भारत माता की जय! 

महात्मा गांधी अमर रहे! महात्मा गांधी अमर रहे! महात्मा गांधी अमर रहे! 

लाल बहादुर शास्त्री अमर रहे! लाल बहादुर शास्त्री अमर रहे! लाल बहादुर शास्त्री अमर रहे! 

विशाल संख्या में पधारे हुए वरिष्ठ महानुभावों और सभी नौजवानों 

साथियों,आज 2 अक्टूबर है। पूज्य महात्मा गांधी का जन्मदिवस है। पूज्य लाल बहादुर शास्त्री जी का भी जन्मदिवस है। लाल बहादुर शास्त्री जी ने हमें मंत्र दिया था जय जवान-जय किसान! देश के किसानों ने उस एक आह्वान पर हिंदुस्तान के अन्न के भंडार भर दिए थे। 

पूज्य बापू ने हमें संदेश दिया था Quit India-Clean India! देशवासियों ने आजादी का आंदोलन चलाकर के देश को पूज्य बापू के नेतृत्व में गुलामी से मुक्त कराया लेकिन पूज्य बापू का Clean India का सपना अभी अधूरा है। यहां पर एक Crowd Sourcing के माध्यम से देश के लोगों का आह्वान किया था कि इसका Logo बनाकर के हमें Idea दीजिए। लोगों को कहा था कि आप इसका घोष वाक्य हमें दीजिए। महाराष्ट्र के भाई अनंत ने इसमें विजय प्राप्त की। गुजरात राजकोट की एक बहन भाग्यश्री ने इसका इनाम प्राप्त किया। 

जब हजारों की तादाद में Logo आए थे और जब मैंने इस Logo को देखा! एक दम से मुझे बड़ा सटीक लगा। मैं देख रहा हूं, इन चश्मों से महात्मा गांधी देख रहे हैं कि बेटे, भारत को स्वच्छ किया कि नहीं किया! ये Logo सिर्फ Logo नहीं है। इस चश्में से गांधी देख रहे हैं – क्या किया? क्या कर रहे हो, कैसे कर रहे हो, कब तक करोगे, इसलिए जब गांधी के चश्में का Logo हम देखते हैं, जो चश्में खुद हमें कहते हैं, स्वच्छ भारत का संदेश देते हैं। मैं इस कल्पना के लिए, इस कृति की रचना करने वाले अनंत को अभनिनंदन देता हूं। एक उन्होंने घोष वाक्य दिया भाग्यश्री ने –“एक कदम स्वच्छता की ओर” बहुत बड़ी बात नहीं है। एक कदम। इसके लिए मैं भाग्यश्री भी बधाई देता हूं। 

मेरे प्यारे देशवासियों! मैं आज इस मंच पर से बड़ी प्रमाणिकता से, पवित्र मन से, मेरे सामने India Gate है, वहां पर देश के लिए मरने-मिटने वालों की ज्योति जल रही रही है, उसकी साक्षी से मैं कहता हूं, राजनीतिक बयान नहीं कर रहा हूं। इस देश की सभी सरकारों ने, इस कल को करने के लिए कोई न कोई प्रयास किया है। इस देश के अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक नेताओं ने इस काम को करने के लिए प्रयास किया है। जिन-जिन लोगों ने, अलग-अलग नाम रहे होंगे, कार्यक्रम की रचना अलग रही होगी, रूप-रंग अलग रहे होंगे लेकिन जिन-जिन लोगों ने काम किया है। मैं सबसे पहले उन सबको वंदन करता हूं। मैं उनका अभिनंदन करता हूं। 

उसी कड़ी को मुझे आगे ले जाना है। मैं कोई दावा नहीं करता हूं कि अभी-अभी जो चुनकर के आई है, सरकार वो ही सब कर रही है। ना, मैंने लालकिले से भी पुरानी सभी सरकारों को बधाई दी थी, अभिनंदन किया था। आज मैं इस पवित्र मंच से भी जिन-जिन सरकारों ने इस काम को किया है, चाहे केंद्र में हो, चाहे राज्य में हो, चाहे नगर-पालिका में हो, चाहे सामाजिक संगठनों ने किया हो, चाहे सर्वोदयी नेताओं ने किया हो, चाहे सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने किया हो और संगठन के कार्यकर्ताओं ने किया है, सब के सब अभिनंदन के अधिकारी हैं और आज इस पवित्र अभियान का आरंभ हो रहा है, तब मैं उन सबको नमन करते हुए, उन सबके आशीर्वाद के साथ, इस कार्यक्रम को आरंभ करने के लिए, मै पूरे देशवासियों से प्रार्थना करता हूं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि क्या सफाई, इस देश को गंदगी से मुक्त करना, क्या सिर्फ सफाई कर्मचारियों का काम है क्या? क्या ये उन्हीं का जिम्मा है क्या? क्या सवा सौ करोड़ देशवासियों का कोई दायित्व नहीं है? हम हर बात उन्हीं पर थोपते रहेंगे क्या? अगर कुछ अच्छा हुआ, बुरा हुआ तो उन्हीं को कोसते रहेंगे क्या? ये स्थिति बदलनी है। 

सवा सौ करोड़ देशवासी, जैसे भारत माता के संतान हैं, प्रधानमंत्री भी पहले भारत माता की संतान है, बाद में प्रधानमंत्री है। इसलिए इस मां की संतान के रूप में, हम सबका दायित्व बनता है। हम हमारे देश को ऐसा न रखें। गांव हो, गली हो, मोहल्ला हो, घर हो, परिवार, स्कूल हो, कॉलेज हो, मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो, कोई भी स्थान हो। ये गंदा कैसे हो सकता है और कहीं गंदगी देखें.. कोई कागज फेंकता है, तो हमें उठाने का मन क्यों नहीं करता? 

मैं जानता हूं, ये प्रचार अभियान से होने वाला काम नहीं है। पुरानी आदतों को बदलने के लिए समय लगता है। कठिन काम है, मैं जानता हूं लेकिन हमारे पास 2019 तक महात्मा गांधी के 150 वर्ष मनाएंगे, तब तक का समय है। मैं मीडिया के मित्रों का भी आभारी हूं कि पिछले कुछ दिनों से वो इस बात को फैला रहे हैं, पहुंचा रहे हैं। अगर हम सब मिलकर के इसको एक जन आंदोलन बनाएंगे, तो मैं नहीं मानता हूं कि दुनिया के साफ-सुथरे शहरों में, देशों में, हमारा नाम नहीं होगा। हम भी उस जगह को बना सकते हैं। भारत ये कर सकता है, भारतवासी कर सकते हैं। अगर भारतवासी कम से कम खर्चे में Mars पहुंच सकते हैं, तो क्या भारतवासी अपना गली-मौहल्ला साफ नहीं कर सकते हैं? Mars तक पहुंचाने के लिए कोई प्रधानमंभी नहीं गया, कोई मंत्री नहीं गया, वैज्ञानिकों ने किया, भारत माता के संतानों ने किया था। सफाई भी हम सब मिलकर के करेंगे। 

मैं जानता हूं, कुछ ही दिनों में आलोचना शुरू होने वाली है, कि देखो क्या हुआ? देखो क्या हुआ? मेरी ढेर सारी आलोचना होने वाली है, मैं जानता हूं लेकिन मैं मां भारती की गंदगी की सफाई के लिए अगर मुझे आलोचना सहना पड़े, तो उसी मैं तैयारी के साथ आज मैदान में आया हूं। मैं इस तैयारी के साथ आया हूं कि मेरे सवा सौ करोड़ देशवासी, भारत मां की संतान, हमारी इस भारत मां को अब गंदा नहीं रहने देंगे। पूज्य बापू के सपनों को पूरा करने में, हम कोताही नहीं बरतेंगे और ये जिम्मेवारी हम सबकी है। 

मैंने Social Media में भी एक आंदोलन खड़ा करने करने का तय किया है। mygov.in, इस वेबसाइट पर भी है। Clean India के लिए एक अलग वेबसाइट बनाई है। Facebook, Twitter पर भी इस काम को आरंभ किया है। # MyCleanIndia, ये भी आज प्रारंभ किया है। मैं देशवासियों से प्रार्थना करता हूं, कि आप एक काम किजिए। कहीं कूड़ा कचरा है, उसकी फोटो आप अपलोड कीजिए। फिर उसकी सफाई आप कीजिए। उसकी वीडियो अपलोड कीजिए। फिर स्‍वच्‍छ, उस जगह की फोटो आप अपलोड कीजिए। 

भाइयों, बहनों, मैं मीडिया से भी प्रार्थना करता हूं। ये सब, आज भी मैं कहता हूं, हिन्‍दुस्‍तान में कई नौजवान ऐसे हैं, कई संगठन ऐसे हैं, और हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में हैं, हजारों की तादाद में हैं। वे सफाई का काम, मैं प्रधानमंत्री बना, उससे पहले से कर रहे है। जरा उनको हम हिन्‍दुस्‍तान की जनता के सामने मीडिया के माध्‍यम से लाएं। छोटे छोटे लोग जो सफाई का काम करते हैं, वो देश के सामने लाएं। हम सब मिलके एक एक प्रेरणा का वातावरण बनाएं। किसने किया, किसने नहीं किया, कैन जिम्‍मेवार है, कौन नहीं है, कौन गुनाहगार, इसमें इस बात को हम न घसीटें। 

मैंने पहले ही कहा, यह राजनीति से परे है। यह सिर्फ राष्‍ट्रभक्ति की प्रेरणा से किया हुआ काम है। हमने, सिर्फ-सिर्फ-सिर्फ राष्‍ट्रभक्ति की प्रेरणा से ही करना है, राजनीति से प्ररित हो कर के नहीं करना है। यह सफाई तब होगी। इसलिए मैं कहता हूं, अनेक संगठन हैं, अनेक सामाजिक संगठन हैं, अनेक सांस्‍कृतिक संगठन हैं, वह अपने-अपने तरीके से काम कर रहे हैं। 

मैंने ऐसे कई गांव देखें हैं, उस गांव का सरपंच इतना जागरूक हैं, गांव के सब लोग, गांव को इतना साफ-सुथरा रखते हैं, देखते ही बनता है। कई लोग हैं, इस काम को करते हैं। कई स्‍कूल में जाते हैं, एक-आध शिक्षक इतना रूचि लेता है, पूरा शिक्षण क्षेत्र का परिसर कितना साफ-सुथरा, पवित्रता के माहौल की अनुभूति होती है। 

जब हम इंडिया गेट पर आते हैं, राष्‍ट्रपति भवन की ओर जाते हैं, यह सफाई देखते हैं, तो मन कितना अच्‍छा लगता हैं। क्‍या मेरा हिन्‍दुस्‍तान का हर कोना इतना ही साफ होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। हर गली-मोहल्‍ला इतना ही साफ होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। यह सामाजिक दायित्‍व है कि नहीं है और इसलिए कृपा करके, अगर इसको राजनीतिक रंग से रंग दिया गया, अगर इसको इसी बात से तौल दिया, कि देखों एक दिन आए, फोटो निकाल के चले गए, तब तो हम भारत मां की फिर से एक बार कु-सेवा करेंगे। महात्‍मा गाधी हिन्‍दुस्‍तान के हर गली मौहल्‍ले में सफाई करने नहीं गए थे। लेकिन सफाई की इनकी प्रतिबद्धता ने पूरे हिन्‍दुस्‍तान में सफाई के प्रति एक जागरूकता पैदा की। हमको, सबको मिल करके इस काम को करना है।हम जहां हों, जैसे हों, इस काम को करेंगे। मुझे विश्‍वास है, मैं अपनी भारत माता को गंदगी से मुक्‍त करा पाएंगे। ये सवा करोड़ देशवासियों का काम है। 

सवा सौ करोड़ में एक मोदी नाम का इंसान भी है। अकेला मोदी है, ऐसा नहीं है। इसलिए काम सवा सौ करोड़ देशवासियों का है, ये मैं सवा सौ करोड़ बार बोल रहा हूं। काम सरकार का सिर्फ नहीं है। यह काम सिर्फ मंत्रियों का नहीं है। यह काम सिर्फ सामाजिक संगठन, समर्पित समाज सेवकों का नहीं है। यह जन-सामान्‍य का काम है। जितना ज्‍यादा हम जन सामान्‍य को जोड़ेंगे, लाभ होगा। 

मैंने आज एक और भी काम...., आज नवरात्रि की भी पूर्णहुति हो रही है। कल विजयादशमी का पर्व हम मनाने वाले हैं। कल के विजया-दशमी के पर्व के लिए भी राष्‍ट्रवासियों को शुभकामना देता हूं। 

आज मैंने सोशल मीडिया के एक आंदोलन चलाने के कार्यक्रम शुरू किया है। मैंने आज नौ लोगों को निमंत्रित किया है कि आप भी पब्लिक प्‍लेस पर आके, अपने आदमियों को ले के स्‍वच्‍छता के अभियान पर काम करेंगे। मैं विश्‍वास करता हूं, जिन नौ लोगों को मैं आज निमंत्रित किया है, वे जरूर इस काम को करेंगे। इतना ही नहीं उनसे भी मेरा आग्रह है, कि वे भी और नौ लोगों का नाम तय करके उनको भी निमंत्रित करे, वो और नौ लोगों को करे, वौ और नौ लोगों को कहे। आपको भी मैं कहता हूं, आप भी इस प्रकार का सफाई का काम करके उसका वीडियो upload करके और नौ लोगों को आप निमंत्रित कीजिए। अरे, नौ-नौ की चैन चलती ही रहे, चलती ही रहे। 

आज मैंने गोवा के गवर्नर माननीय मृदुला सिन्‍हा जी को निमंत्रित किया है। मैंने भारत रत्‍न सचिन तेंदुलकर जी को निमंत्रित किया है। मैंने योग गुरू बाबा रामदेव जी को निमंत्रित किया है। मैंने कांग्रेस के नेता श्रीमान शशि थरूर जी को निमंत्रित किया है। मैंने श्रीमान कमल हसन जी को निमंत्रित किया है। मैने श्रीमान सलमान खान जी को निमंत्रित किया है, मैंने बहन प्रियंका चोपड़ा जी को निमंत्रित किया है। इतना ही नहीं, तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा, उस पूरी टीम को मैंने कहा है, मैं इस काम में आपको निमंत्रण देता हूं, आप भी करिए और अपने सीरियल के माध्‍यम से, और भी सीरियल के माध्‍यम से इस काम को आगे बढ़ाइए। 

ह‍मारी फिल्‍म इं‍डस्‍ट्री देखेगी, पिछले 50 सालों में कई ऐसी फिल्‍में आई हैं, बहुत सी फिल्‍में ऐसी हैं, जिनमें कोई न कोई एपिसोड ऐसा है, जिसमें सफाई के विषय में कोई न कोई लोकशिक्षा का काम किया गया है। इस बात को हमें बढ़ाना। हमें इस बात की जिम्‍मेवारी निभानी है। 

भाईयों और बहनों, डब्‍ल्‍यूएचओ का एक बहुत बड़ा चौंकाने वाला मूल्‍यांकन है- उनका कहना है कि भारत में गंदगी के कारण जो बीमारी आती है, बीमारी के कारण जो रोजी-रोटी छूट जाती है, नौकरी नहीं हो पाती है, परिवार को तकलीफ होती है। डब्‍ल्‍यूएचओ का कहना है कि गंदगी के कारण हर वर्ष भारत के प्रत्‍येक नागरिक को करीब 6500 रूपयों का अतिरिक्‍त नुकसान झेलना पड़ता। बीमारी के कारण, बीमारी के कारण ऑटों रिक्‍शा नहीं चला पाता है। बीमारी के कारण टैक्‍सी नहीं चला पाता है। बीमारी के कारण अखबार बांटने के लिए नहीं जा पाता है। बीमारी के कारण दूध बेचने के लिए नहीं जा पाता है। यह भारत की कुल संख्‍या का average निकाला है, लेकिन सुखी घर के लोगों को ये नहीं भुगतना पड़ता है। अगर उनको निकाल दिया जाए तो average 6500 से बढ़कर के गरीब आदमी के सर पर बोझ की average 12-15 हजार रूपये हो सकती है। 

हम सिर्फ गंदगी साफ करें तो हमारे देश के गरीबों के जेब से कम से कम 6500 रूपये बचने वाले है। वह बीमारी से बचने वाला है। वह नौकरी पर नहीं जा पा रहा है, बेरोजगारी से बचने वाला है। ये गंदगी से मुक्ति गरीबों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बड़ा महत्‍वपूर्ण काम है। इसलिए ये भारत माता की सेवा, गरीबों की सेवा है। 

आइये हम सब मिलकर करके देखें, Mygov.in वेबसाइट पर, मेरे फेसबुक पर, ट्विटर पर, सामान्‍य जनता का जो मिजाज देख रहा हूं, जो उमंग देख रहा हूं। मुझे विश्‍वास है कि सरकार से भी जनता 100 कदम आगे चलने को तैयार है और अगर जनता चलती है तो फिर इसे रोकने का कोई कारण नहीं है। 

भाईयो-बहनों, महात्मा गांधी को हमें कुछ तो देना चाहिए। 2019 में गांधी के जब 150 वर्ष होते हैं, तब हमें ‘स्वच्छ भारत’ और ये सामूहिक दायित्वों से बना हुआ भारत। Quit India की सफलता इसलिए थी कि सारा देश आजादी के आंदोलन में जुड़ा हुआ था। Clean India की सफलता इसमें है कि सवा सौ करोड़ देशवासी इसमें जुड़ें। जय जवान-जय किसान के मंत्र की सफलता इसलिए थी, क्योंकि लाल बहादुर शास्त्री ने जय किसान का नारा दिया, अन्न उत्पादन के लिए आहवान किया, लेकिन लाल बहादुर शास्त्री को किसी ने ये पूछा कि नहीं था कि तुम खेत में जाकर के हल चला रहे हो, तुमने खेती की या नहीं की, तुमने अनाज पैदा किया कि नहीं किया, ये किसी ने नहीं पूछा था लेकिन लाल बहादुर शास्त्री जी ने कहा था जय किसान! और हिंदुस्तान के किसान खड़े हो गए थे। अन्न के भंडार भर दिए थे और भारत के हर गरीब व्यक्ति का पेट भरने का काम, उस एक महापुरुष के शब्दों पर हुआ था। महात्मा गांधी के शब्दों को पूरा करने का ये वक्त है। 

उस महापुरुष के शब्दों की पवित्रता देखिए, उस महापुरुष के शब्दों की ताकत को देखिए, उस महापुरुष के शब्दों के समर्पण को देखिए, क्या हमें वो प्रेरणा नहीं दे सकते हैं। चाहे मैं हूं या आप हों, हम सबके लिए महात्मा गांधी का Quit India नारा, ये सफलता जैसा हमें आनंद देती है, Clean India भी हमें उतना ही आनंद देगी, उतना ही सुख देगी, उतना ही समृद्धि का रास्ता प्रशस्त करेगी, इस विश्वास के साथ इन महापुरुषों के शब्दों पर भरोसा करके हम चल पड़े हैं। 

मेरे पर भरोसा मत कीजिए, मेरी सरकार पर भरोसा मत कीजिए, भरोसा हम करें महात्मा गांधी पर! भरोसा करें, महात्मा गांधी के त्याग, तपश्चर्या और समर्पण पर! भरोसा करें, हम महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपनों पर। आज हमारी जिम्मेदारी बनती है, अगर हम मां भारती के संतान हैं, तो ये हमारा दायित्व बनता है, न मैं गंदगी करूंगा और न मैं गंदगी करने दूंगा। यह हमारा दायित्व होना चाहिए। दुनिया के समृद्ध देश... 

कभी हम विदेशों में जाते हैं और आकर के कहते हैं वाह! इतना साफ-सुथरा! कहीं गंदगी नहीं थी। तो मैं लोगों को पूछता हूं – साफ देखा, स्वच्छ देखा, आपको अच्छा लगा न? मैंने कहा कि आपने किसी को गंदगी करते हुए देखा था, कूड़ा-कचरा फेंकते हुए देखा था, पान की पिचकारी लगाते हुए देखा था तो उन्होंने कहा कि नहीं देखा था, तो मैंने कहा कि सफाई का रहस्य वहां के नागरिकों का discipline है। ये अगर हम लाते हैं तो मुझे विश्वास है, हम बहुत बड़ा काम कर सकते हैं। 

एक काम और है, वह है टॉयलेट बनाना। हमारे देश के गांवों में 60 प्रतिशत से भी ज्यदा लोग आज खुले में शौचालय के लिए जा रहे हैं। मुझे सबसे बड़ी पीड़ा होता है, मां-बहनों को जब खुले में जाना पड़ता है, ये कलंक मिटाना है, हम सबने मिलकर के मिटाना है। मैंने Corporate Social Responsibility वालों से भी कहा है कि इस काम को प्राथमिकता दीजिए। मां-बहनों के सम्मान के लिए हम इतना तो करें। 

आज भी कई स्कूल ऐसे हैं, कि जहां बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट नहीं है ये स्थिति बदलनी है। किसी का इसमें दोष नहीं है, कोई जिम्मेवार नहीं है, बस हमने सकारात्मक रूप से भविष्य की ओर देख कर के चल पड़ना हैं। कोई राजनीतिक टीका-टिप्पणी, इस आंदोलन से जुड़ा हुआ कोई आदमी न करे क्योंकि सबने काम किया है। हमारे पहले सबने काम किया है। महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी इसकी सिरमौर रही है। 

मैं इस काम को वंदन करता हूं और इसलिए मैं हाथ जोड़ करके, विशेष करके मीडिया को और देशवासियों को कहता हूं, कि सारे आंदोलन को सिर्फ मां भारती की भक्ति से जोडि़ए, गरीब से गरीब के स्‍वास्‍थ्‍य से जोडि़ए, कौन कर रहा है, कौन नहीं कर रहा, कौन सफल हुआ, और विफल हुआ, इसके पीछे पड़ करके हम स्थितियों को न बिगाड़ें, न बदलें, हम एक जिम्‍मेदारी से चलें। और हम सामूहिक जिम्‍मेवारी से चलेंगे तो सफलता मिलेगी। 

मैं फिर एक बार आप सबको निमंत्रित करता हूं। हम यहां पर शपथ लेने वाले हैं। मेरी प्रार्थना है कि हम बैठे-बैठे ही शपथ लेंगे, खड़े होने की जरूरत नहीं, जो खड़े हैं, वे खड़े रहें और दूसरी मेरी प्रार्थना है कि हम दोनों हाथ ऊपर करके महात्‍मा गांधी को स्‍मरण करें और महात्‍मा गांधी को स्‍मरण करके, हम जहां हैं वहां दोनों हाथ ऊपर करके महात्‍मा गांधी का स्‍मरण करना है। तो ये काम पूज्‍य बापू को उनके सपनों का भारत बनाने के लिए है। इसलिए दोनों हाथ ऊपर करके, पूज्‍य बापू स्‍मरण करके मेरे साथ ये शपथ समारोह में शरीक होंगे। और ये शपथ सिर्फ बोलना नहीं है, शपथ लेना है। 

आप शपथ लेंगे? ये सफाई आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे? कोई कोताही नहीं बरतेंगे ? 

मेरे साथ बोलिए ‘‘महात्‍मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमें सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी बल्कि एक स्‍वच्‍छ एवं विकसित देश की कल्‍पना की थी। महात्‍मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर मां भारती को आजाद कराया। अब हमारा कर्तव्‍य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करें।“

“मैं शपथ लेता हूं कि मैं स्‍वयं स्‍व्‍च्‍छता के प्रति सजग रहूंगा और उसके लिए समय दूंगा। हर वर्ष 100 घंटे यानी हर सप्‍ताह दो घंटे श्रमदान करके स्‍वच्‍छता के इस संकल्प को चरितार्थ करूंगा। मैं न गंदगी करूंगा और न किसी और को करने दूंगा। सबसे पहले मैं स्‍वयं से, मेरे परिवार से मेरे मोहल्‍ले से, मेरे गांव से एवं मेरे कार्यस्‍थल से शुरूआत करूंगा। मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्‍वच्‍छ दिखते हैं, उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं। इस विचार के साथ मैं गांव-गांव और गली-गली स्‍वच्‍छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा। मैं आज जो शपथ ले रहा हूं वह अन्य 100 व्‍यक्तियों से भी करवाउंगा। वे भी मेरी तरह स्‍वच्‍छता के लिए 100 घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूंगा। मुझे मालूम है कि स्‍वच्‍छता की तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश को स्‍वच्‍छ बनाने में मदद करेगा।’’ 

भारत माता की जय। 

जय हिन्‍द। 

महात्‍मा गांधी अमर रहे 

महात्‍मा गांधी अमर रहे 

महात्‍मा गांधी अमर रहे 

बहुत-बहुत शुभकानाएं। 

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Your Excellency, My Friend, Mister President,
दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,
नमस्कार !

ताशकेंट में मेरे और मेरे delegation के जिस आत्मीयता से स्वागत हुआ, जिस गर्मजोशी से स्वागत हुआ इसके लिए मैं राष्ट्रपति जी और उज़्बेकिस्तान के जनता का ह्रदय से बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।

उज़्बेकिस्तान की यह मेरी चौथी यात्रा है। यह हमारे संबंधों की निकटता, करीबी समन्वय और हमारी गहरी मित्रता को दर्शाता है।

पिछले लगभग एक दशक से मुझे राष्ट्रपति जी के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है। इस दौरान मैं उन्हें दस से ज्यादा बार मिल चुका हूँ, मुझे मिलने का अवसर मिला है।

उनकी सकारात्मक और दूरदर्शी सोच, और निरंतर सीखते रहने की भावना वाकई बहुत ही प्रेरणादायक है। भारत के प्रति उनकी गहरी मित्रता और अटूट प्रतिबद्धता के लिए मैं उनका हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।

Friends,

Uzbekistan is at the heart of Central Asia, and at the heart of India’s engagement with the region.

भारत और उज़्बेकिस्तान की सोच और आकांक्षाओं में गहरी समानता है। “Yangi Uzbekistan” और “विकसित भारत 2047”, दोनों के केंद्र में youth, innovation, inclusive growth और modern technology हैं। इस साझा vision पर चलते हुए हम दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।

इस वर्ष हमारी Strategic Partnership के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस विशेष अवसर पर हमने संबंधों को Comprehensive Strategic Partnership का दर्जा देने का निर्णय लिया है। आज हमने हमारी साझेदारी के इस नए स्वरूप में तेज़ गति और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ने का ambitious agenda तैयार किया है।

हमारा द्विपक्षीय व्यापार एक बिलियन डॉलर पार कर चुका है। अब हमने 2030 तक पाँच बिलियन डॉलर व्यापार का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हम market access, connectivity, banking और payment से जुड़े विषयों पर व्यवस्थागत रूप से आगे बढ़ेंगे।

Infrastructure development में win-win सहयोग बढ़ाने के लिए हम मिलकर काम करेंगे। Digital Public Infrastructure, AI, critical minerals, clean energy, स्पेस और नूक्लीअर एनर्जी में सहयोग हमारे संबंधों को future-ready बना रहा है।

दोस्तों,

कृषि और स्वास्थ्य में हमारी ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं। उज़्बेकिस्तान के horticulture अनुभव और भारत की आधुनिक agricultural practices को जोड़कर हम दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा में योगदान देंगे।

उज़्बेकिस्तान की medicinal herbs और भारत की आयुर्वेद एक्स्पर्टीज़ भी एक natural combination हैं। आज Traditional Medicine पर हुए समझौते से हमारे साझा प्रयासों को बल मिलेगा।

हमारा प्रयास है कि हमारी साझेदारी केवल दो राजधानियों तक सीमित न रहे। इसलिए हम अपने cities और states के बीच partnerships स्थापित करने जा रहे हैं। इन partnerships से urban management, industry, education, tourism और culture में direct connections निरंतर बढ़ते रहेंगे।

दोनों देशों के बीच करीबी रक्षा और सुरक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। आने वाले समय में हम दोनों देशों की defence industries के बीच direct linkages, co-production और co-development को बढ़ावा देंगे।

हमारा मानना है कि terrorism, extremism और separatism पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती हैं। इनके विरुद्ध zero tolerance हमारा साझा संकल्प रहा है, और आगे भी रहेगा।

दोस्तों,

हमारे संबंधों की सबसे गहरी जड़ें हमारी साझा विरासत में हैं। आज हमने इन्हें और मज़बूत बनाने पर विशेष बल दिया।

उज़्बेकिस्तान की Buddhist heritage sites के संरक्षण के लिए हम मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों के युवाओं, विशेषकर students और professionals के बीच exchanges को बढ़ावा देना हमारी उच्च प्राथमिकता है। दोनों देशों के बीच टुरिज़म बढ़ाने के लिए आज Program of Cooperation पर सहमति बनी है। मुझे खुशी है कि उज़्बेकिस्तान में हिन्दी भाषा को promote करने के लिए आज हम Scholarships की घोषणा करने जा रहे हैं।

Sports भी हमारे सहयोग के महत्वपूर्ण आयाम के रूप में उभर रहा है। पिछले वर्ष गोवा में बीस वर्षीय Uzbek Grandmaster सिंदारोव ने FIDE World Cup जीता। अब नवंबर में उनका मुकाबला भारत के बीस वर्षीय chess champion गुकेश के साथ होने वाला है। एक बिसात पर जब ये दो युवा सितारे आमने-सामने होंगे, तो ज़ाहिर है- इस मुकाबले पर पूरी दुनिया की नज़र होगी। अगले महीने समरकन्द में होने जा रहे Chess Olympiad के लिए भी मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। आने वाले समय में कुराश और कबड्डी जैसे traditional games भी हमारी स्पोर्ट्स साझेदारी को नई ऊर्जा देंगे।

आज की चर्चा ने हमारे संबंधों के भविष्य की एक स्पष्ट दिशा तय की है।

A stronger India-Uzbekistan partnership will be a powerful force for peace, progress and prosperity in Central Asia.

Excellency,

आपकी मित्रता और आज की सार्थक चर्चा के लिए एक बार फिर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

दो दिन बाद उज़्बेकिस्तान अपनी स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ मनाएगा। मैं 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से आपको और सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।