“लोकतंत्र भारत के लिए केवल एक व्यवस्था नहीं है। लोकतंत्र हमारे स्वभाव और भारत में जीवन के हिस्से में निहित है"
"सभी राज्यों की भूमिका भारत की संघीय व्यवस्था में 'सबका प्रयास' का बड़ा आधार है"
"कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई 'सबका प्रयास' का एक बेहतरीन उदाहरण है"
"क्या हम साल में 3-4 दिन सदन में उन जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित कर सकते हैं, जो समाज के लिए कुछ खास कर रहे हैं, देश को उनके सामाजिक जीवन के इस पहलू के बारे में बता रहे हैं"
सदन में गुणवत्तापूर्ण बहस के लिए स्वस्थ समय, स्वस्थ दिन का प्रस्ताव
संसदीय प्रणाली को आवश्यक तकनीकी बढ़ावा देने और देश की सभी लोकतांत्रिक इकाइयों को जोड़ने के लिए 'एक राष्ट्र एक विधायी मंच' का प्रस्ताव


नमस्कार!

कार्यक्रम में हमारे साथ उपस्थित लोकसभा के माननीय अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी, राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंश जी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी, हिमाचल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री मुकेश अग्निहोत्री जी, हिमाचल विधानसभा के अध्यक्ष श्री विपिन सिंह परमार जी, देश के विभिन्न सदनों के पीठासीन अधिकारीगण, और उपस्थित देवियों और सज्जनों!

Presiding officers की ये महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस हर साल कुछ नए विमर्शों और नए संकल्पों के साथ होती है। हर साल इस मंथन से कुछ न कुछ अमृत निकलता है, जो हमारे देश को, देश की संसदीय व्यवस्था को गति देता है, नई ऊर्जा देता है, नए संकल्पों के लिए प्रेरित करता है। ये भी बहुत सुखद है कि आज इस परम्परा को सौ साल हो रहे हैं। ये हम सबका सौभाग्य भी है, और भारत के लोकतान्त्रिक विस्तार का प्रतीक भी है। मैं इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सभी को, देश की संसद और सभी विधानसभाओं के सभी सदस्यों को, और सभी देशवासियों को भी बधाई देता हूँ।

साथियों,

भारत के लिए लोकतन्त्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है। लोकतन्त्र तो भारत का स्वभाव है, भारत की सहज प्रकृति है। आपकी ये यात्रा इसलिए भी और विशेष हो गई है क्योंकि इस समय भारत अपनी आज़ादी के 75 साल का पर्व मना रहा है, अमृत महोत्सव मना रहा है। ये संयोग इस कार्यक्रम की विशिष्टता को तो बढ़ाता ही है, साथ ही हमारी जिम्मेदारियों को भी कई गुना कर देता है।

साथियों,

हमें आने वाले वर्षों में, देश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है, असाधारण लक्ष्य हासिल करने हैं। ये संकल्प 'सबके प्रयास' से ही पूरे होंगे। और लोकतन्त्र में, भारत की संघीय व्यवस्था में जब हम 'सबका प्रयास' की बात करते हैं तो सभी राज्यों की भूमिका उसका बड़ा आधार होती है। देश ने बीते सालों में जो हासिल किया है, उसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी ने बड़ी भूमिका निभाई है। चाहे पूर्वोत्तर की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान हो, दशकों से अटकी-लटकी विकास की तमाम बड़ी परियोजनाओं को पूरा करना हो, ऐसे कितने ही काम हैं जो देश ने बीते सालों में किए हैं, सबके प्रयास से किए हैं। अभी सबसे बड़ा उदाहरण हमारे सामने कोरोना का ही है। इतनी बड़ी लड़ाई देश ने सब राज्यों को साथ लेकर जिस एकजुटता से लड़ी है, वो ऐतिहासिक है। आज भारत 110 करोड़ वैक्सीन डोज जैसा बड़ा आंकड़ा पार कर चुका है। जो कभी असंभव लगता था, वो आज संभव हो रहा है। इसलिए, हमारे सामने भविष्य के जो सपने हैं, जो 'अमृत संकल्प' हैं, वो भी पूरे होंगे। देश और राज्यों के एकजुट प्रयासों से ही यह पूरे होने वाले हैं। ये समय अपनी सफलताओं को आगे बढ़ाने का है। जो रह गया है उसे पूरा करने का है। और साथ ही, एक नई सोच, नए विज़न के साथ हमें भविष्य के लिए नए नियम और नीतियाँ भी बनानी हैं। हमारे सदन की परम्पराएँ और व्यवस्थाएं स्वभाव से भारतीय हों,हमारी नीतियाँ, हमारे कानून भारतीयता के भाव को, 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को मजबूत करने वाले हों, और सबसे महत्वपूर्ण, सदन में हमारा खुद का भी आचार-व्यवहार भारतीय मूल्यों के हिसाब से हो, ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है। इस दिशा में हमें अभी भी बहुत कुछ करने के अवसर है।

साथियों,

हमारा देश विविधताओं से भरा है। अपनी हजारों वर्ष की विकास यात्रा में हम इस बात को अंगीकृत कर चुके हैं विविधता के बीच भी, एकता की भव्य और एकता की दिव्य अखंड धारा बहती है। एकता की यही अखंड धारा, हमारी विविधता को संजोती है, उसका संरक्षण करती है। आज के बदलते हुए इस समय में, हमारे सदनों की विशेष जिम्मेदारी है कि देश की एकता और अखंडता के संबंध में अगर एक भी भिन्न स्वर उठता है, तो उससे सतर्क रहना है। विविधता को विरासत के रूप में गौरव मिलता रहे, हम अपनी विविधता का उत्सव मनाते रहें, हमारे सदनों से ये संदेश भी निरंतर जाते रहना चाहिए।

साथियों,

अक्सर, राजनेताओं के बारे में, जन-प्रतिनिधियों के बारे में कुछ लोग ये छवि बना लेते हैं कि ये नेता हैं तो चौबीसों घंटे राजनीतिक उठापटक में ही जुटे होंगे, किसी जोड़-तोड़, खींच-तान में जुटे होंगे। लेकिन आप गौर करें तो हर राजनीतिक दल में, ऐसे जन-प्रतिनिधि भी होते हैं, जो राजनीति से परे, अपना समय, अपना जीवन समाज की सेवा में, समाज के लोगों के उत्थान में खपा देते हैं। उनके ये सेवाकार्य राजनीति में लोगों की आस्था को, विश्वास को, मजबूत बनाए रखते हैं। ऐसे जन-प्रतिनिधियों को समर्पित मेरा एक सुझाव है। हम अपने सदनों में बहुत सी विविधता करते हैं, जैसे प्राइवेट बिल लाते हैं उसके लिए समय निकालते है, कुछ सदन में जीरो आवर के लिए समय निकालते हैं। क्या साल में 3-4 दिन किसी सदन में एक दिन, किसी सदन में दो दिन, ऐसे रखे जा सकते हैं जिसमें समाज के लिए कुछ विशेष कर रहे हैं, हमारे जन-प्रतिनिधि हैं, उनके अनुभव हम सुने वो अपने अनुभव बताएं, अपने समाज जीवन के इस पक्ष के बारे में भी देश को जानकारी दे। आप देखिएगा, इससे दूसरे जन-प्रतिनिधियों के साथ ही समाज के अन्य लोगों को भी कितना कुछ सीखने को मिलेगा। राजनीति का राजनीति के क्षेत्र का एक जो रचनात्मक योगदान भी होता है, वो भी उजागर होगा। और रचनात्मक कामों में लगे हुए हैं उनको भी राजनीति से दूरी बनाए रखने की जो प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उसके बजाय ऐसी सोच, ऐसी सेवा करने वाले लोग राजनीति से जुड़ते जाएंगें, तो राजनीति भी अपने आप में समृद्ध होगी। और मैं मानता हूँ कि एक छोटी सी कमेटी बना दी जाए, जैसे अनुभवों के समन में स्क्रीनिंग कर ले, वेरिफाइ कर ले और फिर कमेटी तय करे की इतने लोगों का कथन होना चाहिए। आप देखिए qualitatively बहुत चेंज आएगा। और मैं जानता हूँ, कि पीठाधीश जो हैं वो इन बातों को बहुत अच्छी तरह जानते हैं, कि कैसे अच्छे से अच्छी चीज खोज करके ले आए। लेकिन मैं मानता हूं कि इस तरह के आयोजन से, बाकी सदस्यों को राजनीति से भी ज्यादा, राजनीति से भी अलग कुछ न कुछ करने की प्रेरणा मिलेगी और साथ ही देश को भी इस तरह के प्रयासों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।

साथियों,

हम quality debate को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ भी आवश्यकता है, हम लगातार कुछ न कुछ innovative कर सकते हैं। Debate में value addition कैसे हो, qualitatively debate लगातार नए स्टैंडर्स को कैसे प्राप्त करेगी। हम quality debate को भी अलग से समय निर्धारित करने के बारे में सोच सकते हैं क्या? ऐसी डिबेट जिसमें मर्यादा का, गंभीरता का पूरी तरह से पालन हो, कोई राजनीतिक छींटाकशी ना हो। एक तरह से वो सदन का सबसे healthy समय हो, healthy Day हो। मैं रोज के लिए नहीं कह रहा हूँ, कभी दो घंटे, कभी आधा दिन, कभी एक दिन, क्या हम इस तरह का कुछ प्रयास कर सकते हैं? Healthy day, healthy debate, quality debate, value addition करने वाली debate रोजमर्रा की राजनीति से बिल्कुल मुक्त debate.

साथियों,

ये आप भी भली-भांति जानते हैं कि जब देश की संसद या कोई विधानसभा अपना नया कार्यकाल शुरू करती है, तो उसमें ज्यादातर सदस्य first timer होते हैं। यानी, राजनीति में बदलाव लगातार होते हैं, जनता लगातार नए लोगों को नई ऊर्जा को मौका देती है। और जनता के ही प्रयासों में सदन में भी हमेशा ताजगी, नया उत्साह, नई उमंग आता ही है। हमें इस नएपन को नई कार्यप्रणाली में ढ़ालने की जरूरत है कि नहीं। मुझे लगता है कि बदलाव आवश्यक है । इसके लिए ये जरूरी है कि नए सदस्यों को सदन से जुड़ी व्यवस्थित ट्रेनिंग दी जाए, सदन की गरिमा और मर्यादा के बारे में उन्हें बताया जाए। हमें across the party सतत संवाद बनाने पर बल देना होगा, राजनीति के नए मापदंड भी बनाने होंगे। इसमें आप सभी presiding officers की भूमिका भी बहुत अहम है।

साथियों,

हमारे सामने एक बहुत बड़ी प्राथमिकता सदन की productivity को बढ़ाने की भी है। इसके लिए जितना जरूरी सदन का discipline है, उतना ही आवश्यक तय नियमों के प्रति commitment भी है। हमारे क़ानूनों में व्यापकता तभी आएगी जब उनका जनता के हितों से सीधा जुड़ाव होगा। और इसके लिए सदन में सार्थक चर्चा-परिचर्चा बहुत जरूरी है। खासतौर पर सदन में युवा सदस्यों को, आकांक्षी क्षेत्रों से आने वाले जन-प्रतिनिधियों को, महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका मिलना चाहिए। हमारी समितियों को भी इसी तरह ज्यादा व्यावहारिक और प्रागंसिक बनाए जाने पर विचार होना चाहिए। इससे हमारे लिए न केवल देश की समस्याएं और उनके समाधान जानना आसान होगा, बल्कि नए ideas भी सदन तक पहुंचेंगे।

साथियों,

आप सभी इस बात से परिचित हैं कि बीते सालों में देश ने वन नेशन वन राशन कार्ड', 'वन नेशन वन मोबिलिटी कार्ड' जैसी कई व्यवस्थाओं को लागू किया है। इस तरह की सुविधाओं से हमारी जनता भी connect हो रही है, और पूरा देश भी एक साथ हमने एक नया अनुभव आ रहा है, मानो देश उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम कोने- कोने में connect हो रहा है। मैं चाहूँगा कि हमारी सभी विधानसभाएँ और राज्य, अमृतकाल में इस अभियान को एक नई ऊंचाई तक लेकर जाएँ। मेरा एक विचार 'वन नेशन वन लेजिस्लेटिव प्लेटफॉर्म' क्या यह संभव है, एक ऐसा डिजिटल प्लेटफार्म, एक ऐसा पोर्टल जो न केवल हमारी संसदीय व्यवस्था को जरूरी technological boost दे, बल्कि देश की सभी लोकतान्त्रिक इकाइयों को जोड़ने का भी काम करे। हमारे हाउसेस के लिए सारे resources इस पोर्टल पर उपलब्ध हों, सेंट्रल और स्टेट legislatures paper-less mode में काम करें, लोकसभा के माननीय अध्यक्ष और राज्यसभा के उप-सभापति महोदय के नेतृत्व में आप Presiding Officers इस व्यवस्था को आगे बढ़ा सकते हैं। हमारे संसद और सभी विधान मंडलों की libraries को भी digitise करने और ऑनलाइन available कराने के लिए चल रहे कार्यों में भी तेजी लानी होगी।

साथियों,

आजादी के इस अमृतकाल में हम तेजी से आजादी के 100 साल की तरफ बढ़ रहे हैं। आपकी 75 वर्षों की यात्रा इस बात की साक्षी है कि समय कितनी तेजी से बदलता है। अगले 25 वर्ष, भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। 25 साल के बाद हम आजादी के 100 साल मनाने वाले हैं। और इसलिए यह अमृतकाल यह 25 साल का बहुत महत्वपूर्ण है। क्या इसमें हम एक ही मंत्र पूरी मजबूती के साथ, पूरे समर्पण के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ एक मंत्र को चरित्रार्थ कर सकते हैं क्या । मेरी दृष्टि से वो मंत्र है - कर्तव्य, कर्तव्य, कर्तव्य ही कर्तव्य। सदन में भी कर्तव्य की बात, सदन से संदेश भी कर्तव्य का हो, सदस्यों की वाणी में भी कर्तव्य की महक हो, उनके वर्तन में भी कर्तव्य की परिपाटी हो, परंपरा हो सदियों की जीवनशैली, आचार- विचार में भी कर्तव्य प्राथमिक हो सदस्यों के मंथन में वाद- विवाद में, संवाद में, समाधान में हर बात में कर्तव्य सर्वोपरि हो हर तरफ सिर्फ कर्तव्य की बात हो, कर्तव्य का बोध हो। अगले 25 साल की हमारी कार्यशैली के हर पहलू में कर्तव्य को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। हमारा संविधान भी हमें यही कहता है जब सदनों से ये संदेश जाएगा, जब सदनों में ये संदेश बार- बोर दोहराया जाएगा, तो इसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा, देश के प्रत्येक नागरिक पर पड़ेगा। देश बीते 75 वर्षों में जिस गति से आगे बढ़ा है, उससे कई गुना गति से देश को आगे बढ़ाने का मंत्र है- कर्तव्य। एक सौ तीस करोड़ देशवासियों का कर्तव्य एक महान संकल्प की पूर्ति के लिए कर्तव्य I मुझे पूरा विश्वास है कि आज जब संसदीय व्यवस्था की सौ वर्ष की इस नई पहल के लिए, आप सब को बहुत शुभकामनाएं, आपकी यह समिट बहुत ही सफल हो, 2047 में देश को कहां ले जाना है, सदन उस पर क्या भूमिका अदा करेंगे, इसकी स्पष्ट रुपरेखा के साथ आप यहां से चलेंगे। देश को बहुत बड़ी ताकत मिलेगी। मैं फिर एक बार आप सबको बहुत- बहुत बधाई देता हूँ, बहुत- बहुत धन्यवाद।

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परिणामों की सूची: फिनलैंड के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
March 05, 2026

MoUs / Agreements

Sl. NoMoU / AgreementDescription

1

MoU on Migration and Mobility Partnership

Finland has emerged as an important destination for Indian professionals, particularly in the field of technology and innovation sectors. The MoU on Migration and Mobility Partnership will facilitate mobility of talent.

2

Renewal of MoU on Environmental Cooperation

Renewal of existing MoU signed in November 2020. It encompasses key areas of collaboration that contribute to sustainability, including bioenergy and waste-to-energy solutions, power storage and flexible RE systems, green hydrogen, as well as wind, solar and small hydro power.

3

MOU on cooperation in the field of Statistics

To evolve mutual cooperation and exchange of experiences/best practices and collaboration in the field of official statistics.

Announcements

 Title

1

Elevation of India - Finland bilateral relations to "Strategic Partnership in Digitalization and Sustainability”

2

Joint Research Calls under Implementation Arrangement between Department of Science and Technology of India and Finnish Innovation Funding Agency Business Finland

3

Aim to double the present bilateral trade between India and Finland by 2030 (Capitalizing on recently concluded India-EU FTA)

4

Establish a cross-sectoral Joint Working Group on Digitalization (Advancing cooperation in new and emerging technologies such as 5G, 6G, quantum communications, high-performance and quantum computing, Artificial Intelligence etc.)

5

Creation of Joint Task Force on 6G (6G research by University of Oulu, Finland and the Bharat 6G Alliance)

6

Greater connectivity of startup ecosystems through Indo-Finland Startup Corridor (Active participation of Indian startups in Slush in Helsinki and Finnish startups in Startup Mahakumbh in New Delhi)

7

Co-hosting of World Circular Economy Forum in India in 2026 (By Ministry of Environment, forest and Climate Change and Finnish Innovation Fund SITRA)

8

Establish Consular Dialogue between the respective Foreign Ministries