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मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी, यहाँ के जनप्रिय सांसद जुझारू नेता आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और हमारे पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री कल्याण सिंह जी, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान लक्ष्मीकांत जी, श्रीमान रमापति जी, श्री सूर्यप्रताप जी, श्रीमान कलराज जी, श्रीमान लालजी टंडन जी, श्रीमान ओमप्रकाश सिंह जी, भाई विनय कटियार जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ नेतागण और गोरखपुर की इस पवित्र धरती पर पधारे हुए लाखों-लाखों भाईयों और बहनों..!

सा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के हर क्षेत्र ने एक-दूसरे से आगे निकलने की स्पर्धा ठान ली है, उत्तर प्रदेश की जितनी भी रैलियां हुई हैं, हर रैली पिछली रैली का रिकॉर्ड तोड़ देती है..! मैं जब यहाँ हेलीकॉप्टर से आ रहा था तो दृश्य देख रहा था, चारों तरफ लोग ही लोग नज़र आ रहे थे, मानों जैसे जनसमंदर हो..! भाईयों-बहनों, इस ठंड के समय में गोरखपुर और अगल-बगल के इलाके से आए लोग और इतनी बड़ी रैली, बदलती हवा का रूख दिखाती है कि हवा किस तरफ चल रही है..! आज आपकी आवाज बनारस की गलियों में भी गूंज रही है..! मित्रों, हमने बहुत चुनाव देखे हैं, लेकिन ये ऐसा चुनाव है जिसका फैसला देश के कोटि-कोटि जनों ने कर लिया है, कांग्रेस और उसके साथी दलों की विदाई देश ने तय कर ली है और कांग्रेस मुक्त भारत का सपना इस बार साकार होकर रहेगा, ये नजारा साफ कह रहा है..!

भाईयों-बहनों, मुझे उत्तर प्रदेश के नौजवानों का विशेष अभिनदंन करना है। 15 दिसम्बर को सरदार बल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि थी और उस पूरे देश में सरदार बल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि‍ देने के लिए देश भर में एकता दौड़ का आयोजन किया गया था। मित्रों, मुझे खुशी है कि उत्तर प्रदेश के हर कोने से, इतनी ठंड में भी लाखों नौजवान एकता दौड़ के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल को याद करके दौड़े और ये विश्व रिकॉर्ड बन गया, कि एक दिन में एक ही समय में हिंदुस्तान में 1100 से अधिक स्थानों पर 50 लाख लोग दौड़े..! हमारे ओमप्रकाश जी मुझे बता रहे थे कि अभी जो लोहा संग्रह का कार्यक्रम चल रहा है, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा भारत के लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की बनने वाली है, अमेरिका में जो स्टेच्यु ऑफ लिबर्टी है, उससे दो गुना बड़ी यह स्टेच्यु ऑफ यूनिटी की प्रतिमा बनने वाली है, इसके लिए भारत के हर गाँव से किसानों के काम में आने वाले औजार को इक्ट्ठा किया जा रहा है, और उस लोहे के औजार के टुकड़ों से सरदार बल्लभ भाई साहब की प्रतिमा बनने वाली है। एकता के लिए यह एक अभिनव प्रयास है और इस प्रयास में उत्तर प्रदेश ने जो सहयोग दिया है, जो उत्साह और उमंग दिखाया है, इसके लिए मैं उत्तर प्रदेश के हर गाँव का, हर नौजवान का, हर किसान का हृदय से अभिनंदन करता हूँ..!

भाईयों-बहनों, मैं जहाँ भी नजर दौड़ाता हूँ, लोग ही लोग है, चारों तरफ जनमेदनी है, जनता जर्नादन के दर्शन ईश्वर के दर्शन होते हैं, ये सौभाग्य हमें मिला है..! मित्रों, ये गोरखपुर की धरती ऐसी है, जहाँ हमारी महान सांस्कृतिक विरासत, हमारे ऋषियों-मुनियों का चिंतन, हमारे ज्ञानियों की सांस्कृतिक रचनाएं, इन सबको अक्षरदेह देने का काम गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा किया गया, जो कि एक बहुत बड़ी सेवा है, यह एक प्रकार से ज्ञान की उपासना का काम हुआ है, और वही समाज आगे बढ़ता है जो हर युग में हर समय ज्ञान उपासना की अपनी साधना निरंतर बनाए रखता है और इस काम में गोरखपुर की धरती का बहुत बड़ा योगदान है, इस धरती को मैं नमन करता हूँ..!

भाईयों-बहनों, 2014 का चुनाव कैसा होगा, उसका एक ट्रेलर अभी-अभी हुआ है..! हमारे देश के पांच राज्यों में चुनाव हुआ, और चार राज्यों में सबसे अधिक भारतीय जनता पार्टी को समर्थन मिला। लेकिन उसमें भी मैं एक बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। कुछ लोग, कुछ ठेकेदार मानते हैं कि दलित हो, पीडि़त हो, शोषित हो, आदिवासी हो, ये सब उनकी जेब में हैं। सालों से ये लोग दलित, पीडि़त, शोषित, आदिवासी को इंसान मानने को तैयार नहीं थे, वे उसे वोट बैंक मानते थे और ये ठेकेदारों का मत था कि भारतीय जनता पार्टी आसमान से नीचे गिरे, लेकिन दलितों में और आदिवासियों में अपनी जगह नहीं बना सकती है, ये इनके दावे थे..! मित्रों, आज मैं गोरखपुर की इस पवित्र धरती से कहना चाहता हूँ, अभी-अभी जिन चार राज्यों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है, वहाँ का नज़ारा क्या है..? राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 सीटें हैं, उसमें से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 में से 32 सीटों पर वहाँ की जनता जर्नादन ने कमल के निशान पर मोहर लगाकर भारतीय जनता पार्टी को विजयी बनाया है..! मित्रों, छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति की 10 सीटें हैं, जिसमें से कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली है..! मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की 35 सीटें हैं, जिसमें से 28 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई हैं..! मैं मेरे उत्तर प्रदेश के दलित, पीडि़त, शोषित, समाज में पीछे रह जाने वाले भाईयों-बहनों को आज विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी को सेवा करने का अवसर मिला है, हमारी प्राथमिकता रही है कि गरीबों का कल्याण हो, लोग गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए ताकतवर बनें, समाज के पीडित और शोषित लोग गरीबी से मुक्ति की एहसास करें और इसी का परिणाम है कि आज दलित, पीडि़त, शोषित, आदिवासी समाज का भारतीय जनता पार्टी के प्रति एक विश्वास पैदा हुआ है..!

भाईयों-बहनों, कांग्रेस पार्टी गरीबों की बातें हर बार करती आई है। चुनाव आते ही कांग्रेस को गरीब याद आते हैं, वो गरीबी की माला जपना शुरू कर देते हैं। मैं कभी-कभी सोचता था कि देश को आजादी पाए 60 साल से अधिक समय हो गया, लगातार कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर मिला, वे गरीबों और गरीबी की बातें करते रहे, लेकिन गरीबों की जिन्दगी में बदलाव क्यों नहीं आया..? 60 सालों में बदलाव न आए, ऐसा तो हमारा देश नहीं है, आखिर इसका कारण क्या है..? भाईयों-बहनों, इसका जवाब मुझे मिल नहीं रहा था, मैं बहुत कोशिश करता था कि कांग्रेस की वो कौन सी मानसिकता है, कांग्रेस की वो कौन सी रणनीति है, कांग्रेस की वो कौन सी सोच है, जिसके कारण गरीबों के इतने वोट मिलने के बाद भी उनके हर छोटे-मोटे नेता के गरीबों पर बात करने के बावजूद भी देश में लगातार गरीबी बढ़ती क्यों चली जा रही है..? इस सवाल का जबाव मुझे अभी-अभी मिल गया है, इसका मूल कारण है कि गरीबों को गरीब रखने में ही कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक भविष्य छुपा हुआ है..! वे किसी भी हालत में गरीबों को गरीबी से लड़ने की ताकत देना नहीं चाहते हैं, वे किसी भी हालत में गरीबी से मुक्ति का प्रयास नहीं चाहते हैं और उनके भीतर एक ऐसी मानसिकता पड़ी है, जो गरीबों के प्रति उपेक्षा के भाव से भरी हुई है। अगर उनकी ये सोच न होती, उनके सोचने का ये तरीका न होता तो एक चाय वाला, एक गरीब मां का बेटा, सर ऊंचा करे वो कांग्रेस का एक भी नेता सहने को तैयार नहीं है, ये उनकी मानसिकता का दर्शन कराता है..! वे हमारी राजनीतिक विचारों का विरोध करते, हमारे काम का विरोध करते, लेकिन कांग्रेस के नेता हमारी गरीबी का मखौल उड़ा रहे हैं, ये इस बात का सबूत है कि कांग्रेस पार्टी का गरीबों की तरफ देखने का नजरिया क्या है..!

भाईयों-बहनों, मुझे एक बात का जबाव दीजिए, क्या आप गरीबों का अपमान सहेगें..? क्या आप गरीबों का अपमान करने का प्रयास सहेगें..? गरीब विरोधी कांग्रेस की मानसिकता सहेगें..? गरीबों को वोट बैंक बनाने वाली कांग्रेस को सहेगें..? अरे, ये सिर्फ चाय वाले का विषय नहीं है, वो क्या कहते हैं..? वो कहते हैं कि 12 रूपये में खाना मिल जाता है, दूसरा नेता कहता है कि 5 रूपये में खाना मिल जाता है..! आप लोग ही बताइए, क्या 12 रूपए में खाना मिल सकता है..? क्या 5 रूपये में खाना मिल सकता है..? ये गरीब का मजाक नहीं है तो क्या है..! भाईयों-बहनों, गरीबी क्या होती है, गरीब कैसे जिंदगी गुजारा करता है, ठंड ज्यादा पड़ जाएं तो भी गरीब मरता है, धूप ज्यादा निकलें, गर्मी ज्यादा हो जाएं तो भी गरीब मरता है, बीमारी ज्यादा फैल जाएं तो भी गरीब मरता है, सारे संकट अगर किसी को झेलने पड़ते हैं तो वह गरीब को झेलने पड़ते हैं, लेकिन दिल्ली‍ में या लखनऊ में बैठी हुई सरकार को गरीबी के खिलाफ लड़ने की इच्छा या तैयारी नहीं है। मित्रों, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, क्या समय की मांग नहीं है कि हम गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ें..?

भाईयों-बहनों, क्या कारण है कि गंगा-यमुना के प्रदेश हों, मां गंगा इस धरती को पुलकित करती हो, लेकिन आज भी मेरे किसान की जिन्दगी में सुख-चैन के दिन नहीं आएं हो, उसके लिए कौन जिम्मेवार है..? ये पूर्वी उत्तर प्रदेश का कोई गाँव ऐसा नहीं होगा जहाँ के लोग मेरे गुजरात में न रहते हों, मेरे गुजरात में रोजी-रोटी न कमाते हों..! कौन नौजवान बेटा अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़कर सैकड़ों किमी. दूर गुजरात जाना पसंद करेगा, जो अपना गाँव, अपने साथी, अपने खेत-खलिहान, अपने बूढे मां-बाप छोड़कर इतनी दूर चला जाए..! आखिर क्यूं..? अगर उसे यहाँ रोजी-रोटी मिलती, उसको मेहनत करने का अवसर मिलता, तो मैं नहीं मानता हूँ कि मेरे उत्तर प्रदेश के नौजवान को गुजरात जाने की नौबत आती..! मित्रों, उत्तर प्रदेश में परमात्मा ने इतना सारा दिया है, इतनी प्राकृतिक कृपा है, अगर सही अर्थ में दिशा पकड़कर यहाँ दस साल मेहनत कर ली जाएं तो ये उत्तर प्रदेश गुजरात से भी आगे निकल सकता है, ऐसा उत्तर प्रदेश बन सकता है..!

भाईयों-बहनों, आज बनारस में नेता जी ने हमें ललकारा है। मेरे लिए खुशी का विषय है कि इन दिनों मैं जहाँ-जहाँ जाता हूँ, बाप और बेटा, दोनों मेरा पीछा करते हैं। और आज उन्होने कहा कि मोदी जी हैसियत नहीं है कि यूपी को गुजरात बना सकें..! नेता जी, क्या आपको गुजरात बनाने का मायना मालूम है..? नेता जी, क्या आपको पता है कि गुजरात बनाने का मतलब क्या होता है..? गुजरात बनाने का मतलब होता है 24 घंटे बिजली, 365 दिन बिजली, हर गाँव-गली में बिजली..! नेता जी, आपकी बात सही है, आपकी हैसियत नहीं है, आप गुजरात नहीं बना सकते, इसके लिए तो 56 इंच का सीना लगता है, आप नहीं बना सकते..! नेता जी, गुजरात बनाने का मतलब होता है, लगातार दस साल तक 10% से भी ज्यादा कृषि विकास दर बनाना, 3-4% पर लुढ़क जाना आपकी हैसियत का नमूना है..! नेता जी, आप गुजरात नहीं बना सकते हैं, दस साल हो गए, गुजरात सुख-चैन की जिंदगी जी रहा है, शांति, एकता और सद्धभावना लेकर आगे बढ़ रहा है, विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है, आप नहीं कर सकते हो..! नेता जी, मुझे खुशी होगी, अगर आप उत्तर प्रदेश को गुजरात जैसा बना दें, तो मेरे गुजरात के लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए उत्तर प्रदेश आने लग जाएं, लेकिन आप नहीं बना सकते हैं..! आपकी सरकार को इतना समर्थन मिला है, क्या किया है आपने लोगों के लिए..? न लोगों को सुरक्षा दे पा रहे हैं, न नौजवानों को रोजगार दे पा रहे हैं, न बहन-बेटियों को सम्मान दे पा रहे हैं, और इतने बड़े उत्तर प्रदेश को आपने अपनी राजनीति के लिए बर्बाद करके रखा हुआ है, हमने इसे आबाद बनाने की शपथ ली है..!

भाईयों-बहनों, अगर हिंदुस्तान से गरीबी मिटानी है, तो अकेला उत्तर प्रदेश पूरे हिंदुस्तान की गरीबी मिटा सकता है, अगर देश में रोजगार देना है तो अकेला उत्तर प्रदेश ही रोजगार दे सकता है, पूरे हिंदुस्तान की शक्ल सूरत अकेला उत्तर प्रदेश बदल सकता है, ऐसी ताकत उत्तर प्रदेश की धरती में है..! मित्रों, सपा, बसपा, कांग्रेस यानि सबका - सबका मालिक एक, आप सभी को मालूम ही है कि कौन है सबका मालिक..! ये सबका मालिक एक वालों का उद्देश्य विकास नहीं है, ये वोट बैंक की राजनीति में डुबे हुए लोग हैं। आप सोचिए, यहाँ गन्ने की खेती करने वाला किसान असहाय जिन्दगी जीने के लिए मजबूर क्यों हुआ है..? यहाँ पानी है, नदियां हैं, लेकिन दूध बाहर से लाना पड़े, ऐसा उत्त‍र प्रदेश किसने बनाया है..? हमारे उत्तर प्रदेश में किसान हैं, पशु हैं, दूध देते हैं, चारा है, पानी है, फिर भी दूध बाहर से क्यों लाना पड़ रहा है..? क्या हमारे उत्तर प्रदेश में अमूल जैसी डेयरी नहीं बन सकती है..? क्या यहाँ के किसानों की आय बढ़ सकती है या नहीं..? लेकिन इन्हे करना ही नहीं है..! दोस्तों, मैं वादा करता हूँ कि अकेली श्वेत क्रांति से, पशुपालन और दूध के माध्यम से उत्तर प्रदेश के गाँवों के नौजवानों को रोजगार मिल सकता है, उत्त‍र प्रदेश के गाँवों के किसानों को ताकत मिल सकती है, उत्तर प्रदेश के गाँवों के किसान की आय बढ़ सकती है और श्वेत क्रांति के कारण देश के आमजनों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है, सपने देखने चाहिए..!

भाईयों-बहनों, ये कांग्रेस पार्टी इस बात को नहीं कर सकती है। हमारे देश में कृषि को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, हमारी कृषि को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, हमारे कृषि क्षेत्र को बल देने की आवश्यकता है। आज पूरे देश में फर्टिलाइजर पाने के लिए किसान को कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है, ब्लैक मार्केट से फर्टिलाइजर को लेना पड़ रहा है और इस कमाल की सरकार को देखिए, गोरखपुर के फर्टिलाइजर के कारखाने को ताला लगाकर बैठी है..! एक तरफ फर्टिलाइजर की जरूरत है, दूसरी तरफ नौजवानों को रोजगार की जरूरत है और इन कमाल के शासकों को देखिए, फर्टिलाइजर के कारखानों को ताला लगाकर बैठे हैं..! मित्रों, बातें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के आदी ये लोग समझते हैं कि वोट बैंक संभालो, सत्ता संभल जाएगी..! अब वो ज़माना चला गया, अब देश को विकास चाहिए, नौजवानों को रोजगार चाहिए, नई पीढ़ी को अपने भविष्य की सुरक्षा चाहिए, ऐसा माहौल बन चुका है और इसका नेतृत्व कोई सबका मालिक एक नहीं कर सकता है। अकेली भारतीय जनता पार्टी ऐसी है, जो विकास के रास्ते पर चल रही है और अब वही इस काम को कर सकती है..!

भाईयों-बहनों, अगर हमें कृषि क्षेत्र में विकास करना है, तो मैं यहाँ के किसानों को आग्रह करता हूँ कि आपका एक समूह गुजरात जाएं, गन्ने की खेती करने वाले किसान और वहाँ चीनी बनाने वाले कारखाने इनके बीच कितना बढि़या तालमेल है, समय पर चीनी मिलें चालू हो जाती हैं, समय पर गन्ना खरीद लिया जाता है, खरीदने के साथ भुगतान कर दिया जाता है और चीनी बाजार में आती है। मित्रों, विषय व्यवस्था का होता है, लेकिन जो राज्य स्कूल-कॉलेज के एक्जाम ही समय पर नहीं ले पाते हैं, वो चीनी के कारखाने समय पर कैसे चला सकते हैं..! हमारे देश में बहुत सारे इलाके ऐसे हैं जहाँ स्कूल-कॉलेज के एक्जाम भी समय पर नहीं होते हैं, इसके कारण करोड़ों-करोड़ों नौजवानों के अमूल्य एक-एक साल पिछड़ जाता है। हम मानव संसाधन का कितना बड़ा विनाश करते हैं..! क्या हमारी यूनीवर्सिटी, हमारे कॉलेज समय पर टाइम टेबल के तहत स्कूल-कॉलेज चलाकर बच्चों को एक्जाम दिलाकर हिंदुस्तान को और इलाकों की बराबरी में नहीं ला सकते..? वास्तव में इनको करना नहीं है..! इसलिए अगर गाँव है तो रोजगार के लिए कृषि को बल देना होगा, और कृषि को आगे बढ़ाना है तो कृषि को तीन हिस्सों में बांटने की जरूरत है, समय की मांग है कि कृषि के क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटा जाए - एक तिहाई, हम जो परम्परागत कृषि करते हैं इसको करें, एक तिहाई, हम पशुपालन करें और एक तिहाई हमारे खेत के आखिरी छोर पर, बॉर्डर पर वृक्षों की खेती करें, पेड़ लगाएं..! आज देश को टिम्बर इम्पोर्ट करना पड़ता है। अगर हमारा किसान अपने खेत के बॉर्डर पर इस प्रकार से पेड़ लगा देता है, घर में बेटी का जन्म हो उसके साथ में पांच पेड़ लगा दे, तो जब बेटी की शादी करने की उम्र हो जाएं तो उन पांच पेड़ को काटकर बेटी की शादी कराने का खर्चा निकल सकता है, हमारे किसान को कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। लेकिन इसके लिए सही सोच चाहिए, सही दिशा चाहिए, सही नेतृत्व चाहिए, तब जाकर समाज को विकास की ओर ले जा सकते हैं..!

भाईयों-बहनों, ये लोग तो पूरा समय इसी बात में लगाते रहते हैं कि गन्ने का दाम कितना मिलें, कितना न मिलें, चीनी की मिल चालू हो या न चालू हो, इसी में समय की बर्बादी हो रही है..! मित्रों, हम सुशासन के बिना स्थि‍तियों को बदल नहीं सकते। मैं अनुभव के आधार पर कहता हूँ कि ये देश गरीब नहीं है, अमीर देश के लोगों को गरीब बनाया गया है, राजनीतिक हेतू पार करने के लिए बनाया गया है। देश अमीर है और लोग भी अमीर बन सकते हैं, और हमें गरीबी से मुक्ति का अभियान चलाने के लिए 2014 का चुनाव लड़ना है..!

भाईयों-बहनों, सामान्य मानवी को सुरक्षा मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए..? क्या कारण है कि गाँव के लोगों को बंदुक का लाइसेंस लेने के लिए कतार में खड़ा रहना पड़े, कहीं भी बाहर जाएं तो बंदुकधारियों को साथ में रखना पड़े, इसका क्या कारण हो सकता है..? मित्रों, मैं गुजरात का अनुभव बताता हूँ, उत्तर प्रदेश से गुजरात में रोजी-रोटी कमाने हुए आये नौजवान, जब घर से निकलते हैं तो मां को बहुत चिंता रहती है। आजकल मोबाइल फोन होने के कारण बेटे के ट्रेन में बैठने के बाद मां हर घंटे उसको फोन करती है कि बेटा कहाँ पहुंचे, कोई तकलीफ तो नहीं है, ट्रेन में संभालकर बैठना, सामान संभालकर रखना, बाहर की कोई चीज मत खाना, मैंने घर से जो बनाकर दिया है वही खाना, मां हर घंटे मोबाइल फोन से बेटे का हाल लेती रहती है... बेटा कहता है, मां तुम सो जाओ, अब तो गाड़ी चल दी है, मैं गुजरात जा रहा हूँ, चिंता मत करो... लेकिन मां सोती नहीं है, मां लगातार हर घंटे बेटे का हाल पूछती रहती है... फिर पूछती है, बेटा गुजरात आया कि नहीं, अब कितना दूर है, तुम गुजरात पहुंचे कि नहीं पहुंचे, बेटा कहता है मां तुम सो जाओ, रात देर हो चुकी है, ट्रेन तो पहुंचेगी... मां मानने को तैयार नहीं, लेकिन जैसे ही बेटा बताता है कि मां, अब ट्रेन गुजरात में प्रवेश कर चुकी है, तब मां कहती है बस बेटा, अब मैं सो जाती हूँ। गुजरात के अंदर तुम्हारी ट्रेन पहुंच गई, मतलब अब तुम सलामत हो..! मित्रों, ये हाल पूरे हिंदुस्तान का बन सकता है या नहीं..? इसलिए मैं आप सभी के पास आया हूँ, हम हिंदुस्तान को रोता हुआ देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान को खून से लथपथ देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान को बेरोजगार देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान के नौजवान को याचक के रूप में देखना नहीं चाहते हैं..!

भाईयों-बहनों, आज गोरखपुर की पवित्र धरती से मैं देशवासियों ये कुछ मांगना चाहता हूँ, क्या आप सभी देंगे..? दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बताइए, देंगे..? मैं देशवासियों से कहता हूँ, गोरखपुर की धरती से कह रहा हूँ, मेरे उत्तर प्रदेश के सभी भाईयों-बहनों को कह रहा हूँ, आपने 60 साल तक शासक चुने हैं, आपने 60 साल तक शासकों को देश और राज्य चलाने का काम दिया है, मैं आपसे सिर्फ 60 महीने मांगने के लिए आया हूँ..! आपने 60 साल दिए हैं, मुझे 60 महीने दीजिए, आपने शासकों को चुना है, एक बार सेवक को चुनकर के देखिए..! भाईयों-बहनों, हम आपकी जिंदगी में बदलाव लाकर रहेंगे, हम चैन से नहीं बैठेंगे, आपके सपनों को पूरा करने के लिए हम हमारा जीवन खपा देने वाले लोग हैं..! मित्रों, आपके चेहरे पर मुस्कान हो, आप सपने देख पाएं, आप अपने अरमानों को पूरा कर पाएं, ऐसा हिंदुस्तान आपको देने का मैं आज वादा करने आया हूँ..!

ज नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है, नेता जी सुभाष बोस ने कहा था - चलो दिल्ली..! सुभाष बाबू ने कहा था - तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा..! भाईयों-बहनों, मैं आपको कह रहा हूँ कि आप मुझे 60 महीने दीजिए, मैं आपको सुख चैन की जिदंगी दूंगा, ये वादा मैं आपसे करने आया हूँ..! मित्रों, हम विकास का मंत्र लेकर चले हैं, 60 साल तक वोट बैंक की राजनीति को बहुत कुछ मिला है, 60 महीने के लिए विकास की राजनीति को आशीर्वाद दे दीजिए, आप देखिएगा, नौजवान के सपने पूरे होगें..! क्या यहाँ बैठे हुए मां-बाप में कोई भी चाहता है कि जिन मुसीबतों में उसने अपनी जिंदगी गुजारी, उसकी संतान भी उन्ही मुसीबतों से जिंदगी गुजारे..? क्या कोई भी मां-बाप चाहेगा..? आपके मां-बाप को जैसी जिदंगी गुजारनी पड़ी, क्या आज के नौजवान वैसी जिदंगी गुजारना चाहते हैं..? क्या आप सभी को प्रगति चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को विकास चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को गाँव में बिजली चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को बच्चों के लिए शिक्षा चाहिए या नहीं..? क्या आपको गाँवों में रोड़ चाहिए या नहीं..? आपके खेतों को पानी चाहिए या नहीं..? यही तो काम सरकार का होता है..! इसलिए हम इस देश को न इस हाल में देखना चाहते हैं, न ऐसा रहने देना चाहते हैं, हम दुनिया की बराबरी करने वाला हिंदुस्‍तान बनाना चाहते हैं और इसके लिए मुझे आपका साथ चाहिए..!

भाईयों-बहनों, 2014 में जब चुनाव आएगा तब तो आप जीत देगें ही देगें, लेकिन आज मैं नतमस्तक होकर कहता हूँ कि आपने मुझे जीत लिया है, आपने मुझे अपना बना लिया है, आपके इस प्यार को मैं ब्याज समेत विकास करके लौटाऊंगा, ये मैं वादा करता हूँ..

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए -

भारत माता की जय..! भारत माता की जय..!

वंदे मातरम्..!  वंदे मातरम्..!  वंदे मातरम्..!

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ଗୁଜରାଟର ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଗରିବ କଲ୍ୟାଣ ଅନ୍ନ ଯୋଜନାର ହିତାଧିକାରୀଙ୍କ ସହିତ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଭାବ ବିନିମୟ
August 03, 2021
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ପୂର୍ବରୁ ଶସ୍ତା ରାସନ ଯୋଜନାର ପରିସର ଓ ବଜେଟ ବଢି ବଢି ଚାଲି ଥିବାବେଳେ ତୁଳନାତ୍ମକ ଭାବେ କ୍ଷୁଧା ଓ ଅପପୁଷ୍ଟି ହାର ହ୍ରାସ ପାଉ ନଥିଲା : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଗରିବକଲ୍ୟାଣ ଅନ୍ନ ଯୋଜନାରେ ଏବେ ହିତାଧିକାରୀମାନେ ପୂର୍ବାପେକ୍ଷା ପ୍ରାୟ ଦୁଇଗୁଣ ରାସନ ପାଉଛନ୍ତି: ଶ୍ରୀ ମୋଦୀ
ମହାମାରୀ ସମୟରେ ଦେଶର ୮୦କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଲୋକ ମାଗଣାରେ ରାସନ (ଖାଦ୍ୟ) ସାମ୍ରଗୀ ପାଉଛନ୍ତି ଏବଂ ସରକାରଙ୍କୁ ଏଥିପାଇଁ ୨ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ଖର୍ଚ୍ଚ କରିବାକୁ ପଡୁଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଦେଶରେ ଶତାବ୍ଦୀର ସର୍ବବୃହତ ମହାମାରୀ ସତ୍ତ୍ୱେ କୌଣସି ଲୋକ ଭୋକିଲା ନାହାନ୍ତି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଗରିବଙ୍କ ସଶକ୍ତୀକରଣକୁ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ଅଗ୍ରାଧିକାର ଦିଆଯାଉଛି: ଶ୍ରୀ ମୋଦୀ
ଆମ ଖେଳାଳିମାନଙ୍କର ନୂଆ ବିଶ୍ୱାସ ନୂଆ ଭାରତର ନମୁନା ହୋଇଛି : ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
୫୦କୋଟି ଡୋଜ ଟିକା ଦେଇ ଏକ ନୂଆ ମାଇଲଖୁଣ୍ଟ ସ୍ଥାପନ ଦିଗରେ ଦେଶ ଆଗେଇ ଚାଲିଛି : ଶ୍ରୀ ମୋଦୀ
ଆଜାଦିର ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ ଅବସରରେ ରାଷ୍ଟ୍ର ନିର୍ମାଣପାଇଁ ଆସନ୍ତୁ ସମସ୍ତେ ପବିତ୍ର ଶପଥ ନେବା: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ

ନମସ୍କାର! ଗୁଜରାଟର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ବିଜୟ ରୂପାଣୀ ମହାଶୟ, ଉପ-ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ନିତୀନ ଭାଇ ପଟେଲ ମହାଶୟ, ସଂସଦରେ ମୋର ସାଥୀ ଏବଂ ଗୁଜରାଟ ଭାଜପା ଅଧ୍ୟକ୍ଷ ଶ୍ରୀମାନ ସି.ଆର ପଟେଲ ମହାଶୟ, ପିଏମ ଗରିବ କଲ୍ୟାଣ ଅନ୍ନ ଯୋଜନାର ସମସ୍ତ ହିତାଧୀକାରୀ, ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ!

ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ଗୁଜରାଟ ବିକାଶ ଏବଂ ବିଶ୍ୱାସର ଯେଉଁ ଅନବରତ ଧାରା ଆରମ୍ଭ କଲା, ତାହା ରାଜ୍ୟକୁ ନୂତନ ଶୀଖରକୁ ନେଇ ଯାଉଛି । ଗୁଜରାଟ ସରକାର ଆମର ଭଉଣୀ, ଆମର କୃଷକ, ଆମର ଗରିବ ପରିବାରଙ୍କ ହିତ ପାଇଁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୋଜନାକୁ ସେବା ଭାବ ସହିତ ଏହି ମାଟିକୁ ନେଇ ଆସିଛନ୍ତି । ଆଜି ଗୁଜରାଟର ଲକ୍ଷ-ଲକ୍ଷ ପରିବାରଙ୍କୁ ପିଏମ ଗରିବ କଲ୍ୟାଣ ଅନ୍ନ ଯୋଜନା ମାଧ୍ୟମରେ ଏକ ସଙ୍ଗେ ମାଗଣ ରାସନ ବିତରଣ କରାଯାଉଛି । ଏହି ମାଗଣା ରାସନ ବୈଶ୍ୱିକ ମହାମାରୀର ଏହି ସମୟରେ ଗରିବଙ୍କର ଚିନ୍ତାକୁ କମ୍ କରୁଛି, ସେମାନଙ୍କର ବିଶ୍ୱାସ ବଢ଼଼ାଉଛି। ଏହି ଯୋଜନା ଆଜିଠାରୁ ପ୍ରାରମ୍ଭ ହେଉନାହିଁ, ଯୋଜନା ବିଗତ ଏକ ବର୍ଷ ଧରି ପ୍ରାୟତଃ ଚାଲୁ ରହିଛି ଫଳରେ ଏହି ଦେଶର କୌଣସି ଗରିବ ଭୋକରେ ଶୋଇ ଯାଆନ୍ତୁ ନାହିଁ।

ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଗରିବଙ୍କ ମନରେ ମଧ୍ୟ ଏଥିପାଇଁ ବିଶ୍ୱାସ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଛି। ଏହି ବିଶ୍ୱାସ, ଏଥିପାଇଁ ଆସିଛି କାରଣ ସେମାନଙ୍କୁ ଲାଗୁଛି ଯେ ଆହ୍ୱାନ ହୁଏତ କେତେ ବଡ଼ ହେଉ ନା କାହିଁକି, ଦେଶ ସେମାନଙ୍କ ସହିତ ରହିଛି। କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ମୋତେ କିଛି ହିତାଧିକାରୀଙ୍କ ସହିତ କଥାବାର୍ତା କରିବାର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥିଲା, ସେହି ଚର୍ଚ୍ଚା ସମୟରେ ମୁଁ ଅନୁଭବ କଲି ଯେ ଏକ ନୂତନ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ସେମାନଙ୍କ ଭିତରେ ଭରି ହୋଇ ରହିଛି ।

ସାଥୀଗଣ,

ସ୍ୱାଧୀନତା ପରଠାରୁ ହିଁ ପ୍ରାୟତଃ ପ୍ରତ୍ୟେକ ସରକାର ଗରିବଙ୍କୁ ଶସ୍ତା ଭୋଜନ ଦେବାର କଥା କହିଥିଲେ। ଶସ୍ତା ରାସନର ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକର ପରିସର ଏବଂ ବଜେଟ ବର୍ଷ ପରେ ବର୍ଷ ବଢ଼଼ି ଚାଲିଲା, କିନ୍ତୁ ତାହାର ଯେଉଁ ପ୍ରଭାବ ହେବା ଦରକାର ଥିଲା, ତାହା ସୀମିତ ହୋଇ ହିଁ ରହିଗଲା । ଦେଶର ଖାଦ୍ୟ ଭଣ୍ଡାର ବଢ଼଼ି ଚାଲିଲା, କିନ୍ତୁ ଖାଦ୍ୟାଭାବ ଏବଂ କୁପୋଷଣରେ ସେହି ଅନୁପାତରେ କୌଣସି ହ୍ରାସ ପାଇଲା ନାହିଁ। ଏହାର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ କାରଣ ଥିଲା ଯେ ପ୍ରଭାବୀ ବିତରଣ ବ୍ୟବସ୍ଥା ନଥିବା ଆଉ ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ କିଛି ରୋଗ ମଧ୍ୟ ଆସିଗଲା, କିଛି ବାଟମାରଣା କରୁଥିବା କମ୍ପାନୀ ମଧ୍ୟ ଆସିଗଲେ, ସ୍ୱାର୍ଥବାଦୀ ତତ୍ୱ ମଧ୍ୟ ପ୍ରବେଶ କରିଗଲେ। ଏହି ସ୍ଥିତିକୁ ବଦଳାଇବା ପାଇଁ ବର୍ଷ 2014 ପରେ ନୂତନ ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ ଆରମ୍ଭ କରାଗଲା । ନୂତନ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିକୁ ଏହି ପରିବର୍ତନର ମାଧ୍ୟମ କରାଗଲା। କୋଟି- କୋଟି ନକଲି ହିତାଧିକାରୀଙ୍କୁ ବ୍ୟବସ୍ଥାରୁ ବାହାର କରାଗଲା। ରାସନ କାର୍ଡକୁ ଆଧାର ସହିତ ସଂଯୋଗ କରାଗଲା ଆଉ ସରକାରୀ ରାସନ ଦୋକାନରେ ଡିଜିଟାଲ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରାଗଲା। ଆଜି ପରିଣାମ ଆମ ସମ୍ମୁଖରେ ରହିଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଶହେ ବର୍ଷର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ବିପତି କେବଳ ଭାରତ ଉପରେ ନୁହେଁ, ସମଗ୍ର ଦୁନିଆ ଉପରକୁ ଆସିଛି, ସମଗ୍ର ମାନବ ଜାତି ପାଇଁ ଆସିଛି । ଜୀବନ- ଜୀବିକା ଉପରକୁ ସଙ୍କଟ ଆସିଲା, କରୋନା ଲକଡାଉନର କଟକଣା ଯୋଗୁଁ କାମ ଧନ୍ଦା ସବୁକୁ ବନ୍ଦ କରିବାକୁ ପଡ଼ିଲା। କିନ୍ତୁ ଦେଶ ନିଜର ନାଗରିକମାନଙ୍କୁ ଭୋକରେ ଶୋଇବାକୁ ଦେଇନାହିଁ। ଦୁର୍ଭାଗ୍ୟବଶତଃ ଦୁନିଆର ବହୁ ଦେଶର ଲୋକଙ୍କ ଉପରେ ଆଜି ସଂକ୍ରମଣ ସହିତ ମଧ୍ୟ ଖାଦ୍ୟାଭାବର ମଧ୍ୟ ଭୀଷଣ ସଙ୍କଟ ଆସିଯାଇଛି। କିନ୍ତୁ ଭାରତ ସଂକ୍ରମଣର ସଙ୍କେତ ମିଳିବାର ପ୍ରଥମ ଦିନରୁ ହିଁ, ଏହି ସଙ୍କଟକୁ ଚିହ୍ନିଲା ଆଉ ଏହା ଉପରେ କାର୍ଯ୍ୟ କଲା। ଏଥିପାଇଁ, ଆଜି ସମଗ୍ର ଦୁନିଆରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଗରିବ କଲ୍ୟାଣ ଅନ୍ନ ଯୋଜନାର ପ୍ରଶଂସା ହେଉଛି । ବଡ଼- ବଡ଼ ବିଶେଷଜ୍ଞ ଏହି କଥାର ପ୍ରଶଂସା କରୁଛନ୍ତି ଯେ ଭାରତ ନିଜର 80 କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଲୋକଙ୍କୁ ଏହି ମହାମାରୀ ସମୟରେ ମାଗଣା ଶସ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ କରାଉଅଛି। ଏହା ଉପରେ 2 ଲକ୍ଷ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଟଙ୍କା ଏହି ଦେଶ ଖର୍ଚ୍ଚ କରୁଛି । ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ମାତ୍ର ଗୋଟିଏ ଯେ- ମୋ ଭାରତର କୌଣସି ଭାଇ ଭଉଣୀ, ମୋର କୌଣସି ଭାରତବାସୀ ଭୋକିଲା ନ ରୁହନ୍ତୁ । ଆଜି 2 ଟଙ୍କାରେ ଏକ କିଲୋ ଗହମ, 3 ଟଙ୍କାରେ ଏକ କିଲୋ ଚାଉଳର କୋଟା ପରେ ମଧ୍ୟ ଅତିରିକ୍ତ 5 କିଲୋ ଗହମ ଏବଂ ଚାଉଳ ମାଗଣାରେ ଦିଆଯାଉଛି । ଅର୍ଥାତ ଏହି ଯୋଜନାରେ ପୂର୍ବ ତୁଳନାରେ ରାସନକାର୍ଡ ଧାରୀଙ୍କୁ ପ୍ରାୟତଃ ଦୁଇଗୁଣା ମାତ୍ରାରେ ରାସନ ଉପଲବ୍ଧ କରାଯାଉଛି। ଏହି ଯୋଜନା ଦୀପାବଳୀ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାଲିବ, ଦୀପାବଳୀ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ କୌଣସି ଗରିବଙ୍କୁ ପେଟ ଭରିବା ପାଇଁ ନିଜ ପକେଟରୁ ଟଙ୍କା କାଢ଼ିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ। ଗୁଜରାଟରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରାୟତଃ ସାଢ଼େ 3 କୋଟି ହିତାଧିକାରୀଙ୍କୁ ମାଗଣା ରାସନର ଲାଭ ଆଜି ମିଳୁଛି । ମୁଁ ଗୁଜରାଟ ସରକାରଙ୍କୁ ଏହି କଥା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ପ୍ରଶଂସା କରିବାକୁ ଚାହିଁବି ଯେ, ସେ ଦେଶର ଅନ୍ୟ ଅଞ୍ଚଳରୁ ଏଠାକୁ କାମଧନ୍ଦା କରିବାକୁ ଆସିଥିବା ଶ୍ରମିକମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ପ୍ରାଥମିକତା ଦେଲେ। କରୋନା ଲକ୍ ଡାଉନ୍ କାରଣରୁ ପ୍ରଭାବିତ ହୋଇଥିବା ଲକ୍ଷ-ଲକ୍ଷ ଶ୍ରମିକଙ୍କୁ ଏହି ଯୋଜନାର ଲାଭ ମିଳିଛି। ଏଥିରେ ବହୁତ ଜଣ ସାଥୀ ଏଭଳି ଥିଲେ, ଯାହାଙ୍କ ପାଖରେ ହୁଏତ ରାସନ କାର୍ଡ ହିଁ ନଥିଲା, କିମ୍ବା ତାଙ୍କର ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟର ରାସନ କାର୍ଡ ଥିଲା। ଗୁଜରାଟ ହେଉଛି ସେହି ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଗୋଟିଏ ଯିଏ ସର୍ବପ୍ରଥମେ ଏକ ରାଷ୍ଟ୍ର, ଏକ ରାସନ୍ କାର୍ଡର ଯୋଜନାକୁ ଲାଗୁ କଲେ। ଏକ ରାଷ୍ଟ୍ର, ଏକ ରାସନ୍ କାର୍ଡର ଲାଭ ଗୁଜରାଟର ଲକ୍ଷ- ଲକ୍ଷ ଶ୍ରମିକ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ହୋଇଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏକ ସମୟ ଥିଲା ଯେତେବେଳେ ଦେଶରେ ବିକାଶର କଥା କେବଳ ବଡ଼- ବଡ଼ ସହର ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ହୋଇ ରହିଥିଲା । ସେଠାରେ ମଧ୍ୟ, ବିକାଶର ଅର୍ଥ କେବଳ ମାତ୍ର ଏତିକି ଥିଲା ଯେ ବିଶେଷ- ବିଶେଷ ଅଞ୍ଚଳରେ ବଡ଼- ବଡ଼ ଫ୍ଲାଏ ଓଭର ତିଆରି କରିଦେବା, ସଡ଼କ ତିଆରି କରିଦେବା, ମେଟ୍ରୋ ହୋଇଯିବା! ଅର୍ଥାତ, ଗାଁ- ଗଣ୍ଡାରୁ ଦୂରରେ, ଆଉ ଆମ ଘର ବାହାରେ ଯେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଥିଲା, ଯାହାକି ସାଧାରଣ ନାଗରିକଙ୍କ ସହିତ ନେଣ- ଦେଣ ନଥିଲା, ତାହାକୁ ବିକାଶ ବୋଲି ମାନି ନିଆଗଲା । ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ଦେଶ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ବଦଳାଇଛି । ଆଜି ଦେଶ ଦୁଇଟି ଦିଗରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛି, ଦୁଇଟି ଧାରଣାରେ ଚାଲିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଦେଶକୁ ନୂତନ ଭିତିଭୂମିର ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି। ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷ- ଲକ୍ଷ କୋଟି- କୋଟି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରାଯାଉଛି, ତାହାଦ୍ୱାରା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ମଧ୍ୟ ମିଳି ପାରୁଛି, କିନ୍ତୁ ଏହା ସହିତ ହିଁ, ସାଧାରଣ ମାନବଙ୍କର ଗୁଣବତାକୁ ସୁଧାରିବା ପାଇଁ, ସହଜରେ ସହବସ୍ଥାନ ପାଇଁ ମାନଦଣ୍ଡ ମଧ୍ୟ ସ୍ଥାପିତ କରାଯାଉଛି। ଗରିବଙ୍କ ସଶକ୍ତୀକରଣ ପାଇଁ ଆଜି ସର୍ବାଧିକ ପ୍ରାଥମିକତା ଦିଆଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ 2 କୋଟି ଗରିବ ପରିବାରଙ୍କୁ ଘର ଦିଆଯାଇଥାଏ ସେତେବେଳେ ଏହାର ଅର୍ଥ ଏହା ହୋଇଥାଏ ଯେ ସେମାନେ ଏବେ ଶୀତ, ଗରମ, ବର୍ଷା ଡରରୁ ମୁକ୍ତ ହୋଇ ବଞ୍ଚି ପାରିବେ, କେବଳ ଏତିକି ହିଁ ନୁହେଁ, ଯେତେବେଳେ ନିଜର ଘର ରହିଥାଏ ନା ତେବେ ଆତ୍ମସମ୍ମାନରେ ତାହାର ଜୀବନ ଭରି ଯାଇଥାଏ । ନୂତନ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇ ଯାଇଥାଏ ଆଉ ସେହି ସଂକଳ୍ପ ଗୁଡ଼ିକୁ ସାକାର କରିବା ପାଇଁ ଗରିବ ପରିବାର ସମେତ ମନପ୍ରାଣ ଦେଇ ଲାଗି ପଡ଼ନ୍ତି, ଦିନରାତି ପରିଶ୍ରମ କରନ୍ତି। ଯେତେବେଳେ 10 କୋଟି ପରିବାରଙ୍କୁ ଶୌଚ ପାଇଁ ଘର ବାହାରକୁ ଯିବାର ବାଧ୍ୟବାଧକତାରୁ ମୁକ୍ତି ମିଳିଥାଏ ତେବେ ତାହାର ଅର୍ଥ ଏହା ହୋଇଥାଏ ଯେ ତାଙ୍କ ଜୀବନସ୍ତର ଉନ୍ନତ ହୋଇଛି। ସେ ପୂର୍ବରୁ ଚିନ୍ତା କରୁଥିଲା ଯେ ସୁଖୀ ପରିବାରଗୁଡ଼ିକର ଘରେ ହିଁ ଶୌଚାଳୟ ରହିଥାଏ, ଶୌଚାଳୟ ସେହିମାନଙ୍କର ଘରେ ହିଁ ରହିଥାଏ। ଗରିବଙ୍କୁ, ବିଚରାମାନଙ୍କୁ ଅନ୍ଧାର କେବେ ହେବ ସେଥିପାଇଁ ଅପେକ୍ଷା କରିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ, ଖୋଲାସ୍ଥାନକୁ ଯିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ । କିନ୍ତୁ ଯେତେବେଳେ ଗରିବଙ୍କୁ ଶୌଚାଳୟ ମିଳିଥାଏ ତେବେ ସିଏ ନିଜକୁ ନିଜେ ଧନୀ ଲୋକଙ୍କ ସହିତ ସମାନ ଭାବେ ନିଜକୁ ଦେଖିଥାଏ, ଏକ ନୂତନ ବିଶ୍ୱାସ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଥାଏ। ଏହିଭଳି ଭାବେ, ଯେତେବେଳେ ଦେଶର ଗରିବ ଜନ-ଧନ ଖାତା ମାଧ୍ୟମରେ ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ ବ୍ୟବସ୍ଥା ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଥାଏ, ମୋବାଇଲ ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ ମଧ୍ୟ ଗରିବଙ୍କ ହାତରେ ରହିଥାଏ ତେବେ ତାହାଙ୍କୁ ଶକ୍ତି ମିଳିଥାଏ, ତାହାଙ୍କୁ ନୂତନ ଅବସର ମିଳିଥାଏ। ଆମର ଏଠାରେ କୁହାଯାଏ –

ସାମର୍ଥ୍ୟ ମୂଳମ୍

ସୁଖମେବ ଲୋକେ!

ଅର୍ଥାତ, ଆମର ସାମର୍ଥ୍ୟର ଆଧାର ଆମ ଜୀବନର ସୁଖ ହିଁ ହୋଇଥାଏ। ଯେପରି ଆମେ ସୁଖ ପଛରେ ଦୌଡ଼ି ସୁଖ ହାସଲ କରି ପାରିବା ନାହିଁ ବରଂ ସେଥିପାଇଁ ଆମକୁ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ, କିଛି ହାସଲ କରିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। ସେପରି ହିଁ ସଶକ୍ତିକରଣ ମଧ୍ୟ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା, ସୁବିଧା ଏବଂ ଗରିମା ବଢ଼଼ିବା ଦ୍ୱାରା ହୋଇଥାଏ। ଯେତେବେଳେ କୋଟି- କୋଟି ଲୋକଙ୍କୁ ଆୟୂଷ୍ମାନ ଯୋଜନା ଯୋଗୁଁ ମାଗଣାରେ ଚିକିତ୍ସା ସୁବିଧା ମିଳେ, ସେତେବେଳେ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟରେ ସେମାନଙ୍କର ସଶକ୍ତୀକରଣ ହୋଇଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ଦୁର୍ବଳ ବର୍ଗର ଲୋକଙ୍କୁ ସଂରକ୍ଷଣର ସୁବିଧା ସୁନିଶ୍ଚିତ କରାଯାଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଏହି ବର୍ଗଙ୍କୁ ଶିକ୍ଷାର ସଶକ୍ତୀକରଣ ହୋଇଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ସଡ଼କଗୁଡ଼ିକ ସହରରୁ ଗାଁଗୁଡ଼ିକୁ ମଧ୍ୟ ଯୋଡ଼ିଥାଏ, ଯେତେବେଳେ ଗରିବ ଲୋକଙ୍କୁ ମାଗଣା ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ, ମାଗଣା ବିଜୁଳି ସଂଯୋଗ ମିଳିଥାଏ ସେତେବେଳେ ଏହିସବୁ ସୁବିଧା ସେମାନଙ୍କର ସଶକ୍ତୀକରଣ କରିଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ଲୋକଙ୍କୁ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ସୁବିଧା ସବୁ ମିଳିଥାଏ ସେତେବେଳେ ସେ ନିଜର ଉନ୍ନତି ବିଷୟରେ, ଦେଶର ପ୍ରଗତି ବିଷୟରେ ଚିନ୍ତା କରିଥାଆନ୍ତି। ଏହି ସ୍ୱପ୍ନ ସବୁକୁ ପୂରଣ କରିବା ପାଇଁ ଆଜି ଦେଶରେ ମୁଦ୍ରା ଯୋଜନା ରହିଛି, ସ୍ୱନିଧି ଯୋଜନା ରହିଛି। ଭାରତରେ ଏଭଳି ଅନେକ ଯୋଜନା ସବୁ ଗରିବଙ୍କୁ ସମ୍ମାନପୂର୍ଣ୍ଣ ଜୀବନର ମାର୍ଗ ଦେଉଛି, ସମ୍ମାନରୁ ସଶକ୍ତୀକରଣର ମାଧ୍ୟମ ହେଉଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଯେତେବେଳେ ସାଧାରଣ ମନୁଷ୍ୟଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ସୁଯୋଗ ମିଳିଥାଏ, ଯେତେବେଳେ ବ୍ୟବସ୍ଥା ସବୁ ନିଜେ ଘର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଞ୍ଚିବାକୁ ଲାଗେ ସେତେବେଳେ କିଭଳି ଭାବେ ଜୀବନ ବଦଳିଯାଏ, ଏହାକୁ ଖୁବ ଭଲ ଭାବେ ଗୁଜରାଟ ବୁଝିଛି। କେବେ ଗୁଜରାଟର ଏକ ବଡ଼ ଅଞ୍ଚଳର ଲୋକମାନଙ୍କୁ, ମାଆ- ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ପାଣି ଭଳି ମୌଳିକ ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ କେତେ- କେତେ କିଲୋମିଟର ପାଦରେ ଚାଲି ଚାଲି  ଯିବାକୁ ପଡ଼ୁଥିଲା। ଆମର ସମସ୍ତ ମାଆ- ଭଉଣୀମାନେ ହେଉଛନ୍ତି ଏହାର ସାକ୍ଷୀ। ଏହି ରାଜକୋଟକୁ ପାଣି ପାଇଁ ଟ୍ରେନ ପଠାଇବାକୁ ପଡ଼ୁଥିଲା। ରାଜକୋଟକୁ ପାଣି ପାଇଁ ଘର ବାହାରେ ଗାତ ଖୋଳି ତଳୁ ପାଇପରୁ ଗୋଟିଏ ଗୋଟିଏ ଗିନାରେ ଭରି ବାଲଟି ଭର୍ତି କରିବାକୁ ପଡ଼ୁଥିଲା। କିନ୍ତୁ ଆଜି, ସର୍ଦ୍ଦାର ସରୋବର ସେତୁ ଦ୍ୱାରା, ସାଉନୀ ଯୋଜନା ଦ୍ୱାରା, କେନାଲର ନେଟୱର୍କ ଦ୍ୱାରା ସେହି କଚ୍ଛରେ ମଧ୍ୟ ମାଆ ନର୍ମଦାଙ୍କ ପାଣି ପହଞ୍ଚି ପାରୁଛି, ଯାହା କେହି କେବେ ଚିନ୍ତା ମଧ୍ୟ କରି ପାରୁ ନଥିଲେ ଆଉ ଆମର ଏଠାରେ ତ କୁହା ଯାଉଥିଲା ଯେ ମାଆ ନର୍ମଦାଙ୍କ ସ୍ମରଣ ମାତ୍ରକେ ପୂଣ୍ୟ ମିଳେ, ଆଜି ତ ସ୍ୱୟଂ ମାଆ ନର୍ମଦା ଗୁଜରାଟର ଗାଁ- ଗାଁକୁ ଯାଉଛନ୍ତି, ସ୍ୱୟଂ ମାଆ ନର୍ମଦା ପ୍ରତିଟି ଘରକୁ ଯାଉଛନ୍ତି, ସ୍ୱୟଂ ମାଆ ନର୍ମଦା ଆପଣଙ୍କ ଦ୍ୱାରକୁ ଆସି ଆପଣଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେଉଛନ୍ତି। ଏହି ପ୍ରୟାସ ଗୁଡ଼ିକର ପରିଣାମ ହେଉଛି ଯେ ଆଜି ଗୁଜରାଟ ଶତ ପ୍ରତିଶତ ପାଇପ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ପାନୀୟ ଜଳ ଉପଲବ୍ଧ କରାଇବାର ଲକ୍ଷ୍ୟଠାରୁ ଏବେ ଆଉ ଅଧିକ ଦୂରରେ ନାହିଁ । ଏହି ଗତି, ସାଧାରଣ ଜନତାଙ୍କ ଜୀବନରେ ଏହି ପରିବର୍ତନ, ଏବେ ଧୀରେ- ଧୀରେ ସମଗ୍ର ଦେଶ ଅନୁଭବ କରୁଛି । ସ୍ୱାଧୀନତାର ଦଶକ- ଦଶକ ପରେ ମଧ୍ୟ ଦେଶରେ କେବଳ 3 କୋଟି ଗ୍ରାମୀଣ ପରିବାର ପାଇପ ମାଧ୍ୟମରେ ପାନୀୟ ଜଳ ସୁବିଧା ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଥିଲେ, ଯାହାଙ୍କୁ ପାଇପ ମାଧ୍ୟମରେ ଜଳ ମିଳୁଥିଲା। କିନ୍ତୁ ଆଜି ଜଳ ଜୀବନ ଅଭିଯାନ ମାଧ୍ୟମରେ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ କେବଳ ଦୁଇ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ, ଦୁଇ ବର୍ଷ ଭିତରେ ସାଢ଼େ 4 କୋଟିରୁ ଅଧିକ ପରିବାରଙ୍କୁ ପାଇପ୍ ପାଣି ସହିତ ସଂଯୋଗ କରାଯାଇ ସାରିଛି, ଆଉ ଏଥିପାଇଁ ମୋ ମାଆ- ଭଉଣୀମାନେ ମୋତେ ଭରପୂର ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେଉଛନ୍ତି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଡବଲ ଇଂଜିନର ସରକାର ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଗୁଜରାଟ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଲାଭ ଦେଖୁଛି। ଆଜି ସର୍ଦ୍ଦାର ସରୋବର ସେତୁ ଦ୍ୱାରା ବିକାଶର ନୂତନ ଧାରା ହିଁ ପ୍ରବାହିତ ହେଉ ନାହିଁ, ବରଂ ଷ୍ଟାଚ୍ୟୁ ଅଫ୍ ୟୁନିଟି ଭାବେ ବିଶ୍ୱର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଆକର୍ଷଣ ମଧ୍ୟରୁ ଗୋଟିଏ ଆଜି ଗୁଜରାଟରେ ଅଛି । କଚ୍ଛରେ ସ୍ଥାପିତ ହେଉଥିବା ନବୀକରଣୀୟ ଶକ୍ତି ପାର୍କ, ଗୁଜରାଟକୁ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱର ନବୀକରଣୀୟ ଶକ୍ତି ମାନଚିତ୍ରରେ ସ୍ଥାପିତ କରିବାକୁ ଯାଉଛି। ଗୁଜରାଟରେ ରେଳ ଏବଂ ବିମାନ ଯୋଗାଯୋଗର ଆଧୁନିକ ଏବଂ ଭବ୍ୟ ଭିତିଭୂମି ପ୍ରକଳ୍ପ ନିର୍ମାଣ କରାଯାଉଛି। ଗୁଜରାଟର ଅହମ୍ମଦାବାଦ ଏବଂ ସୁରଟ ଭଳି ସହରଗୁଡ଼ିକରେ ମେଟ୍ରୋ ସଂଯୋଗର ସମ୍ପ୍ରସାରଣ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ହେଉଛି। ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ମେଡିକାଲ ଶିକ୍ଷାରେ ମଧ୍ୟ ଗୁଜରାଟରେ ପ୍ରଶଂସନୀୟ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି। ଗୁଜରାଟରେ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହୋଇଥିବା ଉନ୍ନତ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଭିତିଭୂମି 100 ବର୍ଷର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ମେଡିକାଲ ଜରୁରୀକାଳୀନ ପରିସ୍ଥିତିକୁ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିବାରେ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଗୁଜରାଟ ସହିତ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ ଏପରି ଅନେକ କାର୍ଯ୍ୟ ଅଛି, ଯେଉଁଥି ପାଇଁ ଆଜି ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶବାସୀଙ୍କର, ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି । ଆଉ ଏହି ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ହିଁ ହେଉଛି ଯାହା ପ୍ରତ୍ୟେକ ଆହ୍ୱାନକୁ ଅତିକ୍ରମ କରିବା ପାଇଁ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ୱପ୍ନକୁ  ପୂରଣ କରିବା ପାଇଁ ହେଉଛି ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ସୂତ୍ର । ଏବେ ଏହାର ତାଜା ଉଦାହରଣ ହେଉଛି ଅଲିମ୍ପିକ୍ସରେ ଆମ ଖେଳାଳୀମାନଙ୍କର ପ୍ରଦର୍ଶନ । ଚଳିତ ଥର ଅଲିମ୍ପିକ୍ସରେ ଭାଗନେବା ପାଇଁ ଭାରତର ସବୁଠାରୁ ଅଧିକ ଖେଳାଳୀ ଯୋଗ୍ୟତା ହାସଲ କରିଛନ୍ତି। ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାର କଥା ଯେ 100 ବର୍ଷରେ ଆସିଥିବା ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ବିପର୍ପ୍ୟୟ ସହିତ ମୁକାବିଲା କରି ଆମେ ଏହା କରି ପାରିଛେ । ଏପରି ଅନେକ ଖେଳ ଅଛି ଯେଉଁଥିରେ ଆମେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ଯୋଗ୍ୟତା ହାସଲ କରିଛେ । କେବଳ ଯୋଗ୍ୟତା ହାସଲ କରିନାହୁଁ ବରଂ କଡ଼ା ଟକ୍କର ମଧ୍ୟ ଦେଇଛୁ। ଆମ ଖେଳାଳୀମାନେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଖେଳରେ ସର୍ବଶ୍ରେଷ୍ଠ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରୁଛନ୍ତି । ଚଳିତ ଅଲିମ୍ପିକ୍ସରେ ନୂତନ ଭାରତର ଦୃଢ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ପ୍ରତ୍ୟକ ଖେଳରେ ଦୃଷ୍ଟି ଗୋଚର ହେଉଛି । ଅଲିମ୍ପିକ୍ସ ଖେଳିବାକୁ ଯାଇଥିବା ଆମର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଖେଳାଳୀ, ନିଜଠାରୁ ଉନ୍ନତ ମାନ୍ୟତା ପ୍ରାପ୍ତ ଖେଳାଳୀମାନଙ୍କୁ, ସେମାନଙ୍କ ଦଳକୁ ଚାଲେଞ୍ଜ ଦେଉଛନ୍ତି । ଭାରତୀୟ ଖେଳାଳୀଙ୍କର ଉତ୍ସାହ, ଉଦ୍ଦିପନା ଏବଂ ହାସଲ କରିବାର ଲକ୍ଷ୍ୟ ଆଜି ସର୍ବୋଚ୍ଚ ସ୍ତରରେ ରହିଛି । ଏହି ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ସେତେବେଳେ ଆସିଥାଏ ଯେତେବେଳେ ଉପପୁକ୍ତ ପ୍ରତିଭାଙ୍କର ଚିହ୍ନଟ ହୋଇଥାଏ, ସେମାନଙ୍କୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହନ ମିଳିଥାଏ।        ଏହି ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ସେତେବେଳେ ଆସିଥାଏ ଯେତେ ବେଳେ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଗୁଡିକ ବଦଳିଥାଏ, ପାରଦର୍ଶୀ ହୋଇଥାଏ । ଏହି ନୂତନ  ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ନ୍ୟୁ ଇଣ୍ଡିଆର ପରିଚୟ ପାଲଟିଛି । ଏହି ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ଆଜି ଦେଶର କୋଣ-ଅନୁ-କୋଣରେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛୋଟ-ଛୋଟ, ବଡ଼ ଗାଁ  ଜନବସତିରେ, ଗରିବ, ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର  ଯୁବ ଭାରତର ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣରେ ଏହି ବିଶ୍ୱାସ ଆସୁଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହି ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସକୁ ଆମକୁ କରୋନା ସହିତ ଲଢେଇରେ ଏବଂ ଆମ ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନରେ ଜାରି ରଖିବାକୁ ହେବ । ବୈଶ୍ୱିକ ମହାମାରୀର ଏହି ବାତାବରଣରେ ଆମକୁ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଆମର ସତର୍କତା ବଜାୟ ରଖିବାକୁ ହେବ। ଦେଶ ଆଜି 50 କୋଟି ଟିକାକରଣ ଦିଗକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଅଗ୍ରସର ହେଉଛି,  ଗୁଜରାଟ ମଧ୍ୟ ସାଢେ 3 କୋଟି ଡୋଜ ଟିକାର ସୋପାନ ପାଖରେ ପହଞ୍ଚୁଛି । ଆମକୁ ଟିକା ନେବାର ଅଛି, ମାସ୍କ ମଧ୍ୟ ପିନ୍ଧିବାର ଅଛି ଏବଂ ଯେତେ ସମ୍ଭବ ହେବ ଜନଗହଳି ବା ଭିଡ ଠାରୁ ଦୂରେଇ ରହିବାକୁ ହେବ । ଆମେ ବିଶ୍ୱରେ ଦେଖୁଛେ । ଯେଉଁଠାରେ ମଧ୍ୟ ମାସ୍କ ପିନ୍ଧିବା କଟକଣା ହଟାଇ ଦିଆଇଥିଲା, ସେଠାରେ ପୁଣି ମାସ୍କ ପିନ୍ଧିବାକୁ ଅନୁରୋଧ କରାଯାଉଛି। ସତର୍କତା ଏବଂ ସୁରକ୍ଷା ସହିତ ଆମକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାର ଅଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଆମେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଗରିବ କଲ୍ୟାଣ ଅନ୍ନ ଯୋଜନା ଉପରେ ଏତେ ବଡ଼ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରୁଛେ ସେତେବେଳେ ମୁଁ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଆଉ ଏକ ସଂକଳ୍ପ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଏହି ସଂକଳ୍ପ ହେଉଛି ରାଷ୍ଟ୍ର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ନୂତନ ପ୍ରେରଣା ଜାଗ୍ରତ କରିବାର । ସ୍ୱାଧୀନତାର 75 ବର୍ଷରେ, ସ୍ୱାଧୀନତାର ଅମୃତ ମହେତ୍ସବରେ, ଆମକୁ ଏହି ପବିତ୍ର ସଂକଳ୍ପ ନେବାର ଅଛି। ଏହି ସଂକଳ୍ପ ଗୁଡିକରେ, ଏହି ଅଭିଯାନରେ ଗରିବ-ଧନୀ, ମହିଳା-ପୁରୁଷ, ଦଳିତ-ବଞ୍ଚିତ ସମସ୍ତଙ୍କର ସମାନ ଭାବେ ଯୋଗଦାନ ରହିବ। ଗୁଜରାଟ ଆଗାମୀ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ନିଜର ସମସ୍ତ ସଂକଳ୍ପ ସିଦ୍ଧ କରୁ, ବିଶ୍ୱରେ ନିଜର ଗୌରବମୟ ପରିଚୟକୁ ଆହୁରି ସୁଦୃଢ କରୁ, ଏହି କାମନା ସହିତ ମୁଁ  ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି । ପୁଣି ଥରେ ଅନ୍ନ ଯୋଜନାର ସମସ୍ତ ହିତାଧିକାରୀଙ୍କୁ ବହୁତ- ବହୁତ ଶୁଭକାମନା!!! ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!!!