प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 03 नवंबर 2019 को 35वें आसियान शिखर सम्मेलन, 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) और 16वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन के अवसर पर थाईलैंड के प्रधानमंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) प्रयात चान-ओ-चा से मुलाकात की।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और नोट किया कि सभी स्तरों पर नियमित उच्च स्तरीय बैठकों और विनिमयों ने संबंधों में सकारात्मक गति का सृजन किया है। प्रतिरक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को देखते हुए, दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग क्षेत्र में सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए सहमत जताई। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में हुई 20% की वृद्धि का स्वागत करते हुए, दोनों नेताओं ने व्यापार अधिकारियों पर व्यापार और निवेश बढ़ाने के तरीकों और साधनों पर चर्चा करने का दायित्व सौंपा।

प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की जिसमें वास्तविक और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र शामिल हैं। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच बढ़ते हवाई संपर्क और बैंकॉक और गुवाहाटी के बीच सीधी उड़ान शुरू करने तथा थाईलैंड के रानोंग बंदरगाह एवं कोलकाता, चेन्नई और विशाखापत्तनम के भारतीय बंदरगाहों के बीच सहयोग के लिए समझौतों को अंतिम रूप दिये जाने का स्वागत किया।

नेताओं ने पारस्परिक हितों के क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान से संबंधित बैठकों में शामिल होने के लिए उन्हें दिए गए निमंत्रण के लिए थाईलैंड के प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया, साथ ही उन्हें आसियान के अध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व पर बधाई दी। उन्होंने इस संबंध को और मजबूत करने हेतु भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी के लिए देश समन्वयक के रूप में थाईलैंड के योगदान का सकारात्मक रूप से मूल्यांकन किया।

भारत और थाईलैंड ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रखने वाले निकट समुद्री पड़ोसी हैं। समकालीन संदर्भ में, भारत की “पूर्व की ओर देखो” नीति का समादर थाईलैंड की “पश्चिम की ओर देखो” नीति द्वारा किया जाता है जिसने इस संबंध को गहरा, मजबूत और बहुपक्षीय बना दिया है।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा कर अभयदान और जीवन बचाने की महत्ता बताई
September 02, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अभयदान और जीवन रक्षा के गुणों को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा:

"अभयस्यैव यो दाता तस्यैव सुमहत्फलम्।

न हि प्राणसमं दानं त्रिषु लोकेषु विद्यते॥"

जो व्यक्ति लोगों के भय को दूर करता है, वह विशेष पुण्य प्राप्त करता है और तीनों लोकों में जीवन रक्षा से बढ़कर कोई मूल्यवान उपहार नहीं है।