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उपस्थि‍त सभी वरिष्ठ महानुभाव

आप सबको मेरी तरफ से दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

गुजरात के लोग नया वर्ष भी मनाते हैं, उनको नववर्ष की शुभकामनाएं और आज बहनों का त्योहार है भाई दूज, तो सभी बहनों को मेरा प्रणाम।

आज पवित्र दिवस पर ...अस्पताल में जब मरीज जाता है तो कायाकल्प हो कर के बाहर आता है, ले‍किन अस्पताल का ही कायाकल्प हो, ये बहुत कम होता है, और मैं आज देख रहा हूं कि 98 ईयर ओल्ड एक अस्पताल का कायाकल्प हुआ है। उसे एक नया जीवन मिला है। एक प्रकार से जीवन का एक नया आरंभ हो रहा है इस अस्पताल का। इस काम को करने के लिए नीता बहन को और रिलायंस फाउंडेशन को मैं हृदय से बहुत बहुत बधाई देता हूं।

हमारे देश में, जब दुनिया के साथ comparison होता है, तो आरोग्य के क्षेत्र में बहुत सी बातें ऐसी हो, जिसमें हमें शर्मिंदगी महसूस करनी पड़ती है। आज हमारे यहां जन्म के साथ मरने वाले बच्चों की संख्या बहुत चिंताजनक है। प्रसूता माताओं के मरने की संख्या बहुत चिंताजनक है। कोई एक बच्चा अगर बोरवेल में गिर जाए तो देश भर के मीडिया के लोग वहां पहुंच जाते हैं, running commentary देते हैं। वह हिल रहा है, सांस की आवाज आ रही है, रोने की आवाज आ रही है और हर परिवार खाना-वाना छोड़ कर के टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाता है और जब तक वह बच्चा जिंदा नहीं निकलता है, एक मायूसी का माहौल रहता है। एक बच्चा बोरवेल में गिर जाए, देश परेशान हो जाता है।

लेकिन हमें पता होता है कि हमारे अगल बगल में सैकड़ों की तादाद में बच्चे जन्म के साथ ही मृत्यु की शरण में पहुंच जाते हैं। कभी बालक मर जाता है, कभी मां और बालक दोनों मर जाते हैं। कारण- जो प्राथमिक सुविधाएं चाहिए, उसका अभाव है, और तब जा कर के , समाज और सरकार मिल कर के, जिसे हम प्रा‍थमि‍कता दे कर के गरीब से गरीब व्यक्ति‍ को आरोग्य की सुविधाएं कैसे उपलब्ध हों, उस दिशा में जितने प्रयत्न हम करें, वह कम है। उसमें आज एक आधुनिक स्वरूप में इस अस्पताल का मध्यमवर्गीय गरीब परिवारों के लिए बहुत उपकारक सिद्ध होगा।

आज मेडिकल साइंस का रूप बहुत बदल चुका है, और आने वाले दिनों में बहुत तेजी से बदलने वाला है। धीरे-धीरे डाक्टरों की expertise, medical equipments ले रहे हैं। ज्यादातर equipment तय कर देता है कि आपकी क्या तकलीफ है। बाद में डाक्टर के हाथ case जाता है। और equipments के क्षेत्र में इतनी कठिनाई है, इतने costly equipments हैं, कि सामान्य अस्पतालों में इसको लगाना बड़ा मुश्कि‍ल है। हमने एक initiative लिया है, ‘मेक इन इंडिया’। क्यूं ना हमारे देश में मेडिकल के लिए आवश्यक जो equipment है, उस industry को बढ़ावा मिले, Foreign Direct Investment आए, और हमारे देश में इस प्रकार के साधन manufacture होते हैं तो दूर-दराज गांव तक बहुत कम खर्चे में इन व्यवस्थाओं को उपलब्ध किया जा सकता है।

आज के Information Technology के युग में Tele-Medicine के माध्यम से Expert Opinion के लिए कहीं दूर-दराज क्षेत्र में भी, पहाड़ों में भी रहने वाले व्यक्ति‍ के लिए अगर ये नेटवर्क के साथ जोड़ा जाए तो अच्छी से अच्छी सेवा उपलब्ध की जा सकती है। भारत सरकार ने एक ‘डिजीटल इंडिया’ का बीड़ा उठाया है, उसका मूल जो फायदा होना है, वह एक Tele-Medicine के माध्यम से गरीब से गरीब पेशेंट को अच्छी सुविधा कैसे मिले, और दूसरा गरीब से गरीब बालक को अच्छी शि‍क्षा कैसे मिले। आज के Technology के माध्यम से ये संभव हुआ है और उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं और आने वाले दिनों में जरूर उसके अच्छे परिणाम मिलेंगे।

आरोग्य के क्षेत्र में यह माना हुआ है कि Preventive Healthcare हम कितने अच्छे तरीके से करते हैं, उस पर ही हमारी आरोग्य की संभावनाएं रहती हैं। बीमार होने के बाद ठीक होने में खर्चा बहुत ज्यादा लगता है, लेकिन बीमार न होने के लिए बहुत कम Investment होता है। लेकिन उस कम Investment में हमारी वृत्ति‍ कम रहती है। व्यक्तिा के जीवन में भी Preventive Health Care के विषय में जितनी consciousness चाहिए, जितनी awareness चाहिए, और जितनी सुविधाएं चाहिए, वह नहीं होती।

अगर व्यक्ति को पीने को शुद्ध पानी मिल जाए तो भी हेल्थ सेक्टर में बहुत तेजी से सुधार आ सकता है, पीने का शुद्ध पानी। मैं अपना अनुभव बताता हूं, आप लोगों ने आज से दस साल पहले साबरमती नदी देखी होगी तो, और किसी बच्चे को कहा जाए कि साबरमती पर essay लिखो तो वह लिखता था कि नदी में बालू होती है, सर्कस के टेंट लगते हैं, क्रिकेट खेलने के लिए अच्छी जगह होती है। क्योंकि उसे मालूम नहीं था कि वहां पानी होता था, नदी में पानी होता है, ये साबरमती के तट पर रहने वालों को पता नहीं था। जब उसको नर्मदा नदी के पानी से जोड़ा गया, और साबरमती नदी को जिंदा किया गया, Riverfront बनाया गया। दुनिया की नजरों में तो इतना ही है कि वाह, Riverfront बहुत अच्छा लगता है, हिन्दुस्तान में पहला Riverfront बना, लेकिन वहां जो और उपयोग हुआ, उसके कारण Rainwater Harvesting हुआ, पानी का सिंचन हुआ, जब नर्मदा का पानी आया, water level ऊपर आया। पूरे शहर का जो water level ऊपर आने के कारण जो म्यूनिसिपल कारपोरेशन का बिजली का बिल पर ईयर 15 करोड़ रुपये कम हो गया तो वे और खुश हो गए। अब ये लोगों के नजर में तो है ये कि पानी आया, अच्छा लगता है। जरा सैर करने में ठीक लगता है। लेकिन सबसे बड़ी बात, जिन लोगों ने, आज से दस साल पहले, बारह साल पहले का अखबार देखेंगे, अगर पांच दिन, सात दिन भी बारिश ज्यादा रहती थी तो अस्पताल की तस्वीरें अखबार में छपती थीं। पेशेंट के लिए जगह नहीं थी, वहां के कोरिडोर के अंदर पेशेंट पड़े हुए हैं और epidemic का हाल बन जाता था।

गरीब परिवार को सबसे बड़ी मुसीबत होती है। अगर ज्यादा गर्मी हो तो गरीब मरेगा, ज्यादा ठंड हो तो गरीब मरेगा, ज्यादा बारिश हो तो गरीब मरेगा। सारी मुसीबतें अगर किसी को झेलनी पड़ती है तो गरीब को झेलनी पड़़ती है। और अगर गरीब बीमार होता है सिर्फ इंसान बीमार नहीं होता है, गरीब बीमार होता है तो पूरा परिवार बीमार हो जाता है। अगर ऑटो रिक्शा चलाता है और वह बीमार हो गया, तीन दिन तक पूरा घर भूखा मरता है। लेकिन ये पानी के कारण, वाटर लेबल ऊपर आने के कारण शुद्ध पानी की संभावना पैदा हुई, Fluoride से मुक्त पानी की संभावना पैदा हुई, दस साल में एक भी epidemic का अनुभव अहमदाबाद ने नहीं किया था।

कहने का तात्पर्य ये है कि पीने का शुद्ध पानी, इस पर हम जितना बल दें, वह आरोग्य के लिए उतना अच्छा है। ज्यादातर हमारे यहां बच्चे, अभी मैंने एक रिपोर्ट पढ़ा था कि पाकिस्तान में जो बच्चे मरते हैं, उनमें से 40 फीसदी बच्चों के मरने का कारण ये था कि वे खाने से पहले हाथ नहीं धोते। अब ये स्वभाव सिर्फ पाकिस्तान में ही होगा, ऐसा नहीं है। हम भी तो वो ही ही हैं, हममें क्या अलग है, हमारी तो पुरानी विरासत एक ही है।

इसलिए मैं मध्य प्रदेश सरकार को ये बधाई देता हूं, उसने एक बड़ा अभि‍यान चलाया, बच्चों को सामूहिक रूप से, साबुन से उनके हाथ धोने का कार्यक्रम किया। उन्होंने गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में नाम दर्ज कराया कि एक समय में एक साथ लाखों बच्चों ने हाथ धोये। एक बहुत बड़ा वर्ग है जिसको ये लगेगा कि ये क्या हो रहा है। ये देश के लिए कर रहे हैं, ये देश यहीं से शुरू करना पड़ेगा, इसकी आवश्यकता पैदा हुई है। इसलिए हम इस दिशा में कैसे आगे बढ़ें?

अभी मैं United Nations में गया था, पहली बार बोलने का मौका मिला, और मैंने एक बात कही कि क्यों ना हम International Yoga Day मनाएं। मैं लगा हूं पीछे, हो सकता है कि UN इसको स्वीकार करे। Holistic Healthcare पूरी दुनिया के अंदर एक बहुत बड़े आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। अच्छे से अच्छे डॉक्टर भी होमियोपैथि‍क की ओर जा रहे हैं। Holistic Healthcare का मूड बना रहे हैं। स्ट्रेसयुक्त लाइफ में से stress free life की ओर जाने के लिए मूड बना रहे हैं। और दुनिया को सही चीज कैसे मिले, अगर हमारे पास ऐसे विरासत हैं तो इसको कैसे दिया जा सके। उस दिशा में हम अगर प्रयास करते हैं तो हम अपना तो कल्याण कर ही सकते हैं, लेकिन औरों का भी कल्याण कर सकते हैं।

आज भी विश्व में भारत के डाक्टरों की इतनी प्रतिष्ठा है, कि जिन देशों में भारतीय डाक्टरों का अनुभव है, थोड़ी बहुत जानकारी है, वहां के पेशेंट इस बात में हमेशा इच्छुक रहते हैं कि ऑपरेशन थि‍येटर में जाने से पहले उन्हें कोई इंडियन डाक्टर का चेहरा दिखाई दे। जिस पल वह इंडियन डाक्टर का चेहरा देखता है, उसका confidence एकदम से बढ़़ जाता है। उसको लगता है कि अब चिंता नहीं है, अब शरीर उनको सौंप दो। यह इज्जत हमारे डाक्टरों ने अपने कौशल-पुरूषा‍र्थ से कमाई है।

हमारा अपना ये कौशल्य है, अब मेडिकल साइंस में हम नए नहीं हैं। अभी नीता बहन, धन्वंतरी की बात कर रही थी, हमारे देश में एक जमाना था, गांव में एक वैद्यराज हुआ करते थे और पूरा गांव स्वस्थ होता था। बीमारी गांव में घुस नहीं सकती थी, एक वैद्यराज था। आज हर क्षेत्र के specialised हैं, और मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में ये speciality आगे बढ़ने वाली है। बायें हाथ का specialist अलग होगा, दायें हाथ का specialist अलग होगा। Right Eye को कोई और देखता होगा, Left Eye को कोई और देखता होगा, यहां तक हम आगे बढ़ने वाले हैं।

एक वैद्यराज, क्या कारण था कि पूरे गांव को स्वस्थ रखता था, और आज इतने Specialists होने के बावजूद भी हम और-और संकटों से गुजरते जा रहे हैं। हम Preventive Healthcare पर बल दें, हमारी lifestyle पर बल दें, हम खुद अपने life को respect करना शुरू करें तो हो सकता है कि हमें इस प्रकार की व्यवस्थाओं की आवश्यकता ही न हो। और ये सब संभव है, मुश्कि‍ल काम नहीं है।

मेडिकल साइंस की दुनिया में हम गर्व कर सकते हैं, हमारा देश किसी समय क्या था। महाभारत में कर्ण की कथा, हम सब कर्ण के विषय में महाभारत में पढ़ते हैं। लेकिन कभी हमने थोड़ा सा और सोचना शुरू करें तो ध्यान में आएगा कि महाभारत का कहना है कि कर्ण मां की गोद से पैदा नहीं हुआ था, इसका मतलब ये हुआ कि उस समय Genetic Science मौजूद था। तभी तो कर्ण, मां की गोद के बिना उसका जन्म हुआ होगा।

हम गणेश जी की पूजा करते हैं, कोई तो प्लास्टि‍क सर्जन होगा उस जमाने में, जिसने मनुष्य के शरीर पर हाथी का सर रख कर के प्लास्टि‍क सर्जरी का प्रारंभ हुआ होगा। अनेक ऐसे क्षेत्र होंगे जहां हमारे पूर्वजों ने बहुत सारा योगदान दिया होगा। और कुछ बातों को तो हमने स्वीकार किया है। आज अगर Space Science को देखें तो हमारे पूर्वजों ने Space Science में बहुत बड़ी ताकत दिखाई थी किसी समय। उस समय सदियों पहले आर्यभट्ट जैसे लोगों ने जो बातें कही थी, आज विज्ञान उसको स्वीकार करने में..., सफलतापूर्वक उसकी मान्यता हो गई है। कहने का तात्पर्य यह है कि यह वो देश है, जिसके पास ये सामर्थ्य रहा था। इसको हम फिर कैसे दोबारा regain करें।

जैसे अस्पताल का कायाकल्प हुआ है, भारत का भी कायाकल्प भी संभव है, और उस सपनों को पूरा करने के लिए अगर हम प्रयास करें, और मुझे विश्वास है कि जिन initiative को लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं और मैं जब ये बातें कहता हूं तो ये बात मैं साफ करता हूं, मैं उस सोच का इंसान नहीं हूं जो कहे कि पहले की सरकारों ने कुछ नहीं किया। मैं ऐसी सोच रखने वाला इंसान नहीं हूं। हर एक ने अपने-अपने कार्यकाल में कुछ न कुछ अच्छा काम किया है। जिस समय जैसी जिम्मेवारी है, और और उमंग के साथ, और अच्छी सोच के साथ आगे बढ़ाना होता है।

हमारी कोशि‍श है कि अगर देश को आगे बढ़ाना है, तो सरकार सबकुछ करेगी, इस विचार से आगे बढ़ना होगा। सबको मिल कर के कुछ करना होगा, तब जाकर के देश आगे बढ़ेगा। सवा सौ करोड़ का देश है, क्या कुछ नहीं कर सकता। जब मैं Mars की बात करता हूं, अगर मुंबई के अंदर आटो रिक्शा में जाना है तो एक किलोमीटर का खर्चा दस बारह रुपये होता होगा, हम Mars पर गए, सात रुपये किलोमीटर का खर्चा आया। ये भी हमारे वैज्ञानिकों की ताकत है, और वो सात रुपये का खर्चा है लेकिन आने वाले कई वर्षों तक काम करने वाला है। जा कर के सोने वाला नहीं है।

कहने का तात्पर्य यह है कि देश में जो बहुत ऊर्जा है, सामर्थ्य पड़ा है, उस सामर्थ्य को लेकर के हम आगे बढ़ें। और इस देश की सोच देखि‍ए, अभी नीता बहन हमारी सर्वे भवन्तु सुखिनः का मंत्र बोल रही थीं, मैं मानता हूं, हिन्दुस्तान की कोई भी पोलिटिकल पार्टी हो या दुनिया की कोई भी पोलिटिकल पार्टी हो, अगर पोलिटिकल पार्टी को one line agenda लिखना है, अपना Manifesto लिखना है, तो इससे बड़ा कोई Manifesto नहीं हो सकता है जो कहता है - सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुः खभाग्भवेत् । यानी सबकी स्वास्थ्य की यहां कल्पना की गई है, सबके सुख की कल्पना की गई है, सबके शांतिपूर्ण जीवन की कल्पना की गई है, जगत के लिए इससे बड़ा कोई Manifesto नहीं हो सकता है, जो वेदकाल से मानव जाति के लिए दिया गया है। उस Manifesto को लागू करने के लिए भारत का दायित्व और ज्यादा है।

भारत का दायित्व जब ज्यादा है तब... हमारे यहां राजा की कल्पना की गई है और राजा रन्ग्तिदेव ने इसकी व्याख्या की है। शास्त्रों ने कहा है, राजा के कर्तव्य का वर्णन करते हुए- ना त्वहम कामयेव राज्यम, ना स्वर्गम, ना पुनर्भावम, कामयेव दुख: तप्तनाम, प्राणिन: अर्त्रिनष्टम। यानी न मुझे राज्य की कामना है, न मुझे मोक्ष की कामना हे, न मुझे पुनर्जन्म की कामना है, अगर कामना है तो गरीब के आंसू पोछने की कामना है। ये भारत की परंपरा रही है, उस परंपरा को लेकर के हम अगर आगे चलते हैं तो मुझे विश्वास है Health Insurance से Health Assurance की यात्रा लंबी है, कठिन है, सिर्फ स्पेलिंग बदलने से होने वाला वो काम नहीं है, बहुत बड़ी साधना करनी होगी। उस साधना करने का संकल्प लेके आप सबसे आर्शीवाद मिले, शुभकामनाएं मिले, जरूर सफल होंगे।

मैं नीता जी को बहुत बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं, अंबानी परिवार को शुभकामनाएं देता हूं। और मुझे अच्छा ये लगा कि उनके मोबाइल के द्वारा गरीबों के सेवा करने का बड़ा अभि‍यान चल रहा है। नीता बहन मुझसे मिलीं तो मैंने उनसे कहा कि उसका जितना ज्यादा उत्थान करोगी, उतना ज्यादा समाज की ज्यादा सेवा होगी।

मैं उनको बहुत बहुत बधाई देता हूं।

आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद।

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Minister of Foreign Affairs of the Kingdom of Saudi Arabia calls on PM Modi
September 20, 2021
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Prime Minister Shri Narendra Modi met today with His Highness Prince Faisal bin Farhan Al Saud, the Minister of Foreign Affairs of the Kingdom of Saudi Arabia.

The meeting reviewed progress on various ongoing bilateral initiatives, including those taken under the aegis of the Strategic Partnership Council established between both countries. Prime Minister expressed India's keenness to see greater investment from Saudi Arabia, including in key sectors like energy, IT and defence manufacturing.

The meeting also allowed exchange of perspectives on regional developments, including the situation in Afghanistan.

Prime Minister conveyed his special thanks and appreciation to the Kingdom of Saudi Arabia for looking after the welfare of the Indian diaspora during the COVID-19 pandemic.

Prime Minister also conveyed his warm greetings and regards to His Majesty the King and His Highness the Crown Prince of Saudi Arabia.