The rich don't need the government. Government is for the poor, for their welfare as they have no support apart from the government: PM
Citizens of India have certain expectation from the Govt, we must fulfil their expectations: PM
Many polls were fought in the name of poor but nothing was done for the poor: PM Modi
JDU, RJD and congress alliance is a ‘Mahaswarthbandhan’: PM
'Sinhasan Khali Karo Ki Janata Aati Hai' -These powerful lines from the poem of Rashtrakavi Dinkar has given strength to the youth of Bihar: PM
This election is a war between Vikasraaj vs Junglraaj: PM
Great personalities like JP Narayan, Rashtrakavi Dinkar, Shree babu are source of Inspiration for the nation: PM
Begusarai has tremendous scope for growth in Industrial development: PM Modi
Caste politics and the politics of vote bank is the main reason behind the plight of Bihar: PM
The day Bihar becomes a developed state; India will be No. 1 country in the world: PM

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय,

मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे वरिष्ठ साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री श्री रजनीश जी, बिहार विधानसभा पक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, हमारे वरिष्ठ नेता डॉ. सी पी ठाकुर जी, बेगूसराय के जनप्रिय सांसद डॉ. भोला सिंह जी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद श्रीमान राम कुमार शर्मा जी, बेगूसराय भाजपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान जयराम दास जी, लोजपा के बेगूसराय जिलाध्यक्ष संजय पासवान जी, हम पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीमान मोहम्मद हसन जी, रालोसपा के जिलाध्यक्ष श्रीमान राजीव कुमार जी, लोजपा के चेरिया बरियारपुर के उम्मीदवार श्री अनिल कुमार चौधरी जी, लोजपा के बछवाड़ा के उम्मीदवार श्री अरविंद कुमार सिंह, भाजपा से तेघड़ा विधानसभा के उम्मीदवार राम लखन सिंह, भाजपा से मटिहानी विधानसभा के उम्मीदवार सर्वेश कुमार, लोजपा के उम्मीदवार साहेबपुर कमाल से मोहम्मद असलम जी, बेगूसराय से भाजपा के उम्मीदवार सुरेन्द्र मेहता जी, भाजपा से बिकरी विधानसभा के उम्मीदवार श्री रामानंद राम जी, लोजपा के उम्मीदवार मिथलेश जी निशांत, इन सभी मेरे साथियों के साथ आप सभी जोर से बोलें - भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

भाईयों-बहनों, किसी प्रदेश में राज्य स्तर की रैली करनी हो, पूरे राज्य से लोगों को बुलाया गया हो, और अगर ऐसी रैली हो जाए तो लोग मानेंगे कि ऐतिहासिक रैली हुई है। एक जिले में इतना बड़ा जमघट, मैं जहाँ देख रहा हूँ माथे ही माथे नज़र आ रहे हैं; ये रैली नहीं, रैला है। 60 साल तक बिहार को तबाह करने वाले ये तीन लोग मिल गए हैं, ये इनको बहाकर फेंक देंगे। मैं लोकसभा के चुनाव में यहाँ आ नहीं पाया था और हमारे भोला बाबू ये शिकायत कर रहे थे, आज मैंने उनकी शिकायत दूर कर दी और ये हमारी ज़िम्मेवारी है कि हिन्दुस्तान का छोटे-से-छोटा नागरिक भी हमसे अपेक्षा कर सकता है और उन अपेक्षाओं को पूरा करने का हमें प्रयास करना चाहिए। चुनावी राजनीति हमने भी देखी है। चुनाव में जनता-जनार्दन के दिल में उठते सवालिया निशानों को भी देखा है लेकिन मैंने जब से चुनाव प्रचार के लिए बिहार आना शुरू किया है, मैंने ऐसा पहले कभी चुनाव नहीं देखा जैसा मैं आज बिहार में देख रहा हूँ। मैं अनुभव कर रहा हूँ कि आज बिहार के नागरिकों के मन में चुनाव के नतीजे क्या होंगे, कैसे होंगे, इस पर कोई सवालिया निशान ही नहीं है। बिहार की जनता ने मान लिया है और ठान लिया है कि भाजपा के नेतृत्व में राजग (एनडीए) की सरकार बन कर रहेगी और बिहार विकासवाद के रास्ते पर चल पड़ेगा, ये मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूँ।

आप बताएं, आखिर सरकार किसके लिए होती है? अमीरों को कभी सरकार की जरुरत पड़ती है क्या? अमीरों को कभी सरकार की जरुरत नहीं पड़ती है। अगर अमीर बीमार हो जाए तो डॉक्टर उसके घर के बाहर कतार लगाकर खड़े हो जाएंगे लेकिन अगर एक गरीब बीमार हो जाए तो उस बीमार के लिए सरकार के अलावा कोई सहारा नहीं होता है। किसी अमीर का बेटा अगर पढ़ना चाहता है तो उसे दुनिया के अच्छे-से-अच्छे टीचर मिल जाएंगे, अच्छे-से-अच्छे स्कूल मिल जाएंगे लेकिन अगर किसी गरीब के बच्चे को पढ़ना हो तो सरकारी शिक्षक और सरकारी स्कूल पर ही भरोसा करना पड़ता है। किसी अमीर को कहीं जाना है तो हवाई जहाज उसका इंतज़ार करता है लेकिन किसी गरीब को अपनी सब्जी, दूध आदि भी बेचने दूसरे गाँव जाना है तो उसे सरकारी बस का ही इंतज़ार करना पड़ता है। अगर बस नहीं आई तो उसका जाना रूक जाएगा।

सरकार गरीब के लिए होती है, गरीबों का जीवन बदलने और उनके कल्याण के लिए होती है लेकिन हमारे देश में चुनाव तो गरीबों के नाम पर लड़े गए लेकिन सरकार गरीबों के लिए नहीं चलाई गई। हमारे देश में वोट तो गरीबों के नाम पर मांगे गए लेकिन सरकार गरीबों के कल्याण के लिए नहीं चलाई गई। अगर इस देश में गरीबों के लिए कुछ हुआ होता; आज़ादी के इतने सालों बाद तक जितनी सरकारें आईं, अगर वो सभी सरकारें गरीबों को ध्यान में रखकर कुछ काम करती तो न मेरे देश में गरीबों की संख्या बढ़ती, न देश में गरीबी एवं भुखमरी रहती और न मेरे देश में बीमारी एवं अशिक्षा बढ़ती।

इस चुनाव में उन सभी लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप सब वोट देने से पहले अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार पूछ लीजिए कि ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ बना हुआ है; ये महागठबंधन नहीं, ‘महास्वार्थबंधन’ है। इस ‘महास्वार्थबंधन’ के तीन पार्टनर हैं जो मिलकर के बिहार को फिर से एक बार हड़प करना चाहते हैं। ये तीन कौन लोग हैं, ये तीन कौन दल हैं, बिहार की जनता याद रखे।

एक कांग्रेस पार्टी है जिसने 35 साल तक बिहार में राज किया है। मुझे बताईये, जिस कांग्रेस ने 35 साल राज किया, उसने इतने वर्षों में कुछ भला किया है? बिहार का विकास किया है क्या? बिहार का नौजवान का भला किया है? उन्हें रोजगार दिलाया है? बिहार से गुंडागर्दी समाप्त की है? जो 35 साल में कुछ नहीं कर पाए, वो आज कुछ कर पाएंगे क्या? उनपर भरोसा कर सकते हैं क्या? उनसे कोई आशा कर सकते हैं क्या? दूसरे हैं – जंगलराज के प्रतीक। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के नाम से गरीबों के गीत गाते-गाते वो 15 साल तक बिहार के सिंहासन पर बैठे। 15 साल में क्या-क्या खाया, बिहार की जनता भली-भांति जानती है। कोई मुझे बताये कि 15 साल में कहीं सड़क का नामो-निशान रहने दिया? स्कूलें चलने दीं? शिक्षकों की भर्ती की? डॉक्टर बिहार छोड़कर भागे कि नहीं? नौजवानों को पलायन करना पड़ा कि नहीं? मां-बेटियों का सम्मान बचा था? क्या जिन्होंने 15 साल तक आपको ऐसी सरकार दी आप क्या उनपर फिर से भरोसा कर सकते हो? वो आपका भला कर सकते हैं? इसके बाद अगले 10 साल जो जंगलराज को हटाने का नाम लेकर के आये थे, वो फिर से जंगलराज लाने के लिए आपके सामने बातें कर रहे हैं, उनकी बातों पर भरोसा किया जा सकता है क्या? 35 साल कांग्रेस और 25 साल ये बड़ा भाई और छोटा भाई अपना कारोबार चलाते रहे।

इन बड़ा भाई - छोटा भाई का रिश्ता तो देखो; बड़ा भाई छोटे भाई को कभी हत्यारा कहता है तो कभी तोता कहता है। 60 साल तक जिन्होंने बिहार में सरकारें चलाई हैं, गरीबों के नाम पर राजनीति की है लेकिन इन्होंने बिहार को दिन-रात बर्बाद करने का ही काम किया है। भाईयों-बहनों, ऐसी सरकारों को फिर से कभी आने देना चाहिए क्या?

आज 8 अक्टूबर है और आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण का स्वर्गवास हुआ था। आज उनकी पुण्यतिथि पर आप सबसे आग्रह करता हूँ कि पल भर के लिए उस महापुरुष, बिहार के सपूत और हिन्दुस्तान के गौरव को याद कीजिये और दिनकर जी के उस बात को हिन्दुस्तान के कोने-कोने में पहुंचा दीजिए। “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” – इसी धरती के संतान और राष्ट्रकवि दिनकर के इस मंत्र ने हिन्दुस्तान के नौजवान को खड़ा कर दिया। आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम् की गूँज जैसे एक देश को नई ताकत देती थी, वैसे देश में भ्रष्टाचार की मुक्ति के लिए, कुशासन से मुक्ति के लिए राष्ट्रकवि दिनकर की यह कविता, ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ अनेकों नौजवानों को प्रेरणा देती है।

ये भूमि उन महापुरुषों की है जिन्होंने आजादी के आंदोलन में एक नई ताकत दी। 1930 में गांधीजी की दांडी यात्रा हिन्दुस्तान की आजादी के आंदोलन महत्वपूर्ण मानी जाती है लेकिन जब नमक सत्याग्रह की बात आती है तो इसी धरती के महापुरुष श्री बाबू की याद आती है। उस महापुरुष ने कितना कष्ट झेला था। आईए, आज हम बेगूसराय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण, राष्ट्रकवि दिनकर जैसे सभी महापुरुषों को याद करें हम लोगों के लिए जीने-मरने वाले श्री बाबू को याद करें और बिहार में विकासराज लाने का संकल्प करें।

एक तरफ़ जंगलराज लाने की कोशिश और दूसरी तरफ़ विकासराज लाने की कोशिश; ये चुनाव जंगलराज और विकासराज के बीच की लड़ाई है। आप मुझे बताईये कि बिहार को विकासराज चाहिए कि नहीं? बिहार को सड़क, रेल, उद्योग चाहिए कि नहीं? नौजवानों को रोजगार चाहिए कि नहीं? उनका पलायन रूकना चाहिए कि नहीं? अगर ये करना है तो बिहार में अब जंगलराज को मौका नहीं देना है। अब बिहार में सिर्फ़ विकासराज चाहिए। विकास का रास्ता ही हमारी समस्याओं का समाधान करेगा इसलिए आज मैं आपके पास विकास का संदेश लेकर आया हूँ।

मैं हैरान हूँ। आप लालू जी 1990 के डायलॉग निकाल लीजिए और 2015 के डायलॉग निकाल लीजिए; वही बात, न नया विचार है, न नई सोच है इतना जरुर है कि अब ख़ुद के बजाय बेटों को लेकर आये हैं, बाकि कोई फ़र्क नहीं आया है। मैं गुजरात की धरती से आता हूँ। मेरा जन्म वहां हुआ है और वो द्वारकाधीश की धरती है। श्री कृष्ण की द्वारका नगरी... उन्होंने गौ-प्रेम सिखाया था और आज भी गुजरात के लोग गौ-भक्ति में इतने लीन हैं कि वहां श्वेत क्रांति हुई, दूध का कारोबार इतना बढ़ा कि आज अमूल पूरी दुनिया में पहचाना जा रहा है। सच्चा यदुवंशी श्री कृष्ण की परंपरा का निर्वाह करने का संकल्प लेता है और यहाँ नेता यदुवंशियों का कितना अपमान कर रहे हैं।

मैं तो हैरान हूँ। आपको कैसी-कैसी गालियां दी जा रही हैं। लालू जी, आप जो कुछ भी बने, इन्हीं यदुवंशियों के आशीर्वाद से बने थे और आज आप उनको इतनी भयंकर गाली दे रहे हो; वो क्या खाते हैं, ऐसे गंभीर आरोप लगा रहे हो। मुझे शर्म आती है कभी मेरे देशवासियों, मेरे यदुवंशियों का ऐसा अपमान मत करो। मैं कृष्ण की धरती से आया हूँ, आपकी इन बातों से मुझे पीड़ा जरा ज्यादा हो रही है। और बोलते क्या हैं, जब मीडिया वालों ने पकड़ लिया, यदुवंशी समाज के लोग आगे आ गए तो क्या कहने लगे; वो कहते हैं – मेरे अन्दर शैतान प्रवेश कर गया। मैं बहुत हैरान हूँ कि क्या शैतान को भी यही ठिकाना मिला क्या, उसे क्या इसी शरीर में प्रवेश करने का मन कर गया क्या, बिहार में उनको और कोई नहीं मिला, हिन्दुस्तान में उनको और कोई नहीं मिला, पूरे विश्व में कोई और नहीं मिला, मिला तो सिर्फ़ लालू जी का शरीर मिला। देखिये, वो शैतान की मेहमाननवाजी भी कैसी कर रहे हैं, जैसे उनका कोई पुराना साथी आया हो, वैसी खातिरदारी कर रहे हैं वो।

भाईयों-बहनों, हमें तो जंगलराज से इस बिहार को बचाना है, रोजगार के लिए बल देना है और इसलिए मैं आज आपके पास आया हूँ। ये इलाक़ा औद्योगिक विकास के लिए एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है। यहाँ के नौजवानों को रोजगार मिलेगा, सिर्फ़ ऐसा नहीं है बल्कि ये बेगूसराय की ताकत इतनी है कि ये बिहार के और नौजवानों को भी रोजगार देने वाला केंद्र बन सकता है लेकिन कोई यहाँ यहाँ आने की हिम्मत नहीं करता है क्योंकि वो कहता है कि जितना पैसा वो लगाएगा, उससे ज्यादा पैसा तो फ़िरौती में देना पड़ेगा। यहाँ तो एक ही उद्योग लगाया जंगलराज ने – अपहरण का उद्योग। किडनैप करो, फ़िरौती लो और अपना मौज-मस्ती करो, यही कारोबार चलता रहा तो कौन बेगूसराय आएगा।

आप देखिये, बरौनी का फ़र्टिलाइज़र का कारखाना, वो चालू होना चाहिए कि नहीं? उसका विकास होना चाहिए कि नहीं? यह आपका हक़ है कि नहीं? अगर आपका हक़ है तो मुझे वो हक़ पूरा करना चाहिए कि नहीं? इसलिए मेरी सरकार ने निर्णय किया कि उस फ़र्टिलाइज़र के लिए 1500 करोड़ लगाकर के फिर से यहाँ के नौजवानों को रोजगार दें और उनका विकास करें।

गंगा तट पर जो लोग रहते हैं, वो परेशान हैं कि बालू चोरों ने उनका जीना हराम करके रखा है, उनकी जमीन नहीं बच पा रही है, उनकी खेती नहीं बच पा रही है। जो लोग इस प्रकार के खेल खेलते हैं, उसका कारण ये है कि बिहार की सरकारों ने बिहार की दो ताक़तों को नज़रअंदाज़ किया है; एक ताक़त है, पानी और दूसरी यहाँ की जवानी। बिहार के कुछ इलाक़ों में इतना पानी है लेकिन उस पानी के कारण यहाँ तबाही हो रही है और बिहार में इतनी जवानी है कि उन्हें रोजी-रोटी के लिए बाहर जाना पड़ता है। ये दोनों बिहार का भाग्य बदल देंगे, ये हमारा विश्वास है इसलिए मेरे नौजवानों, हमें विकास के रास्ते पर चलना है।

अहंकार कहाँ से कहाँ पहुंचा देता है, ये आपने देखा है कांग्रेस पार्टी का अहंकार सातवें आसमान पर रहा और उसका परिणाम ये रहा कि कभी 440 सांसदों के साथ बैठते थे, पर आज 40 पर सिमट गए। जनता-जनार्दन गलतियों को माफ़ कर सकती है, अहंकार को नहीं। यहाँ के एक अहंकारी नेता अपने अहंकार के लिए उन्होंने बिहार के भाग्य को दांव पर लगा दिया है। इस चुनाव में ऐसे अहंकार को चकनाचूर करना हर बिहार प्रेमी का दायित्व है।

ये इलाक़ा है जहाँ परंपरागत रूप से किसान दलहन की खेती करते हैं। पहली बार दिल्ली में बैठी सरकार ने दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा किया और उसका नतीज़ा ये हुआ कि देश में दलहन की खेती करने वालों को प्रोत्साहन मिला। इस बार पहले से अधिक संख्या में दलहन की खेती के लिए हमारे किसान भाई आगे आये। भारत को दलहन की ज़रुरत है। मैं यहाँ दलहन की खेती करने वाले किसानों को और अधिक प्रोत्साहन देने का पक्षधर हूँ ताकि देश को विदेशों से दलहन न खरीदना न पड़े, हमारे किसानों द्वारा पैदा की गई दलहन से इस देश का पेट भरे और इसके लिए भारत सरकार आगे बढ़ रही है।

हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ रुपये का पैकेज दिया एवं 40 हज़ार करोड़ और, कुल मिलाकर 1.65 लाख करोड़ रुपये का पैकेज बिहार के कल्याण के लिए है। अब आप मुझे बताईये कि ये पैकेज गाँव-गाँव पहुंचना चाहिए कि नहीं? नए रास्ते बनने चाहिए कि नहीं? बिजली आनी चाहिए कि नहीं? दावाखाने बनने चाहिए कि नहीं? गरीब के लिए स्कूल बनना चाहिए कि नहीं? लेकिन जो लोग ये कहते हैं कि ये 1.65 लाख करोड़ रुपये आने ही नहीं देंगे, ऐसे लोगों की सरकार बनेगी तो आएगा क्या? बिहार का भला होगा क्या? इस रास्ते में रोड़े अटकने वाले जो लोग हैं, उन्हें हटाना चाहिए कि नहीं? ये चुनाव विकास के रास्ते रोकने वाले लोगों को रोकने का चुनाव है।

ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ है... इस चुनाव में इन तीनों ने अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? चाहे नीतीश जी हों, लालू जी हों, सोनिया जी हों, उन्होंने अपने 60 साल की सरकार का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? वो दे रहे हैं हिसाब क्या? बिहार बर्बाद क्यों हुआ, विकास क्यों नहीं हुआ, जवाब दे रहे हैं क्या? जो काम उनको करना चाहिए, वो कर रहे हैं क्या? मैं बिहार की जनता से आग्रह करता हूँ कि ये जो ‘महास्वार्थबंधन’ बना है, उनके नेताओं से हिसाब मांगो। हर गाँव, गली, घर से जवाब मांगो आप उनसे जवाब मांगिये, आपको खुद पता लग जाएगा कि कौन सा बटन दबाना है, मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।

ये जो 1.65 लाख करोड़ रुपये का पैकेज हमने दिया है और पूरा बारीकी से हिसाब दिया है। मैं उसमें बेगूसराय इलाक़े का बताना चाहता हूँ- एनएच – 82 पर 55 किमी, बिहारशरीफ, बरबीघा, मोकामा सेक्शन, एनएचबी फेज़ – 4 के निर्माण के लिए करीब-करीब 400 करोड़ रुपये का पैकेज; एनएच – 31 के बख्तियार-मोकामा सेक्शन को चार लेन का बनाने के लिए करीब-करीब 1000 करोड़ रुपये का पैकेज; एनएच – 31 पर पटना में गंगा नदी पर नया चार लेन के पुल का प्रावधान है जिसके लिए करीब-करीब 520 करोड़ रुपये; एनएच – 31 एनएचबी फेज़ – 3 सिमरिया-खगड़िया को चार लेन करने के लिए 1062 करोड़ रुपये; उसी प्रकार एनएच – 31 मोकामा-खगड़िया सेक्शन को को चार लेन करने के लिए 810 करोड़ रुपये राशि का प्रावधान है। बरौनी रिफाइनरी, उसमें 6 मिलियन क्षमता वाली 6 टंकियों को 9 मिलियन क्षमता वाली बनाने के लिए करीब 12,000 करोड़ रुपये लगाने का निर्णय किया गया है। बरौनी रिफाइनरी में बीएस4 फ्यूल के उत्पादन के कार्यान्वयन के लिए, मैंने 1500 करोड़ रुपये लगाना तय किया।

बिहार की किसी सरकार ने 60 साल में कभी सोचा नहीं कि बिहार को कैसे बदला जा सकता है। किन बातों पर बल दिया जाना चाहिए, वो नहीं किया। जातिवाद, संप्रदायवाद, यही राजनीति करते रहे यही बिहार की बर्बादी का कारण रहा है। ये ‘महास्वार्थबंधन’ बिग बॉस का घर है जिसमें एक बिग बॉस है जो कहता है कि मैं जैसे कहूँगा, लोग वैसे नाचेंगे; मैं जो कहूँगा, वैसा ये लोग करेंगे। इस बिग बॉस के घर में जितने भी लोग हैं, वे एक-दूसरे के साये से भी डरते हैं, कतराते हैं; एक-दूसरे का खात्मा करने के लिए खेल खेलते रहते हैं और बिग बॉस रिंग लीडर की तरह उन्हें नचाने में लगे हुए हैं।

भाईयों-बहनों, क्या बिहार में ये खेल चलने देना है क्या? बिहार को इस बिग बॉस से बचाना है कि नहीं? और इसलिए आज मैं बेगूसराय की धरती पर आपसे आशीर्वाद लेने आया हूँ। भाजपा हो, राम विलास जी की पार्टी हो, कुशवाहा जी की पार्टी हो, मांझी जी की पार्टी हो, हम सब मिलकर बिहार का भाग्य बदलना चाहते हैं, आपका जीवन बदलना चाहते हैं। मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए। मेरे साथ बोलिये और पूरी ताकत से बताईये, सारे हिन्दुस्तान को पता चले कि बेगूसराय से कैसी आवाज उठती है। ऐसी भयंकर धूप में कोई कल्पना नहीं कर सकता है कि कितना बड़ा जन-सैलाब आया है।

भाईयों-बहनों, मैं आपका ये प्रेम और विश्वास आपको ब्याज समेत लौटाउंगा। इस भयंकर ताप में आप जो तपस्या कर रहे हो, मैं उसे कभी बेकार नहीं जाने दूंगा। आपको एक अपना साथी मिला है जो कंधे से कंधा मिलाकर के आपके सुख-दुःख बांटना चाहता है। बिहार को बदलना मेरा स्वार्थ है, राजनीतिक स्वार्थ नहीं बल्कि मेरा स्वार्थ है कि जिस दिन बिहार बदलेगा, हिन्दुस्तान दुनिया में नंबर एक पर पहुँच जाएगा; ये ताकत है बिहार की। पूरा हिन्दुस्तान स्वार्थ से चाहता है कि मेरा बिहार आगे बढ़े; बिहार विकास की ऊंचाईयों पर पहुंचे; बिहार का नौजवान, उसकी ताकत देश का भाग्य बदलने के काम आए, इसलिए मैं आपसे वोट मांगने आया हूँ। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये -  

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

                   

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India’s youth are playing a vital role in accelerating the journey towards a Viksit Bharat: PM
Rozgar Mela reflects our Government’s commitment to empowering the Yuva Shakti with new opportunities: PM
The world is excited by India’s youth and technological progress and today the global community wants to partner in India’s development journey: PM
Sectors like clean energy, critical minerals, green hydrogen, and sustainable manufacturing are advancing rapidly and partnerships in these areas are creating new opportunities: PM Modi
Every Indian is moving forward with the resolve of building a Viksit Bharat by 2047: PM Modi at Rozgar Mela
Today, Rapid transformation is clearly visible even in rural areas; Enhanced connectivity has opened new avenues for farmers, small traders, and students: PM
Viksit Bharat will be built by the efforts of such youth who view their work as a means of national service: PM Modi

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି ଦେଶବ୍ୟାପୀ ହଜାର ହଜାର ଯୁବକ ଯୁବତୀଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଦିନ।ଆଜି ୫୧ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଯୁବକ-ଯୁବତୀ ସରକାରୀ ଚାକିରିର ନିଯୁକ୍ତିପତ୍ର ପାଇଛନ୍ତି। ଆଜି, ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଦେଶର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାରେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ  ଦାୟିତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶୀଦାର ହେବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ରେଳବାଇ, ବ୍ୟାଙ୍କିଙ୍ଗ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ଆହୁରି  ଅନେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନୂତନ ଦାୟିତ୍ୱ ଗ୍ରହଣ କରିବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି। ଆଗାମୀ ବର୍ଷଗୁଡ଼ିକରେ ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତ ପାଇଁ ସଂକଳ୍ପ ପୂରଣ କରିବାରେ ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିବେ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏହି ସ୍ଥାନରେ ପହଞ୍ଚିବା ପାଇଁ ଆପଣମାନେ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବରେ ଅନେକ ପ୍ରସ୍ତୁତି ଏବଂ କଠିନ ପରିଶ୍ରମ କରିଛନ୍ତି। ଏହି ସଫଳତା ପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ପରିବାରକୁ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଆପଣମାଙ୍କର ଏହି ସଫଳତା ପଛରେ   ପିତାମାତା ଏବଂ ପରିବାରର ଅବଦାନ ଅତୁଳନୀୟ । ଆମେ କେବଳ ନିଜ ପାଇଁ କିମ୍ବା ଆମ ପରିବାର ଯୋଗୁଁ ଏହି ପଦବୀରେ ପହଞ୍ଚି ନାହୁଁ ଏଥିରେ ସମାଜର ମଧ୍ୟ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅବଦାନ ରହିଛି  ।  ଏହି ବିଶାଳ ଦେଶର ୧୪୦ କୋଟି ନାଗରିକଙ୍କ ଅବଦାନର ମଧ୍ୟ ବହୁତ ମହତ୍ୱ ରହିଛି।  ସେଥିପାଇଁ ଆମର ଦାୟିତ୍ୱ କେବଳ ନିଜ ପ୍ରତି କିମ୍ବା ପରିବାର ପ୍ରତି ନୁହେଁ, ସମଗ୍ର ସମାଜ ପ୍ରତି ମଧ୍ୟ ରହିଛି।  ମୁଁ ନିଶ୍ଚିତ ଯେ ଆପଣମାନେ  ଏସବୁ କାର୍ଯ୍ୟ ପାଇଁ ନିଜକୁ ଆହୁରି ସକ୍ଷମ କରିବେ । ମୁଁ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏଥି ପାଇଁ   ଅନେକ  ଅନେକ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଜାଣନ୍ତି ଯେ ମାତ୍ର ଦୁଇ ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ମୁଁ ପାଞ୍ଚଟି ଦେଶର  ଯାତ୍ରା ଫେରିଥିଲି। ଯଦିଓ ଏହା କେବଳ ପାଞ୍ଚଟି ଦେଶ ଯାତ୍ରା ଥିଲା, ମୁଁ ଅନେକ  ଦେଶର ପ୍ରମୁଖ କମ୍ପାନୀର ନେତୃତ୍ୱଦାତାମାନଙ୍କ ସହିତ  ଭେଟିଥିଲି, କଥା ହୋଇଥିଲି ଏବଂ  ଆଲୋଚନା ମଧ୍ୟ କରିଥିଲି । ମୁଁ ପ୍ରତେକ  ସ୍ଥାନରେ  ଗୋଟିଏ କଥା ନିରନ୍ତର ଅନୁଭବ କରିଥିଲି। ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ଭାରତର ଯୁବଶକ୍ତି ଏବଂ ଭାରତର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା  ପ୍ରଗତିକୁ ନେଇ ବହୁତ ଉତ୍ସାହିତ ଅଛି। ଆଜି, ବିଶ୍ୱ ଭାରତର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାର ଏକ ଅଂଶ ହେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଭାରତ ମଧ୍ୟ ବିଶ୍ୱର ବିଭିନ୍ନ ଦେଶ ସହିତ ସହଭାଗୀତା କରୁଛି। ଏହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି ଯୁବପିଢିଙ୍କ ପାଇଁ  ନୂତନ ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରିବା , ନିଯୁକ୍ତି ପ୍ରଦାନ କରିବା  ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର କ୍ଷମତାକୁ  ବିକାଶିତ କରିବା । ମୁଁ ପ୍ରକୃତରେ ଚାହୁଁଛି ଯେ ମୋ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ  ପରିଚିତ ହୁଅନ୍ତୁ। ଏହି ଗସ୍ତ ସମୟରେ ନେଦରଲ୍ୟାଣ୍ଡରେ,ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର, ଜଳ, କୃଷି ଏବଂ ଉନ୍ନତ ଉତ୍ପାଦନ ଉପରେ ଆଲୋଚନା ହୋଇଥିଲା। ସ୍ୱିଡେନ ସହିତ, କୃତ୍ରିମ ବୁଦ୍ଧିମତ୍ତା (AI) ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ୍ ନବସୃଜନରେ ସହଯୋଗ ଉପରେ ଅନେକ ଆଲୋଚନା ହୋଇଥିଲା। ନରୱେ ସହିତ, ସବୁଜ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଏବଂ ସାମୁଦ୍ରିକ ସହଯୋଗ ଉପରେ ଆଲୋଚନା ହୋଇଥିଲା । ରଣନୈତିକ ଶକ୍ତି ଏବଂ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ସହଭାଗୀତା ଉପରେ UAE ସହିତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଚୁକ୍ତିନାମା ହୋଇଥିଲା। ଇଟାଲୀ ସହିତ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା, ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ପଦାର୍ଥ ଏବଂ ବିଜ୍ଞାନ ଓ  ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଭଳି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସହଭାଗୀତା ଉପରେ ଚୁକ୍ତିନାମା ସ୍ଵାକ୍ଷର  ହୋଇଥିଲା।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏହି ସମସ୍ତ ଚୁକ୍ତିନାମା ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ସିଧାସଳଖ ଲାଭ ଦେବ।  ଯେପରି ଆପଣ ଲକ୍ଷ୍ୟ କରିଥିବେ, ଏହି ସମସ୍ତ ବିଷୟଗୁଡ଼ିକ ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଏବଂ ସମର୍ଥ ଭାରତର ଭବିଷ୍ୟତର ନିଶ୍ଚୟତା ନେଇ ଆସୁଛି।। କାରଣ ପ୍ରତ୍ୟେକ ନୂତନ ନିବେଶ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ସହଭାଗୀତା, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଶିଳ୍ପ ସହଯୋଗ ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ କେବଳ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ଆଣିଥାଏ ତାହା ନୁହେଁ   ବରଂ  ଅଗଣିତ ନୂତନ ଅବସର  ମଧ୍ୟ ସୃଷ୍ଟି କରିଥାଏ।

 

ମୋର ଯୁବ ସାଥୀମାନେ,

 

ଆମକୁ ମନେ ରଖିବାକୁ ପଡିବ ଯେ ଏଗୁଡ଼ିକ ସେହି କ୍ଷେତ୍ର, ଯେଉଁଥିରେ ଆସୁଥିବା ନିବେଶ ଏବଂ ସହଭାଗିତା ଆଗାମୀ ୩-୪ ଦଶକର ବିଶ୍ୱ ଅର୍ଥନୈତିକ ବୃଦ୍ଧିକୁ ଦିଗନିର୍ଦ୍ଦେଶ କରିବାକୁ ଥିବା ଶିଳ୍ପଗୁଡ଼ିକୁ ଗଢ଼ି ତୋଳିବ। ଏଥିରେ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ଭାରତର ଯୁବମାନଙ୍କର ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିବ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଏକ ଉଦାହରଣ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି, ଯେ ଭାରତ କିପରି ବିଶ୍ୱ ପାଇଁ ଏକ ବିଶ୍ୱସ୍ତ ଯୋଗାଣ ଶୃଙ୍ଖଳ ସହଭାଗୀ ହେଉଛି। ଉଦାହରଣ ସ୍ୱରୂପ, ନେଦରଲ୍ୟାଣ୍ଡର ଏକ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର କମ୍ପାନୀ ASML - ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଅନେକ ଏହି ନାମ ସହିତ ପରିଚିତ ଥିବେ  - ଭାରତର ଟାଟା ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ସହିତ ଏକ ଚୁକ୍ତିନାମା କରିଛି। ଭାରତ ବିଶ୍ୱର କେବଳ କିଛି ଦେଶ ମଧ୍ୟରୁ ଗୋଟିଏ ଯାହା ସହିତ ଏହି କମ୍ପାନୀ ଏକ ଚୁକ୍ତିନାମା ସ୍ୱାକ୍ଷର କରିଛି। କେବଳ ASML ଏବଂ ଟାଟା ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ମଧ୍ୟରେ ଏହି ଚୁକ୍ତିନାମା ଭାରତରେ ଅଗଣିତ ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରିବ ଏବଂ ଭାରତକୁ ପରବର୍ତ୍ତୀ ପିଢ଼ିର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ପାଇଁ ନୂତନ ସମ୍ଭାବନା  ସୃଷ୍ଟି ମଧ୍ୟ  କରିବ । ସେହିପରି, ସ୍ୱିଡେନ ସହିତ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଏବଂ AI ସହଭାଗୀତା ଓ  UAE ସହିତ ସୁପରକମ୍ପ୍ୟୁଟିଂ ସହଯୋଗ ଭାରତର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା କ୍ଷମତାକୁ ଯଥେଷ୍ଟ ମଜବୁତ କରିବ। ଏହି ଚୁକ୍ତିନାମା ନିସନ୍ଦେହରେ ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରିବ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ସ୍ୱଚ୍ଛ ଶକ୍ତି, ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ପଦାର୍ଥ, ସବୁଜ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ ଏବଂ ସ୍ଥାୟୀ ଉତ୍ପାଦନ ସହିତ ଜଡିତ କ୍ଷେତ୍ରଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି ଏବଂ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି। ଏଗୁଡ଼ିକ ସହିତ ଜଡିତ ସହଭାଗୀତା ଏକ ନୂତନ ଅର୍ଥନୀତି ଏବଂ  ସୁଯୋଗର ଦ୍ୱାର ଖୋଲି ଦେଉଛି। ସ୍ୱିଡେନ୍, ନରୱେ ଏବଂ ଇଟାଲୀ ପରି ଦେଶମାନଙ୍କ ସହିତ ଗ୍ରୀନ୍ ଟ୍ରାନ୍ଜିସନ୍ ଏବଂ ସସ୍ଟେନେବଲ୍ ଟେକ୍ନୋଲୋଜିରେ ସହଯୋଗ ମଧ୍ୟ ବଢ଼ୁଛି। ଏହା ଭାରତକୁ କ୍ଲିନ୍ ମାନୁଫ୍ୟାକ୍ଚରିଂ ସମ୍ବନ୍ଧୀୟ ଭବିଷ୍ୟତ ଶିଳ୍ପଗୁଡ଼ିକରେ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିବ। ଏହା ବ୍ୟତୀତ, ଭାରତ ବନ୍ଦର, ଜାହାଜ ଚଳାଚଳ ଏବଂ ସାମୁଦ୍ରିକ ଭିତ୍ତିଭୂମି ସହିତ ଜଡିତ ଚୁକ୍ତିନାମା ଉପରେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାମ କରିଛି। UAE ଏବଂ ନରୱେ ସହିତ ସହଭାଗୀତା ଭାରତର ଜାହାଜ ନିର୍ମାଣ ଇକୋସିଷ୍ଟମକୁ ମଜବୁତ କରିବ।  ଆପଣମାନେ  ଜାଣନ୍ତି ଯେ, ଜାହାଜ ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ଯଥେଷ୍ଟ ପରିମାଣର ଦକ୍ଷ ମାନବଶକ୍ତି ଆବଶ୍ୟକ। ଏହାର ଅର୍ଥ ହେଉଛି ଯେ ଭାରତୀୟ ଇଞ୍ଜିନିୟର, ଟେକ୍ନିସିଆନ ଏବଂ କୁଶଳୀ ଶ୍ରମିକଙ୍କ ଚାହିଦା ପାଇଁ ଏତେ ଚାହିଦା ବଢ଼ିବ ଯେ ଆପଣମାନେ କଳ୍ପନା ମଧ୍ୟ କରିପାରିବେ ନାହିଁ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ପ୍ରତ୍ୟେକ ନୂତନ ସହଭାଗିତା ସହିତ ଆମେ ଭାରତୀୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍, ଗବେଷକ ଏବଂ ଯୁବ ବୃତ୍ତିଗତଙ୍କ ପାଇଁ ବିଶ୍ୱ ସହିତ ଯୋଡ଼ିବାର ନୂତନ ପଥ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛୁ। ଏହା ମାଧ୍ୟମରେ ଭାରତୀୟ ଯୁବମାନେ ଉନ୍ନତ ଦକ୍ଷତା, ବିଶ୍ୱ ବଜାର ଏବଂ ବିକାଶର ନୂତନ ସୁଯୋଗ ପାଇବେ। ଆଜି, ବିଶ୍ୱ ସେହି ଦେଶଗୁଡ଼ିକୁ ସମ୍ମାନ କରେ ଯେଉଁମାନେ ନବସୃଜନ କରନ୍ତି, ନିର୍ମାଣ କରନ୍ତି ଏବଂ ବଡ଼ ପରିମାଣରେ ସଫଳତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟକରି ପାରନ୍ତି। ଭାରତ ତିନୋଟି ଦିଗରେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ପ୍ରଗତି କରୁଛି, ଏବଂ ଏଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ହେଉଛନ୍ତି ଆପଣମାନେ—ମୋର ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ, ଭାରତର ଯୁବଶକ୍ତି । ମୁଁ ବିଶ୍ୱର ଯେକୌଣସି ସ୍ଥାନକୁ ଯାଏ, ସେଠାରେ ଆଲୋଚନା ସମୟରେ ଭାରତର ଯୁବଶକ୍ତି ବିଷୟରେ ନିଶ୍ଚୟ ଆଲୋଚନା କରେ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭାରତୀୟ ଏକ ଦୃଢ଼ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛନ୍ତି। ଏହି ସଂକଳ୍ପ ହେଉଛି ୨୦୪୭  ସୁଦ୍ଧା ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତ ନିର୍ମାଣ କରିବା। ଏହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ, ଦେଶ ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନିବେଶ କରୁଛି।  ଏହି ନିବେଶ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛି। ଉଦାହରଣ ସ୍ୱରୂପ, ଆଜି, ଭାରତରେ ଅର୍ଦ୍ଧପରିବାହୀ ଉତ୍ପାଦନ ପାଇଁ ଏକ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଯୋଗାଣ ଶୃଙ୍ଖଳ ସୃଷ୍ଟି ହେଉଛି। ଆଗାମୀ ସମୟରେ, ଭାରତର ୧୦ଟି ବୃହତ୍ତମ ଅର୍ଦ୍ଧପରିବାହୀ ୟୁନିଟ୍ ବିଶ୍ୱ ସ୍ତରରେ ନିଜର ଛାପ ସୃଷ୍ଟି କରିବ। ଏଗୁଡ଼ିକ ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ସମ୍ଭାବନା, ସେମାନଙ୍କର ବୁଦ୍ଧି, ସେମାନଙ୍କର ପ୍ରତିବଦ୍ଧତା ଏବଂ ସ୍ୱାଭାବିକ ଭାବରେ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ଦ୍ୱାରା ପରିଚାଳିତ ହେବ। ଭାରତ ଜାହାଜ ନିର୍ମାଣ ଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଜାହାଜ ମରାମତି ଏବଂ ଓଭରହାଲିଂ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏକ ଇକୋସିଷ୍ଟମ ମଧ୍ୟ ବିକଶିତ କରୁଛି। ଏଥିପାଇଁ ପ୍ରାୟ ୭୫,୦୦୦ କୋଟି ଟଙ୍କାର ନିବେଶ କରାଯାଉଛି। ସେହିପରି, ଆମେ ଭାରତ ଭିତରେ ଏକ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ MRO ଇକୋସିଷ୍ଟମ, ଅର୍ଥାତ୍ ରକ୍ଷଣାବେକ୍ଷଣ, ଓଭରହାଲ ଏବଂ ରିପେୟାର୍ ସୁବିଧା ମଧ୍ୟ   ବିକଶିତ କରୁଛୁ। ଏହା ଦେଶର ବିମାନ ଚଳାଚଳ କ୍ଷେତ୍ରକୁ ବହୁତ ଲାଭ ଦେବ  ଏବଂ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବରେ ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି ପାଇଁ ନିଯୁକ୍ତିର ଏକ ନୂତନ କ୍ଷେତ୍ର ସୃଷ୍ଟି କରିବ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି ଭାରତ  ଏକ ପ୍ରମୁଖ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ଉତ୍ପାଦନକାରୀ ଦେଶ।  ଆମେ ଭାରତ ଭିତରେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ମୂଲ୍ୟ ଶୃଙ୍ଖଳା ନିର୍ମାଣ କରୁଛୁ। ଚାଲୁଥିବା PLI ଯୋଜନା ଦେଶରେ ରେକର୍ଡ ସଂଖ୍ୟକ ଇଲେକ୍ଟ୍ରୋନିକ୍ସ ଉତ୍ପାଦନକୁ ଆଗେଇ ନେଉଛି, ଏବଂ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଯୁବକ ମଧ୍ୟ ଚାକିରି ପାଉଛନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏପରି ଅନେକ ଅଭିଯାନରେ ଭାରତର ସରକାରୀ ଏବଂ ବେସରକାରୀ କ୍ଷେତ୍ର ମିଳିତ ଭାବେ ବହୁତ ବଡ଼ ନିବେଶ କରୁଛନ୍ତି। ଏହି ନିବେଶ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ଦେଶ ଭିତରେ ଚାକିରି ଯୋଗାଇ ଦେଉଛି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ କରୁଛି। ଜଣେ ସରକାରୀ କର୍ମଚାରୀ ଭାବରେ, ଯାହା ଆଜି ଆପଣଙ୍କର ନିଯୁକ୍ତି ପତ୍ର ପୂରଣ କରିବା ପରେ ଆପଣଙ୍କର ପରିଚୟ ହେବ, ଆପଣଙ୍କୁ ସର୍ବଦା ମନେ ରଖିବାକୁ ପଡିବ ଯେ  ବ୍ୟବସାୟରେ  ସହଜୀକରଣ (Ease of Doing Business) କେତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

 ଭାରତର ଅଭିବୃଦ୍ଧିର  କାହାଣୀ ଏବଂ  ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି କରିବାର ସାମର୍ଥ କଥା ଆପଣ ସମସ୍ତେ ଜାଣିଛନ୍ତି । ଏଥିପାଇଁ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଏକ ବିରାଟ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରେ। ଯେତେବେଳେ ଗାଁ, ଛୋଟ ସହର ଏବଂ ଦୂରଦୂରାନ୍ତ ଅଞ୍ଚଳ ବିକାଶ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଯାଏ, ଦେଶର ପ୍ରଗତିର ଲାଭ ଅଧିକ ଲୋକଙ୍କ ପାଖରେ ପହଞ୍ଚେ। ଗତ ୧୨   ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ, ରେଳ, ରାଜପଥ, ବିମାନବନ୍ଦର, ଲଜିଷ୍ଟିକ୍ସ, ବନ୍ଦର ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ୍ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଏକ ଅକଳ୍ପନୀୟ ଗତିରେ ବିସ୍ତାରିତ ଏବଂ ବିକଶିତ ହୋଇଛି, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ କାମ କରାଯାଉଛି। ଆଜି, ଯଦି ଆପଣ ଆପଣଙ୍କ ଅଞ୍ଚଳରେ ଯେକୌଣସି ଦିଗରେ ୧୦୦  କିଲୋମିଟର ଯାତ୍ରା କରନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା  କୌଣସି ନା କୌଣସି ବିକାଶମୂଳକ କାମ ଚାଲୁଥିବା ଦେଖିବେ। ଗାଁଗୁଡ଼ିକରେ ମଧ୍ୟ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଉଛି। ବର୍ଦ୍ଧିତ ସଂଯୋଗୀକରଣ ଚାଷୀ, ଛୋଟ ବ୍ୟବସାୟ ଏବଂ ଛାତ୍ରଙ୍କ ପାଇଁ ନୂତନ ପଥ ଖୋଲିଛି। ଆଜି, ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ପରିବାରର ସ୍ଥାୟୀ ଘର ବସବାସ କରୁଛନ୍ତି। ଏହାର ଅର୍ଥ ହେଉଛି ଯେ ଆମେ ବିଶ୍ୱର ଅନେକ ଦେଶ ଅପେକ୍ଷା ବହୁ ଗୁଣ ଅଧିକ ନୂତନ ଘର ନିର୍ମାଣ କରୁଛୁ। କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ମୁଁ କେବେବି ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଅଭିଯାନକୁ ଭୁଲିବାକୁ ଦେଉନାହିଁ। ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଅଭିଯାନରେ ଶୌଚାଳୟର ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିଛି ଏବଂ ଆମେ ମଧ୍ୟ ଏହା ଉପରେ ଅଧିକ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେଉଛୁ। ଆଜି ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଘରେ ବିଦ୍ୟୁତ୍ ପହଞ୍ଚିଛି। ଛାତ ଉପରେ ସୌରଶକ୍ତି - ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅନେକ ନୂତନ ବିକ୍ରେତା ପ୍ରବେଶ କରିଛନ୍ତି। ଏବେ, ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନକୁ ଦେଖନ୍ତୁ, ଯାହା ଟ୍ୟାପ୍ ପାଣି ଯୋଗାଇ ଦେଉଛି।  ମୁଁ ସହରଗୁଡ଼ିକରେ PNG ସଂଯୋଗ ବୃଦ୍ଧି କରିବାକୁ ଚାହୁଁଥିଲି, କିନ୍ତୁ ମୁଁ ପ୍ଲମ୍ବର ପାଇଲି ନାହିଁ; ଅଭାବ ଥିଲା, କାରଣ ବହୁ ସଂଖ୍ୟକ ପ୍ଲମ୍ବର ପୂର୍ବରୁ ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନରେ ନିୟୋଜିତ ଥିଲେ। ଏବେ, ମୋତେ ଶକ୍ତି ପାଇଁ ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରଗୁଡ଼ିକରେ PNG ସଂଯୋଗ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବୃଦ୍ଧି କରିବାକୁ ପଡିଲା, ତେଣୁ ଆପଣ କଳ୍ପନା କରିପାରିବେ ଯେ କେବେ କେବେ ଲୋକଙ୍କ ଆବଶ୍ୟକତା ବଢେ  ସେତେବେଳେ ଲୋକମାନଙ୍କର ଅଭାବ ମଧ୍ୟ ଦେଖାଯାଏ ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନଗୁଡ଼ିକର ପ୍ରଭାବ ସାଧାରଣ ନାଗରିକଙ୍କ ସୁବିଧା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସୀମିତ ରହେନାହିଁ । ଯେତେବେଳେ  ଗାଁଗୁଡ଼ିକରେ ରାସ୍ତା ହେଲା , ବଜାରକୁ ଯାତାୟାତ ସହଜ ହୋଇଗଲା। ବିଦ୍ୟୁତ୍ ସୁବିଧା ଉନ୍ନତ ହେବା ସହିତ, ଛୋଟ ବ୍ୟବସାୟ ସମୃଦ୍ଧ ହେବା ଆରମ୍ଭ ହେଲା। ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକରେ ମଧ୍ୟ, କୃଷି ସହିତ ମୂଲ୍ୟ ବୃଦ୍ଧି ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି। ପୂର୍ବରୁ, ସେମାନେ ଲାଲ ଲଙ୍କା ବିକ୍ରି କରୁଥିଲେ, କିନ୍ତୁ ବର୍ତ୍ତମାନ, ବିଦ୍ୟୁତ୍ ସହିତ, ସେମାନେ ଲଙ୍କା ପାଉଡର ତିଆରି କରନ୍ତି, ପ୍ୟାକେଟ  କରନ୍ତି ଏବଂ ତା'ପରେ ବିକ୍ରି କରନ୍ତି। ଏହା ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକରେ ଛୋଟ ଶିଳ୍ପର ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ଦ୍ରୁତ କରିଛି । ଡିଜିଟାଲ୍ ସଂଯୋଗ ବୃଦ୍ଧି ସହିତ, ଗ୍ରାମବାସୀ ଆଧୁନିକତା ସହିତ ସମନ୍ୱିତ ହୋଇ ବିଶ୍ୱ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେଉଛନ୍ତି। ସହର ଏବଂ ଗ୍ରାମ ମଧ୍ୟରେ ପାର୍ଥକ୍ୟ କାମ ହେଉଛି, ଅର୍ଥନୀତିର ଗତିକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରୁଛି। ଏହି ସବୁର ସକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ସୁନିଶ୍ଚିତ କରେ। କେବଳ ନିଯୁକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି ହୁଏ ନାହିଁ, ବରଂ ଦେଶ ସ୍ୱାଭିମାନର ନୂତନ ଭାବନା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼େ ଏବଂ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଲୋକ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ପାଆନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ପାଖରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ କରିବାର ସୁଯୋଗ ଅଛି ଯାହା ପୂର୍ବରୁ କେବେ ଦେଖାଯାଇନଥିଲା। ମୁଁ କାହାକୁ ଦୋଷ ଦେଉନାହିଁ, କିନ୍ତୁ ବାସ୍ତବତା ହେଉଛି ଯେ ସବୁକିଛି ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ, ବିଶାଳ ସ୍ତରରେ ଏବଂ ବିବିଧତାରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ହେଉଛି। ଆଜି, ଉତ୍ପାଦନ, ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା, ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍, ଡିଜିଟାଲ୍ ସେବା, ରେଳବାଇ, ପ୍ରତିରକ୍ଷା ଏବଂ ଏପରିକି ମହାକାଶ ସମେତ ଅନେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅଗଣିତ ସୁଯୋଗ ଆମ ପାଇଁ ଅପେକ୍ଷା କରିଛି। ଆମର ପ୍ରୟାସ ହେଉଛି ଯେ କିପରି ଯଥାସମ୍ଭବ ଅଧିକ ଯୁବକ ଏହି ନୂତନ ସୁଯୋଗର ଲାଭ  ନେଇପାରିବେ ଏବଂ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ସେମାନଙ୍କର ପ୍ରତିଭା ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିବାର ପ୍ରଚୁର ସୁଯୋଗ ପାଇବେ। ତେଣୁ, ଦକ୍ଷତା ବିକାଶ, ଶିଳ୍ପ-ସଂଯୁକ୍ତ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ଭବିଷ୍ୟତର ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଉପରେ ନିରନ୍ତର ଗୁରୁତ୍ୱ ଦିଆଯାଉଛି। ଆଇଟିଆଇ ଗୁଡ଼ିକୁ ଆଧୁନିକୀକରଣ କରାଯାଉଛି। ଜାତୀୟ ଦକ୍ଷତା ତାଲିମ ପ୍ରତିଷ୍ଠାନଗୁଡ଼ିକୁ ସୁଦୃଢ଼ ​​କରାଯାଉଛି। ପିଏମ ସେତୁ  ଭଳି ଅଭିଯାନ ଏହି ଦିଗରେ କାମ କରୁଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଗତ କିଛି ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ, ଦେଶରେ ସ୍ୱ-ନିଯୁକ୍ତି ଏବଂ ଉଦ୍ୟୋଗର ଏକ ନୂତନ ସଂସ୍କୃତି ବିକଶିତ ହୋଇଛି। ଭାରତ ବିଶ୍ୱର ତୃତୀୟ ସର୍ବବୃହତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଇକୋସିଷ୍ଟ ପାଲଟିଛି । ଏହି ସଂଖ୍ୟା ମନେରଖନ୍ତୁ, ଦେଶରେ ୨୩୦,୦୦୦ରୁ ଅଧିକ ସ୍ୱୀକୃତିପ୍ରାପ୍ତ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଅଛି।  ସେମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ, ଯୁବକମାନେ ମଧ୍ୟ ସାମିଲ ଅଛନ୍ତି। ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କଥା ହେଉଛି ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନ କେବଳ ବଡ଼ ସହରଗୁଡ଼ିକରେ ସୀମିତ ନୁହେଁ, ଏବଂ ମୁଁ ଏଥି ପାଇଁ ବହୁତ   ଖୁସି। ଆଜିକାଲି, ଟାୟାର-୨ ଏବଂ ଟାୟାର-୩  ସହରଗୁଡ଼ିକର ବହୁ ସଂଖ୍ୟକ ଯୁବକ ମଧ୍ୟ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଏବଂ ନବସୃଜନର ଦୁନିଆରେ ସେମାନଙ୍କର ଶକ୍ତି ପ୍ରଦର୍ଶନ କରୁଛନ୍ତି; ସେମାନଙ୍କର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ  ସ୍ୱୀକାରଯୋଗ୍ୟ । ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନ ଏବେ ଦେଶର ଅର୍ଥନୀତିର ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶ। ଏହି ପରିବର୍ତ୍ତନରେ ଆମର ମହିଳାମାନଙ୍କ ଭୂମିକା ମଧ୍ୟ ନିରନ୍ତର ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି। ଆଜି ମହିଳା ନେତୃତ୍ୱାଧୀନ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ବିଷୟରେ ଶୁଣିଲେ  ମନ ଗର୍ବରେ ଭରିଯାଏ। ମୁଁ ବିଶ୍ୱକୁ କହୁଛି ଯେ ଆମ ଦେଶର ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ରେ ମହିଳାଙ୍କ ଭୂମିକା ଯଥେଷ୍ଟ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି, ଏବଂ ବହୁ ସଂଖ୍ୟକ ମହିଳା ଆଗକୁ ଆସୁଛନ୍ତି। ମୁଦ୍ରା ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ, ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ମହିଳା ଆର୍ଥିକ ସହାୟତା ପାଇଛନ୍ତି। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ସ୍ୱନିଧି ଭଳି ଯୋଜନା ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ମହିଳାଙ୍କୁ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ହେବାର ସୁଯୋଗ ଦେଇଛି। ଆଜି, ଗାଁ ଏବଂ ଛୋଟ ସହରରେ, ପୂର୍ବ ଅପେକ୍ଷା ଅଧିକ ମହିଳା ନିଜସ୍ୱ ଭାବରେ ନୂତନ ବ୍ୟବସାୟ ଆରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ନୀତି ଏବଂ ନିଷ୍ପତ୍ତିର ଏହି ଅଭିଯାନ ମଧ୍ୟରେ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଆଉ ଗୋଟିଏ କଥା ମନେ ରଖିବାକୁ ପଡିବ: ଯେକୌଣସି ବ୍ୟବସ୍ଥାର ପ୍ରକୃତ ଶକ୍ତି ଏହାର ଜନସାଧାରଣ । ଲୋକମାନେ ହେଉଛନ୍ତି ଶକ୍ତି  ଏବଂ ଏହା ହେଉଛି ଲୋକଙ୍କ ଶକ୍ତି ଯାହା ଜାତୀୟ ଶକ୍ତି ସୃଷ୍ଟି କରେ। ଆପଣ ଯେଉଁ ବ୍ୟବସ୍ଥାର ଅଂଶ ହେବାକୁ ଯାଉଛନ୍ତି ତାହା ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଜୀବନ, ​​ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଆଶା ଏବଂ ଆକାଂକ୍ଷା ସହିତ ସିଧାସଳଖ ଜଡିତ। ସରକାରୀ ଚାକିରି ହେଉଛି ଲୋକଙ୍କ ଜୀବନକୁ ସହଜ କରିବାର ଏକ ମାଧ୍ୟମ। ଆପଣ ଯେକୌଣସି ବିଭାଗରେ କାମ କରନ୍ତୁ, ଆପଣଙ୍କର ଆଚରଣ, ସମ୍ବେଦନଶୀଳତା ଏବଂ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ହେବ। ଦେଶ ଆପଣଙ୍କ ଉପରେ ନିଜର ବିଶ୍ୱାସ ରଖିଛି। ଏବେ ଆପଣଙ୍କ କାମ, ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ, ଆପଣଙ୍କ କଥା ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ ମାଧ୍ୟମରେ ସେହି ବିଶ୍ୱାସକୁ ଆହୁରି ମଜବୁତ କରିବା ଆପଣଙ୍କର ଦାୟିତ୍ୱ। ଏକ ନୂତନ ବିଶ୍ୱାସ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ହୃଦୟରେ ପୂର୍ଣ୍ଣ ହେବ, ଏବଂ ଆପଣଙ୍କୁ ଭେଟିବା ପରେ ସେମାନେ ନୂତନ ଆଶା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବେ। ତେଣୁ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବ କର୍ମଯୋଗୀ ନିଜ କାର୍ଯ୍ୟକୁ ଏକ ଦାୟିତ୍ୱ ଭାବରେ ଦେଖିବେ।  ମୋ ପାଇଁ, ଆପଣମାନେ  ବହୁତ କିଛି । ପୂର୍ବରୁ, ଆମେ ଶୁଣିଥିଲୁ, "ସହସ୍ତ୍ରବାହୁ ୱାଲେ ଅମୁକ, ସହସ୍ତ୍ରବାହୁ ୱାଲେ ଧିକନେ।" ଆଜି, ଆପଣମାନେ  ସରକାରଙ୍କ ବଳ , ସରକାରଙ୍କ ଶକ୍ତି। ଯେଉଁମାନେ ପୂର୍ବରୁ ସରକାରରେ ଅଛନ୍ତି ସେମାନେ ସେଠାରେ ଅଛନ୍ତି, ଏବଂ ଯେଉଁମାନେ ନୂତନ ଅଛନ୍ତି ସେମାନେ ସେଠାରେ ଅଛନ୍ତି। ଆଜି, ଭାରତର ଲୋକଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷା ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି, ଏବଂ ମୁଁ ଏହାକୁ ବିକାଶର ଏକ ସକାରାତ୍ମକ ସଙ୍କେତ ବୋଲି ଭାବୁଛି। ଆମକୁ ଆମ ଲୋକଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷାକୁ ବୁଝିବାକୁ ପଡିବ ଏବଂ  ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାକୁ ପଡିବ। ଏପରି ପରିସ୍ଥିତିରେ, ସାର୍ବଜନୀନ ସେବାରେ ପ୍ରବେଶ କରୁଥିବା ଯୁବକମାନଙ୍କର ଭୂମିକା ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ହୋଇଯାଇଛି। ଆପଣଙ୍କୁ ନିରନ୍ତର ଶିଖିବାକୁ ପଡିବ ଏବଂ ନୂତନ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା, ନୂତନ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଏବଂ ନୂତନ ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ ନିଜକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାକୁ ପଡିବ। iGOT କର୍ମଯୋଗୀ ପ୍ଲାଟଫର୍ମ ଆପଣଙ୍କୁ ଏଥିରେ ବହୁତ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ। କର୍ମଯୋଗୀ ପ୍ରାରମ୍ଭ ଭଳି ମଡ୍ୟୁଲ ଆପଣଙ୍କର ଦାୟିତ୍ୱ ବୁଝିବା ପାଇଁ ବହୁତ ସହଜ କରିବ। ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଏହାର ସର୍ବାଧିକ ଲାଭ ଉଠାଇବାକୁ ଅନୁରୋଧ କରୁଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

 

ଆଜି, ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି ବିଶ୍ୱର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ନିଜର ପରିଚୟ  ସୃଷ୍ଟି କରୁଛନ୍ତି। ଏହି ସମାନ ଉତ୍ସାହ ଓ ଏହି ଶକ୍ତି ସାର୍ବଜନୀନ ସେବାରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରତିଫଳିତ ହେବା ଉଚିତ। ଏପରି ଯୁବକମାନଙ୍କ ପ୍ରୟାସରେ ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତ ନିର୍ମାଣ ହେବ, ଯେଉଁମାନେ ନିଜ କାମକୁ ଦେଶ ଏବଂ ଲୋକଙ୍କ ସେବାର ଏକ ମାଧ୍ୟମ ବୋଲି ଭାବନ୍ତି। ଆମ ଦେଶରେ କୁହାଯାଏ ଯେ ଲୋକଙ୍କ ସେବା କରିବା ହେଉଛି ଈଶ୍ୱରଙ୍କ ସେବା। ମୋର ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଆଜି ନିଯୁକ୍ତି ପତ୍ର ପାଇଥିବା ଆମର ଯୁବ ସହକର୍ମୀମାନେ ଭାରତର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାକୁ ନୂତନ ଗତି ଦେବେ। ଆପଣଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ନିଷ୍ପତ୍ତି ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତର ସଂକଳ୍ପକୁ ପୂରଣ କରିବ।  ଆପଣମାନେ କେବେବି ସେହି ମନ୍ତ୍ରକୁ ଭୁଲିଯିବା ଉଚିତ୍ ନୁହେଁ। ଆମର ମନ୍ତ୍ର ହେଉଛି: ନାଗରିକ ଦେବୋ ଭବ। ନାଗରିକମାନେ ହିଁ ଈଶ୍ୱର। ନାଗରିକଙ୍କ କଲ୍ୟାଣ ଆମର କର୍ତ୍ତବ୍ୟ। ପୁଣି ଥରେ, ମୁଁ ଆଜି ନିଯୁକ୍ତି ପତ୍ର ପାଇଥିବା ସମସ୍ତ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ସେମାନଙ୍କର ଆଗାମୀ ଜୀବନ ଏବଂ ଦେଶ ସେବା କରିବାର ଏହି ସୁଯୋଗ ପୂରଣ କରିବା ପାଇଁ ମୋର ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ।