नव्या वैद्यकीय महाविद्यालयांमुळे एमबीबीएसच्या सुमारे 1450 जागा वाढणार; संपूर्ण देशामध्ये आरोग्य विषयक पायाभूत सुविधांमध्ये सुधारणा घडवून आणण्यासाठी पंतप्रधानांनी सुरू केलेल्या प्रयत्नांचा भाग
केंद्र सरकारव्दारे वित्तपोषित केंद्रीय प्राचीन तमिळ संस्थेची नवीन वास्तू प्राचीन तमिळ भाषेचे संरक्षण तसेच संवर्धन करण्यासाठी महत्वपूर्ण भूमिका निभावणार
भारतीय वारसा सुरक्षित ठेवून, त्याचे संरक्षण तसेच प्राचीन भाषांच्या संवर्धनाला प्रोत्साहन देण्याच्या पंतप्रधानांच्या दृष्टिकोणातून कार्य

पंतप्रधान नरेंद्र मोदी, दि. 12 जानेवारी, 2022 रोजी सायंकाळी 4.00 वाजता दूरदृश्य प्रणालीच्या माध्यमातून तामिळनाडूमधल्या 11 नवीन सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालयांचे आणि चेन्नईच्या केंद्रीय प्राचीन तमिळ संस्थेच्या नवीन वास्तूचे उद्घाटन करणार आहेत.

नवीन वैद्यकीय महाविद्यालयांच्या स्थापनेसाठी अंदाजे 4,000 कोटी रूपये खर्च आला आहे. यापैकी जवळपास 2,145 कोटी रूपये केंद्र सरकारने आणि उर्वरित निधी तामिळनाडू सरकारने खर्च केला आहे. तामिळनाडूमधल्या विरूधुनगर, नमक्कल, नीलगिरी, तिरूपूर, तिरूवल्लूर, नागपट्टिनम, डिंडीगुल, कल्लाकुरिची, अरियालूर, रामनाथपुरम आणि कृष्णागिरी या जिल्ह्यांमध्ये नवीन वैद्यकीय महाविद्यालये सुरू करण्यात येत आहेत.  देशाच्या सर्व भागांमध्ये स्वस्त वैद्यकीय शिक्षण मिळावे, यासाठी प्रोत्साहन देणे आणि आरोग्यविषयक पायाभूत सुविधांमध्ये सुधारणा घडवून आणण्यासाठी पंतप्रधानांनी सातत्याने प्रयत्न सुरू ठेवले आहेत. त्यानुसार वैद्यकीय महाविद्यालयांची स्थापना करण्यात येत आहे. केंद्राने प्रायोजित केलेल्या - उपलब्ध जिल्हा/ रेफरल रूग्णालयाशी संलग्न ही नवीन वैद्यकीय महाविद्यालये स्थापन करण्यात  येत आहेत. यामध्ये वैद्यकीय विभागाच्या एकूण 1450 नवीन वाढणार आहेत. या योजनेअंतर्गत ज्या जिल्ह्यांमध्ये सरकारी अथवा खाजगी संस्था संचलित एकही वैद्यकीय महाविद्यालय नाही, अशा जिल्ह्यांमध्ये वैद्यकीय महाविद्यालये सुरू करण्यात येत आहेत.

भारताचा समृद्ध वारसा सुरक्षित रहावा, त्याचे संवर्धन, संरक्षण करावे आणि प्राचीन भाषेला प्रोत्साहन दिले जावे,  पंतप्रधानांच्या या दृष्टिकोणातून चेन्नई येथे केंद्रीय प्राचीन तमिळ संस्थेची  (सीआयसीटी)  एका नवीन वास्तू मध्ये स्थापना करण्यात येत आहे. या नवीन परिसरासाठी संपूर्णपणे केंद्र सरकारने निधी दिला आहे. या केंद्राच्या उभारणीसाठी 24 कोटी खर्च झाले आहेत. आत्तापर्यंत प्राचीन तमिळ संस्थेचे काम एका भाडेतत्वावर घेतलेल्या भवनामधून केले जात होते. आता सीआयसीटीचे काम नवीन तीन मजली इमारतीमधून होणार आहे. नवीन वास्तूचा  परिसर भव्य ग्रंथालय, एक ई- लायब्ररी, सेमिनार सभागृह आणि एक मल्टीमिडीया सभागृह यांनी सुसज्ज आहे.

केंद्रीय शिक्षण मंत्रालयाअंतर्गत एक स्वायत्त संघटना असलेली ही सीआयसीटी, तमिळ भाषेची प्राचीनता आणि या भाषेचे वैशिष्ट स्थापन करण्यासाठी वेगवेगळया शोध कार्यांच्या मदतीने योगदान देत आहे. संस्थेच्या ग्रंथालयामध्ये 45,000 पेक्षा जास्त प्राचीन तमिळ पुस्तकांचा एक समृद्ध संग्रह आहे. विद्यार्थ्यांना पाठिंबा देण्यासाठी संस्थेच्या वतीने चर्चासत्र आणि प्रशिक्षण कार्यक्रमाचे आयोजन केले जाते,तसेच पाठ्यवृत्ती प्रदान  करण्यासारखे विविध शैक्षणिक उपक्रमांचे आयोजन केले जाते. याचा उद्देश वेगवेगळ्या भारतीयांबरोबरच 100 परदेशी भाषांमध्ये ‘तिरूक्कुरल’ यांच्या साहित्याचा अनुवाद आणि प्रकाशन करण्याचा आहे. नवीन वास्तू- परिसर संपर्ण दुनियेतल्या प्राचीन तमिळला प्रोत्साहन देण्यासाठी आणि  या संस्थेमार्फत केल्या जाणा-या प्रयत्नांमुळे एक प्रभावी, कार्यशील वातावरण निर्माण करण्यास मदत करेल.

 

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July 11, 2026

Your Excellency, Prime Minister क्रिस्टोफर लक्सन,

दोनों देशों के delegates,

नमस्कार!

किया ओरा!

मेरे और मेरे delegation के ऊष्मा भरे स्वागत और आतिथ्य के लिए मैं मेरे मित्र प्रधानमंत्री लक्सन का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। उन्होंने स्वागत में इतनी गर्मजोशी दिखाई है, कि ऑकलैंड की सर्दी भी आज कुछ कम लग रही है। इस यात्रा के दौरान न्यूजीलैंड के लोगों से जो स्नेह और अपनापन मिला है, वह हमारे हृदय में हमेशा रहेगा।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री लक्सन की भारत यात्रा से हमारे संबंधों के हर क्षेत्र में नई ऊर्जा आई है। उनके नेतृत्व, स्पष्ट विजन, और मजबूत प्रतिबद्धता से, भारत और New Zealand की मित्रता को नयी गति और नयी दिशा मिली है। आज चालीस वर्षों के बाद भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा हो रही है। और मैं हमेशा कहता हूँ, कि बहुत सारे अच्छे काम है, जो मेरे पहले वाले लोग मेरे लिए छोड़ के गए हैं, जो मैं पूरा कर रहा हूँ। साथियों, यह हमारे संबंधों के एक नए अध्याय का शुभारंभ है।

Friends,

भारत और न्यूजीलैंड का लोकतान्त्रिक मूल्यों में दृढ़ विश्वास हमें मिलकर आगे बढ़ने के लिए natural comfort प्रदान करता है। पिछले कुछ वर्षों में हमने हमारे सबंधों को अभूतपूर्व गति प्रदान की है।

आज आज की बैठक में हमने हमारे सहयोग को नई गहराई और व्यापकता देने पर विस्तार से चर्चा की। हमने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को Strategic Partnership के स्तर पर ले जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत हम हर क्षेत्र में स्पष्ट लक्ष्यों और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ेंगे।

इस वर्ष हमने रिकॉर्ड समय में Free Trade Agreement किया। इस उपलब्धि से दोनों देशों के उद्योगों, किसानों और युवाओं के लिए नए द्वार खुलेंगे। हम trade के साथ साथ trust, technology और talent का blue print तैयार कर रहे हैं।

पिछले तीन वर्षों में हमारे व्यापार में 50 पर्सेन्ट से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हमें विश्वास है कि FTA अगले पाँच वर्षों में हमारे व्यापार को दोगुना करने का मजबूत आधार बनेगा।

न्यूजीलैंड द्वारा भारत में बीस बिलियन डॉलर के investment commitment का भी हम विशेष स्वागत करते हैं। यह न्यूज़ीलैंड की companies को भारत की growth story में long-term partner बनने का अवसर देगा।

Friends,

हमारी Strategic Partnership को सार्थक बनाने के लिए हम दोनों देशों की strengths को practical cooperation में बदल रहे हैं। Fin Tech के क्षेत्र में हम भारत के UPI और न्यूजीलैंड के payment systems को जोड़ने पर आगे बढ़ रहे हैं।

Agriculture, dairy और food processing में हमने सहयोग का एक मजबूत खाका बनाया है। इसका लाभ हमारे किसानों और पशु-पालकों को मिलेगा।

Traditional medicine में न्यूज़ीलैंड और भारत दोनों की समृद्ध और जीवंत परंपराएं हैं। आज हमने हमारे स्वास्थ्य सहयोग में traditional medicines की भूमिका बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

रक्षा और सुरक्षा में हमारा बढ़ता सहयोग हमारे गहरे strategic trust का प्रतीक है। पिछले वर्ष किए गए Defence Cooperation Agreement से हमारे सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार हुआ है। आज हमने इंडो-पैसिफिक में maritime cooperation के लिए एक फ्रैम्वर्क पर सहमति बनाई है। Bilateral naval exercises, Logistics support और hydrography में सहयोग से हमारा आपसी तालमेल बढ़ेगा।

Friends,

हमारे संबंधों की सबसे मजबूत ताकत हमारे people-to-people ties हैं। भारतीय समुदाय के लोगों ने अपने परिश्रम और talent से न्यूजीलैंड में विशेष स्थान बनाया है। उनकी देखरेख के लिए मैं प्रधानमंत्री लक्सन और न्यूजीलैंड सरकार और न्यूजीलैंड के लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ।

आज हुआ Cultural Cooperation MOU दोनों देशों के art, culture, heritage तथा creative industries में exchanges को गति देगा। न्यूजीलैंड भारतीय students के लिए एक महत्वपूर्ण destination रहा है। हम न्यूजीलैंड की universities को भारत में campus खोलने के लिए आमंत्रित करते हैं।

इस वर्ष हम दोनों देशों के बीच खेल संबंधों की सौवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। सौ साल पहले मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में हॉकी टीम ने यहाँ आकर जो इतिहास रचा था, वह हमारी खेल साझेदारी को आज भी प्रेरित कर रहा है। इस उपलक्ष्य पर हम दोनों देशों में कई स्पोर्ट्स इवेंट्स आयोजित कर रहे हैं। क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में भी सहयोग बढ़ाने के लिए हम Sports Joint Action Plan बनाया है। हाल ही में भुवनेश्वर में न्यूजीलैंड रग्बी और रग्बी इंडिया के कोचिंग प्रोग्राम से अच्छी शुरुवात हुवी है।

Friends,

वैश्विक मंच पर भी भारत और न्यूज़ीलैंड भरोसेमंद साझेदार और करीबी मित्र हैं। हमारा मानना है कि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए UN सहित अन्य वैश्विक संस्थानों में reform आवश्यक है।

आतंकवाद के विषय पर कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ाने के लिए आज हमने Joint Working Group का गठन किया है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग इंडो-पेसिफिक में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Friends, मैं आप सभी को माओरी नव वर्ष “मातरिकी” की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। जिस तारा-समूह को यहाँ “मातरिकी” नाम दिया गया है, जैसे आपने भी बताया, उसे भारत में प्राचीन काल से “कृत्तिका नक्षत्र” के रूप में जाना जाता है। मुझे विश्वास है कि “मातरिकी” का यह पर्व, हमारे संबंधों को इन्हीं सितारों की तरह जगमगाने की प्रेरणा देगा।

Prime Minister लक्सन,

आपकी मित्रता, आपकी प्रतिबद्धता और मेरी न्यूज़ीलैंड यात्रा को यादगार बनाने के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ। जैसे रग्बी में टीमवर्क और भरोसा ज़रूरी होता है, वैसे ही हम भी आपसी विश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। हम एक ही टीम में है, इसलिए टैकल केवल चुनौतियों को करेंगे।

बहुत-बहुत धन्यवाद।