भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

असम के गवर्नर श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी, ऊर्जावान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जी, केंद्र सरकार में मेरे साथी डॉ. एस जयशंकर, सर्बानन्द सोनोवाल, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा जी, अन्य मंत्रिगण, सांसदगण, विधायक, सभी कलाकार साथी और असम के मेरे भाइयों एवं बहनों,

सोबइके हमार जोहार, मोर भाई बोहिन सब, तहनिकेर की खोबोर?

अपोनालोक अटाइके मुर आंतोरिक उलोग जोनाइसु।

आजी इयात उपोस्थित होई, मोई बोर आनंदिता होइसु।

भाइयों-बहनों,

आज असम में यहां एक अद्भुत माहौल है। ऊर्जा से भरा हुआ माहौल है। उत्साह, उल्लास और उमंग से ये पूरा स्टेडियम गूंज रहा है। झूमर नृत्य के आप सभी कलाकारों की तैयारी, हर तरफ नजर आ रही है। इस जबरदस्त तैयारी में चाय बागानों की सुगंध भी है, और उनकी सुंदरता भी है। और आप तो जानते ही हैं, चाय की ख़ुशबू और चाय के रंग को एक चाय वाले से ज्यादा कौन जानेगा? इसलिए, झूमर और बागान संस्कृति से जैसे आपका खास रिश्ता है ना, वैसे मेरा भी रिश्ता है।

साथियों,

इतनी बड़ी संख्या में आप सभी कलाकार जब झूमर नृत्य करेंगे, तो वो अपने-आप में एक रिकॉर्ड बनाएगा। इसके पहले, मैं 2023 में जब असम आया था, तब 11 हजार से ज्यादा लोगों ने एक साथ बिहु डांस करके रिकॉर्ड बनाया था। वो दृश्य मैं तो कभी भूल ही नहीं सकता हूं, लेकिन जिन्‍होंने टी.वी. पर देखा था ना, वो भी मुझे बार-बार याद कराते हैं। अब आज फिर से एक बार मैं वैसे ही दृश्य का अद्भुत प्रस्तुति का इंतजार कर रहा हूं। मैं इस सांस्कृतिक आयोजन के लिए असम सरकार को और ऊर्जावान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जी को बधाई देता हूँ।

आइज असमकेर चाह जोनोगोष्ठी, आरो आदिबाशी मानुषेर शोंगे, असमकेर एकटा गर्बोर दिन लागे। एइ दिनटे शोबाइके सुभेच्छा जनाच्छी।

साथियों,

इस तरह के भव्य आयोजनों से असम का गौरव तो जुड़ा ही है, इसमें भारत की महान विविधता भी दिखाई देती है और अभी मुझे बताया गया कि 60 से भी ज्‍यादा दुनिया के अलग-अलग देशों के जो राजदूत भी असम को अनुभव करने के लिए यहां मौजूद हैं। एक समय था, जब देश में असम और पूर्वोत्तर के विकास की भी उपेक्षा हुई और यहाँ की संस्कृति को भी नज़रअंदाज किया गया। लेकिन, अब पूर्वोत्तर की संस्कृति का ब्रांड एंबेसडर खुद मोदी ही बन चुका है। मैं असम के काजीरंगा में रुकने वाला, दुनिया को उसकी जैव विविधता के बारे में बताने वाला पहला प्रधानमंत्री हूं। और अभी हिमंत दा ने इसका वर्णन किया और आप सबने खड़े होकर के धन्‍यवाद प्रस्‍ताव दिया। हमने कुछ ही महीने पहले असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा भी दिया है। असम के लोग अपनी भाषा के इस सम्मान का इंतज़ार दशकों से कर रहे थे। इसी तरह, चराइदेव मोईदाम को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में भी शामिल कराया गया है। इसमें भी भाजपा सरकार के प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है।

साथियों,

असम के गौरव वीर सपूत लसित बोरफुकन, जिन्होंने मुगलों से लोहा लेकर असम की संस्कृति और पहचान की रक्षा की थी। हमने उनके 400वें जन्मदिवस को इतने व्यापक स्तर पर मनाया, गणतंत्र दिवस में लसित बोरफुकन की झांकी भी शामिल हुई थी और देशभर के लोगों ने उनको नमन किया था। यहाँ असम में उनकी 125 फुट की कांस्य प्रतिमा भी बनाई गई है। इसी तरह, आदिवासी समाज की विरासत को सेलिब्रेट करने के लिए हमने जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरुआत भी की है। और असम के राज्यपाल तो स्वयं ही हमारे लक्ष्‍मण प्रसाद जी आदिवासी समाज की संतान हैं और आज अपने पुरुषार्थ से यहां पहुंचे हुए हैं। देश में जनजातीय समाज के जो नायक-नायिकाएँ रहें हैं, उनके योगदान को अमर बनाने के लिए आदिवासी म्यूज़ियम्स भी बनाए जा रहे हैं।

साथियों,

भाजपा सरकार असम का विकास भी कर रही है और यहाँ के ‘टी ट्राइब’ की सेवा भी कर रही है। बागान कर्मियों की आय बढ़े, इस दिशा में Assam Tea Corporation के कामगारों के लिए बोनस की घोषणा भी की गई है। खासकर, बागानों में काम करने वाली हमारे बहनें, हमारी बेटियाँ, गर्भावस्था में उनके सामने आय का संकट पैदा हो जाता था। आज ऐसी करीब डेढ़ लाख महिलाओं को गर्भावस्था में 15 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, ताकि उन्हें खर्च की चिंता न रहे। हमारे इन परिवारों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए असम सरकार चाय बागानों में 350 से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी खोल रही है। टी-ट्राइब के बच्चों के लिए 100 से ज्यादा मॉडल टी गार्डन स्कूल भी खोले गए हैं। करीब 100 स्कूल और भी खोले जा रहे हैं। टी ट्राइब के युवाओं के लिए ओबीसी कोटा में 3 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था भी हमने की है। असम सरकार भी इन युवाओं को स्वरोजगार के लिए 25 हजार रुपए की सहायता दे रही है। टी इंडस्ट्री और उसके कामगारों का ये विकास आने वाले समय में पूरे असम के विकास को गति देगा। हमारा पूर्वोत्तर विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। अभी आप सभी अपना शानदार प्रदर्शन शुरू करने वाले हैं। मैं आप सभी को अग्रिम धन्यवाद देता हूं और मुझे पूरा विश्वास है पूरे हिन्‍दुस्‍तान में आज आपकी, आपके इस नृत्य की वाहवाही होने वाली है। सारे टी.वी. चैनल वाले इंतजार कर रहे हैं, कब शुरू होता है। आज पूरा देश और दुनिया इस भव्य नृत्य को देखने वाला है।

सुन्दोर झुमोइर प्रदोर्शन कोरर खातिर सोबाइके हामी धोन्याबाद जनाच्छी। अपोनलोक भाले थाकीबो, अकोउ लोग पाम बोहुत बोहुत धन्यबाद!

भारत माता की जय!

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प्रधानमंत्री 13 फरवरी को सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 एवं 2 का उद्घाटन करेंगे
February 12, 2026
इस उद्घाटन से देश की प्रशासनिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा
सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और मंत्रिमंडल सचिवालय स्थित हैं
कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा आदि कई प्रमुख मंत्रालय स्थित हैं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 13 फरवरी, 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे सेवा तीर्थ भवन परिसर के नामकरण का अनावरण करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 तथा कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री शाम लगभग 6 बजे सेवा तीर्थ में एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

यह उद्घाटन देश की प्रशासनिक शासन संरचना में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है। यह आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

दशकों से, कई प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में कई स्थानों पर फैले हुए खंडित और पुरानी अवसंरचनाओं से कार्य करते रहे। प्रमुख कार्यालयों के इस फैलाव के कारण परिचालन में अक्षमताएं, समन्वय संबंधी चुनौतियां, रखरखाव की बढ़ती लागत और काम करने के लिए अनुपयुक्त वातावरण जैसी समस्याएं उत्पन्न हुईं। आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार सुविधाओं से युक्त नए भवन परिसर के भीतर प्रशासनिक कार्यों को समेकित करके इन समस्याओं से अब मुक्ति मिल जाएगा।

सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे।

कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालय स्थित हैं।

दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं सहयोग, दक्षता, सुचारू संचालन, नागरिकों की बेहतर भागीदारी और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देंगी। 4-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार डिज़ाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं। इन उपायों से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम किया जाएगा। भवन परिसरों में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना जैसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनसे अधिकारियों और आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित होगा।