25 years ago today, Atal Ji's government conducted nuclear tests in Pokhran, showcasing India's strength to the world: PM Modi in Odisha
In Odisha, the state BJP is committed to promoting the Odia language and culture: PM Modi in Kandhamal


जय जगन्नाथ, जय श्री राम!

एथि उपस्थित समस्त मान्यगण्य व्यक्ति नकु मोर नमस्कार! जेडा जौहारी ! मां बराला देवी, मां पाटखंडा और नारायणी मंदिर को मैं आस्थापूर्वक नमन करता हूं। कल से ही यहां मां नारायणी का उत्सव शुरू हुआ है। मैं आप सभी को बधाई देता हूं।

आज मेरा सौभाग्य है कि कंधमाल आते ही मुझे ऐसे आशीर्वाद मिले हैं जो मैं जीवनभर भूल नहीं सकता। और ये आशीर्वाद पूरे देश में क्या परिवर्तन आ रहा है, कैसा परिवर्तन आ रहा है, उसका साक्षात उदाहरण है। एक माता जी ने आ करके मेरा स्वागत सम्मान किया। जब मैंने उनके विषय में जाना तो मैं भावविभोर हो गया। ये वो माता हैं तुला बेहरा जी। जिनके पास अपना कुछ नहीं है। मुझे बताया गया कि वो भिक्षा मांगती हैं। और तुला बेहरा जी ने भिक्षा मांग करके एक लाख इकट्ठा करके भगवान जगन्नाथ जी के चरणों में दिया। खुद को मैंने पूछा कोई जरूरत है क्या आप कुछ चाहती हो क्या। नहीं बोले, बस जगन्नाथ जी का आशीर्वाद चाहिए, ऐसा जिनका पवित्र मन है, ऐसा जिनका त्याग पूर्ण जीवन है, ऐसी मां मुझ जैसे बेटे को आशीर्वाद देने के लिए आ जाएं फिर तो मुझे लगता है कंधमाल के आशीर्वाद, पूरे उड़ीसा के आशीर्वाद मेरे साथ है। आज मेरा एक दूसरा सौभाग्य था आज पूर्णमासी जानी पूर्णमासी जानी शीघ्र कबीर के रूप में जानी जाती है। उड़ीसा में जो ग्रामीण भाषा है जो ट्राइबल की बोलचाल की भाषा है उसमें वो शीघ्र कविताएं बनाती हैं। साहित्य को उन्होंने पचाया है। और मेरा सौभाग्य है कि हमें उनके पद्म अवार्ड देने का सौभाग्य मिला है। आज मुझे यहां शॉल ओढ़ाकर करके उनको सम्मानित करने का अवसर मिला, लेकिन वो मुझे अपने पैर नहीं छूने देती थी। बड़ी मुश्किल से मैंने उनके पैर छुए वो मुझे रोक रही थी। ये जो हमारे यानी एक प्रकार से मातृ शक्ति का साक्षात रूप, दोनों माताएं, जब इस बेटे को आशीर्वाद देती है तो देश की करोड़ों करोड़ों माताएं उनके आशीर्वाद जो मुझे मिलते हैं मेरे मन को एक समाधान होता है। मैं हृदय से इन दोनों माताओं का श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।

भाइयों और बहनों,
कल शाम को मैं भुवनेश्वर पहुंचा था, कल की शाम भुवनेश्वर की शाम क्या अद्भुत नजारा था। क्या अपार जन समूह था, सड़कों पर अबाल-वृद्ध सब, छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग माताएं सड़कों पर आ करके हजारों लोग आशीर्वाद दे रहे थे। मेरे लिए उड़ीसा का स्नेह, उड़ीसा का ये प्यार, कितनी बड़ी ताकत का और भगवान जगन्नाथ जी के चरणों में मिलने वाले आशीर्वाद, सचमुच में मैं आप सबका जितना आभार व्यक्त करूं कम है। मैं ओडिशा के लोगों का ऋणी हूं, आपने मुझे कर्जदार बना दिया है। और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं ये कर्ज मैं ये कर्ज आपके प्यार का कर्ज, आपके आशीर्वाद का कर्ज, जो मेरे लिए ताकत बन गया है मैं यह कर्ज ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके देश की सेवा करके चुकाऊंगा और साथ-साथ उड़ीसा को देश में एक विकसित राज्य बनाने के लिए दिन रात मेहनत करके चुकाऊंगा।

साथियों,
26 साल पहले आज के दिन ही अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। और हमने ये दिखा दिया था कि देशभक्ति से ओत-प्रोत सरकार देशहित के लिए, देश की सुरक्षा के लिए, देश के लोगों की आशा अपेक्षा के लिए कैसे काम करती है। और मुझे याद है जब अटल जी की सरकार ने पोखरण परीक्षण किया था दुनियाभर में जितने भारतीय समुदाय रहता था वो गर्व की अनुभूति करता था और आजादी के बाद पहली बार विदेश की धरती पर लोग उनकी तरफ सम्मान की नजर से देखते थे, वो परमाणु परीक्षण की इतनी बड़ी ताकत थी।


साथियों,
एक वो दिन था, जब भारत ने दुनिया को अपने सामर्थ्य का परिचय करवाया था। और दूसरी तरफ ये कांग्रेस की सोच कांग्रेस बार-बार अपने ही देश को डराने की कोशिश करती है। वो कहते हैं संभल के चलो पाकिस्तान के पास एटम बम है। पाकिस्तान के पास एटम बम है, पाकिस्तान के पास एटम बम है। ये मरे पड़े लोग ये देश के मन को भी मार रहे हैं। और कांग्रेस का हमेशा ऐसा ही रवैया है। ये जो पाकिस्तान के बम बम बम की बातें करते हैं ना, आज तो पाकिस्तान की हालत यह है कि बम को संभालना कहां, वह भी उसके बस का रोग नहीं है। अब तो वह बम बेचने के लिए निकले हैं। कोई खरीदने वाला मिल जाए और लोगों को मालूम है क्वालिटी में दम नहीं है, वो माल भी बिकता नहीं है।

साथियों,
कांग्रेस के इसी कमजोर रवैये के कारण जम्मू-कश्मीर के लोगों ने 60 साल तक आतंक भुगता है। देश ने कितने ही आतंकी हमले झेले हैं। देश भूल नहीं सकता कि आतंकियों को सबक सिखाने के बजाय ये लोग आतंकी संगठनों के साथ बैठकें करते थे। 26-11 के मुंबई के भयंकर हमले के बाद इन लोगों की हिम्मत नहीं पड़ी, कि आतंक के सरपरस्तों पर कार्रवाई करें। और क्यों? क्योंकि कांग्रेस को, इंडी गठबंधन को लगता था कि अगर हम कार्रवाई करेंगे तो हमारा वोटबैंक नाराज हो जाएगा। मैं आज कांग्रेस को दो-टूक कहूंगा, भारत का मुसलमान, कांग्रेस की जो हरकतें हैं उन हरकतों से, कोई इधर-उधर जाएगा ये मानने की कोशिश मत कीजिए। और भाइयों-बहनों, कांग्रेस के शहजादे, आए दिन बयानबाजी ठोक रहे हैं। आप उनके 2014 के चुनाव के भाषण देख लीजिए, 2019 के चुनाव भाषण देख लीजिए और 2024 के चुनावी भाषण देख लीजिए। वो वही स्क्रिप्ट पढ़ते जा रहे हैं और अभी चैलेंज कर रहे हैं। आप लिख के रखिए मेरे देशवासियों, हिंदुस्तान ने मन बना लिया है कि इस बार एनडीए 400 पार करने वाला है। भाजपा अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ कर के ज्यादा से ज्यादा सांसद के साथ आने वाली है। और कांग्रेस वाले यह भी लिख लें इस चुनाव में कांग्रेस को लोकसभा की कुल संख्या के 10 परसेंट चाहिए मान्य विपक्ष बनने के लिए। कांग्रेस वाले जरा कान खोल करके सुन लीजिए ये देश ने तय किया है, कि चार जून को आप देखेंगे के कांग्रेस इस देश में मान्य विपक्ष में नहीं बन पाएगा। वे 50 से नीचे सिमटने वाले हैं।

भाइयों और बहनों,
ओडिशा के आप सभी लोगों के लिए ये चुनाव बहुत अहम है। विकसित ओडिशा-विकसित भारत के संकल्प के लिए आपका हर वोट जरूरी है। आपका एक वोट यहां डबल इंजन की बीजेपी सरकार बनाएगा। ओडिशा में पहली बार डबल इंजन सरकार बनने वाली है। उड़ीसा रे प्रथम थर हेब डबल इंजीन सरकारl इसलिए, ओडिशा से आपको 21 के 21 भाजपा के सांसद दिल्ली भेजने हैं। यहां कंधमाल से हमारे सुकांत कुमार पाणिग्रही जी को भारी बहुमत से विजयी बनाना है। और यहां विधानसभा में भी भाजपा उम्मीदवार हैं उनको भी रिकॉर्ड वोटों से जिताना है। (सुकांत जी जरा आगे आ जाइए) और यहां विधानसभा में भी जो भाजपा के उम्मीदवार हैं उनको भी रिकॉर्ड वोटों से जिताना है। (जरा एमएलए कैंडिडेट भी आगे आ जाएंष जो एमएलए के कैंडिडेट है जो चुनाव लड़ रहे हैं बाकी लोग नीचे बैठिए। जो कैंडिडेट नहीं है वो बैठ जाइए। जो कैंडिडेट हैं वह आगे आ जाएं, जो उम्मीदवार हैं वह आगे आ जाएं जो इस चुनाव में लड़ रहे हैं वह आगे आ जाएं। अब मैं एक मिनट लेता हूं इन सबके पास जाक दोबारा आता हूं।) मेरे इन सभी साथियों को कमल के निशान पर बटन दबाकर आप दिल्ली भी भेजिए, भुवनेश्वर भी भेजिए और डबल इंजन की सरकार बनाइए।

साथियों,
भाजपा विकास भी, विरासत भी के इस मंत्र को लेकर देश को आगे बढ़ा रही है। ये भाजपा ही है जिसकी सरकार में देश का 500 साल का इंतजार पूरा हुआ। अयोध्या में राम मंदिर देखकर आपको गर्व होता है कि नहीं होता है? आपका माथा ऊंचा होता है कि नहीं होता है? हमारे पूर्वजों की आत्मा जहां भी होगी उनके आशीर्वाद मिलते हैं कि नहीं मिलते हैं? 500 साल हमारे पूर्वजों ने जो इंतजार किया वो पूरा हुआ कि नहीं हुआ? राम मंदिर बना कि नहीं बना? बोलो जय श्री। राम जय श्री राम। वहां एक बच्चा मोदी बनके आया है मुझे दिख रहा है। छोटा बच्चा दूर दूर वहां से हाथ ऊपर कर रहा है। चलिए कंधमाल तक भी ये बच्चों का मूड देख करके देश को प्रेरणा मिलती है। शाबाश बेटे तुम मुझसे भी ज्यादा अच्छे लगते हो, हां, बहुत प्यारे लगते हो, अरे मैं भी तुम्हारे जैसा नहीं लगता हूं। इतने सुंदर लगते हो। हां भाई इनसे तस्वीर ले लीजिए, जरा एसपीजी वाले, ये सज्जन कब से हाथ ऊपर करके खड़े हैं। जरा उनसे तस्वीर ले लीजिए भाई। हां धन्यवाद भैया। बहुत बढ़िया चित्र बना के, उड़ीसा में तो हर घर में कला है जी। हां दे दीजिए शाबाश। हां दे दीजिए इनको कैमरामैन को दे दीजिए। मुझे पहुंच जाएगा, पीछे आपका नाम पता लिखा है ना। धन्यवाद। वह जो मोदी बना है ना उसको भी कहिए बैठिए भाई आराम से। अब बेचारा थक जाएगा। साथियों, रामलला जी आज पूरे देश को आशीर्वाद दे रहे हैं। हमें तो दो दो फायदा है। एक तरफ भगवान जगन्नाथ जी के आशीर्वाद और दूसरी तरफ रामलला जी के आशीर्वाद।

साथियों,
यहां राज्य भाजपा भी ओड़िया भाषा ओड़िया संस्कृति के प्रति समर्पित है ऐसा कोई बेटा या बेटी जो उड़ीसा की मिट्टी से निकला हो, यहां की संस्कृति को समझता है भाजपा का यहां का मुख्यमंत्री बनाना तय है। आपका अपना मुख्यमंत्री बनेगा। और मैं तो यहां आया हूं आपको 10 जून को भाजपा की सरकार के मुख्यमंत्री के शपथ समारोह का निमंत्रण देने के लिए। आपको भुवनेश्वर निमंत्रण देने के लिए आने के लिए मैं आपके पास आया हूं।

साथियों,
कल देश ने अक्षय तृतीया का पर्व मनाया है। ओडिशा का अक्षय तृतीया से बहुत विशेष संबंध है। अक्षय तृतीया के दिन से ही पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए रथों का निर्माण आरंभ होता है। मैं आप सभी को इसकी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और इसी से जुड़ा एक बहुत संवेदनशील विषय आप सभी के सामने उठा रहा हूं।

साथियों,
सात दशक पहले श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रबंधन के लिए नियम बनाए गए थे। 70 साल पहले। इन्हीं में से एक नियम था कि मंदिर के सोना-चांदी, कीमती पत्थर, सारी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मेनटेन किया जाएगा। इसके बाद श्री रत्न भंडार में रखे कीमती सामानों की एक सूची तैयार की गई थी। इस रत्न भंडार का आखिरी बार मूल्यांकन करीब 45 साल पहले किया गया था। उस समय आभूषण और रत्न इतने ज्यादा थे कि मूल्यांकन करने वालों ने इस खजाने को अमूल्य बताकर अपने हाथ खड़े कर दिए थे। आप कल्पना कर सकते हैं, भगवान जगन्नाथ, इनके बिना तो हमारा जीवन ही नहीं है। अरे जगन्नाथ है तो जीवन है। अब भगवान जगन्नाथ के यहां कितने आभूषण थे कितनी संपत्ति थी अधिकारिक रूप से श्री रत्न भंडार पिछले करीब 40 साल से खुला नहीं है लेकिन अब तो मैं देश को बताने जा रहा हूं वो जानकर पूरे देश के लोग भी हैरान हो जाएंगे। श्री जगन्नाथ मंदिर के श्री रत्न भंडार के गर्भ गृह के आंतरिक कक्ष की चाबियां पिछले 6 साल से लापता है। इतना बड़ा अमूल्य खजाना, जो भगवान जगन्नाथ के काबे में है आप उसको भी संभाल नहीं पाए। चाबी खो गई। आप मुझे बताइए, मेरे उड़ियावासी आप जरा बताइए, मेरे तो दिल को चोट पहुंची है मैं आपको पूछता हूं और आज पूरे देश को चोट पहुंच रही है जब सुनेंगे तो। क्या आपको यह जानने का अधिकार है कि नहीं है कि चाबियां कहां गई। यह जानने का अधिकार है कि नहीं है। हर देशवासी को पता चलना चाहिए कि नहीं चलना चाहिए। हर उड़िया को पता चलना कि नहीं चाहिए। भगवान जगन्नाथ के हर भक्त को पता होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। चाबी चली गई, किसके पास गई। क्या वो खोलता है, बंद करता है क्या करता है। और फिर राज्य सरकार में जब तूफान खड़ा हो गया तो क्या कहते हैं। राज्य सरकार कहती है कि रत्न भंडार की डुप्लीकेट चाबियां मिली है। अब सवाल उठता है ये डुप्लीकेट चाबियां क्यों बनाई गई। क्या डुप्लीकेट चाबियों से ये रत्न भंडार रातों में कोई खोलता था क्या। क्या डुप्लीकेट चाबियों से यह उत्तम भगवान के आभूषण चोरी होते थे क्या। कहीं और लापता होते थे क्या। क्या होता था। डुप्लीकेट चाबी वाला मामला चाबी खो जाना गंभीर है। डुप्लीकेट चाबी उससे भी गंभीर है। इस मामले की जांच राज्य सरकार ने एक आयोग को सौंपी थी लेकिन वह रिपोर्ट आज तक उड़ीसा सरकार ने सार्वजनिक नहीं की है। भारतीय जनता पार्टी अब पूरे भक्ति भाव से यह विषय उठा रही है। आखिर क्यों बीजेडी सरकार, नवीन बाबू की सरकार इस विषय से क्यों भाग रही है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है, आखिर राज्य सरकार किसके पाप को बचाने की कोशिश कर रही है। मैं आज उड़ीसा के लोगों को देश के लोगों को, एक वायदा कर रहा हूं राज्य के अंदर भाजपा सरकार बनने के बाद श्री रत्न भंडार की पारदर्शिता को प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित किया जाएगा और ये मोदी की गारंटी है। जय जगन्नाथ।

साथियों,
भाजपा, ओडिशा के कल्याण, ओडिशा के विकास का लक्ष्य लेकर चल रही है। मैं गरीबी से निकला हूं। गरीबी विकास की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। और इसलिए गरीब का बेटा मोदी, गरीब का सेवक मोदी, आपका सेवक मोदी, आपके लिए ही तो खुद को खपा रहा है, दिन-रात मेहनत कर रहा है। मोदी के प्रयासों से पिछले 10 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। जब तक मेरे देश में एक भी गरीब है, मोदी चैन से नहीं बैठेगा। मैंने आपको पक्के घर की गारंटी दी है। मैंने आपको मुफ्त राशन की गारंटी दी है। इसका बहुत बड़ा लाभ हमारे आदिवासी समाज के भाइयों और बहनों को हुआ है।

साथियों,
मोदी ने एक ऐसी योजना बनाई है कि आपका बिजली का बिल जीरो हो जाएगा। बिजली का बिल जीरो, इतना ही नहीं आप बिजली बेचकर कमाई करेंगे। आपको लगेगा ये तो गजब लाएं हैं मोदी। देखिए, मोदी ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की है। ओडिशा पर सूर्य देवता की सदियों से पूजा करने वाला राज्य है। सूर्य मंदिर की उपासना करने वाला राज्य है। मैं चाहता हूं कि आप अपने घर में बिजली का उत्पादन करें, उस बिजली का उफयोग करें और जो ज्यादा बिजली हो, उसको भाजपा सरकार, राज्य सरकार बनेगी न, हम उसको खरीद लेंगे तो आपको कमाई भी होगी। यानि भाजपा की इस योजना से आपको डबल फायदा होगा। आपकी बिजली मुफ्त होगी और आप बिजली से कमाई भी कर पाएंगे। और इसके लिए भाजपा सरकार हर परिवार को सोलर पैनल लगाने के लिए करीब 75 हजार रुपए की मदद दे रही है। 75 हजार रुपया और बिजली मुफ्त और बिजली से कमाई। मोदी आपको 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज की भी सुविधा देना चाहता है। लेकिन ओडिशा की बीजेडी सरकार हमारी जो आयुष्मान योजना है वह यहां लागू नहीं होने देती है। इसका कितना बड़ा नुकसान है मैं बताता हूं। जरा उड़ीसा के लोग मेरी भावनाओं को समझें। अब मेरे यहां गुजरात में हमारे बहुत से उड़ीसा के भाई बहन काम करते हैं, मुंबई में करते हैं, बेंगलुरु में करते हैं, हैदराबाद में करते हैं, छत्तीसगढ़ में करते हैं। यह आयुष्मान योजना ऐसी है कि आप अगर हिंदुस्तान में कहीं पर भी हों और अगर आप उड़ीसा के हैं, आयुष्मान योजना का हक मिला हुआ है तो हिंदुस्तान के किसी भी कोने में अगर आपको कोई तकलीफ हो गई, बीमार हो गए, एक्सीडेंट हो गया तो वहां भी 5 लाख रुप तक का इलाज आपको मिल जाएगा। आपके पास पैसे है कि नहीं, साथ में रिश्तेदार है कि नहीं, कोई जरूरत नहीं सिर्फ जेब में एक आयुष्मान कार्ड होना चाहिए, इतनी बड़ी योजना। मुझे बताइए ऐसी योजना आप लोगों को मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। जरा जोर से बताओ तो पता चले। यह योजना आपको मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। मैं पांच साल से यहां की सरकार को समझा समझा करके थक गया कि योजना आप ले लो यह उड़ीसा के लोगों का फायदा करेगी। पता नहीं लेने को तैयार नहीं हैं। जैसे ही भाजपा सरकार यहां बनाओगे 5 लाख रुपए के मुफ्त इलाज की योजना चालू हो जाएगी। भाइयों बहनों, आप मुझे बताइए जिसको आपकी बीमारी की परवाह ना हो ऐसी असंवेदनशील सरकार यहां रहनी चाहिए क्या। उड़ीसा में रहनी चाहिए क्या।

साथियों,
यहां इस क्षेत्र में पर्यटन की इतनी संभावनाएं हैं। दरिंगबाड़ी को तो ओडिशा का कश्मीर कहा जाता है। पर्यटन बढ़ता है, तो रोजगार बढ़ता है, आपकी आमदनी बढ़ती है। लेकिन ओडिशा सरकार की उदासी की वजह से, यहां टूरिज्म भी चौपट है। भाजपा सरकार यहां ‘पर्यटन से पैसा’ बनाने के लिए हर तरह के प्रयास करेगी। भाजपा ने एक और घोषणा की है जिसका लाभ यहां के युवाओं को होगा। मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी, नौजवान देख लीजिए, आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। ये मोदी आपकी सबसे बड़ी गारंटी है। अरे मोदी से बढ़कर और गारंटी क्या होती है। बिना गारंटी आप मुद्रा योजना से बैंक से पहले 10 लाख रुपया मिलता था अब मोदी ने इसको 20 लाख कर दिया है। आप अपना धंधा शुरू कर सकते हैं। यानि उड़ीसा के नौजवानों का यहां अपना काम करना करने के लिए टूरिज्म सेक्टर में स्वरोजगार के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद मिलेगी।

साथियों,
भाजपा सरकार किसानों के हितों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। ओडिशा भाजपा ने भी किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं। 3100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी और 48 घंटे के भीतर पैसा खाते में जमा। इससे यहां के हमारे किसान परिवारों को बहुत मदद मिलेगी। यहां कंधमाल की हल्दी भी तो बहुत मशहूर है। केंद्र सरकार ने कंधमाल हल्दी को GI टैग दिया है। लेकिन साथियों, BJD सरकार ने हल्दी किसानों को भी बेहाल रखा है। यहां पर्याप्त भंडारण की सुविधाएं ही नहीं हैं। इसलिए ओडिशा भाजपा ने कंधमाल में मसाला पार्क बनाने की घोषणा की है। आपके कंधमाल में बनेगा। भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का भी गठन किया है।

साथियों,
मोदी उनको पूजता है, जिनको किसी ने नहीं पूछा। यहां दोकरा और बांस की कलाकारी से जुड़े विश्वकर्मा साथी रहते हैं। इनके लिए मोदी सरकार ने 13 हजार करोड़ रुपए की पीएम विश्वकर्मा योजना बनाई गई है। यहां की भुइयां, भुंजिया, बोंडो पोराजा और मनकिर्डिया जैसी अति पिछड़ी जनजातियों की सुध भी किसी ने नहीं ली थी। पहली बार इनके लिए मोदी ने 24 हज़ार करोड़ रुपए की पीएम जनमन योजना बनाई है। और आप जानते हैं, ये योजना किसके कहने पर बनी है? हमारी राष्ट्रपति, और ओडिशा की बेटी द्रोपदी मुर्मु के मार्गदर्शन में इस योजना ने आकार लिया है। हमारी राष्ट्रपति पर आज पूरे देश को गर्व है। कंधमाल को तो गर्व होता ही होगा।

साथियों,
BJD और कांग्रेस ने कंधमाल को पिछड़ा जिला घोषित कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया था। मोदी ने कंधमाल जैसे जिलों को देश के आकांक्षी जिला घोषित किया। मैं दिल्ली से खुद यहां क्या काम हो रहा है, मेरे चेंबर में एक स्क्रीन है ऐसे आकांक्षी जिलों का क्या काम होता है डेली मॉनिटरिंग होता है इसका। परिणाम यह है कि कंधमाल तेज़ी से विकास कर रहा है। भाजपा सरकार ने यहां कई एकलव्य आवासीय विद्यालय स्वीकृत किए हैं। लेकिन BJD के नेता शिक्षण संस्थानों में कब्ज़ा करके बैठे हैं। BJD के नेता यहां आदिवासियों की ज़मीनें हड़पने में जुटे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, यहां भाजपा सरकार आएगी, तो ऐसे हर माफिया पर कार्रवाई की जाएगी।

भाइयों और बहनों,
कांग्रेस पूरे देश में पस्त पड़ चुकी है। इसलिए जो भी BJD के कुशासन को हटाना चाहते हैं, वो कमल पर ही बटन दबाएं। याद रखिएगा- कमल है तो शांति और विकास है, कमल है तो ज्ञान और विज्ञान है, कमल है तो हर नारी का सम्मान है, कमल है तो संकल्पों की सिद्धि है, कमल है तो सुरक्षा है, समृद्धि है, कमल है तो आत्मनिर्भरता को ताकत है, कमल है तो गौरव से भरी विरासत है, कमल है तो विजय है, विश्वास है, कमल है तो मान है, सम्मान स्वाभिमान है, कमल है तो प्रगति पथ पर हिंदुस्तान है।

अब मुझे बताइए भाई, मैं किसी के भी बारे में भला-बुरा नहीं कहता। अच्छा भी नहीं है भला-बुरा बोलना। लेकिन नवीन बाबू कितने सालों से यहां मुख्यमंत्री हैं। मैं नवीन बाबू को एक चुनौती देता हूं। नवीन बाबू इतने साल से आप मुख्यमंत्री हो, ओडिशा की जनता इतनी दुखी क्यों है। दुखी इसलिए है, जरा नवीन बाबू को कहीं खड़े कर दीजिए और उनको बिना कागज लिए, उनको कहिए आप उड़ीसा के जिलों के नाम बोलिए और जिलों के कैपिटल के नाम बोलिए। जो मुख्यमंत्री अपने जिलों के नाम कागज के बिना बोल नहीं सकते, जो मुख्यमंत्री अपने जिला के मुख्य...का नाम नहीं जानते, वह आपके दुख दर्द जानते होंगे क्या। क्या उनके भरोसे आप अपने बच्चों का भविष्य छोड़ सकते हो क्या। साथियों, और इसलिए मैं कहता हूं हमें ज्यादा नहीं, 5 साल मुझे मौका दीजिए भाइयों, ज्यादा नहीं। अगर 5 साल में मैं आपके उड़ीसा को नंबर वन ना बना दूं ना तो मुझे कहना कि मोदी क्या कह के गया। भाइयों-बहनों, मैं गुजरात का मुख्यमंत्री रहा हूं, गुजरात के पास जो ताकत है उड़ीसा के पास उससे 100 गुना ज्यादा ताकत है। गुजरात आगे निकल गया उड़ीसा क्यों पीछे रह गया। देखिए यहां पर आपके पास इतने मिनरल्स हैं। गुजरात के पास नमक के सिवाय कुछ नहीं है। सिवाय नमक गुजरात के पास कुछ नहीं है फिर भी गुजरात आगे निकल गया आप तो देश का नंबर वन राज्य बन सकते हैं भाई। और इसलिए यहां की जमीन से जुड़ा हुआ इंसान यहां का मुख्यमंत्री होना चाहिए। आपके दिलों से जुड़ा हुआ व्यक्ति मुख्यमंत्री होना चाहिए। और इसलिए उड़ीसा के लोग जरा भी चिंता मत कीजिए। एक बार हिम्मत करके सभी एमएलए को विजयी बनाइए। सभी एमपी को विजयी बनाइए और भुवनेश्वर में बीजेपी की सरकार बनाइए और दिल्ली में 400 पार में आप भी भागीदार बनिए।

साथियों,
मेरा एक काम करेंगे। जरा हाथ ऊपर करके बताओ तो मैं बोलूं। मेरा एक काम करेंगे, ऐसे नहीं जरा जोर से बताओ तो बोलूं। मेरा एक काम करेंगे। एक काम करना घर-घर जाना और लोगों को मिलकर के कहना कि अपने मोदी जी कंधमाल आए थे और मोदी जी ने आपको जय जगन्नाथ कहा है मेरा जय जगन्नाथ पहुंचा देंगे हर परिवार में। मेरा जय जगन्नाथ पहुंचा देंगे।

बोलो भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।
बहुत-बहुत धन्यवाद

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भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डणवीस जी, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे जी, डिप्टी सीएम श्रीमती सुनेत्र पवार जी, अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और वहां पर भी इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई-बहन। यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव, उपमुख्यमंत्री, युवा नेता हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गुजरात के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

और खास इसलिए के मेरे ब़डौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सबकुछ एक साथ हो रहा है।

साथियों,

आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।

साथियों,

इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।

साथियों,

ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भटकती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।

साथियों,

2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा-दीक्षा दी थी, इस धरती ने मुझे जो सिखाया था, आपके पास से जो लेसन लेके मैं दिल्ली पहुंचा था, हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया। और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, देश के व्यापार-कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है।

साथियों,

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानि ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट, दोनों धीमा था। लेकिन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर्स पर हर रोज़ 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं, प्रतिदिन 430 मालगाड़ी। और पहले जो मालगाड़ी, साढ़े 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफऱ तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफर तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानि, इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है, किराया-भाड़ा का खर्च कम हुआ है, समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानि, इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं।

साथियों,

इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेज़ी से बड़े बाज़ार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल, यानि जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं, उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।

साथियों,

ये फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में JNPT मुंबई, JNPT पोर्ट से वड़ोदरा तक Double स्टैक Container मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानि डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया, 250 ट्रक। अब ये जो नाराज फूफा जी है, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है, उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानि अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा।

साथियों,

फ्रेट कॉरिडोर के साथ-साथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है, जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं, वो भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक-दो ट्रेनों की घोषणा होती थी और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही हैं। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरु हुई हैं। नई ट्रेन से वड़ोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी।

साथियों,

रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइपलाइन, गरीबों का घर, जब देश में करोड़ों लोगों के लिए ये चीजें बनती हैं, तो इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों-लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए, इस वर्ष का रेल बजट पौने तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा है। जो 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुणा अधिक है। यानि रेलवे के आधुनिकीकरण पर हो रहा खर्च, हज़ारों हज़ार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया, तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं, नए बिजनेस आते हैं, ये फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग, वो बेटी चित्र लेकर कब से खड़ी है, वो सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए, हां। एक और भी है कोई, हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

साथियों,

मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्तधाराओं का विजन रखा है, उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है। और वड़ोदरा शहर, इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन, स्किल और इंडस्ट्री का कोलैब कैसे होता है, ये वड़ोदरा करीब डेढ़ सौ साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले, यहां टेक्स्टाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरु हुई थी, जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो-ढाई दशक में वड़ोदरा MSMEs का एक बड़ा हब बन गया है। और मुझे याद है, जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था, तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा, तो हर हफ्ते कोई ना कोई डेलीगेशन आता था। बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो, मैन्युफैक्चरिंग का हो, क्योंकि यहां पर आते थे, तो या तो ज्योति या एलएमबी या तो जीएसएफसी, यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया है। अब तो ये शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C-295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वड़ोदरा के लोगों को ये गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है, तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच-मेट्रो कोच बनाने का, रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक, भारत ने करीब 50 हज़ार, ये आंकड़ा सुनिए, 2014 के बाद भारत ने अब तक 50 हज़ार आधुनिक रेलवे कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50 हजार टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 50 हजार आधुनिक कोच तो किए ही हैं, करीब ढाई लाख वेगन, मालगाड़ी के लिए जो वेगन होते हैं, भारतीय रेल में जोड़े गए हैं, ढाई लाख।

साथियों,

अब भारत चिप से लेकर शिप तक, निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानि पुर्जे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा, आत्मनिर्भरता की एक पूरी चेन भारत में ही बनेगी। और ये हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कडाणा डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट का प्रोजेक्ट है, कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर, हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरु किए। और आज हम इसमें 200 गीगावॉट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर, टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार, बिजली उत्पादक बन चुके हैं और इसके कारण, प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक, कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है, कितने नए वेंडर्स आए हैं।

साथियों,

‘झूठ की गूंज’ से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे, लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है, सच की हुंकार के साथ चलता है, सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर्स पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है।

साथियों,

आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा, इलेक्ट्रिक इकोसिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चिप इंडस्ट्री है, डेटा सेंटर और AI से जुड़ी इंडस्ट्री है, इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें AI में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है, तो देश को उसकी तैयारी, उसका इकोसिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं, किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं का फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन-रात मेहनत करके की जा रही है, आपके भविष्य के लिए किया जा रहा है।

साथियों,

दुनिया तेज़ी से बदल रही है, तो दुनिया की ज़रूरतें भी बदल रही हैं और इसी प्रकार हमारी पढ़ाई-लिखाई के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं। पहले फोकस सिर्फ डिग्री पर होता था, लेकिन अब डिग्री के साथ-साथ स्किल पर भी फोकस है, स्किल का महत्मय बढ़ रहा है। नौजवानों के पास स्किल हो और वो स्किल समय-समय पर अपग्रेड हो, एक बड़ी जरूरत बन गई है। और इसीलिए, आज हम अपनी शिक्षा नीति को, शिक्षण और ट्रेनिंग के संस्थानों को नए रूप में ढाल रहे हैं। और इसी भाव के साथ ही मैंने लाल किले से भी युवाशक्ति के लिए दो बड़ी घोषणाएं की हैं। पहली घोषणा, देश की पारंपरिक ज़रूरत से जुड़ी है। आप सब जानते हैं कि हमारे यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर साल, हमारे मिडिल क्लास परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन बच्चों की कोचिंग पर खर्च हो जाता है। हमारी कोशिश है कि गरीब और मिडिल क्लास के ऐसे बच्चों की, परिवारों के पैसे की बचत हो। और इसीलिए अब सरकार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्री-कोचिंग व्यवस्था देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। और हिंदुस्तान के बेस्ट टीचर के द्वारा उनके कोचिंग हो। हमारे जो नौजवान, अपनी तैयारी कर रहे हैं, उनकी कोचिंग का ध्यान सरकार खुद रखेगी।

साथियों,

भारत के नौजवानों को AI में पारंगत होना उतना ही जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे नौजवानों की पीढ़ी AI के लिए तैयार हो। ऐसा नहीं है, AI सीखने वालों की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर में है, अगर कोई इस स्किल को जानता है, तो वो खेती के लिए नया AI solution बना सकता है। आरोग्य के क्षेत्र में technology विकसित कर सकता है। Manufacturing की productivity बढ़ा सकता है। Robotics में अपना startup शुरू कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हमारे पास देश और दुनिया की इंडस्ट्री के लिए AI को समझने वाले और AI का इस्तेमाल करने वाले युवा हों। सरकार इसके लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।

साथियों,

भारत का ये कालखंड अभूतपूर्व है। ये भारत की युवाशक्ति का उत्कर्ष काल है, ये समय फिर भारत के जीवन में लौटकर नहीं आएगा। और इसलिए, हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत शुभकामनाएं।

अब मेरा एक काम करना पड़ेगा वडोदरा वालों को, करेंगे? पक्के तौर पर? आप सबने वड़ोदरा को इतना स्वच्छ बना दिया, कितनी मेहनत करनी पड़ी। मैं देख रहा था, हमारे नौजवान दिन-रात सफाई में लगे हुए थे। लेकिन एक बार हम तय करें कि अब हम वडोदरा को गंदा होने ही नहीं देंगे। मैं खुद गंदगी नहीं करूँगा, ये संकल्प लें, तो वडोदरा गंदा होगा? वडोदरा गंदा होगा? तो दिवाली ऐसी चकाचक जाएगी या नहीं, नवरात्रि शानदार जाएगी या नहीं, गणेशोत्सव में चार चाँद लगेंगे या नहीं, तो इतना काम तो हो जाएगा।

शाबाश।

धन्यवाद।

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!