Share
 
Comments
"PM: Let our lives be not just successful (Safal), but also meaningful (Saarthak) "
"हमारी जिंदगियां न केवल सफल, बल्‍कि सार्थक भी रहें : प्रधानमंत्री "

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today described the Late Shri Eknath Ranade as a person who inspired us to make life not just successful (Safal), but also meaningul (Saarthak). He was speaking at the inaugural ceremony of the 'Mananeeya Eknath Ranade Janm Shati Parva' in New Delhi today. 

eknath centenary 684 (1)

Shri Narendra Modi said Shri Eknath Ranade should inspire us to create an India that is both bhavya (prosperous) and divya (spiritual). He said India`s poor seek prosperity, and the world seeks spirituality from India. 

The Prime Minister said Shri Ranade's mission was to prepare youth of Swami Vivekananda`s dreams. He appreciated the work done by the Vivekananda Kendra in the North-Eastern states. He said Shri Ranade indeed lived up to the motto of "One life. One mission." 

eknath centenary 684 (4) eknath centenary 684 (6)

The Prime Minister spoke at length about his personal experiences with Shri Ranade, calling it his good fortune that after working with Shri Ranade in his formative years, he was today participating in his 'Janma Shati Parva.' He described Shri Ranade as a perfectionist. Referring to Shri Ranade`s role in the creation of the Vivekananda rock memorial at Kanyakumari, the Prime Minister said Mr. Ranade paid attention to minor details like which direction the statue`s eye will look at, and what anti-corrosion material should be used to ensure the statue`s longevity.

eknath centenary 684 (8)

The Prime Minister also praised Shri Ranade as a unifier and one who laid stress on people`s participation - Jan Bhaagidaari. He said he had sought support from leaders across the political spectrum, for the construction of the Vivekananda Rock Memorial. He said many, many Indians above the age of 40, would recall donating a small sum of money for this memorial, and were hence part of it.  eknath centenary 684 (9)

'মন কী বাত'কীদমক্তা হৌজিক অদোমগী ৱাখল্লোন অমদি তান-ৱাশিং শেয়র তৌবীয়ু!
Modi Govt's #7YearsOfSeva
Explore More
It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi

Popular Speeches

It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi
Modi govt's big boost for auto sector: Rs 26,000 crore PLI scheme approved; to create 7.5 lakh jobs

Media Coverage

Modi govt's big boost for auto sector: Rs 26,000 crore PLI scheme approved; to create 7.5 lakh jobs
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM's speech at inauguration of Defence Offices Complexes in New Delhi
September 16, 2021
Share
 
Comments
India has taken another step in developing the nation’s capital according to needs and aspirations of a new India in the 75th year of India’s independence: PM
A big step towards the construction of a modern defense enclave in the capital: PM
The capital of any country is a symbol of the thinking, determination, strength and culture of that country: PM
India is the mother of democracy, the capital of India should be such, in which there are citizens, people at the center: PM
Modern infrastructure has a big role in the government’s focus on ease of living and ease of doing business:PM
When policies and intentions are clear, will power is strong and efforts honest, everything is possible: PM
Before-time Completion of the projects is a manifestation of changed approach and thinking: PM

कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे वरिष्ठ सहयोगी श्रीमान राजनाथ सिंह जी, हरदीप सिंह पुरी जी, अजय भट्ट जी, कौशल किशोर जी, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत जी, तीनों सेनाओं के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारीगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आज़ादी के 75वें वर्ष में आज हम देश की राजधानी को नए भारत की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुसार विकसित करने की तरफ एक महत्‍वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं। ये नया डिफेंस ऑफिस कॉम्लेक्स हमारी सेनाओं के कामकाज को अधिक सुविधाजनक, अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों को और सशक्त करने वाला है। इन नई सुविधाओं के लिए डिफेंस से जुड़े सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आप सभी परिचित हैं कि अभी तक डिफेंस से जुड़ा हमारा कामकाज दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बनाए गए हटमेंट्स से ही चल रहा था। ऐसे हटमेंट्स जिनको उस समय घोड़ों के अस्तबल और बैरकों से संबंधित ज़रूरतों के अनुसार बनाया गया था। आज़ादी के बाद के दशकों में इनको रक्षा मंत्रालय, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के दफ्तरों के रूप में विकसित करने के लिए समय-समय पर हल्‍की-फुल्‍की मरम्म्त हो जाती थी, कोई ऊपर के अधिकारी आने वाले हैं तो थोड़ा और पेंटिंग हो जाता था और ऐसे ही चलता रहा। इसकी बारीकियों को जब मैंने देखा तो मेरे मन में पहला विचार ये आया कि ऐसी बुरी अवस्‍था में हमारे इतने प्रमुख सेना के लोग देश की रक्षा के लिए काम करते हैं। इसकी इस हालत के संबंध में हमारे दिल्‍ली की मीडिया ने कभी लिखा क्‍यों नहीं। ये मेरे मन में होता था, वरना ये ऐसी जगह थी कि जरूर कोई न कोई आलोचना करता कि भारत सरकार क्‍या कर रही है। लेकिन पता नहीं किसी ने इस पर ध्‍यान नहीं दिया। इन हटमेन्ट्स में आने वाली परेशानियों को भी आप लोग भली-भांति जानते हैं।

आज जब 21वीं सदी के भारत की सैन्य ताकत को हम हर लिहाज़ से आधुनिक बनाने में जुटे हैं, एक से एक आधुनिक हथियारों से लैस करने में जुटे हैं, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जा रहा है, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के माध्यम से सेनाओं का को-ऑर्डिनेशन बेहतर हो रहा है, सेना की ज़रूरत की प्रोक्योरमेंट जो सालों-साल चलती थी वो तेज़ हुई है, तब देश की रक्षा-सुरक्षा से जुड़ा कामकाज दशकों पुराने हटमेंट्स से हो, ये कैसे संभव हो सकता है और इसलिए इन स्थितियों को बदलना भी बहुत ज़रूरी था और मैं ये भी बताना चाहूंगा कि जो लोग सेंट्रल विस्‍टा के प्रोजेक्‍ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे वे बड़ी चतुराई से बड़ी चालाकी से सेंट्रल विस्‍टा प्रोजेक्‍ट का यह भी एक हिस्‍सा है। सात हजार से अधिक सेना के अफसर जहां काम करते हैं वो व्‍यवस्‍था विकसित हो रही है, इस पर बिल्‍कुल चुप रहते थे क्‍योंकि उनको मालूम था जो भ्रम फैलाने का इरादा, झूठ फैलाने का इरादा है, जैसे ही यह बात सामने आएगा तो फिर उनकी सारी गपबाजी चल नहीं पाएगी लेकिन आज देश देख रहा है कि सेंट्रल विस्‍टा के पीछे हम कर क्‍या रहे हैं। अब केजी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यु में बने ये आधुनिक ऑफिस, राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हर काम को प्रभावी रूप से चलाने में बहुत मदद करेंगे। राजधानी में आधुनिक डिफेंस एऩ्क्लेव के निर्माण की तरफ ये बड़ा और महत्‍वपूर्ण स्टेप है। दोनों परिसरों में हमारे जवानों और कर्मचारियों के लिए हर ज़रूरी सुविधा दी गई है। और मैं आज देशवासियों के सामने मेरे मन में जो मंथन चल रहा था उसका भी जिक्र करना चाहता हूं।

2014 में आपने मुझे सेवा करने का सौभाग्‍य दिया और तब भी मुझे लगता था कि ये सरकारी दफ्तरों के हाल ठीक नहीं है। संसद भवन के हाल ठीक नहीं है और 2014 में ही आकर मैं पहला ये काम कर सकता था लेकिन मैंने वो रास्‍ता नहीं चुना। मैंने सबसे पहले भारत की आन-बाण-शान, भारत के लिए जीने वाले भारत के लिए जूझने वाले हमारे देश के वीर जवान, जो मातृभूमि के लिए शहीद हो गए, उनका स्‍मारक बनाना सबसे पहले तय किया और आज जो काम आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था वो काम 2014 के बाद प्रारंभ हुआ और उस काम को पूर्ण करने के बाद हमने हमारे दफ्तरों को ठीक करने के लिए सेंट्रल विस्‍टा का काम उठाया। सबसे पहले हमने याद किया मेरे देश के वीर शहीदों को, वीर जवानों को।

साथियों,

ये जो निर्माण कार्य हुआ है कामकाज के साथ-साथ यहां आवासीय परिसर भी बनाए गए हैं। जो जवान 24x7 महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्यों में लगे रहते हैं, उनके लिए ज़रूरी आवास, किचन, मेस, इलाज से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं इन सबका भी निर्माण किया गया है। देशभर से जो हजारों रिटायर्ड सैनिक अपने पुराने सरकारी कामकाज के लिए यहां आते हैं, उनका भी विशेष ख्‍याल रखना, उनको ज़्यादा परेशानी ना हो इसके लिए उचित कनेक्टिविटी का यहां ध्यान रखा गया है। एक अच्छी बात ये भी है कि जो बिल्डिगें बनी हैं, वो इको-फ्रेंडली हैं और राजधानी के भवनों का जो पुरातन रंग-रूप है, जो उसकी एक पहचान है, बरकरार रखा गया है। भारत के कलाकारों की आकर्षक कलाकृतियों को, आत्मनिर्भर भारत के प्रतीकों को यहां के परिसरों में स्थान दिया गया है। यानि दिल्ली की जीवंतता और यहां के पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए, हमारी सांस्कृतिक विविधता का आधुनिक स्वरूप यहां हर कोई अनुभव करेगा।

साथियों,

दिल्ली को भारत की राजधानी बने 100 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। 100 वर्ष से अधिक के इस कालखंड में यहां की आबादी और अन्य परिस्थितियों में बहुत बड़ा अंतर आ चुका है। जब हम राजधानी की बात करते हैं तो वो सिर्फ एक शहर नहीं होता है। किसी भी देश की राजधानी उस देश की सोच, उस देश के संकल्‍प, उस देश का सामर्थ्य और उस देश की संस्कृति का प्रतीक होती है। भारत तो लोकतंत्र की जननी है। इसलिए भारत की राजधानी ऐसी होनी चाहिए, जिसके केंद्र में लोक हो, जनता जनार्दन हो। आज जब हम Ease of living और Ease of doing business पर फोकस कर रहे हैं, तो इसमें आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी उतनी ही बड़ी भूमिका है। सेंट्रल विस्टा से जुड़ा जो काम आज हो रहा है, उसके मूल में यही भावना है। इसका विस्तार हमें आज शुरू हुई सेंट्रल विस्टा से जुड़ी वेबसाइट में भी दिखता है।

साथियों,

राजधानी की आकांक्षाओं के अनुरूप दिल्ली में नए निर्माण पर बीते वर्षों में बहुत जोर दिया गया है। देशभर से चुनकर आए जनप्रतिनिधियों के लिए नए आवास हों, आंबेडकर जी की स्मृतियों को संजोने के प्रयास हों, अनेक नए भवन हों, जिन पर लगातार काम किया गया है। हमारी सेना, हमारे शहीदों, हमारे बलिदानियों के सम्मान और सुविधा से जुड़े राष्ट्रीय स्मारक भी इसमें शामिल हैं। इतने दशकों बाद सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बल के शहीदों के लिए राष्ट्रीय स्मारक आज दिल्ली का गौरव बढ़ा रहे हैं। और इनकी एक बहुत बड़ी विशेषता ये रही है कि इनमें से अधिकतर तय समय से पहले पूरे किए गए हैं वरना सरकारों की पहचान यही है – होती है, चलती है, कोई बात नहीं, 4-6 महीने देर है तो स्‍वाभाविक है। हमने नया वर्क कल्‍चर सरकार में लाने का ईमानदारी से प्रयास किया ताकि देश की संपत्ति बर्बाद न हो, समय-सीमा में काम हो, निर्धारित खर्च से भी कुछ कम खर्च में क्‍यों न हो और professionalism हो, efficiency हो, इन सारी बातों पर हम बल दे रहे हैं ये सोच और अप्रोच में आई efficiency का एक बहुत बड़ा उदाहरण आज यहां प्रस्तुत है।

डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स का भी जो काम 24 महीने में पूरा होना था, वो सिर्फ 12 महीने के रिकॉर्ड समय में कम्प्लीट किया गया है यानि 50 प्रतिशत समय बचा लिया गया। वो भी उस समय जब कोरोना से बनी परिस्थितियों में लेबर से लेकर तमाम प्रकार की चुनौतियां सामने थीं। कोरोना काल में सैकड़ों श्रमिकों को इस प्रोजेक्ट में रोजगार मिला है। इस निर्माण कार्य से जुड़े सभी श्रमिक साथी, सभी इंजीनियर, सभी कर्मचारी, अधिकारी, ये सब के सब इस समय सीमा में निर्माण के लिए तो अभिनंदन के अधिकारी हैं लेकिन साथ-साथ कोरोना का इतना भयानक जब खौफ था, जीवन और मृत्‍यु के बीच में सवालिया निशान थे, उस समय भी राष्‍ट्र निर्माण के इस पवित्र कार्य में जिन-जिन लोगों ने योगदान किया है, पूरा देश उनको बधाई देता है। पूरा देश उनका अभिनन्‍दन करता है। ये दिखाता है कि जब नीति और नीयत साफ हो, इच्छाशक्ति प्रबल हो, प्रयास ईमानदार हों, तो कुछ भी असंभव नहीं होता है, सब कुछ संभव होता है। मुझे विश्वास है, देश की नई पार्लियामेंट बिल्डिंग का निर्माण भी, जैसे हरदीप जी बड़े विश्‍वास के साथ बता रहे थे, तय समय सीमा के भीतर ही पूरा होगा।

साथियों,

आज कंस्ट्रक्शन में जो तेज़ी दिख रही है, उसमें नई कंस्ट्रक्शन टेक्नॉलॉजी की भी बड़ी भूमिका है। डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स में भी पारंपरिक आरसीसी निर्माण के बजाय लाइट गेज स्टील फ्रेम तकनीक का उपयोग किया गया है। नई तकनीक के चलते ये भवन आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से अधिक सुरक्षित हैं। इन नए परिसरों के बनने से दर्जनों एकड़ में फैले पुराने हटमेंट्स के रखरखाव में जो खर्च हर वर्ष करना पड़ता था, उसकी भी बचत होगी। मुझे खुशी है कि आज दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य शहरों में भी स्मार्ट सुविधाएं विकसित करने, गरीबों को पक्के घर देने के लिए आधुनिक कंस्ट्रक्शन टेक्नॉलॉजी पर फोकस किया जा रहा है। देश के 6 शहरों में चल रहा लाइट हाउस प्रोजेक्ट इस दिशा में एक बहुत बड़ा प्रयोग है। इस सेक्टर में नए स्टार्ट अप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिस स्पीड और जिस स्केल पर हमें अपने अर्बन सेंटर्स को ट्रांसफॉर्म करना है, वो नई टेक्नॉलॉजी के व्यापक उपयोग से ही संभव है।

साथियों,

ये जो डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाए गए हैं, ये वर्क-कल्चर में आए एक और बदलाव और सरकार की प्राथमिकता का प्रतिबिंब हैं। ये प्राथमिकता है, उपलब्ध लैंड का सदुपयोग। और सिर्फ लैंड ही नहीं, हमारा ये विश्‍वास है और हमारा प्रयास है कि हमारे जो भी रिसोर्सेज हैं, हमारी जो भी प्राकृतिक संपदाएं हैं उसका optimum Utilization होना चाहिए। अनाप-शनाप ऐसी संपदा की बर्बादी अब देश के लिए उचित नहीं है और इस सोच के परिणामस्‍वरूप सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट के पास जो जमीनें है उनके Proper और optimum Utilization पर परफेक्‍ट प्‍लानिंग के साथ आगे बढ़ने पर बल दिया जा रहा है। ये जो नए परिसर बनाए गए हैं वो लगभग 13 एकड़ भूमि में बने हैं। देशवासी आज जब ये सुनेंगे, जो लोग दिन-रात हमारे हर काम की आलोचना करते हैं, उनका चेहरा सामने रखकर इन चीजों को सुनें देशवासी। दिल्‍ली जैसे इतने महत्‍वपूर्ण जगह पर 62 एकड़ भूमि में राजधानी के अंदर 62 एकड़ भूमि में, इतनी विशाल जगह पर ये जो हटमेंस बने हुए थे, उसको वहां से शिफ्ट किया और उत्‍तम प्रकार की आधुनिक व्‍यवस्‍था सिर्फ 13 एकड़ भूमि में निर्माण हो गया। देश की संपत्ति का कितना बड़ा सदुपयोग होरहा है यानि इतनी बड़ी और आधुनिक सुविधाओं के लिए पहले के मुकाबले लगभग 5 गुना कम भूमि का उपयोग हुआ है।

 

साथियों,

आज़ादी के अमृतकाल यानि आने वाले 25 सालों में नए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का ये मिशन सबके प्रयास से ही संभव है। सरकारी व्यवस्था की Productivity और Efficiency बढ़ाने का जो बीड़ा आज देश ने उठाया है, यहां बन रहे नए भवन उस सपनों को सपोर्ट कर रहे हैं, उस संकल्‍प को साकार करने का विश्‍वास जगा रहे हैं। कॉमन केंद्रीय सचिवालय हो, कनेक्टेड कॉन्फ्रेंस हॉल हों, मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सुलभ कनेक्टिविटी हो, ये सबकुछ राजधानी को People Friendly बनाने में भी बहुत मदद करेंगे। हम सभी अपने लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करें, इसी कामना के साथ मैं फिर एक बार आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं!

बहुत-बहुत धन्यवाद !