इस कार्यक्रम को मैं अभी देख रहा था। बहुत सी चीजें मैं अलग तरीके से देख रहा था। आपने देखा होगा, जिन्‍होंने ईनाम प्राप्‍त किया है, उनमें से ज्‍यादातर अहिन्‍दी भाषी राज्‍य के लोग हैं और योजना का नाम उन्‍होंने हिन्‍दी में दिया है, देखिये ‘नेशनल इंटीग्रेशन’। दूसरा आपने देखा होगा कि जिनके खाते खोले गए हैं, जो कपल आए थे, सभी बहनें फेस्टिवल मूड के कपड़ों में थीं। क्‍योंकि उन्हे यह इतना बड़ा हक मिला है, उनको यह बराबर समझ है। उनको पता है कि बैंक का खाता खुलेगा, खुद आपरेट कर पाएंगे, पैसे वहां जमा होंगे, इससे उन्‍हें जीवन में कितनी बड़ी सुरक्षा मिलेगी। उसके लिए इससे बड़ा कोई फेस्टिवल मूड हो ही नहीं सकता है।

यह आज खुशी की बात है कि आज बहुत सारे रिकार्ड ब्रेक हो रहे हैं। शायद इंश्‍योरेंस कंपनी के इतिहास में एक ही दिन में डेढ़ करोड़ लोगों का अकस्‍मात बीमा, दुर्घटना बीमा, एक लाख रुपये प्रति व्‍यक्ति का, शायद इंश्‍योरेंस कंपनी के जनमत से आज तक कभी नहीं हुआ होगा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकार्ड है। बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में भी एक दिवस में डेढ़ करोड़ नागरिकों का खाता खुलना, यह शायद बैंकिंग इतिहास का एक बहुत बड़ा रिकार्ड होगा।

इससे सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि जो सरकार में बैठे हैं, भिन्‍न भिन्‍न विभागों में काम कर रहे हैं, उनका भी विश्‍वास प्रस्‍थापित होने वाला है। आज के बाद जो हम तय करें, वह हम कर सकते हैं और शासन चलता है, व्‍यवस्‍था में जुड़े हुए लोगों के विश्‍वास पर। उनको अपने पर विश्‍वास हो कि हां, यह कर सकते हैं। यह एक ऐसा अचीवमेंट है जो सिर्फ बैंकिंग सेक्‍टर को नहीं, शासन व्‍यवस्‍था में जुड़े हुए हर व्‍यक्ति के विश्‍वास को अनेक गुना बढ़ा देगा। और इस कारण भविष्‍य में जब भी कोई योजना पर, इस प्रकार का मिशन मोड में काम करना होगा तो हम बहुत आसानी से कर पाएंगे, यह विश्‍वास आज प्रस्‍थापित हुआ है।

भारत सरकार की परंपरा में भी शायद एक साथ 77000 स्‍थान पर साइमलटेनियस कार्यक्रम एक साथ होना, इस प्रकार से कि व्‍यवस्‍था को विशिष्‍ट कार्य के लिए आर्गनाइज करना, एक साथ सभी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को लेकर इतना बड़ा कार्यक्रम करना, ये भी अपने आप में भारत सरकार के लिए एक पहला अनुभव है। वरना सरकुलर जाते हैं, मीटिंग होती है, फिर जानकारी आती है तब तक कि अच्‍छा नहीं हुआ, तो ठीक है, यह नहीं हुआ। इन सारी परंपराओं से हटकर इतना बड़ा अचीव करना, यह सरकार के लिए, सरकारी व्‍यवस्‍था के लिए, एक सुखद अनुभव है। और यह बात सही है कि सफलता नई सिद्धियों को पाने की प्रेरणा बन जाती है। सफलता नई सिद्धियों का गर्भाधान करती है। और ये सफलता देश को आगे ले जाने के अनेक जो प्रकल्‍प हैं, उसको एक नई ताकत देगी। यह आज के इस अवसर से मुझे लग रहा है।

इसको सफल करने वाले वित्‍त विभाग के सभी बंधु, सरकार के सभी बंधु, बैंकिंग क्षेत्र के सभी लोग, सभी राज्‍य सरकारें, ये सब अभिनंदन के अधिकारी हैं और हम सब मिल कर के किसी एक लक्ष्‍य को पाना चाहें तो कितनी आसानी से पा सकते हैं, यह हमें ध्‍यान में आता है।

आप कल्‍पना कर सकते हैं, 1969 में जब बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, राष्‍ट्रीयकरण किया गया, तब कैसे कैसे सपने बोये गए थे। उस समय के सारे विधान निकालिये, सारे बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण गरीबों के लिए होता है, पूरे देश के गले उतार दिया गया था। लेकिन आजादी के 68 वर्ष के बाद, 68 प्रतिशत लोगों के पास भी अर्थव्‍यवस्‍था के इस हिस्‍सा से कोई संबंध नहीं है और इसलिए लगता है कि जिस मकसद से इस काम का प्रारंभ हुआ था, वह वहीं की वहीं रह गई। मैं यह मानता हूं कि जब कोई व्‍यक्ति बैंक में खाता खोलता है, तो अर्थव्‍यवस्‍था की जो एक मुख्‍य धारा है, उस धारा से जुड़ने का पहला कदम बन जाता है।

आज डेढ़ करोड़ परिवार या व्‍यक्ति, जो भी जुड़े हैं, वे अर्थव्‍यवस्‍था की मुख्‍यधारा में अपना पहला कदम रख रहे हैं। यह अपने आप में देश की आर्थिक व्‍यवस्‍था को गति देने के लिए एक महत्‍वपूर्ण सफलता है। आजादी के इतने साल के बाद और जो देश के गरीबों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, और गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अर्थव्‍यवस्‍था सबसे महत्‍वपूर्ण इकाई होती है। अगर उससे वह अछूत रह जाए, मुझे यह शब्‍द प्रयोग करना अच्‍छा तो नहीं लगता, पर मन करता है कि कहूं यह फाइनेंसियल अनटचेबिलिटी है। देश के 40 प्रतिशत लोग, जो भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के हकदार नहीं बन पाते, उसके लाभार्थी नहीं बन पाते, तो हम फिर गरीबी को हटाने के काम में सफल कैसे हो सकते हैं।

इसलिए हमारा मकसद है, अगर महात्‍मा गांधी ने सामाजिक छुआछूत को मिटाने का प्रयास किया, हमें गरीबी से मुक्ति पानी है, तो हमें फाइनेंसियल अनटचेबिलिटी से भी मुक्ति पानी होगी। हर व्‍यक्ति को भी फाइनेंसियल व्‍यवस्‍था से जोड़ना होगा और उसी के तहत इस अभियान को पूरी ताकत के साथ उठाया है।

आज भी गांव के गरीब परिवारों में जब जाते हैं तो देखते हैं, कि माताएं-बहनें बहुत मेहनत करके पैसे बचाती हैं। लेकिन उसको हर बार परेशानी रहती है, अगर पति को बुरी आदतें लगी हैं, व्‍यसन की आदत लग गई है। तो उस महिला को चिंता लगी रहती है कि शाम को पैसे कहां छुपायें, कहां रखें, बिस्‍तर के नीचे रखें, वह ढ़ूंढ के निकाल लेता है। लेकर के बैठ जाता है, उसको नशे की आदत लगी है। जब खाता खुल जाएगा तो महिलाओं का कितना आशीर्वाद मिलेगा हमलोगों को। इसलिए बैंकिंग सेक्‍टर के जिन महानुभावों ने इस काम को किया है, आपने 20 साल की नौकरी की होगी, 25 साल की नौकरी की होगी, आपने बड़े-बड़े मल्‍टी मिलेनियर के खाते खोले होंगे, उनको पैसे दिये होंगे, लेकिन आशीर्वाद पाने की घटना आज हुई है। वह महिला जब खाता खोलेगी, आपको आशीर्वाद देगी और आपके जीवन में सफलता प्राप्‍त होगी। यह छोटा काम नहीं किया है आपलोगों ने। यह एक ऐसा काम किया है, जिसमें लाखों लोगों, लाखों गरीब माताओं का आशीर्वाद आपको मिलने वाला है।

ये कैसी व्‍यवस्‍था हमने विकसित की है, मैं किसी को दोष नहीं देता हूं, मैं आत्‍मचिंतन कर रहा हूं। ये कैसी व्‍यवस्‍था हमने विकसित की है, कि इस देश का अमीर व्‍यक्ति कम से कम ब्‍याज पर धन पा सकता है। बैंक उसके बिजनेस हाउस पर जा करके, कतार लगा करके खड़ी होती है कि आप हमारे साथ बिजनेस कीजिए। बिजनेस के लिए यह आवश्‍यक होगा। वह कोई गलत करते हैं, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं, लेकिन यही स्थिति है और जो गरीब हैं, जिनको कम से कम ब्‍याज पर पैसा मिलना चाहिए, वह अमीर से पांच गुना ब्‍याज पर पैसे लेता है। उस साहूकार से पैसे लेता है, और उसके कारण उसका शोषण भी होता है, एक्‍सप्‍लाइटेशन होता है। हर प्रकार से उसके जीवन में संकट पैदा होने के कारण संकट की शुरूआत हो जाती है। एक बार साहूकार से वह पैसे लिया तो कभी वह उसके चंगुल से मुक्‍त नहीं हो पा रहा है। कर्ज में डूबा हुआ वह व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या की ओर चला जाता है। परिवार तबाह हो जाता है। क्‍या, इस देश की इतनी बड़ी बैंकिंग व्‍यवस्‍था, इतनी बडी फाइनेंसियल सिस्‍टम, उसका दायित्‍व नहीं है, इस दुष्‍चक्र से गरीबों को मुक्ति दिलाये? 

आज गरीबों की दुष्चक्र से मुक्ति का, आजादी का, मैं पर्व मना रहा हूं। 15 अगस्‍त को जिस योजना की घोषणा की, 15 दिन के भीतर भीतर योजना को लागू किया, और आज डेढ़ करोड़ परिवारों तक पहुंचने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। आगे चल कर के उसकी विश्‍वसनीयता बनेगी, बैंकिंग व्‍यवस्‍था में विश्‍वसनीयता बनेगी। उसके कारण बैंकिंग सेक्‍टर भी एक्‍सटेंड होने वाला है। कई नई ब्रांच खुलेगी। कई उसके नए एजेंट तय होंगे। लाखों नौजवानों को इसके कारण रोजगार मिलने वाला है। इस व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाने के लिए स्‍थायी व्‍यवस्‍था विकसित होगी। 2000 से ऊपर की जनसंख्‍या वाले जितने गांव हैं, वहां कोई न कोई बैंकिंग दृष्टि से काम आएगा। इवन पोस्‍टआफिस, आज ईमेल के जमाने में, एसएमएस के जमाने में, पोस्‍टल विभाग की गतिविधियां कम हुई है, लेकिन उसकी व्‍यवस्‍थाएं तो वैसी की वैसी हैं। उन व्‍यवस्‍थाओं का उपयोग बैकिंग सेक्‍टर के लिए किया जाएगा। इन गरीबों के लिए किया जाएगा। तो उसके कारण अपने आप ऐसी व्‍यवस्‍थाएं मिलेंगी, जिन व्‍यवस्‍थाओं के कारण गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ने के लिए बहुत बड़ी ताकत मिलने वाली है और हम सब मिल कर के, गरीबी के खिलाफ लड़ते हैं तो गरीबी से मुक्ति मिल सकती है। यह मेरा पूरा विश्‍वास है।

हम हमेशा कहते हैं, कि भाई सरकार हो, सरकार की संपत्ति हो, वह गरीबों के लिए है। लेकिन आज वह शब्‍दों में नहीं, वह हकीकत में परिवर्तित हो रहा है। उसके कारण आगे चल कर के बैंक से उसको 5000 रुपये तक का कर्ज मिलेगा।सामान्‍य मानव को इससे ज्‍यादा कर्ज की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है। उसको अपनेaass रोजमर्रा के काम के लिए चाहिए और अनुभव यह है, गरीब व्‍यक्ति जो बैंक के अंदर आता है, 99 प्रतिशत वह समय से पहले पैसे जमा कराता है। वह बेचारा हमेशा डरता रहता है। उसमें यदि बहनों के पास हो तो वह 100 प्रतिशत पेमेंट पहले कर देती हैं। ये बैंकिंग सेक्‍टर के लोगों का अनुभव है और बड़े-बड़े लोग । हमें मालूम है, क्‍या होता है और इसलिए यह सारा प्रयास गरीबों के लिए है। गरीबी से मुक्ति चाहने वालों के लिए एक अभियान का हिस्‍सा है। और उसी के लिए उसको आगे बढाया जा रहा है।

किसी काम को जब तब समय सीमा में बांध कर निर्धारित लक्ष्‍य को पाने का प्रयास नहीं किया जाए, और पूरी शक्ति से उसमें झोंक न दिया जाए, तो परिणाम नहीं मिलते और एक बार ब्रेक थ्रू हो जाए तो गाड़ी अपने आप चलने लग जाती है। आज के इस ब्रेक थ्रू के बाद मैं नहीं मानता हूं कि यह रूकने वाला है। शुरू में जैसे वित्‍त मंत्री जी कहते थे, 2015 अगस्‍त तक का समय चल रहा था। मैंने कहा, भाई इस झंडावंदन से अगले झंडावंदन तक में हमको काम करना है। 15 अगस्‍त को झंडावंदन किया और योजना घोषित की। 26 जनवारी तक इसे पूरा करें हम। 15 अगस्‍त 2015 तक क्‍यों इंतजार करें। और मैं वित्‍त विभाग का आभारी हूं, इस डिपार्टमेंट के सभी अधिकारियों का आभारी हूं, बैंकिंग सेक्‍टर का आभारी हूं कि उन्‍होंने बीड़ा उठा लिया है और उन्‍होंने मुझे वादा किया है कि हम जनवरी 26 पहले इस काम को पूरा कर लेंगे।

आज जो रुपे में जो क्रेडिट कार्ड मिल रहा है इन डेढ़ करोड़ लोगों को, हम दुनिया के जो पोपुलर वीजा कार्ड वगैरह हैं, उससे परिचित हैं, जो विश्‍व में चलता है। क्‍या हम लोगों के इरादा नहीं होना चाहिए क्‍या कि हमारा रूपे कार्ड दुनिया के किसी भी देश में चल सके, इतनी ताकत हमारी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? उसकी इतनी क्रेडिबिलिटी होनी चाहिए। होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? आज से इस इवेंट के बाद उसकी पूरी संभावना पैदा होगी। इस देश के डेढ़ करोड़ लोग होंगे, जैसे अमीर लोग कई बड़े रेस्‍टोंरेंट में जाते हैं, तो खाना खाते हैं तो अपना कार्ड देते हैं ओर वो कार्ड में से डेबिट होता है। अब मेरे गरीब के पास भी वो कार्ड होगा। वह भी अपना डेबिट करवाएगा, कोई सब्‍जी बेचता होगा। देखिए अमीर और गरीब की खाई भरने का कितना बड़ा इनीशिएटिव है ये। आज गरीब आदमी भी अपने हाथ में भी मोबाइल होता है तो वो दूसरे के बराबर, अपने को समझता है। उसके पास भी मोबाइल और मेरे पास भी मोबाइल है। अब वो, उसके पास भी कार्ड है और मेरे पास भी कार्ड है, इस मिजाज से काम करेगा। एक मनोवै‍ज्ञानिक परिवर्तन इससे आता है। आखिरकर मानसिक रूप से पक्‍का कर ले, हां मैं किसी की भी बराबरी कर सकता हूं, आगे बढ़ने में कोई रोक नहीं सकता इसको। वो आगे बढ सकता है। इसलिए स्‍पेशल स्‍कीम और भी जोड़ रहे हैं हम आज। हम 26 जनवरी तक, जिसमें आज जो डेढ़ करोड़ लोगों ने किया है, उनका भी समावेश होगा, 26 जनवरी तक जो लोग अपने खाते खुलवाएंगे, उनको एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा के अलावा 30 हजार रुपये का लाइफ इंश्‍योरेंस भी मिलेगा। जो परिवार में कोई बीमार हुआ , कोई जरूरत पड़ी तो उनको काम आएगा। 26 जनवरी तक ये लाभ मिलेगा। गरीब परिवार को एक लाख रुपये की व्‍यवस्‍था, किसी भी गरीब के लिए काम आएगी। उसके परिवार के लोगों को काम आएगी। कभी कभी ये बहुत से बातें, बड़े लोगों को समझ नहीं आती हैं, लेकिन सामान्‍य मानव तेजी से पकड़ता है।

जब 15 अगस्‍त को लाल किले से मैंने एक बात को कहा तो दूसरे दिन ज्‍यादा उसकी चर्चा सुनी नहीं। शाम में टीवी डिबेट में भी उसको सुना नहीं। लेकिन मुझे एक दो सज्‍जन मिलने आए तो उन्‍होंने कहा कि मेरा ड्राइवर बहुत खुश है, मैंने कहा क्‍यों, उसने कहा मोदी जी ने एक लाख रुपये का इंश्‍योरेंस दे दिया। गरीब आदमी को चीजों की कितनी समझ है, कितनी तेजी से वह चीजों को पकड़ता है, उसका एक उदाहरण है। विधिवेत्‍ताओं को शायद पता नहीं होगा एक लाख का इंश्‍योरेंस दिया गया है वह बहुत बड़ी योजना है। हिन्‍दुस्‍तान के एक ड्राइवर, एक गरीब आदमी को पता है, उसके भाग्‍य को बदलने की शुरूआत 15 अगस्‍त को तिरंगा झंडा फहराने के साथ हुई है, यह बात उस तक पहुंच गई है। यह ही चीजें हैं जो कि बदलाव लाती है। और बदलाव लाने की दिशा में हमारा प्रयास है।

हमारे यहां शास्‍त्रों में ऐसा कहा गया है सुखस्‍य मूलम धर्म, धर्मस्‍य मूलम अर्थ, अर्थस्‍य मूलम राज्‍यम। यानी सुख के मूल में धर्म यानी आचरण, लेकिन धर्म के मूल में आर्थिक, इकोनोमिकल स्‍टेबिलिटी है। इकोनोमिकल स्‍टेबिलिटी के मूल में राज्‍य का दायित्‍व है। यह राज्‍य की ज़िम्मेवारी है, फाइनेंसियल इंक्‍लूजन की। यह चाणक्‍य से भी पहले हमारे पूर्वजों ने कहा हुआ है और इस लिए राज्‍य अपना दायित्‍व निभाने का प्रयास कर रहा है कि जिसमें सामान्‍य व्‍यक्ति की भी अब आर्थिक स्थिति सामान्‍य होगी तो उसके जीवन के अंदर सुख और संतोष की स्थिति तक वह पहुंच जाएगा। इसलिए अब हमलोगों का प्रयास है और मैं मानता हूं कि आज जो योजना का आरंभ हुआ है, नौजवानों को रोजगार की संभावनाएं बढ़ने वाली है। गरीब आदमी के हाथ में पैसा आएगा, बचेगा अपने आप में।

जैसा वित्‍त मंत्री जी कहते थे, आने वाले दिनों में जो इंडिविजुअल स्‍कीम्‍स है उसका सीधा सीधा लाभ इन बैंक अकाउंट में जाएगा तो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो लड़ाई है, उसमें एक बहुत बड़ा उपयोगी शस्‍त्र बनने वाला है। जो भ्रष्‍टाचार के खिलाफ भी लड़ने की ताकत देगा। बैंक में खाता, वैसे हमारे खास करके हिन्‍दुस्‍तान और ज्‍यादातर एशियन कंट्रीज में, सदियों से हम लोगों का एक स्‍वभाव रहा है, हमारे संस्‍कार रहे हैं, वह संस्‍कार है, बचत । दुनिया के बाकी देशों में यह प्रकृति नहीं है। वहां तो ऋणम कृत्‍वा, घृतम पीवेत, कर्ज कर के घी पीओ। अब वो घी पीते नहीं, जो पीतें हैं वह पीते हैं। लेकिन ये फिलोस्‍फी गलत है। हमारे यहां परंपरा रही है, सेविंग की। और हमारे देश की ऐसी विशेषता खास एशियन कंट्रीज की ऐसी रही है। कि अपना ही सोचना ऐसा नहीं है, अपने बच्‍चों का भी सोचना, आने वाली पीढ़़ी का सोचना, यह हमारी सदियों क परंपरा रही है। ऐसा नहीं कर्ज करो और जियो बाद में, जो आएगा वह भुगतेगा, वह करेगा। क्रेडिट कार्ड के भरोसे जीने वाले हमलोग नहीं हैं। स्‍वभाव से सेविंग हमारी प्रकृति रही है, और उसके कारण बैंकिंग व्‍यवस्‍था अपने आप में एक लाभ है।

लेकिन बैंकों की स्थिति क्‍या है, मैं अपने जीवन की एक घटना सुनाना चाहता हूं। मैं मेरे गांव मे स्‍कूल में पढ़ता था, और देना बैंक के लोग हमारे स्‍कूल में आए थे। तो देना बैंक के लोग वो कोई मिस्‍टर वोरा करके थे। मुझे इतना याद है कि सबको समझा रहे थे, गुल्‍लक देते थे, पैसा बचाना चाहिए, बच्‍चों को पैसा बचाना चाहिए वगैरह वगैरह। खाता खोलते थे, हमने भी खुलवा दिया था, हमको भी एक गुल्‍लक मिला था। लेकिन हमारा गुल्‍लक में कभी एक रुपया पड़ा नहीं। क्‍योंकि हमारा वह बैकग्रांउड नहीं था कि हम वो कर पायें। अब खाता तो खुल गया, हम स्‍कूल छोड़ दिया, हम गांव छोड़ दिया, हम बाहर भटकने चले गए, तो बैंक वाले मुझे खोज रहे थे। शायद उन्‍होंने मुझे 20 साल तक खोजा, कहां हैं ये। और क्‍यों खोज रहे थे, खाता बंद करवाने के लिए। वह बोले भई, हर साल तुम्‍हारे खाते को कैरी फारवर्ड करना पड़ता है। कागजी कार्रवाई इतनी करनी पड़ रही है, तुम मुक्ति दो हमको। बाद में बताया गया कि मुझे खोजा जा रहा है, तो मैंने बाद में उन्‍हें मुक्ति दे दी।

तो वह एक समय था जब खाता बंद करवाने के लिए भी कोशिश की जाती थी। आज खाता खोलने के लिए कोशिश हो रही है। मैं मानता हूं, यहीं से, यहीं से गरीबों की जिंदगी के सूर्योदय का आरंभ होता है। मैं इस काम को करने वाले बैंकिंग सेक्‍टर के लोगों को बधाई देता हूं। और आज, मैंने एक चिट्ठी लिखी थी, करीब सात लाख लोगों को अभी मैंने एक ईमेल भेजा था, शायद यह भी किसी प्रधानमंत्री को यह काम पहली बार करने का सौभाग्‍य मिला होगा। बैंक के सभी व्‍यक्तियों को यह चिट्ठी गई है और मैंने इनसे आग्रह किया है कि यह बहुत बड़ा पवित्र और सेवा का काम है। इसको हमने करना है और सबने इसको किया।

इस बात को जिस प्रकार से बैंकिग सेक्‍टर के प्रत्‍यक्ष कार्य करने वाले लोगों ने उठा लिया है, मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं और मैं आशा करता हूं कि हमें 26 जनवरी तक इंतजार नहीं करना पड़े और 26 जनवरी से पहले हम लक्ष्‍य को प्राप्‍त करें, और देश में जो आर्थिक छुआछूत का जो एक माहौल है उससे मुक्ति दिलायें और ब्याज के दुष्‍चक्र की वजह से आत्‍महत्‍या की ओर जा रहे उन परिवारों को बचायें और उनके जीवन में भी सुख का सूरज निकले, इसके लिए प्रयास करें।

इसी अपेक्षा के साथ सबको बहुत बहुत धन्‍यवाद, सबको बहुत बहुत शुभकामनाएं।

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नमस्कार !

'विकसित राज्य से विकसित भारत अभियान' में आज हम मध्य प्रदेश के हमारे भाई-बहनों के साथ जुड़ रहे हैं। लेकिन इस पर बात करने से पहले मैं डिंडोरी सड़क हादसे पर अपना दुख व्यक्त करता हूं। इस हादसे में जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, मेरी संवेदनाएं उनके साथ हैं। जो लोग घायल हैं, उनके उपचार की हर व्यवस्था सरकार कर रही है। दुख की इस घड़ी में, मैं मध्य प्रदेश के लोगों के साथ हूं।

साथियों,

इस समय एमपी की हर लोकसभा-विधानसभा सीट पर, विकसित मध्य प्रदेश के संकल्प के साथ लाखों साथी जुड़े हैं। बीते कुछ दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों ने ऐसे ही विकसित होने का संकल्प लिया है। क्योंकि भारत तभी विकसित होगा, जब राज्य विकसित होंगे। आज इस संकल्प यात्रा से मध्य प्रदेश जुड़ रहा है। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

कल से ही एमपी में 9 दिन का विक्रमोत्सव शुरु होने वाला है। ये हमारी गौरवशाली विरासत और वर्तमान के विकास का उत्सव है। हमारी सरकार विरासत और विकास को कैसे एक साथ लेकर चलती है, इसका प्रमाण उज्जैन में लगी वैदिक घड़ी भी है। बाबा महाकाल की नगरी कभी पूरी दुनिया के लिए काल गणना का केंद्र थी। लेकिन उस महत्व को भुला दिया गया था। अब हमने विश्व की पहली "विक्रमादित्‍य वैदिक घड़ी" फिर से स्थापित की है। ये सिर्फ अपने समृद्ध अतीत को पुन: याद करने का सिर्फ अवसर भर है, ऐसा नहीं है। ये उस कालचक्र की भी साक्षी बनने वाली है, जो भारत को विकसित बनाएगा।

 

साथियों,

आज, एमपी की सभी लोकसभा सीटों को, एक साथ लगभग 17 हज़ार करोड़ रुपए की विकास परियोजनाएं मिली हैं। इनमें पेयजल और सिंचाई की परियोजनाएं हैं। इनमें बिजली, सड़क, रेल, खेल परिसर, सामुदायिक सभागार, और अन्य उद्योगों में जुड़े प्रोजेक्ट्स हैं। कुछ दिन पहले ही एमपी के 30 से अधिक रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी काम शुरु हुआ है। भाजपा की डबल इंजन सरकार ऐसे ही डबल स्पीड से विकास कर रही है। ये परियोजनाएं एमपी के लोगों का जीवन आसान बनाएंगी, यहां निवेश और नौकरियों के नए अवसर बनाएंगी। इसके लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई।

साथियों,

आज चारों तरफ एक ही बात सुनाई देती है- अबकी बार, 400 पार, अबकी बार, 400 पार! पहली बार ऐसा हुआ है जब जनता ने खुद अपनी प्रिय सरकार की वापसी के लिए ऐसा नारा बुलंद कर दिया है। ये नारा बीजेपी ने नहीं बल्कि देश की जनता-जनार्दन का दिया हुआ है। मोदी की गारंटी पर, देश का इतना विश्वास भाव-विभोर करने वाला है।

लेकिन साथियों,

हमारे लिए ये सिर्फ तीसरी बार सरकार बनाने का सिर्फ लक्ष्य है, ऐसा नहीं है। हम तीसरी बार में, देश को तीसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए चुनाव में उतर रहे हैं। हमारे लिए सरकार बनाना अंतिम लक्ष्य नहीं है, हमारे लिए सरकार बनाना, देश बनाने का माध्यम है। यही हम मध्य प्रदेश में भी देख रहे हैं। बीते 2 दशक से निरंतर आप हमें अवसर दे रहे हैं। आज भी विकास के लिए कितनी उमंग, कितना उत्साह है, ये आपने नई सरकार के बीते कुछ महीनों में देखा है। और अभी मैं, मेरे सामने स्क्रीन पर देख रहा हूं, लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। वीडियो कांफ्रेंस पर कार्यक्रम हो और 15 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हों, 200 से अधिक स्थानों पर जुड़े हों। ये घटना सामान्य नहीं है और मैं, मेरी आंखों से यहां सामने देख रहा हूं टीवी पर। कितना उत्साह है, कितना उमंग है, कितना जोश दिखाई दे रहा है, मैं फिर एक बार मध्यप्रदेश के भाइयों के इस प्यार को नमन करता हूं, आपके इस आशीर्वाद को प्रणाम करता हूं।

साथियों,

विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण के लिए डबल इंजन सरकार खेती, उद्योग और टूरिज्म, इन तीनों पर बहुत बल दे रही है। आज माँ नर्मदा वहां पर बन रही तीन जल परियोजनाओं का भूमिपूजन हुआ है। इन परियोजनाओं से आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की समस्या का भी समाधान होगा। सिंचाई के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में हम एक नई क्रांति होते देख रहे हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड के लाखों परिवारों का जीवन बदलने वाला है। जब किसान के खेत तक पानी पहुंचता है, तो इससे बड़ी सेवा उसकी क्या हो सकती है। भाजपा सरकार और कांग्रेस की सरकार के बीच का क्या अंतर होता है, इसका उदाहरण सिंचाई योजना भी है। 2014 से पहले के 10 वर्षों में देश में लगभग 40 लाख हेक्टेयर भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में लाया गया था। लेकिन बीते 10 वर्ष के हमारे सेवाकाल में इसका दोगुना यानि लगभग 90 लाख हेक्टेयर खेती को सूक्ष्म सिंचाई से जोड़ा गया है। ये दिखाता है कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता क्या है। ये दिखाता है कि भाजपा सरकार यानि गति भी, प्रगति भी।

साथियों,

छोटे किसानों की एक और बड़ी परेशानी, गोदाम की कमी की रही है। इसके कारण छोटे किसानों को औने-पौने दाम पर अपनी उपज मजबूरी में बेचनी पड़ती थी। अब हम भंडारण से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षो में देश में हजारों की संख्या में बड़े गोदाम बनाए जाएंगे। इससे 700 लाख मीट्रिक टन अनाज के भंडारण की व्यवस्था देश में बनेगी। इस पर सरकार सवा लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने जा रही है।

साथियों,

हमारी सरकार गांव को आत्मनिर्भर बनाने पर बहुत बल दे रही है। इसके लिए सहकारिता का विस्तार किया जा रहा है। अभी तक हम दूध और गन्ने के क्षेत्र में सहकारिता के लाभ देख रहे हैं। भाजपा सरकार, अनाज, फल-सब्ज़ी, मछली, ऐसे हर सेक्टर में सहकारिता पर बल दे रही है। इसके लिए लाखों गांवों में सहकारी समितियों का, सहकारी संस्थानों का गठन किया जा रहा है।

कोशिश यही है कि खेती हो, पशुपालन हो, मधुमक्खी पालन हो, मुर्गीपालन हो, मछलीपालन हो, हर प्रकार से गांव की आय बढ़े।

साथियों,

गांव के विकास में अतीत में एक और बहुत बड़ी समस्या रही है। गांव की ज़मीन हो, गांव की प्रॉपर्टी हो, उसको लेकर अनेक विवाद रहते थे। गांव वालों को जमीन से जुड़े छोटे-छोटे काम के लिए तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब ऐसी समस्याओं का हमारी डबल इंजन की सरकार, पीएम स्वामित्व योजना के जरिए स्थाई समाधान निकाल रही है। और मध्य प्रदेश तो स्वामित्व योजना के तहत बहुत अच्छा काम कर रहा है। मध्य प्रदेश में शत-प्रतिशत गांवों का ड्रोन से सर्वे किया जा चुका है। अभी तक 20 लाख से अधिक स्वामित्व कार्ड दिए जा चुके हैं। ये जो गांव के घरों के कानूनी दस्तावेज़ मिल रहे हैं, इससे गरीब कई तरह के विवादों से बचेगा। गरीब को हर मुसीबत से बचाना ही तो मोदी की गारंटी है। आज मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों मेँ साइबर तहसील कार्यक्रम का भी विस्तार किया जा रहा है। अब नामांतरण, रजिस्ट्री से जुड़े मामलों का समाधान डिजिटल माध्यम से ही हो जाएगा। इससे भी ग्रामीण परिवारों का समय भी बचेगा और खर्च भी बचेगा।

साथियों,

मध्य प्रदेश के नौजवान चाहते हैं कि एमपी देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में से एक बने। मैं एमपी के हर नौजवान को, विशेष रूप से फर्स्ट टाइम वोटर को कहूंगा कि, आपके लिए बीजेपी सरकार नए अवसर बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रही। आपके सपने ही मोदी का संकल्प है। मध्य प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत का, मेक इन इंडिया का एक मज़बूत स्तंभ बनेगा। मुरैना के सीतापुर में मेगा लेदर एंड फुटवेयर क्लस्टर, इंदौर में रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री के लिए पार्क, मंदसौर के इंडस्ट्रियल पार्क का विस्तार, धार इंडस्ट्रियल पार्क का नया निर्माण, ये सब कुछ इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं। कांग्रेस की सरकारों ने तो मैन्युफेक्चरिंग की हमारी पारंपरिक ताकत को भी बर्बाद कर दिया था। हमारे यहां खिलौना बनाने की कितनी बड़ी परंपरा रही है। लेकिन स्थिति ये थी कि कुछ साल पहले तक हमारे बाज़ार और हमारे घर विदेशी खिलौनों से ही भरे पड़े थे। हमने देश में खिलौना बनाने वाले अपने पारंपरिक साथियों को, विश्वकर्मा परिवारों को मदद दी। आज विदेशों से खिलौनों का आयात बहुत कम हो गया है। बल्कि जितने खिलौने हम आयात करते थे, उससे ज्यादा खिलौने आज निर्यात कर रहे हैं। हमारे बुधनी के खिलौना बनाने वाले साथियों के लिए भी अनेक अवसर बनने वाले हैं। आज बुधनी में जिन सुविधाओं पर काम शुरु हुआ है, उससे खिलौना निर्माण को बल मिलेगा।

भाइयों और बहनों,

जिनको कोई नहीं पूछता, उनको मोदी पूछता है। देश में ऐसे पारंपरिक काम से जुड़े साथियों की मेहनत का प्रचार करने का जिम्मा भी अब मोदी ने उठा लिया है। मैं देश-दुनिया में आपकी कला, आपके कौशल का प्रचार कर रहा हूं और करता रहूंगा। जब मैं विदेशी अतिथियों को कुटीर उद्योग में बने सामान उपहार के रूप में देता हूं, तो आपका भी प्रचार करने का पूरा प्रयास करता हूं। जब मैं लोकल के लिए वोकल होने की बात करता हूं, तो आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए घर-घर एक प्रकार से बात पहुंचाता हूं।

साथियों,

बीते 10 वर्षों में पूरे विश्व में भारत की साख बहुत अधिक बढ़ी है। आज दुनिया के देश भारत के साथ दोस्ती करना पसंद करते हैं। कोई भी भारतीय आज विदेश जाता है, तो उसको बहुत सम्मान मिलता है। भारत की इस बढ़ी हुई साख का सीधा लाभ निवेश में होता है, पर्यटन में होता है। आज अधिक से अधिक लोग भारत आना चाहते हैं। भारत आएंगे, तो एमपी आना तो बहुत स्वाभाविक है। क्योंकि एमपी तो अजब है, एमपी तो गजब है। पिछले कुछ वर्षों में ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। ओंकारेश्वर आदि गुरु शंकराचार्य की स्मृति में विकसित किए जा रहे एकात्म धाम के निर्माण में, ये संख्या और बढ़ेगी। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ कुंभ भी होने वाला है। इंदौर के इच्छापुर से ओंकारेश्वर तक 4-लेन सड़क के बनने से श्रद्धालुओं को और सुविधा होगी। आज जिन रेल परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ है, उससे भी मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी और सशक्त होगी। जब कनेक्टिविटी बेहतर होती है, तो खेती हो, पर्यटन हो या फिर उद्योग, हर किसी को लाभ होता है।

साथियों,

बीते 10 वर्ष में हमारी नारीशक्ति के उत्थान के रहे हैं। मोदी की गारंटी थी कि माताओं-बहनों के जीवन से हर असुविधा, हर कष्ट को दूर करने का ईमानदार प्रयास करुंगा। ये गारंटी मैंने पूरी ईमानदारी से पूरा करने का प्रयास किया है। लेकिन आने वाले 5 वर्ष हमारी बहनों-बेटियों के अभूतपूर्व सशक्तिकरण के होंगे। आने वाले 5 वर्षों में हर गांव में अनेक लखपति दीदियां बनेंगी। आने वाले 5 वर्षों में गांव की बहनें, नमो ड्रोन दीदियां बनकर, खेती मे नई क्रांति का आधार बनेंगी। आने वाले 5 वर्षों में बहनों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आएगा। हाल में एक रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक, बीते 10 वर्षों में गरीब कल्याण के लिए जो काम हुए हैं, उससे गांव के गरीब परिवारों की आय तेज़ी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक शहरों के मुकाबले गांव में आय ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही है। बीते 10 वर्षों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर आए हैं। यानि बीजेपी सरकार सही दिशा में काम कर रही है। मुझे विश्वास है कि मध्य प्रदेश ऐसे ही तेजी से विकास की नई ऊंचाई प्राप्त करता रहेगा। एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। और आज आप इतनी बड़ी तादाद में वीडियो कांफ्रेंस वाले कार्यक्रम में आए, आपने नया इतिहास बना दिया है। मैं आप सब भाई-बहनों का ह्दय से धन्यवाद करता हूं।

धन्यवाद !