Complete Speech: Shri Narendra Modi at the Vijay Shankhnaad Rally, Gorakhpur

Published By : Admin | January 23, 2014 | 19:58 IST

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी, यहाँ के जनप्रिय सांसद जुझारू नेता आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और हमारे पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री कल्याण सिंह जी, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान लक्ष्मीकांत जी, श्रीमान रमापति जी, श्री सूर्यप्रताप जी, श्रीमान कलराज जी, श्रीमान लालजी टंडन जी, श्रीमान ओमप्रकाश सिंह जी, भाई विनय कटियार जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ नेतागण और गोरखपुर की इस पवित्र धरती पर पधारे हुए लाखों-लाखों भाईयों और बहनों..!

सा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के हर क्षेत्र ने एक-दूसरे से आगे निकलने की स्पर्धा ठान ली है, उत्तर प्रदेश की जितनी भी रैलियां हुई हैं, हर रैली पिछली रैली का रिकॉर्ड तोड़ देती है..! मैं जब यहाँ हेलीकॉप्टर से आ रहा था तो दृश्य देख रहा था, चारों तरफ लोग ही लोग नज़र आ रहे थे, मानों जैसे जनसमंदर हो..! भाईयों-बहनों, इस ठंड के समय में गोरखपुर और अगल-बगल के इलाके से आए लोग और इतनी बड़ी रैली, बदलती हवा का रूख दिखाती है कि हवा किस तरफ चल रही है..! आज आपकी आवाज बनारस की गलियों में भी गूंज रही है..! मित्रों, हमने बहुत चुनाव देखे हैं, लेकिन ये ऐसा चुनाव है जिसका फैसला देश के कोटि-कोटि जनों ने कर लिया है, कांग्रेस और उसके साथी दलों की विदाई देश ने तय कर ली है और कांग्रेस मुक्त भारत का सपना इस बार साकार होकर रहेगा, ये नजारा साफ कह रहा है..!

भाईयों-बहनों, मुझे उत्तर प्रदेश के नौजवानों का विशेष अभिनदंन करना है। 15 दिसम्बर को सरदार बल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि थी और उस पूरे देश में सरदार बल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि‍ देने के लिए देश भर में एकता दौड़ का आयोजन किया गया था। मित्रों, मुझे खुशी है कि उत्तर प्रदेश के हर कोने से, इतनी ठंड में भी लाखों नौजवान एकता दौड़ के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल को याद करके दौड़े और ये विश्व रिकॉर्ड बन गया, कि एक दिन में एक ही समय में हिंदुस्तान में 1100 से अधिक स्थानों पर 50 लाख लोग दौड़े..! हमारे ओमप्रकाश जी मुझे बता रहे थे कि अभी जो लोहा संग्रह का कार्यक्रम चल रहा है, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा भारत के लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की बनने वाली है, अमेरिका में जो स्टेच्यु ऑफ लिबर्टी है, उससे दो गुना बड़ी यह स्टेच्यु ऑफ यूनिटी की प्रतिमा बनने वाली है, इसके लिए भारत के हर गाँव से किसानों के काम में आने वाले औजार को इक्ट्ठा किया जा रहा है, और उस लोहे के औजार के टुकड़ों से सरदार बल्लभ भाई साहब की प्रतिमा बनने वाली है। एकता के लिए यह एक अभिनव प्रयास है और इस प्रयास में उत्तर प्रदेश ने जो सहयोग दिया है, जो उत्साह और उमंग दिखाया है, इसके लिए मैं उत्तर प्रदेश के हर गाँव का, हर नौजवान का, हर किसान का हृदय से अभिनंदन करता हूँ..!

भाईयों-बहनों, मैं जहाँ भी नजर दौड़ाता हूँ, लोग ही लोग है, चारों तरफ जनमेदनी है, जनता जर्नादन के दर्शन ईश्वर के दर्शन होते हैं, ये सौभाग्य हमें मिला है..! मित्रों, ये गोरखपुर की धरती ऐसी है, जहाँ हमारी महान सांस्कृतिक विरासत, हमारे ऋषियों-मुनियों का चिंतन, हमारे ज्ञानियों की सांस्कृतिक रचनाएं, इन सबको अक्षरदेह देने का काम गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा किया गया, जो कि एक बहुत बड़ी सेवा है, यह एक प्रकार से ज्ञान की उपासना का काम हुआ है, और वही समाज आगे बढ़ता है जो हर युग में हर समय ज्ञान उपासना की अपनी साधना निरंतर बनाए रखता है और इस काम में गोरखपुर की धरती का बहुत बड़ा योगदान है, इस धरती को मैं नमन करता हूँ..!

भाईयों-बहनों, 2014 का चुनाव कैसा होगा, उसका एक ट्रेलर अभी-अभी हुआ है..! हमारे देश के पांच राज्यों में चुनाव हुआ, और चार राज्यों में सबसे अधिक भारतीय जनता पार्टी को समर्थन मिला। लेकिन उसमें भी मैं एक बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। कुछ लोग, कुछ ठेकेदार मानते हैं कि दलित हो, पीडि़त हो, शोषित हो, आदिवासी हो, ये सब उनकी जेब में हैं। सालों से ये लोग दलित, पीडि़त, शोषित, आदिवासी को इंसान मानने को तैयार नहीं थे, वे उसे वोट बैंक मानते थे और ये ठेकेदारों का मत था कि भारतीय जनता पार्टी आसमान से नीचे गिरे, लेकिन दलितों में और आदिवासियों में अपनी जगह नहीं बना सकती है, ये इनके दावे थे..! मित्रों, आज मैं गोरखपुर की इस पवित्र धरती से कहना चाहता हूँ, अभी-अभी जिन चार राज्यों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है, वहाँ का नज़ारा क्या है..? राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 सीटें हैं, उसमें से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 में से 32 सीटों पर वहाँ की जनता जर्नादन ने कमल के निशान पर मोहर लगाकर भारतीय जनता पार्टी को विजयी बनाया है..! मित्रों, छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति की 10 सीटें हैं, जिसमें से कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली है..! मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की 35 सीटें हैं, जिसमें से 28 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई हैं..! मैं मेरे उत्तर प्रदेश के दलित, पीडि़त, शोषित, समाज में पीछे रह जाने वाले भाईयों-बहनों को आज विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी को सेवा करने का अवसर मिला है, हमारी प्राथमिकता रही है कि गरीबों का कल्याण हो, लोग गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए ताकतवर बनें, समाज के पीडित और शोषित लोग गरीबी से मुक्ति की एहसास करें और इसी का परिणाम है कि आज दलित, पीडि़त, शोषित, आदिवासी समाज का भारतीय जनता पार्टी के प्रति एक विश्वास पैदा हुआ है..!

भाईयों-बहनों, कांग्रेस पार्टी गरीबों की बातें हर बार करती आई है। चुनाव आते ही कांग्रेस को गरीब याद आते हैं, वो गरीबी की माला जपना शुरू कर देते हैं। मैं कभी-कभी सोचता था कि देश को आजादी पाए 60 साल से अधिक समय हो गया, लगातार कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर मिला, वे गरीबों और गरीबी की बातें करते रहे, लेकिन गरीबों की जिन्दगी में बदलाव क्यों नहीं आया..? 60 सालों में बदलाव न आए, ऐसा तो हमारा देश नहीं है, आखिर इसका कारण क्या है..? भाईयों-बहनों, इसका जवाब मुझे मिल नहीं रहा था, मैं बहुत कोशिश करता था कि कांग्रेस की वो कौन सी मानसिकता है, कांग्रेस की वो कौन सी रणनीति है, कांग्रेस की वो कौन सी सोच है, जिसके कारण गरीबों के इतने वोट मिलने के बाद भी उनके हर छोटे-मोटे नेता के गरीबों पर बात करने के बावजूद भी देश में लगातार गरीबी बढ़ती क्यों चली जा रही है..? इस सवाल का जबाव मुझे अभी-अभी मिल गया है, इसका मूल कारण है कि गरीबों को गरीब रखने में ही कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक भविष्य छुपा हुआ है..! वे किसी भी हालत में गरीबों को गरीबी से लड़ने की ताकत देना नहीं चाहते हैं, वे किसी भी हालत में गरीबी से मुक्ति का प्रयास नहीं चाहते हैं और उनके भीतर एक ऐसी मानसिकता पड़ी है, जो गरीबों के प्रति उपेक्षा के भाव से भरी हुई है। अगर उनकी ये सोच न होती, उनके सोचने का ये तरीका न होता तो एक चाय वाला, एक गरीब मां का बेटा, सर ऊंचा करे वो कांग्रेस का एक भी नेता सहने को तैयार नहीं है, ये उनकी मानसिकता का दर्शन कराता है..! वे हमारी राजनीतिक विचारों का विरोध करते, हमारे काम का विरोध करते, लेकिन कांग्रेस के नेता हमारी गरीबी का मखौल उड़ा रहे हैं, ये इस बात का सबूत है कि कांग्रेस पार्टी का गरीबों की तरफ देखने का नजरिया क्या है..!

भाईयों-बहनों, मुझे एक बात का जबाव दीजिए, क्या आप गरीबों का अपमान सहेगें..? क्या आप गरीबों का अपमान करने का प्रयास सहेगें..? गरीब विरोधी कांग्रेस की मानसिकता सहेगें..? गरीबों को वोट बैंक बनाने वाली कांग्रेस को सहेगें..? अरे, ये सिर्फ चाय वाले का विषय नहीं है, वो क्या कहते हैं..? वो कहते हैं कि 12 रूपये में खाना मिल जाता है, दूसरा नेता कहता है कि 5 रूपये में खाना मिल जाता है..! आप लोग ही बताइए, क्या 12 रूपए में खाना मिल सकता है..? क्या 5 रूपये में खाना मिल सकता है..? ये गरीब का मजाक नहीं है तो क्या है..! भाईयों-बहनों, गरीबी क्या होती है, गरीब कैसे जिंदगी गुजारा करता है, ठंड ज्यादा पड़ जाएं तो भी गरीब मरता है, धूप ज्यादा निकलें, गर्मी ज्यादा हो जाएं तो भी गरीब मरता है, बीमारी ज्यादा फैल जाएं तो भी गरीब मरता है, सारे संकट अगर किसी को झेलने पड़ते हैं तो वह गरीब को झेलने पड़ते हैं, लेकिन दिल्ली‍ में या लखनऊ में बैठी हुई सरकार को गरीबी के खिलाफ लड़ने की इच्छा या तैयारी नहीं है। मित्रों, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, क्या समय की मांग नहीं है कि हम गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ें..?

भाईयों-बहनों, क्या कारण है कि गंगा-यमुना के प्रदेश हों, मां गंगा इस धरती को पुलकित करती हो, लेकिन आज भी मेरे किसान की जिन्दगी में सुख-चैन के दिन नहीं आएं हो, उसके लिए कौन जिम्मेवार है..? ये पूर्वी उत्तर प्रदेश का कोई गाँव ऐसा नहीं होगा जहाँ के लोग मेरे गुजरात में न रहते हों, मेरे गुजरात में रोजी-रोटी न कमाते हों..! कौन नौजवान बेटा अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़कर सैकड़ों किमी. दूर गुजरात जाना पसंद करेगा, जो अपना गाँव, अपने साथी, अपने खेत-खलिहान, अपने बूढे मां-बाप छोड़कर इतनी दूर चला जाए..! आखिर क्यूं..? अगर उसे यहाँ रोजी-रोटी मिलती, उसको मेहनत करने का अवसर मिलता, तो मैं नहीं मानता हूँ कि मेरे उत्तर प्रदेश के नौजवान को गुजरात जाने की नौबत आती..! मित्रों, उत्तर प्रदेश में परमात्मा ने इतना सारा दिया है, इतनी प्राकृतिक कृपा है, अगर सही अर्थ में दिशा पकड़कर यहाँ दस साल मेहनत कर ली जाएं तो ये उत्तर प्रदेश गुजरात से भी आगे निकल सकता है, ऐसा उत्तर प्रदेश बन सकता है..!

भाईयों-बहनों, आज बनारस में नेता जी ने हमें ललकारा है। मेरे लिए खुशी का विषय है कि इन दिनों मैं जहाँ-जहाँ जाता हूँ, बाप और बेटा, दोनों मेरा पीछा करते हैं। और आज उन्होने कहा कि मोदी जी हैसियत नहीं है कि यूपी को गुजरात बना सकें..! नेता जी, क्या आपको गुजरात बनाने का मायना मालूम है..? नेता जी, क्या आपको पता है कि गुजरात बनाने का मतलब क्या होता है..? गुजरात बनाने का मतलब होता है 24 घंटे बिजली, 365 दिन बिजली, हर गाँव-गली में बिजली..! नेता जी, आपकी बात सही है, आपकी हैसियत नहीं है, आप गुजरात नहीं बना सकते, इसके लिए तो 56 इंच का सीना लगता है, आप नहीं बना सकते..! नेता जी, गुजरात बनाने का मतलब होता है, लगातार दस साल तक 10% से भी ज्यादा कृषि विकास दर बनाना, 3-4% पर लुढ़क जाना आपकी हैसियत का नमूना है..! नेता जी, आप गुजरात नहीं बना सकते हैं, दस साल हो गए, गुजरात सुख-चैन की जिंदगी जी रहा है, शांति, एकता और सद्धभावना लेकर आगे बढ़ रहा है, विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है, आप नहीं कर सकते हो..! नेता जी, मुझे खुशी होगी, अगर आप उत्तर प्रदेश को गुजरात जैसा बना दें, तो मेरे गुजरात के लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए उत्तर प्रदेश आने लग जाएं, लेकिन आप नहीं बना सकते हैं..! आपकी सरकार को इतना समर्थन मिला है, क्या किया है आपने लोगों के लिए..? न लोगों को सुरक्षा दे पा रहे हैं, न नौजवानों को रोजगार दे पा रहे हैं, न बहन-बेटियों को सम्मान दे पा रहे हैं, और इतने बड़े उत्तर प्रदेश को आपने अपनी राजनीति के लिए बर्बाद करके रखा हुआ है, हमने इसे आबाद बनाने की शपथ ली है..!

भाईयों-बहनों, अगर हिंदुस्तान से गरीबी मिटानी है, तो अकेला उत्तर प्रदेश पूरे हिंदुस्तान की गरीबी मिटा सकता है, अगर देश में रोजगार देना है तो अकेला उत्तर प्रदेश ही रोजगार दे सकता है, पूरे हिंदुस्तान की शक्ल सूरत अकेला उत्तर प्रदेश बदल सकता है, ऐसी ताकत उत्तर प्रदेश की धरती में है..! मित्रों, सपा, बसपा, कांग्रेस यानि सबका - सबका मालिक एक, आप सभी को मालूम ही है कि कौन है सबका मालिक..! ये सबका मालिक एक वालों का उद्देश्य विकास नहीं है, ये वोट बैंक की राजनीति में डुबे हुए लोग हैं। आप सोचिए, यहाँ गन्ने की खेती करने वाला किसान असहाय जिन्दगी जीने के लिए मजबूर क्यों हुआ है..? यहाँ पानी है, नदियां हैं, लेकिन दूध बाहर से लाना पड़े, ऐसा उत्त‍र प्रदेश किसने बनाया है..? हमारे उत्तर प्रदेश में किसान हैं, पशु हैं, दूध देते हैं, चारा है, पानी है, फिर भी दूध बाहर से क्यों लाना पड़ रहा है..? क्या हमारे उत्तर प्रदेश में अमूल जैसी डेयरी नहीं बन सकती है..? क्या यहाँ के किसानों की आय बढ़ सकती है या नहीं..? लेकिन इन्हे करना ही नहीं है..! दोस्तों, मैं वादा करता हूँ कि अकेली श्वेत क्रांति से, पशुपालन और दूध के माध्यम से उत्तर प्रदेश के गाँवों के नौजवानों को रोजगार मिल सकता है, उत्त‍र प्रदेश के गाँवों के किसानों को ताकत मिल सकती है, उत्तर प्रदेश के गाँवों के किसान की आय बढ़ सकती है और श्वेत क्रांति के कारण देश के आमजनों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है, सपने देखने चाहिए..!

भाईयों-बहनों, ये कांग्रेस पार्टी इस बात को नहीं कर सकती है। हमारे देश में कृषि को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, हमारी कृषि को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, हमारे कृषि क्षेत्र को बल देने की आवश्यकता है। आज पूरे देश में फर्टिलाइजर पाने के लिए किसान को कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है, ब्लैक मार्केट से फर्टिलाइजर को लेना पड़ रहा है और इस कमाल की सरकार को देखिए, गोरखपुर के फर्टिलाइजर के कारखाने को ताला लगाकर बैठी है..! एक तरफ फर्टिलाइजर की जरूरत है, दूसरी तरफ नौजवानों को रोजगार की जरूरत है और इन कमाल के शासकों को देखिए, फर्टिलाइजर के कारखानों को ताला लगाकर बैठे हैं..! मित्रों, बातें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के आदी ये लोग समझते हैं कि वोट बैंक संभालो, सत्ता संभल जाएगी..! अब वो ज़माना चला गया, अब देश को विकास चाहिए, नौजवानों को रोजगार चाहिए, नई पीढ़ी को अपने भविष्य की सुरक्षा चाहिए, ऐसा माहौल बन चुका है और इसका नेतृत्व कोई सबका मालिक एक नहीं कर सकता है। अकेली भारतीय जनता पार्टी ऐसी है, जो विकास के रास्ते पर चल रही है और अब वही इस काम को कर सकती है..!

भाईयों-बहनों, अगर हमें कृषि क्षेत्र में विकास करना है, तो मैं यहाँ के किसानों को आग्रह करता हूँ कि आपका एक समूह गुजरात जाएं, गन्ने की खेती करने वाले किसान और वहाँ चीनी बनाने वाले कारखाने इनके बीच कितना बढि़या तालमेल है, समय पर चीनी मिलें चालू हो जाती हैं, समय पर गन्ना खरीद लिया जाता है, खरीदने के साथ भुगतान कर दिया जाता है और चीनी बाजार में आती है। मित्रों, विषय व्यवस्था का होता है, लेकिन जो राज्य स्कूल-कॉलेज के एक्जाम ही समय पर नहीं ले पाते हैं, वो चीनी के कारखाने समय पर कैसे चला सकते हैं..! हमारे देश में बहुत सारे इलाके ऐसे हैं जहाँ स्कूल-कॉलेज के एक्जाम भी समय पर नहीं होते हैं, इसके कारण करोड़ों-करोड़ों नौजवानों के अमूल्य एक-एक साल पिछड़ जाता है। हम मानव संसाधन का कितना बड़ा विनाश करते हैं..! क्या हमारी यूनीवर्सिटी, हमारे कॉलेज समय पर टाइम टेबल के तहत स्कूल-कॉलेज चलाकर बच्चों को एक्जाम दिलाकर हिंदुस्तान को और इलाकों की बराबरी में नहीं ला सकते..? वास्तव में इनको करना नहीं है..! इसलिए अगर गाँव है तो रोजगार के लिए कृषि को बल देना होगा, और कृषि को आगे बढ़ाना है तो कृषि को तीन हिस्सों में बांटने की जरूरत है, समय की मांग है कि कृषि के क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटा जाए - एक तिहाई, हम जो परम्परागत कृषि करते हैं इसको करें, एक तिहाई, हम पशुपालन करें और एक तिहाई हमारे खेत के आखिरी छोर पर, बॉर्डर पर वृक्षों की खेती करें, पेड़ लगाएं..! आज देश को टिम्बर इम्पोर्ट करना पड़ता है। अगर हमारा किसान अपने खेत के बॉर्डर पर इस प्रकार से पेड़ लगा देता है, घर में बेटी का जन्म हो उसके साथ में पांच पेड़ लगा दे, तो जब बेटी की शादी करने की उम्र हो जाएं तो उन पांच पेड़ को काटकर बेटी की शादी कराने का खर्चा निकल सकता है, हमारे किसान को कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। लेकिन इसके लिए सही सोच चाहिए, सही दिशा चाहिए, सही नेतृत्व चाहिए, तब जाकर समाज को विकास की ओर ले जा सकते हैं..!

भाईयों-बहनों, ये लोग तो पूरा समय इसी बात में लगाते रहते हैं कि गन्ने का दाम कितना मिलें, कितना न मिलें, चीनी की मिल चालू हो या न चालू हो, इसी में समय की बर्बादी हो रही है..! मित्रों, हम सुशासन के बिना स्थि‍तियों को बदल नहीं सकते। मैं अनुभव के आधार पर कहता हूँ कि ये देश गरीब नहीं है, अमीर देश के लोगों को गरीब बनाया गया है, राजनीतिक हेतू पार करने के लिए बनाया गया है। देश अमीर है और लोग भी अमीर बन सकते हैं, और हमें गरीबी से मुक्ति का अभियान चलाने के लिए 2014 का चुनाव लड़ना है..!

भाईयों-बहनों, सामान्य मानवी को सुरक्षा मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए..? क्या कारण है कि गाँव के लोगों को बंदुक का लाइसेंस लेने के लिए कतार में खड़ा रहना पड़े, कहीं भी बाहर जाएं तो बंदुकधारियों को साथ में रखना पड़े, इसका क्या कारण हो सकता है..? मित्रों, मैं गुजरात का अनुभव बताता हूँ, उत्तर प्रदेश से गुजरात में रोजी-रोटी कमाने हुए आये नौजवान, जब घर से निकलते हैं तो मां को बहुत चिंता रहती है। आजकल मोबाइल फोन होने के कारण बेटे के ट्रेन में बैठने के बाद मां हर घंटे उसको फोन करती है कि बेटा कहाँ पहुंचे, कोई तकलीफ तो नहीं है, ट्रेन में संभालकर बैठना, सामान संभालकर रखना, बाहर की कोई चीज मत खाना, मैंने घर से जो बनाकर दिया है वही खाना, मां हर घंटे मोबाइल फोन से बेटे का हाल लेती रहती है... बेटा कहता है, मां तुम सो जाओ, अब तो गाड़ी चल दी है, मैं गुजरात जा रहा हूँ, चिंता मत करो... लेकिन मां सोती नहीं है, मां लगातार हर घंटे बेटे का हाल पूछती रहती है... फिर पूछती है, बेटा गुजरात आया कि नहीं, अब कितना दूर है, तुम गुजरात पहुंचे कि नहीं पहुंचे, बेटा कहता है मां तुम सो जाओ, रात देर हो चुकी है, ट्रेन तो पहुंचेगी... मां मानने को तैयार नहीं, लेकिन जैसे ही बेटा बताता है कि मां, अब ट्रेन गुजरात में प्रवेश कर चुकी है, तब मां कहती है बस बेटा, अब मैं सो जाती हूँ। गुजरात के अंदर तुम्हारी ट्रेन पहुंच गई, मतलब अब तुम सलामत हो..! मित्रों, ये हाल पूरे हिंदुस्तान का बन सकता है या नहीं..? इसलिए मैं आप सभी के पास आया हूँ, हम हिंदुस्तान को रोता हुआ देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान को खून से लथपथ देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान को बेरोजगार देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान के नौजवान को याचक के रूप में देखना नहीं चाहते हैं..!

भाईयों-बहनों, आज गोरखपुर की पवित्र धरती से मैं देशवासियों ये कुछ मांगना चाहता हूँ, क्या आप सभी देंगे..? दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बताइए, देंगे..? मैं देशवासियों से कहता हूँ, गोरखपुर की धरती से कह रहा हूँ, मेरे उत्तर प्रदेश के सभी भाईयों-बहनों को कह रहा हूँ, आपने 60 साल तक शासक चुने हैं, आपने 60 साल तक शासकों को देश और राज्य चलाने का काम दिया है, मैं आपसे सिर्फ 60 महीने मांगने के लिए आया हूँ..! आपने 60 साल दिए हैं, मुझे 60 महीने दीजिए, आपने शासकों को चुना है, एक बार सेवक को चुनकर के देखिए..! भाईयों-बहनों, हम आपकी जिंदगी में बदलाव लाकर रहेंगे, हम चैन से नहीं बैठेंगे, आपके सपनों को पूरा करने के लिए हम हमारा जीवन खपा देने वाले लोग हैं..! मित्रों, आपके चेहरे पर मुस्कान हो, आप सपने देख पाएं, आप अपने अरमानों को पूरा कर पाएं, ऐसा हिंदुस्तान आपको देने का मैं आज वादा करने आया हूँ..!

ज नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है, नेता जी सुभाष बोस ने कहा था - चलो दिल्ली..! सुभाष बाबू ने कहा था - तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा..! भाईयों-बहनों, मैं आपको कह रहा हूँ कि आप मुझे 60 महीने दीजिए, मैं आपको सुख चैन की जिदंगी दूंगा, ये वादा मैं आपसे करने आया हूँ..! मित्रों, हम विकास का मंत्र लेकर चले हैं, 60 साल तक वोट बैंक की राजनीति को बहुत कुछ मिला है, 60 महीने के लिए विकास की राजनीति को आशीर्वाद दे दीजिए, आप देखिएगा, नौजवान के सपने पूरे होगें..! क्या यहाँ बैठे हुए मां-बाप में कोई भी चाहता है कि जिन मुसीबतों में उसने अपनी जिंदगी गुजारी, उसकी संतान भी उन्ही मुसीबतों से जिंदगी गुजारे..? क्या कोई भी मां-बाप चाहेगा..? आपके मां-बाप को जैसी जिदंगी गुजारनी पड़ी, क्या आज के नौजवान वैसी जिदंगी गुजारना चाहते हैं..? क्या आप सभी को प्रगति चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को विकास चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को गाँव में बिजली चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को बच्चों के लिए शिक्षा चाहिए या नहीं..? क्या आपको गाँवों में रोड़ चाहिए या नहीं..? आपके खेतों को पानी चाहिए या नहीं..? यही तो काम सरकार का होता है..! इसलिए हम इस देश को न इस हाल में देखना चाहते हैं, न ऐसा रहने देना चाहते हैं, हम दुनिया की बराबरी करने वाला हिंदुस्‍तान बनाना चाहते हैं और इसके लिए मुझे आपका साथ चाहिए..!

भाईयों-बहनों, 2014 में जब चुनाव आएगा तब तो आप जीत देगें ही देगें, लेकिन आज मैं नतमस्तक होकर कहता हूँ कि आपने मुझे जीत लिया है, आपने मुझे अपना बना लिया है, आपके इस प्यार को मैं ब्याज समेत विकास करके लौटाऊंगा, ये मैं वादा करता हूँ..

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए -

भारत माता की जय..! भारत माता की जय..!

वंदे मातरम्..!  वंदे मातरम्..!  वंदे मातरम्..!

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August 23, 2026
ନୀତିଗତ ସ୍ଥିରତା, ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ସୁଯୋଗ ଏବଂ ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଭାରତର ବୃଦ୍ଧି ପାଉଥିବା ଶକ୍ତି ଉପରେ ଆଲୋକପାତ କରିଛନ୍ତି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଆମେ ଏପରି ଏକ ଆଭା ସୃଷ୍ଟି କରିବା ଉଚିତ ଯାହା ସାରା ବିଶ୍ୱର ଲୋକମାନେ ସେମାନଙ୍କ ଭବିଷ୍ୟତ ଗଠନ ପାଇଁ ଭାରତ ଆଡକୁ ଚାହିଁବ : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ମୂଲ୍ୟ ଦୃଷ୍ଟିରୁ ଆମେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରତିଦ୍ୱନ୍ଦ୍ୱିତାମୂଳକ ହୋଇଥିବାରୁ ଆମେ ନିଜକୁ ବହୁତ ଶୀଘ୍ର ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ କରିପାରିବା; ଆମର ପ୍ରତିଭା ଏବଂ ଆମ ଲୋକମାନଙ୍କର ରିସ୍କ ନେବାର କ୍ଷମତା ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଉଚ୍ଚ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ : ଆପଣ ଏକ ନୂଆ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସାହସ ଦେଖାଇଛନ୍ତି। ସବୁଠାରୁ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କଥା ହେଉଛି ଆପଣ ସରକାରଙ୍କ କଥା ଉପରେ ବିଶ୍ୱାସ ରଖିଛନ୍ତି। ମୋର ସର୍ବଦା ଏହି ମତ ରହିଆସିଛି ଯେ, ଆମେ ଯେଉଁ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଉ, ଆମକୁ ସେଥିରେ କାଏମ ରହିବାକୁ ପଡ଼ିବ; ଆମକୁ ବାରମ୍ବାର ନିଷ୍ପତ୍ତି ବଦଳାଇବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଯାହାଦ୍ୱାରା ଯିଏ ବି କୌଣସି ରିସ୍କ ନେବାକୁ ଚାହୁଁଥିବ, ତା’ର ଏହି ବିଶ୍ୱାସ ରହିବ ଯେ, "ଠିକ୍ ଅଛି, ଯଦି କିଛି ଭୁଲ୍ ହୁଏ ତେବେ ତାହା ମୋର ନିଜ ଭୁଲ୍ ଯୋଗୁଁ ହେବ, କିନ୍ତୁ କେହି ମୋତେ ମଝି ରାସ୍ତାରେ ଛାଡ଼ିଦେବେ ନାହିଁ।" ଏବଂ ସେହି ବିଶ୍ୱାସ ସୃଷ୍ଟି କରିବା ଆମର ପ୍ରୟାସ ଥିଲା।

ସିଇଓ: ଆମେ ହେଉଛୁ ଭାରତର ପ୍ରଥମ ସ୍ପେସ୍ ଟେକ୍ ୟୁନିକର୍ଣ୍ଣ । ଜୁଲାଇ ୧୮ ରେ ଆମେ ସଫଳତାର ସହ ଭାରତର ପ୍ରଥମ ବେସରକାରୀ ରକେଟ୍ ଉତକ୍ଷେପଣ କରି ସାଟେଲାଇଟ୍ ପ୍ରେରଣ କରିଥିଲୁ। କିନ୍ତୁ ଏହା କେବଳ ଆରମ୍ଭ। ଏହା ସ୍କାଏରୁଟ୍ ପାଇଁ କେବଳ ଏକ ୱାର୍ମ-ଅପ୍ ଥିଲା, ଏହା କେବଳ ଶୁଭାରମ୍ଭ। ଆସନ୍ତା ବର୍ଷ ମଧ୍ୟଭାଗ ସୁଦ୍ଧା ଆମେ ମାସକୁ ଗୋଟିଏ ଲେଖାଏଁ ଲଞ୍ଚ୍ (ଉତକ୍ଷେପଣ) କରିବୁ। ଏହି କ୍ଷେତ୍ରକୁ ଖୋଲିଦେଇଥିବାରୁ ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ ସାର୍। ତିନୋଟି କାରଖାନା ନିର୍ମାଣ ହୋଇସାରିଛି। ମାସକୁ ଗୋଟିଏ ରକେଟ୍ ତିଆରି କରିବାର କ୍ଷମତା ଆମର ଅଛି। ଏବଂ ଏହା କେବଳ ଆରମ୍ଭ। ସପ୍ତାହକୁ ଗୋଟିଏ, ଏପରିକି ଦିନକୁ ଏକାଧିକ ଉତ୍‌କ୍ଷେପଣ କରିବା ଆମର ଭବିଷ୍ୟତର ସ୍ୱପ୍ନ।

ସିଇଓ : ଆମେ ଏପରି ଏକ ଇଞ୍ଜିନ୍ ତିଆରି କରିଛୁ ଯାହା ବିଶ୍ୱର ଆଧୁନିକତମ ଇଞ୍ଜିନ୍‌ଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରୁ ଅନ୍ୟତମ। ସାର୍, ଆମେ ଏହାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିସାରିଛୁ ଏବଂ ଏହାର ପରୀକ୍ଷଣ ଚାଲିଛି।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ : ନିବେଶକମାନଙ୍କର ବିଶ୍ୱାସ ଅଛି ତ?

ସିଇଓ: ସାର୍, ସ୍କାଏରୁଟ୍‌ର ପ୍ରଥମ ଲଞ୍ଚ୍ ପରେ ସେମାନଙ୍କର ବିଶ୍ୱାସ ବହୁତ ବଢ଼ିଯାଇଛି।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ : ଭଲ, ସେହି ରାସ୍ତା ଆପଣଙ୍କୁ ସାହାଯ୍ୟ କରୁଛି?

ସିଇଓ : ଏହା ବହୁତ ସାହାଯ୍ୟ କରୁଛି।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ – ଏବେ ସାରା ବିଶ୍ୱ ଭାରତର ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ଗୁଡ଼ିକୁ ଖୋଜୁଥିବ ଏବଂ ଭାବୁଥିବ ଯେ ଏହା ପଛରେ କିଏ ଅଛନ୍ତି। କାରଣ ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ବଡ଼ ସଫଳତା ମିଳେ, ସାଙ୍ଗେ ସାଙ୍ଗେ ଲୋକଙ୍କ ଧ୍ୟାନ ସେଆଡ଼କୁ ଯାଏ।

ସିଇଓ : ମୋର ମନେହୁଏ, ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ର ଖୋଲିବା ପରେ ଆମେ ଏକ ବହୁତ ଭଲ ଟ୍ରେଣ୍ଡ୍ ଦେଖିବାକୁ ପାଇଛୁ। ଆମର ଯେଉଁ ନାଗରିକମାନେ ଆମେରିକା ଏବଂ ୟୁରୋପରେ ଅଛନ୍ତି, ସେମାନେ ଫେରିଆସି ଆମ ସହିତ କାମ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛନ୍ତି।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ: ଆମକୁ ଅନେକ ଲୋକଙ୍କୁ ଯୋଡ଼ିବାକୁ ହେବ, ଏବଂ ମେହେଟ୍ଟା ଯେପରି କହିଲେ, ଏବେ ଯେଉଁ ଲୋକମାନେ ବିଦେଶକୁ ଚାଲିଯାଇଥିଲେ ସେମାନେ ଫେରୁଛନ୍ତି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଆମକୁ ଏପରି ଏକ ପରିବେଶ ଓ ବାତାବରଣ ସୃଷ୍ଟି କରିବାକୁ ହେବ ଯେପରି ସାରା ବିଶ୍ୱର ଲୋକମାନେ ଅନୁଭବ କରିବେ ଯେ ଯଦି ସେମାନେ ନିଜ ଜୀବନରେ କିଛି କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛନ୍ତି ତେବେ ସେମାନଙ୍କୁ ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନ ଆସିବାକୁ ପଡ଼ିବ, କୌଣସି ଭାରତୀୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ରେ ଯୋଗ ଦେବାକୁ ହେବ, କୌଣସି ଭାରତୀୟ ସ୍ପେସ୍ ଏଜେନ୍ସିରେ ଯୋଗ ଦେବାକୁ ହେବ। ମୋର ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ଯୋଗୁଁ ଆମେ ଏକ ଚୁମ୍ବକ ଭଳି ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ପ୍ରତିଭାବାନ୍ ବ୍ୟକ୍ତିମାନଙ୍କୁ ଆକର୍ଷିତ କରିପାରିବା, ଏବଂ ତାହା ଆମ ପାଇଁ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ପାଲଟିପାରିବ।

ସିଇଓ : ଆମର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେଉଛି ଯେ ଆସନ୍ତା ୧୮ ମାସ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ ଏକ ଅନ୍ତର୍ଜାତୀୟ ଗ୍ରାଉଣ୍ଡ ଷ୍ଟେସନ୍ ନେଟୱାର୍କ ସ୍ଥାପନ କରିବା।

ସିଇଓ : ସାଟେଲାଇଟ୍‌ଗୁଡ଼ିକ ମହାକାଶରେ ୫ ବର୍ଷ କିମ୍ବା ୧୫ ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଗୋଟିଏ ସ୍ଥାନରୁ ଅନ୍ୟ ସ୍ଥାନକୁ ଯିବା ଆସିବା ପାଇଁ ଯେଉଁ ଇଞ୍ଜିନ୍ ବ୍ୟବହାର କରନ୍ତି, ଆମେ ତାହା ତିଆରି କରୁ। ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ ଆମକୁ ବହୁତ ଭଲ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ଓ ସଫଳତା ମିଳିଛି, ଏବଂ ସାର୍, ଏଥିରେ ଆପଣଙ୍କର ପ୍ରଚେଷ୍ଟା ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ରହିଛି, କାରଣ ଏବେ ଭାରତୀୟ କମ୍ପାନୀଗୁଡ଼ିକୁ ରପ୍ତାନି କରିବା ପାଇଁ ସରକାରୀ ସାହାଯ୍ୟ ମିଳୁଛି।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ: ଖର୍ଚ୍ଚ ମାମଲାରେ ଆମେ ବହୁତ ପ୍ରତିଯୋଗିତାମୂଳକ, ପ୍ରତିଭା କ୍ଷେତ୍ରରେ ତ କୌଣସି ପ୍ରଶ୍ନ ହିଁ ଉଠୁନାହିଁ, ଏବଂ ଆମ ଲୋକଙ୍କର ରିସ୍କ ନେବାର କ୍ଷମତା ସଦାବେଳେ ଅଧିକ। ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆମେ ବହୁତ ଶୀଘ୍ର ଆମର ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ସ୍ଥାନ ତିଆରି କରିପାରିବା।

ସିଇଓ : ଏହି ରୋବୋଟିକ୍ ସ୍ପେସକ୍ରାଫ୍ଟ ମହାକାଶକୁ ଯିବ, ଅକାମୀ ହୋଇପଡ଼ିଥିବା ସାଟେଲାଇଟକୁ ସିଧାସଳଖ ଧରିବ ଏବଂ ତାହାକୁ କକ୍ଷପଥରୁ ହଟାଇଦେବ।

ସିଇଓ : ଆମେ ପ୍ରଥମ ଭାରତୀୟ କମ୍ପାନୀ ଯିଏ ଡକିଂ ଏବଂ ରିଫୁଏଲିଂ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଉପରେ କାମ କରୁଛୁ, ମହାକାଶରେ ଏକ ଇନ୍ଧନ ଷ୍ଟେସନ୍ ସ୍ଥାପନ କରିବା ଆମର ଲକ୍ଷ୍ୟ।

ସିଇଓ : ମୋ ନାଁ ଅନ୍ତରୀକ୍ଷ, ମୋର ସହ-ସଂସ୍ଥାପକ ମୋନିକା ମଧ୍ୟ ଏଠାରେ ଅଛନ୍ତି। ସାର୍, ଆମେ ଭାରତର ପ୍ରଥମ ସ୍ପେସ୍ ଫାର୍ମା ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍। ଆମେ ଏପରି ସାଟେଲାଇଟ୍ ତିଆରି କରୁଛୁ ଯାହା ମହାକାଶକୁ ଯାଇପାରିବ, ସେଠାରେ ଔଷଧ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିପାରିବ ଏବଂ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ମହାକାଶରୁ ଫେରାଇ ଆଣିପାରିବ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ : ଆପଣଙ୍କ ନାମ ଅନ୍ତରୀକ୍ଷ, ଆପଣଙ୍କ ପରିବାର ଆଗରୁ ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ ଥିଲେ କି?

ସିଇଓ : ନା ସାର୍, ମୋ ମାଆ ମୋତେ ଏହି ନାମ ଦେଇଥିଲେ।

ସିଇଓ : ଗୋଟିଏ ଲଞ୍ଚ୍ ପରେ, ବିଗତ ଗୋଟିଏ ମାସ ମଧ୍ୟରେ ଆମକୁ ଆଠଟି ଉତ୍‌କ୍ଷେପଣ ଲାଗି କଣ୍ଟ୍ରାକ୍ଟ ମିଳିସାରିଛି।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ : ବହୁତ ବଢ଼ିଆ, ବହୁତ ବଢ଼ିଆ।

ସିଇଓ : ଏବଂ ସେଥିମଧ୍ୟରୁ ଅଧିକାଂଶ ଅନ୍ତର୍ଜାତୀୟ ଅଟନ୍ତି।

ସିଇଓ : ସାର୍, ବର୍ତ୍ତମାନ ଆମେ ୧ ନିୟୁତ କୃଷକଙ୍କ ସହ ଏହି ନବସୃଜନର ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିବାକୁ ଯୋଜନା କରିଛୁ।

ସିଇଓ : ସାର୍, ଏହା ଆପଣଙ୍କ ପାଇଁ, ଯେପରି ଏକ ସ୍ମୃତି ହୋଇ ରହିବ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ: ଚମତ୍କାର।

ସିଇଓ : ଆପଣ ଘରୋଇ କ୍ଷେତ୍ର ପାଇଁ ଯେଉଁ ଦ୍ୱାର ଖୋଲିଦେଲେ, ତାହା ମାଧ୍ୟମରେ ଏବେ ବେସରକାରୀ ସାଟେଲାଇଟ୍‌ଗୁଡ଼ିକ ଭାରତର ସୌନ୍ଦର୍ଯ୍ୟକୁ ଦେଖାଉଛନ୍ତି।