୦୮ ନଭେମ୍ବର ୨୦୨୫: ପିଆଇବି ଦିଲ୍ଲୀ
ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀ ନଭେମ୍ବର ୯ ତାରିଖରେ ଉତ୍ତରାଖଣ୍ଡ ଗସ୍ତରେ ଯିବେ ଏବଂ ଉତ୍ତରାଖଣ୍ଡ ଗଠନର ରଜତ ଜୟନ୍ତୀ ଉପଲକ୍ଷେ ମଧ୍ୟାହ୍ନ ପ୍ରାୟ ସାଢ଼େ ୧୨ଟାରେ ଆୟୋଜିତ ହେବାକୁ ଥିବା କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ସାମିଲ ହେବେ । ଏହି ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଏକ ସ୍ମାରକ ଡାକଟିକଟ ଉନ୍ମୋଚନ କରିବା ସହ ଉପସ୍ଥିତ ଜନସାଧାରଣଙ୍କୁ ସମ୍ବୋଧିତ କରିବେ ।
କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ୮,୧୪୦ କୋଟି ଟଙ୍କାର ବିଭିନ୍ନ ଉନ୍ନୟନ ପ୍ରକଳ୍ପର ଲୋକାର୍ପଣ ଓ ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ । ଏହା ମଧ୍ୟରେ ସେ ୯୩୦ କୋଟି ଟଙ୍କାର ପ୍ରକଳ୍ପ ଉଦଘାଟନ କରିବେ ଏବଂ ୭,୨୧୦ କୋଟି ଟଙ୍କାର ପ୍ରକଳ୍ପର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ । ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପ ଗୁଡ଼ିକ ପାନୀୟଜଳ, ଜଳସେଚନ, ବୈଷୟିକ ଶିକ୍ଷା, ଶକ୍ତି, ସହରାଞ୍ଚଳ ବିକାଶ, କ୍ରୀଡ଼ା ଏବଂ କୌଶଳ ବିକାଶ ଆଦି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କ୍ଷେତ୍ରର ।
ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମଧ୍ୟ ପିଏମ ଫସଲବୀମା ଯୋଜନାରେ ୨୮,୦୦୦ରୁ ଅଧିକ ଚାଷୀଙ୍କ ଆକାଉଣ୍ଟକୁ ସିଧାସଳଖ ସହାୟତା ଭାବେ ୬୨ କୋଟି ଟଙ୍କା ପଠାଇବେ ।
ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଲୋକାର୍ପିତ ହେବାକୁ ଥିବା ପ୍ରକଳ୍ପ ଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ରହିଛି ଅମୃତ ଯୋଜନାରେ ଡେରାଡୁନର ୨୩ଟି ଜୋନକୁ ଜଳଯୋଗାଣ, ପିଥୋରାଗଡ଼ ଜିଲ୍ଲାରେ ବୈଦ୍ୟୁତିକ ସବଷ୍ଟେସନ,, ସରକାରୀ କୋଠାରେ ସୌରଶକ୍ତି ପ୍ଲାଣ୍ଟ, ନୈନିତାଲର ହଲଦ୍ୱାନୀ ଷ୍ଟାଡିୟମରେ ଆଷ୍ଟ୍ରୋଟର୍ଫ ହକି ଗ୍ରାଉଣ୍ଡ ଇତ୍ୟାଦି ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ।
ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଦୁଇଟି ହାଇଡ୍ରୋ-ସେକ୍ଟର ସମ୍ପର୍କିତ ଦୁଇଟି ପ୍ରକଳ୍ପର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ- ସଙ୍ଗ୍ ଡ୍ୟାମ ପାନୀୟ ଜଳ ପ୍ରକଳ୍ପ ଯାହାକି ଡେରାଡୁନକୁ ଦୈନିକ ୧୫୦ ଏମଏଲଡି (ଦୈନିକ ମିଲିଅନ ଲିଟର) ଯୋଗାଣ କରିବ ଏବଂ ନୈନିତାଲର ଜମାରାଣୀ ଡ୍ୟାମ ବହୁମୁଖୀ ପ୍ରକଳ୍ପ, ଯାହାକି ପାନୀୟ ଜଳଯୋଗାଣ, ଜଳସେଚନ ଓ ବୈଦ୍ୟୁତିକ ଶକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି କରିବ । ଶିଳାନ୍ୟାସ ହେବାକୁ ଥିବା ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ପ୍ରକଳ୍ପ ଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ଅଛି ବୈଦ୍ୟୁତିକ ସବଷ୍ଟେସନ, ଚମ୍ପାୱତରେ ମହିଳା କ୍ରୀଡ଼ା କଲେଜ ପ୍ରତିଷ୍ଠା, ନୈନିତାଲରେ ସ୍ୱଦେଶୀ ପ୍ରଯୁକ୍ତିରେ ହେବାକୁ ଥିବା ଡାଏରୀ ପ୍ଲାଣ୍ଟ ।
पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!
आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।
साथियों,
आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,
BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।
साथियों,
बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।
साथियों,
दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,
इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।
साथियों,
स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!
बहुत-बहुत धन्यवाद!
मर्सी बोकू!
जय स्वामीनारायण!


