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PM Modi distributes e-rickshaws in a function organised by Bharatiya Micro Credit in Lucknow
Whole world has recognised that India is the fastest growing major economy in the world today: PM
Primary objectives of the Government are welfare of the poor, and employment for the youth: PM
Youth should become job creators instead of job seekers. My Government has taken a series of steps to fulfil these objectives: PM
Through Jan Dhan Yojana, our Govt has opened doors of banks for poor which were closed for so many years: PM

मंच पर विराजमान उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्रीमान राम नाइक जी, लखनऊ के सांसद और गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी , लखनऊ के विधायक भाई आशुतोष जी , यहाँ के महापौर श्रीमान दिनेश जी , मुद्रा के चेयरमैन डा के शिवा जी,और आज इस समारोह के केंद्र बिंदु , मेरे रिक्शा चालक भाई बन्धु और उनके परिवार जन , और प्यारे भाइयों और बहनों..

ये सरकार एक के बाद एक कदम जिस प्रकार से उठा रही है और इतने कम समय में आज पूरे विश्व ने इस बात को स्वीकार किया है कि दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अगर कोई Economy है तो वो Economy हिंदुस्तान की है। आज पूरी दुनिया में मंदी का माहौल है। बहुत बड़े-बड़े माने-जाने वाले देश भी मंदी के शिकार हो गए हैं और ऐसे समय एक अकेला भारत ऐसा देश है न वो सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना पाया है लेकिन तेज गति से आगे बढ़ रहा है। चाहे World Bank हो, IMF हो, दुनिया की Rating Agencies हो, सब एक स्वर से इस बात को स्वीकार कर रहे हैं, इतना ही नहीं दुनिया के सभी अर्थज्ञाताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ने वाला है।

जब ये बातें सुनते हैं तो मन को बहुत समाधान होता है लेकिन हमारा लक्ष्य सिर्फ दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली Economy बनना नहीं है, हमारा लक्ष्य है हमारे देश के गरीब की जिंदगी में बदलाव लाना, हमारा लक्ष्य है नौजवान को रोजगार मिले, हमारा लक्ष्य है हमारी युवा पीढ़ी अपने पैरों पर खड़ी रहे, हमारी कोशिश है कि देश का नौजवान नौकरी तलाशने के लिए दर-दर ठोकरें न खाएं| इस स्थिति से बाहर आकर के, वो अपने पैरों पर खड़ा रहकर के औरों को भी रोजगार देने की ताकत प्राप्त करे और इसलिए हम जो कदम उठा रहे हैं, वो सारे कदम देश के सामान्य मानवी के जीवन में अपनी मेहनत से जो कमाएं, वो परिवार के जीवन में आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए काम आएं और इसलिए एक के बाद एक कदम। हमारे देश में बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ 40 साल पहले और इसलिए राष्ट्रीयकरण हुआ था, उस समय ये बातें बताई गई थीं कि बैंक गरीबों के काम आनी चाहिए। गरीबी हटाने के लिए बैंकों का राष्ट्रीयकरण जरूरी है और सरकार ने सारी बैंक अपने कब्जे में कर ली। 40 साल हो गए लेकिन इस देश के लिए बैकों के दरवाजे नहीं खुले थे।

हमारी सरकार बनने के बाद हमने एक बीड़ा उठाया कि क्यों न हिंदुस्तान के गरीब से गरीब व्यक्ति का बैंक का खाता क्यों न हो, अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में हिंदुस्तान का गरीब क्यों न हो और प्रधानमंत्री जन-धन योजना का अभियान चला, बैंकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और आज देश में जिन लोगो के बैंक के खाते नहीं थे, करीब-करीब 20 करोड़ नए खाते खोले गए। सारी दुनिया को अचरज हो रहा है कि कैसे संभव हुआ है और खाते खोलने थे, गरीब के खाते खोलने थे तो हमने नियम बनाया कि एक भी पैसा नहीं होगा तो भी बैंक का खाता खोला जाएगा, उसके लिए जो खर्च होता है तो उसके लिए वो उसका बैंक भुगतान करेगा। एक भी नया पैसा देना नहीं था लेकिन हमारे देश के गरीबों की अमीरी देखिए, इन गरीबों ने बैंक में खाते खुलाए और छोटा-मोटा रकम नहीं 30 हजार करोड़ रुपया जमा किया, 30 हजार करोड़ रुपया, ये है हमारे देश के गरीब की ताकत।

वो मूल्यों के लिए जीता है, उसूलों के लिए जीता है और इसलिए मुफ्त में खाते खुलाने की बजाए 100 रुपया, 200 रुपया जो है, उसने बचत की है। हम एक मुद्रा योजना लाए हैं। हमारे देश में जो छोटे-छोटे लोग हैं, अखबार बेचने वाला हो, दूध बेचने वाला हो, बिस्किट बेचता हो, फूल बेचता हो, मंदिर के बाहर प्रसाद बेचता हो, धोबी हो, नाई हो, छोटे-छोटे लोग, उन्होंने तो कभी जिंदगी में सोचा ही नहीं था कि उनके कारोबार में अगर आगे बढ़ना हो और पैसो की जरूरत पड़ी तो बैंक पैसे दे सकती है, उन्होंने कभी बैंक का दरवाजा नहीं देखा था। हम प्रधानमंत्री मुद्रा योजना लाए और तय किया ऐसे सामान्य वर्ग के लोग, जिनको कभी बैंक जाने का अवसर नहीं मिला है, उनको लोन देंगे, बिना गारंटी लोन देंगे और आज मुझे खुशी है कि योजना शुरू की है अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है, 5-6 महीने हुए हैं। अब तक करीब 2 करोड़ लोगों को ये लोन मुहैया कराया गया है, कोई भी गारंटी के बिना।

कुछ लोग हैं जो 50 हजार तक की रकम लिए हैं, कुछ लोग हैं जो 10 लाख तक लिए हैं और कुछ लोग हैं 10 लाख तक से ज्यादा लिया है और ये सारा काम लोन मांगने वाले पर भरोसा करके किया गया है और उसका परिणाम ये आया है करीब 80 हजार करोड़ रुपया इस काम में लगा दिया गया है। आने वाले दिनों में इसके फल नजर आने वाले हैं। आज हम देख रहे हैं 2100 परिवारों को, जो कि किराए की रिक्शा चलाते थे खुद की रिक्शा नहीं थी, उनको छांटा गया और 2100 परिवारों को अपनी मालिकी की रिक्शा का आज, उनको दिया जा रहा है। वे इसके मालिक बनने जा रहे हैं। पहले जो ब्‍याज देना पड़ता था, अब ब्‍याज से मुक्‍ति‍। कि‍राया देना पड़ता था, कि‍राए से मुक्‍ति‍ और उन्हीं पैसों से आज वो मालि‍क बनने जा रहा है। मुद्रा बैंक से उसको पैसे दि‍ए गए हैं, उसको बीमा की पॉलि‍सी दी गई है। अकेले लखनऊ में battery recharging के लि‍ए करीब 40-42 नए सेंटर बन रहे हैं। उनको बैंकों ने पैसे दि‍ए हैं। करीब 10 बड़े सर्वि‍स सेंटर बन रहे हैं, जि‍समें एक-एक सेंटर में 5-5, 10-10, 12-12 नौजवान को काम मि‍लने वाला है। जहां पर इन रि‍क्‍शाओं का repairing का, service का काम होगा। यानी कि‍तना बड़ा रोजगार को बल दि‍या जा सकता है, उसका ये प्रयास है। कोशि‍श यह है कि‍ हमारा सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्‍ति‍ अपने पैरों पर खड़ा रहे।

जि‍न लोगों को ई-रि‍क्‍शा मि‍लने वाला है, ऐसे कुछ परि‍वार जनों से मेरा मि‍लना हुआ। मैंने उनको पूछा, पहले कैसा था, अब क्‍या लगता है, कैसे करोगे? कुछ बातें उभर कर आई। कुछ लोगों ने कहा, हम पहला काम करेंगे जो पैसे बचेंगे बच्‍चों की पढ़ाई कराएंगे। अब देखि‍ए, जीवन कैसे बदलना शुरू हो जाता है। हम चाहते हैं कि‍ हमारे बच्‍चे पढ़-लि‍खकर के बड़े हो जाए। कुछ लोगों ने कहा कि‍ हम daily 40 रुपया - 50 रुपया बैंक में जमा करके बचत करेंगे ताकि‍ भवि‍ष्‍य में हमें काम आए। इस ई-रि‍क्‍शा के साथ उनको इंश्‍योरेंस का लाभ मि‍ल रहा है। प्रधानमंत्री जीवन रक्षा योजना, जीवन ज्‍योति‍ योजना, अटल पेंशन योजना, इन सारी योजनाओं का लाभ उनको दि‍या जा रहा है। यानी एक प्रकार से पूर्णत: सुरक्षा का कवच इन हमारे ई-रि‍क्‍शा वालों को मि‍ल रहा है। इनकी training का पूरा काम पूरा हो चुका है। उनको trained कि‍या गया है, उनको uniform दि‍या जा रहा है और पूरे लखनऊ के जीवन में एक नया culture पैदा करने का प्रयास कि‍या जा रहा है।

भारत आने वाले दि‍नों में tourism को बढ़ावा देने का लगातार प्रयास कर रहा है। 100 से अधि‍क देशों को ई-वीज़ा दि‍या जा रहा है। पहले की तुलना में बहुत बड़ी मात्रा में वि‍देशी लोग भारत आने लगे हैं। दुनि‍या का कोई भी व्‍यक्‍ति‍ हि‍न्‍दुस्‍तान में पहली बार आएगा, उसकी सबसे पहले मुलाकात कि‍ससे होगी? सबसे पहले आएगा, उसका मि‍लना होगा, ड्राइवर के साथ। कोई भी बाहर का मेहमान आता है, सबसे पहले ड्राइवर से मि‍लता है और वो ड्राइवर पहले 10-15 मि‍नट में उसके साथ जो भी व्‍यवहार करेगा, वही उसके मन में हि‍न्‍दुस्‍तान की छवि‍ होगी। वही छवि‍ लेकर के वो जाएगा। अगर वो प्‍यार से उनसे बात करता है, ईमानदारी का व्‍यवहार करता है। बाहर का व्‍यक्‍ति‍ आया, उसको मदद करने का प्रयास करता है, वो जीवन भर बाहर से आया हुआ व्‍यक्‍ति‍ हि‍न्‍दुस्‍तान को भूलकर के नहीं जाएगा। देश का प्रधानमंत्री जो काम नहीं कर सकता है, वो एक ऑटो रि‍क्‍शा वाला कर सकता है, एक रि‍क्‍शा चलाने वाला कर सकता है।

जो बात अरबों-खरबों रुपए के advertisement नहीं कर सकती है, वो एक हमारे एक ड्राइवर के व्‍यवहार के कारण हो सकती है। और इसलि‍ए इन ड्राइवरों की एक वि‍शेष training की जाती है ताकि‍, पर्यटन के लिए भवि‍ष्‍य में भारत की छवि‍ अच्‍छी बनाने वाले ये उत्‍तम से उत्‍तम भारत के brand ambassador के रूप में काम कर सके, उस दि‍शा में काम कि‍या जा रहा है।

ये सि‍र्फ पैदल चलने वाली रि‍क्‍शा से नि‍कलकर के ई-रि‍क्‍शा में गया, इतना छोटा सा परि‍वर्तन नहीं है। ये पूरा एक transformation हो रहा है। एक नया बदलाव आ रहा है और इसके कारण आज दुनि‍या जो global warming की चि‍न्‍ता कर रही है। Environment को लेकर के दुनिया परेशान है। अभी दुनि‍या के सभी देश पेरि‍स में मि‍ले थे, पेरि‍स में मि‍लकर के सब लोग अपना माथा खपा रहे थे कि‍ कैसे दुनि‍या को global warming से बचाया जाए। हर कि‍सी को चि‍न्‍ता सता रही थी। छोटे-छोटे देश जो समुद्री तट से जुड़े हुए हैं उनको अपने अस्‍ति‍त्‍व का खतरा लग रहा है और हर कि‍सी ने पर्यावरण की रक्षा करनी पड़े, environment की रक्षा करनी पड़े, ये आवश्‍यकता बनी है। ये ई-रि‍क्‍शा मानव जाति‍ जि‍स संकट को झेल रही है, पर्यावरण का, उससे मुक्‍ति‍ दि‍लाने का भले गि‍लहरी जैसा छोटा-सा प्रयास क्‍यों न हो, वो भी एक प्रयास है और जि‍स प्रयास को हमारा ऑटो-रि‍क्‍शा वाला करने वाला है।

यानी एक प्रकार से हर वि‍षय को अपने साथ जोड़कर के एक परि‍वर्तन लाने का प्रयास हो रहा है। इसके कारण लखनऊ के जीवन में नया बदलाव आएगा। इन दो हजार से ज्‍यादा परि‍वारों के जीवन में बदलाव आएगा। यहां की आर्थि‍क गति‍वि‍धि‍ को ताकत मि‍लेगी और हम जो चाहते हैं कि‍ वि‍कास वो हो जो सामान्‍य मानवि‍की की जि‍न्‍दगी में बदलाव लाए। हर व्‍यक्‍ति‍ के जीवन में नई आशा लेकर के आए। व्‍यवस्‍था ऐसी हो जहां नौजवान अपने पैरों पर खड़े रहने की ताकत पाए। उन सारी बातों को लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं।

मैं आज जि‍नको ई-रि‍क्‍शा प्राप्‍त हो रही है, उन सभी परि‍वारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और मैं आशा करता हूं कि‍ ये इनकी जि‍न्‍दगी की शुरूआत है, नई जि‍न्‍दगी की शुरूआत है। अब उन्‍होंने रूकना नहीं है। प्रगति‍ की नई ऊंचाइयां पार करने के लि‍ए अपने जीवन में भी बदलाव लाना है और देखते ही देखते उनका परि‍वार, उनके बच्‍चे सुख और शांति‍ की जि‍न्‍दगी जीएं उससे बड़ा हमारे लि‍ए अवसर क्‍या हो सकता है और इसलि‍ए मैं इन सभी परि‍वारों को हृदय से शुभकामनाएं देता हूं।

मैं लखनऊ को आज वि‍शेष रूप से धन्‍यवाद करना चाहता हूं क्‍योंकि‍ प्रधानमंत्री बनने के बाद आपके बीच आने का यह मेरा पहला अवसर है। मुझे लखनऊवासि‍यों का इसलि‍ए अभि‍नंदन करना है कि‍ आपने यहां से एक ऐसे सांसद को चुना है, ऐसे सांसद को चुनकर के आपने देश को एक बहुत ही उत्‍तम गृहमंत्री दि‍या है। इसके लि‍ए मैं लखनऊवासि‍यों का हृदय से बहुत-बहुत अभि‍नंदन करता हूं। मैं लखनऊवासि‍यों को बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Text of PM’s unveils the hologram statue of Netaji at India Gate
January 23, 2022
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Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !