Every person dreams of having his or her own home. It is not merely about a roof & 4 walls, it is beyond that: PM
The decision to make cities smart will be taken not by Governments but by the people of the city, the local administration: PM
This Government is committed to safeguarding the rights of the consumers at all times: PM

आज इस एक छत के नीचे शहरी भारत इकठ्ठा हुआ है। Urban India. एक प्रकार से इस विज्ञान भवन में वे लोग बैठे हैं जिनके जिम्‍मे देश के करीब-करीब 40 प्रतिशत नागरिकों की सुख-सुविधा की जिम्‍मेवारी है। इस देश की 40 प्रतिशत जनसंख्‍या करीब-करीब 40 प्रतिशत जो या तो शहरों में जीवन गुजारा करती है या शहरों पर आधारित अपना जीवन गुजारा करती है। उनको क्‍वालिटी ऑफ लाइफ कैसे मिले, एक सामान्‍य मानव की जो प्राथमिक आवश्‍यकता है उसकी पूर्ति कैसे हो और जब पूरे विश्‍व का ध्‍यान भारत की तरफ है तो हम.. दुनिया जिन ऊंचाइयों पर पहुंची है उसे बराबरी करने की दिशा में और उसे आगे बढ़ने की दिशा में पहल कैसे करें, प्रारम्‍भ कैसे करें और किस दिशा में आगे बढ़ें।

इन दोनों लक्ष्‍यों की पूर्ति को ध्‍यान में रखते हुए एक तरफ झुग्‍गी-झोपड़ी में जिन्‍दगी गुजारा करने वाला वो परिवार, एक तरफ रोजी-रोटी की तलाश में शहर की ओर आया हुआ मजबूर नागरिक और दूसरी तरफ बदलता हुआ वैश्विक परिवेश.. दो छोर की स्थिति में से हमें गुजरना है। हम इसलिए निराश हो करके नहीं बैठ सकते कि दुनिया तो बहुत आगे बढ़ चुकी, पता नहीं हम ये हो सकते हैं कि नहीं हो सकते हैं। हम उदास हो करके नहीं बैठ सकते कि ठीक है भई वो अपनी रोजी-रोटी के लिए आए हैं वो अपना गुजारा कर लेंगे। जी नहीं! हमारे देश के गरीबों को हम उनके नसीब पर नहीं छोड़ सकते। हमारा दायित्‍व होता है, हमारी जिम्‍मेवारी होती है और उन जिम्‍मेवारियों को निभाने के लिए अगर योजनापूर्वक अगर हम आगे बढ़ते है तो परिस्थितियां पलटी जा सकती है, परिस्थितियां सुधारी जा सकती है और लक्ष्‍य को प्राप्‍त किया जा सकता है।

इन बातों को ध्‍यान में रखते हुए इस शहरी जीवन में बदलाव लाने के लिए आप सबके साथ दो दिन विस्‍तार से विचार-विमर्श होने वाला है। यहां पर चुने हुए जन-प्रतिनिधि भी हैं और यहां पर शहरी क्षेत्रों का दायित्‍व संभालने वाले चाहे नगर पालिका हों, या महा-नगर पालिका हों उसके सरकारी अधिकारी भी हैं। हम सब मिल करके आगे बढ़ने का संकल्‍प करने के लिए आज इकट्ट्ठे हुए हैं।

हिन्‍दुस्‍तान के इतिहास में 25-26 जून कोई भूल नहीं सकता है। 40 साल पहले सत्‍ता सुख के खातिर देश को आपातकाल के बंधनों में बाध करके जेलखाना बना दिया गया था। देश में सम्‍पूर्ण क्रांति का सपना ले करके चल रहे जय प्रकाश जी नारायण के नेतृत्‍व में लाखों देशभक्‍तों को लोकतंत्र प्रेमियों को जेलों में बंद कर दिया गया था, अखबार पर ताले लग गए थे रेडियो वही बोलता था जो सरकार बोलती थी। ऐसे दिन थे 40 साल पहले! आज 25 जून को और 26 जून को हम मिल करके उन सपनों को संजोना चाहते हैं कि जहां पर हर नागरिक इस लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था के बीच फूले-फले, प्रगति करे, उसको अवसर मिले, उसको सुविधा मिले। उस दिशा में हम काम करने के लिए संकल्‍पबद्ध हो रहे हैं।

आज मुझे खुशी है कि कल ही हमने कैबिनेट में लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी के स्‍मृति में एक राष्‍ट्रीय स्‍मारक बनाने का निर्णय किया है। जो लोकतंत्र प्रेमी नागरिकों के लिए हमेशा-हमेशा वो दिशा-दर्शक बनता रहेगा और विकास की सारी योजनाएं, यात्राएं जन-सामान्‍य के सहयोग से, जन-सामान्‍य की भागीदारी से कैसे आगे बढ़ें उस दिशा में हम निरंतर प्रयत्‍नरत रहना चाहते हैं। हमारे देश में करीब 500 शहर हैं। ज्‍यादातर गांव से रोजी-रोटी कमाने के लिए लोग आते ही चले जा रहे हैं। बहुत तेजी से हमारा urbanization हो रहा है। अच्‍छा होता आज से 25-30 साल पहले हमने urbanization को एक opportunity समझा होता, urbanization को एक अवसर माना होता। छोटी जगह में thickly populated लोग एक प्रकार से देश की economic के driving source होते है। उस शक्ति को हमने पहचाना होता और हमारे urban growth engine के रूप में हमारी विकास यात्रा में उसकी भूमिका को हमने जाना होता और इस प्रकार से उसको ताकत दी होती तो हम भी आज दुनिया के उन समृद्ध और प्रगतिशील शहरों की बराबरी कर पाए होते। लेकिन.. देर आए दुरुस्‍त आए। पहले क्‍या नहीं हुआ उसका रोना-धोना गाते रहेंगे तो बात बननी नहीं है। पुराने अनुभव बहुत बुरे हैं, मैं जानता हूं और उसी के आधार पर निराश बैठने की भी आवश्‍यकता नहीं है। अगर स्‍पष्‍ट vision के साथ लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के इरादे के साथ और नागरिक को केंद्र में रखते हुए अगर हम योजनाएं करते हैं, तो मैं नहीं मानता हूं कोई रुकावट आ सकती है|

यहां दो दिन में हमारे सामने कई शहरों के best practices के प्रत्‍यक्ष किए हुए कामों को प्रस्‍तुत किया जाएगा। अगर हैदराबाद taxation system में unprecedented growth कर सकता है, किसी भी प्रकार के नए taxes के बजाए भी collection में इतना improvement कर सकता है तो और शहर भी कर सकते हैं। अगर कर्नाटक solid waste management में, उसमें compost की प्रक्रिया के संबंध में अगर आगे बढ़ सकता है तो और शहर भी बढ़ सकते हैं। ऐसा नहीं है कि कोई ऐसी चीजों की यहां चर्चा यहां होने वाली है कि जो हमने कभी सुना भी नहीं सोचा भी नहीं, नहीं! हम उन्‍हीं चीजों को करना चाहते हैं जो ये देश कर सकता है और किसी ने करके दिखाया है। अब उसको हमने सब मिल करके आगे बढ़ाना है, आप देखिए देश का रुतबा बदल सकता है। अब छत्‍तीसगढ़ जैसा प्रदेश, माओवाद के कारण परेशानियों से जूझ रहा प्रदेश, जंगलों की रक्षा करने वाला एक बहुत बड़ा दायित्‍व वाला प्रदेश, उसने open defecation के खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा किया है और उनकी कोशिश है कि हम छत्‍तीसगढ़ को open defecation से मुक्‍त कर देगें। एक लक्ष्‍य ले करके अगर नेतृत्‍व चल पढ़ता है तो स्थितियां बदली जा स‍कती है। बहुत कुछ हो रहा है। इस योजना के तहत उन सारे अनुभवों के आधार पर.. यानी कोई हवाई बातें नहीं हैं, उन अनुभवों के आधार पर एक कदम और कैसे आगे बढ़ाया जाए, पहले से कुछ अच्‍छा कैसे किया जाए, एक जगह पर होता है तो सब जगह पर कैसे हो | कुछ लोग करते हैं हम मिल करके सब लोग क्‍यों न करें उस भाव को पैदा करने का प्रयास। भारत जिस तेजी से urbanize हो रहा है, एक प्रकार से यूरोप का कोई छोटा देश देखें तो हिन्‍दुस्‍तान में हर वर्ष एक नया देश जन्‍म लेता है शहरों में, मतलब हमारे सामने कितनी बड़ी चुनौती है! उस चुनौती को पार करने के लिए हमें निश्चित योजनाओं के साथ आगे बढ़ना पड़ेगा। कुछ कानूनी बाधाएं होगी तो उसके रास्‍ते खोजने पड़ेगें, आर्थिक व्‍यवस्‍थाओं की भी व्‍यवस्‍था होगी उसके संबंध में स्‍थानीय इकाई राज्‍य सरकार, केंद्र सरकार सबने मिल करके एक मॉडल खड़ा करना होगा ताकि हम पैसों के कारण अटके नहीं।

आज पीपीपी मॉडल पब्लिक partnership का मॉडल करीब-करीब स्‍वीकृत हो चुका है उसको कैसे हम बल दें। हम ज्‍यादा से ज्‍यादा urban infrastructure के लिए foreign direct investment को कैसे लाएं। हम आर्थिक संसाधनों को विश्‍व में जहां से भी प्राप्‍त कर सकते हैं, कैसे प्राप्‍त करें, लेकिन निर्धारित समय में हम इन स्थितियों को कैसे बदलें।

किसी भी इंसान, गरीब से गरीब इंसान का एक सपना होता है उसका अपना घर हो और एक बार अगर खुद का घर हो जाता है तो फिर वो सपने संजोने लग जाता है। जब मकान मिलता है तो सिर्फ छत नहीं मिलती चार दीवारें नहीं मिलती है जब गरीब को घर मिलता है तो धीरे-धीरे उसके इरादें भी बदलने लग जाते हैं। घर मिलते ही मन करता है कि यार एक-आध दरी ले आयें तो अच्‍छा होगा। फिर मन करता है कि यार दो कुर्सी लाए तो अच्‍छा होगा। फिर करता है कि यार नहीं-नहीं टीवी मिल जाए तो अच्‍छा होगा, फिर लगता है ये सब करना है तो थोड़ी ज्‍यादा मेहनत करें तो अच्छा होगा फिर लगता है फालतू खर्चा करता था अब उसको थोड़ा पैसा बचाऊंगा, अगले महीने ये लाऊंगा। जीवन में बदलाव शुरू हो जाता है। और वही, self-motivation इन कारणों से आता है। हमारी कोशिश यह है सिर्फ मकान देना, यानी एक परिवार को जो कि बेघर है घर वाला बने इतना नहीं, उसको जीवन जीने की हैसियत देना, उसके मन में जीवन जीने की उमंग भरना, उसके जीवन में जीवन को साकार होने का आनंद देखने को मिले और आने वाले पीढि़यों को देने का सपना पूरा हो, ऐसा एक माहौल बनाने का इरादा है। शहरों में करीब-करीब दो करोड़ से ज्‍यादा परिवार, उनके लिए घर बनाने हैं। अब हमारा देश ऐसा है कि अगर नहीं बना तो जवाब मुझसे मांगा जाएगा। कोई उनसे जवाब नहीं मांगेगा कि ये दो करोड़ बेघर रहे क्‍यों। कोई नहीं मांगेगा, है देश का स्‍वभाव है, क्‍या करेंगे। हमें उसी से गुजारा करना है। लेकिन कोई कुछ कह देगा इस डर के कारण हम काम करना छोड़ दें तो देश का भला नहीं होगा। और इसलिए हमारा दायित्‍व बनता है कि हमारे गरीब परिवारों को घर मिले।

आजादी के 75 साल हो रहे वर्ष 2022 में। उन आजादी के दीवानों का नाम लेते हुए हमें रोमांच होता है। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू को याद करते हैं तो लगता है, कैसा बलिदान था! गांधी सरदार उनकी विरासत को देखते हैं तो लगता है कितना कष्‍ट झेला था। उन्‍होंने जो सपने देखें थे उन सपनों में क्‍या ये भी एक सपना नहीं था कि आजाद कि हिन्‍दुस्‍तान में हर परिवार के पास अपना घर हो? मैं मानता हूं आजादी के जब 75 साल मना रहे हैं तब, हमारे भीतर एक आवाज उठनी चाहिए कि मेरे देश में कोई गरीब ऐसा न हो कि जिसको फुटपाथ पर या झुग्‍गी-झोपड़ी पर जिन्दगी गुजारने के लिए मजबूर रहना पड़े ये हम बदलेंगे। यह हमारा दायित्‍व है और एक बार इस मिजाज को लेकर यहां से निकलेंगे तो रास्‍ते आप मिल जाएंगे। आज शहरों का विकास कैसे हो रहा है? आप किसी भी शहर में जाकर पूछिए बहुत कम शहर ऐसे मिलेंगे कि जहां पर पांच साल के बाद शहर कैसा होगा उसका कोई खाका कागज पर मिलेगा। दस साल के बाद कैसा शहर होगा उसका खाका कागज पर नहीं मिलेगा। जो Private property developer हैं, उनको तो पता होता है कि शहर इतना बढ़ेगा, इस दिशा में बढ़ेगा फिर वो वहां जमीन ले लेगा, योजनाएं डाल देगा। मकान तो खड़े कर देगा लेकिन जिंदगी जीने योग्‍य व्‍यवस्‍था पहुंचती नहीं है। न रोड बनता है, न बिजली पहुंचती है, न drainage की व्‍यवस्‍था होती है। लोग आते हैं, पैसे देकर मकान भी लेते हैं। बाकी व्‍यवस्‍था होती नहीं क्यों? क्‍योंकि शहर के नेतृत्‍व ने शहर नहीं बनाया कुछ property dealer ने शहर को बढ़ाया है। ये जो mismatch है उस mismatch को बदलना है। शहर कैसा बढ़ेगा, कब जाएगा कहां, किस रास्‍ते आगे बढ़ेगा, west में बढ़ेगा आगे East में बढ़ेगा, समाज के छोटे से छोटे व्‍यक्ति के लिए भी उसमें क्‍या जगह होगी, ये Plan, जब तक शहर का नेतृत्‍व दीर्घ दृष्टि के साथ नहीं करता है ये स्थिति बनी रहेगी।

हम इस AMRUT योजना के माध्‍यम से ये एक बदलाव चाहते हैं। शहर खुद अपना सोचने लगे, शहर अपनी योजनाएं बनाने लगे, और कहां जाना कैसे जाना है, उसका फैसला शहर करे। जरूरत के आधार पर वो चलता जाए, बढ़ता जाए, और बाद में व्‍यवस्‍थायें विकसित कर रिकॉर्ड के involvement आ जाता है encroachment आ जाता है, Road नहीं होती है ट्रैफिक की समस्या आती है। पानी नहीं बिजली नहीं, सारी समस्‍या हम झेलते रहते हैं, और ये हर शहर के अगल-बगल में आपको देखने को मिलेगा कि किसी ने उसको बना दिया और बाद में उस शहर को गोद लेना पड़ता है और वो बहुत तकलीफ वाला होता है। हमने इसकी योजना क्‍यों नहीं करनी चाहिए।

हमारे देश में शहरों के विकास के लिए एक तरफ हम स्‍वच्‍छ भारत की बात जब लेकर आए, मैं मानता हूं कि सरकार से लोग दो कदम आगे हैं, स्‍वच्‍छ भारत के काम में, कहीं सरकार कम नजर आती हैं, लोग ज्‍यादा नजर आते हैं। मैं विशेष रूप से मीडिया का आभारी हूं। मैं देख रहा हूं, वरना मुझे याद है कि 15 अगस्‍त को जब स्‍वच्‍छ भारत की बात कहकर निकला तो मुझे डर लगता था। ये रोज मेरे बाल नोच लेंगे। यहां कूड़ा है, यहां कचरा है, लेकिन मैं आज उन सबको सलाम करता हूं जिन्‍होंने ऐसा नहीं किया उन्‍होंने नागरिकों को train करने का काम उठाया और सभी मीडिया के लोग कर रहे हैं। अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं, लोगों को समझा रहे हैं कि क्यों, क्‍यों कूड़ा यहां है तुम यहां क्यों नहीं फेंकते हो।

मैं समझता हूं जब इतिहास लिखा जाएगा मीडिया के स्‍वच्‍छ भारत के अभियान का जो नेतृत्‍व जो आज मीडिया कर रहा है, देश में बदलाव लाने का कारण बनेगा। मैं, मैं देख रहा हूं। बदला जा सकता है ये और आज हमारे यहां Solid waste management, waste water treatment.. हमारा विकास ऐसा नहीं हो सकता कि जो शहर और गांव के बीच संघर्ष पैदा करेगा। हमारा विकास ऐसा होना चाहिए कि जो शहर और गांव एक-दूसरे के पूरक होना चाहिए। अगर शहर को पानी चाहिए, गांव वालों को पानी मिले या नहीं मिले, शहर को तो पानी देना ही पड़ेगा और पीने के पानी की एक बात ऐसी होती है, जहां मानवता का विषय होता है तो कोई बोल भी नहीं पाता है, क्‍या इसके उपाय नहीं है, क्‍यों न हम waste water treatment करें और वो पानी गांवों को खेतों में वापिस करें तो किसान भी परेशान नहीं होगा गांव भी परेशान नहीं होगा और शहर को पीने का पानी चाहिए उसकी उपलब्धता की भी कभी तकलीफ नहीं होगी। हम ये चिंता क्‍यों न करें, हम Solid waste management करके Compost बनाने के पीछे हैं। organic fertilizer तैयार करने की दिशा में क्‍यों काम न करें। वही fertilizer हम नजदीक के गांवों को दें। हमने देखा है कि बड़े शहर, बड़े शहर के आस-पास के 30-40 किलोमीटर के जो गांव होते हैं, वो ज्‍यादातर सब्‍जी की खेती करते हैं, ज्‍यादातर। क्‍योंकि उनको तुरंत सुबह-सुबह मार्केट मिल जाता है, शहर में उनका daily आधार पर चलता है बाजार। अगर हम organic fertilizer, compost fertilizer जो शहरों के कूड़े-कचरे से हम बनाते हैं, वो अगर हम गांव में दे दें, तो जो सब्जी मिलेगी वो organic सब्‍जी मिलेगी। अगर हमारा ये input cost कम होगा तो सब्‍जी भी सस्‍ती आएगी। सब्‍जी सस्‍ती आएगी तो गरीब आदमी भी 100 ग्राम सब्‍जी खाता है, तो दो सौ ग्राम खाएगा और सब्‍जी ज्‍यादा खाएगा तो Nutrition के problem solve होंगे Health के problem solve होंगे। ultimately बजट के Burden कम होते जाएंगे सुविधाएं बढ़ती जाएंगी। लेकिन हम अगर ये सोच करके काम करें तो ये काम बढ़ सकता है और इसलिए हमारे शहरों का विकास का Model है और इसलिए जो AMRUT योजना है इसमें इन बातों पर बल दिया गया है कि हम इन बातों को कैसे करें plan way में आगे बढ़े, गरीबों को घर मिले, जन-सामान्‍य को जीवन जीने की सुविधा मिले।

जो स्‍मार्ट सिटी का concept है उन स्‍मार्ट सिटी जो बनेगी ये पहली बार स्‍मार्ट सिटी योजना ऐसी है कि जिसमें शहरों का निर्णय भारत सरकार नहीं करेगी। शहरों को स्‍मार्ट बनाने का राज्‍य सरकार नहीं करेगी। शहरों को स्‍मार्ट बनाने का निर्णय वो शहर का नेतृत्‍व, वो शहर के नगारिक, वे शहर के municipality के लोग तय करेंगे। थोपा नहीं जाएगा, आवाज नीचे से उठनी चाहिए और इसलिए पहली बार हिन्‍दुस्‍तान में challenge route के आधार पर स्‍मार्ट सिटी बनाने का निर्णय किया है। दुनिया के कई देशों ने ये प्रयोग किया है। कुछ पैरामीटर तय किये गए हैं और जो शहर इस पैरामीटर को पूर्ति करेगा वो entry पाएगा इस स्पर्धा में। फिर उसकी दूसरी exam देनी पड़ेगी फिर उसको पार करेगा तो select होगा, जब select होगा तो फिर भारत सरकार, राज्‍य सरकार मिल करके उस शहर की ताकत को जोड़ करके उसको स्‍मार्ट सिटी बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। अगर ये योजना ऊपर से आएगी तो क्‍या होगा? ये काम क्‍यों नहीं हुआ है, वो दिल्‍ली वालों ने नहीं किया है, ये काम क्‍यों नहीं किया वो हमारे राज्‍य सरकार वाले नहीं करते, नहीं ! ये नीचे से होना है और कहीं पर कोई कठिनाई न आए उस दिशा में आगे बढ़ना है।

मैं समझता हूं यहां पर आये हुए सभी महानुभवों के लिए ये चुनौती है उस चुनौती को स्‍वीकार कीजिए और जो पैरामीटर तय हो उस स्पर्धा में आइये जीत करके आगे निकलिए और एक बार जब.. जीवन में स्‍पर्धा हर जगह पर होती है। आप मेयर भी बनते हैं तो स्‍पर्धा से ही तो बनते हैं, किसी ने ऊपर से तो नहीं बैठा दिया आपको। आप कहीं नौकरी लेने जाते हैं तो वहां भी तो competition होती हैं आप competition को पार करते हैं तो select होते हैं तो हमारे शहरी विकास में भी competition आवश्‍यक है। उस competition को ला करके स्‍मार्ट सिटी बनाने का प्रयास है। कभी-कभी कुछ लोग माथापच्‍ची इसी में खपा रहे हैं कि स्‍मार्ट सिटी चीज है क्‍या? बहुत.. बहुत ज्‍यादा दिमाग खपाने की जरूरत नहीं है। हम.. मान लीजिए किसी रेलवे स्‍टेशन पे गये, और जो पूछताछ वाला व्‍यक्ति वहां बैठा है उसको दो सवाल पूछने हैं और उसने हमको चार-पांच सवालों के जवाब दे दिए जो कि हम पहले उसको पूछने के लिए सोचकर गए थे लेकिन वो समझ जाएगा कि उनको ये पूछना है, वो जवाब दे तो हम कहें यार ये बड़ा स्‍मार्ट आदमी है। मेरी आवश्‍यकता से भी वो एक कदम आगे है, मेरे हिसाब से ही यही स्‍मार्ट सिटी है कि जो नागरिकों की आवश्‍यकता है उससे दो कदम हम आगे चललें, उसकी जो आवश्‍यकता है, आप मांगोगे हाजिर है, आप चाहोगे, हम सोच रहे हैं, आपका सुझाव है हां हमारी योजना बन रही है- दो कदम आगे है। आप देखिए देखते-देखते smart city बन जाएगी। technology है environment friendly development है। हमने प्रकृति के साथ जीना है energy saving यह हमारी स्‍वाभाविक व्‍यवस्‍था है walk to work ये concept लाना पड़ेगा वरना एक जगह पर रहता है और रोज डेढ़ घंटा वो travelling करता है फिर नौकरी पर जाता है तो उसकी maximum energy travelling में जाती है बची-खुची का में लगती है, तो वो काम कैसा होगा। अगर उसकी energy saving होती है। walk to work का concept develop धीरे-धीरे हमारे यहां होता है और एक composite व्‍यवस्‍था विकसित होती है कि जहां सबकुछ available हो साइकिल पर भी जाए तो अपना काम हो जाए। हमने इस प्रकार के मॉडल को develop करना ही होगा और जब ये develop करेंगे तो अपने आप शहर के भीतर कई छोटे-छोटे शहर बन जाते हैं। वो एक प्रकार से पूर्ण शहर बन जाते है। हम उस विचार को ले करके कैसे आगे बढ़ें तो smart city के concept को हमने आगे बढ़ाना है। चाहे housing for all की बात हो, चाहे हमारे 500 नगरों को प्राणवान बनाना है, अमृतमय बनाना है चाहे दुनिया की बराबरी करने वाले हमारे smart city की दिशा में कदम उठाना है। एक composite योजना के साथ urban India का हमारा विज़न क्‍या है, उसको ले करके हम आएं और ये योजना सरकार में बैठ करके कागज पर बनाई हुई योजनाएं नहीं हैं। शायद हिंदुस्‍तान में इतनी बड़ी मात्रा में consultation पहले कभी नहीं हुआ होगा, जितना consultation इस योजना को चरितार्थ करने के लिए लगाया गया है। सभी प्रकार के stake holders को इसमें जोड़ा गया है। उनसे पूछा गया, उनसे जानकारी ली गई है। उनकी समस्‍याओं को समझा गया है और उसको चरितार्थ करने का प्रयास किया है। financial world को भी, उनको भी विश्‍वास में लिया, बताइए कैसे होगा। real estate developers है उनको भी पूछा गया कि बताइए, भई कैसे आगे बढ़ सकते है जो कानूनविद हैं.. कि जिसके कारण कानूनी समस्‍याएं न आएं, उनसे पूछा गया। दुनिया में जो अच्‍छा हुआ है जिन्‍होंने अच्‍छा किया है उनको भी साथ जोड़ा गया है। इस क्षेत्र में जिन-जिन की पहचान है दुनिया में उन सबकी सलाह ली गई है और इन सबसे विचार-विमर्श करके black and white में चीजों को प्रस्‍तुत करने का प्रयास किया है। एक बार ये चीजें तैयार हुई हैं, अब आगे बढ़ने में देर नहीं।

ये सरकार consumer की सुरक्षा इस पर सजग है। Parliament में एक बिल already हमारा गया हुआ है, इस अवसर पर चर्चा होगी हमारी। वरना हमारे देश में चाहे अनचाहे ये जो builder lobby है उनकी छवि काफी गिरी हुई है और गरीब आदमी अपनी जिंदगी का पूरा पैसा उसमें लगाता है यानी उसके जीवन की वो एक ही घटना होती है और फिर जब वो लुट जाता है तो उसका तो सब लुट जाता है। ये छोटे-छोटे गरीब consumer को protect करने के लिए संसद में कानून लाया गया है ये आने वाले सत्र में पारित होगा तो हम विकास चाहते हैं, घर को जोड़ना भी चाहते है लेकिन साथ-साथ हम सामान्‍य नागरिकों की आवश्‍यकताओं की पूर्ति को ध्यान देना चाहते हैं।

मुझे विश्‍वास है कि आज, 25 जून, ये शहरी भारत, विज्ञान भवन में एकत्र हो करके आधुनिक भारत के निर्माण के लिए वैज्ञानिक तौर-तरीके से आगे बढ़ने का संकल्‍प ले करके आगे बढ़ेगा। नगर-पालिका, महानगर पालिका का जो नेतृत्‍व आया है मैं उनसे गुजारिश करना चाहता हूं यहां सब राजनीतिक दल के लोग होंगे, यहां सभी राजनीतिक पृष्‍ठभूमि के लोग होंगे लेकिन एक बात निश्चित है हम जब इतिहास पढ़ते हैं तो उन बातों को गौर करते हैं कि फलाना राजा था 5 साल ही उसको कार्यकाल मिला था लेकिन उसने अपने राज्‍यकाल में ये दो चीजें अच्‍छी करके गया था | 200 साल के बाद भी लोग उसको याद करते हैं 100 साल के बाद भी अच्‍छा उनके कार्यकाल में ये काम हुआ था, उनके कार्यकाल में उनके कार्यकाल में ये तालाब बना और शहर की पानी की समस्‍या हल हुई थी। उनके कार्यकाल में डेढ़ सौ साल पहले स्‍कूल बना था, स्‍कूल में से इतने बड़े-बड़े लोग तैयार हुए। जिसको शासन का अवसर मिलता है उनकी पहचान पचासों साल के बाद भी.. कौन सा अच्‍छा काम करके गये उससे तो नापी जाती हैं| मैं उन नगर-पालिकाओं के अध्‍यक्षों से कहना चाहता हूं। मैं उन महा नगर-पालिकाओं के अध्‍यक्ष से कहना चाहता हूं कल्‍पना कीजिए कि आप 80 साल के उम्र के होंगे आपका पोता उंगली ले पकड़ कर आपके साथ चलता हो तो आपके दिल में इच्‍छा क्‍या होगी। जरा कल्‍पना कीजिए मैं दावे से कहता हूं कि आपके दिल में इच्‍छा ये होगी कि जो छोटा पोता जो ज्‍यादा कुछ समझता नहीं उंगली पकड़कर वहां ले जाएंगे और कहेंगे देखिए ये भवन हैं न मैं जब अध्‍यक्ष था न तो मैंने बनाया था। ये जो गांव में तालाब है न, मैं जब अध्‍यक्ष था न मैंने बनाया था। हर किसी की ख्‍वाहिश होनी चाहिए कि अपने कार्यकाल में अपने शहर को कुछ अच्‍छा नजराना दे करके जाए। आपकी जीवन की सफलता उसमें है। आपकी जीवन की सफलता उस बात में नहीं है कि आपने कितने लोगों को पराजित किया कितनी बार चुनाव जीतकर आये। कितनी बार गठजोड़ करके सत्‍ता को हासिल किया। ये सफलता का मानदंड नहीं होता है। सफलता का मानदंड ये होता है कि जिस जनता जनता जनार्दन की आपको अवसर दिया है उनके लिए क्‍या करके गये, अगर ये मन में संकल्‍प ले करके जाते हैं ये इरादा ले करके जाते हैं कि मुझे पांच साल का कार्यकाल मिला है मुझे तीन साल का कार्यकाल मिला है जनता जनार्दन ने मुझे अवसर दिया है। मैं मेरे नागरिकों के लिए ये करके जाऊंगा और उसका जो संतोष मिलेगा ना अद्भुत संतोष होगा। अद्भुत संतोष होगा। जीवन भर जीने के लिए वो आपके लिए एक बहुत बड़ा अवसर बना हुआ होता है। अपने पोते के पोते भी अगर आपके आंखों के सामने हैं तो आपका मन करेगा कि आप अपना achievement उसको बता कर जाएं, ये आपका सपना रहता है।

आपके दिल में भी वो सपने जगें, आप भी कुछ करने के लिए कृतसंकल्‍प हों। अर्थात प्रयत्‍न करके शहर के जीवन में बदलाव लाएं। वहां के सामान्‍य से सामान्‍य नागरिक के जीवन में बदलाव लाएं इन शुभकामनाओं के साथ मैं आज के इस अवसर पर विभाग के सभी लोगों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं ताकि देश के शहरी जीवन में बहुत ही अल्‍प समय में बदलाव आये और 2022 में जब देश आजादी के 75 साल मनाता हो तब हमारे शहरों में भी हर परिवार में स्‍वतंत्रता की आनंद की अनुभूति दें उसको हम सफलतापूर्वक पार करें इसी शुभकामनाओं के साथ बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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80 व्या स्वातंत्र्यदिनानिमित्त लाल किल्ल्याच्या तटबंदीवरून पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी केलेल्या संबोधनाचा मजकूर
August 15, 2026
“आजचा दिवस आपल्या स्वप्नांना, संकल्पांना आणि सामर्थ्याला घेऊन पुढे जाण्याचा आहे” : पंतप्रधान
“आज दृढ संकल्पाने भारताने एक मोठे स्वप्न पाहिले आहे. 2047 मध्ये स्वातंत्र्याची 100 वर्षे पूर्ण होत असताना आपण विकसित भारताची निर्मिती केलेली असेल, हेच ते स्वप्न” : पंतप्रधान
“आपण स्वतःवर विश्वास ठेवला पाहिजे आणि आत्मनिर्भर भारत उभारण्याचा अभिमान बाळगला पाहिजे” : पंतप्रधान
“ज्या क्षेत्रांकडे पूर्वी ‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्रे’ म्हणून पाहिले जात होते, ती आता ‘पुढे जाण्याची क्षेत्रे’ बनली आहेत” : पंतप्रधान
“प्रत्येक भारतीय ‘मेक इन इंडिया’ आणि ‘स्थानिकांसाठी आग्रह’ या भावनेचा स्वीकार करत आहे” : पंतप्रधान
“भारताकडे स्थिर राजकीय जनादेश, स्थिर सरकार, सशक्त लोकशाही, मजबूत न्यायव्यवस्था आणि आपल्या सर्वांना मार्गदर्शन करणारी राज्यघटना आहे” : पंतप्रधान
“आपल्याला 3 गोष्टींवर लक्ष केंद्रित करण्याची गरज आहे: खर्च, गुणवत्ता आणि उत्पादनाचे प्रमाण” : पंतप्रधान
“आपले कारखाने स्पर्धात्मक, आपली उत्पादने वापरण्यास सुलभ आणि आपले पॅकेजिंग सर्वोत्तम असले पाहिजे” : पंतप्रधान
“ज्या ठिकाणी पूर्वी नक्षलवादी हिंसाचाराचा प्रभाव होता, तेथे आता शांतता, विकास आणि नव्या आशेचे वातावरण आहे” : पंतप्रधान
“येत्या काळात या सप्तधारा भारताला पुढे घेऊन जातील आणि देशाला नव्या उंचीवर पोहोचवतील” : पंतप्रधान

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

आज आपण सर्व 80 वा स्वातंत्र्यदिन साजरा करत आहोत. आज प्रत्येक हृदयाची धडधड वंदे मातरमच्या सुरात निनादत आहे. आज प्रत्येक घरात तिरंगा आहे. प्रत्येक मनात तिरंगा आहे. आणि देश उत्साह आणि आकांक्षांसह नव्या संकल्पांना घेऊन आज पुढे जात आहे. तुम्हा सर्वांना स्वातंत्र्यदिनाच्या खूप खूप शुभेच्छा. देश आज त्या महान सुपुत्रांचे पुण्यस्मरण करतो, ज्यांनी देशाच्या स्वातंत्र्यासाठी त्याग, बलिदानाची पराकाष्ठा केली. आपले तप, त्याग आणि बलिदानाने स्वातंत्र्याचे एकमेव लक्ष्य निर्धारित करून आपले संपूर्ण आयुष्य खर्ची घातले. पूज्य बापूंसह सर्व स्वातंत्र्य सेनानींना, बलिदानाची महान परंपरा जागवणाऱ्या महान क्रांतिकारकांना आज मी श्रद्धेने नमन करत आहे.

आज या समारंभात जे उपस्थित आहेत, त्या सर्वांसाठी आज एक ऐतिहासिक क्षण देखील आहे. स्वातंत्र्यानंतर 15 ऑगस्टला लाल किल्ल्यावर पहिल्यांदा वंदे मातरमचा सूर घुमत आहे. आज ज्यावेळी आपण सर्व या देशाचे लोक वंदे मातरमची 150 वर्षे साजरी करत आहोत, त्यावेळी यापेक्षा जास्त उत्तम क्षण कोणता असू शकेल.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

गेल्या काही दिवसात देशाच्या काही भागात पुराचे थैमान होते, भूस्खलनाचा प्रकोप राहिला, अनेक कुटुंबांना याची झळ पोहोचली, त्यांचे दुःख, वेदना यांची आम्हाला पूर्णपणे जाणीव आहे. पीडित कुटुंबांना मी याची हमी देत आहे की आम्ही आणि संपूर्ण देश त्यांच्या पाठिशी उभे आहोत.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

कोणताही देश त्यावेळी महान बनतो, त्यावेळी आपली उद्दिष्टे साध्य करतो, ज्यावेळी आपली स्वप्ने, आपले संकल्प आणि आपल्या सामर्थ्याच्या बळावर पुढे जातो.

माझ्या देशवासियांनो,

आता लहान स्वप्नांनी काही चालणार नाही, आपल्याला मोठी स्वप्ने,कारण मोठी स्वप्ने आपल्या विचारांचा देखील विस्तार करतात.आपल्या विचारांच्या क्षितिजाचा विस्तार करतात. आपले संकल्प दृढ असले पाहिजेत, ज्यावेळी संकल्प दृढ असतात, तेव्हा अडचणींमध्ये, आपत्तींमध्ये, मार्ग निघण्याचे सामर्थ्य आपोआपच प्राप्त होते.

आणि माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

आपले संकल्प देखील मोठे असले पाहिजेत,कारण, ज्यावेळी स्वप्ने मोठी असतात, संकल्प मोठे असतात, त्यावेळी आपल्या सामर्थ्याची उंची देखील वाढते. आपल्या प्रयत्नांची उंची देखील वाढते, तेव्हा कुठे आपण आपली स्वप्ने साकार करू शकतो

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

आज भारताने देखील एक खूप मोठे स्वप्न पाहिले आहे,दृढ संकल्पासह पाहिले आहे. नवी उंची गाठण्यासाठी पाहिले आहे. आणि ते स्वप्न आहे...

ज्यावेळी देशाच्या स्वातंत्र्याला 100 वर्षे पूर्ण होतील, 2047 मध्ये, आपण विकसित भारत बनवणारच.140 कोटी देशवासियांच्या पुरुषार्थाने, आपल्याला हे लक्ष्य साध्य करायचे आहे. आणि ज्यावेळी जगातील सर्वात जास्त लोकसंख्या असलेला देश विकसित होण्याचा संकल्प करतो, त्यावेळी जगाच्या नजरेत देखील तो आपल्या साहसाची ओळख बनतो.

आपल्याकडे पाहण्याच्या दृष्टीकोनात बदल करण्यासाठी तो जगाला भाग पाडतो.

प्रिय देशवासियांनो,

आणि हे मी उगीचच सांगत नाही, गेल्या 12 वर्षात देशाच्या कोट्यवधी नागरिकांनी, मग ते गरीब असोत, पीडित असोत, वंचित असोत, आदिवासी असोत, गावात राहणारे असोत, शहरात राहणारे असोत, गरीब असोत, मध्यम वर्गातील असोत, युवा असोत, ज्येष्ठ असोत, महिला असोत, पुरुष असोत, उत्तर असो, दक्षिण असो, पूर्व असो वा पश्चिम असो.प्रत्येकाने गेल्या 12 वर्षात या संकल्पासह, समर्पणासह,देशाला नव्या उंचीवर नेण्यासाठी हर तऱ्हेने प्रयत्न केले आहेत. त्यांच्या या प्रयत्नांचा मी आदरपूर्वक स्वीकार करतो आणि त्याचाच हा परिणाम आहे की इतक्या कमी कालावधीत 25 कोटी देशवासी, दारिद्र्य रेषा ओलांडून गरिबीतून बाहेर पडले आहेत. याच देशवासियांच्या प्रयत्नांचा हा परिणाम आहे, एकेकाळी आपली गणना “फ्रॅजाईल फाईव्ह”( अतिशय नाजूक अर्थव्यवस्था) म्हणून होत होती.मात्र, 12 वर्षांच्या आत आपण एक महत्त्वाची अर्थव्यवस्था, एक झपाट्याने विकसित होत असलेली अर्थव्यवस्था बनलो आहोत.

मित्रांनो,

देश स्वतंत्र झाला.अनेक स्वप्ने बाळगून स्वतंत्र झाला.मात्र, आपल्याला गती प्राप्त करता आली नाही,आपल्याला वेग प्राप्त करता आला नाही,होत आहे, चालतंय, अरे होईल, बघू नंतर, यामध्येच अडकून राहिलो. 2014 येईपर्यंत तर संपूर्ण जगाने आपल्याला “फ्रॅजाईल फाईव्ह” मध्ये टाकून ठेवले होते. अशा काळात,गेल्या 12 वर्षात भारताने एक नवी गती प्राप्त केली, अतिशय वेगाने आपण पुढे जात आहोत आणि देशवासियांचा हा संकल्प आहे. की आता 140 कोटी देशवासियांच्या संकल्पाला, सामर्थ्याला थांबवणे आता अशक्य आहे

प्रिय देशवासियांनो,

गेल्या 12 वर्षात संरक्षण उत्पादन सुमारे चार पट झाले आहे, खादी आणि ग्रामोद्योगाचे उत्पादन सुमारे पाच पट झाले आहे, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादनात सुमारे सात पट वाढ झाली आहे, आधुनिक रेल्वे डब्यांच्या निर्मितीत 21 पट वाढ झाली, मोबाईल फोन उत्पादनात 33 पट वाढ झाली, केवळ इतकेच नाही तर आधुनिक युगामध्ये डिजिटल आणि नवोन्मेषाच्या या जगातही आपण आपली पताका फडकवली.इंटरनेट वापरकर्ते, इंटरनेट उपभोक्ते, जवळ जवळ चार पट झाले.

पेटंट मिळण्याच्या संख्येत चार पट वाढ झाली. डिजिटल व्यवहारात 100 पट वाढ झाली.सर्वसामान्य माणसाच्या सुविधांबाबतही आम्ही तितक्याच गांभिर्याने काम केले. दरवर्षी सरासरी 15 पट जास्त वेगाने आम्ही नळाद्वारे पाण्याच्या जोडण्या दिल्या. दरवर्षी सरासरी सहा पट जास्त वेगाने आम्ही लोकांना गॅस कनेक्शन दिले. दरवर्षी सरासरी चार पट वेगाने गरिबांना शौचालये बांधून देण्याचे काम केले. दरवर्षी सरासरी तिप्पट वेगाने गरिबांना घरे देण्याचे काम केले. देशाने शासनात देखील मोठ्या प्रमाणावर बदल केला. हजारोंच्या संख्येने अनुपालने संपुष्टात आणली.शेकडोंच्या संख्येने जुनाट कायदे रद्दबातल केले.गेल्या शतकातील कायदे 21 व्या शतकासाठी लागू होऊ शकत नाहीत.आम्ही आधुनिक पायाभूत सुविधांसाठी मेट्रोचा विस्तार केला. आम्ही सार्वजनिक परिवहन बळ दिले. ज्या वेगाने काम,ज्या प्रमाणात काम केले, हे सर्व,हा वेग, हा विस्तार,ही कामगिरी स्वातंत्र्यानंतर पहिल्यांदाच गेल्या एका दशकात देशाने पाहिली आहे. आणि ज्यावेळी इतक्या जास्त सिद्धी आपल्या समोर आहेत, इतका जास्त वेग दिसत आहे, देशवासियांचे सामर्थ्य प्रत्येक क्षणाला प्रकट होत आहे, त्यावेळी तर 2047 मध्ये विकसित भारत होण्याचा संकल्प कधीच अपूर्ण राहू शकत नाही. ही सर्व आकडेवारी या गोष्टीची साक्ष देत आहे, की आपण प्रगती करणार आहोत.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

मात्र, यासाठी आत्मविश्वासाची गरज असते, आत्मगौरवाची गरज असते आणि त्याबरोबर आत्मनिर्भर भारत असण्याची देखील अतिशय गरज असते. आणि म्हणूनच गेल्या काही वर्षांमध्ये, आमची ही धारणा राहिली आहे आता भारताला दुसऱ्या देशांवर अवलंबून राहून चालणार नाही, आपल्याला आत्मनिर्भर बनावे लागेल.जगात बरेच काही मिळते, स्वस्त मिळते, लवकर मिळू शकते, पण त्यामुळे आपले सामर्थ्य तयार होऊ शकत नाही. ही आपल्या सामर्थ्याची परीक्षा असते. आणि म्हणूनच आपल्याला आपल्या क्षमतेत वाढ करायची आहे. आपल्या हितांचे संरक्षण आपल्याला स्वतः करायचे आहे. आणि यासाठी आत्मनिर्भर भारताचा संकल्प अतिशय दृढतेने सोबत घेऊन आपण पुढे जात आहोत. मेक इन इंडिया, स्वदेशी, व्होकल फॉर लोकल, या सर्व क्षेत्रात आज प्रत्येक भारतीयाचे मन जोडले जात आहे.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

मी तुम्हाला एक उदाहरण देतो. सेमीकंडक्टरचे,देश स्वतंत्र झाल्यानंतर जगात तर सेमीकंडक्टरची चर्चा होतच होती, आपल्याकडे देखील चर्चा होत होती, मात्र, सेमीकंडक्टरचा एखादा मोठा प्रकल्प आपण सुरू करू शकलो नाहीत, आणि आज काय स्थिती आहे. आजच्या डिजिटल जगात, आजच्या तंत्रज्ञानात चिपचे महत्त्व आम्ही जाणून आहोत. कोणतेही इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन असेल, आपली वैद्यकीय उपकरणे असतील, आपल्या परिवहनाची साधने असतील, प्रत्येकात चिप अनिवार्य आहे. आणि या चिपविना जग थांबून जाईल, अशी स्थिती आहे. आणि म्हणूनच भारताने आत्मनिर्भर होण्याच्या दिशेने आपला सेमीकंडक्टर प्लांट, मोठा सेमीकंडक्टर प्लांट, तीन सेमीकंडक्टर प्लांट सुरू झाले आहेत. आणि मला हे सांगण्यात आले की तिथे जे उत्पादन सुरू झाले आहे त्याची निर्यातही सुरू झाली आहे. आणि मला देशवासियांना सांगायचे आहे की आगामी 7-8 वर्षात आणखी पाच, सात किंवा आठ सेमीकंडक्टर प्लांट लवकरच सुरू होणार आहेत. हा आत्मनिर्भर भारत आपल्याला विकसित भारताच्या दिशेने जाण्याचा महामार्ग देईल.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो.

तशीच एक चर्चा डिजिटल मिनरल्सची(खनिजांची) होत आहे, संपूर्ण तंत्रज्ञान डिजिटल मिनरल्सवर अवलंबून आहे. यामध्ये देखील भारत आपली स्थिती सुरक्षित करण्यामध्ये गुंतलेला आहे. या डिजिटल मिनरल्सचे लक्ष्य साध्य करण्यासाठी, आम्ही नॅशनल क्रिटिकल मिनरल सुरू केले. डिजिटल मिनरल कॉरिडॉरची आम्ही घोषणा केली. अनेक देशांसोबत करार होत आहेत. जगातील कित्येक देश आता या क्रिटिकल मिनरल्स संदर्भात भारतावर विश्वास दाखवू लागले आहेत.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

ज्या प्रकारे सेमीकंडक्टरचा विषय आहे, डिजिटल मिनरल्सचा विषय आहे, त्याच प्रकारे ज्या तंत्रज्ञानाच्या दिशेने आपण जात आहोत, जग चालले आहे, त्यामध्ये ऊर्जेचे महत्त्व वाढत चालले आहे, आता ऊर्जेशिवाय नवे जग चालवणे अवघड आहे, आणि म्हणूनच आपल्याला, चिप असो, एआय असो, डेटा सेंटर असो, आपल्याला खूप मोठ्या प्रमाणावर ऊर्जेची गरज भासणार आहे. ऊर्जा सुरक्षा ही आपल्या काळाची गरज आहे.आणि म्हणूनच आम्ही आधीपासूनच त्या दिशेने एकामागोमाग एक भक्कम पावले टाकली आहेत. ऊर्जा सुरक्षेचे एक खूप मोठे माध्यम आहे अणुऊर्जा अर्थात न्यूक्लिअर एनर्जी. आम्ही संसदेत शांती कायदा संमत करून एका नव्या लक्ष्याच्या दिशेने जाण्याचा मार्ग निश्चित केला आहे. 2047 पर्यंत आम्ही 100 गिगावॉट अणुऊर्जा निर्मितीचे लक्ष्य घेऊन वाटचाल करत आहोत, या एकाच दशकात पाच नवीन अणुभट्ट्या उभारण्याचे लक्ष्य निर्धारित करून आम्ही वाटचाल करत आहोत. यावर्षी भारताने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नॉलॉजीमध्ये प्रभुत्व प्राप्त करून एक महत्त्वाचा टप्पा गाठला आहे. यामुळे अणुऊर्जा क्षेत्रात आत्मनिर्भर बनण्याच्या दिशेने एक मोठे यश मिळवण्याच्या दिशेने आपण पाऊल टाकले आहे.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

अनेकदा संसाधनांच्या अभावामुळे देशाची वाटचाल थांबत नाही,तर ती थांबण्याचे कारण आहे विचारांच्या मर्यादा.... ज्यावेळी विचारशक्ती कुंठित होते, मर्यादांमध्ये अडकून राहते, तेव्हा आपल्याला आपले सामर्थ्य ओळखता येत नाही. देशाला आज खनिज तेलासाठी अवलंबून रहावे लागत आहे. आणि आपल्या चुकीच्या विचारशक्तीमुळे हे होत आहे. तुम्हाला हे जाणून आश्चर्य वाटेल की आपण आपल्या किनारपट्टीवर,आपण अशा विचारसरणीमुळे,आपल्या किनारपट्टीचा 99 टक्के भाग नो गो एरिया घोषित केला आहे. आपणच समुद्रात जाऊन कोणतेही उत्खनन न करण्याचा निर्णय घेतला आहे. हे विचारांचे दारिद्र्य होते. आपण हा निर्णय घेतला की हे चालणार नाही. आम्ही त्या 99 टक्के भागाला जो एकेकाळी नो गो एरिया होता, त्याला गो अहेड एरिया म्हणून खुला केला. आता आम्ही समुद्राच्या आत जाऊन संशोधन करण्याच्या आणि नवनवीन साठे शोधण्याच्या दिशेने प्रवृत्त झालो आहोत. आम्ही प्रयत्न करत आहोत. आम्ही गेल्या वर्षी याच दिशेने महत्त्वपूर्ण पाऊल ठेवत समुद्रमंथनाची घोषणा केली होती. गेल्या काही दिवसात 85 हजार कोटी रुपयांची तरतूद करून या योजनेला गती देण्याचा निर्णय घेतला आहे.

माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,

ऊर्जा सुरक्षेच्या पर्यायी स्रोतांसाठी पूर्ण शक्ती लावणं फार गरजेचे आहे आणि म्हणूनच ऊर्जेचा योग्य वापर व्हावा यासाठी भारत गतिमान काम करत आहे. 2014 च्या आधी म्हणजे आजपासून बारा वर्षांपूर्वी आपल्या देशात फक्त 70 शहरांमध्ये पाईप गॅस ची सुविधा होती, पाईपनं गॅस पुरवला जात असे. बारा वर्षात या 70 शहरांना आम्ही 700 शहरांपर्यंत पोहोचवले. याला म्हणतात गती. याला म्हणतात विस्तार. 2014 पूर्वी जेमतेम वीस-बावीस लाख घरांमध्ये पाईपनं गॅस पोहोचत होता, आज पावणेदोन कोटी घरांमध्ये पाईपनं गॅस पुरवला जात आहे. बारा वर्षांपूर्वी देशाची सौर ऊर्जा क्षमता केवळ 2GW होती 2GW.आज 160 GWचं लक्ष्य आपण साध्य केले आहे.

माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,

मी आणखी एक माहिती देतो. देशाच्या मध्यमवर्गाला सामान्य वर्गाला फायदे मिळावेत यासाठी आम्ही लक्ष दिले आहे. आम्ही पीएम सूर्यघर मोफत वीज योजना सुरू केली आणि आज मला समाधान वाटतं की इतक्या कमी वेळात 50 लाख घरांच्या सौरऊर्जेचे काम आपण पूर्ण केले आहे. वेगाने काम होत आहे. हजारो घरांचे वीज बिल शून्यावर आले आहे. हजारो घरं स्वतःची वीज वापरल्यानंतर अतिरिक्त विजेची विक्री करून उत्पन्न मिळवत आहेत. प्रत्येक कुटुंबाला यासाठी 80 हजार रुपये मदत म्हणून सरकारतर्फे दिले जात आहेत. तेव्हा कुठे हे काम पूर्ण होत आहे.

माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,

आपण जाणून हैराण व्हाल की ही जी आपली रेल्वे आहे तिच्या विद्युतीकरणाचं काम आपल्या देशात 1925 मध्ये सुरू झालं होतं 1925 साली विद्युतीकरण सुरू झालं पण 90 वर्षांमध्ये फक्त तीस टक्के रेल्वेचे विद्युतीकरण झालं. 90 वर्षात 30 टक्के. आमचा वेग पहा. उद्दिष्ट साध्य करण्यासाठी आमची धाव पहा. आम्ही या एकाच दशकात शतप्रतिशत काम पूर्ण केलं. 90 वर्षात 30 टक्के आणि दहा वर्षात 70% याला म्हणतात काम आणि यामुळेच डिझेल आपल्याला बाहेरून आणावे लागतं त्यात बचत झाली,

माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,

आम्ही इथेच नाही थांबलो. जगात मागे राहण्याची आमची इच्छा नाही. आपण ही बातमी ऐकली असेलच.‌ भारताने इंधनाच्या एका नव्या क्षेत्रालाही स्पर्श केला आहे. देशात हायड्रोजनवर चालणारी पहिली रेल्वेगाडी सुरू झाली आहे. मला आनंद वाटतो की ही सर्वात लांब रेल्वेगाडी आहे आणि सर्वात ताकदवान रेल्वेगाडी आहे. जगात हायड्रोजन क्षेत्रात भारताने आपला झेंडा रोवला आहे.

प्रिय देश बांधवांनो,

गेली दहा-बारा वर्ष आम्ही 2047 उद्दिष्ट गाठण्यासाठी स्वतःला सिद्ध करत आहोत. आम्ही विचारही केला नव्हता की आम्हाला यातही काही संकट झेलावी लागतील. गेल्या दहा-बारा वर्षात कित्येक संकटांचा सामना करावा लागला.कोरोनासारख्या महामारीनं संपूर्ण जगाला चिंतेच्या खाईत लोटला होतं. सर्व व्यवस्था कोलमडून पडल्या होत्या. कोरोना मधून बाहेर पडलो तर युद्धाच्या विध्वंसाच्या बातम्या येऊ लागल्या. कधी युक्रेन तर कधी पश्चिम आशिया . बघावं तिकडे तणावाची परिस्थिती. माहीत नाही, भविष्यवेत्यांनी काय काय घोषणा केल्या होत्या! जनतेला चिंतेत ठेवणं यातच काही लोकांना आनंद मिळतो. लस मिळणार नाही, कोविडमध्ये लोक वाचणार नाहीत, काहीही होणार नाही , पेट्रोल पंपावर पेट्रोल मिळणार नाही, गॅस मिळणार नाही, डिझेल मिळणार नाही , खत मिळणार नाही, अशा सगळ्या दुनियाभरच्या अफवा पसरवून भारताच्या जनतेला घाबरवून सोडण्याचा, चिंतेमध्ये बुडवून टाकण्याचा आनंद काहीजण घेत होते. पण देशाने बघितलं, गेल्या दहा-बारा वर्षात सुनियोजित योजनांना रंग भरले आहेत आणि अशा संकटं झेलूनही आमच्या नागरिक सेवो भव या मंत्राने विजयी होऊन भारताने जी तयारी केली होती, एकाहून एक उपाय केले होते, कोणी विचार केला नव्हता असं संकट येईल पण संकटाच्या त्या तेवढ्या वेळातही हे सर्व उपाय कामी आले आणि आज देशात गॅस आहे, पेट्रोल आहे, युरिया आहे. आम्ही आपल्या ताकदीने उभे आहोत, चालत आहोत.

माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,

जगातल्या या संकटाचा परिणाम प्रत्येकावरच झाला, आम्हीही यातून सुटलो नाही‌ युरियाचे भाव 3000 रुपयांवर पोहोचले -एका गोणीला. आजही आम्ही देशातल्या कृषी बांधवांना तो भार सहन करायला मजबूर केलेलं नाही. सरकार आपल्या खांद्यांवर तो भार उचलत आहे. भारताला युरियाची गोण ३ हजार रुपयांना मिळते ते सरकार शेतकऱ्यांना 300 रुपयांना उपलब्ध करून देते. एवढेच नाही तर डीएपी चा बाजारभाव आज जगात पाच हजारांवर जाऊन पोहोचला आहे पण आपल्या शेतकऱ्यांना कष्ट होऊ नयेत म्हणून तेराशे पन्नास रुपयांना देण्याचे काम आम्ही आजही करत आहोत. एक वेळ अशी होती.

प्रिय देश बंधूंनो,

एक वेळ अशी होती, जेव्हा मी स्वावलंबनाचा उल्लेख करत असे तेव्हा काहीजण वातानुकूलित दालनात बसणारे लोक आम्हाला विचारत होते जागतिकीकरणाचं काय होणार? पण जगानं पाहिलं आहे -एका दशकात जगानं जणू जागतिकीकरणाबद्दल बोलणं सोडूनच दिलं आहे. जिथून जागतिकीकरणाचा आवाज येत होता तो आता ऐकू येत नाही. जगातला प्रत्येक देश आपापल्या समस्यानुसार निर्णय घेत आहे आणि दुर्दैवानं संकटाच्या या काळात काही लोकांनी आपली प्रतिष्ठा दाखवण्यासाठी संसाधनांचं हत्यारीकरण करण्याचा खेळ खेळला जात आहे. जग स्वतःजवळ जे काही आहे ते शस्त्र म्हणून वापरत आहे. संसाधनांचं शस्त्रीकरण, स्रोतांचं शस्त्रीकरण, पेट्रोल, डिझेल, खतं,औषधं, तंत्रज्ञानाची चिप एवढंच नव्हे तर भूभागालाही शस्त्र बनवलं जात आहे आणि अशावेळी आपण आत्मनिर्भरतेचा मंत्र घेऊन दहा वर्ष योग्य दिशेने चाललो नसतो तर कल्पना करू शकता, अशा संकटांचा सामना कसा केला असता?

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

दुसरीकडे, आज भारताचे प्रोफाइल अधिकाधिक विकसित होत आहे. आज भारत जगासाठी एक स्वीकृत आणि सन्माननीय देश म्हणून मान्यता पावत आहे. भारताकडे स्थिर राजकीय जनादेश आहे, स्थिर सरकार आहे, भारताची गतिमान, चैतन्यमय लोकशाही आहे, भारताची मजबूत न्यायव्यवस्था आहे, आणि आम्हा सर्वांना दिशा देणारे, भारताचे संविधान आहे. आणि आज जग, भारताच्या या सामर्थ्याला ओळखते आहे. आणि म्हणूनच, 2014 नंतर, जगातील जवळपास 40 देशांसोबत, आमचे मुक्त व्यापार करार होत आहेत. आणि बघा, त्यातून किती मोठ्या संधी निर्माण होत आहेत. हे जे व्यापार करार होत आहेत, ते भारतासाठी मोठी संधी आहेत. आणि म्हणून, मी माझ्या एमएसएमई कंपन्यांना सांगू इच्छितो, की आपल्याला ही संधी सोडायची नाही. संपूर्ण जगात आपल्याला पोचायचे आहे, भारताच्या बाजारातील प्रत्येक उत्पादन आपल्याला जागतिक बाजारात पोहचवायचे आहे. मग ते आपली वस्त्रे- प्रावरणे असोत, किंवा आपली मशीनरी असोत, आपली औषधे असतो, आपल्याला ही संधी सोडायची नाही. मात्र, जी जागतिक गुणवत्तेची परिमाणे आहेत, ती आपल्याला साध्य करावी लागतील. जगभरात जी उत्पादने मिळतात, त्यापेक्षा चांगल्या दर्जाची उत्पादने द्यावी लागतील, जगभरात जी उत्पादने मिळतात, त्यापेक्षा स्वस्त द्यावी लागतील. पंजाबच्या लुधीयानापासून ते तमिळनाडूच्या तिरुपुर पर्यंत आमचे वस्त्रोद्योग क्षेत्र जगात पोहचू शकते. इतकेच नाही, तर केरळम पासून ते गुजरात आणि तामिळनाडू पासून ते बंगाल पर्यंतचा आपला सागरी किनारा आहे. आपल्या मच्छीमार बंधू भगिनींना, या मुक्त व्यापार कराराचा, कोळंबी माशाच्या निर्यातीत फायदा होणार आहे. आपले सी-फूड जगभरात पोहोचवण्याची संधी वाढली आहे. आणि आपण या संधीचा लाभ घेत, पुढे जाण्यासाठी, प्रगतीसाठी प्रयत्न करावेत अशी माझी इच्छा आहे.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

मी जी भूमिका आपल्यासमोर मांडली आहे, त्यामागे, 2047 च्या विकसित भारताच्या उद्दिष्टाचा पाया त्यावर रचला आहे. 2047 च्या विकसित भारताचे उद्दिष्ट, गेल्या दहा -बारा वर्षात, देशवासीयांनी जे सामर्थ्य दाखवले आहे, त्या सामर्थ्याचाच भाग आहे.

आणि म्हणूनच, माझ्या बंधू- भगिनींनो,

या शतकाचा एक चतुर्थांश भाग संपला आहे, आणि पुढचा एक चतुर्थांश भाग, आपल्यासाठी अत्यंत महत्वाचा आहे. आता आपण थांबू शकत नाही, आपला वेग कमी होऊ शकत नाही, आपली दिशा निश्चित झाली आहे. आपल्याला आपले साध्य प्राप्त करायचेच आहे. आणि म्हणूनच, आपल्याला आपली कार्यशैली बदलावी लागेल. आपली कार्यशैली बदलत आपल्याला आपली मानसिकता ही बदलावी लागेल. आपल्याला आपल्या कामाची गतीही बदलावी लागेल. जी कामे गेल्या पांच- सात दशकांत झाली नाहीत, ती आपल्याला आगामी पाच सात वर्षात करायची आहेत. आणि मला विश्वास आहे, माझ्या देशातील युवाशक्तीवर, माझ्या देशातील तरुणाईवर, माझ्या देशातील माता- भगिनींवर, माझ्या देशातील शेतकऱ्यांवर, कामगारांवर, की आपण सगळे मिळून हे स्वप्न साकार करू शकतो. आणि म्हणूनच, आपल्याला सुधारणांची गतीही वाढवावी लागणार आहे. आणि मी जेव्हा सुधारणांविषयी बोलतो, त्यावेळी हे लक्षात घ्या, की सुधारणा आपल्यासाठी काही बंधन नाहीत, आपल्यासाठी ती बळजबरी नाही, तर आपला तो दृढनिश्चय आहे. आपल्या दृढनिश्चयानेच आपण सुधारणांच्या एक्सप्रेसला गती दिली आहे आणि आगामी काळातही आपण पुढच्या दर्जाच्या सुधारणांकडे वळणार आहोत. आणि म्हणूनच सरकार, समाज, उद्योजक, उत्पादक, शेतकरी, प्रत्येकाने आपल्या पारंपरिक व्यवस्थेत सुधारणा करायच्या आहेत, आपल्या मानसिकतेत सुधारणा करायच्या आहेत. आपल्या उद्दिष्टांमध्ये सुधारणा करायच्या आहेत.

आणि म्हणूनच, माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

आपल्याला निश्चित दिशा घेऊन वाटचाल करावी लागेल. मी आज त्या युगाचेही स्मरण करू इच्छितो, जेव्हा भारताचे सामर्थ्य सप्त सिंधूच्या रूपात ओळखले जात असे. आपण ते ऐकले आहे, समजून घेतले आहे. आता विकसित भारत घडवण्यासाठी, आपल्याला नवी धारा हवी आहे. आज लाल किल्ल्याच्या या तटबंदी वरुन मी शक्तीच्या सात धारांचे आवाहन करतो. जी कामे गेल्या पाच -सात दशकांत झाली नाहीत, ती कामे, येणाऱ्या पाच- सात वर्षात आपल्याला सप्त धारांच्या सामर्थ्यतून, शक्तीतून, आपण देशाला नवी ऊंची देऊ, गती देऊ. आणि नवी उद्दिष्टे पार करणारे सामर्थ्य देऊ. आणि त्यासोबतच, देशाच्या युवा शक्तिच्या सांमर्थ्यांचाही पूर्ण उपयोग केला जाईल, त्यांची शक्ती या शक्तीशी जोडली जाईल. आणि म्हणूनच, येत्या काळात, जेव्हा मी सप्त धारांविषयी बोलतो, तेव्हा या सप्तधारेतली पहिली शक्ती आहे, आपली उत्पादन शक्ती !

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

आपल्याला उत्पादन क्षेत्राला खूप पुढे न्यायचे आहे. आणि उत्पादन वाढवण्यासोबतच आपल्याला, छोटे छोटे सुटे भागही बनवायचे आहेत आणि मोठ-मोठी यंत्रेही बनवायची आहेत, संपूर्ण मूल्य साखळी आपली असली पाहिजे. आपल्याला छोटे घटकही हवे आहेत, आणि संपूर्ण उत्पादनही करायचे आहे. डिझाईन पासून, उत्पादनापर्यंत, भारताला जागतिक मूल्य साखळीचे एक विश्वासार्ह केंद्र बनवायचे आहे. आणि त्यासाठी मी तीन गोष्टींवर विशेष भर देऊ इच्छितो.

संरचनेपासून उत्पादनापर्यंत प्रत्येक टप्प्यावर भारताला जागतिक पुरवठा साखळीचे विश्वसनीय केंद्र व्हावे लागेल. यासाठी मी तीन बाबींवर विशेष भर देऊ इच्छितो. उत्पादनाच्या क्षेत्रात माझे ज्या बंधू-भगिनी कार्यरत आहेत, त्यांना मी सांगेन की हा या काळाने दिलेली ही संधी आहे, ही संधी हातातून जाऊ देऊ नका. यासाठी आपल्याला किंमत, गुणवत्ता आणि प्रमाण यांच्या बाबतीत जागतिक मानकांची पूर्तता करावी लागेल. आपले कारखाने स्पर्धेला तोंड देणारे असावेत, आपली उत्पादने वापरकर्ता स्नेही असावीत, आपले पॅकेजिंग जगातील लोकांना, आवडणारे, आकर्षित करणारे असावे. आपल्या उत्पादनांमध्ये शून्य दोष आणि अचूकतेने केलेले उत्पादन ही आपली ओळख बनली पाहिजे. प्रत्येक उत्पादक, प्रत्येक उद्योजक आणि प्रत्येक एमएसएमई उद्योगाला मी असे सांगू इच्छितो की, विश्वसनीयता आणि गुणवत्तेच्या आधारावरच जागतिक बाजारात आपली ओळख निर्माण व्हायला हवी. गुणवत्तेच्या बाबतीत कोणतीही तडजोड नको. आणि म्हणूनच आपला मंत्र आहे गुणवत्ता, गुणवत्ता आणि केवळ गुणवत्ता. हेच आपला जागतिक आधारमूल्य असेल.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

या सप्तधारेतील दुसरी शक्ती आहे कृषी आणि अन्न उत्पादन तसेच अन्न प्रकिया. आपल्याला या संदर्भात आगेकूच करावी लागेल. आपल्या शेतकऱ्यांनी सांगेन की आता जगातील बाजारपेठा आपल्यासाठी खुल्या झाल्या आहेत, थेट परदेशी गुंतवणुकीमुळे जगभरातील बाजारपेठा आपल्यासाठी उपलब्ध आहेत.आपल्याला तिथपर्यंत पोहोचायचे आहे, आपल्याला त्या क्षेत्रात प्रवेश करायचा आहे. शेतापासून निर्यात बाजारापर्यंत आपल्याला वाटचाल करायची आहे. आपल्या खाण्यापिण्याच्या पारंपरिक पद्धती असोत, आपले मसाले असोत, आपली भरड धान्ये असोत, खाद्यान्न असो, आपल्याकडे कितीतरी गोष्टी आहेत, त्यांचे जागतिक ब्रँड्स बनले पाहिजेत. शेतकऱ्यांनी रसायनमुक्त शेती करण्यावर भर दिला पाहिजे, जगभरात त्यांना असलेली मागणी वाढत जाणार आहे. आपली उत्पादने जागतिक मानकांची पूर्तता करणारी असतील तर आपण सहजपणे ती जगभरात पोहोचवू शकू. माझ्या सप्तधारेतील तिसरी शक्ती आहे तंत्रज्ञान आणि नवोन्मेष.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

आजचा काळ कृत्रिम बुद्धिमत्तेचा आहे, क्वांटम तंत्रज्ञानाचा आहे, अवकाश तंत्रज्ञानाचा आहे, रोबोटिक्सचा आहे, डेटा सेंटर्सचा आहे, संपूर्णपणे नवी क्षेत्रे खुली झाली आहेत, आणि उदयोन्मुख तंत्रज्ञान हे क्षेत्र देखील आपल्यासाठी आव्हानात्मक ठरते आहे. आणि म्हणूनच आपल्या देशाला जगासाठी उपलब्ध बाजारपेठ बनायचे नाही तर आपल्याला नवोन्मेषाचे प्रमुख केंद्र व्हायचे आहे. आपण युपीआय आणि डिजिटल सार्वजनिक पायाभूत सुविधांच्या रुपात स्वतःची क्षमता दाखवून दिली आहे, आपल्या सामर्थ्याची जाणीव करून दिली आहे. आता भारताला डिजिटल सार्वजनिक तंत्रज्ञान जगाच्या कानाकोपऱ्यापर्यंत पोहोचवायचे आहे. भारताला पुढच्या पिढीतील संपर्क तंत्रज्ञानात आघाडी घ्यायची आहे. भारतात निर्मित 6 जी तंत्रज्ञान जगभरात सर्वत्र पोहोचवणे हे आपले लक्ष्य असले पाहिजे. आणि त्यासाठी आपण जलदगतीने काम केले पाहिजे, आपले प्रयत्न कमी पडता कामा नयेत.

सप्तधारेतील चौथी शक्ती आहे, गतिशक्ती. या गतिशक्तीसाठी, देशभरात सुरळीत संपर्क यंत्रणा निर्माण करण्यावर आपण भर द्यायला हवा. जलदगती रेल्वे सुविधेद्वारे शहरांना एकमेकांशी जोडले पाहिजे. आणि यासाठी आपल्याला आधुनिक महामार्ग हवेत, अंतर्गत जलमार्ग हवेत, विमानतळे हवीत, बहुपद्धतीय लॉजिस्टिक्सची यंत्रणा हवी. आपल्याला बंदरे म्हणजे केवळ माल चढवण्याच्या-उतरवण्याच्या जागा म्हणून नव्हे, जगभरातील जहाजांना नांगर टाकून थांबण्याची जागा म्हणून नव्हे तर आपल्याला बंदरांचा वापर करून विकास घडवून आणण्याच्या दिशेने काम केले पाहिजे.

आपली सप्तधारेतील पाचवी शक्ती आहे, संरक्षण सामर्थ्य. आणि या सामर्थ्याचे अनेक प्रकारे महत्त्व आहे. माझ्या प्रिय देशवासियांनो, संरक्षणाच्या क्षेत्रात आत्मनिर्भर होणे किती आवश्यक आहे याचा अनुभव आता भारताने घेतला आहे, आणि जगाने देखील घेतला आहे. हे साध्य करण्याशिवाय कोणताही पर्याय नाही, आणि यासाठी जगभरात सगळे स्वतःपुरता विचार करत असताना भारत जगभरासाठी बाजारपेठ म्हणून उपलब्ध राहू शकत नाही. आपल्याला संरक्षणाच्या क्षेत्रात आत्मनिर्भर व्हावे लागेल. अत्याधुनिक तंत्रज्ञान विकसित करून आपल्याला तंत्रज्ञानाचा जागतिक पुरवठादार होण्याचे उद्दिष्ट निश्चित करून त्या दिशेने काम करावे लागेल. आपल्याला ड्रोन आणि ड्रोन-विरोधी तंत्रज्ञान विकसित केले पाहिजे. तसेच हायपरसॉनिक संरक्षण तंत्रज्ञानाच्या क्षेत्रात आपल्याला आघाडी घ्यावी लागेल. मित्रांनो, सायबर सुरक्षितता देखील आज प्रत्येक घराची समस्या झाली आहे. आपल्या तरुणांसाठी ते देखील संरक्षणाचे एक असे क्षेत्र आहे ज्यामध्ये आपल्या सामर्थ्याचा वापर आपण देशासाठी आणि जगासाठी करून घेऊ शकतो.

आपल्या सप्तधारेतील सहावी शक्ती आहे, हरित अर्थव्यवस्था, नील अर्थव्यवस्था, जी हरित रोजगार निर्माण करते. आपल्याला हरित हायड्रोजन, नवीकरणीय उर्जा, उर्जा साठवण, हरित वाहतूक व्यवस्था, हरित उत्पादन यांच्या संदर्भात जागतिक व्यापक प्रमाण प्राप्त करायचे आहे. जग जेव्हा जागतिक तापमानवाढीची चर्चा करत असते तेव्हा आपण त्यावर उपाययोजना शोधत असतो, समस्यांचे निराकरण करण्याचे मार्ग शोधत असतो. आणि भारत या हरित अर्थव्यवस्थेच्या चळवळीसह वाटचाल करत आहे. भारताकडे नील अर्थव्यवस्थेसाठी देखील फार मोठ्या संधी आहेत. भारताकडे प्रचंड सागरकिनारी भाग आहे, नील अर्थव्यवस्थेसाठी मोठा वाव आहे, मत्स्योद्योग आहे, तटवर्ती पर्यटन आहे, महासागर तंत्रज्ञाने आहेत, अशी अनेक क्षेत्रे आहेत ज्यामध्ये आपण प्रगती करू शकतो.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

भारत जेव्हा सप्तधारेच्या संदर्भात व्यक्त होतो आहे तेव्हा याची सातवी धारा आहे, तिचे जगासाठी स्वतःचे एक वेगळे महत्त्व आहे, आणि ते म्हणजे भारताचे सूप्त सामर्थ्य. भारताच्या सूप्त सामर्थ्याचे महत्त्व वेगळे आहे. आज योगाने संपूर्ण जगाला भारताशी जोडले आहे. जगासाठी योग एक उर्जास्त्रोत होऊ लागला आहे, भारतावरील विश्वासाचे एक सबळ कारण होऊ लागला आहे. ज्या भारताकडे श्रद्धास्थाने आहेत, आयुर्वेदाचे ज्ञान आहे, ज्या पद्धतीने भारताकडे समग्र आरोग्यसुविधेची यंत्रणा आहे, ‘हील इन इंडिया’ ची चळवळ आहे, त्यांच्या बळावर आपण जगात आपल्या सामर्थ्यासह सादर होऊ शकतो. आपली हस्तकला असो, संस्कृती असो, आपले चित्रपट असोत, आपले सर्जन विश्व असो, व्हिएफएक्स असो, आपले अॅनिमेशन असो, गेमिंग असो, डिजिटल कार्यक्रम असो, सर्जनशील विश्वात भारत आपला दबदबा निर्माण करू शकतो. आपल्याला याला वैश्विक सामर्थ्याच्या रुपात विकसित करावे लागेल. आज भारताने वेव्हज समिटला फार मोठी ताकद मिळवून दिली आहे. संपूर्ण जग हळूहळू या जागतिक दृक्श्राव्य आणि मनोरंजन संमेलनाची प्रतीक्षा करू लागले आहे. आणि हे संमेलन भारताच्या सूप्त सामर्थ्याची, सर्जक विश्वाची जगाला ओळख करून देईल.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

भारताकडे एक प्रचंड वनसंपदा आहे. आपल्याकडे शंभराहून अधिक राष्ट्रीय उद्याने आहेत, क्षमता प्रचंड आहे, मात्र परदेशी पर्यटकांना आकर्षित करण्यात आपण कमी पडलो आहोत. आपल्याकडे सुप्त सामर्थ्याच्या माध्यमातून जगभरातील पर्यटकांना भारताकडे आकर्षित करण्याची संधी आहे. आपल्याला आपली ताकद जगाला दाखवून द्यायची आहे आणि आपण हे काम सहजपणे करू शकतो.

आज जगात क्रीडाक्षेत्राप्रती जो ओढा वाढला आहे तो देखील भारताप्रती आकर्षणाचे केंद्र झाला आहे. जगातील खेळ भारतात का नसावेत. कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था देखील वाढत आहे, जगातील प्रत्येक कलाकाराला आता असे वाटते की एकदातरी भारताच्या भूमीवर सादरीकरण करावे. ही एक फार मोठी संधी आहे. आपल्याला याचा लाभ घेण्यासाठी यंत्रणा उभाराव्या लागतील.

मित्रांनो, सप्तधारेतील या सात शक्तींचा. सप्तशक्तींचा उद्देश केवळ एकाच क्षेत्रात प्रगती करण्याचा नाही तर समग्र दृष्टीकोनासह आपल्याला आपल्या राष्ट्रासाठी जी लक्ष्य निश्चित करून चाललो आहोत, जी आकांक्षा बाळगून निघालो आहोत ती साध्य करण्याच्या दिशेने आपल्याला काम करायचे आहे.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

काही गोष्टी मी तुम्हाला सांगितल्या आहेत. पण मी याच्याही पुढे जाऊन विचार करतो आहे. मी जरा देशाला खडबडून जागे करू इच्छितो, देशाच्या सामर्थ्यांना देखील जागृत करू इच्छितो. देश म्हणजे केवळ सरकार नसते, देश म्हणजे प्रत्येक नागरिक असतो. की फॉर्च्युन 500 ची चर्चा तर आपण खूप करतो पण या फॉर्च्युन 500 मध्ये भारताच्या 50 कंपन्या असायला काय हरकत आहे असा विचार आपण करू शकत नाही का? ते आपले लक्ष्य असले पाहिजे.

मित्रांनो,

जगात बँकिंग क्षेत्र भरभराटीला येत आहे, अशा वेळी जगातील प्रमुख बँकांमध्ये भारतातील बँकांचा समावेश का होऊ नये?. जगातील प्रमुख पाच बँकांमध्ये भारतातील बँकेने स्थान मिळवले पाहिजे. भारतातील औषधनिर्मिती क्षेत्रात आपण खूप कार्य केले आहे.मात्र जगातील प्रमुख औषधनिर्मिती कंपन्यांच्या यादीत भारताच्या देखील एक दोन कंपन्यांचा समावेश असला पाहिजे, भारताने ते स्थान मिळवले पाहिजे. लॉ-फर्म्स आहेत, रेटिंग एजन्सी असतात. तर आता भारताने या क्षेत्रात जागतिक नेतृत्व केले पाहिजे ही आजच्या काळाची मागणी नव्हे काय..आपल्याकडे प्रतिभा आहे, सामर्थ्य आहे, आपला इतका प्रदीर्घ इतिहास आहे, भाषांवर आपले प्रभुत्व आहे. आपली एखादी कन्सल्टिंग कंपनी, अकाऊंटिंग कंपनी जगातील प्रमुख कंपन्यांमध्ये का नसावी? भारतातील तंत्रज्ञानविषयक कंपन्या जगात आघाडीवर असाव्यात हे आपले उद्दिष्ट असले पाहिजे. आपले निर्धार असे असले पाहिजेत ज्याकडे विश्व आकर्षित होईल, आपले निर्धार ही आपल्या देशाची ओळख असली पाहिजे, आणि जगासाठी ते एक विश्वसनीय स्थान असेल, त्या दिशेने आपल्याला काम करावे लागेल. आणि यासाठी मी राज्य सरकारांना सांगू इच्छितो की, स्थानिक स्वराज्य संस्थांना सांगू इच्छितो, आणि भारत सरकारची देखील ही जबाबदारी आहे की आपल्याला आपल्या सुधारणांचा वेग वाढवला पाहिजे. आपल्याला 2047 च्या आपल्या उद्दिष्टानुसार आपल्या यंत्रणा विकसित कराव्या लागतील. भूतकाळातील नीतीनियम येथे लागू होणार नाहीत तर आपल्याला आगामी काळातील स्वप्नांना लक्षात घेऊन चालावे लागेल. अशा प्रकारे जर आपण काम करू शकलो तर मला पूर्ण विश्वास आहे आणि मी देशवासियांना हा भरवसा देऊ इच्छितो की याच मार्गाने, मेहनतीमध्ये कोणतीही कसर न ठेवता आपण विकसित भारताचे स्वप्न पूर्ण करू शकतो.

आपल्याला सर्वांना सोबत घेऊन पुढे जायचे आहे, केंद्र सरकार, राज्य सरकारे, उद्योगक्षेत्र, असे आपण सर्वांनी मिळून काम करायचे आहे, सुधारणा घडवायच्या आहेत, सुधारणांसह प्रगती करायची आहे. आणि मी याआधी देखील सांगितले आहे की आम्ही सुधारणा जबरदस्ती करून नव्हे तर सर्वांना पटवून देऊन करतो आहोत.

माझ्या प्रिय देशवासियांनो,

जेव्हा मी विकसित भारताबद्दल बोलतो, देशाला जलदगतीने पुढे नेण्याविषयी बोलतो, तेव्हा याचा सर्वात मोठा लाभार्थी कोण आहे, सुधारणांचा लाभार्थी कोण आहे तर तो माझ्या देशातील युवावर्ग आहे, युवा शक्ती आहे. विकसित भारताच्या प्रवासात तरुणांची फार मोठी भूमिका आहे.इतकेच नव्हे तर विकसित भारताचा सर्वात मोठा लाभार्थी माझ्या देशातील तरुण आहे आणि म्हणूनच आपल्याला विकसित भारताचे उद्दिष्ट तरुणांशी जोडून घेऊन पुढे जायचे आहे. तरुणांना सर्वोच्च प्राधान्य मानून आपल्याला पुढे जायचे आहे.

मित्रांनो,

गेल्या दहा बारा वर्षांत या दिशेने खूप मोठे काम झाले आहे. स्टार्ट अप इंडिया अभियान, आज संपूर्ण देशात अडीच लाखांहून अधिक नोंदणीकृत स्टार्ट अप उद्योग उभारले आहेत. देशातील तरुण स्वतः तर काम करत आहेतच, इतरांना देखील रोजगार देत आहेत. भारत सरकारने 1 लाख कोटी रुपयांचा नवोन्मेष निधी जाहीर केला आहे. मी देशातील तरुणांना सांगू इच्छितो की तुम्ही तुमची स्वप्ने घेऊन या, साधनसंपत्तीची टंचाई भासू देणार नाही, 1 लाख कोटी रुपये वापरून तुमच्या स्वप्नांना ताकद देण्याची यंत्रणा आम्ही उभारली आहे. संशोधनाच्या क्षेत्रात नव्या संधी निर्माण होत आहेत, डिजिटल इंडियामुळे किफायतशीर दरात डेटा उपलब्ध झाला आहे, ज्याने तरुणांना सक्षम केले आहे. जगभरात सर्वात स्वस्त दरातील डेटा आज भारतात उपलब्ध आहे.देशातील तरुणांना यामुळे नवी ताकद मिळाली आहे.

स्किल इंडिया हा राष्ट्रीय कार्यक्रम आम्ही तयार केला आहे. अवकाश क्षेत्र आम्ही खुले केले आहे.आम्ही राष्ट्रीय ड्रोन नीती तयार केली आहे.खेलो इंडिया धोरण तयार केले आहे, गेल्या 35 वर्षात नवे शैक्षणिक धोरण आणले नव्हते ते आम्ही घेऊन आलो आहोत. याचा लाभ मध्यमवर्गीय कुटुंबांना झाला आहे. मित्रांनो, 2004 ते 2014 या काळातील आकडेवारी मी तुमच्यासमोर मांडू इच्छितो. या काळात देशात 350पेक्षा देखील कमी विद्यापीठे होती. आणि आज दहा बारा वर्षानंतर 650 नवी विद्यापीठे स्थापन झाली आहेत, ही संख्या आता 2000पर्यंत पोहोचते आहे. 2014 पूर्वी वैद्यकीय अभ्यासक्रमासाठी केवळ चारशे जागा उपलब्ध होत्या ती संख्या आता 800 वर पोहोचली आहे. इतकेच नव्हे तर, आता परदेशी विद्यापीठे देखील भारताच्या भूमीवर आली आहेत, आज देशातच परदेशी विद्यापीठाची पदवी आपल्या तरुणांना मिळेल याची व्यवस्था करण्यात आली आहे.

आपल्या देशातील मुले तंत्रज्ञानाकडे लहान वयातच आकर्षित व्हावी या दिशेने आम्ही काम करत आहोत. आणि यासाठी आम्ही 10 हजारांहून अधिक अटल टिंकरिंग प्रयोगशाळा लहान लहान मुलांसाठी उपलब्ध करून दिल्या आहेत, जेणेकरून नवोन्मेष आणि तंत्रज्ञानामध्ये या लहान मुलांची रुची वाढेल.आम्ही अनेक मार्ग शोधले, आम्ही खासगी स्टार्ट अप क्षेत्र खुले केले तुम्ही पाहिले असेल. 28 वर्षांच्या तरुणांनी पहिल्या प्रयत्नातच जगातील पहिला खासगी उपग्रह प्रक्षेपित केला. हे फार मोठे कार्य झाले. आज सुमारे अडीच लाखांहून अधिक नोंदणीकृत स्टार्ट अप उद्योग आहेत. आम्ही गेल्या काही दिवसांत एआय संमेलन भरवले. एआय क्षेत्राचा विस्तार वेगाने होतो आहे. लाल किल्ल्यावरून बोलताना मी तरुणांसाठी एक घोषणा करू इच्छितो, येत्या एका वर्षात एक कोटी युवकांना एआय प्रशिक्षण देणार आहोत, ज्यामुळे आपल्या देशाचा तरुण एआयच्या क्षेत्रात जगाचे नेतृत्व करण्याचे सामर्थ्य मिळवू शकेल.

माझ्या मित्रांनो,

जैवअर्थव्यवस्था एक नवे क्षेत्र आहे. 2014 पूर्वी एक काळ असा होता जेव्हा केवळ साठ हजार कोटी रुपये मूल्याचे जैवअर्थव्यवस्थेचे काम होत असे. माझ्या तरुणांनी काय कमाल केली आहे, बघा जेव्हा नीती स्वच्छ असतात, लक्ष्य स्पष्ट असते, तेव्हा माझ्या तरुणांनी जैवअर्थव्यवस्थेचे मूल्य 20 लाख कोटी रुपयांवर नेऊन ठेवले. 2009-10 च्या काळात केवळ दीड लाख इलेक्ट्रिक वाहने आपल्या देशात विकली गेली होती. 2025-26 मध्ये 25 लाख इलेक्ट्रिक वाहने विकली गेली आहेत.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

माझ्या तरुणांसाठी विमान वाहतूक क्षेत्रही अतिशय वेगाने पुढे जात आहे. नवीन विमानतळ, नवीन मार्ग, नवनवीन रोजगाराच्या संधी निर्माण होत आहेत. देखभाल, दुरुस्ती आणि ओव्हरहॉलिंगमुळेही देशात मोठ्या प्रमाणावर कुशल मनुष्यबळाला काम मिळत आहे. मेड इन इंडिया विमाने बनवण्याच्या दिशेने आपण यश मिळवले आहे. मेड इन इंडिया डिफेन्स ट्रान्सपोर्ट एअरक्राफ्ट C-295 ने आधीच आपले उड्डाण केले आहे, यशस्वी उड्डाण केले आहे.

माझ्या सहकाऱ्यांनो,

देशातील तरुणांसाठी ड्रोननेही खूप मोठे काम केले आहे. स्वामित्व योजना, गावांमध्ये ड्रोनच्या माध्यमातून स्वामित्व योजना यशस्वी होत आहे. सुमारे सव्वा तीन कोटी कुटुंबांना स्वामित्व योजनेचा लाभ मिळाला आहे आणि त्यामुळे 140 लाख कोटी रुपयांएवढी संपत्ती अनलॉक झाली आहे. ज्यामुळे त्यांना बँकेकडून कर्ज मिळू शकते. लोक आपला व्यवसाय करू शकतात.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

आपल्या मध्यमवर्गीय कुटुंबांच्या डोक्यावर एक मोठे ओझे ठरले आहे, ते म्हणजे, कोचिंग क्लासेसची स्पर्धा. ही स्पर्धा अशी आहे की प्रत्येक आई-वडिलांना वाटते की मुलाला कोचिंग क्लासमध्ये पाठवले नाही, तर आपण प्रतिष्ठित कुटुंब नाही. या गरीब आणि मध्यमवर्गीय कुटुंबांची चिंता करताना त्यांचा हजारो कोटी रुपयांचा खर्च होतो, तो खर्चही वाचावा, मुलेही आपल्या आसपास राहू शकावीत, त्यांची काळजी घेता येऊ शकेल, कुटुंबावर आर्थिक भार पडू नये यासाठी, आम्ही तरुणांसाठी विविध स्पर्धा परीक्षांचे मोफत ऑनलाइन कोचिंग सुरू करण्याचा निर्णय घेतला आहे. आपल्याकडे सार्वजनिक डिजिटल पायाभूत सुविधा आहेत. आपल्याकडे उत्तम गुणवत्ता आहे, शिक्षक आहेत. या सर्व संसाधनांना एकत्र जोडून देशातील तरुणांना मोफत कोचिंग व्यवस्था देण्यासाठी एक संपूर्ण नेटवर्क उभारणार आहोत.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

मी नेहमी म्हणत आलो आहे, जो खेळेल तो विकसित होईल, फुलेल. जेव्हा मी खेळाबद्दल बोलत आहे, तेव्हा माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज भारत क्रीडा जगतात आपले स्थान निर्माण करत आहे. आता क्रीडा स्पर्धांच्या पोडियमवर भारताचे राष्ट्रगीत ऐकू येते. भारताचे राष्ट्रगान ऐकू येते. भारताचा तिरंगा फडकताना दिसतो. टॉप्स योजनेने मोठे यश मिळवले आहे. खेलो इंडिया क्रीडा स्पर्धा, विद्यापीठ स्पर्धा, हिवाळी क्रीडा स्पर्धा, सागर किनारी क्रीडा स्पर्धा, क्रीडा पायाभूत सुविधा, खेळांसाठी प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स मेडिसिन, खेळांसाठी पोषण—या सर्व विषयांमध्ये भारत आता प्रावीण्य मिळवण्याच्या दिशेने पुढे जात आहे. तरुणांसाठी एक संपूर्ण नवे क्षेत्र खुले होत आहे. खेळाडू बनता आले नाही, तरी त्याला पाठबळ देण्यासाठी मोठे क्षेत्र खुले होत आहे. क्रीडा जगतात भारताची कामगिरी सातत्याने सुधारत आहे आणि आपण 2036 मध्ये ऑलिम्पिक स्पर्धांचे मजबूत दावेदार म्हणून पुढे जात आहोत आणि 2030 मध्ये भारतात राष्ट्रकुल क्रीडा स्पर्धेचे आयोजन आपण करणार आहोत.

आणि माझ्या सहकाऱ्यांनो,

जगात ऑलिम्पिकमध्ये सुमारे 40 प्रकारचे खेळ असतात आणि ऑलिम्पिकमध्ये सुमारे सव्वा तीनशे ते साडेतीनशे असतात. आणि तुम्हाला हे जाणून वाईट वाटेल, माझ्या देशबांधवांनो, माझ्या तरुणांनो, मी तुम्हाला आव्हान देतो, मी आवाहन करतो, मला तुमची मदत हवी आहे. सव्वा तीनशे स्पर्धांपैकी भारत दोन तृतीयांश खेळांमध्ये कुठेच नसतो. आपली उपस्थिती पण नसते. आपण पात्र ठरत नाही. आता मात्र आम्ही ठरवले आहे की 2036 मध्ये जी ऑलिंपिक स्पर्धा होणार, ती भारतात व्हावी, अशी आमची इच्छा आहे. पण 2036 मध्ये ज्या क्रीडा प्रकारांमध्ये आज भारत खेळत नाही, ज्या प्रकारांमध्ये भारत पात्र ठरत नाही, ज्या स्पर्धा भारताने सोडून दिल्या आहेत, त्यातील तीन चतुर्थांश भाग आपली वाट पाहत आहे. भारत त्यावर भर देईल आणि यासाठी आम्ही गुणवत्ता शोधाचे एक अभियानही चालवू इच्छितो.

आम्हाला जर 2036 साठी खेळाडू हवे असतील, तर आज पाच वर्षे, 10 वर्षे, 15 वर्षे वयाची जी मुले आहेत, त्यांच्याकडे लक्ष द्यावे लागेल. त्या मुलींकडेही लक्ष द्यावे लागेल. आणि म्हणूनच 5 ते 15 वर्षे वयोगटातील मुलांमध्ये क्रीडा नैपुण्य शोधण्यासाठी गावोगावी, शहरोशहरी, शाळाशाळांमध्ये टॅलेंट हंटचे अभियान राबवले जाईल. मुलांची प्रतिभा पाहिली जाईल आणि त्यानंतर त्यांना विशेष प्रशिक्षण देऊन त्यातून देशासाठी खेळणारे चांगले खेळाडू तयार केले जातील.

माझ्या प्रिय युवा मित्रांनो,

देशासमोर, देशातील तरुणांसमोर अमली पदार्थांचे व्यसन हे एक मोठे संकट बनत चालले आहे. नशामुक्त भारत ही आपल्या सर्वांची सामूहिक जबाबदारी असली पाहिजे. आपल्या उज्ज्वल भविष्यासाठी आपली युवा पिढी सक्षम झाली पाहिजे. आपल्या युवा सामर्थ्याचा उपयोग आपल्या देशासाठी झाला पाहिजे. म्हणून नशामुक्त भारतासाठी, गेल्या काही दिवसांत, माय भारतचे स्वयंसेवक, देशातील स्वयंसेवी संस्था, सामाजिक-सांस्कृतिक संघटना आणि देशातील आध्यात्मिक गुरूंनी एकत्र येऊन नशामुक्त भारताचा, 100 सप्ताहांचा एक कार्यक्रम निश्चित केला आहे. 100 आठवडे चालणारे हे अभियान असणार आहे. मी प्रत्येक कुटुंबाला सांगू इच्छितो की तुम्हीही या अभियानाचा भाग बना.त्यात सहभागी व्हा आणि नशामुक्त भारताचे स्वप्न पूर्ण करण्यासाठी पुढे या.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो

दशकांपासून असलेल्या ज्या आव्हानांचा सामना आपण करत आहोत, ती आव्हाने आता एकविसाव्या शतकात संपवणे अत्यंत आवश्यक आहे. नक्षलवाद, माओवादाने लाखो तरुणांचे भविष्य उद्ध्वस्त केले. अनेक मातांच्या कुशीतले त्यांचे तरुण पुत्र हिरावून घेतले, त्यांना उद्ध्वस्त केले. प्रत्येक आई-वडिलांची स्वप्ने चिरडून टाकली. या नक्षलवादाने चार-चार दशकांपर्यंत हिंदुस्थानच्या मोठ्या भागाला, मोठ्या लोकसंख्येला आपल्या ताब्यात ठेवले होते. बंदुकीच्या जोरावर त्यांच्यावर दडपशाही केली . संविधानाची संपूर्ण पायमल्ली केली होती. देशातील सामान्य नागरिकांच्या रक्षणासाठी 3,000 हून अधिक आमचे पोलीस आणि सुरक्षा दलाचे जवान शहीद झाले. युद्धात जितके सैनिक मृत्युमुखी पडतात, त्यापेक्षा अधिक आमच्या पोलीस जवानांना देशातील सामान्य माणसाला सुरक्षा मिळावी यासाठी आपल्या प्राणांची बाजी लावावी लागली. या नक्षलवादाने सगळी भूमी रक्तबंबाळ केली होती.

2014 मध्ये तुम्ही आम्हाला संधी दिली, त्याच दिवशी आम्ही संकल्प केला होता की देशाला नक्षलवादापासून मुक्त करू आणि आज मला आनंद आहे की नक्षली-माओवादी हिंसा आता आपल्या शेवटच्या घटका मोजत आहे. आता तिच्यात तग धरण्याची ताकद उरलेली नाही. ती पूर्णपणे संपवण्याच्या दिशेने आपण पुढे जात आहोत. ज्या ठिकाणी कधी नक्षलवाद्यांच्या गोळ्या चालत होत्या, जी भूमी कधी रक्तरंजित राहत असे, आज त्याच नक्षलग्रस्त भागांमध्ये, त्याच परिसरांमध्ये नक्षलमुक्त झाल्यामुळे विकास, विश्वास आणि प्रयत्नांचा तिरंगा फडकत आहे.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

पण या आव्हानाला आपण आजही कमी लेखू शकत नाही. या आव्हानाबाबत आपल्याला आणखी सावध राहण्याची गरज आहे. अनेक वर्षे देशाच्या सत्तेत माओवादी विचारांचे लोक सत्तेच्या विविध स्थानांवर आपले स्थान निर्माण करून बसले होते. सरकारी समित्यांमध्ये सल्लागार म्हणूनही या माओवादी विचारसरणीने सरकारच्या धोरणांवर प्रभाव टाकला होता.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,

जंगलांमध्ये आम्हाला सशस्त्र नक्षलवाद्यांचा खात्मा करण्यात, त्या संकटापासून देशाला मुक्त करण्यात यश मिळाले आहे. मात्र शस्त्रधारी नक्षलवादी आता शिल्लक राहिले नसले तरी पण बुद्धीवर नक्षलवादाचा पगडा असलेले, नक्षलीबुद्धीचे अशा संधीच्या शोधात आहेत ज्यानं समाज हिंसा, अराजकतेचा मार्ग चोखाळेल, यासाठी ते हर तऱ्हेनं प्रयत्न करत आहेत. हे नक्षली विचारांचे लोक ओळखले पाहिजेत; अशा नक्षली विचारांच्या लोकांना बाजूला करावं लागेल आणि देशाला विकसित राष्ट्र बनविण्याच्या मुख्य ध्येयाच्या दिशेने देशातील युवा पिढीला सहभागी करून घ्यावं लागेल.

माझ्या प्रिय देशवासीयांनो,

सुरक्षित भारत बनवणं, हे आपलं सर्वांचं दायित्व आहे. आव्हान आपल्या देशामधलं असो की सीमेच्या पलीकडचं, कोणत्याही स्थितीला तोंड देण्यासाठी भारत तयार आहे. आज युद्धाचं स्वरुप बदलत आहे. आज युद्ध सीमेवरच लढलं जाईल, अशी खात्री देता येत नाही, ते कधी सीमेच्या आत, कुठे तेलशुद्धीकरण केंद्रावर, कुठे बँकिंग क्षेत्रावर, कुठे डेटा सेंटरवर जाऊन, एकप्रकारे युद्धाचं नवीन स्वरुप पायाभूत सुविधा तोडून टाकत आहे. आम्ही गेल्यावर्षी मिशन सुदर्शन चक्रची घोषणा केली होती. त्याबाबत अत्यंत वेगानं काम सुरू आहे. आज संरक्षण निर्यात जवळपास 50 टक्क्यांनी वाढली आहे. सुमारे 100 देशांमध्ये आपल्या देशात तयार झालेली शस्त्रास्त्रे पोहोचत आहेत. जागतिक पटलावर भारताची प्रतिमा हळूहळू उंचावत आहे. बदलत्या काळानुसार आपल्याला अस्त्र-शस्त्राप्रमाणे काम करायचं आहे. सैन्यदलांचं सामर्थ्य वाढवायचं आहे, पण त्याचबरोबर नागरिकांनाही सज्ज बनवायचं आहे. मागील शतकानुरुप नागरी संरक्षणाची जी व्यवस्था विकसित झाली होती, ती आता कालबाह्य झाली आहे, आणि म्हणूनच आज मी लाल किल्यावरून घोषणा करतो की येत्या काही दिवसात नागरी संरक्षणासाठी एक ‘व्हायब्रंट नेटवर्क’ तयार करू. त्याला आधुनिक संरक्षण व्यवस्थांची ओळख करून देऊ. आधुनिक संकटांपासून नागरिकांचं रक्षण करण्याची व्यवस्था होऊ शकेल असं, आधुनिक काळातील आव्हानांवर मात करू शकेल असं, खूप मोठं आधुनिक स्वयंसेवी दल आम्ही तयार करणार आहोत.

माझ्या प्रिय देशवासीयांनो,

राष्ट्र उभारणीच्या कार्यातील आपल्या भगिनींचं-मुलींचं योगदान ही मोठी प्रेरणादायी बाब बनली आहे. फायटर जेट असो वा नागरी विमान वाहतूक आपल्या मुली सर्वात पुढे दिसत आहेत. खेळाचं मैदान असो, आपल्या मुली पुढे आहेत. विज्ञान -तंत्रज्ञान-गणित (स्टेम) क्षेत्रातील शिक्षणासाठी प्रवेश घेण्यातही आपल्या मुली सर्वात पुढे असल्याचं दिसत आहे. आज सैन्यातही, ज्या मुली एनडीएतून शिक्षण घेऊन बाहेर पडल्या आहेत, त्या अत्यंत आत्मविश्वासानं सैन्यात नेतृत्व करण्याचं सामर्थ्य दाखवून देऊ लागल्या आहेत. आपल्या मुलींमध्ये केवढी शक्ती आहे. मागील काही दिवसांपूर्वी मी साहरनमध्ये एका सेमीकंडक्टर प्रकल्पात गेलो होतो. तिथे देशाच्या कानाकोपऱ्यातल्या आदिवासी भागातून आलेल्या मुली काम करत होत्या. जिथे पासपोर्ट काय असतो, याचीही कुणाला माहिती नाही, अशा गावांमधल्या होत्या, त्या मुली परदेशात गेल्या, तिथे त्यांनी प्रशिक्षण घेतलं आणि आज त्या ‘चिप’ तयार करण्याचं काम अत्यंत आत्मविश्वासानं करत आहे, मी त्यांचा आत्मविश्वास पाहून खरोखर मी खूप प्रभावित झालो.

आज तीन कोटी भगिनींना लखपती दीदी बनवण्याचं आम्ही जे उद्दीष्ट ठरवलं होतं, ते पार केलेलं आहे. आता आम्ही सहा कोटी महिलांना लखपती दीदी बनवण्याचं ध्येय गाठण्याच्या दिशेनं प्रगती करत आहोत. तीन कोटी नवीन लखपती दीदी तयार होणं म्हणजे ग्रामीण अर्थव्यवस्थेत मातृशक्तीच्या रुपानं मोठा बदल घडून येणार आहे.

माझ्या प्रिय देशवासीयांनो,

आज पंचायतींमध्ये, नगरपालिकांमध्ये, महानगरपालिकांमध्ये लोकप्रतिनिधी या नात्यानं महिला खूप मोठ्या संख्येनं देशाला मार्ग दाखवत आहेत. समस्यांवर उपाय शोधत आहेत, अत्यंत सक्षम नेतृत्व देत आहेत, हीच बाब लक्षात घेऊन आम्ही संसदेत नारी शक्ती वंदन अधिनियम विधेयक मंजूर केलं होतं; पण काही ना काही कारणांमुळे राजकारणाच्या आखाड्यात चाळीस वर्षांपासून कायम हे स्वप्न राजकीय डावपेचांचा बळी ठरत आलं आहे. आज मी देशातल्या सर्व राजकीय पक्षांना लाल किल्ल्याच्या या तटबंदीवरून, फडकणाऱ्या तिरंग्याच्या साक्षीनं आवाहन करतो, आग्रहपूर्वक सांगतो की चला, आपल्या माता भगिनींना विधानसभेत आणि लोकसभेत लवकरात लवकर 33 टक्के प्रतिनिधीत्व मिळावं, धोरण निर्मितीत त्यांना योगदान देता यावं, यासाठी त्या महिलांच्या सामर्थ्याचे पुजारी व्हा, त्या महिलांचा सन्मान करण्यासाठी पुढे या. ही काळाची गरज आहे. मी सगळ्या राजकीय पक्षांना आवाहन करतो की महिलांना आरक्षण मिळवून देऊन त्यांचा सन्मान करण्यात तुम्हीही सहभागी व्हा, तुम्हीही या यशाचं श्रेय घ्या आणि माता भगिनींना त्यांचा हक्क द्या.

माझ्या प्रिय देशवासीयांनो,

विकसित भारताचा संकल्प तेव्हाच पूर्ण होईल, जेव्हा विकास अगदी शेवटच्या व्यक्तीपर्यंत पोहोचेल. 2014 पूर्वी केवळ 25 कोटी लोकांना सामाजिक सुरक्षेचं कवच होतं. फक्त 25 कोटी लोकांना. मित्रांनो, गेल्या पाच-सात दशकांमध्ये फक्त 25 कोटी. आम्ही केवळ एका दशकाच्या आत शंभर कोटी नागरिकांना सामाजिक सुरक्षेचं कवच दिलं आहे. आयुष्मान भारत योजनेअंतर्गत 70 वर्षांहून अधिक वयाच्या ज्येष्ठ नागरिकांनाही पाच लाख रुपयांचे औषधोपचार मोफत मिळण्याची सोय उपलब्ध झाली आहे. कोट्यावधी लोकांची यामुळे खूप मोठी सोय झाली आहे, आणि या आयुष्मान कार्डामुळे जी गरीब कुटुंबं होती, मध्यमवर्गीय कुटुंबं होती त्यांच्या औषधं, शस्त्रक्रिया यावर होणाऱ्या दोन लाख कोटी रुपयांच्या खर्चात बचत झाली आहे. आज मला एका कामासाठी तुमची मदत हवी आहे. मी तुम्हा सर्वांकडून एक मदत मागतो आहे. सर्व तरुणांनो तुम्ही या गोष्टीचं नेतृत्व करावं, अशी माझी इच्छा आहे. तुमचा एक ते दोन तासांचा वेळ देशाला खूप मोठी शक्ती देणारा असेल. तुम्हाला वाटेल की एक-दोन तासांत मी काय शक्ती देणार, पण मी सांगतो की तुम्ही खूप मोठी शक्ती देणार आहात आणि त्यासाठी प्रत्येक घरात तसं वातावरण तयार झालं पाहिजे. सध्या काही दिवसांपासून जनगणनेचं काम सुरू आहे. विविध गोष्टींची मोजदाद केली जात आहे. आणि ही मोजणी केवळ आकड्यांमध्ये होऊन चालत नाही. त्यातल्या बारीक सारीक तपशीलांच्या आधारे धोरणं तयार केली जातात, योजनांची आखणी होते. देशाला पुढे नेण्यासाठीची रुपरेषा तयार केली जाते; आणि यासाठी परिपूर्ण माहिती उपलब्ध असणे आवश्यक असते. कधी कधी सरकारच्यावतीने जे प्रतिनिधी येतात, ते इतके घाईत असतात की ते कधी एक स्पेलिंग भलतंच लिहितात किंवा वेगळंच काही तरी लिहून ठेवतात आणि यामुळे अपेक्षित स्वरुपात अंतिम परिणाम दिसून येण्यात अडचणी येतात. आता जर तंत्रज्ञान उपलब्ध झालेलं आहे आणि यावेळी निर्णय झालेला आहे तर तुम्ही स्वतः देखील आपली माहिती मोबाईल फोनच्या माध्यमातून भरून देऊ शकता. त्यानंतर कुणी सरकारी कर्मचारी, प्रतिनिधी येतील, तुमच्याशी चर्चा करतील. तरी पण कुटुंबातील तुम्ही सर्वजण एकत्र बसून सर्व बारीकसारीक तपशीलात, स्पेलिंगमध्येही कोणती चूक राहू न देता आपली सगळी माहिती डिजिटली जितक्या अचूकपणे नोंदवाल तितकी देशाला पुढे जाण्यात मोठी मदत होईल. यासाठी मी देशातील तरुणांना सांगू इच्छितो की, तुम्ही आपल्या कुटुंबातील सर्व सदस्यांना एकत्र बसवून पूर्ण फॉर्म नीट समजून घ्या, अगोदर कागदावर ती माहिती लिहून काढा. कुठे चूक असेल तर ती दुरुस्त करून घ्या आणि त्यानंतर ती सगळी माहिती डिजिटली अपलोड करा. तुम्ही पहाल की देशाचं किती महत्त्वाचं काम होईल, देशाचा वेळ आणि ऊर्जा योग्य कामासाठी वापरली जाईल. यासाठी देशातील तरुणांना जनगणनेच्या या कामाशी अशाप्रकारे स्वतःला सक्रियपणे जोडून घेण्याचं मी आग्रहपूर्वक आवाहन करतो. या लाल किल्ल्यावरून मी याच दिवशी पंच प्रण (प्रतिज्ञा)ची चर्चा केली होती. या पंचप्रणांनी देशाला आपल्या आत्मगौरव बाळगून आपले लक्ष्य पार करण्याचे सामर्थ्य प्राप्त करून पुढे जाण्यास खूप मोठं बळ दिलं आहे. आपल्याला गुलामगिरीच्या खुणा यापुढेही पुसून टाकत राहायचं आहे. नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांनी जशा भारताचं स्वप्न पाहिलं होतं, जसं बाबासाहेब आंबेडकरांनी पाहिलं होतं, पंडित नेहरुंनी पाहिलं होतं, सरदार पटेल, भगतसिंग, सुखदेव, राजगुरू यांनी पाहिलं होतं, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जींनी पाहिलं होतं, भगवान बिरसा मुंडांनी पाहिलं होतं, जोतिबा फुलेंनी पाहिलं होतं, त्या सर्वांपासून प्रेरणा घेऊन आपण पुढे वाटचाल करण्यासाठी आपण पुन्हा नव्यानं त्या संकल्पाचा पुनरुच्चार करूया. स्वतःपेक्षा राष्ट्रहिताला प्राधान्य आणि कर्तव्य ही आपली ओळख असावी, मी सर्व देशवासीयांना सांगेन की ही वेळ आपली आहे. स्वप्नांना ध्येय बनवा आणि सामर्थ्याचं यशात रुपांतर करा. चला, प्रत्येक पाऊल हे विकासाचं पाऊल बनवूया, सर्वांनी एकमेकांच्या साथीने वाटचाल करूया, सर्वांची मने जुळलेली असावीत, सगळ्यांनी आपल्या ध्येयाला धरून असावे, एका दिव्याने हजारो दीप उजळले जावेत. चला सर्वांनी मिळवून विकसित भारत घडवूया. याच भावनेसह या मंगल पर्वाच्या आपल्या सर्वांना खूप खूप शुभेच्छा

माझ्यासोबत म्हणा,

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

खूप-खूप आभार!