प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27 जनवरी, 2022 को वर्चुअल प्रारूप में भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की पहली बैठक की मेजबानी करेंगे, जिसमें कजाकिस्तान, किर्गिज गणराज्य, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति भाग लेंगे। राजनेताओं के स्तर पर भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच अपनी तरह की यह पहली वार्ता होगी।

पहला भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंधों का प्रतिबिंब है, जो भारत के "विस्तारित पड़ोस" (एक्सटेंडेड नेबरहुड) का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में सभी मध्य एशियाई देशों की ऐतिहासिक यात्रा की थी। इसके बाद, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर उच्च स्तर पर विचारों के आदान-प्रदान हुए हैं।

विदेश मंत्रियों के स्तर पर भारत-मध्य एशिया वार्ता की शुरुआत हुई थी, जिसकी तीसरी बैठक 18-20 दिसंबर, 2021 तक नई दिल्ली में हुई। इस बैठक ने भारत-मध्य एशिया संबंधों को प्रोत्साहन प्रदान किया है। 10 नवंबर, 2021 को नई दिल्ली में अफगानिस्तान पर आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता में मध्य एशियाई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदों के सचिवों ने भाग लिया था। इस बैठक में अफगानिस्तान पर एक सर्वमान्य क्षेत्रीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया था।

पहले भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन में, भारत-मध्य एशिया संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राजनेताओं द्वारा उपयुक्त कदमों पर चर्चा किये जाने की उम्मीद है। उनसे क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों, विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा की उभरती स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करने की भी अपेक्षा है।

यह शिखर सम्मेलन, भारत-मध्य एशिया साझेदारी के व्यापक और स्थायी महत्व का प्रतीक है, जिसे भारत और मध्य एशियाई देशों के राजनेताओं द्वारा मज़बूत किया गया है।

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प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प, आत्मसंयम और बुद्धिमत्ता के गुणों पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 02, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका तात्‍पर्य है दृढ़ संकल्प और आत्म-संयम ही वह शक्तियां हैं जो कठिनतम मार्गों को भी सुगम बना देती हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज हमारे युवा इसी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

"दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः।

अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥"

जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भांति सोच-समझकर दृढ़ निश्‍चय के साथ आरंभ करता है और बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, जो समय का सदुपयोग करता है तथा अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। ऐसा व्‍यक्ति ही वास्‍तव में बुद्धिमान होता है।