This nation belongs to each and every Indian: PM Modi

Published By : Admin | April 17, 2017 | 14:37 IST
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This nation belongs to each and every Indian. There is no question of discrimination against anyone: PM Modi
In less than a year, Ujjwala Yojana beneficiaries crossed 2 crore, says PM Modi
Urge people to undertake digital transactions and make mobile phones their banks: PM Modi

मंच पर विराजमान दमन दीव और दादरा नगर हवेली के प्रशासक श्रीमान प्रफुल्ल भाई पटेल, यहां के सांसद श्रीमान नटू भाई, पड़ोस में दमन के सांसद श्री लालू भाई दादरा नगर एवं जिला पंचायत के अध्यक्ष श्रीमान रमन ककुवा जी, सिलवासा नगर के अध्यक्ष भाई राकेश चौहान जी और विशाल संख्या में पधारे हुए दादरा नगर हवेली के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों मराठी बोलाछे हिन्दी बोलाछे गुजराती बोलाछे बोला। अच्छा एक काम करिए करेंगे अपना मोबाइल बाहर निकालिये और मोबाइल बाहर निकाल कर के उसकी लाइट जला कर के आज के इस भव्य कार्यक्रम का आप स्वागत कीजिये सबकी लाइट जलनी चाहिए। हर एक के मोबाइल की लाइटें जलनी चाहिए। हर किसी के मोबाइल की लाइट जलनी चाहिए। देखिये सारे कैमरा वाले आपको रिकॉर्ड कर रहे हैं। सबका हाथ ऊपर चाहिए एक दम ऊपर। हाथ ऊपर करके हिलाइए। सबका हाथ ऊपर चाहिए। सब मोबाइल फोन अपना हिलाइये बराबर। देखिए जगमग तारे नजर आ रहे हैं सबको। देखिए दादरा नगर हवेली की ताकत देखिए। जोर से बोलिये भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। कमाल कर दिखाया आपने आज।

देश के और भूभाग के लोग अगर ये कार्यक्रम देखते होंगे, तो उनको बड़ा आशचर्य होता होगा छोटा सा सिलवासा, एक छोटा सा क्षेत्र हिन्दुस्तान की सबसे छोटी जो पार्लियामेंट सीट है उसमें जिसका नाम है और ये जन सागर कोई देखे, तो बड़े से बड़े प्रदेश की रैली भी इतनी बड़ी नहीं होती है। भाइयों बहनों ये Union territory केन्द्र शासित प्रदेश चाहे दादरा नगर हवेली हो चाहे दीव दमन हो, लोगों को पता ही नहीं था कि उनकी सरकार कौनसी है। यहां जो कलेक्टर आते थे उसको ही वो सरकार मानते थे। पहली बार प्रफुल्ल भाई को प्रशासक रखने के बाद दादरा नगर हवेली का हर नागरिक को लगने लगा है कि अब दिल्ली में हमारा कोई रखवाला बैठा है। हमारे सुख दुख की चिंता अब दिल्ली से हो रही है। ये पहली बार दादरा नगर हवेली और दीव दमन के लोगों को लगने लगा है, वरना उन्होंने मान लिया था कि भई क्या करें, यहां तो कोई सरकार तो है नहीं दिल्ली बहुत दूर है, चलो जैसा है वैसा गुजारा कर लेंगे, लेकिन हमने दिखा दिया कि हिन्दुस्तान का छोटा सा छोटा इलाका भी गरीब से गरीब नागरिक भी उसका इस देश पर उतना ही हक है जितना दिल्ली में रहने वालों का होता है और इसलिये ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का हिन्दुस्तान है हर सवा सौ करोड़ देशवासी का हर नागरिक उसका मालिक है। और हर नागरिक का भाग्य बदलना इस देश की सामूहिक जिम्मेवारी है। मुझे बताया गया कि यहां पर 1980 के पहले यानी करीब करीब 35- 40 साल पहले कोई प्रधानमंत्री यहां पर आए थे, जो आज 35 साल के हो गए उनको तो पता भी नहीं होगा कि क्या प्रधानमंत्री की सूची में ये छोटी सी जगह भी होती है क्या, नहीं होती। आखिरी बार करीब 35-40 साल पहले भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रीमान मुरारजी भाई देसाई यहां आए थे। उसके बाद प्रधानमंत्री के रूप में मुझे आज आपके बीच आने का सौभाग्य मिला है। लेकिन मैं पहली बार नहीं आया हूं। शायद ही यहां कोई पंचायत होगी कि जहां मैं गया नहीं हूं। स्कूटर पर दौरा करता था। यहां सैकड़ों परिवार मिल जाएंगे आपको जो बताएंगे कि मोदी जी पहले यहां आते थे हमारे यहां खाना खाते थे। कभी हमारे यहां चाय पीते थे कई लोग यहां बैठे होंगे। इस पूरे क्षेत्र में मुझे भ्रमन करने का सौभाग्य मिलता था। और इसके कारण मैं आपके सुख दुख से परिचित हूं। यहां पर विकास की संभावनाओं से परिचित हूं। और एक प्रकार से अब सिलवासा, दमन ये लघु भारत बन गए हैं Mini India बन गए हैं हिन्दुस्तान का कोई कोना ऐसा नहीं होगा, जिसके लोग इस इलाके में रहते नहीं होंगे। हिन्दुस्तान के हर कोने के नागरिक हमारे इस भूभाग में रहते हैं। मैंने भारत सरकार के अधिकारियों से पूछा एक बार हमनें कहा कि केन्द्र सरकार अब मुझे याद है, जब आदिवासियों को जमीन के पट्टे देने का काम चल रहा था, तो पुरे देश में सबसे अच्छा काम जो हुआ, वो गु जरात में और मध्य प्रदेश में आदिवासियों का हुआ। उसके बावजूद भी तब मैं यहां मुख्यमंत्री था यहां गुजरात में भारत सरकार और कांग्रेस के नेता आए दिन आदिवासियों को भड़काते थे, झूठ फैलाते थे और उनको समझाते थे कि ये मोदी सरकार है गुजरात सरकार है वो आदिवासियों को जमीन के पट्टे नहीं दे रही है। जब मैं भारत सरकार में बैठा तो मैं हैरान हो गया, जहां कोई बीच में राज्य सरकार नहीं है, जिसमें सीधी सीधी जिम्मेवारी केन्द्र सरकार के अधिकारियों की है। सारे हिन्दुस्तान में आदिवासियों को जमीन के हक के पट्टे दिये जाते थे। लेकिन इतने साल तक जिन्होंने दिल्ली में शासन किया और राज्यों को जो कटघरे में खड़ा कर देते थे, झूठे आरोप लगाते थे, मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि दादरा नगर हवेली में जहां मेरे आदिवासी भाइयों की जनसंख्या है उनको एक जमीन का पट्टा नहीं दिया गया। उनको शोभा नहीं देता था। जब हम सरकार में आए प्रफुल्ल भाई को यहां काम दिया। हमने कहा भारत सरकार की कौनसी योजना है जो यहां लागू नहीं हुई निकालो। पहले सरकारी बाबू यूनियन टैरिटरी के क्षेत्रों में जाना पसंद करते थे। उनको लगता है वो राजा रजवाड़े की तरह रहता था उनका एमपी को संभाल लिया तो काम चल जाता था। ये सच्चाई है न, सच्चाई है न, लेकिन अब ये कांग्रेस की सरकार नहीं है मोदी की सरकार है। यहां जनता के लिये काम करना पड़ेगा जनता के लिये दौड़ना पड़ेगा, जनता के सुख के लिये अपनी जान खपानी पड़ेगी। इस मकसद से मैं काम कर रहा हूं। और उसी का नतीजा है कि आज यहां पर हजारों परिवार जिनको जमीन के पट्टे आज दिये जा रहे हैं। हजारों आदिवासी परिवार पहली बार अनेक पीढ़ियों से जिस जमीन को वो जोत रहे थे लेकिन उनके पास एक कागज का टुकड़ा नहीं था कि उनका कोई हक बनता है। मैं आज दादरा नगर हवेली के प्रशासक जी को और उनकी पूरी टीम को हृदय से बधाई देता हूं। के मेरे प्यारे आदिवासी भाइयों बहनों को उनको हक दिलाने का इतना बड़ा काम किया और मेरे हाथों से ये हजारों परिवारों को, ये हजारों परिवारों को ये मुझे आज हक पत्र देने का अवसर मिला है।

भाइयों बहनों आज करीब दो हजार तीन सौ पचीस इतने से छोटे से दादरा नगर हवेली में दो हजार तीन सौ पचीस आदिवासी परिवारों को जमीन का हक मिलना ये आजादी के बाद की इस इलाके की सबसे बड़ी घटना है। सबसे बड़ी घटना है। आप कल्पना कर सकते हैं, मेरे मन को कितना आनन्द होता होगा। कितना सुख मिलता होगा। ये जो मैंने आपके मोबाइल फोन से ये जो लाइट जलाई थी न ये मेरे आदिवासी भाइयों के लिये लाइट जलाई थी मेरे आदिवासी भाइयों के लिये।

भाइयों बहनों आज हमारा सपना है 2022 भारत की आजादी के 75 साल होंगे, देश की आजादी के लिए कितने लोगों ने जान की बाजी लगा दी। कैसे कैसे सपने देखे थे। क्या 2022 हर हिन्दुस्तानी कोई सपना नहीं देख सकता है। यहां बैठे हुए हर के मन में एक विचार नहीं आना चाहिए कि 2022 जब आजादी के 75 साल होंगे आने वाले पांच साल में मैं भी देश के लिये कुछ करूंगा। करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। करेंगे। दोनों मुट्ठी बंद कर के मुझे बताइए करेंगे। देश के लिये कुछ करेंगे। अपने लिये नहीं। देश के लिये करेंगे। एक छोटा सा काम भी अगर आप देश के लिये करेंगे। 2022 पूरे देश में माहौल बन जाएगा। सवा सौ करोड़ हिन्दुस्तानी देश के लिये कुछ करने के लिये निकल पड़ेंगे। दुनिया की कोई ताकत नहीं है। हमारे देश को पीछे रख सके भाई। हमनें सपना संजोया है। 2022 जब आजादी के 75 साल होंगे। हमारे देश का एक भी गरीब ऐसा नहीं होना चाहिए जिसके पास रहने के लिये अपना खुद का घर न हो। गरीब से गरीब को भी रहने के लिये घर मिलना चाहिये कि नहीं मिलना चाहिए, मिलना चाहिये कि नहीं मिलना चाहिए। भाइयों बहनों ये संघ प्रदेश में दादरा नगर हवेली में जो अभी सर्वे किया गया है। गांवों में छौ हज़ार दो सौ चौतीस परिवार इनके पास घर नहीं है और सिलवासा जैसे शहरी इलाके में 800 परिवार है जिनको अपना घर नहीं है। 2022 तक इन सात हजार परिवों को खुद का घर देने का काम उसका आज प्रारंभ हो रहा है। और इसलिए मैं इन सभी मेरे गरीब परिवारों को आज हृदय से बधाई देता हूं। आपने अपने मोबाइल से आज जो रौशनी फैलाई है। वो उन गरीबों को घर मिलने के उत्सव की रौशनी है और घर भी सामान्य नहीं, घर भी सामान्य नहीं। घर ऐसा होगा जिसमें बिजली होगी, पानी का प्रबंध होगा, शौचालय होग, नजदीक में बच्चों को पढ़ने के लिये स्कूल होगा, बूढ़ों के लिये दवाई की व्यवस्था होगी ऐसा घर देने का हमारा इरादा है भाइयों बहनों।

भाइयों बहनों आज एक और महत्वपूर्ण काम हुआ और वो है, गैस का कनेक्शन देना। और उसके साथ चूल्हा भी भेंट में मिल रहा है, कूकर भी भेंट में मिल रहा है, चूल्हा जलाने वाला गैस का लाइटर भी भेंट मिल रहा है। भाइयों बहनों ये हमारा देश हमारे ये नेता लोग इनकी सोच कैसी थी जरा सोचीए आप 2014 को याद कीजिए जब हिन्दुस्तान में लोकसभा का चुनाव चल रहा था। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया था। मेरे सामने कांग्रेस चुनाव के मैदान में थी। चुनाव में पॉलिटिकल पार्टियां वादा करती हैं। कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में बड़ी मिटिंग की लोकसभा चुनाव के रणनीति के लिये मिटिंग की। और उसके बाद पत्रकार वार्ता की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या घोषणा की थी आप जरा याद करना। उन्होंने कहा था कि 2014 के लोकसभा में हम जीतेंगे। और हमारी ये सरकार बनेगी। तो अभी जो एक साल में नौ गैस के सिलेंडर देते हैं, हम उसको बढ़ाकर के 12 कर देंगे। इस वादे के नाम पर देश में चुनाव लड़ा गया था। 9 गैस के सिलेंडर के 12 गैस के सिलेंडर इसके आधार पर वोट मांगे जा रहे थ। आपको हैरानी होगी आज से कुछ साल पहले पर्लियामेंट के मेम्बर को 25 गैस की कूपन मिलती थी हर साल और वो अपने परिचितों को अपने कार्यकर्ताओं को गैस का कनेक्शन देने के लिये कूपन देता था। एक साल में 25. और कुछ एमपी अखबार में आता था उस जमाने में वो कूपन भी कालेबाजारी में बेच डालते थे। अखबारों में छपने लगा आखिरकार एमपी को कूपन देना बंद हो गया। यानी गैस का कनेक्शन लेने के लिये पार्लियामेंट के मेम्बर के घर अच्छे अच्छे परिवार के लोग कतार लगाकर के खड़े रहते थे। आपने भी देखा होगा। कितनी मशक्कत की होगी। तब आपको गैस का सिलंडर मिला होगा। भाइयों बहनों हमारी सरकार बनी। मैं ये सोचता था कि मेरी गरीब माताओं का क्या गुनाह जो लकड़ी का चूल्हा जलाकर खाना पकाती है। आप जानके हैरान होंगे दोस्तों जब एक मां लकड़ी का चूल्हा जलाकर के खाना पकाती है, तो उसके शरीर में 400 सिगरेट का धुंआ उसके शरीर में जाता है। एक दिन में चार सौ सिगरेट का धुंआ लकड़ी का चूल्हा जलाने से खाना पकाने से होता है। उस मां की तबियत का हाल क्या होता होगा। और छोटे छोटे बच्चे घर में खेलते हैं। मां खाना पकाती है। ये धुंआ बच्चों के शरीर में भी जाता है। उन बच्चों के शरीर का क्या होता होगा। भाइयों बहनों इस पीड़ा से दर्द से और मैं तो गरीबी में पैदा हुआ हूं। मैंने मेरी मां को लकड़ी का चूल्हा जलाते देखा है। पूरा घर धुंए से कैसे भर जाता था। वो अपनी आंखों से देखा है अनुभव किया है। तब मन में एक कशक थी कि मैं इन मेरी गरीब माताओं को इससे मुक्ति कैसे दिलाऊं और भाइयों बहनों हमने बीड़ा उठाया हर गरीब परिवार में गैस का चूल्हा पहुंचाएंगे, मुफ्त में कनेक्शन देंगे। 11 महीने हुए योजना लागू किये अब तक दो करोड़ परिवारों को गैस का चूल्हा पहुंच गया है। और आज मुझे खुशी है कि करीब आठ हजार परिवार ये दादरा नगर हवेली में भी उनको ये गैस का कनेक्शन दिया जाएगा। लेकिन यहां के लोगों की मदद से उनको कूकर भी मिल रहा है लाइटर भी मिल रहा है। ये यहां विशेष हो रहा है। मैं बहुत बहुत बधाई देता हूं। इस अभियान के लिये।

भाइयों बहनों आज यहां पर मेरे दिव्यांग भाइयों बहनों के लिये कुछ साधन देने का काम हुआ है। इलैक्ट्रिक व्हीकल देने का काम हुआ है। जो देख नहीं पाते हैं ऐसे दिव्यांग को हाथ में आधुनिक छड़ी दी है। ताकि सेंसर से पता चले कि सामने कोई आता है। भाइयों बहनों सब सरकारों में योजनाएं होती थीं, लेकिन हमारी सरकार आने के बाद अब तक करीब पांच हजार कैंप लगे हैं और लाखों दिव्यांगों को मदद पहुंचाई गई है। पहले तीस साल में मुश्किल से पचास कैंप भी नहीं लगे थे। और पैसे धरे के धरे रहते थे भाइयों बहनों। सरकार गरीबों के लिये होती है, सरकार गरीबों के कल्याण के लिये होती है और इसीलिये सरकार हमारी अलग अलग जगह जिले जिले में जाकर के दिव्यांगों को खोजती है, कैंप लगाती है और भारत सरकार के खजाने से उनको संसाधन जुटा देती है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपनी जिन्दगी जीने के लिये आगे बढ़ें। उस दिशा में काम हो रहा है।

भाइयों बहनों आज यहां जन औषधि केन्द्रों का भी लोकाप्रण हुआ है। हम जानते हैं बीमार होना कितना महंगा हो गया है। सुखी परिवार हो मध्यमवर्गीय परिवार हो, परिवार में पति पत्नी दोनों कमाते हों। लेकिन अगर घर में कोई बीमारी आ जाए, तो घर का पूरा आर्थिक कारोबार चौपट हो जाता है। बेटी की शादी करवानी हो तो नहीं करवा पाते, मकान खरीदना हो तो नहीं खरीद पाते, दवाई इतनी महंगी होती है। डॉक्टर इतने महंगे होते हैं। भाइयों बहनों हमने तय किया 800 जितनी दवाइयों का लिस्ट बनाया। दवाई बनाने वालों को बुलाया। हमने कहा इतने रुपये क्यों मांग रहे हो भाई, इतना मुनाफा करके क्या करोगे। सब लाइन में लग गए और जो दवाई 1200 रुपये में बिकती थी वो 70-80 रुपये में बिकना शुरू हो गया भाई। जो दवाई 300 रुपये में बिकती थी, वो 7 रुपये दस रुपये में बिकने लग गई। क्यों गरीब को भी दवाई मिलनी चाहिए। समय पर मिलनी चाहिए। उसको भी तो जीने का हक होता है। सरकार में दम होना चाहिए तब वो परिवर्तन लाकर के रहते हैं भाई। ऐसे जन औषधि केन्द्र आज, आज दादरा नगर हवेली में शुरु हो रहे हैं। ताकि यहां के गरीब को और डॉक्टर कुछ भी लिख कर के दे दें। आप चिंता किये बिना ये जन औषधि केन्द्र की दवाई लीजिए। कोई फर्क नहीं है। वो सस्ती है इसलिये खराब है ऐसा अगर कोई भ्रम फैलाता है तो मत मानिये। गरीबों को लुटने नहीं दिया जाएगा। मध्यमवर्गीय आदमी को मरने नहीं दिया जाएगा। और इसलिये भाइयों बहनों अनेक योजनाएं लेकर के आज मैंने देखा जब वाई फाई की बात आई सारे नौजवान उछल पड़े। जैसा ही वाई फाई के उद्घाटन पर टीवी पर दिखाया सबको खुशी की लहर आ गई। ये बदले हुए न्यू इंडिया का ये नमूना है। उसको लगता है जीवन का हिस्सा हो गया है। लेकिन भाइयों बहनों एक और काम मैं आपसे चाहता हूं करोगे। ऐसे ढीला ढीला बोला तो क्या करोगे। करोगे। इधर से आवाज नहीं आ रही है। करोगे। करोगे। अपने मोबाइल फोन पर भीम एप डाउनलोड कीजिए। और भीम एप डाउनलोड करिए सिर्फ इतना ही नहीं, अपने इलाके के सभी व्यापारियों को भी भीम एप डाउनलोड करवाइये। और अब गैस पर पैसे किसी को दीजिये मत। उसको बताइए भीम एप से मैं पैसे देना चाहता हूं। तुम भी मुझे भीम एप से जो देना चाहते हो दे दो। आदत डाल लीजिए भाइयों बहनों। ये वाई फाई का आपको जो आनन्द आ रहा है न अगर आप अपने ही मोबाइल फोन को अपनी बैंक बना दीजिए। अपने ही मोबाइल फोन को अपना बटुआ बना दीजिए। कम कैश से कारोबार कैसे चले । भाइयों बहनों भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ा जंग मैंने छेड़ा है। आप मुझे बताइए भ्रष्टाचार जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए। बेईमानी खत्म होनी चाहिए कि नहीं चाहिए। ईमानदारी से देश चलना चाहिए कि नहीं चलना चाहिए। आपकी मदद के बिना कैसे होगा। करोगे मदद। करोगे मदद। और उसका एक उपाए है कम कैश आप भीम एप से भुगतान करने की शुरुआत कीजिए। कालेबाजारी भ्रष्टाचार के रास्ते बंद होना शुरू हो जाएंगे। और इसलिए मुझे आपकी मदद चाहिए। ये वाई फाई का उपयोग, और अभी तो एक योजना बनाई है भारत सरकार ने आप उससे कमाई कर सकते हैं। जो नौजवान वैकेशन में कमाई करना चाहते हैं। उनके लिए मैंने पूरे देश में एक योजना बनाई है। आप अगर अपने भीम एप से अपना आर्थिक कारोबार करते हैं। और एक और व्यापारी को या कोई और व्यक्ति को भीम एप डाउनलोड करके तीन बार खरीद बिक्री करने का सिखा देते हैं। और अगर वो करता है तो सरकरार की तरफ से आपके मोबाइल फोन में दस रुपया आ जाएगा। अगर दिन में आप बीस लोगों को करोगे, तो आपके मोबाइल फोन में 200 रुपया आ जाएगा। अगर इस वैकेशन के तीन महीने ये काम कर लिया तो आप 18 से 20 हजार रुपया कमा सकते हैं। हिन्दुस्तान के हर नौजवान ने इस वैकेशन में कम से कम बीस हजार रुपया कमाना है। भीम एप से कमाना है। अब मुझे अपने मां बाप से खर्च के लिये पैसा नहीं मांगना है। मोदी जी की योजना का फायदा उठाऊंगा, भीम एप का प्रचार करूंगा। और हर दिन बीस लोगों को समझा कर के 200 रुपया कमा कर आऊंगा। ये काम हम कर सकते हैं भाइयों। करोगे। करोगे कि वो ठेली वाला ही करोगे। हां वो नहीं करना है। 


भाइयों बहनों अनेक योजनाओं का यहां आज आरंभ हुआ है। लोकापर्ण हुआ है। सारी योजनाओं का मैं उल्लेख नहीं कर रहा हूं। एक साथ इतनी सारी योजनाएं। गरीबों को आवास आदिवासी को घर। नौजवान को वाई फाई, युवकों को रोजगार, माताओं बहनों को गैस का कनेक्शन, कोई ऐसा नहीं है जिसको कोई लाभ न पहुंचा हो। शायद दादरा नगर हवेली की इतिहास में आजादी के बाद पहली बार इतना बड़ा समागम हुआ होगा। इतनी बड़ी सरकारी योजनाएं आई होगी और इतना बड़ा फायदा पहुंचाया होगा। मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद कर के बोलिये। भारत माता की जय, ऐसे नहीं। दमन वालों को भी परेशानी होनी चाहिए काम कैसे होता है। ऐसा जयकारा बोलिये जरा। भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बहुत बहुत धन्यवाद।

 

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Success starts with action: PM Modi at inauguration of National Games
September 29, 2022
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PM inaugurates world-class ‘Swarnim Gujarat Sports University’ in Desar
“When the event is so wonderful and unique, its energy is bound to be this extraordinary”
“The victory of the players and their strong performance in the sporting field also paves the way for victory of the country in other fields”
“The soft power of sports enhances the country's identity and image manifold”
“Savaj, the Asiatic lion mascot reflects the mood of fearless participation among India’s youth”
“When infrastructure is of good standard, morale of the athletes also soars”
“We worked for sports with a sports spirit. Prepared in mission mode for years through schemes like TOPS”
“Efforts like Fit India and Khelo India that have become a mass movement”
“Sports budget of the country has increased by almost 70 per cent in the last 8 years”
“Sports have been a part of India’s legacy and growth journey for thousands of years”

भारत माता की जय,

भारत माता की जय,

इस भव्य आयोजन में हमारे साथ उपस्थित गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत जी, हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई, संसद के मेरे साथी सी.आर पाटिल, भारत सरकार में मंत्री श्री अनुराग जी, राज्य के मंत्री हर्ष संघवी जी, मेयर किरीट भाई, खेल संस्थाओं के प्रतिनिधिगण और देश भर से यहाँ जुटे मेरे युवा खिलाड़ियों।

आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है, अभिनंदन है। ये दृश्य, ये तस्वीर, ये माहौल, शब्दों से परे है। विश्व का सबसे बड़ा स्टेडियम, विश्व का इतना युवा देश, और देश का सबसे बड़ा खेल उत्सव! जब आयोजन इतना अद्भुत और अद्वितीय हो, तो उसकी ऊर्जा ऐसी ही असाधारण होगी। देश के 36 राज्यों से 7 हजार से ज्यादा athletes, 15 हजार से ज्यादा प्रतिभागी, 35 हजार से ज्यादा कॉलेज, यूनिवर्सिटीज़, और स्कूलों की सहभागिता, और 50 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स का नेशनल गेम्स से सीधा जुड़ाव, ये अद्भुत है, ये अभूतपूर्व है। नेशनल गेम्स का anthem ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया। मैं कहुंगा जुड़ेगा इंडिया, आप बोलियेगा जीतेगा इंडिया। ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया, ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया, ‘जुड़ेगा इंडिया, जीतेगा इंडिया, ये शब्द, ये भाव आज आसमान में गूंज रहा है। आपका उत्साह आज आपके चेहरों पर चमक रहा है। ये चमक आगाज है, खेल की दुनिया के आने वाले सुनहरे भविष्य के लिए। नेशनल गेम्स का ये प्लेटफ़ॉर्म आप सभी के लिए एक नए launching pad का काम करेगा। मैं इन खेलों में शामिल हो रहे सभी खिलाड़ियों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनायें देता हूँ।

 

साथियों,

मैं आज गुजरात के लोगों की भी सराहना करता हूँ, जिन्होंने बहुत ही कम समय में इस भव्य आयोजन के लिए सारी व्यवस्थाएं कीं। ये गुजरात का सामर्थ्य है, यहां के लोगों का सामर्थ्य है। लेकिन साथियों अगर आपको कहीं कमी महसूस हो, कहीं कोई असुविधा महसूस हो तो उसके लिए मैं गुजराती के नाते आप सबसे एडवांस में क्षमा मांग लेता हूं। कल अहमदाबाद में जिस तरह का शानदार, भव्य ड्रोन शो हुआ, वो देखकर तो हर कोई अचंभित है, गर्व से भरा है। टेक्नोलॉजी का ऐसा सधा हुआ इस्तेमाल, ड्रोन की तरह ही गुजरात को, भारत को नई ऊंचाईयों पर ले जाएगा। यहां जो पहले नेशनल स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, उसकी सफलता की भी बहुत चर्चा हो रही है। इन सारे प्रयासों के लिए मैं मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेन्द्र भाई पटेल और उनकी पूरी टीम की भी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं। अभी कुछ दिन पहले नेशनल गेम्स का official mascot ‘सावज’ भी लॉंच हुआ है। गिर के शेरों को प्रदर्शित करता ये शुभांकर सावज भारत के युवाओं के मिजाज को दिखाता है, निडर होकर मैदान में उतरने के जुनून को दिखाता है। ये वैश्विक परिदृश्य में तेजी से उभरते भारत के सामर्थ्य का भी प्रतीक है।

 

साथियों,

आज आप यहाँ जिस स्टेडियम में, जिस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मौजूद हैं, इसकी विशालता और आधुनिकता भी एक अलग प्रेरणा का कारण है। ये स्टेडियम तो दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है ही, साथ ही ये सरदार पटेल स्पोर्ट्स enclave और कॉम्प्लेक्स भी कई मायनों में सबसे अनूठा है। आमतौर पर ऐसे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स एक या दो या तीन खेलों पर ही केंद्रित होकर रह जाते हैं। लेकिन सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबाल, हॉकी, बास्केटबॉल, कबड्डी, बॉक्सिंग और लॉन टेनिस जैसे अनेकों खेलों की सुविधा एक साथ उपलब्ध है। ये एक तरह से पूरे देश के लिए एक मॉडल है। क्योंकि, जब इनफ्रास्ट्रक्चर इस स्टैंडर्ड का होता है, तो खिलाड़ियों का मनोबल भी एक नई ऊंचाई तक पहुंच जाता है। मुझे विश्वास है, हमारे सभी खिलाड़ी इस कॉम्प्लेक्स के अपने अनुभवों को जरूर enjoy करेंगे।

 

मेरे नौजवान साथियों,

सौभाग्य से इस समय नवरात्रि का पावन अवसर भी चल रहा है। गुजरात में माँ दुर्गा की उपासना से लेकर गरबा तक, यहाँ की अपनी अलग ही पहचान है। जो खिलाड़ी दूसरे राज्यों से आए हैं, उनसे मैं कहूंगा कि खेल के साथ ही यहां नवरात्रि आयोजन का भी आनंद जरूर लीजिये। गुजरात के लोग आपकी मेहमान-नवाज़ी में, आपके स्वागत में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। वैसे मैंने देखा है कि कैसे हमारे नीरज चोपड़ा कल गरबा का आनंद ले रहे थे। उत्सव की यही खुशी, हम भारतीयों को जोड़ती है, एक दूसरे का साथ देने के लिए प्रेरित करती है। मैं इस अवसर पर, आप सभी को, सभी गुजरातवासियों और देशवासियों को एक बार फिर नवरात्रि की बधाई देता हूँ।

 

मेरे युवा मित्रों,

किसी भी देश की प्रगति और दुनिया में उसके सम्मान का, खेलों में उसकी सफलता से सीधा संबंध होता है। राष्ट्र को नेतृत्व देश का युवा देता है, और खेल-स्पोर्ट्स, उस युवा की ऊर्जा का, उसके जीवन निर्माण का प्रमुख स्रोत होता है। आज भी आप देखेंगे, दुनिया में जो देश विकास और अर्थव्यवस्था में टॉप पर हैं, उनमें से ज्यादातर मेडल लिस्ट में भी टॉप पर होते हैं। इसलिए, खेल के मैदान में खिलाड़ियों की जीत, उनका दमदार प्रदर्शन, अन्य क्षेत्रों में देश की जीत का भी रास्ता बनाता है। स्पोर्ट्स की सॉफ्ट पावर, देश की पहचान को, देश की छवि को कई गुना ज्यादा बेहतर बना देती है।

 

साथियों,

मैं स्पोर्ट्स के साथियों को अक्सर कहता हूँ- Success starts with action! यानी, आपने जिस क्षण शुरुआत कर दी, उसी क्षण सफलता की शुरुआत भी हो गई। आपको लड़ना पड़ सकता है, जूझना पड़ सकता है। आप लड़खड़ा सकते हैं, गिर सकते हैं। लेकिन, अगर आपने दौड़ने का जज़्बा नहीं छोड़ा है, आप चलते जा रहे हैं तो ये मानकर चलिए कि जीत खुद एक-एक कदम आपकी ओर बढ़ रही है। आजादी के अमृतकाल में देश ने इसी हौसले के साथ नए भारत के निर्माण की शुरुआत की है। एक समय था, जब दुनिया ओलंपिक्स जैसे वैश्विक खेल महाकुंभ के लिए दीवानी होती थी। लेकिन हमारे यहाँ वो खेल, बरसों तक सिर्फ जनरल नॉलेज के विषय के तौर पर ही समेट दिए गए थे। लेकिन अब मिजाज बदला है, मूड नया है, माहौल नया है। 2014 से ‘फ़र्स्ट एंड बेस्ट’ का जो सिलसिला देश में शुरू हुआ है, हमारे युवाओं ने वो जलवा खेलों में भी बरकरार रखा है।

आप देखिए, आठ साल पहले तक भारत के खिलाड़ी, सौ से भी कम इंटरनेशनल इवेंट्स में हिस्सा लेते थे। अब भारत के खिलाड़ी तीन सौ से भी ज्यादा इंटरनेशनल इवेंट्स में शामिल होते हैं। आठ साल पहले भारत के खिलाड़ी, 20-25 खेलों को खेलने ही जाते थे। अब भारत के खिलाड़ी करीब 40 अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेने जाते हैं। आज भारत के मेडल की संख्या भी बढ़ रही है और भारत की धमक भी बढ़ रही है। कोरोना के कठिन समय में भी देश ने अपने खिलाड़ियों का मनोबल कम नहीं होने दिया। हमने हमारे युवाओं को हर जरूरी संसाधन दिये, ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा। हमने स्पोर्ट्स स्पिरिट के साथ स्पोर्ट्स के लिए काम किया। TOPS जैसी योजनाओं के जरिए वर्षों तक मिशन मोड में तैयारी की। आज बड़े-बड़े खिलाड़ियों की सफलता से लेकर नए खिलाड़ियों के भविष्य निर्माण तक, TOPS एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। आज हमारे युवा हर खेल में नए रिकॉर्ड्स बना रहे हैं, और अपने ही रिकॉर्ड्स ब्रेक भी करते चले जा रहे हैं। टोक्यो में इस बार भारत ने ओलंपिक्स का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन किया। टोक्यो ओलंपिक में पहली बार युवाओं ने इतने मेडल्स देश के नाम किए। उसके बाद थॉमस कप में हमने हमारी बैडमिंटन टीम की जीत का जश्न मनाया। यूगांडा में पैरा-बैडमिंटन टीम ने भी 47 मेडल्स जीतकर देश की शान बढ़ाई। इस सफलता का सबसे ताकतवर पक्ष ये है कि इसमें हमारी बेटियाँ भी बराबरी से भागीदार हैं। हमारी बेटियाँ आज सबसे आगे तिरंगे की शान बढ़ा रही हैं।

 

साथियों,

खेल की दुनिया में ये सामर्थ्य दिखाने की क्षमता देश में पहले भी थी। ये विजय अभियान पहले भी शुरू हो सकता था। लेकिन, खेलों में जो professionalism होना चाहिए था, उसकी जगह परिवारवाद और भ्रष्टाचार ने ले रखी थी। हमने सिस्टम की सफाई भी की, और युवाओं में उनके सपनों के लिए भरोसा भी जगाया। देश अब केवल योजनाएँ नहीं बनाता, बल्कि अपने युवाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ता है। इसीलिए, आज फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे प्रयास एक जन-आंदोलन बन गए हैं। इसीलिए, आज खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा संसाधन भी दिए जा रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा अवसर भी मिल रहे हैं। पिछले 8 वर्षों में देश का खेल बजट करीब-करीब 70 प्रतिशत बढ़ा है। आज देश में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज बन रही हैं, कोने-कोने में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इतना ही नहीं रिटायर होने के बाद भी खिलाड़ियों को कोई तकलीफ न हो, इसके लिए भी प्रयास किया जा रहा है। रिटायर होने वाले खिलाड़ियों के अनुभवों का लाभ नई पीढ़ी को मिल सके, इस दिशा में भी काम हो रहा है।

 

साथियों,

स्पोर्ट्स, खेल, हजारों वर्षों से भारत की सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा रहा हैं। खेल हमारी विरासत और विकास यात्रा का जरिया रहे हैं। आजादी के अमृतकाल में देश अपनी विरासत पर गर्व के साथ इस परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है। अब देश के प्रयास और उत्साह केवल एक खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘कलारीपयट्टू’ और योगासन जैसे भारतीय खेलों को भी महत्व मिल रहा है। मुझे खुशी है कि इन खेलों को नेशनल गेम्स जैसे बड़े आयोजनों में शामिल किया गया है। जो खिलाड़ी इन खेलों का प्रतिनिधित्व यहाँ कर रहे हैं, उन्हें मैं एक बात विशेष तौर पर कहना चाहता हूं। आप एक ओर हजारों वर्ष पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, तो साथ ही खेल जगत के भविष्य को नेतृत्व भी दे रहे हैं। आने वाले समय में जब इन खेलों को वैश्विक मान्यता मिलेगी, तो इन क्षेत्रों में आपका नाम legends के रूप में लिया जाएगा।

 

साथियों,

आखिरी में, आप सभी खिलाड़ियों को मैं एक मंत्र और देना चाहता हूं। अगर आपको competition जीतना है, तो आपको commitment और continuity को जीना सीखना होगा। खेलों में हार-जीत को कभी भी हमें आखिरी नहीं मानना चाहिए। ये स्पोर्ट्स स्पिरिट आपके जीवन का हिस्सा होना चाहिए, तभी भारत जैसे युवा और भारत जैसा युवा देश, उसके सपनों को आप नेतृत्व देंगे, असीमित संभावनाओं को साकार करेंगे। और आपको याद रखना है, जहां गति होती है, वहीं पर प्रगति होती है। इसलिए, इस गति को आपको मैदान से बाहर भी बनाकर रखना है। ये गति आपके जीवन का मिशन होना चाहिए। मुझे विश्वास है, नेशनल गेम्स में आपकी जीत देश को जश्न का मौका भी देगी, और भविष्य के लिए एक नया विश्वास भी जगाएगी। इसी विश्वास के साथ, ये छत्तीसवें राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ का आह्वान करता हूं।