PM takes stock of relief work underway across the state
PM Modi expresses solidarity with the people of Gujarat
PM announces financial assistance of Rs. 1,000 crore for immediate relief activities in the State
Union Government will deploy an Inter-Ministerial Team to visit the state to assess the extent of damage in the State
Centre assures all help for restoration and rebuilding of the infrastructure in the affected areas
PM also takes stock of COVID-19 situation in Gujarat
Rs. 2 lakh Ex gratia for the next of kin of the dead and Rs 50,000 for the injured due to Cyclone Tauktae would be given to all those affected across India
Immediate financial assistance would be given to all affected states after they send their assessments to the Centre
ತೌಕ್ತೇ ಚಂಡಮಾರುತದಿಂದ ಉದ್ಭವಿಸಿರುವ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಪರಿಶೀಲಿಸಲು ಪ್ರಧಾನಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಇಂದು ಗುಜರಾತ್ ಗೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿದರು. ಗುಜರಾತ್ ಮತ್ತು ದಿಯುನಲ್ಲಿ ಉನಾ (ಗಿರ್ - ಸೋಮನಾಥ್), ಜಾಫ್ರಾಬಾದ್ (ಅಮ್ರೇಲಿ), ಮಾಹುವಾ (ಭಾವನಗರ) ದಲ್ಲಿ ಚಂಡಮಾರುತ ಪೀಡಿತ ಪ್ರದೇಶಗಳಲ್ಲಿ ವೈಮಾನಿಕ ಸಮೀಕ್ಷೆಯನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿ ನಡೆಸಿದರು.
ನಂತರ ಅವರು ಗುಜರಾತ್ ಮತ್ತು ದಿಯುನಲ್ಲಿ ಕೈಗೊಳ್ಳುತ್ತಿರುವ ಪರಿಹಾರ ಮತ್ತು ಪುನರ್ವಸತಿ ಕ್ರಮಗಳನ್ನು ಪರಿಶೀಲಿಸಲು ಅಹಮದಾಬಾದ್ ನಲ್ಲಿ ಸಭೆ ನಡೆಸಿದರು.
ಗುಜರಾತ್ ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ತಕ್ಷಣದ ಪರಿಹಾರ ಕಾರ್ಯಗಳಿಗಾಗಿ ಪ್ರಧಾನಿಯವರು 1,000 ಕೋಟಿ ರೂ. ಹಣಕಾಸು ನೆರವು ಘೋಷಿಸಿದರು. ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ಆಗಿರುವ ಹಾನಿಯ ಪ್ರಮಾಣವನ್ನು ತಿಳಿಯಲು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ಅಂತರ-ಮಂತ್ರಿ ತಂಡವನ್ನು ಕಳುಹಿಸುತ್ತದೆ. ನಿಯೋಜಿಸುತ್ತದೆ. ಅದರ ವರದಿಯ ಆಧಾರದ ಮೇಲೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ನೆರವು ನೀಡಲಾಗುವುದು.
ಈ ಸಂಕಷ್ಟದ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರದೊಂದಿಗೆ ನಿಕಟವಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತದೆ, ಸಂತ್ರಸ್ತ ಪ್ರದೇಶಗಳಲ್ಲಿನ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳ ಪುನಃಸ್ಥಾಪನೆ ಮತ್ತು ಪುನರ್ನಿರ್ಮಾಣಕ್ಕೆ ಸಾಧ್ಯವಿರುವ ಎಲ್ಲ ನೆರವನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ ಎಂದು ಪ್ರಧಾನಿ ರಾಜ್ಯದ ಜನರಿಗೆ ಭರವಸೆ ನೀಡಿದರು.
ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿಯವರು ತಮ್ಮ ಭೇಟಿಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೋವಿಡ್ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಮಾಹಿತಿ ಪಡೆದರು. ಕೈಗೊಂಡಿರುವ ಪ್ರತಿಕ್ರಿಯೆ ಕ್ರಮಗಳ ಬಗ್ಗೆ ರಾಜ್ಯ ಆಡಳಿತವು ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿಯವರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿತು. ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕವನ್ನು ತಡೆಗಟ್ಟುವ ಕ್ರಮಗಳನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುಬೇಕಾದ ಅಗತ್ಯವನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿ ಒತ್ತಿ ಹೇಳಿದರು.
ಪ್ರಧಾನಿಯವರ ಗುಜರಾತ್ ಭೇಟಿಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ವಿಜಯ್ ರೂಪಾನಿ ಮತ್ತು ಇತರ ಅಧಿಕಾರಿಗಳು ಇದ್ದರು.
ಭಾರತದ ವಿವಿಧ ಭಾಗಗಳಲ್ಲಿ ಚಂಡಮಾರುತದಿಂದ ಸಂತ್ರಸ್ತರಾಗಿರುವ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಪ್ರಧಾನಿ ತಮ್ಮ ಸಂಪೂರ್ಣ ಬೆಂಬಲ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಿದರು ಮತ್ತು ವಿಪತ್ತಿನ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ತಮ್ಮವರನ್ನು ಕಳೆದುಕೊಂಡ ಕುಟುಂಬಗಳಿಗೆ ತೀವ್ರ ಸಂತಾಪ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಿದರು.
ಕೇರಳ, ಕರ್ನಾಟಕ, ಗೋವಾ, ಮಹಾರಾಷ್ಟ್ರ, ಗುಜರಾತ್, ರಾಜಸ್ಥಾನ ಮತ್ತು ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೆಶಗಳಾದ ದಮನ್ ಮತ್ತು ದಿಯು ಮತ್ತು ದಾದ್ರಾ ಮತ್ತು ನಗರ ಹವೇಲಿಗಳಲ್ಲಿ ಚಂಡಮಾರುತದಲ್ಲಿ ಮೃತಪಟ್ಟವರ ಕುಟುಂಬಗಳಿಗೆ 2 ಲಕ್ಷ ರೂ. ಮತ್ತು ಗಂಭೀರವಾಗಿ ಗಾಯಗೊಂಡವರಿಗೆ 50,000 ರೂ. ಪರಿಹಾರವನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿಯವರು ಘೋಷಿಸಿದರು.
ಚಂಡಮಾರುತದಿಂದ ಉಂಟಾಗಿರುವ ನಂತರದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯ ಹಿನ್ನೆಲೆಯಲ್ಲಿ ಕೇಂದ್ರವು ಸಂತ್ರಸ್ತ ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರಗಳೊಂದಿಗೆ ನಿಕಟವಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ಪ್ರಧಾನಿ ಹೇಳಿದರು. ಆಯಾ ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರಗಳು ಹಾನಿಯ ಮೌಲ್ಯಮಾಪನಗಳನ್ನು ಕೇಂದ್ರದೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಂಡ ನಂತರ ಈ ರಾಜ್ಯಗಳಿಗೆ ತಕ್ಷಣದ ಹಣಕಾಸಿನ ನೆರವು ನೀಡಲಾಗುವುದು ಎಂದರು.
ವಿಪತ್ತು ನಿರ್ವಹಣೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಹೆಚ್ಚಿನ ವೈಜ್ಞಾನಿಕ ಅಧ್ಯಯನಗಳತ್ತ ನಾವು ಗಮನ ಹರಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ ಎಂದು ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ ಹೇಳಿದರು. ಪೀಡಿತ ಪ್ರದೇಶಗಳಿಂದ ಜನರನ್ನು ತ್ವರಿತವಾಗಿ ಸ್ಥಳಾಂತರಿಸುವುದನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ರಾಜ್ಯದೊಳಗಿನ ಸಮನ್ವಯವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಲು ಮತ್ತು ಆಧುನಿಕ ಸಂವಹನ ತಂತ್ರಗಳನ್ನು ಬಳಸಲು ಹೆಚ್ಚಿನ ಗಮನವನ್ನು ನೀಡಬೇಕೆಂದು ಅವರು ಕರೆ ನೀಡಿದರು. ಹಾನಿಗೊಳಗಾದ ಮನೆಗಳು ಮತ್ತು ಆಸ್ತಿಗಳನ್ನು ಸರಿಪಡಿಸಲು ತಕ್ಷಣ ಗಮನ ಹರಿಸಬೇಕೆಂದು ಪ್ರಧಾನಿ ತಿಳಿಸಿದರು.
The government places great emphasis on bringing a 'technology culture' to agriculture: PM Modi
March 06, 2026
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This year’s Union Budget gives a strong push to agriculture and rural transformation : PM
Government has continuously strengthened the agriculture sector ,major efforts have reduced the risks for farmers and provided them with basic economic security: PM
If we scale high-value agriculture together, it will transform agriculture into a globally competitive sector: PM
As export-oriented production increases, employment will be created in rural areas through processing and value addition: PM
Fisheries can become a major platform for export growth, a high-value, high-impact sector of rural prosperity: PM
The government is developing digital public infrastructure for agriculture through AgriStack: PM
Technology delivers results when systems adopt it, institutions integrate it, and entrepreneurs build innovations on it: PM
नमस्कार !
बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।
साथियों,
आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।
साथियों,
आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।
साथियों,
नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।
साथियों,
एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।
साथियों,
पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।
साथियों,
हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।
साथियों,
आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।
साथियों,
ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।
लेकिन साथियों,
टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।
साथियों,
हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।
साथियों,
देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।