ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀ 16 ଫେବୃଆରୀ, 2019ରେ ମହାରାଷ୍ଟ୍ରର ୟବତମାଲ ଏବଂ ଧୁଲେ ଗସ୍ତରେ ଯିବେ । ସେ ରାଜ୍ୟରେ ଅନେକ ପ୍ରକଳ୍ପର ଲୋକାର୍ପଣ କରିବେ ।

ତମାଲ

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆସନ୍ତାକାଲି ନାନ୍ଦେଡ଼ରେ ଏକଲବ୍ୟ ଆଦର୍ଶ ଆବାସିକ ବିଦ୍ୟାଳୟର ଉଦଘାଟନ କରିବେ । ଆଧୁନିକ ସୁବିଧାରେ ସମ୍ପନ୍ନ ଏହି ବିଦ୍ୟାଳୟର ମୋଟ ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀ ଧାରଣ କ୍ଷମତା 420 ରହିଛି । ଏହାଦ୍ୱାରା ଜନଜାତିର ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଶିକ୍ଷାର ସ୍ତରରେ ଉନ୍ନତି ଆସିବାରେ ସହାୟତା ମିଳିପାରିବ । ଏଥିସହିତ ଏହା ସେମାନଙ୍କ ସାମଗ୍ରୀକ ଉନ୍ନତି ଏବଂ ବ୍ୟକ୍ତିତ୍ୱ ବିକାଶର ପରିବେଶ ଯୋଗାଇବ ।

ଆସନ୍ତାକାଲି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନାରେ ଚୟନ ହୋଇଥିବା ହିତାଧିକାରୀମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଇ-ଗୃହ ପ୍ରବେଶର ଚାବି ଅର୍ପଣ କରିବେ ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଭିଡ଼ିଓ ଲିଙ୍କ ଜରିଆରେ ଅଜନୀ (ନାଗପୁର)-ପୁଣେ ଟ୍ରେନକୁ ସବୁଜ ପତାକା ଦେଖାଇ ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିବେ । ଏହି ଟ୍ରେନରେ ଥ୍ରୀ-ଟାୟାର ଶୀତତାପନିୟନ୍ତ୍ରିତ କୋଚ ରହିବ ଏବଂ ଏହା ନାଗପୁର ଏବଂ ପୁଣେ ମଧ୍ୟରେ ରାତ୍ରୀ ସେବା ଉପଲବ୍ଧ କରାଇବ । ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ବଟନ ଚିପି କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ସଡ଼କ ପାଣ୍ଠି (ସିଆରଏଫ) ଅନ୍ତର୍ଗତ ନିର୍ମିତ ହେବାକୁ ଥିବା ସଡ଼କର ଆଧାରଶିଳା ରଖିବେ ।

ମହାରାଷ୍ଟ୍ର ରାଜ୍ୟ ଗ୍ରାମୀଣ ଜୀବିକା ମିଶନ (ଏମଏସଆରଏଲଏମ) ଅନ୍ତର୍ଗତ ମହିଳା ସ୍ୱୟଂ ସହାୟିକା ଗୋଷ୍ଠୀଗୁଡ଼ିକୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ପ୍ରମାଣପତ୍ର/ଚେକ ବଂଟନ କରିବେ । ଆର୍ଥିକ ଅନ୍ତର୍ଭୂକ୍ତୀକରଣ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଏମଏସଆରଏଲଏମ ସାମାଜିକ ପରିବର୍ତ୍ତନ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଥାଏ ଯାହାଦ୍ୱାରା ଘରେ ଘରେ ଆର୍ଥିକ ସେବା ଜରିଆରେ କୃଷି ଏବଂ ଅଣକୃଷି ଜୀବିକା ସୁଯୋଗ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବାରେ ସହାୟତା ମିଳିଥାଏ ।

ଧୁଲେ

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ୟବତମାଲ ପରେ ଆସନ୍ତକାଲି ଧୁଲେଠାରେ ପହଁଚିବେ । ସେଠାରେ ସେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ କୃଷି ସିଂଚାଇ ଯୋଜନା (ପିଏମକେଏସୱାଇ) ଅନ୍ତର୍ଗତ ଲୋଅର ପଞ୍ଜାରା ମିଡ଼ିୟମ ପ୍ରକଳ୍ପର ଉଦଘାଟନ କରିବେ । ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପକୁ 2016-17ରେ ପିଏମକେଏସୱାଇରେ ସାମିଲ କରାଯାଇଥିଲା । ଏହାର ମୋଟ ଜଳ ସଂଚୟ କ୍ଷମତା 109.31 ନିୟୁତ ଘନମିଟର ରହିଛି । ଯାହାଦ୍ୱାରା ଧୁଲେ ଜିଲ୍ଲାରେ 21ଟି ଗ୍ରାମର 7,585 ହେକ୍ଟର ଚାଷଜମିକୁ ଜଳସେଚନ ସୁବିଧା ମିଳିପାରିବ ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ସୁଲୱାଡ଼େ ଜାମଫଳ କନୋଲି ଉଠା ଜଳସେଚନ ଯୋଜନାର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ । ଏହି ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ 124 ଦିନର ମୌସୁମୀ ଋତୁରେ ତାପି ନଦୀର 9.24 ଟିଏମସି ବନ୍ୟାଜଳ ଉଠାଯାଇପାରିବ । ଏହାଦ୍ୱାରା ଧୁଲେ ଜିଲ୍ଲାରେ ପାଖାପାକି 100ଟି ଗ୍ରାମର 33,367 ହେକ୍ଟର ଚାଷଜମିକୁ ଜଳସେଚନ ମିଳିବ ବୋଲି ଆଶା କରାଯାଉଛି ।

ଅମୃତ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ଧୁଲେ ସହରକୁ ଜଳଯୋଗାଣ ପାଇଁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ । ଏହାଦ୍ୱାରା ଶିଳ୍ପ ଏବଂ ବାଣିଜ୍ୟିକ ବିକାଶ ଲାଗି ଜଳ ଉପଲବ୍ଧତା ସୁନିଶ୍ଚିତ ହେବ ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମଧ୍ୟ ଧୁଲେ-ନରଦାନା ରେଳ ଲାଇନ ଏବଂ ଜଲଗାଁଓ-ମନମାଡ଼ ତୃତୀୟ ରେଳ ଲାଇନର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ । ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଭିଡ଼ିଓ ଲିଙ୍କ ଜରିଆରେ ଭୁସାବଲ-ବାନ୍ଦ୍ରା ଖନ୍ଦେଶ ଏକ୍ସପ୍ରେସ ଟ୍ରେନକୁ ସବୁଜ ପତାକା ଦେଖାଇ ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିବେ । ଏହା ରାତ୍ରି ସେବା ପ୍ରଦାନ କରୁଥିବା ଟ୍ରେନ ଯାହା ମୁମ୍ବାଇ-ଭୁସାୱଲକୁ ସିଧାସଳଖ ଯୋଡ଼ିବ । ଏହି ଟ୍ରେନ ସପ୍ତାହକୁ ତିନି ଥର ଚଳାଚଳ କରିବ ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଜଲଗାଁଓ-ଉଢ଼ାନା ଲାଇନର ଦୋହରୀକରଣ ଏବଂ ବିଦ୍ୟୁତକରଣ ରେଳ ପ୍ରକଳ୍ପର ଉଦଘାଟନ କରିବେ । ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପ ଦ୍ୱାରା ଯାତ୍ରୀ ଏବଂ ସାମଗ୍ରୀ ପରିବହନ କ୍ଷମତା ବୃଦ୍ଧି ପାଇବ । ଏହା ନନ୍ଦୁରବାର, ବ୍ୟାରା, ଧରନଗାଁଓ ଏବଂ ଏହି ଅଂଚଳର ଅନ୍ୟ ସ୍ଥାନଗୁଡ଼ିକର ବିକାଶ ପାଇଁ ମାଧ୍ୟମ ହୋଇପାରିବ ।

 

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!