"After the British, India should shun nepotism, power-pride, scams, inflation, old mind sets, mistrust: Narendra Modi"
"As we breathe in the air of freedom we remember those who who devoted their lives for our Freedom: Narendra Modi"
"Great men and women spent their youth in the prisons and went to the gallows: Shri Modi"
"We may have attained freedom but not escaped mental slavery. Status quo-ist mindset must go to grow: Shri Modi"
"Hoped as a common man that PM’s speech would give a new message, but was disappointed: Narendra Modi"
"Should'nt we remember Sardar Patel & Shastriji too, instead of just one family from RedFort: CM "
"PM raised same issues like Nehruji did 60 years ago while unfurling the Tricolour: Narendra Modi"
"UPA's Food Security Bill is like serving salt & acid on plates of poor instead of food: CM"

६७वां आजादी पर्वः कच्छ जिला

भारतमाता की आन-बान-शान के साथ राष्ट्र ध्वज को मुख्यमंत्री ने दी सलामी

देश को संकटों और समस्याओं में डुबाने के लिए वर्तमान शासक संपूर्ण जिम्मेदारः मुख्यमंत्री

गुलामी की मानसिकता, स्थगित शासन और भ्रष्टाचार से आजादी ही जनता का फैसला है

देश के शासकों पर से उठा जनता का भरोसा

  गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दुस्तान को वर्तमान संकटों और समस्याओं से मुक्त कराने का आह्वान करते हुए कहा कि स्थगितता और विफलताओं के कारण देश की सवा सौ करोड़ जनता का भरोसा वर्तमान शासन पर से उठ गया है। स्वराज के बाद अब देश को गुलामी की मानसिकता में से आजाद कराने का समय आ गया है। ६७वें आजादी पर्व के राज्य स्तरीय समारोह के अवसर पर कच्छ की धरती पर भुज के लालन कॉलेज के पटांगण में भारत के तिरंगे का आन-बान-शान के साथ ध्वज वंदन कराने के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की ताकत और सामर्थ्य की उपेक्षा कर संकटों में धकेल देने वाली कांग्रेस शासित यूपीए सरकार के खिलाफ जमकर प्रहार किया। आजादी की जंग के योद्धाओं, शहीदों और महापुरुषों का ऋण स्वीकार कर, कोटि-कोटि वंदन करते हुए श्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम की दोनों विचारधाराओं- सशस्त्र क्रांति और अहिंसक आंदोलन में गुजरात के नेतृत्व की भूमिका पेश की। सरदार पटेल, महात्मा गांधी और श्यामजी कृष्ण वर्मा जैसे महापुरुषों के नेतृत्व में आजादी की जंग में अपना सब कुछ न्योछावर करने वालों को उन्होंने श्रद्धांजलि दी। आजादी के बाद आई गुलामी की मानसिकता और सोच की स्थगितता में से बाहर निकलने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति की यह चिंता जायज है कि लोकतंत्र में संसद और विधानसभा राजनीति का अखाड़ा बन गए हैं। विरोधी दल सरकार की कमजोरियों को लेकर आवाज उठाएं यह स्वाभाविक है लेकिन शासक पक्ष संसद की-विधानसभा की गरिमा को बरकरार न रखे यह लोकतंत्र के लिए शोभास्पद नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के सन्दर्भ में भी प्रधानमंत्री को देश की सेना के मनोबल को शक्ति मिले उसके लिए हौसला बढ़ाने की जरूरत थी। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हमारी सहनशक्ति की एक सीमा होनी चाहिए, लेकिन सहनशीलता की सीमा की व्याख्या भी सुनिश्चित करना शासक दल का फर्ज है।

आज देश की सुरक्षा पर संकट किसलिए है? यह प्रश्न उठाते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत के राष्ट्रपति की चिंता और भावना का आदर करने का प्रथम कर्तव्य प्रधानमंत्री का है। राजनैतिक भाषा नहीं बल्कि देश की मूलभूत समस्याओं देश की सुरक्षा, भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री को देश को विश्वास दिलाना चाहिए। भाई-भतीजावाद, सास-बहू और दामाद तक भ्रष्टाचार पहुंच गया है। भ्रष्टाचार से देश तबाही के कगार पर पहुंच गया है। शासनकर्ता दल उसमें लिप्त हो चुका है, डूब गया है। भ्रष्टाचार रोकने की शुरुआत सर्वोच्च स्तर से होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री के लाल किले पर से दिए गए स्वतंत्रता दिवस के संदेश का विश्लेषण करते हुए श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस भाषण से पूरा हिन्दुस्तान निराश हुआ है। इस भाषण में सरदार पटेल और लाल बहादुर शास्त्री का कहीं उल्लेख ही नहीं है। क्या पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का ही बतौर प्रधानमंत्री योगदान था? इस देश के विकास में परिवारवाद और राजनीति क्यों आड़े आती है?

नौसेना सबमरीन के जवानों की कल हुई मृत्यु को लेकर पूरा देश दुःख का अनुभव कर रहा है। उत्तराखंड के लिए सेना सहित हिन्दुस्तान की सभी सरकारों ने अपनी पूरी ताकत से सेवाधर्म का कर्तव्य निभाया है, उनकी शक्ति के लिए प्रशंसा का एक शब्द भी नहीं कहा? परिवारभक्ति में इस कदर डुबने की वजह क्या है? कच्छ की मरुभूमि और भारत-पाक सीमा पर से प्रधानमंत्री की मानसिकता और जिम्मेदारी को ललकारते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक मंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था और रुपया कमजोर हुआ है, प्रधानमंत्री का यह बयान या बचाव गले नहीं उतरता। पंडित नेहरू के समय से लेकर आज तक के ६० वर्ष में शासनकर्ता के रूप में आपने किया क्या?

खाद्य सुरक्षा विधेयक की खामियों को गंभीर करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अंत्योदय योजना के गरीब से गरीब लाभार्थी को खाद्य सुरक्षा कानून से कोई फायदा नहीं होने वाला। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों पर खाद्य सुरक्षा कानून के अमल के चलते प्रति माह ८० से ८५ रुपये का बोझ बढ़ेगा। यह खाद्य सुरक्षा विधेयक संविधान के समानता के सिद्धांत की अवगणना करता है। राज्यों के बीपीएल लाभार्थियों की संख्या केन्द्र तय करता है और वितरण के मापदंड राज्यों को सौंपता है। ऐसी अनेक खामियां हैं। आपने गरीब की थाली में से रोटी छिनकर उनके जख्म पर तेजाब छिड़कने का काम किया है। क्यों नहीं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई जाती।

महंगाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के मौन पर आक्रोश जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को गरीबी, भ्रष्टाचार और असुरक्षा की भावना में डुबो दिया है। अब देश के लिए नई सोच, नई आशा और नई मुक्ति अनिवार्य है। अंग्रजों से भारत को मुक्त कराया अब भ्रष्टाचार, असुरक्षितता, महंगाई, भाई-भतीजावाद, परिवारवाद, अशिक्षा-अंधश्रद्धा से मुक्ति चाहिए। देश की जनता नया फैसला करने को मजबूर हो गई है, क्योंकि संकटों और समस्याओं की फांस जनता के गले में है, उससे उसे मुक्ति चाहिए।

गुजरात के विकास का श्रेय मुख्यमंत्री को नहीं बल्कि जनशक्ति की विकास में भागीदारी को जाता है, यह कहते हुए श्री मोदी ने बताया कि रोजगार प्रदान करने में गुजरात सबसे आगे है। ऐसी क्या वजह है कि भाजपा शासित और गैर कांग्रेसी राज्य सरकारों को सबसे ज्यादा राष्ट्रीय अवार्ड मिले हैं? २० सूत्रीय गरीबलक्षी कार्यक्रमों के अमल में ऐसी राज्य सरकारें एक से पांच के क्रम में हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री का शासक दल प्रेम नहीं करता।

आज देश की मांग यह है कि हम स्पर्धा करें विकास की, भारतमाता के तिरंगे के शान की। गुजरात और केन्द्र के बीच विकास की स्पर्धा करने का आह्वान उन्होंने प्रधानमंत्री से किया। सबसे बड़ी स्पर्धा विकास और सुशासन की होनी चाहिए। सरकारी लालफीताशाही और सरकारी फाइलों की ३५ धाम की विकास यात्रा के बावजूद सरकार की गति पर देश को विश्वास नहीं रहा। अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी की सरकार में जनता को भरोसा था कि देश अब आगे जा रहा है। लेकिन २००४ के बाद दस वर्ष में अब भरोसा नहीं रहा। भारत के संघीय ढांचे का सम्मान और राज्यों की मजबूती, प्रत्येक गांव, तहसील और जिले की प्रगति होनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के राज्यों को कमजोर रखकर देश और लोकतंत्र मजबूत नहीं रहेगा। गुजरात के विकास मॉडल में कृषि, मैन्युफेक्चरिंग और सेवा क्षेत्र का संतुलन करके अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है।

  विकास की नई ऊंचाइयों पर किस तरह पहुंचा जा सकता है, यह गुजरात ने कर दिखाया है। दस वर्ष में ही यूनिवर्सिटियों की संख्या ११ से बढ़ाकर ४२ की है। रोजगार के लाखों अवसर प्रदान किए हैं। पिछले दस वर्ष में ही राज्य सरकार की नौकरियों में नई जनरेशन की ढाई लाख से ज्यादा भर्ती की गई है। अब अगले पांच वर्ष में लगातार योग्यता के स्तर पर सरकारी भर्तियों की मैन पॉवर प्लानिंग बैंक बनाकर ८० हजार नौकरियों के अवसर उपलब्ध हों, ऐसी वैज्ञानिक पद्धति पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। उत्तम स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रधानमंत्री ने स्वयं राष्ट्रीय अवार्ड गुजरात को प्रदान किया है। निजी क्षेत्र में कुशल युवाओं के लिए रोजगार के विशाल अवसर खुले हैं।

उन्होंने कहा कि गुजरात में कृषि क्षेत्र में ग्लोबल एग्रो फेयर आयोजित होगा। वैज्ञानिक पशुपालन और सहकारी दूध उत्पादन क्षेत्र में गुजरात आगे रहा है। भारत के किसान परिश्रम से देश के अन्न भंडार भरकर दुनिया का पेट भरने में सक्षम हैं। लेकिन करंट डेफिसिट अकाउंट संकट और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के बीच असंतुलन से देश की अर्थव्यवस्था टूट रही है। हमें एक भारत-श्रेष्ठ भारत के मंत्र के साथ सबका साथ, सबका विकास और हिन्दुस्तान को हरा-भरा बनाने का संकल्प करना होगा। ६७वें स्वंत्रता पर्व के महोत्सव के सिलसिले में भुज के लालन कॉलेज प्रांगण में उमड़े जनसैलाब के बीच कच्छ की विभिन्न शालाओं के १२०० विद्यार्थियों के द्वारा महायोग और सूर्य नमस्कार, कच्छ की सांस्कृतिक विरासत उजागर करता रंगारंग देशभक्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों ने उत्साहपूर्वक देखा। पुलिस जवानों द्वारा पेश डेयर डेविल शो, श्वान दल और हॉर्स शो सहित कई कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनें।

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी डॉ. वी.बी. वाघेला, मोहनभाई सोलंकी, चंद्रकांत मांकड़ और हरेशचंद्र राणा से मुलाकात कर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देने के साथ ही शॉल ओढ़ाकर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्य सचिव वरेश सिन्हा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह एस.के. नंदा, सांसद पूनमबेन जाट, जिला पंचायत प्रमुख त्रिकमभाई छांगा, विधायक वासणभाई आहिर, मोहनभाई कुंडारिया, ताराचंद छेड़ा, रमेशभाई महेश्वरी, वाघजीभाई पटेल, नीमाबेन आचार्य, पुलिस महानिदेशक अमिताभ पाठक, युवक सेवा, सांस्कृतिक विभाग के सचिव भाग्येश झा, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग श्रीनिवास, जिला प्रभारी सचिव जे.पी. गुप्ता, जिला कलक्टर हर्षद पटेल, भुज शहर भाजपा उप प्रमुख मामद सिद्दीक जुनेजा, कई अधिकारी, पदाधिकारी और नागरिक मौजूद थे।

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Text of PM’s speech at the launch of ‘Nasha Mukt Yuva for Viksit Bharat Sankalp Abhiyan’ via VC
August 02, 2026


नमस्‍कार!

आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं। इस संकल्प को लेकर, इसक कार्यक्रम से जुड़े सभी पूज्य संतजन, अलग-अलग राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे सभी राज्यपाल, सभी मुख्यमंत्री, अन्‍य सभी जनप्रतिनिधिगण, 28 हजार से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से युवा साथी, मैं आज इस शुभ घड़ी पर, शुभ संकल्प के लिए करोड़ों-करोड़ों नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं। आज हम सभी जिस अभियान के साक्षी बन रहे हैं, वह अभियान व्यक्ति के लिए हैं, परिवार के लिए हैं, समाज के लिए भी है और सबसे बड़ी बात है, यह राष्‍ट्र के लिए है।

साथियों,

विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए ‘नशा मुक्त युवा’ इस मूवमेंट का नाम ही इसके संकल्प को स्पष्ट करता है, क्योंकि आज जब देश ने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है, तो इसके लिए आवश्यक है, देश का युवा तन से स्वस्थ हो, मन से स्वस्थ हो, आत्‍मविश्‍वास से भरपूर हो और ड्रग्स जैसी घातक आदत से हमेशा-हमेशा दूर ही रहे, दूर हो। यही इस अभियान का उद्देश्य है। इसलिए हम सबको यह संकल्प लेना है, हमारे युवा नशे और ड्रग्स के खतरों को समझे, हर तरह से जागरूक रहे और उससे दूर रहें और इस संकल्प में अब ‘राष्‍ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियान की बड़ी भूमिका है।

साथियों,

काशी का सांसद होने के नाते मुझे खुशी है कि यह अभियान का पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पिछले साल काशी की पवित्र धरती से शुरू हुआ था। इसलिए वैज्ञानिक स्‍पष्‍टता के साथ-साथ इसमें आध्यात्मिक ऊर्जा भी है, संतों के आशीर्वाद भी हैं और महान सांस्कृतिक विरासत भी हैं। इसमें वह सांस्कृतिक समर्पण भी है, जिसने सदियों से नशे को खारिज किया है। यही वजह है, देश के 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन करोड़ों-करोड़ों देशवासियों के हित के लिए आज हमारे साथ जुड़ चुके हैं। सामाजिक संगठनों ने, NGOs ने इस दिशा में संकल्प लिया है। सबने मिलकर ‘काशी डिक्लेरेशन’ के जरिए रोडमैप तैयार किया है और आज हम देख रहे हैं, काशी से उठा वो कल्याणकारी विचार अब यह एक नेशनल प्रोजेक्ट्स बन गया है। आज से देशभर में ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान आरंभ हो रहा है।

साथियों,

कुछ काम ऐसे होते हैं, जो व्यक्तिगत रूप से कोई प्रयास करे, तो कभी-कभी निराश हो जाता है, थकान महसूस करता है, लंबी दूरी चलने में मन तैयार नहीं होता है, लेकिन जब सामूहिक अभियान बन जाता है, कंधे से कंधा मिलाकर करोड़ों लोग चल पड़ते हैं, तो ऐसे सभी जो व्यक्तिगत रूप से अपने आप कुछ नहीं कर पाते हैं, उनको भी एक नई ऊर्जा मिल जाती है। सामूहिकता की एक ताकत होती है और आज उस ताकत को लेकर के यह अभियान हर युवा मन को छूने वाला है। थोड़ी देर पहले देश के लाखों युवाओं ने नशा मुक्ति की शपथ ली है। आपने अपने जीवन को नशे से दूर रखने का संकल्प लिया है। आपने अपने स्कूल, अपने कॉलेज और अपने समाज में नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया है।

साथियों,

आज लिया गया यह संकल्प आने वाले 100 सप्ताह तक लगातार ऐसे ही आगे बढ़ेगा। हर रविवार, कला, संस्‍कृति, स्पोर्ट्स, मेडिटेशन, आध्यात्म और सेवा से जुड़ी गतिविधियां होंगी। नशा मुक्ति का संदेश नए लोगों तक पहुंचेगा। आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे, हंड्रेड मजबूत स्‍टेप्‍स।

साथियों,

आज हजारों स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के लाखों विद्यार्थी इस कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़े हैं। माई भारत के वॉलंटियर्स भी लाखों की तादाद में आज इससे जुड़े हैं। मेरे एनएसएस के नौजवान भी आज हमारे साथ शामिल हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से, अलग-अलग संस्‍थानों से, अलग-अलग बैकग्राउंड के एक करोड़ से अधिक युवा आज एक साथ हैं। मेरा आप सभी से आग्रह है, आप सब इस बड़े मोवमेंट के लीडर हैं। आपने मेरे इस विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत का युवा कितना जागरूक है, कितना समझदार है और अपने कर्तव्यों के प्रति कितना गंभीर है। मैं आप सभी को इस अभियान के लिए अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे युवा साथियों,

आप भारत की अमृत पीढ़ी हैं। आप अगले 20-25 वर्षों में अपने जीवन को भी दिशा देंगे और आप ही 2047 में देश को विकसित भारत की मंजिल तक लेकर जाएंगे और उसको शिखर पर आप ही बैठे होंगे, उसका सारा रसपान करने का अवसर आप ही को मिलने वाला है। देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशक्ति और आपके टैलेंट की जरूरत है। इसलिए, देश के लिए और अपने जीवन के लिए, खुद को नशा मुक्त रखना बहुत जरूरी है। नशा फोकस को भटकाता है, और धीरे-धीरे युवा को उसके अपने सपनों से दूर ले जाता है। अभी जिन नौजवानों ने नाट्य मंचन किया, बहुत कम समय में, बहुत अच्छे तरीके से नाट्य मंचन में उन्होंने समस्या भी बताई, समस्या के कारण पैदा हुए संकट भी बताए और बाहर निकलने के सामूहिक प्रयत्न का रास्ता भी दिखाया। नाट्य मंचन छोटा था, लेकिन जैसा उन्होंने कहा, आओ हम नाटक देखें! यह नाटक नहीं था, यह हम लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश था। हमें जगा रहा था, हमें जूझने के लिए प्रेरित कर रहा था।

साथियों,

आजकल हम देखते हैं, आज के युवा स्‍टार्टअप्‍स की दुनिया में छाए हैं, AI को लीड कर रहे हैं, Sports में तिरंगा लहरा रहे हैं, स्‍पेस से लेकर Science तक नए कीर्तिमान बना रहे हैं। लेकिन साथियों, जब कोई युवा, अगर ड्रग्स के एडिक्‍शन में फंस जाए, तो केवल एक युवा नहीं हारता, एक सपना हार जाता है, एक सपने की बाल मृत्यु हो जाती है, एक परिवार हार जाता है, पूरा का पूरा परिवार टूट जाता है, समाज से भी नफरत का शिकार बन जाता है। नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, नशा एक माँ की मुस्कान छीन लेता है। नशा एक पिता के सपनों को चूर-चूर कर देता है। एक बहन की राखी की उम्मीद को कमजोर कर देता है। एक छोटे भाई का आदर्श छीन लेता है। घर के बुजुर्ग हर दिन इस दर्द को जीते हैं कि उनका अपना बच्चा धीरे-धीरे खुद को खो रहा है, खुद को गला रहा है, तिल-तिल गल रहा है, आंखों के सामने उसे बर्बाद होते देख रहे हैं और जब परिवार में, समाज में ऐसा होता है और कहीं न कहीं, राष्ट्र की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और इसलिए दुश्मन देश भी षड्यंत्र करके हमारे देश के युवाओं को इस नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश बाकी नहीं रखते हैं। ड्रग्स सप्लाई कर-करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को तबाह करना, यह भी उनकी आतंकी साजिश का हिस्सा होता है और इसलिए हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है।

साथियों,

नशा मुक्त रहकर आपको अपने पोटेंशियल को प्रोटेक्ट करना है! आपको ध्यान रखना है, ड्रग्स कुछ समय के लिए 'High' देता है। लेकिन आपके करियर और फैमिली लाइफ को 'Low' कर देता है। हमें नशे को किसी भी तरह की स्वीकार्यता नहीं देनी है।

साथियों,

हमारे समाज में भी हमेशा नशे को एक बुराई के रूप में देखा है। हमारे संतों ने, गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी कहा गया है- "जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ। आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥'' अर्थात, जिस पदार्थ के सेवन से बुद्धि और विवेक साथ छोड़ दें, इंसान अपने और पराए की पहचान भूल जाए, ऐसा नशा उसे पतन की ओर ले जाता है।

साथियों,

हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गईं है और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग, योग और ध्यान की ताकत, यह नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। और आज तो हमारे पास नशा छोड़ने के लिए rehabilitation center जैसी सुविधाएं भी हैं। इसलिए, अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है, तो इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है, घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो, उसका सहयोग मांगे, मन खोलकर के उससे बात करें, जो एक्सपर्ट्स हैं, उनका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए, ताकि ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सके। आपको भनक आ जाएगी, थोड़ा ध्यान रखिए पता चलेगा, उसमें बदलाव आ रहा है, वो खोया-खोया लग रहा है, वो मुँह छुपा रहा है, कमरे में बंद हो जा रहा है, देर रात आ रहा है, पैसे अनाब-शनाब मांग रहा है, यह सारी चीजों से पता चल जाता है, भनक आ जाती है, कुछ मामला गड़बड़ है।

साथियों,

एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ के हमारे प्रोफेसर्स साथियों से भी करना चाहता हूँ, आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैम्पस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े-बड़े परिणाम ला सकते हैं। और साथियों, हमें एक और बात ध्यान रखनी है, जो युवा नशे से लड़कर बाहर निकलते हैं, वह कमजोर नहीं होते, जो नशे को परास्‍त करके निकला है न, वह असली योद्धा होता है, समाज को उनका सम्मान करना चाहिए, अपनापन देना चाहिए, उसे दूसरा अवसर देना चाहिए क्योंकि ड्रग्स से जुड़ा किसी का अतीत उसकी पहचान नहीं हो सकता, उसका साहस उसकी पहचान होता है।

साथियों,

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आज सरकार भी मजबूती से युवाओं के साथ खड़ी है। देश में नशे के कारोबारियों और तस्करों पर सख्ती के साथ कार्रवाई हो रही है। पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। हजारों करोड़ रुपए की ड्रग्स भी जब्त की गई है। यह दिखाता है कि, ड्रग्स के खिलाफ हमारी सरकार कितनी सख्त है। मुझे विश्वास है, केन्‍द्र सरकार, राज्य सरकार, हर कोई इसे मिशन मोड में करेंगे। मुझे विश्वास है, हमारे देश का युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी युवा ऊर्जा को न केवल संरक्षित करेगा, बल्कि विकसित भारत के संकल्पों को भी आगे बढ़ाएगा। और जब मैं आज अनेक महान संतों को मेरे सामने देख रहा हूं, दूर से मैं मन से उनको प्रणाम करता हूं। मैं इन सभी सामाजिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक संस्‍थाएं, आध्यात्मिक गुरुजन, आपका देश के कोने-कोने में संगठन है, आपके युवा साथी डिवोटीज हैं। आने वाले 100 दिन में हर एक संगठन, एक सप्ताह अपने जिम्मे ले सकता है, पूरा सप्ताह पूरे देश में वह संगठन नेतृत्व करे, बाकी सब शक्तियां उसके साथ जुड़े और रविवार को बहुत बड़ा कार्यक्रम करें। दूसरे सप्ताह, दूसरा संगठन, दूसरी शक्ति, सप्ताह भर प्रयोग करें, कार्यक्रम करे और रविवार को बड़ा कार्यक्रम करे। अगर 100 सप्ताह हमारे देश के ऐसे आध्यात्मिक, सामाजिक संगठन, युवा संगठन एक-एक सप्ताह अपने जिम्मे ले लें और बाकी सारी शक्तियां वह जुड़े और रविवार सब मिलकर के करें, आप कल्पना कर सकते हैं, देश में कितना बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। मैं एक बार फिर आप सबने समय निकाला, इस पवित्र कार्य में हम सबको आशीर्वाद दिए, इसके लिए संतों का, आचार्यो का, संगठन के महारथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इन एक करोड़ से ज्यादा जुटे नौजवानों का विशेष रूप से अभिनंदन करता हूं, आपने यह बहुत बड़ा काम किया है। मैं माई भारत के वॉलंटियर्स की बधाई करता हूं, वो जो भी ठान लेते हैं, आजकल करके दिखाते हैं। अभी पिछले दिनों मुझे माई भारत के वॉलंटियर्स को मिलने का मौका मिला, वह हिन्‍दुस्‍तान के सीमावर्ती गांवों में जाकर के एक-एक सप्ताह रूक करके आए हैं। जिसे कभी देश का आखिरी गांव कहा जाता है, जाता था जिसको आज हम देश का पहला गांव कहते हैं, वहां जाकर के आए। उनके अनुभव बड़े प्रेरक थे और आज इतना बड़ा कार्यक्रम माई भारत के वॉलंटियर्स कर पाते हैं, यह अपने आप में उनकी राष्‍ट्र के प्रति जागरूक समर्पित भावना का प्रतीक है, मैं उनकी बधाई देता हूं, उनका भी अभिनंदन करता हूं। और मुझे पूरा विश्वास है कि आप सबके सामूहिक प्रयत्नों से यह हमारी मोवमेंट घर-घर पहुंचेगी, हर युवा के दिन में पहुंचेगी और यह ड्रग्स के कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा खौफ भी बन जाएगी। आइए, हम सब मिलकर के आगे चलें, मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!