Published By : Admin |
November 3, 2019 | 18:07 IST
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35 ನೇ ಆಸಿಯಾನ್ ಶೃಂಗಸಭೆ, 14 ನೇ ಪೂರ್ವ ಏಷ್ಯಾ ಶೃಂಗಸಭೆ (ಇಎಎಸ್) ಮತ್ತು 16 ನೇ ಭಾರತ-ಏಷಿಯಾನ್ ಶೃಂಗಸಭೆಯ ಹೊರತಾಗಿ ಪ್ರಧಾನಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು 2019 ರ ನವೆಂಬರ್ 3 ರಂದು ಥೈಲ್ಯಾಂಡ್ ಪ್ರಧಾನಿ ಜನರಲ್ (ನಿವೃತ್ತ) ಪ್ರಯುತ್ ಚಾನ್-ಒ-ಚಾ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿಯಾದರು.
ಸಭೆಯಲ್ಲಿ ಉಭಯ ನಾಯಕರು ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ಸಂಬಂಧದಲ್ಲಿ ಆಗಿರುವ ಪ್ರಗತಿಯನ್ನು ಪರಿಶೀಲಿಸಿದರು ಮತ್ತು ಆಗಾಗ್ಗೆ ಉನ್ನತ ಮಟ್ಟದ ಸಭೆಗಳು ಮತ್ತು ಎಲ್ಲಾ ಹಂತಗಳ ವಿನಿಮಯವು ಸಂಬಂಧದಲ್ಲಿ ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸಿದೆ ಎಂದು ಗಮನಿಸಿದರು. ರಕ್ಷಣಾ ಮತ್ತು ಭದ್ರತಾ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಿದ ಪರಸ್ಪರ ಕಾರ್ಯಗಳನ್ನು ಗಮನಿಸಿ, ರಕ್ಷಣಾ ಮತ್ತು ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳ ವಲಯದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರದ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಅನ್ವೇಷಿಸಲು ಎರಡೂ ಕಡೆಯವರು ಒಪ್ಪಿದರು. ಕಳೆದ ವರ್ಷ ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ವ್ಯಾಪಾರದಲ್ಲಿ 20% ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಸ್ವಾಗತಿಸಿದ ನಾಯಕರು ವ್ಯಾಪಾರ ಮತ್ತು ಹೂಡಿಕೆಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುವ ಮಾರ್ಗಗಳು ಮತ್ತು ವಿಧಾನಗಳನ್ನು ಚರ್ಚಿಸಲು ಸಂಬಂಧಪಟ್ಟ ವ್ಯವಹಾರ ಅಧಿಕಾರಿಗಳಿಗೆ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಣೆ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ವಹಿಸಲು ನಿರ್ಧರಿಸಿದರು.
ಭೌತಿಕ ಮತ್ತು ಡಿಜಿಟಲ್ ಸಂಪರ್ಕ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳು ಸೇರಿದಂತೆ ಉಭಯ ದೇಶಗಳ ನಡುವೆ ಸಂಪರ್ಕವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುವ ಮಾರ್ಗಗಳ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಗಳು ಚರ್ಚಿಸಿದರು. ಉಭಯ ನಾಯಕರು ಉಭಯ ದೇಶಗಳ ನಡುವೆ ಹೆಚ್ಚುತ್ತಿರುವ ವಾಯು ಸಂಪರ್ಕವನ್ನು ಸ್ವಾಗತಿಸಿದರು ಮತ್ತು ಬ್ಯಾಂಕಾಕ್ ಮತ್ತು ಗುವಾಹಟಿ ನಡುವೆ ನೇರ ಹಾರಾಟದ ಆರಂಭ ಮತ್ತು ರಾನೊಂಗ್ ಬಂದರು, ಥೈಲ್ಯಾಂಡ್ ಮತ್ತು ಕೋಲ್ಕತ್ತಾ, ಚೆನ್ನೈ ಮತ್ತು ವಿಶಾಕಪಟ್ಟಣಂನಲ್ಲಿರುವ ಭಾರತೀಯ ಬಂದರುಗಳ ನಡುವಿನ ಸಹಕಾರಕ್ಕಾಗಿ ಒಪ್ಪಂದಗಳನ್ನು ಅಂತಿಮಗೊಳಿಸಿದರು.
ನಾಯಕರು ಪರಸ್ಪರ ಆಸಕ್ತಿಯ ಪ್ರಾದೇಶಿಕ ಮತ್ತು ಬಹುಪಕ್ಷೀಯ ವಿಷಯಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಅಭಿಪ್ರಾಯಗಳನ್ನು ವಿನಿಮಯ ಮಾಡಿಕೊಂಡರು. ಆಸಿಯಾನ್ ಸಂಬಂಧಿತ ಸಭೆಗಳಲ್ಲಿ ಪಾಲ್ಗೊಳ್ಳಲು ತಮ್ಮನ್ನು ಆಹ್ವಾನಿಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ ಥಾಯ್ ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯವರಿಗೆ ಧನ್ಯವಾದವನ್ನು ಅರ್ಪಿಸಿದರು ಮತ್ತು ಆಸಿಯಾನ್ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿರುವ ಅವರ ನಾಯಕತ್ವವನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸಿದರು. ಈ ಸಂಬಂಧವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಲಪಡಿಸಲು ಭಾರತ-ಆಸಿಯಾನ್ ಕಾರ್ಯತಂತ್ರದ ಸಹಭಾಗಿತ್ವದ ದೇಶಗಳ ಸಂಯೋಜಕರಾಗಿ ಥೈಲ್ಯಾಂಡ್ ನೀಡಿದ ಕೊಡುಗೆಯನ್ನು ಅವರು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಅಭಿಪ್ರಾಯದ ಮೂಲಕ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಿದರು.
ಭಾರತ ಮತ್ತು ಥೈಲ್ಯಾಂಡ್ ಐತಿಹಾಸಿಕ ಮತ್ತು ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ಸಂಪರ್ಕಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವ ನಿಕಟ ಕಡಲ ನೆರೆಹೊರೆಯವರು. ಸಮಕಾಲೀನ ಸನ್ನಿವೇಶದಲ್ಲಿ, ಭಾರತದ ‘ಆಕ್ಟ್ ಈಸ್ಟ್’ ನೀತಿಯು ಥೈಲ್ಯಾಂಡ್ನ ‘ಲುಕ್ ವೆಸ್ಟ್’ ನೀತಿಯಿಂದ ಮೆಚ್ಚುಗೆ ಪಡೆದಿದೆ, ಇದು ಸಂಬಂಧವನ್ನು ಆಳವಾಗಿ, ದೃಢವಾಗಿ ಮತ್ತು ಬಹುಮುಖಿಯನ್ನಾಗಿ ಮಾಡಿದೆ.
Had an excellent meeting with Prime Minister Prayut Chan-o-cha. We talked about ways to expand cooperation between India and Thailand. I also thanked him for the wonderful hospitality of the people as well as Government of Thailand. pic.twitter.com/79pMhf8MV1
आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं।
साथियों,
हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।
साथियों,
कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।
साथियों,
सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।
नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं।
साथियों,
कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है।
साथियों,
मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है।
साथियों,
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है।
भाइयों बहनों,
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी।
मेरे प्रिय देशवासियों,
कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी
राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस,DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए।
साथियों,
ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी।
साथियों,
महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है।
साथियों,
ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है, कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है।
साथियों,
कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है।
साथियों,
जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा।
साथियों,
कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी।
साथियों,
कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे, कायम रहे!
साथियों,
नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।