गुजरात ने देश के लिए जितना योगदान वर्तमान में दिया है, उतना ही अतीत में भी दिया: जामनगर में पीएम मोदी

भारत माता की जय.... 

आप सभी सोच रहे होंगे कि ये नरेंद्र भाई पगड़ी पहनकर क्यों आए? और जब मुख्यमंत्री पगड़ी पहनने जा रहे थे तो मैंने कहा कि आप इस पगड़ी के ऊपर ही पगड़ी पहनाइए, मैं ये पगड़ी नहीं उतार सकता ।  मैं रास्ते में जाम साहब के दर्शन करने गया और मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनका अनोखा प्यार, पूरे परिवार का अनोखा प्यार मिला और जाम साहब ने मुझे पगड़ी पहनाई, तो फिर कुछ नहीं बचता भाई और इसलिए मैंने कहा जाम साहब की यह पगड़ी मेरे लिए एक बेहतरीन पेशकश है और जामनगर के साथ मेरे रिश्ते की कई विशेषताएं रही हैं। पिछले 2 दिनों से मैं गुजरात में यात्रा कर रहा हूं । यहाँ वोट मांगने के लिए गुजरात आने की जरूरत नहीं है, कई लोग मुझसे कहते थे सर आपको यहाँ प्रचार करने की जरूरत है? मैंने कहा भाई प्रचार और प्रेम में अंतर है। मैं यहां प्रचार करने नहीं आया हूं, मैं यहां प्रेम का स्वाद चखने आया हूं।

गुजरात की धरती ने जो प्यार और आशीर्वाद दिया है, वह बहुत बड़ी पूंजी है । आज जब मैं जामनगर आया तो कई पुरानी बातें ताजा हो गईं। जब में संगठन का काम करता था तब भी में यहाँ आता था, लेकिन एक बार एक बहुत महत्वपूर्ण घटना घटी। भूचर मोरी के युद्ध की घटना और हमारे क्षत्रिय समाज के नेता मुझे निमंत्रण देने आये। तभी किसी ने मेरे कान में कहा " साहब आप नहीं आएंगे हमें मालूम है पर यह हमारा फर्ज है इसलिए हम आये है यहाँ । मैंने कहा क्यों नहीं आएँगे? तो बोले कोई भी मुख्यमंत्री नहीं आया आज तक । मैंने कहा क्यों नहीं आएँगे? वो तो हम सब सीएम में ट्राई कर चुके हैं, फिर क्या हुआ? तो कहा सर, ऐसी मान्यता है कि जहां इतने वीर मरे, जिनके संरक्षक वहां शहीद हुए, जिनकी वहाँ पूजा की जाती है परन्तु लेकिन किसी ने गुजरात के मुख्यमंत्रीओ के कान भर दिए हैं कि अगर आप इस भूचर मोरी में जाएंगे, तो आप अपना मुख्यमंत्री पद गवां देंगे वगैरह वगैरहइसके कारण एक भी मुख्यमंत्री नहीं आ रहा था । 

मैंने कहा कि मेरे क्षत्रिय समाज का यह बलिदान मेरे मुख्यमंत्री पद के सामने कुछ नहीं है, मैं आऊंगा और मैं गया था । मैंने बड़े गर्व से इस कार्यक्रम की सराहना की और इसे प्रोत्साहित भी किया । तो आज मैं जामनगर के साथ अपनी कई यादें लेकर वापस जामनगर आया हूं और ढेर सारी बातें करने के मूड में हूं। मैं जहां भी गया हूं वहां अपार आशीर्वाद, अभूतपूर्व उत्साह और आनंद देखा है और इस बार हिंदुस्तान में जहां भी गया हूं, 2014 के चुनाव में भी में गया, जो भाई ये फोटो लेकर खड़े हैं, बैठ जाओ । मैंने देखा कि तुम क्या लाए हो, प्लीज़ आपकी वजह से आपके पीछे बैठा व्यक्ति परेशानी हो सकती है, आप बैठ जाओ । आपका प्यार मेरे सिर पर है और चाहे वह गुजरात हो, तमिलनाडु हो, कश्मीर हो या कन्याकुमारी हो या असम हो, मैं जहां भी गया हूं मैंने ऐसा उत्साह, इतना उत्साह और इतना उत्साह और प्रतिबद्धता देखी है, 2014 में, 2019 में, वह 2024 में जो मैं देख रहा हूं। 

क्योंकि 2014 में जब वो गए थे तो सब यही सोच रहे थे कि ये भाई क्या करेगा

मैं गुजरात के लोगों को जानता हूं लेकिन हर कोई इतना नहीं जानता, 2019 में गया तो सब बोले की आदमी काम का है और 2024 में देखता हूं कि इस भाई ने हमारे देश का नाम दुनिया में रोशन किया, मोदी सर आगे बढ़ो और हम जहां भी जाएं, एक आवाज, "फिर एकबार मोदी सरकार"

मित्रो

गुजरात ने जितना वर्तमान में योगदान दिया है, उतना ही योगदान अतीत में भी देश के लिए दिया है। और आज भी जब पोलिश संसद का सत्र शुरू होता है तो सबसे पहली बात जो वो लोग दोहराते है वो है जामनगर, दिग्विजयजी महाराज साहब। 

और बाद में संसद शुरू होती है । और उनके द्वारा बोए गए बीजों के कारण, पोलैंड के साथ हमारे रिश्ते आज भी बहुत मजबूत हैं, और जैसा कि मैंने कहा, जाम साहब के परिवार के साथ मेरा रिश्ता घर जैसा है। उनका आशीर्वाद रहा है इसलिए आज मैं यहां आते समय उनका आशीर्वाद लेने गया और उन्होंने मुझे प्यार से पगड़ी पहनाई और आशीर्वाद दिया। और जब जाम साहब कहते हैं 'विजय भव' तो वो जीत पक्की हो जाती है। हमारे देश के राजा-महाराजाओं ने अखंड भारत बनाने के लिए पीढ़ियों तक अपना राजपाठ त्याग दिया था। यह देश उनके योगदान को कभी नहीं भूलेगा. लेकिन आजादी के 75 साल बाद भी इतिहास की एक अहम घटना को नकारा गया । शहजादे द्वारा बोली जाने वाली भाषा को यह देश आज भी स्वीकार नहीं कर सकता । लेकिन मैंने भारत की एकता में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई है और वहां मैं उन शाही परिवारों का एक संग्रहालय बना रहा हूं जिन्होंने देश की एकता में योगदान दिया है। आजादी के इतने वर्षों के बाद भी किसी सरकार ने यह सम्मान देने के बारे में नहीं सोचा, लेकिन मैंने इसे संभव बनाया है क्योंकि मैं इतिहास की महानता को मानने वाला व्यक्ति हूं और मैं जानता हूं कि जो लोग इतिहास भूल जाते हैं वे कभी इतिहास नहीं बना सकते।

मित्रो,

कांग्रेस की शुरुआत दुष्प्रचार से हुई और उसी के कारण आज कांग्रेस की राजनीति निराशा में बदल गयी है। कांग्रेस में देश की प्रगति के प्रति वही हताशा और नफरत है, जो पहले गुजरात को लेकर कांग्रेस की हताशा थी। आज दुनिया में भारत का कद भी बढ़ रहा है और भारत का सम्मान भी बढ़ रहा है। फिर कांग्रेस और उसके युवराज विदेश जाकर भारत को बदनाम करने वाले लंबे-लंबे भाषण देते हैं। 2014 में जब उन्होंने सत्ता छोड़ी तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में 11वें स्थान पर थी। और आपको जानकर ख़ुशी होगी कि जब देश आज़ाद हुआ तो हम दुनिया में छठे नंबर पर थे और उन्होंने उसे 11वें नंबर पर पहुंचा दिया। और फिर चाय बेचने वाला आया, वहां बहुत बुद्धिमान लोग बैठे थे लेकिन उसकी रगों में गुजराती खून था और वह दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था को पांचवीं अर्थव्यवस्था में ले आया। और मैं आपका आशीर्वाद सत्ता या सुख के लिए नहीं चाहता, पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं चाहता। 2014 में प्रधान मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद, मोदी का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है, लेकिन मोदी इसके लिए नहीं जीते हैं पर महेनता करने के लिए अपने सपनों पर अड़े हुए हैं। मोदी आपका आशीर्वाद मांग रहे हैं, मेरे मन में संकल्प है कि मैं तीसरे कार्यकाल में उस संकल्प को पूरा करूंगा और मेरा संकल्प भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में लाना है। और आप कल्पना कर सकते हैं कि जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा तो भारत के प्रति दुनिया का नजरिया कैसे बदल जाएगा। भारत के पास भारत की जरूरतों को पूरा करने, भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने और अपने युवाओं के सपनों को साकार करने की क्षमता होगी। भारत आत्मनिर्भर बनेगा, हिंदुस्तान को कभी दुनिया में किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और मैं भारत को ऐसा बनाने का आशीर्वाद चाहता हूं। 

मित्रो,

कांग्रेस के धुरंधर देश की प्रगति को कम आंकते हुए कहते हैं कि तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्या जरूरत है? सोते रहो भाई. जो लोग खटखट कर हर बात का हल मांग रहे हैं गरीबी उन्मूलन, जो मांग रहे हैं एक झटके में गरीबी उन्मूलन, जो फंसे हैं खटखट और पटाखों में, समस्याओं और चुनौतियों से कैसे बचें, उनका सामना कैसे करें, समस्याओं का समाधान कैसे करें यह कैसे करना है, चुनौतियों का सामना कैसे करना है, शायद कभी सोचा ही नहीं होगा। साथियों, नीति क्या है, निर्णय क्या है और जब नीति स्पष्ट होती है तो परिणाम भी बढ़िया होता है।

मित्रो,

कांग्रेस का जहर इतना बढ़ गया है, इतना बढ़ गया है कि पता नहीं चार जून तक ये जहर कहां फैल जाएगा। जब कांग्रेस का घोषणापत्र आया तो मैंने देश को विशेषकर देश के वैचारिक वर्ग को सचेत किया, मैंने उन्हें बताया कि कांग्रेस का घोषणापत्र खतरे की चेतावनी है और मैंने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं कांग्रेस के घोषणापत्र में मुस्लिम लीग की छाप देखता हूं। तो कुछ लोगों को लगा होगा कि ये कोई राजनीतिक बयान है। लेकिन जब लोगों को इसका विवरण पता चलने लगा तो देश में चिंता बढ़ने लगी. देश की आजादी के पहले मुस्लिम लीग ने जो भाषा बोली, भारत के विभाजन का जो नैरेटिव रचा, दुर्भाग्य से आज उन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस अपने घोषणापत्र देशवासियों के सामने वोट मांग रहा है। इंडी अलायंस की रैलियों में इंडी अलायंस के नेता मुस्लिम मतदाताओं से जिहाद को वोट देने की अपील कर रहे हैं! और वो भी कोई मदरसे का बच्चा नहीं बोल रहा है, एक पढ़े-लिखे परिवार से आया कांग्रेस का नेता जो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा है वो किस जिहाद की बात कर रहा है । अब कांग्रेस और वोट जिहाद का क्या रिश्ता है ये आपको कांग्रेस के इतिहास से पता चलेगा, आपको याद होगा जब देश में जिहाद के नाम पर आतंकवादी हमले हुए थे तो सबसे पहले कांग्रेस के लोग ही उन आतंकवादियों के बचाव में आये थे। कश्मीर में अलगाववादियों की मेजबानी तत्कालीन प्रधानमंत्री ने की थी जिसकी तस्वीरें मौजूद हैं। 26/11 को मुंबई में रुका हुआ हमला हुआ था, जिसमें कसाब और अन्य आतंकियों को बचाने के लिए कांग्रेस नेता आगे आये थे। मुंबई आतंकी हमले के जिहादियों को बचाने के लिए लिखी गईं किताबें, जिसके विमोचन कार्यक्रम में कांग्रेस नेता हाजर थे। कांग्रेस नेता कह रहे थे कि जब दिल्ली में बाटला हाउस एनकाउंटर में एक जिहादी आतंकवादी मारा गया तो कांग्रेस मैडम की आंखों से आंसू निकल रहे थे, आंसू बह रहे थे। अफजल गुरु को फांसी माफी के लिए यही इकोसिस्टम के लोग सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंचे और यही लोग अब देश में वोट जिहाद का नारा लगा रहे हैं ।

साथियो,

कांग्रेस पार्टी फिलहाल दो रणनीतियों पर चुनाव लड़ रही है। पहला मुद्दा है समाज को जाति के नाम पर बांटना और दूसरा मुद्दा है तुष्टिकरण के जरिए अपना वोट बैंक मजबूत करना । इसलिए सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के आरक्षण को लेकर झूठी अफवाहें फैलाना शुरू किया । इस मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाने की कोशिश की और अब कांग्रेस आरक्षण के अपने असली मकसद की ओर मुड़ गई है ।  कांग्रेस पार्टी एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण छीनना चाहती है और उनके आरक्षण का कुछ हिस्सा छीनकर एससी, एसटी, ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय करते हुए संविधान में बदलाव कर मुसलमानो को  धर्म के आधार पर आरक्षण देने की तैयारी कर रही है। कर्नाटक में कांग्रेस ने क्या किया? रातों-रात फतवा जारी कर दिया, आदेश जारी कर दिया और रातों-रात कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय के कई लोगों को ओबीसी घोषित कर दिया। सभी मुस्लिम ओबीसी । कर्णाटक में ओबीसी समुदाय को संविधान से जो 27 टका आरक्षण मिलता है, उस पर रातों-रात धावा बोलकर ओबीसी समुदाय के हिस्से से डाका डाला गया और वह भी धर्म के आधार पर आरक्षण देकर। 

जब देश का संविधान बना तो महीनों तक चर्चा चली, देश की कांग्रेस और उस समय के आजादी आंदोलन के दिग्गज नेताओं ने संविधान बनाया, चर्चा हुई, उसमें कोई आरएसएस या बीजेपी का सदस्य नहीं था । देश के एक प्रमुख विद्वान थे बाबा साहेब अम्बेडकर और उन्होंने विचार विमर्श करके निर्णय लिया कि भारत जैसे देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। धर्म के नाम पर आरक्षण देश में कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है, इस पर बाबा साहब अंबेडकर ने विस्तार से प्रकाश डाला। 

इस बात को बाबा साहब अम्बेडकर ने साफ तौर पर खारिज कर दिया था और देश का जो संविधान बना था वह देश में धर्म के नाम पर आरक्षण पर रोक लगाता है। दलित, आदिवासी, ओबीसी संविधान इसकी इजाजत देता है। लेकिन कांग्रेस पार्टी धर्म के नाम पर आरक्षण की बात करके अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है और जब मैंने इस कांग्रेस के पापों को उजागर किया और पिछले 9 दिनों से मैं मांग कर रहा हूं कि कांग्रेस पार्टी को जवाब देना चाहिए, मैंने दिया है उन्हें एक चुनाव। 9 दिन हो गए, तीन उम्मीदवार हैं, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, मैं बार-बार कहता हूं, मैं मीडिया को एक बार फिर से जगाना चाहता हूं, मैं देशवासियों को भी जगाना चाहता हूं, क्योंकि ये लोग एक भयानक समस्या की ओर ले जा रहे हैं। मैं जागना चाहता हूं और मेरी तीन चुनौतियां क्या हैं

मेरी पहली चुनौती है "क्या कांग्रेस लिखित गारंटी देगी कि वह संविधान बदल देगी और मुसलमानों को आरक्षण नहीं देगी"! यह लिखकर दो।

दूसरा "धर्म के आधार पर आरक्षण देने से दलित, आदिवासी, बक्शीपंच ओबीसी के अधिकार खत्म नहीं होंगे" क्या कांग्रेस यह लिखित में दे सकती है?

तीसरी चुनौती "क्या ये कांग्रेस लिखित में दे सकती है कि उनकी राज्य सरकारें, उनके सहयोगियों की सरकारें गारंटी देती हैं कि वे ओबीसी कोटा पर छापा मारकर और मुसलमानों को शामिल करके अपना गुप्त एजेंडा नहीं चलाएंगे? इसका मतलब है कि वे चुप हैं। क्या उनके दिमाग में, उनकी सोच में कुछ गड़बड़ है। 

जामनगर के लोग मुझे बताएं कि जब देश पर इतना बड़ा खतरा मंडरा रहा हो तो मोदी चुप रह सकते हैं? क्या मोदी देश को फिर से विभाजित होने देंगे?  

साथियो

मैं आज जामनगर की धरती से देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं और कांग्रेस के नेताओं से कहना चाहता हूं कि जब तक मोदी जिंदा है, जब तक मोदी जिंदा है, मैं इस देश को धर्म के आधार पर दोबारा नहीं टूटने दूंगा। मैं धर्म के आधार पर दलितों, आदिवासियों, बख्शी पंचों का हक नहीं छीनने दूंगा, जब तक जिंदा हूं तब तक लड़ता रहूंगा और जवाब देने की बजाय मुंह छिपाकर आंखों में धूल झोंक रही है कांग्रेस देशवासियों का। 

साथियो

कांग्रेस के लोग, उसके शहजाद और उनका इकोसिस्टम हमारी आस्था पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। आपको याद होगा कुछ समय पहले मैं विकास कार्यों के लिए द्वारका आया था। द्वारिकाधीश के दर्शन के बाद मैं हमारे ग्रंथों में वर्णित द्वारिका के दर्शन के लिए समुद्र के तल पर गया और मैंने कुछ समय तक समुद्र के अंदर ध्यान और पूजा भी की। कांग्रेस के शहजादे भी इससे परेशान हैं और मैं भी हैरान हूं, जो लोग उत्तर प्रदेश, बिहार में अपने आप को यदुवंशी कहते हैं, वे उन लोगों के साथ बैठे हैं जो श्रीकृष्ण की द्वारिका को अस्वीकार करते हैं और उन शहजादों के साथ बैठे हैं जो पूजा करने पर उनका मजाक उड़ाते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र के अंदर पूजा के लिए कुछ भी नहीं है। अरे, उन लोगों का क्या करें जिनके पास सामान्य ज्ञान भी नहीं है? आप बताएं कि क्या इन लोगों में दूसरे धर्मों के लिए इस तरह बोलने की हिम्मत है? क्या ये लोग दूसरे धर्मों को गलत ठहरा सकते हैं और उनका मज़ाक उड़ा सकते हैं? यह राम मंदिर का बहिष्कार करता है, द्वारिका का गलत चित्रण करता है। हिंदू धर्म की शक्ति ने घोषणा की कि मैं हिंदू धर्म में शक्ति की अवधारणा को नष्ट कर दूंगा। क्या इस देश में सत्ता के विनाश की कोई कल्पना कर सकता है? हम शक्ति के उपासक हैं। 

यही कांग्रेस का चरित्र है, उन लोगों ने अभी कहा है कि हम शिव और राम को लड़वाएंगे और उन्होंने यह भी कहा है कि हम राम को हराएंगे। कांग्रेस को क्या हो गया है? इसलिए मैं कहता हूं कि सभी को कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत है। अब बताओ किसी को किसी से ख़ुशी या नाराजगी हो सकती है। लेकिन अगर कोई इसके लिए कांग्रेस को वोट देने की बात करता है तो मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अगर किसी को भारत में सरकार बनानी है तो उस पार्टी को कम से कम 272 सीटें जीतनी होंगी या नहीं? जरा 272 सीटें लाकर दिखा दीजिए, इस देश में बीजेपी के अलावा कोई भी पार्टी 270 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रही है. अब मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं और प्रधानमंत्री नहीं बन रहा हूं, अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि अगर आप 272 सीटों से ऊपर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं तो उन्हें वोट देकर अपना वोट क्यों बर्बाद कर रहे हैं? इसमें क्या तर्क है? अरे आप सबको क्या फ़र्क पड़ता है कि आप वोट देने की सोच रहे हैं, अरे खुद कांग्रेस का राजघराना जो दिल्ली में रहता है वो कांग्रेस को ही वोट नहीं देने वाला है. अब आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन यह सच बात है। वे जहां रहते हैं, जहां उन्हें वोट देना है, वहां कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं है.,यहां हमारा जो अहमद भाई का परिवार है, अहमद भाई कांग्रेस के एक बड़े यार्ड के नेता थे, वो परिवार भी इस बार कांग्रेस को वोट नहीं दे सकता. भरूच में भी कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं है. उनके एक बड़े नेता यहीं भावनगर में भी रहते हैं, अगर उनका वोट भावनगर में होगा तो वो कांग्रेस को वोट नहीं दे पाएंगे. अगर कांग्रेस के नेता कांग्रेस को वोट देने में सक्षम नहीं हैं तो देशवासियों को कांग्रेस को वोट देकर अपना वोट बर्बाद करने की क्या जरूरत है?

और इसलिए मेरे भाइयो-बहनो, जब मैं आज जामनगर की धरती पर आशीर्वाद लेने आया हूं, तो आप देखिए, जब मैं गुजरात में था, तो मैंने पानी के लिए बहुत ताकत लगाई है। आज हम पूरे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व कनेक्टिविटी विकसित कर रहे हैं। अमृतसर-भटिंडा-जामनगर कॉरिडोर, 80 करोड़ रुपये, सोचिए कितनी ताकत बनने वाली है। धोराजी - जामकंदोराणा - कालावाड खंड के चौड़ीकरण का मतलब है कि सड़क चौड़ी हो रही है। यहां द्वारका में सुदर्शन सेतु है, अब सुदर्शन सेतु देखने के लिए पर्यटक अलग से आते हैं, नहीं तो पहले बेटद्वारका जाना है तो रुकना पड़ेगा भाई, रुकना पड़ेगा और अगर समुद्र पागल है तो दो कदम पीछे रुकना पड़ेगा । आज सुदर्शन सेतु दर्शनीय बन गया है। जामनगर-अहमदाबाद वंदे भारत ट्रेन बाबा, अगर आप यात्रा नहीं करना चाहते तो भी लोग ट्रेन देखने के लिए स्टेशन पार जाते हैं, ट्रेन के साथ फोटो खिंचाते हैं। आजादी के 75 साल बाद लाल डब्बे वाली ट्रेन से एक खूबसूरत ट्रेन दिखी । अमृत ​​योजना के तहत जामनगर रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और मैं ऐसा रेलवे स्टेशन बनाना चाहता हूं कि आप एयरपोर्ट को भूल जाएं। मुझे हमारे जामनगर में औद्योगिक विकास याद है, जब मैं नया मुख्यमंत्री बना, जामनगर में चुनाव लड़ा, मेरी जिंदगी सबसे पहले सौराष्ट्र से शुरू हुई। सौराष्ट्र की धरती ने मुझे पहली बार जन प्रतिनिधि बनने का आशीर्वाद दिया और वहीं से यह सफर शुरू हुआ, उस समय मैंने कहा था कि राजकोट, मोरबी और जामनगर एक ऐसा त्रिकोण है जो मिनी जापान के रूप में विकसित होने की ताकत रखता है और उस समय मेरे धनुष का मज़ाक उड़ाया गया। यहां तक ​​कि मीडिया वाले भी मेरे बाल खींचते थे और जैसा कि आप आज देख सकते हैं, एक समय गुजरात में हमारी खेती की हालत बहुत खराब थी क्योंकि 10 साल में से 7 साल सूखा पड़ता था! आज हम कृषि में 8 से 10 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि हमने पानी पर फोकस किया। हमारे गुजरात की पहचान क्या थी? दलाली का अर्थ है एक जगह से माल लेकर दूसरी जगह बेचना और बीच में जो कुछ मिले उससे अपना गुजारा करना। उससे आगे कुछ नहीं और उससे बाहर आज गुजरात एक औद्योगिक राज्य बन गया है और मित्र, आने वाले दिनों को सुनहरे अक्षरों में लिख दो, तुम देखते हो कैसे लाइन बंद हो गई है, ये ब्रास है। लेकिन गुजरात में हवाई जहाज बनने हैं, गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहन बनने हैं, दुनिया में सिर्फ 4 या 5 देश हैं जहां सेमीकंडक्टर बनते हैं, ये सेमीकंडक्टर भारत में गुजरात में बनने हैं भाई। इसका मतलब है कि एक समय आएगा जब भारत में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन की चिप गुजरात में बनेगी। ये क्रांतिकारी चीजें हो रही हैं। गुजरात ग्रीन हाइड्रोजन, दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा क्षेत्र ग्रीन हाइड्रोजन जिसमें गुजरात दुनिया का सबसे बड़ा हब बनने जा रहा है। ऐसे अनेक क्षेत्रों में हिरन इस गुजरात को भरना है और मेरा एक और सपना है, ये मध्यम वर्गीय, उच्च मध्यम वर्गीय परिवारों के लोग हैं, बाकी सबके लिए, मेरे लिए आपका बिजली का बिल शून्य है।

अब सोचिए अगर बिजली का बिल जीरो हो जाए तो आपको अपने जीवन में नई दिशा में आगे बढ़ने का कितना मौका मिलेगा। उसके लिए हमने पीएम सूर्यघर योजना बनाई है. सोलर पैनल के लिए सरकार से पैसा मिलेगा. आप अपने घर पर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा करें, जितनी बिजली आपको चाहिए उतनी मुफ्त में इस्तेमाल करें और अतिरिक्त बिजली सरकार खरीदेगी और आपको पैसे देगी। न केवल आपकी परिवहन लागत, चाहे वह आपकी स्कूटी हो, स्कूटर हो, मोटरसाइकिल हो, कार हो, अब बिजली बिल की तरह पेट्रोल का ईंधन बिल भी शून्य है और ईंधन बिल भी शून्य है। काना खुराक के बिना मुफ्त में मुफ्त। पीएम सूर्यघर योजना आपके घर में पैदा होने वाली बिजली है, पुराने जमाने में जो इलेक्ट्रिक वाहन आ रहे हैं, उनकी बैटरी को अपने घर में चार्ज करें और फिर उसे सड़क पर ले जाएं और यह आपके लिए अच्छा होगा और मजे से चलाएगा। इसी दिशा में जाना है भाइयों। 

वैश्विक मानचित्र पर जामनगर स्वास्थ्य की दृष्टि से दुनिया का एक महत्वपूर्ण WHO केंद्र है, जामनगर में वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा के लिए एक केंद्र बनाया जा रहा है। पूरी दुनिया आयुर्वेद की ओर रुख कर रही है, जामनगर का आयुर्वेद विश्वविद्यालय इसका प्रेरणा केंद्र बन गया है। आज भारत के आयुर्वेद को विश्व में पहचान मिली है। हमने 2023 को बाजरा वर्ष के रूप में मनाया, हमारे छोटे किसान, जहां पानी की कम मांग है, हमारी बड़ी अनाज वाली फसलें जैसे ज्वार, बाजरा और वो सब। किसी ने इसके लिए नहीं पूछा. घर में लड़के सोचते हैं कि ये सब पुराना हो गया है. आज यह सिद्ध हो गया है कि हमारे पूर्वज जो खाते थे वह सुपर फ़ूड है और हमने जो बाजरा वर्ष मनाया उसका नाम "श्री अन्न" था। क्योंकि भारत में अलग-अलग जगहों के अलग-अलग नाम हैं। अब ये श्री अन्ना दुनिया में है और ये मेरा सपना है कि दुनिया की डाइनिंग टेबल इन छोटे किसानों द्वारा उगाया गया श्री अन्ना खायेगी और जब मैं पिछली बार अमेरिका गया था तो अमेरिका के राष्ट्रपति ने वहां के प्रधानमंत्री को ऐसा सम्मान दिया था। भारत पहली बार. भारत के किसी भी प्रधान मंत्री ने वह सम्मान प्राप्त नहीं किया और भव्य भोज का आयोजन नहीं किया। उस भोज की खास बात यह थी कि सभी के भोजन में शाकाहारी भोजन तो था ही, हमारा ज्वार, बाजरी, बाजरा, श्री अन्ना का भोजन भी था। व्हाइट हाउस में भी सुपर फूड का महत्व बढ़ता जा रहा है।

साथियो

सौनी योजना, मुझे याद है कि जब मैंने राजकोट में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और सौनी योजना की घोषणा की थी, तब प्रेस ने हेडलाइन बनाई थी कि मोदी ने नई चुनाव नीति निकाली है क्योंकि उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले ऐसा किया था। आज पानी पहुंचे या नहीं, झील भरी या नहीं। भाई-बहनों ने कच्छ की खाई में पानी पहुंचाया, सबकी योजना ने नया जीवन दिया है। जामनगर जिले के 400 से ज्यादा गांवों में नल से पानी, मेरी माताएं-बहनें एक-एक करके दो-दो किलोमीटर तक गरहुला लेकर जाती थीं, इस मोदी ने आपका गरहुला और नल से पानी छीन लिया। फिलहाल गैस बोतलों में आ रही है और अब गैस पाइपलाइन से आएगी। इस मोदी ने सब कुछ स्पष्ट रूप से व्यवस्थित और तय किया है। रक्षा के मामले में हमारा यहां बड़ा बेस है, हम रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे हैं। कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि भाइयो, हम भारी संख्या में आगे बढ़ रहे हैं, मुझे आपसे उम्मीद है, आपका आशीर्वाद है, मुझे यह भी पता है कि आप 26-26 सीटें जीतने वाले हैं। आप भी जानते हैं कि मोदी हमारे घर का लड़का है तो हमें उस पर कायम रहना है, आप भी जानते हैं । 

7 मई को मैं उम्मीद कर रहा हूं कि चाहे कितनी भी गर्मी हो, चाहे कितना भी व्यस्तता हो, हमारे गुजरात में पूरे भारत में सबसे ज्यादा मतदान होना चाहिए। हमारे गुजरात को वोटिंग के अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ने हैं. तोड़ना? हर पोलिंग बूथ पर धक्का? कितनी भी गर्मी हो, पहले मतदान फिर जलपान।

मेरी दूसरी अपेक्षा अधिक से अधिक मतदान केंद्र जीतना है। सिर्फ लोकसभा या विधानसभा उपचुनाव जीतने के लिए नहीं, मैं सभी पोलिंग बूथों पर रहना चाहता हूं, आपकी मदद के बिना जीतना चाहता हूं? मदद करना? क्या आप आशीर्वाद देंगे?

बेन पूनम बेन जामनगर से चुनाव लड़ रही हैं, आपका आशीर्वाद उन पर बना रहे और हमारे साथी अर्जुनभाई मोढवाडिया पोरबंदर से चुनाव लड़ रहे हैं। हमारे दोनों सहयोगियों को भारी बहुमत से विजयी बनायें।

यहां से मुझे कलकत्ता के लिए निकलना है, कल बंगाल में गुजरात के रोमांच के बारे में बात करूंगा.

एक बार फिर मुझसे बात करो भारत माता की, फिर एकबार, अबकी बार...

भारत माता...

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

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आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !