ಆಪರೇಷನ್ ಗಂಗಾ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಹಲವಾರು ಸಾವಿರ ನಾಗರಿಕರನ್ನು ದೇಶಕ್ಕೆ ಕರೆತರಲಾಗಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಾಚರಣೆಗೆ ಉತ್ತೇಜನ ನೀಡಲು, ಭಾರತವು ತನ್ನ ನಾಲ್ವರು ಮಂತ್ರಿಗಳನ್ನು ಅಲ್ಲಿಗೆ ಕಳುಹಿಸಿದೆ: ಉಕ್ರೇನ್ ಸ್ಥಳಾಂತರಿಸುವಿಕೆಯ ಕುರಿತು ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
ಬಿಜೆಪಿ ಸರ್ಕಾರ ಬಡವರಿಗಾಗಿ ಶ್ರಮಿಸುತ್ತಿದೆ ಮತ್ತು ಅವರಿಗೆ ಪಕ್ಕಾ ಮನೆ, ನಲ್ಲಿ ನೀರು ಮತ್ತು ಆರೋಗ್ಯ ವಿಮೆಯನ್ನು ಒದಗಿಸುವ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ: ಸೋನಭದ್ರದ ಮಹತ್ವಾಕಾಂಕ್ಷೆಯ ಜಿಲ್ಲಾ ಅಭಿಯಾನದಲ್ಲಿ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
ಹಿಂದಿನ ಸರ್ಕಾರಗಳು 8-10 ಅರಣ್ಯ ಉತ್ಪನ್ನಗಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಎಂಎಸ್‌ಪಿ ನೀಡುತ್ತಿದ್ದವು. ಇಂದು, ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರವು 90 ಅರಣ್ಯ ಉತ್ಪನ್ನಗಳಿಗೆ MSP ನೀಡುತ್ತಿದೆ: ಬುಡಕಟ್ಟು ರೈತರಿಗೆ ಬೆಂಬಲ ನೀಡಿದ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಮತವೂ ಮುಂಬರುವ ವಿಧಾನಸಭಾ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಗೆಲುವು ದಾಖಲಿಸಲು ನಮ್ಮನ್ನು ಕರೆದೊಯ್ಯುತ್ತದೆ. ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಮತ್ತು ಬೆಳವಣಿಗೆಗಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಲು ಇದು ನಮಗೆ ಹೊಸ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ: ಗಾಜಿಪುರದಲ್ಲಿ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ

भारत माता की जय

भारत माता की जय

हम रउआ सब लोग के, प्रणाम करत बानी!

साथियो,

ये धरती, शौर्य, पराक्रम और वीरों की धरती है। गाजीपुर के बेटे परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद उन्होंने दिखा दिया था कि देश पर संकट हो तो गाजीपुर के लोग क्या नहीं कर सकते हैं। मुझे आज भी याद है, जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था, 7-8 आठ साल पहले, श्रीमान अब्दुल हमीद जी की पत्नी रसूलन बीबी जी मेरे निवास स्थान पर आईं और उन्होंने मुझे भरपूर आशीर्वाद दिया था।

भाइयो और बहनो, गाजीपुर ने मनोज सिन्हा जी के रूप में भी, मनोज सिन्हा जी के रूप में एक ऐसा रत्न दिया है, जो देश की मुकुटमणि जम्मू-कश्मीर को संभाल रहे हैं। देशहित को हमेशा सबसे ऊपर रखने वाले बेटे-बेटियों की इस वीर भूमि को मैं आदरपूर्वक नमन करता हूं।

साथियो,

यूपी में पांच चरणों के चुनाव में बीजेपी अपना परचम लहरा चुकी है। बीजेपी की सरकार बननी तय है, लेकिन अब रिकॉर्ड जीत दिलाने के लिए आपका एक-एक वोट उतना ही जरूरी है। यूपी के विकास के लिए डबल इंजन की सरकार को आपका एक-एक वोट नई ऊर्जा देगा। और आपका एक-एक वोट, उन घोर परिवारवादियों को भी करारा जवाब देगा, ये घोर परिवारवादी जिन्होंने इस क्षेत्र को इतने दशकों तक विकास से वंचित रखा।

भाइयो और बहनो,

गाजीपुर की इस धऱती का संबंध मां गंगा से है, कृषि से है, ऋषि से है। लेकिन परिवारवादियों ने अपने स्वार्थ में इस पुण्य क्षेत्र की पहचान बदलकर के रख दी थी। परिवारवादियों के शासन में यहां की पहचान गहमर के वीर ना होकर माफिया और बाहुबली बन गये थे। क्या आपको ये पहचान मंजूर है क्या, ये पहचान बदलने वालों को ये सजा करने का मौका है कि नहीं है।

इनको सजा दोगे कि नहीं दोगे ? आपको वोट देकर के सजा देनी है भाइयो। परिवारवादियों के राज में क्या कुछ नहीं हुआ, याद कीजिए मेरे भाइयो-बहनो, इन घोर परिवारवादियों ने हमारे दलित भाई-बहनों की बस्तियां जलाई थी कि नहीं जलाईं थीं। बस्तियां जलाईं थीं की नहीं जलाई थीं, क्या गाजीपुर के लोग भूले नहीं हैं वो दौर, जब हमारे एक होनहार साथी कृष्णानंद राय जी की गोलियों से छलनी कर दिया गया था।

भाइयो और बहनो, गाजीपुर को उन परिस्थितियों से निकालकर योगी जी के शासन में गाजीपुर के विकास को प्राथमिकता दी गई है। दंगों के दौरान खुली जीप में घूमने वाले आज घुटनों पर हैं दोस्तो। पहले की सरकारों के समय जो दहशत थी, उसकी जगह अब गरीबों के कल्याण ने ले ली है।

साथियो,

परिवारवादी सरकारों ने ठान रखा था कि गाजीपुर में विकास नहीं होने देना है।

लेकिन हमने भी ठानकर रखा था, हमने ये ठानकर काम किया कि गाजीपुर के लोगों की सेवा करनी है। सेवा करके रहेंगे। साथियो, आपकी एक बहुत बड़ी समस्या कनेक्टिविटी की थी। हम इस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। आपको याद होगा, ताडी घाट पुल की मांग 6 दशक से हो रही थी।

ये हमारी ही सरकार है जिसने इसके निर्माण का काम शुरू करवाया। पूरे क्षेत्र में विकास को और तेजी देने के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे भी शुरू हो चुका है। हमने गाजीपुर को काशी से जोड़ने के लिए हाइवे का निर्माण भी कराया है। गाजीपुर को बलिया, आजमगढ़ और बक्सर से जोड़ने के लिए भी ऐसा ही काम चल रहा है।  

साथियो,

इन घोर परिवारवादियों ने जिस तरह सुख-चैन भरा जीवन गुजारा है, महलों में जीना, महंगी गाड़ियों में घूमना, वो कभी भी गरीब का दर्द नहीं समझ सकते। इन्हें माताओ-बहनो को चूल्हे के धुएं से जो तकलीफ होती है, इसका अंदाजा भी नहीं था। ये हमारी ही सरकार है, जिसने गाजीपुर की ढाई लाख से अधिक गरीब माताओ-बहनो को उज्ज्वला का गैस कनेक्शन दिया है।

साथियो,

ये वही परिवारवादी हैं जो शौचालय की बात करने पर हम लोगों का मजाक उड़ाते थे। इन परिवारवादियों को कभी हमारी माताओं-बहनों की असहनीय पीड़ा भी कभी समझ ही नहीं आई। इस पीड़ा को दूर करने का काम भी हमारी सरकार ने किया है।

साथियो,

ये लोग इतने असंवेदनशील हैं कि दिव्यांग, वृद्ध, असहाय की पेंशन का पैसा भी खा जाते थे। याद है ना, कैसे पैंशन के पैसे खा गए। याद रखिएगा- ये लोग पेंशन के भी लुटेरे रहे हैं। आज भी इन लोगों की सोच वही है, इनकी नजर आपके विकास के लिए आए पैसे हैं ना, उस पैसों पर इनकी नजर है। इसलिए आपको इन परिवारवादियों से सावधान रहना बहुत जरूरी है।

भाइयो और बहनो,

गरीब के घर में बीमारी आ जाए तो इलाज का खर्च पूरे परिवार की कमर तोड़ देता है। सारे सपने चूर-चूर कर देता है। हमने गाजीपुर के सवा दो लाख से ज्यादा गरीब परिवारों को आयुष्मान भारत योजना का सुरक्षा चक्र दिया है। अब ये हमारे गरीब परिवार 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज अच्छे से अच्छे अस्पताल में करा सकते हैं। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, हमने इसके लिए पूर्वांचल में मेडिकल कालेजों की संख्या भी बढ़ाई है। यहां का महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज भी अब आपकी सहूलियत बढ़ा रहा है।

भाइयो और बहनो,

मैं जब भी गाजीपुर आता हूं, मुझे गाजीपुर के सांसद रहे स्वर्गीय विश्वनाथ सिंह गहमारी जी की बात जरूर याद आती है। नेहरू जी जब प्रधानमंत्री थे तो विश्वनाथ जी ने पार्लियामेंट के अंदर उन्हें याद दिलाया था कि पूर्वांचल में इतनी ज्यादा गरीबी है कि लोग गोबर में से गेहूं के दाने निकालकर, उसे धोकर अपना पेट भरने के लिए मजबूर हैं। जिसके दिल में गरीब के लिए दर्द हो, वो कभी भी गरीब को ऐसी स्थिति में नहीं छोड़ सकता।

साथियो,

हमारे देश पर, पूरी दुनिया पर, पूरी मानव जात पर कोरोना ने इतना बड़ा संकट पैदा किया, 100 साल का सबसे बड़ा संकट, 100 साल में नहीं आया ऐसा संकट, इतनी बड़ी महामारी आई, लेकिन हमने किसी गरीब को भूखा नहीं सोने दिया भाइयो। किसी गरीब के घर का एक दिन भी चूल्हा न जले, ये हमें मंजूर नहीं। भाइयो-बहनो, पिछले दो साल से भाजपा की डबल इंजन की सरकार, यूपी के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है। इस पर देशभर में 2 लाख 60 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। मुझे पता है कि अगर यही काम इन घोर परिवारवादियों को करना होता तो वो आपको दाने-दाने के लिए तरसा देते और सारा पैसा खुद खा जाते।

साथियो,

महामारी के इस समय में हमारी सरकार गरीब का जीवन बचाने को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हमने ये सुनिश्चित किया है कि सभी को वैक्सीन जरूर लगे। जो वैक्सीन विदेशों में हजारों रुपये में लग रही है, वही वैक्सीन हमारी सरकार मुफ्त में लगवा रही है। भाइयो और बहनो, आपको टीका लगा कि नहीं लगा...जरा हाथ उठाकर बताइये...टीका लगा....सबको लगा, अच्छा, आपको एक भी पैसा देना पड़ा क्या ? आपके जेब से एक रुपया भी गया क्या।

भाइयो और बहनो,

आप ये भी याद रखिए। ये परिवारवादी, कैसे भारत की वैक्सीन के खिलाफ अफवाह फैला रहे थे। आज अगर लोगों की चिंता कम हुई है, स्कूल-कॉलेज खुल पा रहे हैं तो ये इस वैक्सीन की वजह से ही हो रहा है।

साथियो,

हमारी सरकार छोटे किसानों की जरूरतों पर भी ध्यान दे रही है। आज गाजीपुर के 5 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। छोटे किसान उनकी पहले कभी चिंता नहीं हुई भाइयो। ऐसे किसान जिसके पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन होती है। और परिवार बढ़ता है तो वो जमीन का भी बंटवारा हो जाता है। हमने पांच लाख किसान, और मैं सिर्फ गाजीपुर की बात कर रहा हूं, पांच लाख किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत इन किसानों के बैंक खातों में करीब साढ़े आठ सौ करोड़ रुपये, साढ़े आठ सौ करोड़ रुपये अकेले गाजीपुर के पांच लाख किसानों के खाते में जमा किए हैं भाइयो। अगर कोई और सरकार होती, कितने ही रुपये चबा जाते दोस्तो, चबा जाते। आपको ध्यान रखना है, इन घोर परिवारवादियों की नजर, आपको ये जो राशि मिल रही है, ये राशि पर भी इनकी नजर है, और इसलिए ऐसे लोगों को एक तस्सु भर भी जगह नहीं देनी है। घुसने नहीं देना है भाइयो।

साथियो,
ये घोर परिवारवादी चाहते हैं हमारा गरीब, हमारे देश का नागरिक, हमारे गाजीपुर के लोग जातियों में बंट जाएं, बिखर जाएं, अंदर-अंदर लड़ते रहें, ताकि उनकी दुनिया चलती रहे, उनका खेल चलता रहे। लेकिन आपको इन्हें बता देना है कि आपके लिए अपने क्षेत्र का विकास, अपने देश का विकास, अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य यही आपके लिए सर्वोपरि है। मैं यहां के सभी माताओं-बहनों को, बुजुर्गों को प्रार्थना करना चाहता हूं। पहले की सरकारों के कारण आपको जिस मुसीबत में जिंदगी गुजारनी पड़ी, जिन तकलीफों में जिंदगी जीनी पड़ी, जिस अभाव में गुजारा करना पड़ा।

कोई मां-बाप, कोई मां-बाप चाहेगा कि उनके बच्चों को भी वैसी जिंदगी जीनी पड़े. कोई चाहेगा क्या, कोई मां-बाप चाहेगा कि उनके बच्चे भी इसी मुसीबत में जिएं। जरा मुझे बताइये कि कोई चाहेगा क्या। तो हमें अपनी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य को पक्का करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। और इसलिए भाइयो और बहनो, आपको भाजपा और उसके सहयोगियों के पक्ष में, हमारे एनडीए के जो साथी हैं, कहीं अपना दल है, कहीं निषाद पार्टी है, इन सभी सहयोगियों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करना है।

भाइयो और बहनो,

मैं आज देख रहा हूं कि आप कितनी बड़ी संख्या में यहां आए हो, जहां भी मेरी नजर पहुंचती है, लोग ही लोग हैं। इनती बड़ी तादाद में आप आशीर्वाद देने आए, मैं आपका आभारी हूं। लेकिन भाइयो और बहनो, अब इतनी बड़ी रैली हो गई। इतने सारे नेता आ गए। अब तो चुनाव जीत गए। चलो जाके सौ जाएं, ऐसा तो नहीं करोगे ना। जाके सौ नहीं जाओगे ना। अब तो जीत गए क्या करना है। ऐसा नहीं करोगे ना। मतदान पूरा होने तक ज्यादा मेहनत करनी है, करोगे। घर-घर जाओगे। एक-एक मतदाता को मिलोगे। अच्छा भइया मेरा एक काम करोगे। करोगे।

जो भी करने वाले हैं जरा हाथ ऊपर करो। करोगे। देखिए, ये गाजीपुर की धरती है। आपने वादा किया है तो गाजीपुर के लोग कभी भी वादा तोड़ते नहीं है। मेरा काम करोगे। फिर से बताइये जोर से, करोगे । देखिए, अभी से लेकर हर घर जाइये, जा करके उन परिवार के लोगों को बताइये कि मोदी जी गाजीपुर आए थे, और उन्होंने आपको प्रणाम भेजा है।

ये काम करोगे। घर-घर मेरा प्रणाम पहुंचाओगे। पक्का पहुंचाओगे। देखिए, जब आप हर परिवार में मेरा प्रणाम पहुंचाओगे तो हर परिवार मुझे आशीर्वाद देगा और जब हर परिवार आशीर्वाद देगा तो आपको मालूम है कि मेरी ऊर्जा कितनी बढ़ जाएगी। मैं कितना ज्यादा काम करूंगा।

कितनी सेवा करूंगा आप लोगों की और इसलिए मेरी तरफ से हर घर जा करके प्रणाम पहुंचाना है, पहुंचाओगे, पहुंचाओगे। और भाइयो और बहनो हर मतदाता का मतदान करवाना है। याद रखिएगा- पहले मतदान, फिर जलपान।

बहुत बहुत धन्यवाद

भारत माता की जय

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February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।