Text of PM's address at Parivartan Rally in Gaya, Bihar

Published By : Admin | August 9, 2015 | 18:33 IST
People of Bihar want change and be part of the state's development: PM Modi #ParivartanInBihar
NDA Government is dedicated to the development and welfare of Bihar: PM #ParivartanInBihar
NDA's sole focus is Bihar's progress. We want to improve education, employment & skill development among youth: PM #ParivartanInBihar

भारत माता की जय

ये जो कोई ऊपर हैं, अगर आप में से कोई नीचे गिरा तो मेरा क्या होगा। मैं देख रहा था कि एयरपोर्ट से यहाँ तक पूरे रास्ते भर ऐसा ही लोगों का हुजूम जमा था  गया वालों से मेरी एक शिकायत है। शिकायत करूं, आप बुरा नहीं मानोगे न। पक्का नहीं मानोगे। मैं गया लोकसभा के चुनाव के समय भी आया था, इसी मैदान में आया था और करीब-करीब इसी समय आया था और चुनाव पीक पर थे तब आया था। मैं ख़ुद चुनाव लड़ रहा था, लोकसभा का चुनाव था, प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय करना था लेकिन उस सभा में तो इससे आधे लोग भी नहीं आये थे और आज उससे डबल से भी ज्यादा मैं देख रहा हूँ। हवा का रुख़ मुझे पता चल रहा है। लेकिन मेरी ये शिकायत प्यार की है, नाराजगी की नहीं है। ये शिकायत आपको अभिनंदन करने के लिए है, आपको बधाई देने के लिए है। कमाल कर दिया है आज गया वालों ने। ये हमारे जीतन राम जी की कर्मभूमि है ना।     

मंच पर विराजमान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान अमित भाई शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे वरिष्ठ साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, हम पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, केन्द्रीय मंत्री एवं रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान उपेन्द्र कुशवाहा जी, बिहार विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री अनंत कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री भूपेन्द्र यादव जी, पूर्व मंत्री और हम सबके मार्गदर्शक श्रीमान डॉ. सी पी ठाकुर जी, केंद्र में मेरे साथी मंत्री श्रीमान राधामोहन सिंह जी, श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्रीमान राजीव प्रताप रूडी जी, श्री गिरिराज जी, श्री राम कृपाल यादव जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी चौधरी जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष और मेरे मित्र डॉ. अरुण जी, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ हुसैन जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए गया के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

चुनाव बहुत जल्द आ रहे हैं और मैं साफ देख रहा हूँ जनता ने दो फैसले कर लिये हैं। बिहार की जनता ने दो निर्णय कर लिये हैं - एक निर्णय बिहार के जीवन में, बिहार के विकास में, बिहार का भाग्य बदलने के लिए एक आधुनिक ताकतवर नया बिहार बनाने का निर्णय कर लिया है और दूसरा निर्णय बिहार की जनता ने कर लिया है, बिहार में परिवर्तन का। 25 साल से जिनको झेला है, जिनके हर ज़ुल्म को झेला है, जिनके अहंकार को झेला है, जिनकी धोखाधड़ी को झेला है, इन सबसे मुक्ति का पर्व ये चुनाव आने वाला है भाईयों। और ये चुनाव बिहार को जंगलराज से मुक्ति का पर्व बनने वाला है, ये चुनाव बिहार में अहंकारी हुकूमत से मुक्ति का पर्व बनने वाला है।

भाईयों-बहनों, 25 साल हो गए, इन्हीं लोगों ने बिहार पर राज किया है। आप मुझे बताईये, आज जैसे 25 साल बीते हैं, अगर आने वाले 5 साल भी ऐसे बीते तो नौजवान बर्बाद हो जाएगा कि नहीं हो जाएगा? आपका भविष्य तबाह हो जाएगा, आपको बिहार छोड़कर रोजी-रोटी के लिए कहीं जाना पड़ेगा, बूढ़े मां-बाप को छोड़ना पड़ेगा, क्या हम ऐसा बिहार चाहते हैं? क्या बिहार में परिवर्तन चाहिए? बिहार का भला करने वाली सरकार चाहिए? लोकतंत्र में विश्वास करने वाली सरकार चाहिए? अहंकार से मुक्त सरकार चाहिए? जंगलराज के सपनों को चूर-चूर करना चाहिए? इसलिए भाईयों-बहनों, आज मैं बिहार की जनता के पास आया हूँ। मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। क्या करके रख दिया बिहार को? आज भी हिन्दुस्तान के सांस्कृतिक इतिहास की चर्चा कोई करेगा तो उस चर्चा की शुरुआत बिहार के भव्य भूतकाल से होती है। आज भी विश्व में अहिंसा के संदेश की कोई चर्चा करता है तो भगवान बुद्ध का स्मरण करता है तो बात बिहार से प्रारंभ होती है। सत्ता के लिए संघर्ष के बाद जनता की भलाई के लिए सत्य को छोड़ने का महाप्रयास, इसकी भी चर्चा होगी तो यही बिहार से चर्चा होती है। विज्ञान हो, संस्कृति हो, इतिहास हो, वीरता हो, पराक्रम हो, कोई ऐसा विषय नहीं है, हिन्दुस्तान जब भी उसकी चर्चा करे तो चर्चा का प्रारंभ बिहार से होता है।

ऐसी ये महान भूमि, ऐसी ये पवित्र भूमि, उसके सपनों को सत्ता के नशे में बैठे लोगों ने चूर-चूर कर दिए। आधुनिक भारत में भी बिहार ने देश को जितना दिया है, शायद ही हिन्दुस्तान का कोई राज्य इसका दावा कर सकता है जितना बिहार ने देश को दिया है। जब बिहार देश को उत्तम मानव संसाधन दे सकता है आज हिंदुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा जिस राज्य में बिहार का नौजवान आईएएस बनकर न बैठा हो, कोई राज्य नहीं होगा। भारत के कोने-कोने में बिहार का नौजवान जिस पद पर बैठा है उस राज्य को विकास के नई ऊंचाईयों पर ले जाने का पराक्रम करके दिखाता है। ये बिहार के नौजवानों की ताकत है, ये बिहार के लोगों की ताकत है लेकिन क्या कारण है कि बिहार आगे बढ़ नहीं पा रहा है। क्या कारण है? बिहार को किसने बर्बाद किया? बिहार के सपनों को किसने चूर-चूर किया? बिहार में जंगलराज कौन लाया? बिहार में जंगलराज लाने का और प्रयास कौन कर रहा है? क्या फिर से बिहार को उन 25 साल की बर्बादी की ओर ले जाना है क्या? फिर से उस दोज़ख में जाना है क्या? क्या बिहार बचाना है? क्या नया बिहार बनाना है? क्या बिहार को आगे ले जाना है? तो भाईयों-बहनों, हम कंधे से कंधे मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं। अब दिल्ली बिहार के साथ है। अब दिल्ली बिहार का भाग्य बदलने के लिए आपकी सेवा में तैनात है और इसलिए भाईयों-बहनों, आज मैं आपके पास आया हूँ बिहार के जीवन को बदलने के लिए, एक अच्छी सरकार चुनने के लिए आपसे प्रार्थना करने के लिए आया हूँ। बिहार की जनता ने पिछले लोकसभा के चुनाव में मुझपर इतना प्यार बरपाया, इतना प्यार बरपाया कि मैं उस प्यार को ब्याज समेत लौटाना चाहता हूँ, विकास करके लौटाना चाहता हूँ लेकिन जो विकास के लिए प्रतिबद्ध हो, ऐसी सरकार यहाँ होना जरुरी है।

भाईयों-बहनों, गंगाजी तो बहती है लेकिन अगर हम उल्टा लोटा लेकर जाएंगे तो कोई एक बूँद भी पानी नहीं ले पाएंगे। दिल्ली से विकास की गंगा तो बह रही है लेकिन यहाँ के शासकों का अहंकार उल्टा लोटा पकड़े हुए है ताकि दिल्ली के विकास की गंगा बिहार के गाँव-गली में ना पहुंचे। पिछले दिनों जब मैं बिहार आया था, अनेक योजनाओं का शिलान्यास किया। 10-10 साल से रुकी पड़ी थी, कोई देखने को तैयार नहीं था। यही लोग दिल्ली की सरकार को चलाते थे और आज वही लोग साथ मिलकर के बिहार के लोगों को फिर से एकबार जंगलराज की ओर घसीटने के लिए, अपने निजी स्वार्थ के लिए तैयार बैठे हैं। आप मुझे बताईए, ये जो राजनीतिक लाभ लेने के लिए गठबंधन हुआ है, क्या चुनाव के बाद भी ये गठबंधन चलेगा क्या? ये जो जहर अभी पीया गया है, चुनाव के बाद जहर उगलेंगे कि नहीं उगलेंगे। ये जहर पीने वाले चुनाव के बाद जब जहर उगलेंगे तो वो जहर किसकी थाली में जाकर पड़ेगा? जनता की थाली में पड़ेगा कि नहीं पड़ेगा? जनता मरेगी कि नहीं मरेगी? जनता बर्बाद होगी कि नहीं होगी? जिन्होंने जहर पीया है, उनको जहर उगलने का मौका देना चाहिए क्या? ये जहर पीने वालों की जरुरत है क्या? जहर पिलाने वालों की जरुरत है क्या? मुझे तो पता ही नहीं चल रहा, ये बिहार में भुजंग प्रसाद कौन है और चंदन कुमार कौन है? नए भुजंग प्रसाद, नए चंदन कुमार, पता नहीं कौन किसको जहर पिला रहा है, कौन किसका जहर पी रहा है लेकिन इतना मुझे पता है कि चुनाव समाप्त होते ही ये जहर उगलना शुरू करेंगे। बिहार को बर्बाद करने में अब जंगलराज के साथ जहरीला वातावरण भी आने वाला है और इसलिए बिहार को बचाना समय की मांग है।

अब देखिए, भाजपा की सरकार क्यों बनानी चाहिए, एनडीए की सरकार क्यों बनानी चाहिए। जीतन राम मांझी, राम विलास पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा, सुशील मोदी, ये सारे अनुभवी लोग, इनके नेतृत्व में बिहार में नई सरकार क्यों बनानी चाहिए। मैं अनुभव से बताता हूँ, हमारे देश में कई वर्षों से ये चर्चा चली, बीमारू राज्य है। बीमारू राज्य शब्द का प्रयोग चल पड़ा। आर्थिक विकास के पैमानों के आधार पर चल पड़ा और उस बीमारू राज्य में बिहार का भी नाम, उत्तरप्रदेश का भी नाम, मध्यप्रदेश का भी नाम, राजस्थान का भी नाम, ये बीमारू राज्य में गिने जाते हैं। लेकिन जब मध्यप्रदेश की जनता ने भाजपा की सरकार बनाई, अभी तो वहां 15 साल का भी सेवा करने का समय पूरा नहीं हुआ, अभी तो 10-12 साल हुए हैं लेकिन 10-12 साल के अन्दर-अन्दर मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा ने मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकाल लिया है। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को बीमारू से बाहर निकालना है? पक्का निकालना है? मध्यप्रदेश को निकाला भाजपा ने, बिहार को कौन निकालेगा? राजस्थान को बीमारू राज्य कहा जाता था। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और विकास की नई ऊंचाईयों को पार किया। आज राजस्थान बीमारू राज्य से बाहर निकाल आया है तो भाईयों-बहनों, क्या बिहार बीमारू राज्य से बाहर आ सकता है? क्या हम ला सकते हैं? आप मदद करोगे? आप आशीर्वाद दोगे? मैं आपसे वादा करता हूँ कि 5 साल के भीतर-भीतर हम बिहार को बीमारू राज्य से बाहर निकाल देंगे।

दुनिया में कई देशों में मुझे जाने का सौभाग्य मिला, एशिया के कई देशों में जाने का सौभाग्य मिला और वहां पर बड़े से बड़े राजनेता को मिलना हुआ हो, वहां के उद्योगपतियों से मिलना हुआ हो, वहां के साहित्यकारों से मिलना हुआ हो, वहां के छोटे-मोटे व्यापारियों से मिलना हुआ हो, वहां के सरकारी अफसरों से मिलना हुआ हो, हर किसी ने मुझसे एक बात कही। जिन-जिन देशों में बौद्ध धर्म का प्रभाव है, बौद्ध परंपरा का प्रभाव है, उन सभी देशों के मुखिया ने कहा कि एक बार तो बोधगया जाने की इच्छा है। दुनिया का हर व्यक्ति जो बौद्ध परंपरा से जुड़ा हुआ है, कम्युनिस्ट विचारधारा के नेता भी मिले, वो भी मुझे कहते हैं कि एक बार बोधगया के दर्शन के लिए जाएंगे। जितने यात्री ताजमहल देखने के लिए आते हैं, उससे ज्यादा यात्री बोधगया में माथा टेकने के लिए तैयार हैं। मुझे बताईये, क्या हमें बोधगया को ऐसा बनाना चाहिए कि नहीं चाहिए? बोधगया से ऐसा विकास हो टूरिज्म का ऐसा क्षेत्र बने ताकि दुनियाभर में बुद्ध को मानने वाले लोगों को बोधगया आने की व्यवस्था मिले और इतनी बड़ी संख्या में अगर यात्री आएंगे तो इस इलाके में कभी गरीबी रहेगी क्या।

टूरिज्म एक ऐसा उद्योग है, टूरिज्म एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कम से कम पूँजी से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। अगर एक बार बोधगया में विश्वभर के यात्रियों के आने का सिलसिला चालू हो जाए और बहुत बड़ी संख्या में हो जाए तो इस इलाके के किसी नौजवान को बेरोजगार रहने की नौबत नहीं आएगी। इतनी ताकत है उसमें और गरीब से गरीब आदमी कमाता है, ऑटो रिक्शावाला भी कमायेगा, बिस्कुट बेचने वाला भी कमायेगा, चने मुरमुरे बेचने वाला भी कमायेगा, खिलौने बेचने वाला भी कमायेगा, फूल बेचने वाला कमायेगा, अरे चाय बेचने वाला भी कमायेगा। लेकिन भाईयों-बहनों, इनकी राजनीति वोट-बैंक की राजनीति इतनी है कि उन्होंने बोधगया का विकास करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। इतना ही नहीं, जब यहाँ पर बम धमाका हुआ तो पूरे विश्व को बहुत बड़ा सदमा पहुंचा। विश्वभर में बौद्ध परंपरा को निभाने वाले सभी देशों के लोगों को सदमा पहुंचा लेकिन वोट बैंक की राजनीति में डूबे हुए लोग, उनको इसकी कोई परवाह नहीं थी। उनके लिए ऐसी घटनाएं आती है, जाती है। भाईयों-बहनों, मुझे यह स्थिति बदलनी है।

मुझे बोधगया को पूरे एशिया में तीर्थ-क्षेत्र के रूप में परिवर्तित करना है और मुझे आगे बढ़ाना है। ये गया पितृ तर्पण का स्थल है। हिन्दुस्तान का हर युवक, हर बेटा-बेटी, जब पितृ तर्पण की बात आती है तो उसका एक सपना रहता है कि उसके पिता का तर्पण मैं गया जी में जाकर करूँ। हिंदुस्तान भर के लोगों का ये सपना है कि नहीं है? पितृ तर्पण के लिए लोग आते हैं कि नहीं आते हैं? सवा सौ करोड़ का देश, हर वर्ष करोड़ों बड़ी आयु के लोग स्वर्ग सिधारते हैं, उनके संतान पितृ गया में आ करके तर्पण करना चाहते हैं। करोड़ों लोग आने के लिए तैयार बैठे हैं लेकिन यहाँ का समाचार सुनते हैं और इसके लिए आते नहीं हैं वो पितृ भी नाराज होते हैं और यहाँ के लोगों की रोजी-रोटी का भी नुकसान होता है। मुझे बताईये, हर हिन्दुस्तानी का पितृ तर्पण का सपना पूरा हो, ये व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? यहाँ के लोगों को रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए?

आप मुझे बताईये, विकास करने की दिशा में अगर आगे बढ़ना है। भाईयों-बहनों, लेकिन अगर जंगलराज पार्ट-2, ये अगर आ गया फिर तो सब बर्बाद हो जाएगा। कोई व्यक्ति जेल जाता है तो क्या सीख कर आता है भाई? कोई अच्छी चीज़ें सीख कर आता है क्या? बुरी-बुरी चीज़ें सीख कर के आता है ना जितनी बुराईयां हैं सब लेकर के आता है कि नहीं आता है? जंगलराज पार्ट-1 में जेल का अनुभव नहीं था, जंगलराज पार्ट-2 में अब जेल का अनुभव जुड़ गया है और इसलिए बर्बादी की संभावना ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए पिछली बार जब मैं आया था, तब मैंने कहा था आरजेडी का सीधा-सीधा मतलब है – रोजाना जंगलराज का डर और जो लोग उनके साथ जुड़ गए हैं; आपने देखा होगा कि अभी पटना में सवेरे-सवेरे भाजपा के कार्यकर्ता को गोलियों से भून दिया गया, मौत के घाट उतार दिया गया, पटना में हुआ और इनकी नाक के नीचे हुआ। भाईयों-बहनों, ये जंगलराज की शुरुआत है कि नहीं है? और ये जो जंगलराज पार्ट-2 आ रहा है, जंगलराज और जेल का अनुभव जुड़ रहा है, जंगलराज और जहर उगलने का अवसर खड़ा किया जा रहा है तो उस समय एक तरफ रोजाना जंगलराज का डर और दूसरी तरफ जनता का दमन और उत्पीड़न। जेडीयू - जनता का दमन और उत्पीड़न, जनता – जे, दमन – डी और उत्पीड़न – यू। आप बताईये, बिहार को ऐसे लोगों के हाथ में सौंपा जा सकता है, 25 साल जिन्होंने बर्बाद किया, उनको मौका दिया जा सकता है?

भाईयों-बहनों, आपको हैरानी होगी, पूरे हिन्दुस्तान में ये लालटेन वालों ने आपको अँधेरे में रखा है। बिजली आती है? बिजली मिलती है? परीक्षा का समय हो, अगर पढ़ना है तो बिजली मिलती है क्या? अँधेरे में गुजारा करना पड़ता है? मिट्टी के तेल पर गुजारा करना पड़ता है। पिछले चुनाव में यहाँ के नेता ने आपको वादा किया था कि आपको बिजली देंगे। बिजली देने का वादा किया था, बिजली नहीं मिलेगी तो वोट नहीं मांगूंगा, ऐसा कहा था? बिजली मिली? धोखा किया? फिर से वोट मांगने आए, दूसरा धोखा किया। ये बार-बार धोखा हो रहा है। आप इनके झांसे में आ जाएंगे क्या? आज हिन्दुस्तान में प्रति व्यक्ति कम से कम बिजली की खपत कहीं पर है तो दुर्भाग्यशाली मेरे बिहार के भाई-बहन हैं। उनके भाग्य को इन्होंने अंधकारमय बना दिया है। हिन्दुस्तान में औसत प्रति व्यक्ति करीब-करीब एक हजार किलोवाट बिजली की खपत है जबकि बिहार में 150 किलोवाट भी नहीं है। कहाँ हजार और कहाँ ढेढ़ सौ, छठवां हिस्सा है आपका! इतना ही नहीं, बिहार से भी छोटा राज्य सिक्किम के लोगों की छह गुना ज्यादा खपत है। बिहार से निकला हुआ झारखंड, 10 साल के अंदर-अंदर झारखंड का नागरिक बिहार से 5 गुना ज्यादा बिजली का खपत करता है। आपको अँधेरे में रखने वाला पाप किसने किया है? 25 साल की दो सरकारों ने किया है कि नहीं किया है? 25 साल के दो मुख्यमंत्रियों ने किया है कि नहीं किया है? और इसलिए जिन्होंने आपको बर्बाद किया है, उनको दोबारा भार नहीं दिया जा सकता है।

शिक्षा के क्षेत्र में आज हिन्दुस्तान में कोई भी टीवी चैनल उठा लीजिए, आपको दो-चार बिहार के तेजस्वी नौजवान उस टीवी चैनल के माध्यम से देश को संबोधित करते नजर आएंगे। ऐसे तेजस्वी लोगों की यह भूमि है लेकिन यहाँ के नौजवानों को अवसर नहीं दिया जाता है। टेक्निकल एजुकेशन में आज बिहार का क्या हाल है। अगर हमें नौजवानों को रोजगार देना है तो उनको टेक्निकल एजुकेशन देना होगा, स्किल डेवलपमेंट कराना होगा, इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षा दिलाना होगा डिग्री इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इंजीनियरिंग करानी पड़ेगी, सर्टिफिकेट कोर्स करना पड़ेगा। बिहार के अन्दर नौजवानों को शिक्षा मिलनी चाहिए। आज मुझे दुःख के साथ कहना पड़ता है, आज बिहार का हाल क्या है शिक्षा में।

17-20 साल उम्र के 80 लाख से ज्यादा नौजवान बिहार में हैं। इन 80 लाख बच्चों के मां-बाप के सपने हैं कि उनके बच्चों को डिप्लोमा करने का मौका मिले, डिग्री करने का मौका मिले, सर्टिफिकेट कोर्स करने का मौका मिले लेकिन बिहार में ये सारा होने के बावजूद भी बिहार में इंजीनियरिंग की सीटें कितनी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार में सिर्फ़ 25,000 सीट है। 80 लाख नौजवान पढ़ना चाहते हैं उसमें से 5-10 लाख तो इंजीनियरिंग में जाना चाहते होंगे कि नहीं लेकिन सिर्फ़ 25,000 सीट है और ये जिम्मेवारी बिहार सरकार की है। 25 साल हो गए और सिर्फ़ 25,000 सीट।

इतना बड़ा बिहार और दूसरी तरफ देखिये हिन्दुस्तान के और राज्यों का हाल। मैं बताना चाहता हूँ जो बिहार से बहुत छोटे हैं... हिमाचल प्रदेश, पूरे पटना की जितनी जनसंख्या है, पूरे हिमाचल की जनसंख्या उतनी ही है लेकिन हिमाचल प्रदेश में इंजीनियरिंग में पढने के लिए सीटों की संख्या है - 24,000। इतने छोटे हिमाचल में 24,000 और इतने बड़े बिहार में 25,000। क्या होगा यहाँ के नौजवानों का! उड़ीसा, हमारे बगल में है, पिछड़ा राज्य माना गया लेकिन उस उड़ीसा में इंजीनियरिंग की सीटें कितनी हैं, आप कल्पना नहीं कर सकते कि उड़ीसा जैसा बिहार से भी छोटा प्रदेश, वहां इंजीनियरिंग की सीटें हैं -  1 लाख 13 हजार से भी ज्यादा। इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेवार है? पंजाब बहुत ही छोटा राज्य है और पंजाब में सीटें हैं - 1 लाख 4 हजार। पंजाब बिहार का एक-चौथाई भी नहीं है और वहां 1 लाख सीटें हैं और बिहार में 25 हजार है। कौन जिम्मेवार है? जंगलराज जिम्मेवार है कि नहीं है? ये दोबारा जंगलराज लाना है? उत्तराखंड बहुत छोटा राज्य है, पटना की जितनी जनसंख्या है, उत्तराखंड की उससे ज्यादा नहीं है, पटना से भी कम जनसंख्या और उसके बावजूद भी उत्तराखंड में इंजीनियरिंग की सीटें हैं – 40,000 से ज्यादा। अब मुझे बताईये कि बिहार के नौजवानों के साथ अन्याय है कि नहीं? बिहार के नौजवानों का भाग्य बर्बाद किया जा रहा है कि नहीं किया जा रहा है? क्या बिहार के नौजवानों को इंजीनियरिंग में पढने का हक होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? उनको ये सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? जिन्होंने यह सुविधा नहीं दी है, उन्हें जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? उनको भगाना चाहिये कि नहीं चाहिए?

इसलिए मैं आज यह कहने आया हूँ कि अगर बिहार के नौजवानों का भाग्य बदलना है तो शिक्षा में बदलाव लाने की जरुरत है और शिक्षा में बदलाव एनडीए की सरकार ला सकती है, बिहार का भाग्य बदल सकती है। हर वर्ष, बिहार के जिन मां-बाप के पास कुछ पैसे हैं वे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बिहार से बाहर भेजते हैं। करीब 4-5 लाख नौजवान बिहार छोड़कर के, अपने मां-बाप को छोड़कर के, यार-दोस्तों को छोड़कर के कहीं न कहीं पढने के लिए जाते हैं और हर साल एक-एक युवक के पढने के पीछे खर्चा करीब-करीब एक लाख रूपया आता है। मुझे बताईये, चार लाख लोग बिहार से बाहर जाएं, हर वर्ष एक लाख रूपया साथ-साथ चला जाए तो बिहार का चार हजार करोड़ का नुकसान होता है कि नहीं होता है? ये बिहार का चार हजार करोड़ रूपया बचना चाहिए कि नहीं चाहिए? अगर बिहार का चार हजार करोड़ रूपया बचाना है तो बिहार के नौजवान को यहाँ पढने के लिए सुविधा मिलनी चाहिए। ये बिहार सरकार भाजपा की सरकार बनाईए, एनडीए की बनाईए और हम बना कर रहेंगे। इसलिए मैं आपसे आग्रह करने आया हूँ कि हमें विकास के लिए वोट चाहिए, बिहार को जंगलराज से मुक्त कराने के लिए वोट चाहिए, धोखेबाजी से बिहार को मुक्त कराने के लिए वोट चाहिए। मैं आपको भरोसा दिलाने आया हूँ कि मैं बिहार की विकास यात्रा में कंधा से कंधा मिलाकर चलूँगा। अगर आप एक कदम चलेंगे तो मैं सवा कदम चलूँगा, मैं ये विश्वास दिलाने आया हूँ। चुनाव के समय भारी मतदान करके परिवर्तन लाकर के रहिये, बिहार का भाग्य बदल के रहिये। 

बहुत बहुत धन्यवाद!       

Explore More
ಶ್ರೀರಾಮ ಜನ್ಮಭೂಮಿ ಮಂದಿರದ ಧ್ವಜಾರೋಹಣ ಉತ್ಸವ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ

ಜನಪ್ರಿಯ ಭಾಷಣಗಳು

ಶ್ರೀರಾಮ ಜನ್ಮಭೂಮಿ ಮಂದಿರದ ಧ್ವಜಾರೋಹಣ ಉತ್ಸವ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ
Samsung to manufacture AI data center HVAC products in India, expanding to Asia-Pacific

Media Coverage

Samsung to manufacture AI data center HVAC products in India, expanding to Asia-Pacific
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ಮಾಜಿ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಬಿಡುಗಡೆ ಸಮಾರಂಭ ಉದ್ದೇಶಿಸಿ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರ ಭಾಷಣ
August 12, 2026
ಇಂದು ಶ್ರೀ ರಾಮ್‌ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಆತ್ಮಚರಿತ್ರೆಯನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುವ ಅವಕಾಶ ನಮಗೆ ದೊರೆತಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಭಾಗವಾಗಲು ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸೇವೆ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ರಾಷ್ಟ್ರದ ಪ್ರಗತಿಗೆ ಮುಡಿಪಾಗಿಟ್ಟ ಜೀವನವನ್ನು ಕೋವಿಂದ್‌ ಅವರ ಪ್ರಯಾಣವು ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕೋವಿಂದ್ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ನನ್ನ ಸುದೀರ್ಘ ಪರಿಚಯ ಮತ್ತು ನನ್ನ ಬಗ್ಗೆ ಅವರ ವಿಶೇಷ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ಆತ್ಮೀಯತೆ ನನ್ನ ದೊಡ್ಡ ಆಸ್ತಿಯಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕಡುಬಡವರು ಮತ್ತು ಅವಕಾಶ ವಂಚಿತರು ಉನ್ನತ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ತಲುಪುವ ಅವಕಾಶ ಪಡೆಯಬಲ್ಲ ನವ ಭಾರತವನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸುವ ಕನಸನ್ನು ಮಹಾತ್ಮಾ ಗಾಂಧಿ, ಬಾಬಾ ಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್, ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ ಮತ್ತು ಸಾವಿತ್ರಿಬಾಯಿ ಫುಲೆ ಅವರು ಕಂಡಿದ್ದರು: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ಕೋವಿಂದ್ ಅವರಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು ತಮ್ಮ ಶ್ರದ್ಧೆ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದಿಂದ ಕೇವಲ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಪರಿವರ್ತಿಸಿಕೊಂಡಿರುವುದಲ್ಲದೆ, ಶತಮಾನಗಳಷ್ಟು ಹಳೆಯದಾದ ಕನಸು ಮತ್ತು ಆಶಯವನ್ನು ನನಸು ಮಾಡುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ
ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿ ನಿವೃತ್ತರಾದ ನಂತರವೂ; ಅವರು 'ಒಂದು ರಾಷ್ಟ್ರ, ಒಂದು ಚುನಾವಣೆ' ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅದರ ನಿರ್ಣಯವು ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಅಧ್ಯಾಯವನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಲಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ

ನಮ್ಮ ಮಾಜಿ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ, ಲೋಕಸಭೆ ಸ್ಪೀಕರ್ ಓಂ ಬಿರ್ಲಾ ಜಿ, ಶ್ರೀಮತಿ ಸವಿತಾ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ, ಸಮಾರಂಭದಲ್ಲಿ ಉಪಸ್ಥಿತರಿರುವ ಎಲ್ಲಾ ಹಿರಿಯ ಗಣ್ಯರೆ - ನಾನು ಎಲ್ಲರನ್ನೂ ಉಲ್ಲೇಖಿಸಲು ಸಾಧ್ಯವಾಗದಿರಬಹುದು, ಆದರೆ ಇದು ಒಂದು ಕುಟುಂಬದ ಸಮಾರಂಭದಂತೆ ಭಾಸವಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂಬುದು ನನಗೆ ತುಂಬಾ ಸಂತೋಷ ನೀಡುತ್ತಿದೆ.

ಸಹೋದರ ಸಹೋದರಿಯರೆ,

ಇಂದು ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಯನ್ನು ಬಿಡುಗಡೆ ಮಾಡುವ ಸಂದರ್ಭ ನಮಗಿದೆ. ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಭಾಗವಾಗುವ ಅದೃಷ್ಟ ನನಗೂ ಸಿಕ್ಕಿದೆ ಎಂಬುದರಿಂದ ನನಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರೊಂದಿಗೆ ನನಗೆ ದೀರ್ಘ ಒಡನಾಟ, ಅವರನ್ನು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶ, ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿ ಅವರ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ಪಡೆಯುವ ಅವಕಾಶ, ಇದೆಲ್ಲದರ ಜತೆಗೆ, ನನ್ನ ಮೇಲಿನ ಅವರ ವಿಶೇಷ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ವಾತ್ಸಲ್ಯ - ಇದು ನನ್ನ ಜೀವನದ ಒಂದು ದೊಡ್ಡ ನಿಧಿಯಾಗಿದೆ. ಅವರ ಜೀವನದ ಬಗ್ಗೆ ನಾನು ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಂಡಂತೆ, ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಗಳನ್ನು ನಾನು ಹತ್ತಿರದಿಂದ ನೋಡಿದ್ದರಿಂದ, ಶ್ರೀ ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಆತ್ಮಚರಿತ್ರೆ ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವ ಮತ್ತು ಭಾರತೀಯ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಪರಂಪರೆಯಾಗುತ್ತದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ಪೂರ್ಣ ವಿಶ್ವಾಸದಿಂದ ಹೇಳಬಲ್ಲೆ. ಅವರ ಜೀವನ ಪಯಣ, ಸಮಾಜ ಮತ್ತು ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಅವರ ಕೊಡುಗೆ - ನಾನು ಮಾತನಾಡಲು ತುಂಬಾ ಇದೆ, ಆದರೆ ಪುಸ್ತಕ ಬಿಡುಗಡೆಯಲ್ಲಿ "ಮುನ್ನುಡಿ"ಯನ್ನು ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕು. ಅದರ ಸಂಪೂರ್ಣ ಪ್ರಯೋಜನವನ್ನು ಪಡೆಯಲು ನೀವು ಪುಸ್ತಕವನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಓದಬೇಕು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಜೀವನ ಪಯಣವನ್ನು ಅವರ ಸ್ವಂತ ಮಾತುಗಳಲ್ಲೇ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಲು, ಅವರ ಬರವಣಿಗೆ, ಅವರ ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಓದಲು - ಇದು ಹೊಸ ಪೀಳಿಗೆಗೆ ಕಲಿಯಲು ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಯು ಬಹಳಷ್ಟು ನೀಡುತ್ತದೆ. ಈ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆಗಾಗಿ ನಾನು ರಾಮ್ ನಾಥ್ ಕೋವಿಂದ್ ಅವರನ್ನು ಹೃತ್ಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ತಮ್ಮ ಪುಸ್ತಕಕ್ಕೆ "ಭಾರತೀಯ ಗಣರಾಜ್ಯದ ವಿಜಯೋತ್ಸವ: ನನ್ನ ಜೀವನ, ನನ್ನ ಹೋರಾಟಗಳು" ಎಂಬ ಅತ್ಯಂತ ಸೂಕ್ತವಾದ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಇದರ ಅರ್ಥವೇನೆಂದರೆ ಜೀವನ ಮತ್ತು ಅದರ ಹೋರಾಟಗಳು ವೈಯಕ್ತಿಕ, ಆದರೆ ಆ ಹೋರಾಟಗಳಿಂದ ಬಂದ ವಿಜಯಗಳು ಭಾರತ ಗಣರಾಜ್ಯಕ್ಕೆ, ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವಕ್ಕೆ ಸೇರಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಜನರು ಯಶಸ್ಸು ಬಂದಾಗ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವೇ ಹೊಗಳಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ, ಕಷ್ಟಗಳು ಬಂದಾಗ ಸಮಾಜವನ್ನು ದೂಷಿಸುತ್ತಾರೆ, ಇದು ಮಾನವ ಸ್ವಭಾವ ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ನೋಡುತ್ತೇವೆ. ಆದರೆ ಹೃದಯವು ಉದಾರವಾಗಿದ್ದಾಗ, ಅಲ್ಲಿ ಭಾರತೀಯ ಮೌಲ್ಯಗಳು ಇದ್ದಾಗ, ಒಬ್ಬ ವ್ಯಕ್ತಿಯು ಸಮಾಜದಲ್ಲಿ ದೋಷಗಳನ್ನು ಹುಡುಕಲು ಸಮಯ ವ್ಯರ್ಥ ಮಾಡುವುದಿಲ್ಲ. ಅವರು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಹಾದಿಯತ್ತ ಗಮನ ಹರಿಸುತ್ತಾರೆ, ಸಮಾಜವು ತಮ್ಮ ಯಶಸ್ಸಿನ ಸಮಾನ ಪಾಲುದಾರ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾರೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನ ಚರಿತ್ರೆ ಮತ್ತು ಅದರ ಶೀರ್ಷಿಕೆ ಇದಕ್ಕೆ ಸ್ಪಷ್ಟ ಉದಾಹರಣೆಗಳಾಗಿವೆ. ಕಾನ್ಪುರದ ದೇಹತ್‌ನಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬದಲ್ಲಿ ಜನಿಸಿದ ಅವರ ಜೀವನವನ್ನು ನೋಡಿ. ಬೇಸಿಗೆಯ ದಿನದಲ್ಲಿ ಅವರ ಮನೆಗೆ ಬೆಂಕಿ ಹೇಗೆ ಹೊತ್ತಿಕೊಂಡಿತು ಎಂಬುದನ್ನು ಅವರು ತಮ್ಮ ಪುಸ್ತಕದಲ್ಲಿ ವಿವರಿಸಿ ಬರೆದಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ತಾಯಿ, ತನ್ನ ಸ್ವಂತ ಸುರಕ್ಷತೆಯನ್ನು ಮರೆತು, ಮನೆಯ ವಸ್ತುಗಳನ್ನು ಉಳಿಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸಿದರು. ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬದ ಆ ತಾಯಿಗೆ, ಪ್ರತಿಯೊಂದು ವಸ್ತುವು ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳನ್ನು ಬೆಳೆಸುವ ಸಾಧನವಾಗಿದೆ. ಆ ಪ್ರಯತ್ನದಲ್ಲಿ ಅವರು ಬೆಂಕಿಯ ಜ್ವಾಲೆಗೆ ಸಿಲುಕಿ ನಿಧನರಾದರು. ಊಹಿಸಿ - ಇಷ್ಟು ಚಿಕ್ಕ ವಯಸ್ಸಿನಲ್ಲಿ, ಒಬ್ಬರು ತಾಯಿಯನ್ನು ಈ ರೀತಿ ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುವುದು ಎಷ್ಟು ನೋವಿನಿಂದ ಕೂಡಿರಬೇಕು. ನನ್ನ ತಾಯಿ 100 ವರ್ಷಗಳನ್ನು ಮೀರಿ ಬದುಕಿ ನನ್ನನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಿದ್ದು ನನ್ನ ಅದೃಷ್ಟ. ಹಾಗಿದ್ದರೂ, ನಾನು ಇನ್ನೂ ಅವರ ಅನುಪಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಅನುಭವಿಸುತ್ತಿದ್ದೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ನೋವಿನ ಘಟನೆ ಯಾರನ್ನಾದರೂ ಬೀಳಿಸಬಹುದಿತ್ತು, ಆದರೆ ಅದು ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರನ್ನು ಬಲಶಾಲಿಯನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿತು. ನೆರೆಮನೆಯ ತಾಯಿ ಅವರ ಪಾಲನೆಗೆ ಮುಂದಾದರು. ಇದರಿಂದ ಅವರಿಗೆ ಸಾಮಾಜಿಕ ಏಕತೆ ಮತ್ತು ಸಾಮರಸ್ಯದ ಬಲ ಅರ್ಥವಾಯಿತು. ಈ ಘಟನೆಯ ನಂತರ, ಅವರ ತಂದೆಯ ಪಾತ್ರ ಇನ್ನಷ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಯಿತು. ಅವರ ತಂದೆ ಕುಟುಂಬವನ್ನು ನಿರ್ವಹಿಸಿದ ರೀತಿ, ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಮೌಲ್ಯಗಳನ್ನು ನೀಡುವ ರೀತಿ - ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ತನ್ನ ತಂದೆಯನ್ನು ತನ್ನ ನಾಯಕ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ಬಾಲ್ಯದ ಹೋರಾಟಗಳ ನಡುವೆ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಮೇಲೇರಲು ಶಿಕ್ಷಣವನ್ನು ಮಾರ್ಗವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಅವರು ಕಷ್ಟಪಟ್ಟು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದರು, ಸಂಪನ್ಮೂಲಗಳ ಕೊರತೆಯನ್ನು ದೌರ್ಬಲ್ಯವಾಗಲು ಬಿಡಲಿಲ್ಲ. ಜನರು ಆಗ ಊಹಿಸಲೂ ಸಾಧ್ಯವಾಗದ ಎತ್ತರವನ್ನು ಅವರು ತಲುಪಿದರು - ಅವರು ಭಾರತದಂತಹ ವಿಶಾಲ ದೇಶದ ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾದರು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಷ್ಟು ಉನ್ನತ ಹುದ್ದೆ ಏರಿದ ನಂತರವೂ, ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ವಿನಮ್ರ ವ್ಯಕ್ತಿತ್ವ ಮತ್ತು ಸರಳತೆ ಹಾಗೆಯೇ ಉಳಿಯಿತು. ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯಾಗಿ ನಾನು ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿ ಭವನದಲ್ಲಿ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಲು ಹೋದಾಗ, ಅವರು ಶಿಷ್ಟಾಚಾರ ದಾಟಿ ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದರು ಎಂಬುದು ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ. ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯನ್ನು ಬೀಳ್ಕೊಡಲು ಅವರು ಕಾರಿನ ಬಾಗಿಲಿಗೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದರು. ನಾನು ಅವರನ್ನು ಹೀಗೆ ಮಾಡಬೇಡಿ ಎಂದು ವಿನಂತಿಸುತ್ತಿದ್ದೆ, ಆದರೆ ಅವರು ಕೊನೆಯವರೆಗೂ ತಮ್ಮ ವಿನಮ್ರತೆಯನ್ನು ಬಿಡಲಿಲ್ಲ. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾದ ನಂತರ, ಅವರು ತಮ್ಮ ಗ್ರಾಮವಾದ ಪರೌಂಖ್‌ಗೆ ಹೋದಾಗ, ಅವರು ತಮ್ಮ ಶಿಕ್ಷಕರ ಪಾದಗಳನ್ನು ಮುಟ್ಟಿ ಗೌರವ ಸಲ್ಲಿಸಿದರು. ಅವರು ಹಳ್ಳಿಯ ಮಣ್ಣಿಗೆ ನಮಸ್ಕರಿಸಿ ಸಾಮಾನ್ಯ ಜನರಿಗೆ ಧನ್ಯವಾದ ಅರ್ಪಿಸಿದರು. ಇಡೀ ದೇಶವು ಆ ಭಾವನಾತ್ಮಕ ದೃಶ್ಯವನ್ನು ಕಂಡಿತು. ಅವರ ನಡವಳಿಕೆಯು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನು ಹೆಮ್ಮೆಪಡುವ ಭಾರತೀಯ ಮೌಲ್ಯಗಳ ಚಿತ್ರಣವನ್ನು ಜಗತ್ತಿಗೆ ಪ್ರಸ್ತುತಪಡಿಸಿತು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಶತಮಾನಗಳ ಕಾಲದ ಗುಲಾಮಗಿರಿಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ದೇಶವು ಆರ್ಥಿಕವಾಗಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕವಾಗಿ ಬಹಳಷ್ಟು ಕಳೆದುಕೊಂಡಿತು. ನಮ್ಮ ಪೂರ್ವಜರು ಶತಮಾನಗಳ ಕಾಲ ಹೋರಾಡಿದರು. ಮಹಾತ್ಮ ಗಾಂಧಿ, ಬಾಬಾಸಾಹೇಬ್ ಅಂಬೇಡ್ಕರ್, ಜ್ಯೋತಿಬಾ ಫುಲೆ, ಸಾವಿತ್ರಿಬಾಯಿ ಫುಲೆ - ಬಡವರು ಮತ್ತು ಅತ್ಯಂತ ನಿರ್ಲಕ್ಷಿತರು ಸಹ ಶಿಖರವನ್ನು ತಲುಪಬಹುದಾದ ನವ ಭಾರತ ಕಟ್ಟುವ ಕನಸು ಕಂಡ ಅನೇಕ ಮಹಾನ್ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರಂತಹ ವ್ಯಕ್ತಿಗಳು ತಮ್ಮ ಶ್ರಮ ಮತ್ತು ಸಾಮರ್ಥ್ಯದ ಮೂಲಕ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಬದಲಾಯಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ಶತಮಾನಗಳಷ್ಟು ಹಳೆಯದಾದ ಆ ಕನಸು ಮತ್ತು ದೃಷ್ಟಿಕೋನವನ್ನು ನನಸಾಗಿಸುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಈ ದಿಕ್ಕಿನಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿವೆ. ಭವಿಷ್ಯದಲ್ಲಿ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರಂತಹ ಅನೇಕ ಯುವಕರು ನಮಗೆ ಬೇಕಾಗಿದ್ದಾರೆ, ಅವರು ತೊಂದರೆಗಳಿಂದ ಸೋಲುವುದಿಲ್ಲ, ಕಷ್ಟಗಳ ಮುಂದೆ ಹತಾಶರಾಗುವುದಿಲ್ಲ, ಆದರೆ ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ಮೂಲಕ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಗುರಿಯನ್ನು ಸುಲಭಗೊಳಿಸುವ ಧೈರ್ಯ ಹೊಂದಿರುತ್ತಾರೆ. ಈ ಬದಲಾವಣೆಯು ಬಲಿಷ್ಠ ಭಾರತ ನಿರ್ಮಿಸುವ ಸಂಕಲ್ಪವನ್ನು ಪೂರೈಸುತ್ತದೆ. ಇಲ್ಲಿಂದ ಸ್ವಾವಲಂಬಿ ಮತ್ತು ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತಕ್ಕೆ ದಾರಿ ಹೊರಹೊಮ್ಮುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಅಂತಹ ಯುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲು, ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯ ಪ್ರಮುಖ ಸೆಲೆಯಾಗಬಹುದು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ತಮ್ಮ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರು ಮೊರಾರ್ಜಿ ದೇಸಾಯಿ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ತಮ್ಮ ಒಡನಾಟ, ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಸುವಿಸ್ತಾರವಾಗಿ ವಿವರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ರಾಷ್ಟ್ರಕ್ಕೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಅವರೊಳಗಿನ ಮನೋಭಾವ, ಮೊರಾರ್ಜಿ ಭಾಯಿ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವ ಮೂಲಕ ಅವರು ಪಡೆದ ಕಲಿಕೆ ಮತ್ತು ಮಾರ್ಗ - ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರು ರಾಜಕೀಯ ಮತ್ತು ಸಮಾಜ ಸೇವೆಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಮಾರ್ಗವನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಅವರು ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯಗಳಿಗೆ ಸಮರ್ಪಿತರಾಗಿದ್ದರು. ಅವರು ಸೇವೆಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಗುರಿಯಾಗಿಸಿಕೊಂಡರು. ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಅವರ ಅವಧಿ ಇದಕ್ಕೆ ಸಾಕ್ಷಿಯಾಗಿದೆ. ರಾಜ್ಯಪಾಲರಾಗಿಯೂ ಅವರು ಒಂದು ಉದಾಹರಣೆ ನೀಡಿದರು. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಯಾಗಿಯೂ ನಾವು ಅವರ ಅದೇ ಸಮರ್ಪಣೆಯನ್ನು ಕಂಡಿದ್ದೇವೆ. ರಾಷ್ಟ್ರಪತಿಗಳ ಅತ್ಯುನ್ನತ ಹುದ್ದೆಯಿಂದ ನಿವೃತ್ತರಾದ ನಂತರವೂ ಅವರು ವಿಶ್ರಾಂತಿ ಪಡೆಯಲಿಲ್ಲ. ಅವರು ಇನ್ನೂ ಒಂದು ರಾಷ್ಟ್ರ, ಒಂದು ಚುನಾವಣೆಯಂತಹ ಪ್ರಮುಖ ವಿಷಯಗಳ ಮೇಲೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅವರು ರಾಷ್ಟ್ರವನ್ನು ಜಾಗೃತಗೊಳಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇದು ಭಾರತೀಯ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದಲ್ಲಿ ಹೊಸ ಅಧ್ಯಾಯವನ್ನು ಆರಂಭಿಸಬಹುದಾದ ವಿಷಯವಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಸಮರ್ಪಣೆ ಮತ್ತು ಸೇವಾ ಮನೋಭಾವದಿಂದ ದೇಶದ ಜನರು ಬಹಳಷ್ಟು ಕಲಿಯಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾನು ನಂಬುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಸಾಮಾಜಿಕ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿರುವುದು, ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಾಗಿ ಸಮಯವನ್ನು ಕಂಡುಕೊಳ್ಳುವುದು ತುಂಬಾ ಕಷ್ಟ. ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಈ ಕೆಲಸವನ್ನು ನಮ್ಮೆಲ್ಲರಿಗಾಗಿ ಮಾಡಿದ್ದಾರೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಅವರ ಜೀವನವು ಬಡ ಮತ್ತು ಸೌಲಭ್ಯವಂಚಿತ ಹಿನ್ನೆಲೆಯ ಜನರು ತಮ್ಮ ಸ್ವಂತ ಜೀವನದ ಪ್ರತಿಬಿಂಬಗಳನ್ನು ನೋಡಬಹುದಾದ ಬಹಳಷ್ಟು ವಿಷಯಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿದೆ. ಕಠಿಣ ಸಂದರ್ಭಗಳಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ, ಸಾಮಾನ್ಯ ಕುಟುಂಬವು ಜೀವನದ ಶುದ್ಧತೆ ಮತ್ತು ಪ್ರಾಮಾಣಿಕತೆಯೊಂದಿಗೆ ಹೇಗೆ ರಾಜಿ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದಿಲ್ಲ. ಆ ಆದರ್ಶಗಳು ನಂತರ ನಮ್ಮ ಜೀವನದ ಅಡಿಪಾಯವಾಗುತ್ತವೆ. ಕಠಿಣ ಸಮಯದ ಮೌಲ್ಯಗಳು ಜೀವನದುದ್ದಕ್ಕೂ ನಮಗೆ ಹೇಗೆ ಬೆಳಕನ್ನು ನೀಡುತ್ತವೆ. ಈ ಪರಿಶುದ್ಧತೆಯು ನಮಗೆ ಹೇಗೆ ದೇಶ ಸೇವೆಗೆ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ. ವಿವಿಧ ಸ್ಥಾನಗಳಲ್ಲಿ ಜವಾಬ್ದಾರಿಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸುವಾಗ, ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಸಮಾಜಕ್ಕೆ ಈ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯನ್ನು ನೀಡಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಕೋವಿಂದ್ ಅವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಯು ಅವರ ಜೀವನದ ನೆನಪುಗಳನ್ನು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ನಮ್ಮ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವದ ಪ್ರಮುಖ ನೆನಪುಗಳನ್ನು ಸಹ ಸಂರಕ್ಷಿಸುತ್ತದೆ ಎಂಬ ವಿಶ್ವಾಸ ನನಗಿದೆ. ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ, ಜೀವನಚರಿತ್ರೆ ಹೊರತಂದ ಅವರಿಗೆ ನನ್ನ ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಕೋರುತ್ತೇನೆ. ನಾನು ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಯುವ ಪೀಳಿಗೆಯನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ - ಇದು ರೀಲ್‌ಗಳ ಯುಗ, ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳ ಪ್ರಭಾವಿಗಳು ನಿಮ್ಮನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ಮತ್ತು ಅಲ್ಲಿಗೆ ಎಳೆಯುತ್ತಾರೆ. ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್‌ಗಳ ಈ ಯುಗದಲ್ಲಿ ಒಂದು ವಿಷಯವನ್ನು ನೆನಪಿಡಿ. ರೈಲ್ವೆ ನಿಲ್ದಾಣಗಳಲ್ಲಿ ಇದನ್ನು ಬರೆಯಲಾಗಿದೆ - ಕೆಲವು ಜನರು ಸೇತುವೆ ಬಳಸುವ ಬದಲು ಹಳಿಗಳ ಮೇಲೆ ಹಾರುತ್ತಾರೆ. ಅಲ್ಲಿ ಬರೆಯಲಾಗಿದೆ: ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್ ನಿಮ್ಮ ದೂರವನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ನೀವು ಶಾರ್ಟ್‌ಕಟ್‌ಗಳ ಮೂಲಕ ಹೋಗಲು ಬಯಸಿದ್ದರೂ ಸಹ, ನಾನು ಯುವಕರನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ - ನೀವೇ ಮೆಚ್ಚುವವರ ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಳನ್ನು ಓದಿ. ಜೀವನಚರಿತ್ರೆಗಳು ಇತಿಹಾಸದ ಘಟನೆಗಳನ್ನು ವಿಭಿನ್ನ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುವ ಅವಕಾಶವನ್ನು ನಿಮಗೆ ನೀಡುತ್ತವೆ. ಅವು ಇತಿಹಾಸಕ್ಕೆ ಹತ್ತಿರದಲ್ಲಿವೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೋವಿಂದ್ ಜಿ ಅವರ ಪ್ರಯತ್ನವು ಭವಿಷ್ಯದ ಪೀಳಿಗೆಗೆ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಯುವ ಜನರಿಗೆ ಪ್ರಯೋಜನವಾಗಬೇಕೆಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಅನೇಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು. ತುಂಬು ಧನ್ಯವಾದಗಳು.