Centre of Excellence to come up at five engineering colleges in Gujarat

Published By : Admin | October 29, 2013 | 13:51 IST

The Industries Department of Gujarat signed MoUs with Siemens Software and other well-known companies for setting up of five centres of excellence for engineering students of Gujarat in the presence of Chief Minister, Narendra Modi. The MoUs were signed during a seminar related to qualitative improvements in higher education at the Mahatma Mandir in Gandhinagar.

The Chief Minister appreciated the project which involves setting up of a centre of excellence on public-private partnership at the cost of Rs. 500 crore. He said that in Gujarat as many as 13 centres of excellence in engineering colleges have been set up so far and around 50,000 engineering students will be benefitted with the setting up of these five new centres of excellence.

The article is originally published in The Gujarat (Magazine), Vol-III, Issue-4.

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“Placing of the Budget by a third term government is being seen as a glorious event by the nation”
“This Budget will set the direction of the next five years of the current government and will lay a strong foundation for the dream of Viksit Bharat by 2047”
“Rise up above party politics and commit to the nation by making use of the dignified platform of the Parliament”
“Till 2029 the only priority should be the country, its poor, farmers, women and the youth”
“Muzzling of the elected government and its Prime Minister has no place in democratic traditions”
“First time members should be allowed to come forward and present their views”
“This House is not meant for political parties, this House is meant for the country. It is not meant to serve the Parliamentarians but 140 crore citizens of India”

आज सावन का पहला सोमवार है। इस पवित्र दिवस पर एक महत्वपूर्ण सत्र प्रारंभ हो रहा है, और सावन के इस पहले सोमवार की मैं देशवासियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

आज संसद का मानसून सत्र भी आरंभ हो रहा है। देश बहुत बारीकी से देख रहा है कि संसद का ये सत्र सकारात्मक हो, सृजनात्मक हो और देशवासियों के सपनों को सिद्ध करने के लिए एक मजबूत नींव रखने वाला हो।

साथियों,

भारत के लोकतंत्र की जो गौरवयात्रा है, उसमें ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में मैं देख रहा हूं। व्यक्तिगत रूप से मुझे भी, हमारे सभी साथियों के लिए भी ये अत्यंत गर्व का विषय है कि करीब 60 साल के बाद कोई सरकार तीसरी बार वापस आई और तीसरी पारी का पहला बजट रखने का सौभाग्य प्राप्त हो, ये भारत के लोकतंत्र की गौरवयात्रा की अत्यंत गरिमापूर्ण घटना के रूप में देश इसे देख रहा है। ये बजट सत्र है। मैं देशवासियों को जो गारंटी देता रहा हूं क्रमश: रूप से उन गारंटीयों को जमीन पर उतारना इस लक्ष्य को लेकर के हम आगे बढ़ रहे हैं। ये बजट अमृतकाल का एक महत्वपूर्ण बजट है। हमें 5 साल का जो अवसर मिला है, आज का बजट हमारे उन 5 साल के कार्य की दिशा भी तय करेगा और ये बजट 2047 जब आजादी के 100 साल होंगे, तब विकसित भारत का जो हमारा सपना है, उस सपने को पूरा करने की मजबूत नींव वाला बजट लेकर के हम कल देश के सामने आएंगे। हर देशवासी के लिए एक गर्व की बात है कि भारत बड़ी इकोनॉमी वाले देशों में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश है। गत 3 वर्षों में लगातार 8 प्रतिशत ग्रोथ के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं, grow कर रहे हैं। आज भारत में positive outlook, investment और performance एक प्रकार से opportunity की peak पर है। ये अपने आप में भारत की विकास यात्रा का एक अहम पड़ाव है।

साथियों,

मैं देश के सभी सांसदों से किसी भी दल के क्यों न हों। मैं आज आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं कि हम गत जनवरी से लेकर के हम लोगों के पास जितना सामर्थ्य था, इस सामर्थ्य को लेकर के जितनी लड़ाई लड़नी थी- लड़ ली, जनता को जो बात बतानी थी- बता दी। किसी ने राह दिखाने का प्रयास किया, किसी ने गुमराह करने का प्रयास किया। लेकिन अब वो दौर समाप्त हुआ है, देशवासियों ने अपना निर्णय दे दिया है। अब चुने हुए सभी सांसदों का कर्तव्य है, सभी राजनीतिक दलों की विशेष जिम्मेदारी है कि हमने दल के लिए जितनी लड़ाई लड़नी थी, लड़ ली, अब आने वाले 5 वर्ष के लिए हमें देश के लिए लड़ना हैं, देश के लिए जूझना हैं, एक और नेक बनकर के जूझना है। मैं सभी राजनीतिक दलों से भी कहूंगा कि आइए हम आने वाले चार, साढ़े चार साल दल से ऊपर उठकर के, सिर्फ और सिर्फ देश को समर्पित होकर के संसद के इस गरिमापूर्ण मंच का हम उपयोग करें।

जनवरी 2029, जब चुनाव का वर्ष होगा आप उसके बाद जाइए मैदान में, सदन का भी उपयोग करना है, कर लीजिए। वो 6 महीने जो खेल, खेलने हैं- खेल लीजिए। लेकिन तब तक सिर्फ और सिर्फ देश, देश के गरीब, देश के किसान, देश के युवा, देश की महिलाएं उनके सामर्थ्य के लिए, उनको empower करने के लिए जनभागीदारी का एक जनआंदोलन खड़ा कर करके 2047 के सपने को पूरा करने के लिए हम पूरी ताकत लगाएं। मुझे आज बहुत दुख के साथ कहना है कि 2014 के बाद कोई सांसद 5 साल के लिए आए, कुछ सांसदों के 10 साल के लिए मौका मिला। लेकिन बहुत से सांसद ऐसे थे, जिनको अपने क्षेत्र की बात करने का अवसर नहीं मिला, अपने विचारों से संसद को समृद्ध करने का अवसर नहीं मिला, क्योंकि कुछ दलों की नकारात्मक राजनीति ने देश के संसद के महत्वपूर्ण समय को एक प्रकार से अपनी राजनीतिक विफलताओं को ढाकने के लिए दुरूपयोग किया है। मैं सभी दलों से आग्रहपूर्वक कहता हूं कि कम से कम जो पहली बार सदन में आए हैं, ऐसे बहुत बड़ी संख्या में हमारे माननीय सांसद हैं और सभी दल में हैं, उनको अवसर दीजिए, चर्चा में उनके विचारों को प्रकट करने का मौका दीजिए। ज्यादा से ज्यादा लोगों को आगे आने का अवसर दीजिए। और आपने देखा होगा कि पार्लियामेंट के नए संसद गठन होने के बाद जो पहला सत्र था, 140 करोड़ देशवासियों के बहुमत के साथ जिस सरकार को सेवा करने का हुकुम किया है देशवासियों ने, उसकी आवाज को कुचलने का अलोकतांत्रिक प्रयास हुआ। ढाई घंटे तक देश के प्रधानमंत्री का गला घोटने का, उनकी आवाज को रोकने का, उनकी आवाज को दबाने का लोकतांत्रिक परंपराओं में कोई स्थान नहीं हो सकता है। और इन सबका पश्चाताप तक नहीं है, दिल में दर्द तक नहीं है।

मैं आज आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं देशवासियों ने हमें यहां देश के लिए भेजा है, दल के लिए नहीं भेजा है। ये सदन दल के लिए नहीं, ये सदन देश के लिए है। ये सदन सांसदों की सीमा तक नहीं है, 140 करोड़ देशवासियों की एक विराट सीमा तक के लिए है। मैं विश्वास करता हूं कि हमारे सभी माननीय सांसद पूरी तैयारी के साथ चर्चा को समृद्ध करेंगे, कितने ही विरूद्ध विचार होंगे, विरूद्ध विचार बुरे नहीं होते हैं, नकारात्मक विचार बुरे होते हैं। जहां सोचने की सीमाएं समाप्त हो जाती है, देश को नकारात्मकता की जरूरत नहीं है, देश को एक विचारधारा, प्रगति की विचारधारा, विकास की विचारधारा, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली विचारधारा से हमें आगे बढ़ना होगा। मैं पूरी आशा करता हूं कि हम लोकतंत्र के इस मंदिर का, भारत के सामान्य मानवी के आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सकारात्मक रूप से उपयोग करेंगे।

बहुत-बहुत धन्यवाद साथियों।