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मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी, यहाँ के जनप्रिय सांसद जुझारू नेता आदरणीय श्री योगी आदित्यनाथ जी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और हमारे पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री कल्याण सिंह जी, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान लक्ष्मीकांत जी, श्रीमान रमापति जी, श्री सूर्यप्रताप जी, श्रीमान कलराज जी, श्रीमान लालजी टंडन जी, श्रीमान ओमप्रकाश सिंह जी, भाई विनय कटियार जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ नेतागण और गोरखपुर की इस पवित्र धरती पर पधारे हुए लाखों-लाखों भाईयों और बहनों..!

सा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के हर क्षेत्र ने एक-दूसरे से आगे निकलने की स्पर्धा ठान ली है, उत्तर प्रदेश की जितनी भी रैलियां हुई हैं, हर रैली पिछली रैली का रिकॉर्ड तोड़ देती है..! मैं जब यहाँ हेलीकॉप्टर से आ रहा था तो दृश्य देख रहा था, चारों तरफ लोग ही लोग नज़र आ रहे थे, मानों जैसे जनसमंदर हो..! भाईयों-बहनों, इस ठंड के समय में गोरखपुर और अगल-बगल के इलाके से आए लोग और इतनी बड़ी रैली, बदलती हवा का रूख दिखाती है कि हवा किस तरफ चल रही है..! आज आपकी आवाज बनारस की गलियों में भी गूंज रही है..! मित्रों, हमने बहुत चुनाव देखे हैं, लेकिन ये ऐसा चुनाव है जिसका फैसला देश के कोटि-कोटि जनों ने कर लिया है, कांग्रेस और उसके साथी दलों की विदाई देश ने तय कर ली है और कांग्रेस मुक्त भारत का सपना इस बार साकार होकर रहेगा, ये नजारा साफ कह रहा है..!

भाईयों-बहनों, मुझे उत्तर प्रदेश के नौजवानों का विशेष अभिनदंन करना है। 15 दिसम्बर को सरदार बल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि थी और उस पूरे देश में सरदार बल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि‍ देने के लिए देश भर में एकता दौड़ का आयोजन किया गया था। मित्रों, मुझे खुशी है कि उत्तर प्रदेश के हर कोने से, इतनी ठंड में भी लाखों नौजवान एकता दौड़ के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल को याद करके दौड़े और ये विश्व रिकॉर्ड बन गया, कि एक दिन में एक ही समय में हिंदुस्तान में 1100 से अधिक स्थानों पर 50 लाख लोग दौड़े..! हमारे ओमप्रकाश जी मुझे बता रहे थे कि अभी जो लोहा संग्रह का कार्यक्रम चल रहा है, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा भारत के लौह पुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की बनने वाली है, अमेरिका में जो स्टेच्यु ऑफ लिबर्टी है, उससे दो गुना बड़ी यह स्टेच्यु ऑफ यूनिटी की प्रतिमा बनने वाली है, इसके लिए भारत के हर गाँव से किसानों के काम में आने वाले औजार को इक्ट्ठा किया जा रहा है, और उस लोहे के औजार के टुकड़ों से सरदार बल्लभ भाई साहब की प्रतिमा बनने वाली है। एकता के लिए यह एक अभिनव प्रयास है और इस प्रयास में उत्तर प्रदेश ने जो सहयोग दिया है, जो उत्साह और उमंग दिखाया है, इसके लिए मैं उत्तर प्रदेश के हर गाँव का, हर नौजवान का, हर किसान का हृदय से अभिनंदन करता हूँ..!

भाईयों-बहनों, मैं जहाँ भी नजर दौड़ाता हूँ, लोग ही लोग है, चारों तरफ जनमेदनी है, जनता जर्नादन के दर्शन ईश्वर के दर्शन होते हैं, ये सौभाग्य हमें मिला है..! मित्रों, ये गोरखपुर की धरती ऐसी है, जहाँ हमारी महान सांस्कृतिक विरासत, हमारे ऋषियों-मुनियों का चिंतन, हमारे ज्ञानियों की सांस्कृतिक रचनाएं, इन सबको अक्षरदेह देने का काम गीता प्रेस गोरखपुर के द्वारा किया गया, जो कि एक बहुत बड़ी सेवा है, यह एक प्रकार से ज्ञान की उपासना का काम हुआ है, और वही समाज आगे बढ़ता है जो हर युग में हर समय ज्ञान उपासना की अपनी साधना निरंतर बनाए रखता है और इस काम में गोरखपुर की धरती का बहुत बड़ा योगदान है, इस धरती को मैं नमन करता हूँ..!

भाईयों-बहनों, 2014 का चुनाव कैसा होगा, उसका एक ट्रेलर अभी-अभी हुआ है..! हमारे देश के पांच राज्यों में चुनाव हुआ, और चार राज्यों में सबसे अधिक भारतीय जनता पार्टी को समर्थन मिला। लेकिन उसमें भी मैं एक बात की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। कुछ लोग, कुछ ठेकेदार मानते हैं कि दलित हो, पीडि़त हो, शोषित हो, आदिवासी हो, ये सब उनकी जेब में हैं। सालों से ये लोग दलित, पीडि़त, शोषित, आदिवासी को इंसान मानने को तैयार नहीं थे, वे उसे वोट बैंक मानते थे और ये ठेकेदारों का मत था कि भारतीय जनता पार्टी आसमान से नीचे गिरे, लेकिन दलितों में और आदिवासियों में अपनी जगह नहीं बना सकती है, ये इनके दावे थे..! मित्रों, आज मैं गोरखपुर की इस पवित्र धरती से कहना चाहता हूँ, अभी-अभी जिन चार राज्यों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है, वहाँ का नज़ारा क्या है..? राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 सीटें हैं, उसमें से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। राजस्थान में अनुसूचित जाति की 34 में से 32 सीटों पर वहाँ की जनता जर्नादन ने कमल के निशान पर मोहर लगाकर भारतीय जनता पार्टी को विजयी बनाया है..! मित्रों, छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति की 10 सीटें हैं, जिसमें से कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली है..! मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की 35 सीटें हैं, जिसमें से 28 सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई हैं..! मैं मेरे उत्तर प्रदेश के दलित, पीडि़त, शोषित, समाज में पीछे रह जाने वाले भाईयों-बहनों को आज विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी को सेवा करने का अवसर मिला है, हमारी प्राथमिकता रही है कि गरीबों का कल्याण हो, लोग गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए ताकतवर बनें, समाज के पीडित और शोषित लोग गरीबी से मुक्ति की एहसास करें और इसी का परिणाम है कि आज दलित, पीडि़त, शोषित, आदिवासी समाज का भारतीय जनता पार्टी के प्रति एक विश्वास पैदा हुआ है..!

भाईयों-बहनों, कांग्रेस पार्टी गरीबों की बातें हर बार करती आई है। चुनाव आते ही कांग्रेस को गरीब याद आते हैं, वो गरीबी की माला जपना शुरू कर देते हैं। मैं कभी-कभी सोचता था कि देश को आजादी पाए 60 साल से अधिक समय हो गया, लगातार कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर मिला, वे गरीबों और गरीबी की बातें करते रहे, लेकिन गरीबों की जिन्दगी में बदलाव क्यों नहीं आया..? 60 सालों में बदलाव न आए, ऐसा तो हमारा देश नहीं है, आखिर इसका कारण क्या है..? भाईयों-बहनों, इसका जवाब मुझे मिल नहीं रहा था, मैं बहुत कोशिश करता था कि कांग्रेस की वो कौन सी मानसिकता है, कांग्रेस की वो कौन सी रणनीति है, कांग्रेस की वो कौन सी सोच है, जिसके कारण गरीबों के इतने वोट मिलने के बाद भी उनके हर छोटे-मोटे नेता के गरीबों पर बात करने के बावजूद भी देश में लगातार गरीबी बढ़ती क्यों चली जा रही है..? इस सवाल का जबाव मुझे अभी-अभी मिल गया है, इसका मूल कारण है कि गरीबों को गरीब रखने में ही कांग्रेस पार्टी का राजनीतिक भविष्य छुपा हुआ है..! वे किसी भी हालत में गरीबों को गरीबी से लड़ने की ताकत देना नहीं चाहते हैं, वे किसी भी हालत में गरीबी से मुक्ति का प्रयास नहीं चाहते हैं और उनके भीतर एक ऐसी मानसिकता पड़ी है, जो गरीबों के प्रति उपेक्षा के भाव से भरी हुई है। अगर उनकी ये सोच न होती, उनके सोचने का ये तरीका न होता तो एक चाय वाला, एक गरीब मां का बेटा, सर ऊंचा करे वो कांग्रेस का एक भी नेता सहने को तैयार नहीं है, ये उनकी मानसिकता का दर्शन कराता है..! वे हमारी राजनीतिक विचारों का विरोध करते, हमारे काम का विरोध करते, लेकिन कांग्रेस के नेता हमारी गरीबी का मखौल उड़ा रहे हैं, ये इस बात का सबूत है कि कांग्रेस पार्टी का गरीबों की तरफ देखने का नजरिया क्या है..!

भाईयों-बहनों, मुझे एक बात का जबाव दीजिए, क्या आप गरीबों का अपमान सहेगें..? क्या आप गरीबों का अपमान करने का प्रयास सहेगें..? गरीब विरोधी कांग्रेस की मानसिकता सहेगें..? गरीबों को वोट बैंक बनाने वाली कांग्रेस को सहेगें..? अरे, ये सिर्फ चाय वाले का विषय नहीं है, वो क्या कहते हैं..? वो कहते हैं कि 12 रूपये में खाना मिल जाता है, दूसरा नेता कहता है कि 5 रूपये में खाना मिल जाता है..! आप लोग ही बताइए, क्या 12 रूपए में खाना मिल सकता है..? क्या 5 रूपये में खाना मिल सकता है..? ये गरीब का मजाक नहीं है तो क्या है..! भाईयों-बहनों, गरीबी क्या होती है, गरीब कैसे जिंदगी गुजारा करता है, ठंड ज्यादा पड़ जाएं तो भी गरीब मरता है, धूप ज्यादा निकलें, गर्मी ज्यादा हो जाएं तो भी गरीब मरता है, बीमारी ज्यादा फैल जाएं तो भी गरीब मरता है, सारे संकट अगर किसी को झेलने पड़ते हैं तो वह गरीब को झेलने पड़ते हैं, लेकिन दिल्ली‍ में या लखनऊ में बैठी हुई सरकार को गरीबी के खिलाफ लड़ने की इच्छा या तैयारी नहीं है। मित्रों, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, क्या समय की मांग नहीं है कि हम गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ें..?

भाईयों-बहनों, क्या कारण है कि गंगा-यमुना के प्रदेश हों, मां गंगा इस धरती को पुलकित करती हो, लेकिन आज भी मेरे किसान की जिन्दगी में सुख-चैन के दिन नहीं आएं हो, उसके लिए कौन जिम्मेवार है..? ये पूर्वी उत्तर प्रदेश का कोई गाँव ऐसा नहीं होगा जहाँ के लोग मेरे गुजरात में न रहते हों, मेरे गुजरात में रोजी-रोटी न कमाते हों..! कौन नौजवान बेटा अपने बूढ़े मां-बाप को छोड़कर सैकड़ों किमी. दूर गुजरात जाना पसंद करेगा, जो अपना गाँव, अपने साथी, अपने खेत-खलिहान, अपने बूढे मां-बाप छोड़कर इतनी दूर चला जाए..! आखिर क्यूं..? अगर उसे यहाँ रोजी-रोटी मिलती, उसको मेहनत करने का अवसर मिलता, तो मैं नहीं मानता हूँ कि मेरे उत्तर प्रदेश के नौजवान को गुजरात जाने की नौबत आती..! मित्रों, उत्तर प्रदेश में परमात्मा ने इतना सारा दिया है, इतनी प्राकृतिक कृपा है, अगर सही अर्थ में दिशा पकड़कर यहाँ दस साल मेहनत कर ली जाएं तो ये उत्तर प्रदेश गुजरात से भी आगे निकल सकता है, ऐसा उत्तर प्रदेश बन सकता है..!

भाईयों-बहनों, आज बनारस में नेता जी ने हमें ललकारा है। मेरे लिए खुशी का विषय है कि इन दिनों मैं जहाँ-जहाँ जाता हूँ, बाप और बेटा, दोनों मेरा पीछा करते हैं। और आज उन्होने कहा कि मोदी जी हैसियत नहीं है कि यूपी को गुजरात बना सकें..! नेता जी, क्या आपको गुजरात बनाने का मायना मालूम है..? नेता जी, क्या आपको पता है कि गुजरात बनाने का मतलब क्या होता है..? गुजरात बनाने का मतलब होता है 24 घंटे बिजली, 365 दिन बिजली, हर गाँव-गली में बिजली..! नेता जी, आपकी बात सही है, आपकी हैसियत नहीं है, आप गुजरात नहीं बना सकते, इसके लिए तो 56 इंच का सीना लगता है, आप नहीं बना सकते..! नेता जी, गुजरात बनाने का मतलब होता है, लगातार दस साल तक 10% से भी ज्यादा कृषि विकास दर बनाना, 3-4% पर लुढ़क जाना आपकी हैसियत का नमूना है..! नेता जी, आप गुजरात नहीं बना सकते हैं, दस साल हो गए, गुजरात सुख-चैन की जिंदगी जी रहा है, शांति, एकता और सद्धभावना लेकर आगे बढ़ रहा है, विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है, आप नहीं कर सकते हो..! नेता जी, मुझे खुशी होगी, अगर आप उत्तर प्रदेश को गुजरात जैसा बना दें, तो मेरे गुजरात के लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए उत्तर प्रदेश आने लग जाएं, लेकिन आप नहीं बना सकते हैं..! आपकी सरकार को इतना समर्थन मिला है, क्या किया है आपने लोगों के लिए..? न लोगों को सुरक्षा दे पा रहे हैं, न नौजवानों को रोजगार दे पा रहे हैं, न बहन-बेटियों को सम्मान दे पा रहे हैं, और इतने बड़े उत्तर प्रदेश को आपने अपनी राजनीति के लिए बर्बाद करके रखा हुआ है, हमने इसे आबाद बनाने की शपथ ली है..!

भाईयों-बहनों, अगर हिंदुस्तान से गरीबी मिटानी है, तो अकेला उत्तर प्रदेश पूरे हिंदुस्तान की गरीबी मिटा सकता है, अगर देश में रोजगार देना है तो अकेला उत्तर प्रदेश ही रोजगार दे सकता है, पूरे हिंदुस्तान की शक्ल सूरत अकेला उत्तर प्रदेश बदल सकता है, ऐसी ताकत उत्तर प्रदेश की धरती में है..! मित्रों, सपा, बसपा, कांग्रेस यानि सबका - सबका मालिक एक, आप सभी को मालूम ही है कि कौन है सबका मालिक..! ये सबका मालिक एक वालों का उद्देश्य विकास नहीं है, ये वोट बैंक की राजनीति में डुबे हुए लोग हैं। आप सोचिए, यहाँ गन्ने की खेती करने वाला किसान असहाय जिन्दगी जीने के लिए मजबूर क्यों हुआ है..? यहाँ पानी है, नदियां हैं, लेकिन दूध बाहर से लाना पड़े, ऐसा उत्त‍र प्रदेश किसने बनाया है..? हमारे उत्तर प्रदेश में किसान हैं, पशु हैं, दूध देते हैं, चारा है, पानी है, फिर भी दूध बाहर से क्यों लाना पड़ रहा है..? क्या हमारे उत्तर प्रदेश में अमूल जैसी डेयरी नहीं बन सकती है..? क्या यहाँ के किसानों की आय बढ़ सकती है या नहीं..? लेकिन इन्हे करना ही नहीं है..! दोस्तों, मैं वादा करता हूँ कि अकेली श्वेत क्रांति से, पशुपालन और दूध के माध्यम से उत्तर प्रदेश के गाँवों के नौजवानों को रोजगार मिल सकता है, उत्त‍र प्रदेश के गाँवों के किसानों को ताकत मिल सकती है, उत्तर प्रदेश के गाँवों के किसान की आय बढ़ सकती है और श्वेत क्रांति के कारण देश के आमजनों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है, सपने देखने चाहिए..!

भाईयों-बहनों, ये कांग्रेस पार्टी इस बात को नहीं कर सकती है। हमारे देश में कृषि को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है, हमारी कृषि को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, हमारे कृषि क्षेत्र को बल देने की आवश्यकता है। आज पूरे देश में फर्टिलाइजर पाने के लिए किसान को कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है, ब्लैक मार्केट से फर्टिलाइजर को लेना पड़ रहा है और इस कमाल की सरकार को देखिए, गोरखपुर के फर्टिलाइजर के कारखाने को ताला लगाकर बैठी है..! एक तरफ फर्टिलाइजर की जरूरत है, दूसरी तरफ नौजवानों को रोजगार की जरूरत है और इन कमाल के शासकों को देखिए, फर्टिलाइजर के कारखानों को ताला लगाकर बैठे हैं..! मित्रों, बातें छोटी-छोटी होती हैं, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के आदी ये लोग समझते हैं कि वोट बैंक संभालो, सत्ता संभल जाएगी..! अब वो ज़माना चला गया, अब देश को विकास चाहिए, नौजवानों को रोजगार चाहिए, नई पीढ़ी को अपने भविष्य की सुरक्षा चाहिए, ऐसा माहौल बन चुका है और इसका नेतृत्व कोई सबका मालिक एक नहीं कर सकता है। अकेली भारतीय जनता पार्टी ऐसी है, जो विकास के रास्ते पर चल रही है और अब वही इस काम को कर सकती है..!

भाईयों-बहनों, अगर हमें कृषि क्षेत्र में विकास करना है, तो मैं यहाँ के किसानों को आग्रह करता हूँ कि आपका एक समूह गुजरात जाएं, गन्ने की खेती करने वाले किसान और वहाँ चीनी बनाने वाले कारखाने इनके बीच कितना बढि़या तालमेल है, समय पर चीनी मिलें चालू हो जाती हैं, समय पर गन्ना खरीद लिया जाता है, खरीदने के साथ भुगतान कर दिया जाता है और चीनी बाजार में आती है। मित्रों, विषय व्यवस्था का होता है, लेकिन जो राज्य स्कूल-कॉलेज के एक्जाम ही समय पर नहीं ले पाते हैं, वो चीनी के कारखाने समय पर कैसे चला सकते हैं..! हमारे देश में बहुत सारे इलाके ऐसे हैं जहाँ स्कूल-कॉलेज के एक्जाम भी समय पर नहीं होते हैं, इसके कारण करोड़ों-करोड़ों नौजवानों के अमूल्य एक-एक साल पिछड़ जाता है। हम मानव संसाधन का कितना बड़ा विनाश करते हैं..! क्या हमारी यूनीवर्सिटी, हमारे कॉलेज समय पर टाइम टेबल के तहत स्कूल-कॉलेज चलाकर बच्चों को एक्जाम दिलाकर हिंदुस्तान को और इलाकों की बराबरी में नहीं ला सकते..? वास्तव में इनको करना नहीं है..! इसलिए अगर गाँव है तो रोजगार के लिए कृषि को बल देना होगा, और कृषि को आगे बढ़ाना है तो कृषि को तीन हिस्सों में बांटने की जरूरत है, समय की मांग है कि कृषि के क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटा जाए - एक तिहाई, हम जो परम्परागत कृषि करते हैं इसको करें, एक तिहाई, हम पशुपालन करें और एक तिहाई हमारे खेत के आखिरी छोर पर, बॉर्डर पर वृक्षों की खेती करें, पेड़ लगाएं..! आज देश को टिम्बर इम्पोर्ट करना पड़ता है। अगर हमारा किसान अपने खेत के बॉर्डर पर इस प्रकार से पेड़ लगा देता है, घर में बेटी का जन्म हो उसके साथ में पांच पेड़ लगा दे, तो जब बेटी की शादी करने की उम्र हो जाएं तो उन पांच पेड़ को काटकर बेटी की शादी कराने का खर्चा निकल सकता है, हमारे किसान को कर्ज नहीं लेना पड़ेगा। लेकिन इसके लिए सही सोच चाहिए, सही दिशा चाहिए, सही नेतृत्व चाहिए, तब जाकर समाज को विकास की ओर ले जा सकते हैं..!

भाईयों-बहनों, ये लोग तो पूरा समय इसी बात में लगाते रहते हैं कि गन्ने का दाम कितना मिलें, कितना न मिलें, चीनी की मिल चालू हो या न चालू हो, इसी में समय की बर्बादी हो रही है..! मित्रों, हम सुशासन के बिना स्थि‍तियों को बदल नहीं सकते। मैं अनुभव के आधार पर कहता हूँ कि ये देश गरीब नहीं है, अमीर देश के लोगों को गरीब बनाया गया है, राजनीतिक हेतू पार करने के लिए बनाया गया है। देश अमीर है और लोग भी अमीर बन सकते हैं, और हमें गरीबी से मुक्ति का अभियान चलाने के लिए 2014 का चुनाव लड़ना है..!

भाईयों-बहनों, सामान्य मानवी को सुरक्षा मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए..? क्या कारण है कि गाँव के लोगों को बंदुक का लाइसेंस लेने के लिए कतार में खड़ा रहना पड़े, कहीं भी बाहर जाएं तो बंदुकधारियों को साथ में रखना पड़े, इसका क्या कारण हो सकता है..? मित्रों, मैं गुजरात का अनुभव बताता हूँ, उत्तर प्रदेश से गुजरात में रोजी-रोटी कमाने हुए आये नौजवान, जब घर से निकलते हैं तो मां को बहुत चिंता रहती है। आजकल मोबाइल फोन होने के कारण बेटे के ट्रेन में बैठने के बाद मां हर घंटे उसको फोन करती है कि बेटा कहाँ पहुंचे, कोई तकलीफ तो नहीं है, ट्रेन में संभालकर बैठना, सामान संभालकर रखना, बाहर की कोई चीज मत खाना, मैंने घर से जो बनाकर दिया है वही खाना, मां हर घंटे मोबाइल फोन से बेटे का हाल लेती रहती है... बेटा कहता है, मां तुम सो जाओ, अब तो गाड़ी चल दी है, मैं गुजरात जा रहा हूँ, चिंता मत करो... लेकिन मां सोती नहीं है, मां लगातार हर घंटे बेटे का हाल पूछती रहती है... फिर पूछती है, बेटा गुजरात आया कि नहीं, अब कितना दूर है, तुम गुजरात पहुंचे कि नहीं पहुंचे, बेटा कहता है मां तुम सो जाओ, रात देर हो चुकी है, ट्रेन तो पहुंचेगी... मां मानने को तैयार नहीं, लेकिन जैसे ही बेटा बताता है कि मां, अब ट्रेन गुजरात में प्रवेश कर चुकी है, तब मां कहती है बस बेटा, अब मैं सो जाती हूँ। गुजरात के अंदर तुम्हारी ट्रेन पहुंच गई, मतलब अब तुम सलामत हो..! मित्रों, ये हाल पूरे हिंदुस्तान का बन सकता है या नहीं..? इसलिए मैं आप सभी के पास आया हूँ, हम हिंदुस्तान को रोता हुआ देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान को खून से लथपथ देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान को बेरोजगार देखना नहीं चाहते हैं, हम हिंदुस्तान के नौजवान को याचक के रूप में देखना नहीं चाहते हैं..!

भाईयों-बहनों, आज गोरखपुर की पवित्र धरती से मैं देशवासियों ये कुछ मांगना चाहता हूँ, क्या आप सभी देंगे..? दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बताइए, देंगे..? मैं देशवासियों से कहता हूँ, गोरखपुर की धरती से कह रहा हूँ, मेरे उत्तर प्रदेश के सभी भाईयों-बहनों को कह रहा हूँ, आपने 60 साल तक शासक चुने हैं, आपने 60 साल तक शासकों को देश और राज्य चलाने का काम दिया है, मैं आपसे सिर्फ 60 महीने मांगने के लिए आया हूँ..! आपने 60 साल दिए हैं, मुझे 60 महीने दीजिए, आपने शासकों को चुना है, एक बार सेवक को चुनकर के देखिए..! भाईयों-बहनों, हम आपकी जिंदगी में बदलाव लाकर रहेंगे, हम चैन से नहीं बैठेंगे, आपके सपनों को पूरा करने के लिए हम हमारा जीवन खपा देने वाले लोग हैं..! मित्रों, आपके चेहरे पर मुस्कान हो, आप सपने देख पाएं, आप अपने अरमानों को पूरा कर पाएं, ऐसा हिंदुस्तान आपको देने का मैं आज वादा करने आया हूँ..!

ज नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है, नेता जी सुभाष बोस ने कहा था - चलो दिल्ली..! सुभाष बाबू ने कहा था - तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा..! भाईयों-बहनों, मैं आपको कह रहा हूँ कि आप मुझे 60 महीने दीजिए, मैं आपको सुख चैन की जिदंगी दूंगा, ये वादा मैं आपसे करने आया हूँ..! मित्रों, हम विकास का मंत्र लेकर चले हैं, 60 साल तक वोट बैंक की राजनीति को बहुत कुछ मिला है, 60 महीने के लिए विकास की राजनीति को आशीर्वाद दे दीजिए, आप देखिएगा, नौजवान के सपने पूरे होगें..! क्या यहाँ बैठे हुए मां-बाप में कोई भी चाहता है कि जिन मुसीबतों में उसने अपनी जिंदगी गुजारी, उसकी संतान भी उन्ही मुसीबतों से जिंदगी गुजारे..? क्या कोई भी मां-बाप चाहेगा..? आपके मां-बाप को जैसी जिदंगी गुजारनी पड़ी, क्या आज के नौजवान वैसी जिदंगी गुजारना चाहते हैं..? क्या आप सभी को प्रगति चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को विकास चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को गाँव में बिजली चाहिए या नहीं..? क्या आप सभी को बच्चों के लिए शिक्षा चाहिए या नहीं..? क्या आपको गाँवों में रोड़ चाहिए या नहीं..? आपके खेतों को पानी चाहिए या नहीं..? यही तो काम सरकार का होता है..! इसलिए हम इस देश को न इस हाल में देखना चाहते हैं, न ऐसा रहने देना चाहते हैं, हम दुनिया की बराबरी करने वाला हिंदुस्‍तान बनाना चाहते हैं और इसके लिए मुझे आपका साथ चाहिए..!

भाईयों-बहनों, 2014 में जब चुनाव आएगा तब तो आप जीत देगें ही देगें, लेकिन आज मैं नतमस्तक होकर कहता हूँ कि आपने मुझे जीत लिया है, आपने मुझे अपना बना लिया है, आपके इस प्यार को मैं ब्याज समेत विकास करके लौटाऊंगा, ये मैं वादा करता हूँ..

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए -

भारत माता की जय..! भारत माता की जय..!

वंदे मातरम्..!  वंदे मातरम्..!  वंदे मातरम्..!

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Treat lockdown only as a measure of the last resort, we have to concentrate on micro containment zones: PM
April 20, 2021
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The nation has fought against the coronavirus pandemic with discipline and patience and must continue to do so: PM
India has vaccinated at the fastest pace in the world: PM Modi
Lockdowns must only be chosen as the last resort and focus must be more on micro-containment zones: PM Modi

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार !

कोरोना के खिलाफ देश आज फिर बहुत बड़ी लड़ाई लड़ रहा है। कुछ सप्ताह पहले तक स्थितियां संभली हुई थीं और फिर ये कोरोना की दूसरी वेव तूफान बनकर आ गई। जो पीड़ा आपने सही है, जो पीड़ा आप सह रहे हैं, उसका मुझे पूरा एहसास है। जिन लोगों ने बीते दिनो में अपनो को खोया है, मैं सभी देशवासियों की तरफ़ से उनके प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। परिवार के एक सदस्य के रूप में, मैं आपके दुःख में शामिल हूं। चुनौती बड़ी है लेकिन हमें मिलकर अपने संकल्प, अपने हौसले और तैयारी के साथ इसको पार करना है।

साथियों,

अपनी बात को विस्तार देने से पहले मैं देश के सभी डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ, हमारे सभी सफाई कर्मचारी भाई बहन, हमारे एंबुलेंस के ड्राइवर्स, हमारे सुरक्षाबल-पुलिसकर्मी, सभी की सराहना करूंगा। आपने कोरोना की पहली वेव में भी अपना जीवन दांव पर लगाकर लोगों को बचाया था। आज आप फिर इस संकट में अपने परिवार, अपने सुख, अपनी चिंता छोड़कर दूसरों का जीवन बचाने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

साथियों,

हमारे शास्त्रों में कहा गया है- त्याज्यम् न धैर्यम्, विधुरेऽपि काले। अर्थात, कठिन से कठिन समय में भी हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए। किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए हम सही निर्णय लें, सही दिशा में प्रयास करें, तभी हम विजय हासिल कर सकते हैं। इसी मंत्र को सामने रखकर आज देश दिन रात काम कर रहा है। बीते कुछ दिनों में जो फैसले लिए गए हैं, जो कदम उठाए गए हैं, वो स्थिति को तेजी से सुधारेंगे। इस बार कोरोना संकट में देश के अनेक हिस्से में ऑक्सीजन की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ी है। इस विषय पर तेजी से और पूरी संवेदनशीलता के साथ काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, प्राइवेट सेक्टर, सभी की पूरी कोशिश है कि हर जरूरतमंद को ऑक्सीजन मिले। ऑक्सीजन प्रॉडक्शन और सप्लाई को बढ़ाने के लिए भी कई स्तरों पर उपाय किए जा रहे हैं। राज्यों में नए ऑक्सीजन प्लांट्स हों, एक लाख नए सिलेंडर पहुंचाने हों, औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल हो रही ऑक्सीजन का मेडिकल इस्तेमाल हो, ऑक्सीजन रेल हो, हर प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

इस बार जैसे ही कोरोना के केस बढ़े, देश के फार्मा सेक्टर ने दवाइयों का उत्पादन और बढ़ा दिया है। आज जनवरी-फरवरी की तुलना में देश में कई गुना ज्यादा दवाइयों का प्रोडक्शन हो रहा है। इसे अभी और तेज किया जा रहा है। कल भी मेरी देश की फार्मा इंडस्ट्री के बड़े जो प्रमुख लोग हैं, एक्सपर्ट्स लोग है उनसे बहुत लंबी बात हुई है। प्रॉडक्शन बढ़ाने के लिए हर तरीके से दवाई कंपनियों की मदद ली जा रही है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे देश के पास इतना मजबूत फार्मा सेक्टर है, जो बहुत अच्छी और तेजी से दवाइयां बनाता है। इसके साथ ही अस्पतालों में बेड की संख्या को बढ़ाने का भी काम तेजी से चल रहा है। कुछ शहरों में ज्यादा डिमांड को देखते हुए विशेष और विशाल कोविड हॉस्पिटल बनाए जा रहे हैं।

साथियों,

पिछले वर्ष, जब देश में कोरोना के कुछ ही मरीज सामने आए थे, उसी समय भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी वैक्‍सीन्‍स के लिए काम शुरू कर दिया गया था। हमारे वैज्ञानिकों ने दिन-रात एक करके बहुत कम समय में देशवासियों के लिए वैक्‍सीन्‍स विकसित की हैं। आज दुनिया की सबसे सस्ती वैक्सीन भारत में है। भारत की कोल्ड चेन व्यवस्था के अनुकूल वैक्सीन हमारे पास है। इस प्रयास में हमारे प्राईवेट सेक्‍टर ने innovation और enterprise की भावना का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वैक्सीन्स की approvals और regulatory प्रोसेसज को फास्ट ट्रैक पर रखने के साथ ही, सभी साइंटिफिक और regulatory मदद को भी बढ़ाया गया है। यह एक team effort है जिसके कारण हमारा भारत, दो मेड इन इंडिया वेक्‍सीन्‍स के साथ दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू कर पाया। टीकाकरण के पहले चरण से ही गति के साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों तक, जरूरतमंद लोगों तक वैक्सीन पहुंचे। दुनिया में सबसे तेजी से भारत में पहले 10 करोड़, फिर 11 करोड़ और अब 12 करोड़ वैक्सीन के डोस दिए गए हैं। आज कोरोना से इस लड़ाई में हमें हौसला मिलता है कि हमारे हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स और सीनियर सिटीजन के एक बड़े हिस्से को वेक्‍सीन का लाभ मिल चुका है।

साथियों,

कल ही वैक्सीनेशन को लेकर हुए एक और अहम फैसला भी हमने किया है। एक मई के बाद से, 18 वर्ष के ऊपर के किसी भी व्यक्ति को वैक्सीनेट किया जा सकेगा। अब भारत में जो वैक्सीन बनेगी, उसका आधा हिस्सा सीधे राज्यों और अस्पतालों को भी मिलेगा। इस बीच गरीबों, बुजुर्गों, निम्‍न वर्ग के लोग निम्‍न मध्‍यम वर्ग के लोग और 45 वर्ष की आयु के ऊपर के व्यक्तियों के लिए केंद्र सरकार का जो वैक्सीनेशन कार्यक्रम चल रहा है, वो भी उतनी ही तेजी से जारी रहेगा। पहले की तरह ही सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वैक्सीन मिलती रहेगी जिसका फायदा जैसा मैनें कहा हमारे गरीब परिवार हो, हमारे निम्‍न वर्ग, मध्‍यम वर्ग के परिवार हो वो उनका लाभ उठा सकेगें।

साथियों,

हम सभी का प्रयास, जीवन बचाने के लिए है और जीवन बचाने के लिए तो है ही, प्रयास ये भी है कि आर्थिक गतिविधियां और आजीविका, कम से कम प्रभावित हों। प्रयास का तरीका यही रखा जाए। वैक्सीनेशन को 18 वर्ष की आयु के ऊपर के लोगों के लिए ओपन करने से शहरों में जो हमारी वर्कफोर्स है, उसे तेजी से वैक्सीन उपलब्ध होगी। राज्यों और केंद्र सरकार के प्रयासों से, श्रमिकों को भी तेजी से वैक्सीन मिलने लगेगी। मेरा राज्य प्रशासन से आग्रह है कि वो श्रमिकों का भरोसा जगाए रखें, उनसे आग्रह करें कि वो जहां हैं, वहीं रहें। राज्यों द्वारा दिया गया ये भरोसा उनकी बहुत मदद करेगा कि वो जिस शहर में हैं वहीं पर अगले कुछ दिनों में वैक्सीन भी लगेगी और उनका काम भी बंद नहीं होगा।

साथियों,

पिछली बार जो परिस्थितियां थीं, वो अभी से काफी भिन्न थीं। तब हमारे पास इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए कोरोना स्पेसिफिक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। आप याद करिए, देश की क्या स्थिति थी। कोरोना टेस्टिंग के लिए पर्याप्त लैब नहीं थी, PPEs का कोई प्रोडक्शन नहीं था। हमारे पास इस बीमारी के ट्रीटमेंट के लिए कोई खास जानकारी भी नहीं थी। लेकिन बहुत ही कम समय में हमने इन चीजों में सुधार किया। आज हमारे डॉक्टरों ने कोरोना के इलाज की बहुत ही अच्छी एक्सपर्टीज हासिल कर ली है, वो ज्यादा से ज्यादा जीवन बचा रहे हैं। आज हमारे पास बड़ी मात्रा में PPE किट्स हैं, लैब्‍स् का बड़ा नेटवर्क है और हम लोग टेस्टिंग की सुविधा को निरंतर बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

देश ने कोरोना के खिलाफ अब तक बहुत मजबूती से और बहुत धैर्य से लड़ाई लड़ी है। इसका श्रेय आप सभी देशवासियों को ही जाता है। अनुशासन और धैर्य के साथ कोरोना से लड़ते हुए आप देश को यहां तक लाए हैं। मुझे विश्वास है, जनभागीदारी की ताकत से हम कोरोना के इस तूफान को भी परास्त कर पाएंगे। आज हम अपने चारों और देख रहे है कि कैसे कई लोग, कई सामाजिक संस्थाये ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाने में दिन रात जुटे हैं। दवाई पहुँचाना हो, खाने या रहने की व्यवस्था करनी हो, लोग पूरे मनोयोग के साथ काम कर रहे हैं। मैं इन सभी के सेवा भाव को नमन करता हूँ और देशवासियों से अपील करता हूँ की अधिक से अधिक मात्रा में इस संकट की घड़ी में आगे आए और ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाये। समाज के पुरुषार्थ और सेवा के संकल्प से ही हम ये लड़ाई जीत पायेंगे। मेरा युवा साथियों से अनुरोध है कि वो अपनी सोसायटी में, मौहल्ले में, अपार्टमेंट्स में छोटी छोटी कमेटियाँ बनाकर कोविड अनुशासन का पालन करवाने में मदद करे। हम ऐसा करेंगे तो सरकारों को ना कभी कंटेनमेंट ज़ोन बनाने की जरूरत पड़ेगी ना कर्फ़्यू लगाने की जरूरत पड़ेगी और लॉकडाउन का तो सवाल ही नही उठता। आवश्‍यकता ही नही पड़ेगी। स्वच्छता अभियान के समय, देश में जागरूकता फैलाने के लिए मेरे बाल मित्रों ने बहुत मदद की थी। छोटे-छोटे बालक 5वीं, 7वीं, 10वीं, में पढ़ने वाले। उन्होंने घर के लोगों को समझाया था, मनाया था। उन्होंने बड़ों को भी स्वच्छता का संदेश दिया था। आज मैं फिर अपने बाल मित्रों से एक बात विशेष तौर पर कहना चाहता हूं। मेरे बाल मित्र, घर में ऐसा माहौल बनाइये कि बिना काम, बिना कारण घर के लोग, घर से बाहर न निकलें। आपकी जिद बहुत बड़ा परिणाम ला सकती है। प्रचार माध्यमों से भी मेरी प्रार्थना है कि ऐसे संकट की घड़ी में वो लोगों को सतर्क और जागरूक करने के लिए जो प्रयास कर रहे हैं, उसे और बढ़ाएं। इसके साथ ही, इसके लिए भी काम करें कि डर का माहौल कम हो सके, लोग अफवाह और भ्रम में न आएं।

साथियों,

आज की स्थिति में हमें देश को लॉकडाउन से बचाना है। मैं राज्यों से भी अनुरोध करूंगा कि वो लॉकडाउन को अंतिम विकल्प के रूप में ही इस्तेमाल करें। लॉकडाउन से बचने की भरपूर कोशिश करनी है। और माइक्रो कन्टेनमेंट जोन पर ही ध्यान केंद्रित करना है। हम अपनी अर्थव्यवस्था की सेहत भी सुधारेंगे और देशवासियों की सेहत का भी ध्यान रखेंगे।

साथियों,

आज नवरात्रि का आखिरी दिन है। कल रामनवमी है और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का हम सभी को यही संदेश है कि हम मर्यादाओं का पालन करें। कोरोना के इस संकट काल में, कोरोना के बचने के जो भी उपाय हैं, कृपया करके उनका पालन शत प्रतिशत करिए। दवाई भी, कड़ाई भी के मंत्र को कभी भी भूलना नही है। ये मंत्र जरूरी है, वैक्‍सीन के बाद भी जरूरी है। रमजान के पवित्र महीने का भी आज सातवां दिन है। रमजान हमें धैर्य, आत्मसंयम और अनुशासन की सीख देता है। कोरोना के खिलाफ जंग जीतने के लिए अनुशासन भी उसकी भी ही जरूरत है। जब जरूरी हो, तभी बाहर निकलें, कोविड अनुशासन का पूरा पालन करें, मेरा आप सभी से यही आग्रह है। मैं आपको फिर ये भरोसा देता हूँ, आपके इस साहस, धैर्य और अनुशासन के साथ जुड़कर, आज जो परिस्थितियां हैं, उन्हें बदलने में देश कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगा। आप सभी स्वस्थ रहें, आपका परिवार सब स्‍वस्‍थ रहे इसी कामना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !