Every poor should get a pucca house, every village should have access to fast internet, every village should be connected with pucca roads: PM Modi
For welfare schemes like Housing, LPG Connections & Farmer support to continue in the state, it is imperative that the Double Engine Sarkar remains in power: PM Modi
Most of their candidates are history-sheeter. Their condition is such that some of their candidates are fighting the elections from the jail: PM Modi takes a dig at opposition

भारत माता की… भारत माता की…

कन्नौज के सभी भाइयों-बहनों को मेरा आदरपूर्वक नमस्कार।

आप सभी इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी को आशीर्वाद देने आए हैं। मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। इटावा, औरैया और फर्रुखाबाद से भी लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र के भी सभी लोगों का मैं अभिनंदन करता हूं। कन्नौज की आबोहवा में इत्र की खुशबू तो होती ही है इसके साथ-साथ यहां के लोगों के परिश्रम की सुगंध भी होती है। आप लोगों का विकास हो, निरंतर विकास हो, हर व्यापारी-कारोबारी का बिजनेस और बढ़े, इसी कामना के साथ मैं आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। बीते दिनों उत्तर प्रदेश हो, गोवा हो, उत्तराखंड हो जहां-जहां बीजेपी के पक्ष में वहां मुझे कार्यक्रमों के लिए जाना हुआ, भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में अभूतपूर्व लहर देखी है। अभी मैं उत्तराखंड से आ रहा हूं, जो मिजाज उत्तराखंड में मैंने देखा है, जो उत्साह और उमंग मैंने उत्तराखंड में देखा है। भाइयों-बहनों, ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी इन राज्यों में पहले से ज्यादा सीटें कैसे प्राप्त करे, ये जैसे जनता ने मन बला लिया है। और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए आज भाजपा का कार्यकर्ता जितनी मेहनत कर रहा है उससे ज्यादा उत्तर प्रदेश के, गोवा के, उत्तराखंड के, पंजाब के, मणिपुर के वहां के मतदाता जी-जान से जुटे हैं, रात-दिन मेहनत कर रहे हैं, मैं इन मतदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आज मैं कन्नौज की धरती से, उत्तराखंड के लोगों को, गोवा के लोगों को फिर एक बार कहूंगा कि 14 फरवरी को अधिक से अधिक मतदान करके रिकॉर्ड बनाएं।और साथियों, मैं आपसे एक बात कहूंगा। यूपी में लड़ाई इस बात की नहीं है कि किसकी सरकार बनेगी या किसकी सरकार नहीं बनेगी। पूरा यूपी जानता है, पूरा देश जानता है कि- “आएगी तो भाजपा ही, आएंगे तो योगी ही”। और पहले चरण के चुनाव ने ये पक्का कर दिया है- “आएगी तो भाजपा ही, आएंगे तो योगी ही”। बस अब मुकाबला इस बात की है बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी, वो पहले से कितनी ज्यादा से ज्यादा सीटें लेकर के बनेगी इसका मुकाबला चल रहा है। और इस मुकाबले में भी आगे निकलना है, इसलिए भाजपा समर्थकों के लिए भी एक- एक वोट की अहमियत है। योगी जी आज फ्रंट फुट पर जो मोर्चा संभाले हैं तो उसके पीछे भी आपके एक-एक वोट की ताकत है आपके समर्थन की ताकत। हमें मिलकर इस ताकत को और बढ़ाना है।

भाइयों और बहनों,

पहले चरण के मतदान ने एक और बात साफ की है। दो दिन से घोर परिवारवादियों को सपने दिखना बंद हो गए हैं… पता है क्यों? इसलिए क्योंकि उनकी नींद हराम हो गई है। वो लोग सोच रहे थे कि जातिवाद फैलाकर, संप्रदायवाद फैलाकर, वोटों को बांट देंगे। लेकिन मुझे खुशी है कि यूपी के लोग माफियावादियों, दंगावादियों के खिलाफ एकजुट होकर वोट कर रहे हैं। ये एकजुटता दंगावाद से मुक्ति के पक्ष में है। ये एकजुटता, कानून व्यवस्था के पक्ष में है। ये एकजुटता महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि के पक्ष में है। यूपी के जिन क्षेत्रों में आगे के चरणों का चुनाव है, वहां के लोगों को भी मैं कहूंगा- इसी तरह एकजुट रहना है, अपना वोट जाति के नाम पर, संप्रदाय के नाम पर बंटने नहीं देना है।

साथियों,

विकास के लिए, रोजगार के लिए, निवेश के लिए, शांति का माहौल सबसे पहली शर्त होती है। इसलिए, उत्तर प्रदेश आज कानून के राज को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रहा है। यूपी का सामान्य से सामान्य मतदाता भी समझ रहा है कि दंगाइयों और गुंडे-बदमाशों के इलाज की दवा सिर्फ और सिर्फ भाजपा के सरकार के ही पास है। मुझे याद है, एक समय था जब गुजरात में भी ऐसी ही स्थिति थी। कांग्रेस के बरसों के शासन ने वहां ऐसी स्थितियां बना दी थीं कि ना व्यापार-कारोबार फलता-फूलता था, ना लोग सुरक्षित महसूस करते थे। और हर साल वहां दंगे होते थे। हर बार खबरे आती थी कि यहां दंगा हो गया, तो वहां दंगा हो गया। वहां हर वर्ष जैसे जगन्नाथ पुरी में जगन्नथ जी की रथयात्रा निकलती है न ऐसे ही अहमदाबाद में भी जगन्नाथ जी की यात्रा निकलती है, और अनुभव ये है कि पिछले बीजेपी सरकार आने से पहले 10 साल में से 7 साल ऐसे जाते थे कि कोई न कोई दंगा हो जाता था, इतना ही नहीं पतंग उड़ाने में भी दंगा, रास्ते में आने जाने पर दंगा, यानि हर साल हर छोटी-मोदी बात पर दंगे होते थे। और दंगों की वजह से कर्फ्यू लगता था, संपत्ति जलती थी, हत्याएं होना तो आम बात हो गई थी। लोगों को मोहल्ले के मोहल्ले खाली करके भागना पड़ता था। और इसके बाद खाली मकानों को सस्ते में खरीद कर उस इलाके की पहचान ही बदल दी जाती थी। इसी प्रकार के दुष्चक्र में गुजरात लंबे अरसे तक फंसा हुआ था। गुजरात के लोगों ने जब बीजेपी को मौका दिया, तो स्थितियां बदलनी शुरू हो गई। हमने सबसे बड़ी प्राथमिकता कानून व्यवस्था को दी, कानून के राज को दी।

इसी का नतीजा है कि पिछले दो दशकों से गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ है। अब वहां हर वर्ग, हर संप्रदाय के लोग अपने विकास, गुजरात के विकास, देश के विकास में जुटे हुए हैं। और आप देखिए, सभी के प्रयासों से गुजरात भी किस तरह विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। कन्नौज के मेरे भाइयों-बहनों आप मुझे बताइये, हमें शांति चाहिए कि नहीं चाहिए ? कानून का राज चाहिए कि नहीं चाहिए ? दंगों से मुक्ति चाहिए कि नहीं चाहिए ? गुंडागर्दी बंद होनी चाहिए कि नहीं चाहिए ? माफियाशाही बंद होनी चाहिए कि नहीं चाहिए ? बेटियों को सम्मान की जिंदगी मिलनी चाहिए कि नहीं चाहिए ? व्यापारी सुख शांति से व्यापार करे ऐसी स्थिति चाहिए कि नहीं चाहिए ? ये काम भाजपा सरकार ही कर सकती है योगी जी की सरकार ही कर सकती है। उधर साथियों देखिए, जगह कम है लोग ज्यादा है, आप वहीं रहिए प्लीज आगे आने की कोशिश मत कीजिए, आप वहीं रहीये आपका प्यार मेरे सर आंखों पर। ये आपका प्यार ही है जो मुझे दिन-रात काम करने के लिए दौड़ाता रहता है। आपके प्यार को सौ-सौ सलाम। भाइयों-बहनों, उत्तर प्रदेश में भी हमें कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है।योगी जी के नेतृत्व में यूपी ने जिस प्रकार दंगों को रोका है, हमें उसे स्थाई स्वरूप देना है। दोबारा ऐसी हरकतों को उत्तर प्रदेश में पनपने नहीं देना है।

भाइयों और बहनों,

सिर्फ विकास की बातें करने से विश्वास नहीं आता, लेकिन जब नीयत भी साफ होती है मेहनत दिन-रात होती है, जनता की सुख-दुख की चिंता होती है तभी सामान्य मानवी के मन में विश्वास पैदा होता है। लेकिन, जिनकी राजनीतिक बुनियाद अपराध, गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार पर टिकी हो, वो कभी सुधर नहीं सकते।आप देखिए, कैसे-कैसे उम्मीदवारों को इन लोगों ने टिकट दिए हैं। इनके ज्यादातर उम्मीदवार हिस्ट्रीशीटर है। और उनकी तो हालत ऐसी है, कई लोग तो जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं।

साथियों,

लोकतंत्र की व्याख्या करते हुए पूरे विश्व में एक बात कही जाती है, लंबे अरसे से कही जाती है और कहा जाता है… “Government-of-the-people-by-the-people-for-the-people” यानि जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन। हमारे देश की घोर परिवारवादी पार्टियों ने, लोकतंत्र की इस भावना को ही बदल दिया। इन लोगों का मंत्र क्या बन गया है। ये लोग कहते हैं, उनका सूत्र क्या है of-the-people-by-the-people-for-the-people नहीं, उनका सूत्र है परिवार का, परिवार के लिए, परिवार द्वारा शासन। “Government-of-the family-by-the-family-for-the-family” इसलिए यूपी के लोगों ने फिर ठान लिया है कि उन्हें सिर्फ अपने परिवार के स्वार्थ के लिए काम करने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में नहीं चाहिए। यूपी के लोगों को तो पब्लिक की सेवा करने वाले लोग चाहिए, परिवार की सेवा करने वाले नहीं। इन घोर परिवारवादियों की कुनीति का एक गवाह कन्नौज का इत्र उद्योग भी है। इन्होंने अपने भ्रष्टाचार से, अपने काले कारनामों से यहां के इत्र कारोबार को बदनाम किया। इन्होंने इत्र को करप्शन से जोड़ दिया। हम इस इत्र को ग्लोबल ब्रांड बनाने में जुटे हैं। दुनिया में कन्नौज के इत्र का डंका बजे इसके लिए हम काम कर रहे हैं।

साथियों,

पहले की सरकारों के समय, उत्तर प्रदेश के जिलों की पहचान, यहां जिलों की पहचान कैसे होती थी? फलाना जिला- फलाना माफिया, वो जिला- वो माफिया, उधर वाला जिला- वो मदमाश। जिलों की पहचान ऐसे ही माफियाओं से होती थी। पांच वर्ष के भीतर-भीतर अब योगी जी की सरकार के समय यूपी के जिलों की पहचान वहां के उत्पादों से हो रही है। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के तहत योगी जी की सरकार ने औरैया के देसी घी को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद की है। इटावा के बुनकरों द्वारा बनाए उत्पाद, देश विदेश में धूम मचाएं इसके लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यूपी में ऐसे उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय मार्केट तक पहुंचाने के लिए भी काम हो रहा है। अब तो बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी जल्द तैयार होने वाला है। इसका भी लाभ औरैया और इटावा सहित इस पूरे क्षेत्र को होने वाला है।

साथियों,

गांव, गरीब, किसान, पशुपालक, सभी का जीवन बेहतर बनाने के लिए भी हम दिनरात काम कर रहे हैं। हमारे यहां पशुधन का क्या महत्व है, ये हमारे गोपालकों से बेहतर कौन बता सकता है। बीते वर्षों में हमारी सरकार ने गोबरधन योजना की शुरुआत की, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का गठन किया, डेयरी सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हज़ारों करोड़ रुपए का विशेष फंड बनाया है। हमने पहली बार, पशुपालकों को, मछली पालन से जुड़े लोगों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा हमारी सरकार ने दी है।

साथियों,

कोरोना की वजह से आज देश में लोगों के टीकाकरण की बहुत चर्चा हो रही है। कोरोना के कारण सबको पता है कि टीकाकरण कितना बड़ा काम होता है, कितनी मेहनत होती है, कितने काम होते हैं, सबको पता है, लेकिन एक बात बताता हूं जिसकी चर्चा बहुत नहीं हो रही है, लोगों के ध्यान में भी नहीं आता है क्यों ? बात ऐसी भी है जैसे कोरोना के समय वैक्सीन की चर्चा होती है, हमने हिंदुस्तान में आजादी के बाद पहली बार सबसे बड़ा एक काम चलाया है वो पशुधन की सुरक्षा के लिए पशुओं के लिए पशुओं के लिए बहुत बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया आजादी के बाद पशुओं के टीकाकरण का ऐसा अभियान देश में पहली बार शुरू हुआ है। इस पर सरकार 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। पशुओं को Foot and Mouth Disease, मुंहपका और खुरपका बीमारी से निजात दिलाना हमारी प्राथमिकता है।

भाइयों और बहनों,

जो काम इनको छोटे लगते हैं, हमें उनमें गरीब की तरक्की का समाधान दिखता है। हमें उसकी चिंता थी जिसके पास या तो ज़मीन है ही नहीं, या फिर बहुत कम है। हमें उन बहनों की चिंता थी जिनके लिए पशुपालन आत्मनिर्भरता का, आत्मसम्मान का माध्यम है। पशुपालन में जुटे एक बड़े समाज को, जिसे पिछड़ा कहा गया, हमें उनकी समृद्धि, उनकी गरिमा की चिंता थी। हमें उन पशुओं की चिंता थी, जिनको बेसहारा, बेआसरा छोड़ दिया जाता है। इसलिए दूध के साथ-साथ, और जो दूध नहीं दे पाते है उन पशुओं के गोबर से भी धन कमाने के माध्यम आज हम विकसित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में गोबर से बायोगैस बनाने के, जैविक खाद बनाने वाले, बहुत बड़े-बड़े प्लांट्स लगाए जा रहे हैं।

साथियों,

हमारी सरकार, नैचुरल फार्मिंग को भी बढ़ावा दे रही है। ये खेती का वो तरीका है, जिसमें खेती पर खर्च ना के बराबर होता है, लेकिन उत्पादन कहीं ज्यादा होता है। इसमें भी हमारे पशुधन की भूमिका है। देश के अनेक राज्यों के किसान, आज केमिकल फ्री खेती कर रहे हैं, नैचुरल फार्मिंग कर रहे हैं और पहले से ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। जो पशु कुछ लोगों को बोझ लगते हैं, वही पशु, अब किसानों की कमाई बढ़ाने में मदद करने जा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले मेरी काशी के ऐसे कई किसानों से मुलाकात हुई थी। नैचुरल फार्मिंग का ये तरीका, उत्तर प्रदेश के छोटे किसानों के लिए भी बहुत लाभकारी है। उनके अनुभव सुनकर के मुझे इतना आनंद आया, उन्होंने खेती में क्रांति का काम किया है।

भाइयों और बहनों,

कन्नौज को विशेष ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार एक और अभियान चला रही है। मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए भाजपा सरकार ने 500 करोड़ रुपए का एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। इससे यहां के लोगों को दो तरह के लाभ मिलेंगे। एक तो मधुमक्खियों से फूलों की खेती को मदद मिलेगी, यानि एक तरह से इत्र उद्योग को सीधी मदद मिलेगी। दूसरा ये कि यहां अलग-अलग फूलों के रस से बने, अलग अलग तरह के सुगंध और स्वाद वाले शहद का उत्पादन संभव होगा और बढ़ेगा जिसका दुनिया के बाजार में बहुत बड़ी आवश्यकता है। इस तरह के आधुनिक प्रयासों की उम्मीद आप परिवारवादियों से कभी नहीं कर सकते।

भाइयों और बहनों,

भाजपा सरकार वर्तमान के साथ ही भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भी निरंतर काम कर रही हैं। चाहे हर गरीब को पक्का घर देना हो, हर गांव को तेज़ इंटरनेट की सुविधा देनी हो, हर गांव को पक्की सड़कों से जोड़ना हो, हाईवे-एक्सप्रेसवे बनाने हो, गांव के पास ही अच्छे भंडार, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, कृषि आधारित उद्योग लगाने हो, इसके लिए हमारी सरकार ने बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाई हैं। 44 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की केन-बेतवा लिंक परियोजना इसी का एक उदाहरण है। ये जो घोर परिवारवादी बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं, वो इन्हीं योजनाओं के भरोसे बोलना पड़ रहा है। लेकिन भाइयों और बहनों, केंद्र की इन योजनाओं का लाभ उत्तर प्रदेश को तभी मिल सकता है जब यहां बेहतर तालमेल वाली सरकार हो। गरीबों को घर देने में यूपी अव्वल राज्यों में रहा, क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है। गरीब बहनों को मुफ्त गैस कनेक्शन तेज़ी से मिले, क्योंकि यहां डबल इंजन की सरकार है। लाखों किसान परिवारों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिला, क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों मरीज़ों को मुफ्त इलाज मिला, क्यों ? क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है।दशकों पुरानी सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुईं, हर घर जल योजना पर काम हुआ, क्यों ? क्योंकि यहां पर डबल इंजन की सरकार है।

साथियों

ये डबल इंजन की सरकार ही है जिसके कारण 100 साल के सबसे बड़े संकट का, कोरोना महामारी का यूपी ने डटकर मुकाबला किया। ऐसा संकट अगर उनके जमाने में आय होता, 2017 से पहले आता होता तो, उत्तर प्रदेश को बहुत बड़ी समस्या हो जाती। इनका काम तब भी बोलता था कि ये यूपी के लोगों के विरोधी हैं, इनका काम अब भी यही बोलता है। इन्होंने मेड इन इंडिया टीकों को भाजपा का टीका बताकर गरीबों के जीवन से बहुत बड़ा खिलवाड़ करने की कोशिश की।हमारी सरकार पूरी शक्ति से जुटी है कि यूपी के एक-एक गरीब को कोरोना की वैक्सीन लग जाए। लेकिन इन लोगों ने इस अभियान में भी बाधा डालने की कोशिश की। आप अंदाजा लगाइए साथियों, अगर गरीबों को कोरोना वैक्सीन नहीं लगी होती तो इस लहर में मेरे सभी भाइयों-बहनों का, मेरे उत्तर प्रदेश के नागरिकों का क्या हाल हुआ होता। हमारी सरकार ने गरीब का सामान्य मानवी का जीवन बचाने के लिए, सबको मुफ्त वैक्सीन लगवाई और आज भी लगवा रही है। मैं कन्नौज के, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद और यूपी के हर व्यापारी, कारोबारी, हर दुकानदार से एक बात विशेष तौर पर कहूंगा। एक बार सोचिए कि अगर हमारी सरकार ने तेजी से सबको वैक्सीन नहीं लगवाई होती, अगर हम ये काम नहीं करवाए होते तो क्या होता? आज देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, बाजारों में हलचल बढ़ रही है। क्या बिना वैक्सीन ऐसा संभव होता और अगर एक-दो साल और निकालने पड़ते तो न जाने मेरे कितने परिवार तबाह हो जाते तबाह हो जाते।

साथियों,

याद रखिए, मोदी विरोध में जो गरीब के जीवन से खेल सकते हैं, वो लोग क्या-क्या नहीं कर सकते। डबल इंजन की सरकार है, इसलिए आज यूपी शत-प्रतिशत टीकाकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है। साथियों, इस कोरोना काल ने एक और बात का ऐहसास सबको कराया है। इन घोर परिवारवादियों ने, उनके जो राशन माफिया अगर इस कोरोना काल में होते, तो यूपी के गरीबों को जो मुफ्त राशन पहुंच रहा है वह पहुंचता क्या? ये राशन मिलता क्या, गरीबों का चूल्हा जलता क्या? मेरे प्यारे भाइयों बहनों,यूपी के गरीबों, दलितों, पिछड़ों को तो भुखमरी का सामना करना पड़ता। दिल्ली से जो राशन हम भेजते उसको इनका माफिया अपने गोदामों में बंद कर देता, ब्लैक में बाजारों में बिकवाता। ये डबल इंजन की सरकार है, जो महामारी के इस समय में बीते कई महीनों से गरीब को मुफ्त अनाज दे रही है। और यूपी के लोग, यूपी के गरीब याद रखें, इन घोर परिवारवादियों की आंखों में ये गरीब कल्याण की योजनाएं उनको खटक रही हैं। पहला मौका मिलते ही, वो इन योजनाओं को उसका लाभ गरीबों तक पहुंचना बंद करा देंगे। और उनकी ये माफिया कंपनी कटकी कंपनी सबकुछ तबाह कर देगी।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन सरकार कैसे काम करती है, वो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी दिखता है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गरीबों को, हमारी बहनों को, लखनऊ-दिल्ली तक जाना पड़ता था। लेकिन अब मेडिकल कॉलेज, सुपरस्पेशियेलिटी हॉस्पिटल, पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट्स यहीं बन रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाएं तो बेहतर होंगी ही, यहां के युवाओं के लिए डॉक्टरी और पैरामेडिकल के क्षेत्र में जाने का एक अवसर भी बढ़ेगा। और जितनी मात्रा में हम मेडिकल कॉलेज बना रहे हैं, इतना ही नहीं अब हमारे मेडिकल कॉलेज में अपनी भाषा में अपनी मातृभाषा में हमारे नवजवान पढ़ सकेंगे। हमारी बेटियां पढ़ सकेंगी। इसका मतलब यह हुआ कि जो अंग्रेजी नहीं पढ़ा है जिसको गरीबी के कारण अंग्रेजी की शिक्षा नहीं मिली है वो परिवार का बच्चा भी अगर उसमें दमखम है तो हिंदी में पढ़कर बी वो डॉक्टर बनेगा। और अपनी जिंदगी भी बनाएगा।

भाइयों और बहनों,

सबका साथ, सबका विकास, क्या होता है, ये युवाओं के लिए हमारी नीति में भी दिखता है। भारतीय जनता पार्टी ने सामान्य वर्ग के गरीबों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा दी है। ये भी हमारे दलित वर्ग हमारे ट्राइवल वर्ग के एससी एसटी के भाई-बहनों, या पिछड़ा वर्ग के जो भाई-बहन है उनके आरक्षण का अधिकार को जरा भी तकलीफ दिए बिना उसको बरकरार रखते हुए रखने का काम हमने किया है जो सालों से मांग हो रही थी, इनको परवाह नहीं थी।

साथियों,

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के हमारे लोकसभा और विधानसभाओं के साथियों के लिए आरक्षण को 10 साल तक और बढ़ाने का भी काम भाजपा की सरकार ने किया है। ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने के लिए तीन-तीन दशक से मांग हो रही थी, इतनी सरकारें आईं, यहां के सपा वाले भी उस सरकार में भागीदार थे लेकिन उन्होंने कभी ओबीसी को यह अधिकार नहीं दिया ये मोदी की सरकार आने के बाद हमने ओबीसी कमीशन को संविधान अधिकार देकर के ओबीसी की मांग को हमने पूरा किया है। देशभर में केंद्र सरकार के कोटे में जो मेडिकल सीटें होती हैं, उनमें ओबीसी को आरक्षण देने का फैसला भी भाजपा सरकार का एक बड़ा निर्णय़ है। कुछ दिन पहले सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है। अब प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को भी अपनी आधी सीटें, 50 प्रतिशत सीटों की फीस सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर रखनी होगी। इसका बहुत बड़ा लाभ, हमारे मध्यम वर्ग के परिवार, हमारे निम्न वर्ग मध्य वर्ग के परिवार, जो बेचारे ज्यादा खर्च नहीं कर सकते हैं वे भी अपने बच्चों को डॉक्टर बना सकते हैं। भाइयों-बहनों गरीब, दलित, पिछड़े वर्ग के लोग भी, ये जो हमने सारी व्यवस्थाएं बदली हैं। आराम से वे अपने सपने पूरे कर सकते हैं।

साथियों,

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की वजह से भी उत्तर प्रदेश के युवाओं को बहुत मदद मिलने वाली है। हिंदी मीडियम में, जैसे मैंने कहा, ये पढ़ने वाले छात्रों को भी, गांव और गरीब परिवारों के युवाओं को भी डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, टेक्निकल एजुकेशन लेना है वो आराम से ले पाएगा, उनको जो मुश्किल आती थी वो अब जाएगी, और इसलिए भाइयों-बहनों हमने पढ़ाई में ये सारे विकल्प हमने आपको दिया हुआ है।

साथियों,

जब आप मतदान केंद्रों पर जाकर हमें अपना स्नेह, अपना आशीर्वाद देते हैं, तब हमें नए संकल्पों की शक्ति मिलती है। सुविधा, सुरक्षा और सुअवसर देने के इस अभियान को हमें जारी रखना है। यूपी को दंगामुक्त रखने के अभियान को हमें सशक्त करना है। हर बूथ को जगाना है। हर बूथ से लोगों को मतदान केंद्र पर लाना है। इस बार सिर्फ भाजपा को जिताना नहीं हैं, बल्कि बड़े मार्जिन से जिताना है। पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ के जिताना है। आप लोग ये काम करेंगे? घर-घर जाएंगे? एक-एक बूथ से अपने आस-पास के लोगों को निकालेंगे? ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाएंगे? भाइयों-बहनों, ये चुनाव का समय है मतदान के दिन पहले मतदान फिर जलपान, इसी अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। इस चुनाव में जो उम्मीदवार है उनसे मेरा आग्रह है कि आगे आ जाइए। सारे उम्मीदवार आकर के खड़े हो जाएं। और हमारे उप-मुख्यमंत्री जी भी आ जाएं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, हमारे साथ बोलिए… भारत माता की… दोनों हाथ ऊपर कर पूरी ताकत से बोलिए भारत माता की… भारत माता की…

भारत माता की… बहुत-बहुत धन्यवाद

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डणवीस जी, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे जी, डिप्टी सीएम श्रीमती सुनेत्र पवार जी, अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और वहां पर भी इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई-बहन। यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव, उपमुख्यमंत्री, युवा नेता हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गुजरात के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

और खास इसलिए के मेरे ब़डौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सबकुछ एक साथ हो रहा है।

साथियों,

आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।

साथियों,

इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।

साथियों,

ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भटकती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।

साथियों,

2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा-दीक्षा दी थी, इस धरती ने मुझे जो सिखाया था, आपके पास से जो लेसन लेके मैं दिल्ली पहुंचा था, हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।

साथियों,

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रतिदिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं।

साथियों,

इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेज़ी से बड़े बाज़ार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल, यानि जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं, उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।

साथियों,

ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT मुंबई, JNPT पोर्ट से वड़ोदरा तक Double स्टैक Container मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानि डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया, 250 ट्रक। अब ये जो नाराज फूफा जी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानि अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा।

साथियों,

फ्रेट कॉरिडोर के साथ-साथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है, जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वो भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक-दो ट्रेनों की घोषणा होती थी और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरु हुई हैं। नई ट्रेन से वड़ोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी।

साथियों,

रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइपलाइन, गरीबों का घर, जब देश में करोड़ों लोगों के लिए ये चीजें बनती हैं, तो इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों-लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए, इस वर्ष का रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुणा अधिक है। यानि रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च, हज़ारों हज़ार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया, तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं, नए बिजनेस आते हैं, ये फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग, वो बेटी चित्र लेकर कब से खड़ी है, वो सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए, हां। एक और भी है कोई, हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

साथियों,

मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्तधाराओं का विजन रखा है, उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है। और वड़ोदरा शहर, इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन, स्किल और इंडस्ट्री का कोलैब कैसे होता है, ये वड़ोदरा करीब डेढ़ सौ साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले, यहां टेक्स्टाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरु हुई थी, जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो-ढाई दशक में वड़ोदरा MSMEs का एक बड़ा हब बन गया है। और मुझे याद है, जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था, तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा, तो हर हफ्ते कोई ना कोई डेलीगेशन आता था। बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो, मैन्युफैक्चरिंग का हो, क्योंकि यहां पर आते थे, तो या तो ज्योति या एलएमबी या तो जीएसएफसी, यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया है। अब तो ये शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C-295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वड़ोदरा के लोगों को ये गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है, तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच-मेट्रो कोच बनाने का, रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक, भारत ने करीब 50 हज़ार, ये आंकड़ा सुनिए, 2014 के बाद भारत ने अब तक 50 हज़ार आधुनिक रेलवे कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 50 हजार आधुनिक कोच तो किए ही हैं, करीब ढाई लाख वेगन, मालगाड़ी के लिए जो वेगन होते हैं, भारतीय रेल में जोड़े गए हैं, ढाई लाख।

साथियों,

अब भारत चिप से लेकर शिप तक, निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानि पुर्जे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा, आत्मनिर्भरता की एक पूरी चेन भारत में ही बनेगी। और ये हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कडाणा डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट है, कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर, हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरु किए। और आज हम इसमें 200 गीगावॉट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर, टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार, बिजली उत्पादक बन चुके हैं और इसके कारण, प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक, कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है, कितने नए वेंडर्स आए हैं।

साथियों,

‘झूठ की गूंज’ से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है, सच की हुंकार के साथ चलता है, सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर्स पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है।

साथियों,

आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा, इलेक्ट्रिक इकोसिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चिप इंडस्ट्री है, डेटा सेंटर और AI से जुड़ी इंडस्ट्री है, इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें AI में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है, तो देश को उसकी तैयारी, उसका इकोसिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं, किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं का फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करके की जा रही है, आपके भविष्य के लिए किया जा रहा है।

साथियों,

दुनिया तेज़ी से बदल रही है, तो दुनिया की ज़रूरतें भी बदल रही हैं और इसी प्रकार हमारी पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। पहले फोकस सिर्फ डिग्री पर होता था, लेकिन अब डिग्री के साथ-साथ स्किल पर भी फोकस है, स्किल का महत्मय बढ़ रहा है। नौजवानों के पास स्किल हो और वो स्किल समय-समय पर अपग्रेड हो, एक बड़ी जरूरत बन गई है। और इसीलिए, आज हम अपनी शिक्षा नीति को, शिक्षण और ट्रेनिंग के संस्थानों को नए रूप में ढाल रहे हैं। और इसी भाव के साथ ही मैंने लाल किले से भी युवाशक्ति के लिए दो बड़ी घोषणाएं की हैं। पहली घोषणा, देश की पारंपरिक ज़रूरत से जुड़ी है। आप सब जानते हैं कि हमारे यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर साल, हमारे मिडिल क्लास परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन बच्चों की कोचिंग पर खर्च हो जाता है। हमारी कोशिश है कि गरीब और मिडिल क्लास के ऐसे बच्चों की, परिवारों के पैसे की बचत हो। और इसीलिए अब सरकार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्री-कोचिंग व्यवस्था देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। और हिंदुस्तान के बेस्ट टीचर के द्वारा उनके कोचिंग हो। हमारे जो नौजवान, अपनी तैयारी कर रहे हैं, उनकी कोचिंग का ध्यान सरकार खुद रखेगी।

साथियों,

भारत के नौजवानों को AI में पारंगत होना उतना ही जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे नौजवानों की पीढ़ी AI के लिए तैयार हो। ऐसा नहीं है, AI सीखने वालों की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर में है, अगर कोई इस स्किल को जानता है, तो वो खेती के लिए नया AI solution बना सकता है। आरोग्य के क्षेत्र में technology विकसित कर सकता है। Manufacturing की productivity बढ़ा सकता है। Robotics में अपना startup शुरू कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हमारे पास देश और दुनिया की इंडस्ट्री के लिए AI को समझने वाले और AI का इस्तेमाल करने वाले युवा हों। सरकार इसके लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।

साथियों,

भारत का ये कालखंड अभूतपूर्व है। ये भारत की युवाशक्ति का उत्कर्ष काल है, ये समय फिर भारत के जीवन में लौटकर नहीं आएगा। और इसलिए, हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत शुभकामनाएं।

अब मेरा एक काम करना पड़ेगा वडोदरा वालों को, करेंगे? पक्के तौर पर? आप सबने वड़ोदरा को इतना स्वच्छ बना दिया, कितनी मेहनत करनी पड़ी। मैं देख रहा था, हमारे नौजवान दिन-रात सफाई में लगे हुए थे। लेकिन एक बार हम तय करें कि अब हम वडोदरा को गंदा होने ही नहीं देंगे। मैं खुद गंदगी नहीं करूँगा, ये संकल्प लें, तो वडोदरा गंदा होगा? वडोदरा गंदा होगा? तो दिवाली ऐसी चकाचक जाएगी या नहीं, नवरात्रि शानदार जाएगी या नहीं, गणेशोत्सव में चार चाँद लगेंगे या नहीं, तो इतना काम तो हो जाएगा।

शाबाश।

धन्यवाद।

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!