिर उनका राशन कार्ड दूसरे राज्यों का था। गुजरात उन राज्यों में है जिसने सबसे पहले वन नेशन, वन राशन कार्ड की योजना को लागू किया। वन नेशन, वन राशन कार्ड का लाभ गुजरात के लाखों श्रमिक साथियों को हो रहा है।

भाइयों और बहनों,

एक दौर था जब देश में विकास की बात केवल बड़े शहरों तक ही सीमित होती थी। वहाँ भी, विकास का मतलब बस इतना ही होता था कि ख़ास-ख़ास इलाकों में बड़े बड़े flyovers बन जाएं, सड़कें बन जाएं, मेट्रो बन जाएं! यानी, गाँवों-कस्बों से दूर, और हमारे घर के बाहर जो काम होता था, जिसका सामान्‍य मानवी से लेना-देना नहीं था उसे विकास माना गया। बीते वर्षों में देश ने इस सोच को बदला है। आज देश दोनों दिशाओं में काम करना चाहता है, दो पटरी पर चलना चाहता है। देश को नए infrastructure की भी जरूरत है। Infrastructure पर भी लाखों-करोड़ों खर्च हो रहा है, उससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, लेकिन साथ ही, सामान्य मानवी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए, Ease of Living के लिए नए मानदंड भी स्थापित कर रहे हैं। गरीब के सशक्तिकरण, को आज सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जब 2 करोड़ गरीब परिवारों को घर दिये जाते हैं तो इसका मतलब होता है कि वो अब सर्दी, गर्मी, बारिश के डर से मुक्त होकर जी पायेगा, इतना ही नहीं, जब खुद का घर होता है ना तो आत्‍मसम्‍मान से उसका जीवन भर जाता है। नए संकल्‍पों से जुड़ जाता है और उन संकल्‍पों को साकार करने के लिये गरीब परिवार समेत जी जान से जुट जाता है, दिन रात मेहनत करता है। जब 10 करोड़ परिवारों को शौच के लिए घर से बाहर जाने की मजबूरी से मुक्ति मिलती है तो इसका मतलब होता है कि उसका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। वो पहले सोचता था कि सुखी परिवारों के घर में ही toilet होता है, शौचालय उन्‍हीं के घर में होता है। गरीब को तो बेचारे को अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है, खुले में जाना पड़ता है। लेकिन जब गरीब को शौचालय मिलता है तो वो अमीर की बराबरी में अपने आप को देखता है, एक नया विश्‍वास पैदा होता है। इसी तरह, जब देश का गरीब जन-धन खातों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ता है, मोबाइल बैंकिंग गरीब के भी हाथ में होती है तो उसे ताकत मिलती है, उसे नए अवसर मिलते हैं। हमारे यहाँ कहा जाता है-

सामर्थ्य मूलम्
सुखमेव लोके!

अर्थात्, हमारे सामर्थ्य का आधार हमारे जीवन का सुख ही होता है। जैसे हम सुख के पीछे भागकर सुख हासिल नहीं कर सकते बल्कि उसके लिए हमें निर्धारित काम करने होते हैं, कुछ हासिल करना होता है। वैसे ही सशक्तिकरण भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधा और गरिमा बढ़ने से होता है। जब करोड़ों गरीबों को आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज मिलता है, तो स्वास्थ्य से उनका सशक्तिकरण होता है। जब कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की सुविधा सुनिश्चित की जाती है तो इन वर्गों का शिक्षा से सशक्तिकरण होता है। जब सड़कें शहरों से गाँवों को भी जोड़ती हैं, जब गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलता है तो ये सुविधाएं उनका सशक्तिकरण करती हैं। जब एक व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाएं मिलती हैं तो वो अपनी उन्नति के बारे में, देश की प्रगति में सोचता है। इन सपनों को पूरा करने के लिए आज देश में मुद्रा योजना है, स्वनिधि योजना है। भारत में ऐसी अनेकों योजनाएं गरीब को सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दे रही हैं, सम्मान से सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं।

भाइयों और बहनों,

जब सामान्य मानवी के सपनों को अवसर मिलते हैं, व्यवस्थाएं जब घर तक खुद पहुँचने लगती हैं तो जीवन कैसे बदलता है, ये गुजरात बखूबी समझता है। कभी गुजरात के एक बड़े हिस्से में लोगों को, माताओं-बहनों को पानी जैसी जरूरत के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। हमारी सभी माताएं-बहनें साक्षी हैं। ये राजकोट में तो पानी के लिये ट्रेन भेजनी पड़ती थी। राजकोट में तो पानी लेना है तो घर के बाहर गड्ढा खोदकर के नीचे पाइप में से पानी एक-एक कटोरी लेकर के बाल्‍टी भरनी पड़ती थी। लेकिन आज, सरदार सरोवर बांध से, साउनी योजना से, नहरों के नेटवर्क से उस कच्छ में भी मां नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जहां कोई सोचता भी नहीं था और हमारे यहां तो कहा जाता था कि मां नर्मदा के स्‍मरण मात्र से पूण्‍य मिलता है, आज तो स्‍वयं मां नर्मदा गुजरात के गांव-गांव जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा घर-घर जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा आपके द्वार आकर के आपको आशीर्वाद देती है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज गुजरात शत-प्रतिशत नल से जल उपलब्ध कराने के लक्ष्य से अब ज्यादा दूर नहीं है। यही गति, आम जन के जीवन में यही बदलाव, अब धीरे धीरे पूरा देश महसूस कर रहा है। आज़ादी के दशकों बाद भी देश में सिर्फ 3 करोड़ ग्रामीण परिवार पानी के नल की सुविधा से जुड़े हुए थे, जिनको नल से जल मिलता था। लेकिन आज जल जीवन अभियान के तहत देशभर में सिर्फ दो साल में, दो साल के भीतर साढ़े 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पाइप के पानी से जोड़ा जा चुका है और इसलिये मेरी माताएं-बहनें मुझे भरपूर आशीर्वाद देती रहती हैं।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार के लाभ भी गुजरात लगातार देख रहा है। आज सरदार सरोवर बांध से विकास की नई धारा ही नहीं बह रही, बल्कि Statue of Unity के रूप में विश्व के सबसे बड़े आकर्षण में से एक आज गुजरात में है। कच्छ में स्थापित हो रहा Renewable Energy Park, गुजरात को पूरे विश्व के Renewable Energy Map में स्थापित करने वाला है। गुजरात में रेल और हवाई कनेक्टिविटी के आधुनिक और भव्य Infrastructure Project बन रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। Healthcare और Medical Education में भी गुजरात में प्रशंसनीय काम हो रहा है। गुजरात में तैयार हुए बेहतर Medical Infrastructure ने 100 साल की सबसे बड़ी Medical Emergency को हैंडल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

साथियों,

गुजरात सहित पूरे देश में ऐसे अनेक काम हैं, जिनके कारण आज हर देशवासी का, हर क्षेत्र का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। और ये आत्मविश्वास ही है जो हर चुनौती से पार पाने का, हर सपने को पाने का एक बहुत बड़ा सूत्र है। अभी ताज़ा उदाहरण है ओलंपिक्स में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन। इस बार ओलंपिक्स में भारत के अब तक के सबसे अधिक खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। याद रहे ये 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए हमने किया है। कई तो ऐसे खेल हैं जिनमें हमने पहली बार qualify किया है। सिर्फ qualify ही नहीं किया बल्कि कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं। हमारे खिलाड़ी हर खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस ओलिंपिक में नए भारत का बुलंद आत्मविश्वास हर game में दिख रहा है। ओलंपिक्स में उतरे हमारे खिलाड़ी, अपने से बेहतर रैंकिंग के खिलाड़ियों को, उनकी टीमों को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों का जोश, जुनून और जज़्बा आज सर्वोच्च स्तर पर है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब सही टैलेंट की पहचान होती है, उसको प्रोत्साहन मिलता है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, transparent होती हैं। ये नया आत्मविश्वास न्यू इंडिया की पहचान बन रहा है। ये आत्मविश्वास आज देश के कोने-कोने में, हर छोटे-छोटे बड़े गांव-कस्बे, गरीब, मध्यम वर्ग के युवा भारत के हर कोने में ये विश्‍वास में आ रहा है।

साथियों,

इसी आत्मविश्वास को हमें कोरोना से लड़ाई में और अपने टीकाकरण अभियान में भी जारी रखना है। वैश्विक महामारी के इस माहौल में हमें अपनी सतर्कता लगातार बनाए रखनी है। देश आज 50 करोड़ टीकाकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है तो, गुजरात भी साढ़े 3 करोड़ वैक्सीन डोसेज के पड़ाव के पास पहुंच रहा है। हमें टीका भी लगाना है, मास्क भी पहनना है और जितना संभव हो उतना भीड़ का हिस्सा बनने से बचना है। हम दुनिया में देख रहे हैं। जहां मास्क हटाए भी गए थे, वहां फिर से मास्क लगाने का आग्रह किया जाने लगा है। सावधानी और सुरक्षा के साथ हमें आगे बढ़ना है।

साथियों,

आज जब हम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्नयोजना पर इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं तो मैं एक और संकल्प देशवासियों को दिलाना चाहता हूँ। ये संकल्प है राष्ट्र निर्माण की नई प्रेरणा जगाने का। आज़ादी के 75 वर्ष पर, आजादी के अमृत महोत्सव में, हमें ये पवित्र संकल्प लेना है। इन संकल्पों में, इस अभियान में गरीब-अमीर, महिला-पुरुष, दलित-वंचित सब बराबरी के हिस्सेदार हैं। गुजरात आने वाले वर्षों में अपने सभी संकल्प सिद्ध करे, विश्व में अपनी गौरवमयी पहचान को और मजबूत करे, इसी कामना के साथ मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। एक बार फिर अन्न योजना के सभी लाभार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं !!! आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद !!!