Our endeavour is Sabka Saath, Sabka Vikas: PM Modi

Published By : Admin | October 16, 2019 | 14:01 IST
It is the values of Veer Savarkar that we have put nationalism at the core of nation building: PM Modi in Akola
They do not want a United India but they want a divided India, an India fighting against each other: PM Modi on Opposition
Our endeavour is Sabka Saath, Sabka Vikas and in the past five years, we have taken great strides in this: PM Modi in Maharashtra
I urge you all to vote for the BJP and bring us back with an even higher majority, says PM Modi in Maharashtra
Narendra-Devendra formula super hit in Maharashtra, says PM Modi in Panvel

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। मुझे ऐसा लगता है कि आज महाराष्ट्र ने सारे रिकॉर्ड ब्रेक करने का तय कर लिया है। इस तरफ जहां मेरी नजर पहुंचती है लोग खड़े है, रोड के उस पार भी दिखते हैं शायद। अब मुझे बताइए, इधर से उधर तक इतनी बड़ी भीड़ और सामने भी तो फिर एनसीपी-कांग्रेस का क्या होगा। एक से बढ़कर एक रैलियां मैं देख रहा हूं जी, जितना स्नेह और प्रेम आज यहां देखने को मिल रहा है, जो उत्साह आप सभी में नजर आ रहा है उससे स्पष्ट है कि महाजनादेश किस तरफ जा रहा है। इस महाजनसागर को देखने के बाद विरोधियों के लिए संदेश साफ है, ‘फिर एक बार महायुती की सरकार’।

साथियो, ये छत्रपति वीर शिवाजी महाराज, भक्त प्रहलाद, ज्योराओ फुले, बाबा साहेब अंबेडकर ऐसे मनिषियों की धरती है, वीरों की धरती है। महाराष्ट्र ने देश को दिशा देने वाला नेतृत्व दिया है और ये काम अभी से नहीं बल्कि सदियों से ये हमारा महाराष्ट्र निरंतर करता आ रहा है। राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति को लेकर यहां से हर बार आवाज बुलंद हुई है लेकिन दुर्भाग्य की ये बात है कि कांग्रेस और एनसीपी के नेता महाराष्ट्र के इन्हीं संस्कारों को हर मौके पर, हर मंच पर, हर कदम पर ठेस पहुंचाने में लगे रहते हैं। लोकसभा के चुनाव में महाराष्ट्र के मेरे भाइयो-बहनो ने इनको स्पष्ट संदेश दिया है लेकिन ये आपकी भावनाओं को समझने के लिए भी तैयार नहीं हैं, ये समझ ही नहीं रहे हैं कि अब भारत में नामदारों की मनमानी से नहीं कामदारों की इच्छाशक्ति से काम होगा। ये समझ ही नहीं रहे हैं कि अब भारत में लटकाने-भटकाने वाली संस्कृति नहीं, तय समय पर विकास के काम पूरे करने वाली संस्कृति आज लोगों को मंजूर है लोग इसी को मानते हैं।

साथियो, ये देश की भावनाएं नहीं समझ रहे हैं लेकिन इन्हें देख भी रहा है और समझ भी रहा है और मौका आते ही हिसाब भी साफ कर देता है। हम सभी इनसे बार-बार निवेदन कर रहे हैं कि कम से कम राष्ट्रहित और राष्ट्ररक्षा के मुद्दों पर हम सभी देशवासियों का, सभी राजनीतिक दलों का, सभी नेताओं का एक ही सुर होना चाहिए, दुनिया को एक ही आवाज सुनाई देनी चाहिए-एक ही स्वर सुनाई देना चाहिए लेकिन हर बात में राजनीति की रोटियां सेंकने की आदत वाले ये नेता देशहित की, राष्ट्रहित की इतनी सीधी सरल बात को भी मानने को तैयार नहीं है। इसी दौरान मैंने सुना, अखबार में पढ़ने को भी मिला कि कांग्रेस पार्टी में अब नई ट्रेनिंग शुरू हो रही है, कहते हैं कि अब कांग्रेस के संगठन में राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया जाएगा, अब रोना कि हंसना कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि कांग्रेस पार्टी ने स्वीकार कर लिया है कि आज की कांग्रेस आजादी के दीवानों वाली, देशभक्तों वाली कांग्रेस नहीं है। परिवारवाद के बोझ के नीचे कांग्रेस का राष्ट्रवाद दब चुका है, परिवारभक्ति में ही कांग्रेस को राष्ट्रभक्ति नजर आती है और यही वजह है कांग्रेस आज लड़खड़ा रही है, अंतिम सांस ले रही है। इसी तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में सिर्फ दुनिया भर में जितने करप्शन के प्रकार हैं, सारे करप्शन के ही संस्कार आज वहां बचे हैं, राष्ट्रवाद की भावना कम होती जा रही है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण, ये लोगों को याद कीजिए आप, सर्जिकल स्ट्राइक के समय इन लोगों ने क्या बातें कहीं थीं, कौन सी भाषा बोली थी। मैं जरा आप से पूछना चाहता हूं, आप जवाब देंगे सब लोग, जवाब देंगे? क्या कभी कोई देशभक्त सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध करेगा क्या, कर सकता है क्या? वीरों का अपमान कर सकता है क्या, हमारी सेना का अपमान कर सकता है क्या? इन्होंने किया, बेशर्मी के साथ किया। उसके बाद बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, जब बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई फिर इन्होंने वही गीत गाना शुरू किया, वही राग अलापना शुरू किया और इनकी आदत जाती नहीं है और अब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने पर भी इनका रवैया राष्ट्र की भावना के बिल्कुल विपरीत है। मैं ये एनसीपी और कांग्रेस वालों को कहना चाहता हूं कि अगर 370 से इतना प्रेम है अगर आपको तो उसको जहां दफनाया गया है वहां जाकर के चादर उड़ा के आ जाओ। जमीन पर इन दोनों दलों के जो कार्यकर्ता हैं, विशेष तौर पर जो युवा साथी हैं वो भी अपने नेताओं की बात ना मानते हुए कहते हैं कि 370 और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर देश की भावनाओं के साथ खड़ा होना चाहिए, मोदी के साथ खड़ा होना चाहिए तो ऐसे लोगों के मुंह पर ताले लगा दिए जाते हैं। लेकिन भाइयो-बहनो, ये सब इसलिए हो रहा है, कुछ नेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर होने के कारण ना उनको देश दिखता है, ना देश का भला दिखता है, ना जनता दिखती है, ना जनता की भावनाएं दिखती हैं और इसलिए ये उल्टी बातें बोलते रहते हैं, ये उल्टी भाषा बोलते रहते हैं।

भाइयो-बहनो, यही कारण है कि बीते कुछ समय से अनेक जनाधार वाले नेता इन दोनों दलों को छोड़-छोड़ कर वीर शिवाजी के संस्कारों को सम्मान देने वाले महायुती के साथ खड़े हैं, आप देखिएगा जो वहां रह भी गए हैं वो भी 21 अक्टूबर को बूथ पर जाकर महायुती के पक्ष में ही मतदान करने वाले हैं, अब वहां कुछ बचा ही नहीं है। साथियों कांग्रेस और एनसीपी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में लंबे समय तक एक साथ शासन किया है। हर काम में भागीदार हैं, अच्छा हो, बुरा हो, अब मैं गिनाना नहीं चाहता हूं अच्छा नहीं लगेगा लेकिन दोनों ने मिलकर ही किया है। लेकिन इन दोनों दलों की नीति, निष्ठा और नीयत में हमेशा खोट रहा है और इसका एक बहुत बड़ा नुकसान मराठवाड़ा को भी हुआ है। 2014 से पहले स्थिति ये थी कि योजना मराठवाड़ा के लिए बनती थी, नाम मराठवाड़ा के लोगों का लिया जाता था लेकिन विकास मराठवाड़ा का नहीं सिर्फ कुछ नेताओं का, उनके परिवारों का, उनके सिपहसालारों का, उनके रिश्तेदारों का, उनके चेले चपाटों का सिर्फ उन्हीं का भला होता था। मैं सच बता रहा हूं कि नहीं बता रहा हूं, मेरी बात सही है? तो ऐसे लोगों को बचने देना चाहिए क्या, ऐसी राजनीति चलती रहनी चाहिए क्या? साफ कर दोगे ना इस बार, पक्का, पूरी तरह? शाबाश। यही कारण है कि महाराष्ट्र को तीन-तीन मुख्यमंत्री देने के बावजूद मराठवाड़ा की स्थिति में खास अंतर नहीं आया। सड़क हो, पानी हो, अस्पताल हो, बिजली हो, ये बुनियादी चीजें, इन बुनियादी सुविधाओं के लिए भी यहां के लोगों को तरसते रहना पड़ा भाइयो-बहनो। मुख्यमंत्रियों का क्षेत्र होने के बावजूद यहां से विकास गायब रहा।

साथियो, उनके तीन मंत्रियों के कार्यकाल की तुलना और मैं चुनौती देता हूं, उनके तीन मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की चर्चा भाजपा के एक मुख्यमंत्री के कार्यकाल से कर लीजिए हम उनसे आगे निकल जाएंगे भाइयो। और मैं तो देख रहा हूं इस चुनाव में क्या होने वाला है, आपको मालूम है क्या होने वाला है, क्या लगता है आपको? मैं बताता हूं, वो एनसीपी की घड़ी है ना घड़ी उसमें दस पर एक बड़ा भाई खड़ा है और छोटा भाई दूसरे दस पर खड़ा है, मतलब कि बड़ा भाई भी दस सीट लेकर के आएगा और छोटा भाई भी दस सीट लेकर के आएगा, उनकी घड़ी में दिखा दिया है कि दस सीट बड़े भाई की, दस सीट छोटे भाई की, इससे आगे बढ़ने की संभावना नजर नहीं आई है। भाइयो-बहनो, आज मराठवाड़ा में क्या हो रहा है, आज यहां ग्रामीण सड़कों, स्टेट और नेशनल हाईवे से जुड़े करीब 50 हजार करोड़ रुपए के काम हो रहे हैं। संत गजानन महाराज के गांव से पंढरपुर को कनेक्ट करने के लिए परतूर से नेशनल हाईवे बन रहा है भाइयो-बहनो। मराठवाड़ा में लोड शेडिंग की परेशानी से राहत मिली है, यहां किसान हो या उद्योग, बिजली के कनेक्शन से लेकर बिजली की कीमत तक में राहत मिली है। जालना में ही ड्राई पोर्ट बन रहा है, टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, ये सारी सौगात यहां आपके घर में आ रही है भाइयो-बहनो। इसके साथ ही ऑरिक सिटी के माध्यम से इंडस्ट्रियल टाउनशिप बन रही है, जिसका लाभ जालना को भी होने वाला है। एक प्रकार से सुविधा से लेकर के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए यहां अनेक अवसर तैयार हो रहे हैं।

भाइयो-बहनो, सार्थक और सही विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार में तालमेल बहुत जरूरी है, नीयत साफ होना जरूरी है। महाराष्ट्र के सामान्यजन का विकास तब और तेज हो जाता है जब केंद्र के प्रयासों को यहां की सरकार आगे बढ़ाए, उनको विस्तार दे और ऐसा तभी होता है जब केंद्र और राज्य दोनों जगह ही राष्ट्रहित और जनहित को सर्वोपरि रखने वाली सरकारें हों। बीते पांच साल में केंद्र सरकार ने जो भी योजनाएं और कार्यक्रम बनाए, उनमें महाराष्ट्र में महायुती की सरकार ने मूल्यवृद्धि की वैल्यू एडिशन किया, उनका विस्तार किया। मैं आपको आज जो बातें जो याद करने जैसी हैं, उनको याद कराना चाहता हूं। प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना केंद्र ने शुरू की, इसके तहत महाराष्ट्र में माइक्रोइरिगेशन के लिए हजारों करोड़ रुपए दिए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने तेजी के साथ इन योजनाओं पर तो काम किया ही, साथ ही जल संवर्धन के लिए जलयुक्त शिवार जैसे अभियान भी चलाए। इससे मराठवाड़ा सहित पूरे महाराष्ट्र में एक जल क्रांति शुरू हो गई, मराठवाड़ा में बन रहा वॉटर ग्रिड इसी जल क्रांति का हिस्सा है। गोदावरी को फिर से जलयुक्त करने का प्रयास भी इसी जल क्रांति का हिस्सा है। इस जल क्रांति से जालना को, पूरे मराठवाड़ा को बहुत लाभ होने वाला है और लंबे समय तक लाभ होने वाला है। आने वाले समय में यहां के सैंकड़ों गांवों को पर्याप्त पानी उपलब्ध होने वाला है। साथियो, सूखे की समस्या को मैंने बहुत नजदीक से देखा है, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भी और भारतीय जनता पार्टी का संगठन का जब काम करता था तब भी उस समय भी जो महाराष्ट्र में जो जल संकट था, उसको भी मैंने निकट से देखा है। हम सभी ने पानी के अभाव के कारण शेतकरी समाज को अपने पशुओं सहित पलायन के लिए मजबूर होते हुए भी देखा है। हम उन बहनों की पीड़ा के साक्षी भी रहे हैं जिनका पूरा दिन पानी के इंतजाम में ही बीत जाता है। यही कारण है कि अब भारत को सूखे के संकट से मुक्त और जलयुक्त बनाने का सपना हमने देखा है।

जल जीवन मिशन के तहत इस सपने को साकार करने के लिए देश अब जुट चुका है। आने वाले पांच वर्षों में इस मिशन पर साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है। पानी के लिए साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए मेरे भाइयो-बहनो। इसके तहत पानी की बचत से लेकर घर-घर पानी पहुंचाने का संकल्प हमने लिया है। गांव-गांव में पानी के जो स्रोत हैं उनको जीवित करने का प्रण लिया है। ये काम आप सभी मेरे भाइयो-बहनो आपके सक्रिय सहयोग से पूरा होगा और मुझे पूरा विश्वास है आप वो लोग हैं, जिन्होंने पानी के अभाव का संकट झेला है और इसलिए मेरे पानी के अभियान में आप लोग जी-जान से जुड़ोगे ये मेरा विश्वास है, मेरा आप पर भरोसा है। भाइयो-बहनो, गरीबों की, शोषितों, पीड़ितों, वंचितों की आवश्यकताओं को समझ के उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए हम निरंतर काम कर रहे हैं। इसी सोच के साथ देश के इतिहास में पहली बार हर वर्ग, हर समुदाय को व्यापक सुरक्षा दे का काम हुआ है। देश के हर किसान परिवार के बैंक खाते में बिना बिचौलिए सीधी मदद किसान के खाते में पहली बार मिल रही है। छोटे किसानों, खेत मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, इन सभी साथियों को तीन हजार तक की पेंशन की सुविधा पहली बार मिल रही है।

 

देश के करीब 50 करोड़ गरीब परिवारों को आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा पहली बार मिल रही है और जब दुनिया के लोग सुनते हैं ना कि आयुष्मान भारत कोई उसको मोदी केयर कहता है, इतना बड़ा आंकड़ा सुनते हैं तो दुनिया के लोग चकित हो जाते हैं। अभी मैं जब अमेरिका में युनाइटेड नेशन्स में जब बोल रहा था, वहां के मीटिंग के अंदर और जब मैंने बताया कि अमेरिका की कुल जनसंख्या, कनाडा की कुल जनसंख्या, मैकिस्को की कुल जनसंख्या, इन तीनों देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा भारत में उन लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिल रहा है। कल ही इस योजना के लाभार्थियों की संख्या 50 लाख पार कर गई है। एक रुपए महीना और 90 पैसे प्रतिदिन के मामूली प्रीमियम पर गरीब से गरीब को बीमा सुरक्षा कवर मिलना संभव हो पाया है। इतना ही नहीं, घुमंतू जनजातियों को, इन घुमंतू जनजातियों को पहचान मिले, उनको अपना पता मिले अड्रेस मिले इसके लिए पहली बार प्रयास किए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि हमारे बंजारा समाज के को आसान बनाने वाली तमाम सुविधाएं मिल पाएं, इसके लिए विकास कल्याण बोर्ड बनाने का फैसला सरकार ने लिया है। मैं बंजारा समाज को आश्वस्त करता हूं कि उनकी हर मुश्किल, हर तकलीफ का अहसास सरकार को है और इनके समाधान के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

साथियो, यही नहीं भाजपा और महायुती की सरकार ने जो भी योजनाएं बनाई हैं वो सर्वव्यापी हैं, सर्वसमावेशी हैं, सबका भला करने वाली है। गरीबों को आवास मिला तो वो हर पंथ, हर समाज के गरीबों को मिला, गैस का कनेक्शन मिला तो वो हर पंथ, हर मत, हर समाज की बहनों को मिला, मुफ्त बिजली का कनेक्शन मिला तो वो हर पंथ, हर संप्रदाय के गरीबों को मिला, शौचालय की सुविधा मिली तो हर गरीब परिवार को मिली। आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा भी हर गरीब को बिना किसी भेदभाव के मिल रही है। इतना ही नहीं मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के दंश से मुक्ति दिलाने का काम भी भाजपा और महायुती की सरकार ने पूरा किया। कांग्रेस और एनसीपी ने मुस्लिम बहनों के न्याय के इस प्रयास को रोकने का हर संभव प्रयास किया लेकिन आज एक सख्त कानून बन चुका है और इस वजह से आज मुस्लिम बेटी खुश है, उस मुस्लिम बेटी की मां भी खुश है, उस मुस्लिम बेटी के पिता भी खुश है और उसका भाई भी खुश है। लेकिन अगर इससे वोट बैंक का सपना संजोने वालों को समस्या हुई है, वो दुखी हैं तो इसे भी देश देख रहा है, देश के लोग देख रहे हैं।

भाइयो-बहनो, सबका साथ-सबका विकास के इसी संकल्प को हमें मिलकर के मजबूत भी करना है और हर इंसान को न्याय भी देना है, संतोष भी देना है। भाइयो-बहनो, 21 अक्टूबर को क्या है? मतदान है, याद है लेकिन 20 अक्टूबर को रविवार है 21 अक्टूबर को सोमवार है, दो छुट्टी साथ में आ जाएगी तो आपका मन करेगा कि चलो दो छुट्टी साथ में आई है कहीं चले जाएं। ऐसा तो नहीं करोगे ना? देखिए 21 अक्टूबर को अपने गांव में, अपने घर में रहना है और ज्यादा से ज्यादा मतदान हो ये सुनिश्चित करना है क्योंकि लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है चुनाव और चुनाव में मतदान करना अपने देश के गरीबों का भला करने के लिए उसको ताकत देना इससे बड़ा कोई सौभाग्य नहीं होता है। और इसलिए 21 अक्टूबर को आप सभी को सुनिशचित करना है कि हर बूथ पर भारी मतदान हो और हर बूथ में महायुती के उम्मीदवारों की प्रचंड विजय हो। करोगे ना, घर-घर जाओगे, एक-एक मतदाता को मिलोगे, वोट पक्का करोगे, ज्यादा से ज्यादा मतदान कराओगे, अगर पहले पोलिंग बूथ पर 700 वोट पड़ा था तो इस बार ज्यादा करोगे, लोगों को घर से ले जाओगे? देखिए ये करने वाला काम है। भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
77 व्या स्वातंत्र्य दिनानिमित्त लाल किल्ल्याच्या तटबंदीवरून पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी केलेले भाषण

लोकप्रिय भाषण

77 व्या स्वातंत्र्य दिनानिमित्त लाल किल्ल्याच्या तटबंदीवरून पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी केलेले भाषण
India a 'green shoot' for the world, any mandate other than Modi will lead to 'surprise and bewilderment': Ian Bremmer

Media Coverage

India a 'green shoot' for the world, any mandate other than Modi will lead to 'surprise and bewilderment': Ian Bremmer
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
PM Modi's Interview to Navbharat Times
May 23, 2024

प्रश्न: वोटिंग में मत प्रतिशत उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। क्या, कम वोट पड़ने पर भी बीजेपी 400 पार सीटें जीत सकती है? ये कौन से वोटर हैं, जो घर से नहीं निकल रहे?

उत्तर: किसी भी लोकतंत्र के लिए ये बहुत आवश्यक है कि लोग मतदान में बढ़चढ कर हिस्सा लें। ये पार्टियों की जीत-हार से बड़ा विषय है। मैं तो देशभर में जहां भी रैली कर रहा हूं, वहां लोगों से मतदान करने की अपील कर रहा हूं। इस समय उत्तर भारत में बहुत कड़ी धूप है, गर्मी है। मैं आपके माध्यम से भी लोगों से आग्रह करूंगा कि लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भूमिका जरूर निभाएं। तपती धूप में लोग ऑफिस तो जा ही रहे हैं, हर व्यक्ति अपने काम के लिए घर से बाहर निकल रहा है, ऐसे में वोटिंग को भी दायित्व समझकर जरूर पूरा करें। चार चरणों के चुनाव के बाद बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पा लिया है, आगे की लड़ाई 400 पार के लिए ही हो रही है। चुनाव विशेषज्ञ विश्लेषण करने में जुटे हैं, ये उनका काम है, लेकिन अगर वो मतदाताओं और बीजेपी की केमिस्ट्री देख पाएं तो समझ जाएंगे कि 400 पार का नारा हकीकत बनने जा रहा है। मैं जहां भी जा रहा हूं, बीजेपी के प्रति लोगों के अटूट विश्वास को महसूस रहा हूं। एनडीए को 400 सीटों पर जीत दिलाने के लिए लोग उत्साहित हैं।

प्रश्न: लेकिन कश्मीर में वोट प्रतिशत बढ़े। कश्मीर में बढ़ी वोटिंग का संदेश क्या है?

उत्तर: : मेरे लिए इस चुनाव में सबसे सुकून देने वाली घटना यही है कि कश्मीर में वोटिंग प्रतिशत बढ़ी है। वहां मतदान केंद्रों के बाहर कतार में लगे लोगों की तस्वीरें ऊर्जा से भर देने वाली हैं। मुझे इस बात का संतोष है कि जम्मू-कश्मीर के बेहतर भविष्य के लिए हमने जो कदम उठाए हैं, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। श्रीनगर के बाद बारामूला में भी बंपर वोटिंग हुई है। आर्टिकल 370 हटने के बाद आए परिवर्तन में हर कश्मीरी राहत महसूस कर रहा है। वहां के लोग समझ गए हैं कि 370 की आड़ में इतने वर्षों तक उनके साथ धोखा हो रहा था। दशकों तक जम्मू-कश्मीर के लोगों को विकास से दूर रखा गया। सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार से वहां के लोग त्रस्त थे, लेकिन उन्हें कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा था। परिवारवादी पार्टियों ने वहां की राजनीति को जकड़ कर रखा था। आज वहां के लोग बिना डरे, बिना दबाव में आए विकास के लिए वोट कर रहे हैं।

प्रश्न: 2014 और 2019 के मुकाबले 2024 के चुनाव और प्रचार में आप क्या फर्क महसूस कर रहे हैं?

उत्तर: 2014 में जब मैं लोगों के बीच गया तो मुझे देशभर के लोगों की उम्मीदों को जानने का अवसर मिला। जनता बदलाव चाहती थी। जनता विकास चाहती थी। 2019 में मैंने लोगों की आंखों में विश्वास की चमक देखी। ये विश्वास हमारी सरकार के 5 साल के काम से आया था। मैंने महसूस किया कि उन 5 वर्षों में लोगों की आकांक्षाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने और बड़े सपने देखे हैं। वो सपने उनके परिवार से भी जुड़े थे, और देश से भी जुड़े थे। पिछले 5 साल तेज विकास और बड़े फैसलों के रहे हैं। इसका प्रभाव हर व्यक्ति के जीवन पर पड़ा है। अब 2024 के चुनाव में मैं जब प्रचार कर रहा हूं तो मुझे लोगों की आंखों में एक संकल्प दिख रहा है। ये संकल्प है विकसित भारत का। ये संकल्प है भ्रष्टाचार मुक्त भारत का। ये संकल्प है मजबूत भारत का। 140 करोड़ भारतीयों को भरोसा है कि उनका सपना बीजेपी सरकार में ही पूरा हो सकता है, इसलिए हमारी सरकार की तीसरी पारी को लेकर जनता में अभूतपूर्व उत्साह है।

प्रश्न: 10 साल की सबसे बड़ी उपलब्धि आप किसे मानते हैं और तीसरे कार्यकाल के लिए आप किस तरह खुद को तैयार कर रहे हैं?

उत्तर: पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार ने अर्थव्यवस्था, सामाजिक न्याय, गरीब कल्याण और राष्ट्रहित से जुड़े कई बड़े फैसले लिए हैं। हमारे कार्यों का प्रभाव हर वर्ग, हर समुदाय के लोगों पर पड़ा है। आप अलग-अलग क्षेत्रों का विश्लेषण करेंगे तो हमारी उपलब्धियां और उनसे प्रभावित होने वाले लोगों के बारे में पता चलेगा। मुझे इस बात का बहुत संतोष है कि हम देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर ला पाए। करोड़ों लोगों को घर, शौचालय, बिजली-पानी, गैस कनेक्शन, मुफ्त इलाज की सुविधा दे पाए। इससे उनके जीवन में जो बदलाव आया है, उसकी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी। आप सोचिए, कि अगर करोड़ों लोगों को ये सुविधाएं नहीं मिली होतीं तो वो आज भी गरीबी का जीवन जी रहे होते। इतना ही नहीं, उनकी अगली पीढ़ी भी गरीबी के इस कुचक्र में पिसने के लिए तैयार हो रही होती।

हमने गरीब को सिर्फ घर और सुविधाएं नहीं दी हैं, हमने उसे सम्मान से जीने का अधिकार दिया है। हमने उसे हौसला दिया है कि वो खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सके। हमने उसे एक विश्वास दिया कि जो जीवन उसे देखना पड़ा, वो उसके बच्चों को नहीं देखना पड़ेगा। ऐसे परिवार फिर से गरीबी में न चले जाएं, इसके लिए हम हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं। इसीलिए, आज देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है, ताकि वो अपनी आय अपनी दूसरी जरूरतों पर खर्च कर सकें। हम कौशल विकास, पीएम विश्वकर्मा और स्वनिधि जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं। हमने घर की महिला सदस्य को सशक्त बनाने के भी प्रयास किए। लखपति दीदी, ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। मेरी सरकार के तीसरे कार्यकाल में इन योजनाओं को और विस्तार मिलेगा, जिससे ज्यादा महिलाओं तक इनका लाभ पहुंचेगा।

प्रश्न: हमारे रिपोर्टर्स देशभर में घूमे, एक बात उभर कर आई कि रोजगार और महंगाई पर लोगों ने हर जगह बात की है। जीतने के बाद पहले 100 दिनों में युवाओं के लिए क्या करेंगे? रोजगार के मोर्चे पर युवाओं को कोई भरोसा देना चाहेंगे?

उत्तर: पिछले 10 वर्षों में हम महंगाई दर को काबू रख पाने में सफल रहे हैं। यूपीए के समय महंगाई दर डबल डिजिट में हुआ करती थी। आज दुनिया के अलग-अलग कोनों में युद्ध की स्थिति है। इन परिस्थितियों का असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ा है। हमने दुनिया के ताकतवर देशों के सामने अपने देश के लोगों के हित को प्राथमिकता दी, और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने नहीं दीं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़तीं तो हर चीज महंगी हो जाती। हमने महंगाई का बोझ कम करने के लिए हर छोटी से छोटी चीज पर फोकस किया। आज गरीब परिवारों को अच्छे से अच्छे अस्पताल में 5 लाख रुपये तक इलाज मुफ्त मिलता है। जन औषधि केंद्रों की वजह से दवाओं के खर्च में 70 से 80 प्रतिशत तक राहत मिली है। घुटनों की सर्जरी हो या हार्ट ऑपरेशन, सबका खर्च आधे से ज्यादा कम हो गया है। आज देश में लोन की दरें सबसे कम हैं। कार लेनी हो, घर लेना हो तो आसानी से और सस्ता लोन उपलब्ध है। पर्सनल लोन इतना आसान देश में कभी नहीं था। किसान को यूरिया और खाद की बोरी दुनिया के मुकाबले दस गुना कम कीमत पर मिल रही है। पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के नए मौके बने हैं। EPFO के मुताबिक पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं।

PLFS का डेटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वो अब 3% रह गई है। हमारी माइक्रो फाइनैंस की नीतियां कितनी प्रभावी हैं, इस पर SKOCH ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए हैं। युवाओं के पास अब स्पेस सेक्टर, ड्रोन सेक्टर, गेमिंग सेक्टर में भी आगे बढ़ने के अवसर हैं। देश में डिजिटल क्रांति से भी युवाओं के लिए अवसर बने हैं। आज भारत में डेटा इतना सस्ता है तभी देश की क्रिएटर इकनॉमी बड़ी हो रही है। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं, इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। हमने अपनी सरकार के पहले 100 दिनों का एक्शन प्लान तैयार किया है, उसमें हमने अलग से युवाओं के लिए 25 दिन और जोड़े हैं। हम देशभर से आ रहे युवाओं के सुझाव पर गौर कर रहे हैं, और नतीजों के बाद उस पर तेजी से काम शुरू होगा।

प्रश्न: सोशल मीडिया में एआई और डीपफेक जैसे मसलों पर आपने चिंता जताई है। इस चुनाव में भी इसके दुरुपयोग की मिसाल दिखी हैं। मिसइनफरमेशन का ये टूल न बने, इसके लिए क्या किया जा सकता है? कई एक्टिविस्ट और विपक्ष का कहना रहा है कि इन चीजों पर सख्ती की आड़ में कहीं फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पर पाबंदी तो नहीं लगेगी? इन सवालों पर कैसे आश्वस्त करेंगे?

उत्तर: तकनीक का इस्तेमाल जीवन में सुगमता लाने के लिए किया जाना चाहिए। आज एआई ने भारत के युवाओँ के लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं। एआई, मशीन लर्निगं और इंटरनेट ऑफ थिंग्स अब हमारे रोज के जीवन की सच्चाई बनती जा रही है। लोगों को सहूलियत देने के लिए कंपनियां अब इन तकनीकों का उपयोग बढ़ा रही हैं। दूसरी तरफ इनके माध्यम से गलत सूचनाएं देने, अफवाह फैलाने और लोगों को भ्रमित करने की घटनाएं भी हो रही हैं। चुनाव में विपक्ष ने अपने झूठे नरैटिव को फैलाने के लिए यही करना शुरू किया था। हमने सख्ती करके इस तरह की कोशिश पर रोक लगाने का प्रयास किया। इस तरह की प्रैक्टिस किसी को भी फायदा नहीं पहुंचाएगी, उल्टे तकनीक का गलत इस्तेमाल उन्हें नुकसान ही पहुंचाएगा। अभिव्यक्ति की आजादी का फेक न्यूज और फेक नरैटिव से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने एआई के एक्सपर्ट्स के सामने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर डीप फेक के गलत इस्तेमाल से जुड़े विषयों को गंभीरता से रखा है। डीप फेक को लेकर वर्ल्ड लेवल पर क्या हो सकता है, इस पर मंथन चल रहा है। भारत इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए ही मैंने खुद सोशल मीडिया पर अपना एक डीफ फेक वीडियो शेयर किया था। लोगों के लिए ये जानना आवश्यक है कि ये तकनीक क्या कर सकती है।

प्रश्न:देश के लोगों की सेहत को लेकर आपकी चिंता हम सब जानते हैं। आपने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस शुरू किया, योगा प्रोटोकॉल बनवाया, आपने आयुष्मान योजना शुरू की है। तीसरे कार्यकाल में क्या इन चीज़ों पर भी काम करेंगे, जो हमारी सेहत खराब होने के मूल कारक हैं। जैसे लोगों को साफ हवा, पानी, मिट्टी मिले।

उत्तर: देश 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस सपने को शक्ति तभी मिलेगी, जब देश का हर नागरिक स्वस्थ हो। शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हो। यही वजह है कि हम सेहत को लेकर एक होलिस्टिक अप्रोच अपना रहे हैं। एलोपैथ के साथ ही योग, आयुर्वेद, भारतीय परंपरागत पद्धतियां, होम्योपैथ के जरिए हम लोगों को स्वस्थ रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। राजनीति में आने से पहले मैंने लंबा समय देश का भ्रमण करने में बिताया है। उस समय मैंने एक बात अनुभव की थी कि घर की महिला सदस्य अपने खराब स्वास्थ्य के बारे छिपाती है। वो खुद तकलीफ झेलती है, लेकिन नहीं चाहती कि परिवार के लोगों को परेशानी हो। उसे इस बात की भी फिक्र रहती है कि डॉक्टर, दवा में पैसे खर्च हो जाएंगे। जब 2014 में मुझे देश की सेवा करने का अवसर मिला तो सबसे पहले मैंने घर की महिला सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता की। मैंने माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया और 10 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए। मैंने बुजुर्गों की सेहत पर भी ध्यान दिया है। हमारी सरकार की तीसरी पारी में 70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलने लगेगा। यानी उनके इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। साफ हवा, पानी, मिट्टी के लिए हम काम शुरू कर चुके हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक पर हमारा अभियान चल रहा है। जल जीवन मिशन के तहत हम देश के लाखों गांवों तक साफ पानी पहुंचा रहे हैं। सॉयल हेल्थ कार्ड, आर्गेनिक खेती की दिशा में काम हो रहा है। हम मिशन लाइफ को प्राथमिकता दे रहे हैं और इस विचार को आगे बढ़ा रहे हैं कि हर व्यक्ति पर्यावरण के अनुकूल जीवन पद्धति को अपनाए।

प्रश्न: विदेश नीति आपके दोनों कार्यकाल में काफी अहम रही है। इस वक्त दुनिया काफी उतार चढ़ाव से गुजर रही है, चुनाव नतीजों के तुरंत बाद जी7 समिट है। आप नए हालात में भारत के रोल को किस तरह देखते हैं?

उत्तर: शायद ये पहला चुनाव है, जिसमें भारत की विदेश नीति की इतनी चर्चा हो रही है। वो इसलिए कि पिछले 10 साल में दुनियाभर में भारत की साख मजबूत हुई है। जब देश की साख बढ़ती है तो हर भारतीय को गर्व होता है। जी20 समिट में भारत ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बना, अब जी7 में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। आज दुनिया का हर देश जानता है कि भारत में एक मजबूत सरकार है और सरकार के पीछे 140 करोड़ देशवासियों का समर्थन है। हमने अपनी विदेश नीति में भारत और भारत के लोगों के हित को सर्वोपरि रखा है। आज जब हम व्यापार समझौते की टेबल पर होते हैं, तो सामने वाले को ये महसूस होता है कि ये पहले वाला भारत नहीं है। आज हर डील में भारतीय लोगों के हित को प्राथमिकता दी जाती है। हमारे इस बदले रूप को देखकर दूसरे देशों को हैरानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। ये नया भारत है, आत्मविश्वास से भरा भारत है। आज भारत संकट में फंसे हर भारतीय की मदद के लिए तत्पर रहता है। पिछले 10 वर्षों में अनेक भारतीयों को संकट से बाहर निकालकर देश में ले आए। हम अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को भी देश में वापस ला रहे हैं। युद्ध में आमने-सामने खड़े दोनों देशों को भारत ने बड़ी मजबूती से ये कहा है कि ये युद्ध का समय नहीं है, ये बातचीत से समाधान का समय है। आज दुनिया मानती है कि भारत का आगे बढ़ना पूरी दुनिया और मानवता के लिए अच्छा है।

प्रश्न: अमेरिका भी चुनाव से गुजर रहा है। आपके रिश्ते ट्रम्प और बाइडन दोनों के साथ बहुत अच्छे रहे हैं। आप कैसे देखते हैं अमेरिका के साथ भारतीय रिश्तों को इन संदर्भ में?

उत्तर: हमारी विदेश नीति का मूल मंत्र है इंडिया फर्स्ट। पिछले 10 वर्षों में हमने इसी को ध्यान में रखकर विभिन्न देशों और प्रभावशाली नेताओं से संबंध बनाए हैं। भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती का आधार 140 करोड़ भारतीय हैं। हमारे लोग हमारी ताकत हैं, और दुनिया हमारी इस शक्ति को बहुत महत्वपूर्ण मानती है। अमेरिका में राष्ट्रपति चाहे ट्रंप रहे हों या बाइडन, हमने उनके साथ मिलकर दोनों देशों के संबंध को और मजबूत बनाने का प्रयास किया है। भारत-अमेरिका के संबंधों पर चुनाव से कोई अंतर नहीं आएगा। वहां जो भी राष्ट्रपति बनेगा, उसके साथ मिलकर नई ऊर्जा के साथ काम करेंगे।

प्रश्न: BJP का पूरा प्रचार आप पर ही केंद्रित है, क्या इससे सांसदों के खुद के काम करने और लोगों के संपर्क में रहने जैसे कामों को तवज्जो कम हो गई है और नेता सिर्फ मोदी मैजिक से ही चुनाव जीतने के भरोसे हैं। आप इसे किस तरह काउंटर करते हैं?

उत्तर: बीजेपी एक टीम की तरह काम करती है। इस टीम का हर सदस्य चुनाव जीतने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। चुनावी अभियान में जितना महत्वपूर्ण पीएम है, उतना ही महत्वपूर्ण कार्यकर्ता है। ये परिवारवादी पार्टियों का फैलाया गया प्रपंच है। उनकी पार्टी में एक परिवार या कोई एक व्यक्ति बहुत अहम होता है। हमारी पार्टी में हर नेता और कार्यकर्ता को एक दायित्व दिया जाता है।

मैं पूछता हूं, क्या हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोज रैली नहीं कर रहे हैं। क्या हमारे मंत्री, मुख्यमंत्री, पार्टी पदाधिकारी रोड शो और रैलियां नहीं कर रहे। मैं पीएम के तौर पर जनता से कनेक्ट करने जरूर जाता हूं, लेकिन लोग एमपी उम्मीदवार के माध्यम से ही हमसे जुड़ते हैं। मैं लोगों के पास नैशनल विजन लेकर जा रहा हूं, उसे पूरा करने की गारंटी दे रहा हूं, तो हमारा एमपी उम्मीदवार स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने का भरोसा दे रहा है। हमने उन्हीं उम्मीदवारों का चयन किया है, जो हमारे विजन को जनता के बीच पहुंचा सकें। विकसित भारत की सोच से लोगों को जोड़ने के लिए जितनी अहमियत मेरी है, उतनी ही जरूरत हमारे उम्मीदवारों की भी है। हमारी पूरी टीम मिलकर हर सीट पर कमल खिलाने में जुटी है।

प्रश्न: महिला आरक्षण पर आप ने विधेयक पास कराए। क्या नई सरकार में हम इन पर अमल होते हुए देखेंगे?

उत्तर: ये प्रश्न कांग्रेस के शासनकाल के अनुभव से निकला है, तब कानून बना दिए जाते थे लेकिन उसे नोटिफाई करने में वर्षों लग जाते थे। हमने अगले 5 वर्षों का जो रोडमैप तैयार किया है, उसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम देश की आधी आबादी को उसका अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इंडी गठबंधन की पार्टियों ने दशकों तक महिलाओं को इस अधिकार से वंचित रखा। सामाजिक न्याय की बात करने वालों ने इसे रोककर रखा था। देश की संसद और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से महिला सशक्तिकरण का एक नया दौर शुरू होगा। इस परिवर्तन का असर बहुत प्रभावशाली होगा।

प्रश्न: महाराष्ट्र की सियासी हालत इस बार बहुत पेचीदा हो गई है। एनडीए क्या पिछली दो बार का रिकॉर्ड दोहरा पाएगा?

उत्तर: महाराष्ट्र समेत पूरे देश में इस बार बीजेपी और एनडीए को लेकर जबरदस्त उत्साह है। महाराष्ट्र में स्थिति पेचीदा नहीं, बल्कि बहुत सरल हो गई है। लोगों को परिवारवादी पार्टियों और देश के विकास के लिए समर्पित महायुति में से चुनाव करना है। बाला साहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाने वाली शिवसेना हमारे साथ है। लोग देख रहे हैं कि नकली शिवसेना अपने मूल विचारों का त्याग करके कांग्रेस से हाथ मिला चुकी है। इसी तरह एनसीपी महाराष्ट्र और देश के विकास के लिए हमारे साथ जुड़ी है। अब जो महा ‘विनाश’ अघाड़ी की एनसीपी है, वो सिर्फ अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए वोट मांग रही है। लोग ये भी देख रहे हैं कि इंडी गठबंधन अभी से अपनी हार मान चुका है। अब वो चुनाव के बाद अपना अस्तित्व बचाने के लिए कांग्रेस में विलय की बात कर रहे हैं। ऐसे लोगों को मतदान करना, अपने वोट को बर्बाद करना है। इस बार हम महाराष्ट्र में अपने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने वाले हैं।

प्रश्न: पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी ने बहुत प्रयास किए हैं। पिछली बार बीजेपी 18 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। बाकी राज्यों की तुलना में यह आपके लिए कितना कठिन राज्य है और इस बार आपको क्या उम्मीद है?

उत्तर: TMC हो, कांग्रेस हो, लेफ्ट हो, इन सबने बंगाल में एक जैसे ही पाप किए हैं। बंगाल में लोग समझ चुके हैं कि इन पार्टियों के पास सिर्फ नारे हैं, विकास का विजन नहीं हैं। कभी दूसरे राज्यों से लोग रोजगार के लिए बंगाल आते थे, आज पूरे बंगाल से लोग पलायन करने को मजबूर हैं। जनता ये भी देख रही है कि बंगाल में जो पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं, दिल्ली में वही एक साथ नजर आ रही हैं। मतदाताओं के साथ इससे बड़ा छल कुछ और नहीं हो सकता। यही वजह है कि इंडी गठबंधन लोगों का भरोसा नहीं जीत पा रहा। बंगाल के लोग लंबे समय से भ्रष्टाचार, हिंसा, अराजकता, माफिया और तुष्टिकरण को बर्दाश्त कर रहे हैं। टीएमसी की पहचान घोटाले वाली सरकार की बन गई है। टीएमसी के नेताओं ने अपनी तिजोरी भरने के लिए युवाओं के सपनों को कुचला है। यहां स्थिति ये है कि सरकारी नौकरी पाने के बाद भी युवाओं को भरोसा नहीं है कि उनकी नौकरी रहेगी या जाएगी। लोग बंगाल की मौजूदा सरकार से पूरी तरह हताश हैं।अब उनके सामने बीजेपी का विकास मॉडल है। मैं बंगाल में जहां भी गया, वहां लोगों में बीजेपी के प्रति अभूतपूर्व विश्वास नजर आया। विशेष रुप से बंगाल में मैंने देखा कि माताओं-बहनों का बहुत स्नेह मुझे मिल रहा है। मैं उनसे जब भी मिलता हूं, वो खुद तो इमोशनल हो ही जाती हैं, मैं भी अपने भावनाओं को रोक नहीं पाता हूं। इस बार बंगाल में हम पहले से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेंगे।

प्रश्न: शराब मामले को लेकर अरविंद केजरीवाल को जेल जाना पड़ा है। उनका कहना है कि ईडी ने जबरदस्ती उन्हें इस मामले में घसीटा है जबकि अब तक उनके पास से कोई पैसा बरामद नहीं हुआ?

उत्तर: आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को सुना है जो आरोपी हो और ये कह रहा हो कि उसने घोटाला किया था। या कह रहा हो कि पुलिस ने उसे सही गिरफ्तार किया है। अगर एजेंसियों ने उन्हें गलत पकड़ा था, तो कोर्ट से उन्हें राहत क्यों नहीं मिली। ईडी और एजेसिंयो पर आरोप लगाने वाला विपक्ष आज तक एक मामले में ये साबित नहीं कर पाया है कि उनके खिलाफ गलत आरोप लगा है। वो कुछ दिन के लिए जमानत पर बाहर आए हैं, लेकिन बाहर आकर वो और एक्सपोज हो गए। वो और उनके लोग गलतियां कर रहे हैं और आरोप बीजेपी पर लगा रहे हैं। लेकिन जनता उनका सच जानती है। उनकी बातों की अब कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई है।

प्रश्न: इस बार दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इससे क्या लगातार दो बार से सातों सीटें जीतने के क्रम में बीजेपी को कुछ दिक्कत हो सकती है? इस बार आपने छह उम्मीदवार बदल दिए

उत्तर: इंडी गठबंधन की पार्टियां दिल्ली में हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके सामने अपना अस्तित्व बचाने का संकट है। चुनाव के बाद वैसे भी इंडी गठबंधन नाम की कोई चीज बचेगी नहीं। दिल्ली की जनता ने बहुत पहले कांग्रेस को बाहर कर दिया था, अब दूसरे दलों के साथ मिलकर वो अपनी मौजूदगी दिखाना चाहते हैं। क्या कभी किसी ने सोचा था कि देश पर इतने लंबे समय तक शासन करने वाली कांग्रेस के ये दिन भी आएंगे कि उनके परिवार के नेता अपनी पार्टी के नहीं, बल्कि किसी और उम्मीदवार के लिए वोट डालेंगे।

दिल्ली में इंडी गठबंधन की जो पार्टियां हैं, उनकी पहचान दो चीजों से होती है। एक तो भ्रष्टाचार और दूसरा बेशर्मी के साथ झूठ बोलना। मीडिया के माध्यम से ये जनता की भावनाओं को बरगलाना चाहते हैं। झूठे वादे देकर ये लोगों को गुमराह करना चाहते हैं। ये जनता के नीर-क्षीर विवेक का अपमान है। जनता आज बहुत समझदार है, वो फैसला करेगी। बीजेपी ने लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बीजेपी में कोई लोकसभा सीट नेता की जागीर नहीं समझी जाती। जो जनहित में उचित होता है, पार्टी उसी के अनुरूप फैसला लेती है। हमारे लिए राजनीति सेवा का माध्यम है। यही वजह है कि हमारे कार्यकर्ता इस बात से निराश नहीं होते कि टिकट कट गया, बल्कि वो पूरे मनोयोग से जनता की सेवा में जुट जाते हैं।

प्रश्न: विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र खतरे में है और अगर बीजेपी जीतती है तो लोकतंत्र औपचारिक रह जाएगा। आप उनके इन आरोपों को कैसे देखते हैं?

उत्तर: कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम झूठ और अफवाह के सहारे चुनाव लड़ने निकला है। पुराने दौर में उनका यह पैंतरा कभी-कभी काम कर जाता था, लेकिन आज सोशल मीडिया के जमाने में उनके हर झूठ का मिनटों में पर्दाफाश हो जाता है।

उन्होंने राफेल पर झूठ बोला, पकड़े गए। एचएएल पर झूठ बोला, पकड़े गए। जनता अब इनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेती है। देश जानता है कि कौन संविधान बदलना चाहता है। आपातकाल के जरिए देश के लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश किसने की थी। कांग्रेस के कार्यकाल में सबसे ज्यादा बार संविधान की मूल प्रति को बदल दिया। कांग्रेस पहले संविधान संसोधन का प्रस्ताव अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा लगाने के लिए लाई थी। 60 वर्षों में उन्होंने बार-बार संविधान की मूल भावना पर चोट की और एक के बाद एक कई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया। सबसे ज्यादा बार राष्ट्रपति शासन लगाने का रेकॉर्ड कांग्रेस के नाम है। उनकी जो असल मंशा है, उसके रास्ते में संविधान सबसे बड़ी दीवार है। इसलिए इस दीवार को तोड़ने की कोशिश करते रहते हैं। आप देखिए कि संविधान निर्माताओं ने धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध किया था। लेकिन कांग्रेस अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए बार-बार यही करने की कोशिश करती है। अपनी कोई कोशिशों में नाकाम रहने के बाद आखिरकार उन्होंने कर्नाटक में ओबीसी आरक्षण में सेंध लगा ही दी।

कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेता लोकतंत्र की दुहाई देते हैं, लेकिन वास्तविकता ये है कि लोकतंत्र को कुचलने के लिए, जनता की आवाज दबाने के लिए ये पूरी ताकत लगा देते हैं। ये लोग उनके खिलाफ बोलने वालों के पीछे पूरी मशीनरी झोंक देते हैं। इनके एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर कार्रवाई कर रही है। इस काम में ये लोग खुलकर एक-दूसरे का साथ दे रहे हैं। जनता ये सब देख रही है, और समझ रही है कि अगर इन लोगों के हाथ में ताकत आ गई तो ये देश का, क्या हाल करेंगे।

प्रश्न: आप एकदम चुस्त-दुरुस्त और फिट दिखते हैं, आपकी सेहत का राज, सुबह से रात तक का रूटीन?

उत्तर: मैं यह मानता हूं कि मुझ पर किसी दैवीय शक्ति की बहुत बड़ी कृपा है, जिसने लोक कल्याण के लिए मुझे माध्यम बनाया है। इतने वर्षों में मेरा यह विश्वास प्रबल हुआ है कि ईश्वर ने मुझे विशेष दायित्व पूरा करने के लिए चुना है। उसे पूरा करने के लिए वही मुझे सामर्थ्य भी दे रहा है। लोगों की सेवा करने की भावना से ही मुझे ऊर्जा मिलती है।

प्रश्न: प्रधानमंत्री जी, आप काशी के सांसद हैं। बीते 10 साल में आप ने काशी को खूब प्रमोट किया है। आज काशी देश में सबसे प्रेफर्ड टूरिज्म डेस्टिनेशमन बन रही है। इसके अलावा आप ने जो इंफ्रास्ट्रक्चर के काम किए हैं, उससे भी बनारस में बहुत बदलाव आया है। इससे बनारस और पूर्वांचल की इकोनॉमी और रोजगार पर जो असर हुआ है, उसे आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: काशी एक अद्भूत नगरी है। एक तरफ तो ये दुनिया का सबसे प्राचीन शहर है। इसकी अपनी पौराणिक मान्यता है। दूसरी तरफ ये पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की आर्थिक धुरी भी है। 10 साल में हमने काशी में धार्मिक पर्यटन का खूब विकास किया। शहर की गलियां, साफ-सफाई, बाजारों में सुविधाएं, ट्रेन और बस के इंतजाम पर फोकस किया। गंगा में सीएनजी बोट चली, शहर में ई-बस और ई-रिक्शा चले। यात्रियों के लिए हमने स्टेशन से लेकर शहर के अलग-अलग स्थानों पर तमाम सुविधाएं बढ़ाई।

इन सब के बाद जब हम बनारस को प्रमोट करने उतरे, तो देशभर के श्रद्धालुओं में नई काशी को देखने का भाव उमड़ आया। यह यहां सालभर पहले से कई गुना ज्यादा पर्यटक आते हैं। इससे पूरे शहर में रोजगार के नए अवसर तैयार हुए।

हमने बनारस में इंडस्ट्री लानी शुरू की है। TCS का नया कैंपस बना है, बनास डेयरी बनी है, ट्रेड फैसिलिटी सेंटर बना है, काशी के बुनकरों को नई मशीनें दी जा रही है, युवाओं को मुद्रा लोन मिले हैं। इससे सिर्फ बनारस ही नहीं, आसपास के कई जिलों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली।

प्रश्न: आपने कहा कि वाराणसी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक धुरी जैसा शहर है। बीते 10 वर्षों में पू्र्वांचल में जो विकास हुआ है, उसको कैसे देखते हैं?

उत्तर: देखिए, पूर्वांचल अपार संभावनाओं का क्षेत्र है। पिछले 10 वर्षों में हमने केंद्र की तमाम योजनाओं में इस क्षेत्र को बहुत वरीयता दी है। एक समय था, जब पूर्वांचल विकास में बहुत पिछड़ा था। वाराणसी में ही कई घंटे बिजली कटौती होती थी। पूर्वांचल के गांव-गांव में लालटेन के सहारे लोग गर्मियों के दिन काटते थे। आज बिजली की व्यवस्था में बहुत सुधार हुआ है, और इस भीषण गर्मी में भी कटौती का संकट करीब-करीब खत्म हो चला है। ऐसे ही पूरे पूर्वांचल में सड़कों की हालत बहुत खराब थी। आज यहां के लोगों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की सुविधा मिली है। गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, चंदौली जैसे टियर थ्री कहे जाने वाले शहरों में हजारों की सड़कें बनी हैं।

आजमगढ़ में अभी कुछ दिन पहले मैंने एयरपोर्ट की शुरुआत की है। महाराजा सुहेलदेव के नाम पर यूनिवर्सिटी बनाई गई है। पूरे पूर्वांचल में नए मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। बनारस में इनलैंड वाटर-वे का पोर्ट बना है। काशी से ही देश की पहली वंदे भारत ट्रेन चली थी। देश का पहला रोप-वे ट्रांसपोर्ट सिस्टम बन रहा है।

कांग्रेस की सरकार में पूर्वांचल के लोग ऐसी सुविधाएं मिलने के बारे में सोचते तक नहीं थे। क्योंकि लोगों को बिजली-पानी-सड़क जैसी मूलभूत सुविआधाओं में ही उलझाकर रखा गया था। यह स्थिति तब थी जब इनके सीएम तक पूर्वांचल से चुने जाते थे। तब पूर्वांचल में सिर्फ नेताओं के हेलिकॉप्टर उतरते थे, आज जमीन पर विकास उतर आया है।

प्रश्न: आप कहते हैं कि बनारस ने आपको बनारसी बना दिया है। मां गंगा ने आपको बुलाया था, अब आपको अपना लिया है। आप काशी के सांसद हैं, यहां के लोगों से क्या कहेंगे?

उत्तर: मैं एक बात मानता हूं कि काशी में सबकुछ बाबा की कृपा से होता है। मां गंगा के आशीर्वाद से ही यहां हर काम फलीभूत होते हैं! 10 साल पहले मैंने जब ये कहा था कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है, तो वो बात भी मैंने इसी भावना से कही थी। जिस नगरी में लोग एक बार आने को तरसते हैं, वहां मुझे दो बार सांसद के रूप में सेवा करने का अवसर मिला। जब पार्टी ने तीसरी बार मुझे काशी की उम्मीदवारी करने को कहा, तभी मेरे मन में यह भाव आया कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है। काशी ने मुझे अपार प्रेम दिया है। उनका यह स्नेह और विश्वास मुझ पर एक कर्ज है। मैं जीवनभर काशी की सेवा करके भी इस कर्ज को नहीं उतार पाऊंगा।

Following is the clipping of the interview:

 

 

Source: Navbharat Times