ଚଳିତମାସ ପାଞ୍ଚ ତାରିଖରେ ଲକ୍ଷ୍ନୌରେ “ଆଜାଦି @୭୫ -ନ୍ୟୁ ଅର୍ବାନ ଇଣ୍ଡିଆ : ଟ୍ରାନ୍ସଫର୍ମିଂ ଅର୍ବାନ ଲ୍ୟାଣ୍ଡ ସ୍କେପ ଉପରେ ଏକ ସମ୍ମିଳନୀ ଆୟୋଜିତ ହେଉଛି । ଏଥିସହିତ ଏକ ପ୍ରଦର୍ଶନୀର ଆୟୋଜନ ମଧ୍ୟ କରାଯାଇଛି । ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀ ଏହାକୁ ଉଦ୍‌ଘାଟନ କରିବେ । ଏହି ସମ୍ମିଳନୀରେ ସ୍ୱାଧୀନତାର  ୭୫ବର୍ଷ ପାଳନ ଅବସରରେ ନୂଆ ଭାରତରେ ସହରାଂଚଳରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ସମ୍ପର୍କରେ ଆଲୋଚନା ହେବ । ଲକ୍ଷ୍ନୌର ଇନ୍ଦିରା ଗାନ୍ଧୀ ପ୍ରତିଷ୍ଠାନରେ ଆୟୋଜିତ ହେଉଥିବା ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମକୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଅକ୍ଟୋବର ୫ତାରିଖ ପୂର୍ବାହ୍ନ ସାଢେ ୧୦ଟା ସମୟରେ ଉଦ୍‌ଘାଟନ କରିବାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ରହିଛି ।

 ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଡିଜିଟାଲ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ସହରାଞ୍ଚଳ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନାରେ ନିର୍ମିତ ଘରର ଚାବି ହିତାଧିକାରୀମାନଙ୍କୁ ହସ୍ତାନ୍ତର କରିବେ  । ଉତ୍ତରପ୍ରଦେଶର ୭୫ଜିଲ୍ଲାରେଏହି ଯୋଜନାରେ ନିର୍ମିତ ୭୫ହଜାର ଘରକୁ ହିତାଧିକାରୀମାନଙ୍କୁ ଆନୁଷ୍ଠାନିକ ଭାବେ ପ୍ରଦାନ କରିବେ । ସେ ମଧ୍ୟ୍ ଆଭାସୀ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ହିତାଧିକାରୀମାନଙ୍କ ସହ କଥାବାର୍ତ୍ତା କରିବାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଚୂଡାନ୍ତ ହୋଇଛି । ଏହା ଛଡା ସ୍ମାର୍ଟ ସିଟି ମିଶନ ଓ ଅମୃତ ଯୋଜନାରେ ସେ ମଧ୍ୟ ୭୫ଟି ଯୋଜନାର ଶୁଭାରମ୍ଭ  ଅଥବା ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିବେ । ‘ଫେମ’ ଯୋଜନାରେ ରାଜ୍ୟରେ ସାତଟି ସହର -ଲକ୍ଷ୍ନୌ, କାନପୁର, ବାରାଣସୀ, ପ୍ରୟାଗରାଜ, ଗୋରଖପୁର, ଝାନ୍ସି ଓ ଗାଜିଆବାଦରେ ୭୫ଟି ବସ୍ ଚଳାଚଳର ଶୁଭାରମ୍ଭ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଦ୍ୱାରା କରାଯିବ । ଏହି ଅବସରରେ ସହରଞ୍ଚଳ ବିକାଶ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ପକ୍ଷରୁ ବିଭିନ୍ନ ଧ୍ୱଜାଧାରୀ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର କାର୍ଯ୍ୟ କରିତା ଉପରେ ପ୍ରସ୍ତୁତ ଏକ କଫି ଟେବୁଲ ବୁକକୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଉନ୍ମୋଚନ କରିବେ । ଏହି ଅବସରରେ ଆୟୋଜିତ ତିନିଟି ପ୍ରଦର୍ଶନୀକୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆଭାସି ବ୍ୟବସ୍ଥ।।ରେ ଦେଖିବେ । ସେ ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷ୍ନୌର ବାବା ସାହେବ ଭୀମରାଓ ଆମ୍ବେଦକର ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟରେ ଅଟଳବିହାରୀ ବାଜପେୟୀ ଚେୟାରର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଘୋଷଣା କରିବେ ।

 ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ କେନ୍ଦ୍ର ପ୍ରତିରକ୍ଷାମନ୍ତ୍ରୀ, ସହରାଞ୍ଚଳ ବିକାଶ  ଓ ଆବାସ ବ୍ୟାପାର ମନ୍ତ୍ରୀ, ଉତ୍ତରପ୍ରଦେଶର ରାଜ୍ୟପାଳ ଓ  ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ  ପ୍ରମୁଖ ଯୋଗଦେବେ ।

ଯେଉଁ ସମ୍ମିଳନୀ ଓ ପ୍ରଦର୍ଶନୀ ସହରାଞ୍ଚଳ ବିକାଶ ଓ ଆବାସ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ପକ୍ଷରୁ ଆୟୋଜିତ ହୋଇଛି ତାହା ଅକ୍ଟୋବର ପାଂଚରୁ ସାତ ତାରିଖ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାଲିବ । ଆଜାଦି କା ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ ଅବସରରେ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆୟୋଜିତ ହୋଇଛି । ଉତ୍ତରପ୍ରଦେଶର ସହରାଞ୍ଚଳର ରୂପରେଖ ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିବା ସମ୍ପର୍କରେ ଏଥିରେ ମୁଖ୍ୟତଃ ଆଲୋଚନା ହେବ । ସବୁ ରାଜ୍ୟ ଓ କେନ୍ଦ୍ରଶାସିତ ଅଞ୍ଚଳକୁ ଏହି ସମ୍ମିଳନୀକୁ ନିମନ୍ତ୍ରଣ କରାଯାଇଛି । ସେମାନେ ଏଥିରେ ଅନୁଭୂତି ଲାଭ କରିବାର ସୁଯୋଗ ପାଇବେ ।

ଏହି ଅବସରରେ ସହରାଞ୍ଚଳ ଭାରତ, ନିର୍ମାଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଇନୋଭେଟିଭ ଟେକ୍‌ନୋଲୋଜିର ପ୍ରୟୋଗ ଏବଂ ୨୦୧୭ ପରେ ଉତ୍ତର ପ୍ରଦେଶରେ ସହରାଞ୍ଚଳ ବିକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ଯୋଜନାର ସଫଳତା ଉପରେ ତିନିଟି ପ୍ରଦର୍ଶନୀ ଆୟୋଜିତ ହୋଇଛି । ଏଥିରେ ଇଣ୍ଡିଆନ ହାଉସିଂ ଟେକ୍‌ନୋଲୋଜି  ମେଳା ଓ ଗ୍ଲୋବାଲ ହାଉସିଂ ଟେକ୍‌ନୋଲୋଜି ଚାଲେଞ୍ଜ-ଇଣ୍ଡିଆ ନାମରେ ଦୁଇଟି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ମଧ୍ୟ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ । ସର୍ବସାଧାରଣଙ୍କ ନିମନ୍ତେ ଏହି ପ୍ରଦର୍ଶନୀ ଅକ୍ଟୋବର ୬ ଓ ୭ତାରିଖ ଦୁଇଦିନ ଖୋଲା ରହିବ ।

 

 

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!