PM Modi inaugurates Dr Ambedkar National Memorial in Delhi, travels by Metro to the ceremony
Many Govts came to power after independence but what should have been done much before has happened now: PM Modi
Dr Ambedkar National Memorial will bring Baba Saheb closer to younger generation, says PM Modi
It is a matter of fortune for the Govt that we have got an opportunity to develop five places associated with Baba Saheb: PM Modi
Dr Ambedkar National Memorial is a symbol of an ordinary person's extraordinary life, says the PM
Last Govt closed files related to Ambedkar memorial, we reopened file to this project in 2014: PM
In 2015, we strengthened the law against atrocities on Dalits, we won’t allow dilution of SC/ST act: PM Modi at inauguration of Dr Ambedkar National Memorial in Delhi
I challenge the Congress to tell about a single work done by them for Baba Saheb, any single work done by them as a mark of respect to him: PM Modi

मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी, 

श्री थावरचंद गहलोत जी,

श्री राम विलास पासवान जी,

डॉक्टर हर्षवर्धन जी,

श्री रामदास आठवले जी,

श्री कृष्ण पाल जी,

श्री विजय सांपला जी,

 

यहां उपस्थित अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों, सबसे पहले मैं देश के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि आज उन्हें डॉक्टर आंबेडकर नेशनल मेमोरियल के तौर पर एक अनमोल उपहार मिला है। 

आज बाबा साहेब की स्मृति में बने इस नेशनल मेमोरियल को राष्ट्र को समर्पित करते हुए, मैं खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं। देश में बैसाखी भी मनाई जा रही है। ये हमारे अन्नदाता- हमारे किसान के परिश्रम को पूजने का दिन है। मैं देश को बैसाखी की भी बधाई देता हूं। 

आज ही जलियांवाला बाग़ नरसंहार की बरसी भी है। 99 वर्ष पूर्व आजादी के दीवानों पर जिस तरह अंग्रेजी हुकूमत का कहर बरपा था, वो मानव इतिहास की सबसे हृदय विदारक घटनाओं में से एक है।

जलियांवाला बाग़ गोलीकांड में शहीद हर सेनानी को मैं नमन करता हूं।

 

साथियों, 

स्वतंत्रता के बाद से इतनी सरकारें आईं, इतना वक्त गुजर गया, लेकिन जो कार्य बहुत पहले हो जाना चाहिए था वो अब हो रहा है। इसलिए, मेरे लिए इस जगह पर आना, इस कार्यक्रम में शामिल होना, उस जमीन पर खड़े होना, जहां बाबा साहेब ने आखिरी समय गुजारा था, बहुत ही भावुक है। बाबा साहेब के नाम पर, उनकी याद में निर्मित ये राष्ट्रीय स्मारक, देश की तरफ से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि है।

कल उनकी जन्म जयंती है और उससे एक दिन पहले यहां इस समारोह का आयोजन बाबा साहेब के प्रति हमारी सरकार की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

इस पवित्र कार्य को पूरा करने के लिए, मैं सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और भारत सरकार के अन्य संबंधित विभागों की हृदय से प्रशंसा करता हूं। मेमोरियल के निर्माण में अपना पसीना बहाने वाले एक - एक श्रमिक को मेरा नमन है। उनमें से अधिकांश आज यहां नहीं होंगे, इस कार्यक्रम से दूर होंगे, लेकिन उन्हें मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।

भाइयों और बहनों, अब आज से 26 अलीपुर रोड पर बनी ये स्मारक, दिल्ली ही नहीं, देश के मानचित्र पर हमेशा-हमेशा के लिए अंकित हो गई है। 

यहां आकर लोग बाबा साहेब के जीवन से जुड़ी बातों को, उनकी दृष्टि को, और बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। 

  • ये स्मारकएक असाधारण व्यक्ति के असाधारण जीवन का प्रतीक है। 
  • ये स्मारकमां भारती के होनहार सपूत के आखिरी दिनों की यादगार है।

 

भाइयों और बहनों,

इस स्मारक को एक किताब की शक्ल में तैयार किया गया है। वो किताब, हमारे देश का वो संविधान, जिसके शिल्पकार डॉक्टर आंबेडकर थे। 

जिस संविधान को रचकर,

बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को, लोकतांत्रिक बने रहने का रास्ता दिखाया था। 

आज की नई पीढ़ी, जब इस मेमोरियल में आएगी, तो यहां लगी प्रदर्शनी देखकर, यहां म्यूजियम में आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके जीवन के अहम पड़ावों को देखकर,

बाबा साहेब के जीवन के अथाह विस्तार को समझ पाएगी।

 

साथियों,

ये हमारी सरकार के लिए सौभाग्य की बात है कि उसे बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पांच स्थानों को पंच तीर्थ के तौर पर विकसित करने का अवसर मिला है। 

मध्य प्रदेश के महू में बाबा साहेब की जन्मभूमि, 

लंदन में डॉक्टर अंबेडकर मेमोरियलउनकी शिक्षाभूमि, 

नागपुर में दीक्षाभूमि, 

मुंबई में चैत्य भूमि और 

यहां दिल्ली में इस नेशनल मेमोरियल के तौर पर उनकी महापरिनिर्वाण भूमि। 

ये स्थान, ये तीर्थ, सिर्फ ईंट-गारे की इमारत भर नहीं हैं, बल्कि ये जीवंत संस्थाएं हैं, आचार-विचार के सबसे बड़े संस्थान हैं। 

साथियों,

ये दिव्य - भव्य इमारत इस सरकार के कार्य करने की संस्कृति का भी प्रतीक है। जब अटल जी की सरकार थी, तब यहां इस जमीन पर नेशनल मेमोरियल की बात आगे बढ़ी थी। 

लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद कांग्रेस सरकार के समय इस प्रोजेक्ट पर काम रुक गया।

2014 में हमारी सरकार बनने के बाद एक बार फिर 26 अलीपुर रोड की फाइल को खोजकर निकाला गया। फाइल मिलने के बाद फिर तेजी से काम शुरू हुआ। 

21 मार्च, 2016 को मेमोरियल का शिलान्यास करते हुए ही मैंने कह दिया था कि 2018 में, बाबा साहेब की जयंती पर इसका लोकार्पण करने आऊंगा। समय की पाबंदी, संसाधनों पर विश्वास और सरकार की इच्छाशक्ति, किस तरह परिवर्तन लाती है, ये आज हम फिर देख रहे हैं।

 

साथियों,

लोकतंत्र में जब जनता जवाब मांगे, उससे पहले आपको स्वयं से अपनी जवाबदेही तय करनी होती है। आपको खुद को जवाब देना होता है।

लेकिन हमारे यहां पहले की सरकारों में इस तरह की जवाबदेही, कम ही देखी गई। इस व्यवस्था को इस सरकार में बदल दिया गया है। संभवत: आप में से कुछ लोग दिल्ली के 15 जनपथ पर बने आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर गए होंगे। 1992 में इस सेंटर का विचार सामने आया था। लेकिन 22 साल तक इसकी भी फाइल कहीं दबी रह गई। 

दिल्ली में कार्यभार संभालने के सालभर के भीतर ही अप्रैल 2015 में मैंने इस सेंटर का शिलान्यास किया और कुछ महीने पहले ही दिसंबर में इसका लोकार्पण भी किया। अब डॉक्टर आंबेडकर के विचारों का प्रतीक ये स्टेट ऑफ द आर्ट इंटरनेश्नल सेंटर दिल्ली की शान बना हुआ है।

 

भाइयों और बहनों,

व्यवस्था का ऐसा कायाकल्प तब होता है, जब बिल्कुल ग्राउंड लेवल पर जाकर कमियों को समझा जाए, उन्हें दूर किया जाए। 

अभी तीन दिन पहले मैं चंपारण में था। वहां से मैंने मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री के फेज वन का भी लोकार्पण किया। इस प्रोजेक्ट की भी वही कहानी है। 

स्वीकृत हुआ साल 2007 में, लेकिन काम शुरू हुआ 2015 में। पहले की सरकार ने सात साल ऐसे ही गुजार दिए। हमारी सरकार के सिर्फ दो-ढाई साल के प्रयास से, अब इस फैक्ट्री में दुनिया के सबसे शक्तिशाली रेल इंजनों में से एक, मैन्यूफैक्चर भी होने लगा है। मैं आपको इस तरह के प्रोजेक्ट की लिस्ट गिनाने लग जाऊं तो सुबह हो जाएगी। देश को स्वतंत्रता के बाद अटकाने-भटकाने-लटकाने की कार्यसंस्कृति मिलेगी, ये तो बाबा साहेब ने कभी नहीं सोचा था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि आने वाली सरकारों में परियोजनाएं तीस-तीस-चालीस-चालीस साल तक पूरी नहीं होंगी। योजनाओं का इस तरह अधूरा रहना, देश के प्रति बहुत बड़ा अपराध है। 

साथियों,

पिछले चार साल से हमारी सरकार खोज-खोज कर बरसों से अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने का काम कर रही है।

सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में होने वाली प्रगति की बैठकों के माध्यम से साढ़े 9 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अधूरी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने का काम किया गया है। पिछले चार साल में प्रगति की बैठकों से, देश के विकास में गति आई है।

 

साथियों,

अभाव का रोना नहीं और प्रभाव से विचलित नहीं होना, ये मंत्र हर किसी के लिए एक ताकत बन जाता है। ये ताकत देने का काम बाबा साहेब आंबेडकर ने हमें  अपने जीवन से दिया है। इसलिए इस सरकार में भी आपको अभाव का रोना नहीं दिखेगा। हम तो अपने संसाधनों पर, अपने सामर्थ्य पर भरोसा करके आगे बढ़ रहे हैं। इसी सोच ने हमें लक्ष्य तय करना और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देना सिखाया है।

 

भाइयों और बहनों,

आज से ठीक एक महीना पहले, यहीं दिल्ली में एक कार्यक्रम हुआ था। पूरी दुनिया के लोग जुटे थे। उस कार्यक्रम में दुनिया के बाकी देशों ने बात रखी कि कैसे TB को 2030 तक खत्म किया जाए। उसी बैठक में भारत ने ऐलान किया कि वो साल 2025 तक TB को पूरी तरह खत्म करने के लिए काम करेगा।

यानि हमने अपने लिए लक्ष्य प्राप्त करने की समय सीमा को, बाकी देशों के मुकाबले 5 साल और कम कर लिया है। 

अब आप सोचिए। पहले की सरकारें, काम पूरा होने की तारीख आगे बढ़ाने में दिमाग खपाती थीं, ये सरकार काम पूरा करने की तारीख को और पहले करने में विश्वास रखती है। चाहे देश के दूर - दराज वाले इलाकों में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण का कार्यक्रम हो या ग्रामीण सड़कों को जोड़ने की योजना, इस सरकार में लक्ष्य पूरा होने की आखिरी तारीख को दो-दो, तीन-तीन साल कम कर दिया है। 

साथियों,

बाबा साहब की विचारधारा के मूल में समानता अनेक रूपों में निहित रही है।

सम्मान की समानता, 

कानून की समानता,

अधिकार की समानता,

मानवीय गरिमा की समानता,

अवसर की समानता। 

ऐसे कितने ही विषयों को बाबा साहेब ने अपने जीवन में लगातार उठाया। उन्होंने हमेशा उम्मीद जताई थी कि भारत में सरकारें संविधान का पालन करते हुए बिना पंथ का भेद किए हुए, बिना जाति का भेद किए हुए चलेंगी। आज इस सरकार की हर योजना में आपको सामाजिक न्याय और बिना किसी भेदभाव, सभी को समानता का अधिकार देने का प्रयास दिखेगा। दशकों से हमारे देश में जो असंतुलन बना हुआ था, उसे इस सरकार की योजनाएं समाप्त करने का काम कर रही हैं। 

जैसे जनधन योजना। स्वतंत्रता के इतने वर्षों के बाद भी करोड़ों लोगों के पास बैंक अकाउंट न होना, बहुत बड़ा सामाजिक अन्याय था। इसे खत्म करने का काम हमने किया। जनधन योजना के तहत अब तक देश में 31 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खुलवाए जा चुके हैं। इसी तरह देश के करोड़ों घरों में शौचालय न होना भी सामाजिक अन्याय का ही एक पहलू था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश में इस सरकार ने

7 करोड़ शौचालय बनवाए हैं। इनमें से लगभग सवा 2 करोड़ शौचालय ग्रामीण इलाकों में रहने वाले दलित और आदिवासियों के घरों में बने हैं। पिछले चार वर्षों में देश ने देखा है कि किस तरह शौचालयों से इज्जत भी आती है, समानता भी आती है। 

भाइयों और बहनों।

आज के इस आधुनिक दौर में किसी के घर में बिजली न हो, ये भी बहुत बड़ा सामाजिक अन्याय है। हमारे यहां तो 2014 में 18 हजार से ज्यादा गांव ऐसे थे, जहां तक बिजली पहुंची ही नहीं थी। वो 18वीं सदी में ही जी रहे थे। डंके की चोट पर लाल किले से ऐलान करके हमारी सरकार इन गावों तक बिजली पहुंचा रही है। अब तक 16 हजार से ज्यादा गांवों में बिजली पहुंचाई भी जा चुकी है। 

अब तो हमने हर घर को बिजली कनेक्शन से जोड़ने का भगीरथ काम भी शुरू कर दिया है।

प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत देश के 4 करोड़ घरों में बिजली कनेक्शन मुफ्त दिया जा रहा है। जब घर में रोशनी होगी, तो पूरे समाज में भी प्रकाश फैलेगा। स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली मुद्रा योजना भी दशकों से हो रहे अन्याय को खत्म करने का काम कर रही है। 

बैंक से कर्ज, सिर्फ बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने वाले लोगों को ही मिले, अपने दम पर कुछ करने का सपना देख रहा नौजवान, बैंक गारंटी के नाम पर भटकता रहे, ये स्थिति ठीक नहीं। इसलिए हमारी सरकार ने बिना बैंक गारंटी लोन लेने का विकल्प दिया।  मुद्रा योजना के तहत अब तक 12 करोड़ से ज्यादा Loan स्वीकृत किए गए हैं। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार के असीमित द्वार खुलना संभव हुआ है।  मुद्रा योजना के तहत 2 करोड़ 16 लाख से ज्यादा दलित लाभार्थियों का फायदा भी हुआ है। 

साथियों,

इस बजट में सरकार ने एक और बड़ी योजना का ऐलान किया है। पूरी दुनिया में इस योजना की चर्चा हो रही है। ये योजना, सामाजिक असंतुलन दूर करने की दिशा में हमारा बहुत बड़ा प्रयास है। इस योजना का नाम है- आयुष्मान भारत। इस योजना के तहत सरकार, देश के लगभग 11 करोड़ गरीब परिवारों यानि करीब-करीब 45 से 50 करोड़ लोगों को हेल्थ एश्योरेंस देने जा रही है। गरीब परिवार में अगर कोई बीमार पड़ता है, तो उसे 5 लाख रुपए तक का इलाज सुनिश्चित किया जाएगा।

 

साथियों,

आज देश के किसी भी कोने में आप चले जाइए, तो वहां पर ग्रामीण महिलाओं में जिस योजना की सबसे ज्यादा चर्चा है, वो है उज्जवला।  दशकों तक देश में ऐसी स्थिति रही कि गांव के कुछ घरों में ही गैस कनेक्शन था। गैस कनेक्शन होने की वजह से उन घरों की अपनी पहचान थी। जिन घरों में गैस नहीं थी, वो सामाजिक अन्याय का ही एक उदाहरण थे। उज्जवला योजना के तहत सरकार ने देश में साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा गैस कनेक्शन मुफ्त दिए हैं। अब इसका लक्ष्य बढ़ाकर 8 करोड़ कनेक्शन कर दिया गया है। मैं समझता हूं कि बीते कई दशकों की योजनाओं की तुलना कर लें, तो भी सामाजिक न्याय स्थापित करने वाली ये सबसे लोकप्रिय योजना है।

 

साथियों,

इस सरकार में कानून के माध्यम से सामाजिक संतुलन को स्थापित करने का भी निरंतर प्रयास किया गया है।ये हमारी ही सरकार है जिसने साल 2015 में दलितों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए कानून को और सख्त किया था।

 

दलितों पर होने वाले अत्याचारों की लिस्ट को 22 अलग-अलग अपराधों से बढ़ाकर 47 कर दिया था। यानि अब दलितों के खिलाफ 47 अलग-अलग अपराधों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।   साथियों, जब हमारी सरकार ने इस कानून को संशोधित किया था, तब आरोपियों को अग्रिम जमानत न देने का जो प्रावधान था, उसे यथावत रखा गया था।  पीड़ितों को मिलने वाली राशि भी इसी सरकार ने बढ़ाई। इस कानून का कड़ाई से पालन हो, इसके लिए, हमारी सरकार ने पहले की सरकार के मुकाबले दोगुने से ज्यादा राशि खर्च की।  जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को इस अधिनियम से जुड़ा फैसला दिया, तो सिर्फ 12 दिन में पुनर्विचार याचिका भी

दाखिल की गई।

  • मैं आज इस अवसर पर देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जिस कानून को हमारी सरकार ने ही सख्त किया है, उस पर प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा। मेरा आग्रह है लोगों से, कांग्रेस और कांग्रेस कल्चर के सामने आत्मसमर्पण करने वाले दलों के जाल में न फंसे।

 

साथियों,

अपने दलित भाई-बहनों, पिछड़ों-आदिवासियों के सम्मान के लिए, उनके अधिकार के लिए हमारी  सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

 SC/ST पर अत्याचार से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए special courts का गठन किया जा रहा है।  सरकार ने पिछड़ी जातियों के सब-कैटेगरी के लिए कमीशन के गठन का निर्णय भी किया है। सरकार चाहती है कि OBC समुदाय में जो अति पिछड़े हैं, उन्हें सरकार और शिक्षण संस्थाओं में तय सीमा में रहते हुए आरक्षण का और ज्यादा फायदा मिले। इसलिए OBC समुदाय में सब-कैटेगरी बनाने के लिए कमीशन बनाया गया है।

 

साथियों,

पहले 6 लाख रुपए सालाना की आय वाले कर्मचारी क्रीमी लेयर के दायरे में आ जाते थे। सरकार ने इसे बढ़ाकर 8 लाख रुपए प्रतिवर्ष कर दिया है। यानि अब पिछड़े वर्ग के और ज्यादा लोगों को OBC आरक्षण का फायदा मिल रहा है।  पहले सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों में क्रीमी लेयर की समानता नहीं थी। इस असंतुलन को खत्म करने की मांग पिछले 24 साल से की जा रही थी। इस सरकार ने कुछ महीना पहले ये असंतुलन खत्म कर दिया है। केंद्र में आने के बाद सरकार ने ऐसे पदों को भरने में भी तेजी दिखाई है जो  दलितों-पिछड़ों के लिए आरक्षित हैं। 

साथियों,

सामाजिक अधिकार इस सरकार के लिए सिर्फ कहने-सुनने की बात नहीं, बल्कि एक कमिटमेंट है। 

जिस ‘न्यू इंडिया’ की बात मैं करता हूं वो बाबा साहेब के भी सपनों का भी भारत है।  डॉक्टर आंबेडकर की 125वीं जन्म जयंती को देश-विदेश में बहुत ही भव्य तरीके से मनाया गया। इस दौरान विशेष डाक टिकट, सिक्के जारी किए गए। 

गणतंत्र दिवस पर बाबा साहेब से संबंधित झांकी निकाली गई। अमेरिका और ब्रिटेन में जहां बाबा साहेब ने पढ़ाई की थी, वहां पर अनेक विद्यार्थियों को भेजा गया। 

सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 26 नवंबर को जिस दिन, संविधान को स्वीकार किया गया था, उसे संविधान दिवस घोषित किया और पहली बार संविधान पर संसद में दो दिन तक चर्चा भी की गई।

 

भाइयों और बहनों,

मैं आज देश के लोगों को स्पष्ट कहना चाहता हूं कि ये बाबा साहेब की सत्यनिष्ठा, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के पवित्र यज्ञ में उनका योगदान ही है जिसकी वजह से वो भारतीयों के हृदय में निवास करते हैं। 

वरना कांग्रेस ने पूरी शक्ति लगा दी थी देश के इतिहास से उनका नामो-निशान मिट जाए।  ये इतिहास की बहुत कड़वी सच्चाई है कि जब बाबा साहेब जीवित थे, तब भी कांग्रेस ने उनके अपमान में कोई

कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।

इसलिए भाइयों और बहनों, 

  • आज की पीढ़ी के लिए जानना आवश्यक है कि कैसे कांग्रेस ने बाबा साहेब को जीवित रहते और उनके निधन के बाद भी अपमानित किया।

 

  • आज की पीढ़ी के लिए ये जानना भी आवश्यक है कि कैसे बाबा साहेब ने कांग्रेस का असली चरित्र देश के सामने रखा था।

 

  • आज की पीढ़ी के लिएये जानना भी जरूरी है कि जब कांग्रेस आरोपों से घिरती हैतो कैसे सामने वाले व्यक्ति को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए

साम-दाम-दंड-भेदहर तरह से साजिश रचने लगी है।

 

कांग्रेस और बाबा साहेब के बीच जब संबंध टूटने का आखिर दौर था, उस समय के बारे में आपसे विस्तार से बात करना चाहता हूं। ये बातें याद करनी इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि ये कांग्रेस का असली चेहरा सामने लाती हैं।

 

साथियों,

तमाम विवादों की वजह से बाबा साहेब ने नेहरू जी के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। अपने बयान में बाबा साहेब ने एक - एक करके अपनी तकलीफों का जिक्र किया था। 

वो वजहें भी विस्तार से बताईं थीं, जिनकी वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया। मैं उस बयान की कुछ पंक्तियों के बारे में आपको बताना चाहता हूं। 

ये बताना इसलिए बहुत महत्वपूर्ण हैताकि देशभर का दलित समाज,

देश भर का आदिवासीपिछड़ा समाजप्रत्येक भारतवासी ये जाने किदेश में इमरजेंसी लगाने वाली कांग्रेस ने संविधान के रचयिता के साथ कैसा सलूक किया था।

 

साथियों, बाबा साहेब ने लिखा था-

मुझे कैबिनेट की किसी कमेटी में नहीं लिया गया। 

 ही विदेश मामलों की कमेटी में, 

 ही रक्षा कमेटी में। 

जब आर्थिक मामलों की कमेटी बन रही थीतो मुझे लगा कि उसमें मुझे जरूर शामिल किया जाएगाक्योंकि मैं अर्थशास्त्र और वित्तीय मामलों का छात्र रहा हूं। लेकिन मुझे उसमें भी छोड़ दिया गया।

 

बाबा साहेब को लेकर कांग्रेस की क्या सोच थी, उसकी ये सच्चाई 70 साल पहले की है। 

जिस व्यक्ति ने दुनिया के एक से बढ़कर एक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की हो, उस व्यक्ति का कांग्रेस में पल-पल अपमान किया गया। 

खुद बाबा साहेब ने कहा है कि उन्हें सिर्फ एक मंत्रालय दिया गया जिसमें बहुत काम नहीं था। वो सोचते थे योजनाएं बनाने के काम से जुड़ेंगे, जिन विषयों के वो सिद्धस्त हैं, उनमें अपने अनुभव का फायदा देश को देंगे, लेकिन उन्हें इन सबसे दूर रखा गया।  यहां तक की मंत्रिमंडल विस्तार के समय, किसी मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी तक बाबा साहेब को नहीं दी गई। 

साथियों,

एक और बड़ी वजह थी जिसकी वजह से बाबा साहेब ने इस्तीफा दिया। ये वजह भी बताती है कि कांग्रेस का देश के दलितों, देश के पिछड़ों के साथ क्या व्यवहार रहा है।

अपने बयान में बाबा साहेब ने लिखा था- 

अब मैं आपको वजह बताना चाहता हूं जिसने सरकार से मेरा मोहभंग कर दिया। ये पिछड़ों और दलितों के साथ किए जा रहे बर्ताव से जुड़ा है। 

मुझे इसका अफसोस है कि संविधान में पिछड़ी जातियों के हितों के संरक्षण के लिए उचित प्रावधान नहीं हैं। ये कार्य एक आयोग की सिफारिशों के आधार पर होना था। 

संविधान को लागू हुए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका है लेकिन सरकार ने अब तक आयोग नियुक्त करने के बारे में सोचा तक नहीं है

 

साथियों,

तब से लेकर आज तक, कांग्रेस की सोच नहीं बदली है। 70 साल पहले पिछड़ी जातियों के खिलाफ आयोग को लेकर कांग्रेस ने बात आगे नहीं बढ़ने दी। यहां तक की डॉक्टर आंबेडकर को इस्तीफा तक देना पड़ा।

आज 70 साल भी कांग्रेस संसद में OBC कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने के काम को रोकने का काम कर रही है।  OBC कमीशन को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद इस आयोग को भी ST/SC आयोग की तरह शक्तियां हासिल हो जाएंगी। लेकिन कांग्रेस इसमें भी अड़ंगा लगा रही है।

 

साथियों,

आप सभी से मैंने बाबा साहेब के इस्तीफे के प्रकरण पर इतना विस्तार से इसलिए बात की, क्योंकि कांग्रेस द्वारा ये भ्रम फैलाया जाता है कि उसने तो बाबा साहेब को देश का कानून मंत्री बनाया था।

कानून मंत्री बनाने के बाद बाबा साहेब के साथ जो बर्ताव कांग्रेस ने किया, वो हर भारतीय को जानना चाहिए।  क्योंकि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस ने इकोसिस्टम ऐसा बनाया कि देश का इतिहास सिर्फ एक परिवार के इर्द-गिर्द सिमटकर रह गया। 

जिसने कांग्रेस के इकोसिस्टम के आगे घुटने नहीं टेकेउसे किताबों तक में जगह नहीं मिली।

 

साथियों,

1951 में कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद बाबा साहेब ने 1952 में लोकसभा का आम चुनाव लड़ा था। 

कांग्रेस ने उस समय न सिर्फ उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारा बल्कि खुद नेहरू जी, बाबा साहेब के खिलाफ प्रचार करने भी गए। कांग्रेस द्वारा पूरी शक्ति लगाने की वजह से बाबा साहेब को हार का अपमान सहना पड़ा। 

इसके बाद उन्होंने 1953 में भंडारा सीट से लोकसभा का उपचुनाव लड़ा। कांग्रेस ने फिर उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा और फिर बाबा साहेब को लोकसभा में पहुंचने से रोक दिया। इस लगातार अपमान के समय उनका साथ दिया था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने। उन्हीं के प्रयासों से बाबा साहेब राज्यसभा में पहुंचे। 

साथियों,

 मैं चुनौती देता हूं कांग्रेस को।

वो एक काम बता दें जो उसने बाबा साहेब के लिए किया है। 

वो एक काम बता दें जो उसने बाबा साहेब के सम्मान के लिए किया है।

 

भाइयों और बहनों,

हमें, आपको, पता है कि कांग्रेस के पास इसका कोई जवाब नहीं है। जवाब के नाम पर वो सिर्फ झूठ बोल सकती है। सच्चाई ये है कि बाबा साहेब के निधन के बाद कांग्रेस ने राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को भी मिटाने की कोशिश की। नेहरू जी से लेकर राजीव गांधी तक, कांग्रेस ने तमाम लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया, लेकिन उसे कभी बाबा साहेब ‘भारत के रत्न’ नहीं लगे।

बाबा साहेब को भारत रत्न तब मिला, जब वी.पी.सिंह जी की सरकार बनी, जब अटलजी, आडवाणी जी ने उनसे बाबा साहेब को भारत रत्न देने का आग्रह किया।

ये बीजेपी की ही कोशिश थी, कि संसद के सेंट्रल हॉल में बाबा साहेब का चित्र लगाया गया।

वरना बाबा साहेब का चित्र लगाने के खिलाफ ये तर्क दिया जाता था कि सेंट्रल हॉल में जगह नहीं है।

सोचिए, जिस व्यक्ति ने सेंट्रल हॉल में बैठेकर संविधान को रचा हो, उसकी बारीकी पर घंटों चर्चा की हो, कांग्रेस शासन के दौरान उसी के लिए सेंट्रल हॉल में कोई जगह नहीं थी।

 

भाइयों और बहनों,

मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर 90 के दशक में देश में पिछड़ों और दलितों के अधिकारों पर राष्ट्रव्यापी चर्चा नहीं शुरू हुई होतीतो कांग्रेस आज भी बाबा साहेब से अपनी नफरत सार्वजनिक तौर पर वैसे ही दिखातीजैसे पहले दिखाती थी।

कांग्रेस को बाबा साहेब के नाम में वोटबैंक नजर आता हैसत्ता नजर आती हैइसलिए वो अब मजबूरी में उनका नाम लेने का दिखावा करने लगी है। 

मैं समझता हूं, कांग्रेस के अपने इतिहास में, बाबा साहेब का नाम लेना उसकी सबसे बड़ी मजबूरियों में से एक है। 

ये बाबा साहेब के महान कर्मों कादेश के लिए उनकी सेवा का फल है कि एक परिवार की पूजा करने वालेउस परिवार को देश का भाग्यविधाता समझने वालेअब दिल पर पत्थर रखकर बाबा साहेब का नाम ले रहे हैं। 

लेकिन मुझे पता है, कांग्रेस ये भी नहीं करेगी। वो सिर्फ भ्रम फैला सकती है, दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों को झूठ बोल सकती है, उनके बीच अफवाह फैला सकती है। इस कोशिश की एक तस्वीर इस महीने की दो तारीख को हम देख चुके हैं। कभी आरक्षण खत्म किए जाने की अफवाह फैलाना, कभी दलितों के अत्याचार से जुड़े कानून को खत्म किए जाने की अफवाह फैलाना, भाई से भाई को लड़ाने में कांग्रेस कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही।

 

साथियों,

कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी और  आज चाहती है कि दलित और पिछड़े विकास की मुख्यधारा में आएं। 

जबकि हमारी सरकार, बाबा साहेब के दिखाए रास्ते पर चलते हुए, सबका साथ-सबका विकास के मंत्र के साथ समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

कोई भी राजनीतिक दल और व्यक्ति जो ईमानदारी के साथ बाबा साहेब के नाम की माला जपता हैउनमें आस्था रखता हैकभी कांग्रेस के साथ नहीं जा सकता।

 

साथियों,

मैं अगर गरीब और पिछड़े परिवार में पैदा नहीं हुआ होता, तो बाबासाहेब को इतनी आसानी से समझ ही नहीं पाता। मैंने गरीबी देखी है, जाति से जुड़े अपशब्द भी सुने हैं, ताने भी सुने हैं। इसलिए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए ये अनुभव सहज रहा कि उस कालखंड में बाबासाहेब को क्या-क्या सहना पड़ा। बाबा साहेब की प्रेरणा से ही, कल से, यानि उनकी जयंती से, देश में ग्राम स्वराज अभियान की शुरुआत होने जा रही है। मैं खुद भी छत्तीसगढ़ के बीजापुर में रहूंगा। कल से देश में क्षेत्रीय विकास में होने वाले असंतुलन, स्वास्थ्य में होने वाले असंतुलन को खत्म करने के लिए एक नए अध्याय की भी शुरुआत होगी। 

साथियों,

सामाजिक न्याय इस सरकार के लिए सिर्फ कहने-सुनने की बात नहीं, बल्कि एक कमिटमेंट है। लेकिन जिस तरह की घटनाएं हमने बीते दिनों में देखीं हैं, वो सामाजिक न्याय की अवधारणा को चुनौती देती हैं। 

पिछले दो दिनो से जो घटनाये चर्चा में है वो निश्चित रूप से किसी भी सभ्य समाज के लिये शर्मनाक है। हमारे स्वतंत्रा सेनानियो ने जिन्होंने अपनी ज़िंदगी इस देश के भविष्य के लिए बलिदान कर दी यह उनके बलिदान का अपमान है। 

एक समाज के रूप में, एक देश के रूप में हम सब इस के लिए शर्मसार है. देश के किसी भी राज्य में, किसी भी क्षेत्र में होने वाली ऐसी वारदातें, हमारी मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती हैं।  मैं देश को विश्वास दिलाना चाहता हूँ की कोई अपराधी बचेगा नहीं, न्याय होगा और पूरा होगा। हमारे समाज की इस आंतरिक बुराई को खत्म करने का काम, हम सभी को मिलकर करना होगा। 

मैंने तो लाल किले से बोलने का साहस किया था कि लड़की से नहीं, लड़कों से पूछो। हमें पारिवारिक व्यवस्था, Social Values से लेकर न्याय व्यवस्था तक, सभी को इसके लिए मजबूत करना होगा ।

तभी हम बाबा साहेब के सपनों का भारत बना पाएंगे, न्यू इंडिया बना पाएंगे। 

बाबा साहेब का आशीर्वाद आप  सभी पर भी बना रहे, उनके विचारों से आप भी निरंतर प्रेरणा लेते रहें, इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

एक बार फिर आप सभी को, देश के सभी लोगों को, डॉक्टर आंबेडकर नेशनल मेमोरियल के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद !!!

 

Explore More
୭୭ତମ ସ୍ବାଧୀନତା ଦିବସ ଅବସରରେ ଲାଲକିଲ୍ଲା ପ୍ରାଚୀରରୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣର ମୂଳ ପାଠ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

୭୭ତମ ସ୍ବାଧୀନତା ଦିବସ ଅବସରରେ ଲାଲକିଲ୍ଲା ପ୍ରାଚୀରରୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣର ମୂଳ ପାଠ
'Grateful to PM Modi's leadership…': White House praises India's democracy and electoral process

Media Coverage

'Grateful to PM Modi's leadership…': White House praises India's democracy and electoral process
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
PM Modi's interview to Prabhat Khabar
May 19, 2024

प्रश्न- भाजपा का नारा है-‘अबकी बार 400 पार’, चार चरणों का चुनाव हो चुका है, अब आप भाजपा को कहां पाते हैं?

उत्तर- चार चरणों के चुनाव में भाजपा और एनडीए की सरकार को लेकर लोगों ने जो उत्साह दिखाया है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि हम 270 सीटें जीत चुके हैं. अब बाकी के तीन चरणों में हम 400 का आंकड़ा पार करने वाले हैं. 400 पार का नारा, भारत के 140 करोड़ लोगों की भावना है, जो इस रूप में व्यक्त हो रही है. दशकों तक जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को देश ने सहन किया. लोगों के मन में यह स्वाभाविक प्रश्न था कि एक देश में दो विधान कैसे चल सकता है. जब हमें अवसर मिला, हमने आर्टिकल 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर में भारत का संविधान लागू किया. इससे देश में एक अभूतपूर्व उत्साह का प्रवाह हुआ. लोगों ने तय किया कि जिस पार्टी ने आर्टिकल 370 को खत्म किया, उसे 370 सीटें देंगे. इस तरह भाजपा को 370 सीट और एनडीए को 400 सीट देने का लोगों का इरादा पक्का हुआ. मैं पूरे देश में जा रहा हूं. उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम मैंने लोगों में 400 पार नारे को सच कर दिखाने की प्रतिबद्धता देखी है. मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि इस बार जनता 400 से ज्यादा सीटों पर हमारी जीत सुनिश्चित करेगी.

प्रश्न- लोग कहते हैं कि हम मोदी को वोट कर रहे हैं, प्रत्याशी के नाम पर नहीं. लोगों का इतना भरोसा है, इस भरोसे को कैसे पूरा करेंगे?

उत्तर- देश की जनता का यह विश्वास मेरी पूंजी है. यह विश्वास मुझे शक्ति देता है. यही शक्ति मुझे दिन रात काम करने को प्रेरित करती है. मेरी सरकार लगातार एक ही मंत्र पर काम कर रही है, वंचितों को वरीयता. जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, मोदी उनको पूजता है. इसी भाव से मैं अपने आदिवासी भाई-बहनों, दलित, पिछड़े, गरीब, युवा, महिला, किसान सभी की सेवा कर रहा हूं. जनता का भरोसा मेरे लिए एक ड्राइविंग फोर्स की तरह काम करता है.

देखिए, जो संसदीय व्यवस्था है, उसमें पीएम पद का एक चेहरा होता है, लेकिन जनता सरकार बनाने के लिए एमपी को चुनती है. इस चुनाव में चाहे भाजपा का पीएम उम्मीदवार हो या एमपी उम्मीदवार, दोनों एक ही संदेश लेकर जनता के पास जा रहे हैं. विकसित भारत का संदेश. पीएम उम्मीदवार नेशनल विजन की गारंटी है, तो हमारा एमपी उम्मीदवार स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने की गारंटी है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक टीम की तरह काम करती है और इस टीम के लिए उम्मीदवारों के चयन में हमने बहुत ऊर्जा और समय खर्च किया है. हमने उम्मीदवारों के चयन का तरीका बदल दिया है. हमने किसी सीट पर उम्मीदवार के चयन में कोई समझौता नहीं किया, न ही किसी तरह के दबाव को महत्व दिया. जिसमें योग्यता है, जिसमें जनता की उम्मीदों को पूरा करने का जज्बा है, उसका चयन किया गया है. हमें मिल कर हर सीट पर कमल खिलाना है. भाजपा और एनडीए की यह टीम 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमेशा समर्पित रहेगी.

प्रश्न- आपने 370 को हटाया, राम मंदिर बनवा दिया. अब तीसरी बार आपकी सरकार अगर लौटती है, तो कौन से वे बड़े काम हैं, जिन्हें आप पहले पूरा करना चाहेंगे?

उत्तर- जब आप चुनाव जीत कर आते हैं, तो आपके साथ जनता-जनार्दन का आशीर्वाद होता है. देश के करोड़ों लोगों की ऊर्जा होती है. जनता में उत्साह होता है. इससे आपके काम करने की गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. 2024 के चुनाव में जिस तरीके से भाजपा को समर्थन मिल रहा है, ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि तीसरी बार सरकार में आने के बाद क्या बड़े काम होने वाले हैं.

यह चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि 2014 और 2019 में चुनाव जीतने के बाद ही सरकार एक्शन मोड में आ गयी थी. 2019 में हमने पहले 100 दिन में ही आर्टिकल 370 और तीन तलाक से जुड़े फैसले लिये थे. बैंकों के विलय जैसा महत्वपूर्ण फैसला भी सरकार बनने के कुछ ही समय बाद ले लिया गया था. हालांकि इन फैसलों के लिए आधार बहुत पहले से तैयार कर लिया गया था.

इस बार भी हमारे पास अगले 100 दिनों का एक्शन प्लान है, अगले पांच वर्षों का रोडमैप है और अगले 25 वर्षों का विजन है. मुझे देशभर के युवाओं ने बहुत अच्छे सुझाव भेजे हैं. युवाओं के उत्साह को ध्यान में रखते हुए हमने 100 दिनों के एक्शन प्लान में 25 दिन और जोड़ दिये हैं. 125 में से 25 दिन भारत के युवाओं से जुड़े निर्णय के होंगे. हम आज जो भी कदम उठा रहे हैं, उसमें इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इससे विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में कैसे मदद मिल सकती है.

प्रश्न- दक्षिण पर आपने काफी ध्यान दिया है. लोकप्रियता भी बढ़ी है. वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा, लेकिन क्या सीट जीतने लायक स्थिति साउथ में बनी है?

उत्तर- देखिए, दक्षिण भारत में बीजेपी अब भी सबसे बड़ी पार्टी है. पुद्दुचेरी में हमारी सरकार है. कर्नाटक में हम सरकार में रह चुके हैं. 2024 के चुनाव में मैंने दक्षिण के कई जिलों में रैलियां और रोड शो किये हैं. मैंने लोगों की आंखों में बीजेपी के लिए जो स्नेह और विश्वास देखा है, वह अभूतपूर्व है. इस बार दक्षिण भारत के नतीजे चौंकाने वाले होंगे.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हम सबसे ज्यादा सीटें जीतेंगे. लोगों ने आंध्र विधानसभा में एनडीए की सरकार बनाने के लिए वोट किया है. कर्नाटक में भाजपा एक बार फिर सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी. मैं आपको पूरे विश्वास से कह रहा हूं कि तमिलनाडु में इस बार के परिणाम बहुत ही अप्रत्याशित होंगे और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में होंगे.

प्रश्न- ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भाजपा को बहुत उम्मीदें हैं. भाजपा कितनी सीटें जीतने की उम्मीद करती है?

उत्तर- मैं ओडिशा और पश्चिम बंगाल में जहां भी जा रहा हूं, मुझे दो बातें हर जगह देखने को मिल रही हैं. एक तो भाजपा पर लोगों का भरोसा और दूसरा दोनों ही राज्यों में वहां की सरकार से भारी नाराजगी. लोगों की आकांक्षाओं को मार कर राज करने को सरकार चलाना नहीं कह सकते. ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लोगों की आकांक्षाओं, भविष्य और सम्मान को कुचला गया है. पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी का दूसरा नाम बन गयी है. लोग देख रहे हैं कि कैसे वहां की सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है.

संदेशखाली की पीड़ितों की आवाज दबाने की कोशिश की गयी. लोगों को अपने त्योहार मनाने से रोका जा रहा है. टीएमसी सरकार लोगों तक केंद्र की योजनाओं का फायदा नहीं पहुंचने दे रही. इसका जवाब वहां के लोग अपने वोट से देंगे. पश्चिम बंगाल के लोग भाजपा को एक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं. बंगाल में इस बार हम बड़ी संख्या में सीटें हासिल करेंगे. मैं ओडिशा के लोगों से कहना चाहता हूं कि उनकी तकलीफें जल्द खत्म होने वाली हैं. चुनाव नतीजों में हम ना सिर्फ लोकसभा की ज्यादा सीटें जीतेंगे, बल्कि विधानसभा में भी भाजपा की सरकार बनेगी.

पहली बार ओडिशा के लोगों को डबल इंजन की सरकार के फायदे मिलेंगे. बीजेडी की सरकार हमारी जिन योजनाओं को ओडिशा में लागू नहीं होने दे रही, हमारी सरकार बनते ही उनका फायदा लोगों तक पहुंचने लगेगा. बीजेडी ने अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा नुकसान उड़िया संस्कृति और भाषा का किया है. मैंने ओडिशा को भरोसा दिया है कि राज्य का अगला सीएम भाजपा का होगा, और वह व्यक्ति होगा, जो ओडिशा की मिट्टी से निकला हो, जो ओडिशा की संस्कृति, परंपरा और उड़िया लोगों की भावनाओं को समझता हो.

ये मेरी गारंटी है कि 10 जून को ओडिशा का बेटा सीएम पद की शपथ लेगा. राज्य के लोग अब एक ऐसी सरकार चाहते हैं, जो उनकी उड़िया पहचान को विश्व पटल पर ले जाए, इसलिए उनका भरोसा सिर्फ भाजपा पर है.

प्रश्न- बिहार और झारखंड में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहेगा, आप क्या उम्मीद करते हैं?

उत्तर- मेरा विश्वास है कि इस बार बिहार और झारखंड में भाजपा को सभी सीटों पर जीत हासिल होगी. दोनों राज्यों के लोग एक बात स्पष्ट रूप से समझ गये हैं कि इंडी गठबंधन में शामिल पार्टियों को जब भी मौका मिलेगा, तो वे भ्रष्टाचार ही करेंगे. इंडी ब्लॉक में शामिल पार्टियां परिवारवाद से आगे निकल कर देश और राज्य के विकास के बारे में सोच ही नहीं सकतीं.

झारखंड में नेताओं और उनके संबंधियों के घर से नोटों के बंडल बाहर निकल रहे हैं. यह किसका पैसा है? ये गरीब के हक का पैसा है. ये पैसा किसी गरीब का अधिकार छीन कर इकट्ठा किया गया है. अगर वहां भ्रष्टाचार पर रोक रहती, तो यह पैसा कई लोगों तक पहुंचता. उस पैसे से हजारों-लाखों लोगों का जीवन बदल सकता था, लेकिन जनता का वोट लेकर ये नेता गरीबों का ही पैसा लूटने लगे. दूसरी तरफ जनता के सामने केंद्र की भाजपा सरकार है, जिस पर 10 साल में भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा.

आज झारखंड में जिहादी मानसिकता वाले घुसपैठिये झुंड बना कर हमला करते हैं और झारखंड सरकार उन्हें समर्थन देती है. इन घुसपैठियों ने राज्य में हमारी बहनों-बेटियों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. वहीं अगर बिहार की बात करें, तो जो पुराने लोग हैं, उन्हें जंगलराज याद है. जो युवा हैं, उन्होंने इसका ट्रेलर कुछ दिन पहले देखा है.

आज राजद और इंडी गठबंधन बिहार में अपने नहीं, नीतीश जी के काम पर वोट मांग रहा है. इंडी गठबंधन के नेता तुष्टीकरण में इतने डूब चुके हैं एससी-एसटी-ओबीसी का पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिम समाज को देना चाहते हैं. जनता इस साजिश को समझ रही है. इसलिए, भाजपा को वोट देकर इसका जवाब देगी.

प्रश्न- संपत्ति का पुनर्वितरण इन दिनों बहस का मुद्दा बना हुआ है. इस पर आपकी क्या राय है?

उत्तर- शहजादे और उनके सलाहकारों को पता है कि वे सत्ता में नहीं आने वाले. इसीलिए ऐसी बात कर रहे हैं. यह माओवादी सोच है, जो सिर्फ अराजकता को जन्म देगी. इंडी गठबंधन की परेशानी यह है कि वे तुष्टीकरण से आगे कुछ भी सोच नहीं पा रहे. वे किसी तरह एक समुदाय का वोट पाना चाहते हैं, इसलिए अनाप-शनाप बातें कर रहे हैं. लूट-खसोट की यह सोच कभी भी भारत की संस्कृति का हिस्सा नहीं रही. वे एक्सरे कराने की बात कर रहे हैं, उनका प्लान है कि एक-एक घर में जाकर लोगों की बचत, उनकी जमीन, संपत्ति और गहनों का हिसाब लिया जायेगा. कोई भी इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा. पिछले 10 वर्षों में हमारा विकास मॉडल लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने का है. इसके लिए हम लोगों तक वे मूलभूत सुविधाएं पहुंचा रहे हैं, जो दशकों पहले उन्हें मिल जाना चाहिए था. हम रोजगार के नये अवसर तैयार कर रहे हैं, ताकि लोग सम्मान के साथ जी सकें.

प्रश्न- भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है. भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. आम आदमी को इसका लाभ कैसे मिलेगा?

उत्तर- यह बहुत ही अच्छा सवाल है आपका. तीसरे कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगी. जब मैं यह कहता हूं कि तो इसका मतलब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सम्मान के साथ देशवासियों के लिए समृद्धि भी लाने वाला है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का मतलब है बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी का विस्तार, ज्यादा निवेश और ज्यादा अवसर. आज सरकार की योजनाओं का लाभ जितने लोगों तक पहुंच रहा है, उसका दायरा और बढ़ जायेगा.

भाजपा ने तीसरे टर्म में आयुष्मान भारत योजना का लाभ 70 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों को देने की गारंटी दी है. हमने गरीबों के लिए तीन करोड़ और पक्के मकान बनाने का संकल्प लिया है. तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने की बात कही है. जब अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो हमारी योजनाओं का और विस्तार होगा और ज्यादा लोग लाभार्थी बनेंगे.

प्रश्न- आप लोकतंत्र में विपक्ष को कितना जरूरी मानते हैं और उसकी क्या भूमिका होनी चाहिए?

उत्तर- लोकतंत्र में सकारात्मक विपक्ष बहुत महत्वपूर्ण है. विपक्ष का मजबूत होना लोकतंत्र के मजबूत होने की निशानी है. इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि पिछले 10 वर्षों में विपक्ष व्यक्तिगत विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगा. विपक्ष या सत्ता पक्ष लोकतंत्र के दो पहलू हैं, आज कोई पार्टी सत्ता में है, कभी कोई और रही होगी, लेकिन आज विपक्ष सरकार के विरोध के नाम पर कभी देश की सेना को बदनाम कर रहा है, कभी सेना के प्रमुख को अपशब्द कह रहा है. कभी सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाता है, तो कभी एयरस्ट्राइक पर संदेह जताता है. सेना के सामर्थ्य पर उंगली उठा कर वे देश को कमजोर करना चाहते हैं.

आप देखिए, विपक्ष कैसे पाकिस्तान की भाषा बोलने लगा है. जिस भाषा में वहां के नेता भारत को धमकी देते थे, वही आज कांग्रेस के नेता बोलने लगे हैं. मैं इतना कह सकता हूं कि विपक्ष अपनी इस भूमिका में भी नाकाम हो गया है. वे देश के लोगों का विश्वास नहीं जीत पा रहे, इसलिए देश के खिलाफ बोल रहे हैं.

प्रश्न- झारखंड में बड़े पैमाने पर नोट पकड़े गये, भ्रष्टाचार से इस देश को कैसे मुक्ति मिलेगी?

उत्तर- देखिए, जब कोई सरकार तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के दलदल में फंस जाती है तो इस तरह की चीजें देखने को मिलती हैं. मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं. 2014 से पहले, कांग्रेस के 10 साल के शासन में ईडी ने छापे मार कर सिर्फ 35 लाख रुपये बरामद किये थे. पिछले 10 वर्ष में इडी के छापे में 2200 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं. यह अंतर बताता है कि जांच एजेंसियां अब ज्यादा सक्रियता से काम कर रही हैं.

आज देश के करोड़ों लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पैसे भेजे जा रहे हैं. कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने कहा था कि दिल्ली से भेजे गये 100 पैसे में से लाभार्थी को सिर्फ 15 पैसे मिलते हैं. बीच में 85 पैसे कांग्रेस के भ्रष्टाचार तंत्र की भेंट चढ़ जाते थे. हमने जनधन खाते खोले, उन्हें आधार और मोबाइल नंबर से लिंक किया, इसके द्वारा भ्रष्टाचार पर चोट की. डीबीटी के माध्यम से हमने लाभार्थियों तक 36 लाख करोड़ रुपये पहुंचाये हैं. अगर यह व्यवस्था नहीं होती, तो 30 लाख करोड़ रुपये बिचौलियों की जेब में चले जाते. मैंने संकल्प लिया है कि मैं देश से भ्रष्टाचार को खत्म करके रहूंगा. जो भी भ्रष्टाचारी होगा, उस पर कार्रवाई जरूर होगी. मेरे तीसरे टर्म ये कार्रवाई और तेज होगी.

प्रश्न- विपक्ष सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों- इडी और सीबीआइ के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है. इस पर आपका क्या कहना है?

उत्तर- आपको यूपीए का कार्यकाल याद होगा, तब भ्रष्टाचार और घोटाले की खबरें आती रहती थीं. उस स्थिति से बाहर निकलने के लिए लोगों ने भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया, लेकिन आज इंडी गठबंधन में शामिल दलों की जहां सरकार है, वहां यही सिलसिला जारी है. फिर जब जांच एजेंसियां इन पर कार्रवाई करती हैं तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर शोर मचाने लगता है. एक घर से अगर करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं, तो स्पष्ट है कि वो पैसा भ्रष्टाचार करके जमा किया गया है. इस पर कार्रवाई होने से विपक्ष को दर्द क्यों हो रहा है? क्या विपक्ष अपने लिए छूट चाहता है कि वे चाहे जनता का पैसा लूटते रहें, लेकिन एजेंसियां उन पर कार्रवाई न करें.

मैं विपक्ष और उन लोगों को चुनौती देना चाहता हूं, जो कहते हैं कि सरकार किसी भी एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है. एक भी ऐसा केस नहीं हैं जहां पर कोर्ट ने एजेंसियों की कार्रवाई को गलत ठहराया हो. भ्रष्टाचार में फंसे लोगों के लिए जमानत पाना मुश्किल हो रहा है. जो जमानत पर बाहर हैं, उन्हें फिर वापस जाना है. मैं डंके की चोट पर कहता हूं कि एजेंसियों ने सिर्फ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही की है.

प्रश्न- विपक्ष हमेशा इवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, आपकी क्या राय है?

उत्तर- विपक्ष को अब यह स्पष्ट हो चुका है कि उसकी हार तय है. यह भी तय हो चुका है कि जनता ने उन्हें तीसरी बार भी बुरी तरह नकार दिया है. ये लोग इवीएम के मुद्दे पर अभी-अभी सुप्रीम कोर्ट से हार कर आये हैं. ये हारी हुई मानसिकता से चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए पहले से बहाने ढूंढ कर रखा है. इनकी मजबूरी है कि ये हार के लिए शहजादे को दोष नहीं दे सकते. आप इनका पैटर्न देखिए, चुनाव शुरू होने से पहले ये इवीएम पर आरोप लगाते हैं. उससे बात नहीं तो इन्होंने मतदान प्रतिशत के आंकड़ों का मुद्दा उठाना शुरू किया है. जब मतगणना होगी तो गड़बड़ी का आरोप लगायेंगे और जब शपथ ग्रहण होगा, तो कहेंगे कि लोकतंत्र खतरे में है. चुनाव आयोग ने पत्र लिख कर खड़गे जी को जवाब दिया है, उससे इनकी बौखलाहट और बढ़ गयी है. ये लोग चाहे कितना भी शोर मचा लें, चाहे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा लें, जनता इनकी बहानेबाजी को समझती है. जनता को पता है कि इसी इवीएम से जीत मिलने पर कैसे उनके नरेटिव बदल जाते हैं. इवीएम पर आरोप को जनता गंभीरता से नहीं लेती.

प्रश्न- आपने आदिवासियों के विकास के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं. आप पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भगवान बिरसा की जन्मस्थली उलिहातू भी गये. आदिवासी समाज के विकास को लेकर आपका विजन क्या है?

उत्तर- इस देश का दुर्भाग्य रहा है कि आजादी के बाद छह दशक तक जिन्हें सत्ता मिली, उन लोगों ने सिर्फ एक परिवार को ही देश की हर बात का श्रेय दिया. उनकी चले, तो वे यह भी कह दें कि आजादी की लड़ाई भी अकेले एक परिवार ने ही लड़ी थी. हमारे आदिवासी भाई-बहनों का इस देश की आजादी में, इस देश के समाज निर्माण में जो योगदान रहा, उसे भुला दिया गया. भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को ना याद करना कितना बड़ा पाप है. देश भर में ऐसे कितने ही क्रांतिकारी हैं जिन्हें इस परिवार ने भुला दिया.

जिन आदिवासी इलाकों तक कोई देखने तक नहीं जाता था, हमने वहां तक विकास पहुंचाया है. हम आदिवासी समाज के लिए लगातार काम कर रहे हैं. जनजातियों में भी जो सबसे पिछड़े हैं, उनके लिए विशेष अभियान चला कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है. इसके लिए सरकार ने 24 हजार करोड़ रुपये की योजना बनायी है.

भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को भाजपा सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया. एकलव्य विद्यालय से लेकर वन उपज तक, सिकेल सेल एनीमिया उन्मूलन से लेकर जनजातीय गौरव संग्रहालय तक, हर स्तर पर विकास कर रहे हैं. एनडीए के सहयोग से पहली बार एक आदिवासी बेटी देश की राष्ट्रपति बनी है.अगले वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती है. भाजपा ने संकल्प लिया है कि 2025 को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जायेगा.

प्रश्न- देश के मुसलमानों और ईसाइयों के मन में भाजपा को लेकर एक अविश्वास का भाव है. इसे कैसे दूर करेंगे?

उत्तर- हमारी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में एक काम भी ऐसा नहीं किया है, जिसमें कोई भेदभाव हुआ हो. पीएम आवास का घर मिला है, तो सबको बिना भेदभाव के मिला है. उज्ज्वला का गैस कनेक्शन मिला है, तो सबको मिला है. बिजली पहुंची है, तो सबके घर पहुंची है. नल से जल का कनेक्शन देने की बात आयी, तो बिना जाति, धर्म पूछे हर किसी को दी गयी. हम 100 प्रतिशत सैचुरेशन की बात करते हैं. इसका मतलब है कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे, हर परिवार तक पहुंचे. यही तो सच्चा सामाजिक न्याय है.

इसके अलावा मुद्रा लोन, जनधन खाते, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, स्टार्ट अप- ये सारे काम सबके लिए हो रहे हैं. हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास के विजन पर काम करती है. दूसरी तरफ, जब कांग्रेस को मौका मिला, तो उसने समाज में विभाजन की नीति अपनायी. दशकों तक वोटबैंक की राजनीति करके सत्ता पाती रही, लेकिन अब जनता इनकी सच्चाई समझ चुकी है.

भाजपा को लेकर अल्पसंख्यकों में अविश्वास की बातें कांग्रेसी इकोसिस्टम का गढ़ा हुआ है. कभी कहा गया कि बीजेपी शहरों की पार्टी है. फिर कहा गया कि बीजेपी ऐसी जगहों में नहीं जीत सकती, जहां पर अल्पसंख्यक अधिक हैं. आज नागालैंड सहित नॉर्थ ईस्ट के दूसरे राज्यों में हमारी सरकार है, जहां क्रिश्चियन समुदाय बहुत बड़ा है. गोवा में बार-बार भाजपा को चुना जाता है. ऐसे में अविश्वास की बात कहीं टिकती नहीं.

प्रश्न- झारखंड और बिहार के कई इलाकों में घुसपैठ बढ़ी है, यहां तक कि डेमोग्रेफी भी बदल गयी है. इस पर कैसे अंकुश लगेगा?

उत्तर- झारखंड को एक नयी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. जेएमएम सरकार की तुष्टीकरण की नीति से वहां घुसपैठ को जम कर बढ़ावा मिल रहा है. बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से वहां की आदिवासी संस्कृति को खतरा पैदा हो गया है, कई इलाकों की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है. बिहार के बॉर्डर इलाकों में भी यही समस्या है. झारखंड में आदिवासी समाज की महिलाओं और बेटियों को टारगेट करके लैंड जिहाद किया जा रहा है. आदिवासियों की जमीन पर कब्जे की एक खतरनाक साजिश चल रही है.

ऐसी खबरें मेरे संज्ञान में आयी हैं कि कई आदिवासी बहनें इन घुसपैठियों का शिकार बनी हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है. बच्चियों को जिंदा जलाया जा रहा है. उनकी जघन्य हत्या हो रही है. पीएफआइ सदस्यों ने संताल परगना में आदिवासी बच्चियों से शादी कर हजारों एकड़ जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है. आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए, आदिवासी बेटी की रक्षा के लिए, आदिवासी संस्कृति को बनाये रखने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है.

Following is the clipping of the interview:

 

 Source: Prabhat Khabar