ಭಾರತ ಮತ್ತು ಕೊರಿಯಾ ಗಣರಾಜ್ಯದ ನಡುವಿನ ವಿಶೇಷ ವ್ಯೂಹಾತ್ಮಕ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯ ಮಹತ್ವವನ್ನು ಒತ್ತಿಹೇಳಿದ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರು, ಪ್ರಮುಖ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಆಳವಾದ ಸಹಕಾರ ಮತ್ತು ಹೂಡಿಕೆಯ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಬಿಂಬಿಸಿದರು
ಭಾರತಕ್ಕೆ ಭೇಟಿ ನೀಡುವಂತೆ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಜೇ ಮ್ಯುಂಗ್ ಅವರಿಗೆ ನೀಡಿದ ಆಹ್ವಾನವನ್ನು ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರು ಪುನರುಚ್ಚರಿಸಿದರು
ಕೊರಿಯಾ ಗಣರಾಜ್ಯದ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಶ್ರೀ ಲೀ ಜೇ ಮ್ಯುಂಗ್ ಅವರ ವಿಶೇಷ ರಾಯಭಾರಿ ಶ್ರೀ ಕಿಮ್ ಬೂ ಕ್ಯೂಮ್ ನೇತೃತ್ವದ ನಿಯೋಗ ಇಂದು ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರನ್ನು ಭೇಟಿ ಮಾಡಿತು.
2025ರ ಜೂನ್ ನಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಜಿ-7 ಶೃಂಗಸಭೆಯ ನೇಪಥ್ಯದಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಜೇ ಮ್ಯುಂಗ್ ಅವರೊಂದಿಗಿನ ತಮ್ಮ ಆತ್ಮೀಯ ಮತ್ತು ಫಲಪ್ರದ ಭೇಟಿಯನ್ನು ಸ್ಮರಿಸಿದ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರು, ಭಾರತಕ್ಕೆ ಉನ್ನತ ಮಟ್ಟದ ನಿಯೋಗವನ್ನು ಕಳುಹಿಸುವ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಅವರ ನಡೆಗೆ ತಮ್ಮ ತುಂಬು ಹೃದಯದ ಮೆಚ್ಚುಗೆ ವ್ಯಕ್ತಪಡಿಸಿದರು.
ಶ್ರೀ ಕಿಮ್ ಅವರು ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಜೇ ಮ್ಯುಂಗ್ ಅವರಿಂದ ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿಯವರೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಂಡರು ಮತ್ತು ಭಾರತದೊಂದಿಗಿನ ತನ್ನ ವಿಶೇಷ ಕಾರ್ಯತಂತ್ರದ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗೆ ಕೊರಿಯಾ ಗಣರಾಜ್ಯವು ನೀಡುವ ಮಹತ್ವವನ್ನು ಪುನರುಚ್ಚರಿಸುವ ಸಂದೇಶವನ್ನು ಪುನರುಚ್ಚರಿಸಿದರು.
ಎರಡೂ ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವಗಳ ನಡುವೆ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಇಂಡೋ-ಪೆಸಿಫಿಕ್ ನಲ್ಲಿ ಆಳವಾದ ಮತ್ತು ಬಹುಮುಖಿ ಸಂಬಂಧಗಳು ನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿರುವ ಸ್ಥಿರಗೊಳಿಸುವ ಪಾತ್ರವನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿ ಒತ್ತಿ ಹೇಳಿದರು.
ಉದಯೋನ್ಮುಖ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಗಳು, ಹಡಗು ನಿರ್ಮಾಣ, ರಕ್ಷಣೆ, ಎಲೆಕ್ಟ್ರಾನಿಕ್ಸ್, ಹಸಿರು ಜಲಜನಕ ಮತ್ತು ಬ್ಯಾಟರಿಗಳಂತಹ ಪ್ರಮುಖ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಆಳವಾದ ಹೂಡಿಕೆ ಅವಕಾಶಗಳು ಮತ್ತು ಸಹಕಾರವನ್ನು ತೆರೆಯುವ ಭಾರತದ ಆರ್ಥಿಕ ಮತ್ತು ಉತ್ಪಾದನಾ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿ ಬಿಂಬಿಸಿದರು. ಎರಡೂ ದೇಶಗಳ ಆರ್ಥಿಕತೆಗೆ ಪರಿವರ್ತಕ ಶಕ್ತಿಯಾಗಿ ಭಾರತದ ಜನಸಂಖ್ಯಾ ಲಾಭಾಂಶ ಮತ್ತು ನುರಿತ ಮಾನವ ಸಂಪನ್ಮೂಲದ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿ ಒತ್ತಿ ಹೇಳಿದರು.
ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ಸಂಬಂಧಗಳನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿನ ಎತ್ತರಕ್ಕೆ ಏರಿಸುವ ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವ ಬದ್ಧತೆಯನ್ನು ಎರಡೂ ಕಡೆಯವರು ಪುನರುಚ್ಚರಿಸಿದರು.
ನಿಯೋಗದ ಪ್ರಯತ್ನಗಳಿಗೆ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಅವರು ಯಶಸ್ಸನ್ನು ಹಾರೈಸಿದರು ಮತ್ತು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಜೇ ಮ್ಯುಂಗ್ ಅವರಿಗೆ ಆತಿಥ್ಯ ವಹಿಸುವ ಆರಂಭಿಕ ಅವಕಾಶವನ್ನು ಎದುರು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದರು.
Delighted to receive the delegation of Special Envoys from the Republic of Korea led by Mr. Kim Boo Kyum. Recalled my positive meeting with President @Jaemyung_Lee last month. India–ROK Special Strategic Partnership, which completes 10 years, continues to grow from innovation and… pic.twitter.com/3N1V0WSFe1
Today, the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust: PM Modi at G7 Summit in Evian, France
June 16, 2026
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राष्ट्रपति मैक्रों, Your Excellencies,
नमस्कार!
G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।
Friends,
आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।
ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।
विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।
Friends,
पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।
किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।
Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.
अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।
Friends,
भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।
भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।
संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।
श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।
भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.
Friends,
आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।
हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।
Friends,
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।
हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।
Friends,
भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।