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Vijaya Dashami is about the victory of good over evil and terrorism is an enemy of humanity: PM Modi
The forces of humanity across the world must now unite against terrorism: PM Modi
Global community has to unite to put an end to terror, the “enemy of humanity”: PM Modi
India is a country which follows the principles of peace as taught by Lord Buddha: PM Modi
Women need to be respected & treated right, no matter what religion or background one comes from: PM

जय श्री राम, विशाल संख्या में पधारे प्यारे भाईयों और बहनों,

आप सबको विजयादशमी की अनेक-अनेक शुभकामनाएं। मुझे आज अति प्राचीन रामलीला, उस समारोह में सम्मिलित होने का सौभाग्‍य मिला है। हिन्‍दुस्‍तान की धरती का ये वो भू-भाग है, जिस भू-भाग ने दो ऐसे तीर्थरूप जीवन हमें दिए हैं- एक प्रभु राम और दूसरे श्री कृष्‍ण, इसी धरती से मिले। और ऐसी धरती पर विजयादशमी के पर्व पर आ करके नमन करना, इससे बड़ा जीवन का सौभाग्‍य क्‍या हो सकता है?

विजयादशमी का पर्व असत्‍य पर सत्‍य की विजय का पर्व है। आताताई को परास्‍त करने का पर्व है। हम रावण को तो हर वर्ष जलाते हैं, आखिरकार इस परम्‍परा से हमें क्‍या सबक लेना है? रावण को जलाते समय हमारा एक ही संकल्‍प होना चाहिए कि हम भी हमारे भीतर, हमारी सामाजिक रचना में, हमारे राष्‍ट्रीय जीवन में जो-जो बुराइयां हैं, उन बुराइयों को भी ऐसे ही खत्‍म करके रहेंगे। और हर वर्ष रावण जलाते समय हमने हमारी बुराइयों को खत्‍म करने के संकल्‍प को भी मजबूत बनाना चाहिए, और उसमें विजयादशमी के समय हिसाब-किताब भी करना चाहिए कि हमने कितनी बुराइयों को खत्‍म किया।

आज शायद उस समय का रावण का रूप नहीं होगा; आज शायद उस समय के जैसी राम और रावण की लड़ाई भी नहीं होगी, लेकिन हमारे भीतर अंतरद्वंध एक अविरल चलने वाली प्रक्रिया है, और इसलिए हमारे भीतर भी ये दशहरा जो शब्‍द है, उसका एक संदेश तो ये भी है कि हम हमारे भीतर की दस कमियों को हरें, उसको खत्‍म करें - दशहरा, उसको खत्‍म करें, जीवन को पतन लाने वाली जितनी-जितनी चीजें हैं, उस पर विजय प्राप्‍त किए बिना जीवन कभी सफल नहीं होता है। हर एक के अंदर सब कुछ समाप्‍त करने का सामर्थ्‍य नहीं होता है, लेकिन हर एक में ऐसी बुराइ्यों को समाप्‍त करने के प्रयास करने का सामर्थ्‍य तो ईश्‍वर ने दिया होता है, और इसमें समाज के नाते, व्‍यक्ति के नाते, राष्‍ट्र के नाते हमारे भीतर विचार के रूप में; आचार के रूप में; ग्रन्थियों के रूप में; बुरी सोच के रूप में; जो रावण बस रहा है, उसे भी हम लोगों ने समाप्‍त करके ही इस राष्‍ट्र को गौरवशाली बनाना होगा। 


मैं इस समिति का इसलिए आभारी हूं कि जैसे लोकमान्‍य तिलक जी ने गणेश-उत्‍सव को सार्वजनिक उत्‍सव बना करके सामाजिक चेतना जगाने के लिए एक अवसर के रूप में परिवर्तित किया था, आपने भी इस रामलीला के मंचन को सिर्फ पुरानी चीजों को भक्ति भाव से याद करने तक सीमित नहीं रखा, एक कौतुहलवश नई पीढ़ी देखने के लिए आ जाए, कलाकारों को अवसर मिल जाए, इसलिए नहीं किया। लेकिन आपने हर रामलीला के समय समाज के अंदर जो बुराइयां हैं, ऐसी कोई न कोई बुराइयां, या समाज में जो कोई अच्‍छाई उभारनी है, उस अच्‍छाई के ऊपर केन्द्रित करते हुए आपने इस रामलीला के मंचन की परम्‍परा खड़ी की है। मैं समझता हूं कि अद्भुत और पूरे देश के लोगों ने प्रेरणा प्राप्‍त करने जैसा ये काम यहां की रामलीला के द्वारा हो रहा है। और उस रामायण के पात्रों के माध्‍यम से भी हम आधुनिक जीवन के लिए संदेश दे सकते हैं, सामर्थ्‍य है उसमें। और ये देश की विशेषता यही है कि हजारों साल से हमारे यहां हमारी सांस्‍कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की यही तो सबसे बड़ी व्‍यवस्‍था रही है कि कथा के द्वारा, कला के द्वारा हमने इस परम्‍परा को जीवित रखा है, और उसका अपना एक समाज जीवन में महामूल्‍य होता है।

इस बार का मंचन का विषय रहा है आतंकवाद। आतंकवाद ये मानवता का दुश्‍मन है, और प्रभु राम मानवता का प्रतिनिधित्‍व करते हैं; मानवता के उच्‍च मूल्‍यों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं; मानवता के आदर्शों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं; मर्यादाओं को रेखांकित करते हैं; और विवेक, त्‍याग, तपस्‍या, उसकी एक मिसाल हमारे बीच छोड़ करके गए हैं। और इसलिए और आतंकवाद के खिलाफ सबसे पहले कौन लड़ा था? कोई फौजी था क्‍या? कोई नेता था क्‍या?

रामायण गवाह है कि आतंकवाद के खिलाफ सबसे पहले लड़ाई किसी ने लड़ी थी तो वो जटायु ने लड़ी थी। एक नारी के सम्‍मान के लिए रावण जैसी सामर्थ्‍यवान शक्ति के खिलाफ एक जटायु जूझता रहा, लड़ता रहा। आज भी अभय का संदेश कोई देता है तो जटायु देता है। और इसलिए सवा सौ करोड़ देशवासी- हम राम तो नहीं बन पाते हैं, लेकिन अनाचार, अत्‍याचार, दुराचार के सामने हम जटायु के रूप में तो कोई भूमिका अदा कर सकते हैं। अगर सवा सौ करोड़ देशवासी एक बन करके आतंकवादियों की हर हरकत पर अगर ध्‍यान रखें, चौकन्‍ने रहें तो आतंकवादियों का सफल होना बहुत मुश्किल होता है।

आज से 30-40 साल पहले जब हिन्‍दुस्‍तान दुनिया को हमारी आतंकवाद के कारण जो परेशानियां हैं, उसकी चर्चा करता था तो विश्‍व के गले नहीं उतरता था। 92-93 की घटना मुझे याद है, मैं अमेरिका के State Department के State Secretary से बात कर रहा था और जब मैं आतंकवाद की चर्चा करता था तो वो मुझे कह रहे थे ये तो आपका Law & Order problem है। मैं उनको समझा रहा था कि Law & Order problem नहीं है, आतंकवाद कोई और चीज है, उनके गले नहीं उतरता था। लेकिन 26/11 के बाद सारी दुनिया के गले उतर गया है आतंकवाद कितना भयंकर होता है। और कोई माने कि हम तो आतंकवाद से बचे हुए हैं तो गलतफहमी में न रहें, आतंकवाद को कोई सीमा नहीं है, आतंकवाद को कोई मर्यादा नहीं है, वो कहीं पर जा करके किसी भी मानवतावादी चीजों को नष्‍ट करने पर तुला हुआ है। और इसलिए विश्‍व की मानवतावादी शक्तियों का आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना अनिवार्य हो गया है। जो आतंकवाद करते हैं उनको जड़ से खत्‍म करने की जरूरत पैदा हुई है। जो आतंकवाद को पनाह देते हैं, जो आतंकवाद को मदद करते हैं, अब तो उनको भी बख्‍शा नहीं जा सकता है। पूरा विश्‍व तबाह हो रहा है, दो दिन से हम टीवी पर सीरिया की एक छोटी बालिका का चित्र देख रहे हैं; दो दिन से हम सीरिया की एक छोटी बालिका का चित्र देख रहे हैं टीवी पर, आंख में आंसू आ जाते हैं। किस प्रकार से निर्दोषों की जान ली जा रही है। और इसलिए आज जब हम रावण वध और रावण को जला रहे हैं, तब पूरे विश्‍व ने, सिर्फ भारत ने नहीं, सिर्फ मुझे और आपने नहीं, पूरे विश्‍व की मानवतावादी शक्तियों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बन करके लड़ाई लड़नी ही पड़ेगी। आतंकवाद को खत्‍म किए बिना मानवता की रक्षा संभव नहीं होगी।

भाइयो, बहनों जब मैं समाज के भीतर हमारे यहां जो बुराइयां हैं, उसको भी हमें नष्‍ट करना होगा, और यही विजयादशमी से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। रावण रूपी वो बातें छोटी होंगी, लेकिन वो भी एक प्रकार की रावण रूप ही है। दुराचार, भ्रष्‍टाचार, हमारे समाज को तबाह करने वाले ये रावण नहीं हैं तो क्‍या हैं? इसको भी हमें खत्‍म करने के लिए देश के नागरिकों को संकल्‍पबद्ध होना पड़ेगा।

गंदगी, ये भी रावण का ही एक छोटा सा रूप ही है। ये गंदगी है जो हमारे गरीब बच्‍चों की जान ले लेती है। बीमारी गरीब परिवारों को तबाह कर देती है। अगर हम गंदगी से मुक्ति पाएं, गंदगी रूपी रावण से मुक्ति पाएं, तो देश के करोड़ों-करोड़ों परिवार जो अल्पायु में मौत के शरण हो जाते हैं; बीमारी के शिकार हो जाते हैं; उनको हम बचा सकते हैं। अशिक्षा, अंधश्रद्धा, ये भी तो समाज को नष्‍ट करने वाली हमारी कमियां हैं। और उससे भी मुक्ति पाने के लिए हमें संकल्‍प करना होगा।

आज एक तरफ हम विजयादशमी का पर्व मना रहे हैं, तो उसी समय पूरा विश्‍व आज Girl Child Day भी मना रहा है। आज Girl Child Day भी है। मैं जरा अपने-आप से पूछना चाहता हूं, मैं देशवासियों से पूछना चाहता हूं, कि एक सीता माता के ऊपर अत्‍याचार करने वाले रावण को तो हमने हर वर्ष जलाने का संकल्‍प किया हुआ है, और जब तक पीढि़यां जीती रहेंगी रावण को जलाते रहेंगे क्‍योंकि सीता माता का अपहरण किया था; लेकिन कभी हमने सोचा है कि जब पूरा विश्‍व आज Girl Child Day मना रहा है तब हम बेटे और बेटी में फर्क करके मां के गर्भ में कितनी सीताओं को मौत के घाट उतार देते हैं। ये हमारे भीतर के रावण को खत्‍म कौन करेगा? क्‍या आज भी 21वीं शताब्‍दी में मां के गर्भ में बेटियों को मारा जाएगा? अरे एक सीता के लिए जटायु बलि चढ़ सकता है, तो हमारे घर में पैदा होने वाली सीता को बचाना हम सबका दायित्‍व होना चाहिए। घर में बेटा पैदा हो, जितना स्‍वागत-सम्‍मान हो, बेटी पैदा हो उससे भी बड़ा स्‍वागत-सम्‍मान हो, ये हमें स्‍वभाव बनाना होगा।

इस बार ओलंपिक में देखिए, हमारे देश की बेटियों ने नाम को रोशन कर दिया। अब ये बेटी-बेटे का फर्क हमारे यहां रावण रूपी मानसिकता का ही अंश है। शिक्षित हो; अशिक्षित हो, गरीब हो; अमीर हो, शहरी हो; ग्रामीण हो, हिन्‍दू हो; मुसलमान हो, सिख हो; इसाई हो, बौद्ध हो; किसी भी सम्‍प्रदाय के क्‍यों न हो; किसी भी आर्थिक पार्श्‍वभूमि के क्‍यों न हो; किसी भी सामाजिक पार्श्‍वभूमि के क्‍यों न हो, लेकिन बेटियां समान होनी चाहिए; महिलाओं के अधिकार समान होने चाहिए, महिलाओं को 21वीं सदी में न्‍याय मिलना चाहिए कि किसी भी परम्‍परा से जुड़े क्‍यों न हों; किसी भी समाज से जुड़े क्‍यों न हों, महिलाओं का गौरव करने का ये युग हमें स्‍वीकारना होगा। बेटियों का गौरव करना होगा; बेटियों को बचाना होगा। हमारे भीतर ऐसे जो रावण के रूप बिखरे पड़े हैं उससे इस देश को हमें मुक्ति दिलानी है। और इसलिए जब लक्ष्‍मण की नगरी में आया हूं, गोस्‍वामी तुलसीदास की धरती पर आया हूं। श्रीकृष्‍ण के जीवन में भी युद्ध था, राम के जीवन में भी युद्ध था, लेकिन हम वो लोग हैं जो युद्ध से बुद्ध की ओर चले जाते हैं। समय के बंधनों से, परिस्थिति की आवश्‍यकताओं से युद्ध कभी-कभी अनिवार्य हो जाते हैं, लेकिन ये धरती का मार्ग युद्ध का नहीं, ये धरती का मार्ग बुद्ध का है। और ये देश; ये देश सुदर्शन चक्‍करधारी मोहन को युगपुरुष मानता है, जिसने युद्ध के मैदान में गीता कही; यही देश चरखाधारी मोहन, जिसने अहिंसा का संदेश‍ दिया, उसको भी युगपुरुष मानता है। यही इस देश की विशेषता है कि दोनों तराजु पर हम संतुलन ले करके चलने वाले लोग हैं। और इसलिए हम युद्ध से बुद्ध की यात्रा वाले लोग हैं। हम हमारे भीतर के रावण को खत्‍म करने का संकल्‍प करने वाले लोग हैं। हमारे देश को सुजलाम-सुफलाम बनाने का संकल्‍प करके निकले हुए लोग हैं।

ऐसे समय अति प्राचीन ये रंगमंच जहां रामलीला होती हैं, अनेक पीढि़यों के बालक कभी राम और लक्ष्‍मण के रूप में, मां सीता के रूप मे इसी स्‍थान पर उनकी चरण-रज पड़ी होगी और वो पल वो इन्‍सान नहीं रहते; वो भक्ति में लीन हुए होते हैं, वो पात्र नहीं होते हैं; वो परमात्‍मा का रूप बन जाते हैं। उसी मंच पर आ करके आज इन सब रावणों के खिलाफ जो हमारे भीतर हैं, चाहे जातिवाद हो, चाहे वंशवाद हो, चाहे ऊंच-नीच की बुराई हो, चाहे सम्‍प्रदायवाद का जनून हो, ये सारी बुराइयां किसी न किसी रूप में बिखरा पड़ा रावण का ही रूप है। और इससे मुक्ति पाना, इसे खत्‍म करना, और एकात्‍म हिन्‍दुस्‍तान; एकरस हिन्‍दुस्‍तान; समरस हिन्‍दुस्‍तान इसी सपने को पार करने का संकल्‍प करके इस विजयादशमी के पावन पर्व पर हम बस प्रभु रामजी के हम पर आशीर्वाद बने रहें, मानवता के मार्ग पर चलने की हमें ताकत मिले, बुद्ध का मार्ग हमारा अन्तिम मार्ग बना रहे।

इसी एक अपेक्षा के साथ आप सबको विजयादशमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए जय श्रीराम। आवाज दूर-दूर तक जानी चाहिए। जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय जय श्रीराम, जय जय श्रीराम।

'মন কী বাত'কীদমক্তা হৌজিক অদোমগী ৱাখল্লোন অমদি তান-ৱাশিং শেয়র তৌবীয়ু!
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Text of PM's speech at joint conference of Central Vigilance Commission & Central Bureau of Investigation at Kevadia
October 20, 2021
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“In the last 6-7 years, the government has succeeded in instilling the confidence that it is possible to contain corruption”
“Today there is political will to attack corruption and continuous improvement is also being carried out at the administrative level”
“New India Innovates, Initiates and Implements. New India is no longer ready to accept that corruption is part of the system. It wants its systems transparent, processes efficient and governance smooth.”
“Government undertook the task of reduction of government interference in the lives of the common people in a mission mode by simplifying the government procedures”
“Approach of trust and technology has strengthened efficient governance and ease of doing business”
“Along with technology and alertness- simplicity, clarity, transparency in the processes will go a long way for preventive vigilance. This will simplify our work and save the resources of the nation”
“Ensure that there is no safe haven for anyone anywhere who deceives the country and countrymen”
“CVC and CBI and other anti-corruption institutions should remove such processes that come in the way of new India”

लोकपाल के अध्यक्ष जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष जी, सेंट्रल विजिलेंस कमिशनर सुरेश एन. पटेल जी, सीबीआई डायरेक्टर सुबोध कुमार जायसवाल जी, प्रतिष्ठित पैनलिस्ट, अलग-अलग राज्यों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण, कार्यक्रम में उपस्थित अन्य महानुभाव,

देवियों और सज्जनों !

करप्शन से जुड़ी नई चुनौतियों के सार्थक समाधान तलाशने के लिए, आप सब सरदार वल्लभभाई पटेल के सानिध्य में महामंथन के लिए जुटे हैं। सरदार पटेल ने हमेशा, गवर्नेंस को भारत के विकास का, जन सरोकार का, जनहित का, आधार बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। आज हम भारत की आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। आने वाले 25 वर्ष, यानि इस अमृतकाल में आत्मनिर्भर भारत के विराट संकल्पों की सिद्धि की तरफ देश बढ़ रहा है। आज हम गुड गवर्नेंस को एक प्रकार से – गुड गवर्नेस प्रो पीपल, प्रोएक्टिव गवर्नेंस को सशक्त करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आप सभी साथियों की कर्मण्यता, कर्मशीलता सरदार साहेब के आदर्शों को मजबूत करने वाली है।

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है-

न्यायमूलं सुराज्यं

स्यात् !

यानि सुराज तभी संभव है जब सभी को न्याय मिले। भ्रष्टाचार-करप्शन, छोटा हो या बड़ा, वो किसी ना किसी का हक छीनता है। ये देश के सामान्य नागरिक को उसके अधिकारों से वंचित करता है, राष्ट्र की प्रगति में बाधक होता है और एक राष्ट्र के रूप में हमारी सामूहिक शक्ति को भी प्रभावित करता है। आप सभी साथियों पर, जिन संस्थानों से आपका संबंध है उन पर, करप्शन रूपी अन्याय को खत्म करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। आज आपको सरदार पटेल जी की छत्रछाया में, और माता नर्मदा के तट पर अपने संकल्प को फिर दोहराना है, देश के प्रति अपने दायित्वों के ऐहसास को नई ऊर्जा से भरना है।

साथियों,

बीते 6-7 सालों के निरंतर प्रयासों से हम देश में एक विश्वास कायम करने में सफल हुए हैं, कि बढ़ते हुए करप्शन को रोकना संभव है। आज देश को ये विश्वास हुआ है कि बिना कुछ लेन-देन के, बिना बिचौलियों के भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है। और आज देश को ये भी विश्वास हुआ है कि देश को धोखा देने वाले, गरीब को लूटने वाले, कितने भी ताकतवर क्यों ना हो, देश और दुनिया में कहीं भी हों, अब उन पर रहम नहीं किया जाता, सरकार उनको छोड़ती नहीं है।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि ये भरोसा इतनी आसानी से कायम नहीं हुआ है। पहले जिस तरह सरकारें चलीं, पहले जिस तरह व्यवस्थाएं चलीं, उनमें राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति, दोनों की कमी थी। आज भ्रष्टाचार पर प्रहार की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी है और प्रशासनिक स्तर पर निरंतर सुधार भी किया जा रहा है।

साथियों,

आज 21वीं सदी का भारत, आधुनिक सोच के साथ ही टेक्नोलॉजी को मानवता के हित में इस्तेमाल करने पर बल देता है। न्यू इंडिया Innovate करता है, Initiate करता है और Implement करता है। न्यू इंडिया अब ये भी मानने को तैयार नहीं कि भ्रष्टाचार सिस्टम का हिस्सा है। उसे System Transparent चाहिए, Process Efficient चाहिए और Governance Smooth चाहिए।

साथियों,

आज़ादी के बाद के दशकों में देश में जो व्यवस्था बनी, जो सोच रही, उसमें यही भावना प्रधान थी कि सरकार सब कुछ अपने कब्जे में रखे। तब की सरकारों ने Maximum Control अपने पास रखे और इस वजह से सिस्टम में अनेक प्रकार की गलत प्रवृत्तियों ने जन्म ले लिया। Maximum Control, चाहे वो घर में हो, परिवार में या फिर देश में, Maximum Damage करता ही है। इसलिए हमने देशवासियों के जीवन से सरकार के दखल को कम करने को एक मिशन के रूप में लिया। हमने सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए। मैक्सिमम गवर्नमेंट कंट्रोल के बजाय मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस पर फोकस किया।

साथियों,

आप सभी इस बात के भी साक्षी हैं कि देश के नागरिकों को सशक्त करने के लिए किस तरह Trust और Technology पर विशेष बल दिया गया है। आज देश में जो सरकार है, वो देश के नागरिकों पर ट्रस्ट करती है,

उन्हें शंका की नजर से नहीं देखती। इस भरोसे ने भी भ्रष्टाचार के अनेकों रास्तों को बंद किया है। इसलिए दस्तावेज़ों की वैरीफिकेशन के लेयर्स को हटाकर, करप्शन और अनावश्यक परेशानी से बचाने का रास्ता बनाया है। डिजिटल टेक्नॉलॉजी से, जन्म प्रमाण पत्र से लेकर पेंशन के लिए ज़रूरी जीवन प्रमाण पत्र तक सैकड़ों सुविधाएं बिना बिचौलियों के डिलीवर की जा रही हैं। ग्रुप सी और ग्रुप डी की भर्तियों से इंटरव्यू खत्म किया तो गरीब और मिडिल क्लास को करप्शन के दबाव से मुक्ति मिली है। गैस सिलेंडर की बुकिंग से लेकर टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं तक ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रियाएं, उन लंबी लाइनों से मुक्ति दे रही हैं जो भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा ज़रिया रही हैं।

साथियों,

Trust और Technology से efficient governance और Ease of doing business पर क्या असर हुआ है, ये आप सभी भलीभांति जानते हैं। परमीशन और कंप्यालेंस के नाम पर, बिजनेस को शुरु करने और बंद करने के नाम पर, बैंकों से लोन लेने या लोन को रफा-दफा करने को लेकर, जो कुछ भी अतीत में हुआ है, जो देश को नुकसान हुआ है, उसे अब ठीक किया जा रहा है। बीते सालों में सैकड़ों ऐसे पुराने कानूनों के जाल को हमने साफ किया है और आज की चुनौतियों को देखते हुए सख्त नए कानून भी देश को दिए हैं। हज़ारों कंप्लायेंस और भांति-भांति के NoC, तरह-तरह की परमिशंस के नाम पर करप्शन का कैसा खेल चलता था, ये आपसे बेहतर कौन जानता है। बीते सालों में हज़ारों कंप्लायेंस खत्म किए जा चुके हैं और आने वाले समय में ऐसे हज़ारों कंप्लायेंस और खत्म करने का इरादा है। अधिकतर परमीशंस को फेसलेस किया जा चुका है और सेल्फ असेसमेंट, सेल्फ डेक्लेरेशन जैसी प्रक्रियाओं को बिजनेस के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। GeM यानि गवर्नमेंट e-Market प्लेस की वजह से सरकारी खरीद और e-tendering में पारदर्शिता आई है, उलझने कम हुई हैं। डिजिटल फुटप्रिंट्स ज्यादा से ज्यादा होने से इन्वेस्टिगेशंस भी ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो रही है। हाल में लॉन्च किया गए- पीएम गतिशक्ति- नेशनल मास्टर प्लान से भी डिसिजन मेकिंग से जुड़ी अऩेक मुश्किलें समाप्त होने वाली हैं।

साथियों,

जब हम ट्रस्ट और टेक्नॉलॉजी के दौर में आगे बढ़ रहे हैं, तो आप सभी साथियों, आप जैसे कर्मयोगियों पर देश का ट्रस्ट भी उतना ही अहम है। हम सभी को एक बात हमेशा याद रखनी है- राष्ट्र प्रथम ! हमारे काम की एक ही कसौटी है- जनहित, जन-सरोकार !

अगर हमारे फैसले, इस कसौटी पर खरे उतरते हैं, तो मैं हमेशा देश के हर कर्मयोगी के पीछे पूरी मजबूती से खड़ा मिलूंगा। सरकार ने सख्त कानूनी रास्ते बनाए हैं। उनको लागू करना आपका कर्म है। लेकिन कानून की ताकत के साथ ही उचित व्यवहार के लिए प्रोत्साहित करना, Motivate करना ये भी उतना ही बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

आमतौर पर आपका काम तब शुरु होता है जब कोई घोटाला, भ्रष्टाचार, अनियमितता हो जाती है। मैं आपसे एक विचार साझा करना चाहता हूं। ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि हम प्रिवेंटिव विजिलेंस (Preventive Vigilance) पर काम करें। अगर हम सतर्क हैं, एलर्ट हैं तो ये काम आसानी से किया जा सकता है। आप तकनीक का, अपने अनुभव का सहारा लेकर इस व्यवस्था को और मजबूत कर सकते हैं। प्रिवेंटिव विजिलेंस के लिए सतर्कता, तकनीक के साथ ही प्रक्रिया में सरलता, स्पष्टता, ट्रांसपरेंसी इसे लाकर हम कई बड़े बदलाव ला सकते हैं।

आज देश में कई सरकारी विभाग, बैंक, पीएसयू, वित्तीय संस्थान प्रिवेंटिव विजिलेंस की दिशा में कई महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। हम सभी ने अपने घरों में अनेक बार सुना है Prevention is better than cure आप कोशिश करें कि Preventive Vigilance, आपकी कार्यप्रणाली का हिस्सा बने। इससे एक तो आपका काम आसान होगा दूसरा देश के समय, संसाधन, शक्ति को बचाया जा सकेगा। मुझे बताया गया है कि इसे देखते हुए CVC ने अपनी नियमावली में कुछ सुधार किए हैं। इस रूलबुक में ई-सतर्कता पर एक अतिरिक्त अध्याय जोड़ा गया है। अपराध करने वाले तो हर महीने हर दिन नए नए तरीके खोज लेते हैं ऐसे में हमें उनसे दो कदम आगे ही रहना है।

साथियों,

आपको याद रखना है कि आपकी साझेदारी, इस मिट्टी से है, मां भारती से है। देश और देशवासियों को धोखा देने वाले के लिए देश और दुनिया में कोई भी Safe haven नहीं होना चाहिए। कोई कितना भी ताकतवर हो, अगर वो राष्ट्रहित के, जनहित के विरुद्ध आचरण कर रहा है, तो उस पर एक्शन से पीछे हटने की ज़रूरत नहीं है। हमें राष्ट्रहित में अपना कर्म करते जाना है, अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाना है। और एक बात आप सभी को याद रखनी है। आपका काम किसी को डराने का नहीं है बल्कि गरीब से गरीब के मन-मस्तिष्क से बेवजह का डर निकालना है, हिचक के माहौल को दूर करना है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध देश की लड़ाई दिनों-दिन और मजबूत हो, इसके लिए आपके प्रयास बहुत जरूरी हैं। हमें इस लड़ाई को एजेंसियों तक ही सीमित नहीं रखना है। इसलिए आज टेक्नॉलॉजी के नकारात्मक पहलुओं से निपटना भी बहुत ज़रूरी है। जैसे कोई भी ताला फ़ूलप्रूफ नहीं हो सकता, गलत नीयत वाला उसकी चाबी खोज ही लेता है। वैसे ही टेक्नॉलॉजी का तोड़ भी अपराधी मानसिकता वाले ढूंढ ही लेते हैं। मज़बूत डिजिटल गवर्नेंस के साथ साइबर क्राइम और साइबर फ्रॉड भी एक बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। मुझे विश्वास है कि आप सभी एक्सपर्ट आने वाले दिनों में इन चुनौतियों पर गंभीरता से मंथन करेंगे। एक और आग्रह मैंने 15 अगस्त को लाल किले से सभी सरकारी विभागों में नियमों, प्रक्रियाओं की समीक्षा को लेकर किया था। मैं CVC और CBI सहित सभी एंटीकरप्शन संस्थाओं और संस्थाओं से भी कहूंगा की, आपके यहां जो दशकों से चली आ रही ऐसी प्रक्रियाएं हैं, जो नए भारत की नई सोच के आड़े आती हैं, उनको हटाया जाए। नए भारत की नई सोच और नए संकल्पों के लिए इससे बेहतर समय और क्या हो सकता है देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आप भी इस महायज्ञ में अपने प्रयासों के साथ जुट जाइए। आप वो लोग है जिन्हें सिस्टम की बारीकियां भी पता हैं और वो कमियां भी पता हैं जहां से भ्रष्टाचार पनपता है। करप्शन के लिए जीरो जॉरो टॉलरेंस की न्यू इंडिया की नीति को आपको दिनोंदिन मजबूत बनाना है। आप इस महामंथन के दौरान भी इस प्रकार की प्रक्रियाओं और कानूनों पर चर्चा करेंगे।

आप कानूनों को इस तरह लागू करें कि गरीब सिस्टम के करीब आएं और भ्रष्टाचारी एक-एक कर सिस्टम से बाहर हों। ये बहुत बड़ी देशसेवा होगी। आज़ादी के अमृतकाल में करप्शन मुक्त समाज के निर्माण के लिए आप इनोवेशंस के साथ आगे बढ़ेंगे, इसी कामना के साथ आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं !

बहुत- बहुत धन्यवाद !