लखपति दीदी - महिला दिवस पर हमें ये जो आज मान सम्मान मिला है, उससे हम बहुत खुश हैं।

प्रधानमंत्री – महिला दिवस, दुनिया भले ही आज महिला दिवस मनाता हो, लेकिन हमारे संस्कारों में और हमारे देश की संस्कृति में मातृ देव भव: से शुरू होता है और हमारे लिए 365 दिन मातृ देवो भव: होता है।

लखपति दीदी - मैं शिवानी महिला मंडल में हम बीड़ वर्क का काम करते हैं, मोतियों का, जो हमारा सौराष्ट्र का कल्चर है सर, हमने 400 से ज्यादा बहनों को तालीम दी है बीड़ वर्क की, 11 बहनों में हम जो तीन-चार बहनें है ना, वो मार्केटिंग का काम संभालते हैं और दो बहनें सब हिसाब-किताब वो करती हैं।

प्रधानमंत्री – यानी मार्केटिंग वाले बाहर जाते हैं?

लखपति दीदी - हां सर, आउटस्टेट में सब जगह।

प्रधानमंत्री - मतलब पूरा हिंदुस्तान घूम लिया है।

लखपति दीदी - हां सर पूरा, मेजोरिटी में कोई सिटी बाकी नहीं रखा सर।

प्रधानमंत्री - और पारुल बहन कितना कमाती है?

लखपति दीदी - पारुल बहन 40 हजार से ज्यादा कमा लेती है सर।

प्रधानमंत्री- मतलब आप लखपति दीदी बन गई हो?

लखपति दीदी - हां सर, लखपति दीदी बन गई हूं, और पैसा भी लगा दिया है लखपति दीदी का, मैं सोचती हूं, कि मेरे साथ अभी हमारी 11 बहनें लखपति बन गई हैं और पूरे गांव की दीदी सब लखपति बन जाए, ऐसा मेरा सपना है,

प्रधानमंत्री – वाह।

लखपति दीदी - कि मैं सबको लखपति दीदी बना दूं।

प्रधानमंत्री – चलिए फिर तो मेरा जो सपना है तीन करोड़ लखपति दीदी बनाना, तो मुझे लगता है, आप लोग 5 करोड़ को पहुंचा देंगे।

लखपति दीदी – पक्का सर पक्का, प्रॉमिस करा देंगे।

लखपति दीदी- मेरी टीम के अंदर 65 बहनें है, 65 महिला मेरे साथ जुड़ी हैं और उसमें हम जो मिश्री आती है, उससे बने शरबत का उत्पादन करते हैं। हमारा वार्षिक टर्नओवर 25 से 30 लाख तक का है। मेरा खुद का ढाई से तीन लाख तक का मेरा खुद का है। मेरी जो दीदीयां हैं वो दो-ढाई लाख से ऊपर कमाती हैं और, एसएचजी को भी हम हमारी प्रोडक्ट सेल करने को लिए देते हैं, और हमें ऐसा प्लेटफार्म मिला है सर, हम निसहाय औरतों को, जैसे छत पर एक सरसी (सहारा) मिल गई थी, हमें लगा था, कि हम कहां से कहां पहुंच गए। मेरे साथ जो महिलाएं जुड़ी है, उन्होंने भी अपने बच्चे को अच्छी तरह से पढ़ाया है सर, और सबको विकल्प भी हमने दिलवाया है। कई महिलाएं मेरे साथ ऐसे हैं, जो एक्टिवा पर भी मार्केटिंग में जाती है, कोई बैंक का काम करती है, कोई सेलिंग का काम करती है।

प्रधानमंत्री - सब आपकी बहनों को व्हीकल दिलवा दिया?

लखपति दीदी - हां सर, और मैंने खुद से भी एक इको गाड़ी ली है सर।

प्रधानमंत्री – हां।

लखपति दीदी - मैं गाड़ी नहीं चला सकती, तो सर जब भी जाना होता है, तो ड्राइवर को साथ लेकर चलती हूं, सर आज तो हमारी प्रसन्नता और भी बढ़ गई, हमारा एक ख्वाब था, हम तो टीवी पर देखते थे, भीड़ में भी आपको देखने के लिए जाते थे और यहां नजदीक से देख रहे हैं आपको।

प्रधानमंत्री - ये देखिए आपके हर एक स्टॉल पर मैं आया हूं, कभी ना कभी मौका मिला, यानी मैं सीएम हूं या पीएम हूं, मेरे में कोई फर्क नहीं होता है, मैं वैसा ही हूं।

लखपति दीदी - सर आपकी बदौलत, आपके आशीर्वाद से तो हम महिलाएं इतनी कठिनाई के बाद भी यहां उच्च मुकाम तक पहुंचे और लखपति दीदी बन गए हैं सर, और आज मेरे साथ जुड़ी.....

प्रधानमंत्री - अच्छा गांव वाले जानते हैं आप लखपति दीदी हैं?

लखपति दीदी - हा हां सर, सब जानते हैं सर। अभी यहां आने का था तो सबको डर लग रहा था सर, तो हम आपसे गांव की कोई कंप्लेंट करने के लिए यहां आपसे आ रहे हैं, तो वो लोग बोलते थे, कि दीदी जाओ तो कंप्लेंट नहीं करना।

लखपति दीदी - 2023 में, जब आपने मिलेट्स ईयर, इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर घोषित किया, तो हम गांव की जुड़ी हुई हैं, तो हमें पता था कि जो 35 रुपये में हम बाजरा बेच रहे हैं या ज्वार बेच रहे हैं, उसमें हम वैल्यू एडिशन करें, ताकि लोग भी हेल्दी खाएं और हमारा भी बिजनेस हो जाए, तो तीन प्रोडक्ट से हमने तब स्टार्ट किया था, कुकीज था हमारा और खाखरा था, गुजराती का खाखरा आपको पता है।

प्रधानमंत्री - अब खाखरा तो ऑल इंडिया हो गया है।

लखपति दीदी - यस, ऑल इंडिया हो गया है सर।

प्रधानमंत्री - जब ये लोग सुनते हैं, कि मोदी जी लखपति दीदी बनाना चाहता है, तो क्या लगता है लोगों को?

लखपति दीदी - सर, सच्ची बात बोलूं, पहले उनको लगता है कि मतलब ये पॉसिबल है ही नहीं औरतों के लिए, लखपति-लखपति मतलब एक पांच-चार जीरो होते हैं उसके अंदर और वो पुरुषों के जेब में ही अच्छे लगते हैं, लोग ये सोचते हैं, पर मैंने तो ये बोला है सर, कि आज लखपति है दो-चार साल बाद इसी दिन हम सब करोड़पति दीदी के इवेंट में बैठने वाले हैं।

प्रधानमंत्री - वाह।

लखपति दीदी - और ये सपना हम साकार करेंगे। मतलब आपने हमें राह दिखा दी है कि लखपति तक आपने पहुंचा दिया, करोड़पति हम बताएंगे, सर हम करोड़पति बन गए हैं, ये बैनर लगाओ।

लखपति दीदी - मैं एक ड्रोन पायलट हूं, ड्रोन दीदी हूं और अभी मेरी जो कमाई है वो 2 लाख तक पहुंच गई है।

प्रधानमंत्री - मुझे एक बहन मिली थी, वो कह रही थी मुझे तो साइकिल चलाना नहीं आता था, अब मैं ड्रोन चलाती हूं।

लखपति दीदी - हम प्लेन तो नहीं उड़ा सकते, लेकिन ड्रोन तो उड़ा के पायलट तो बन ही गए हैं।

प्रधानमंत्री - पायलट बन गए।

लखपति दीदी - जी, सर मेरे जो देवर हैं, वो सब तो मुझे पायलट कहकर ही बुलाते हैं, मुझे भाभी कहकर नहीं बुलाते।

प्रधानमंत्री – अच्छा, पूरे परिवार में पायलट दीदी हो गई।

लखपति दीदी- पायलट ही बोलते हैं, घर में आएंगे, एंटर होंगे तब भी पायलट, ऐसे ही बुलाएंगे।

प्रधानमंत्री - और गांव वाले भी?

लखपति दीदी - गांव वाले भी दिया गया है।

प्रधानमंत्री - आपने ट्रेनिंग कहां ली?

लखपति दीदी - पुणे, महाराष्ट्र से।

प्रधानमंत्री - पुणे जाकर लिया।

लखपति दीदी - पुणे।

प्रधानमंत्री – तो परिवार वालों ने जाने दिया आपको?

लखपति दीदी - जाने दिया।

प्रधानमंत्री – अच्छा।

लखपति दीदी - मेरा बच्चा छोटा था उसको मैं रख के गई थी, रहेगा कि नहीं रहेगा।

प्रधानमंत्री - आपके बेटे ने ही आपको ड्रोन दीदी बना दिया।

लखपति दीदी - उसका भी ख्वाब है, कि मैं मम्मा तुम ड्रोन के पायलट बन गई हो, मैं प्लेन का पायलट बनूंगा।

प्रधानमंत्री - अरे वाह, तो आज गांव-गांव ड्रोन दीदी की अपनी एक पहचान बन गई है।

लखपति दीदी - सर इसके लिए मैं आपका शुक्रिया करना चाहूंगी, क्योंकि आपकी ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत में आज लखपति दीदी की गिनती में आ गई हूं।

प्रधानमंत्री - आपका घर में भी रूतबा बढ़ गया होगा।

लखपति दीदी - जी।

लखपति दीदी - जब मैंने शुरू किया तो मेरे पास 12 बहनें थीं, अब 75 हो गई हैं।

प्रधानमंत्री - कितना कमाते होंगे सब?

लखपति दीदी - अपने राधा कृष्ण मण्डल की बात करू, तो बहनें embroidery और पशु पालन दोनों करती हैं और 12 महीनों का 9.5-10 लाख कमा लेती हैं।

प्रधानमंत्री – दस लाख रुपया।

लखपति दीदी - हाँ इतना कमाती हैं..

लखपति दीदी - सर, मैंने 2019 में समूह में जुड़ने के बाद, मैंने बड़ौदा स्वरोजगार संस्थान से बैंक सखी की तालीम ली।

प्रधानमंत्री - दिन भर कितना रुपया हाथ में रहता है?

लखपति दीदी - सर, वैसे तो हम एक से डेढ़ लाख तक बैंक में ही सर मैं ज्यादातर करती हूं और मेरे घर पर करती हूं, ऐसे सर।

प्रधानमंत्री – कुछ टेंशन नहीं होता है?

लखपति दीदी - कुछ दिक्कत नहीं सर, एक छोटा सा बैंक लेकर घूमती हूं मैं।

प्रधानमंत्री – हां।

लखपति दीदी - हां सर।

प्रधानमंत्री - तो आपके यहां कितना कारोबार हर महीने का होता होगा बैंक का?

लखपति दीदी - बैंक का सर मेरा महीने का 4 से 5 लाख तक का हो जाता है।

प्रधानमंत्री - तो एक प्रकार से लोगों को अब बैंक पर भरोसा हो रहा है और लोग मानते हैं, आप आए मतलब बैंक आई।

लखपति दीदी - हां सर।

लखपति दीदी - सर, मैंने आपको अपने मन से गुरु माना है। आज मैं जो लखपति दीदी बनी हूँ, ये आपकी प्रेरणा आप दे रहे हो, उसी में से मैं आगे बढ़ पाई हूँ और आज इस स्टेज पर बैठी हूँ। मुझे लग रहा है कि मैं एक सपना देख रही हूँ और हम लखपति दीदी बन गए हैं। हमारा सपना है सर कि हम दूसरी बहनों को भी हमें लखपति बनाने का है, हमें सखी मंडल से आकर हमें जिंदगी में बहुत बदलाव हुआ सर, उसकी एक मैडम आया था Lbsnaa मंसूरी से, राधा बेन रस्तोगी, तो मेरी स्किल देखी और दीदी ने कहा कि आप मंसूरी आएंगे, मैंने हां कर दी और मैं मसूरी गई, वहां पर एक बार मैंने गुजराती नाश्ता पर वहां का 50 किचन स्टाफ है, उसको मैंने ट्रेनिंग दी, अपने गुजराती में कहते सर रोटला, तो वहां पे मैंने बाजरी, ज्वार, सबका मैंने वहां रोटी सिखाई और पर मुझे वहां की एक चीज बहुत अच्छी लगी, सब लोग मुझे ऐसे बुलाते थे रीता बेन गुजरात से नरेंद्र मोदी साहिब के वतन से आए हैं, तो मुझे इतना गौरव होता था कि मैं गुजरात की लेडीज हूं, तो मुझे ऐसा गौरव मिल रहा है, ये मेरे लिए सबसे बड़ा गौरव है।

प्रधानमंत्री - अब आप लोगों ने ऑनलाइन जो बिजनेस के मॉडल होते हैं, उसमें आपको एंटर होना चाहिए, मैं सरकार को भी कहूंगा आपको मदद करें, इसको अपग्रेड करना चाहिए, कि भई हमने इतनी बहनों को जोड़ा, इतनी बहनें कमा रही हैं, ग्रास रूट लेवल पर कमा रही हैं, क्योंकि दुनिया में लोगों को पता चलना चाहिए कि भारत में महिलाएं सिर्फ घर का काम करती हैं, ये जो कल्पना है, ऐसा नहीं है, वो भारत की आर्थिक शक्ति बनी हुई हैं। भारत की आर्थिक स्थिति में बहुत बड़ा रोल अब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के द्वारा हो रहा है। दूसरा, मैंने देखा है कि हमारी महिलाओं में टेक्नोलॉजी को तुरंत पकड़ती हैं, मेरा एक ड्रोन दीदी में मेरा अनुभव है, जिन दीदी को ड्रोन पायलट बनाने की ट्रेनिंग दी थी, तीन-चार दिन में ही उनको आ जाता था, इतनी तेजी से सीख लेती हैं और प्रैक्टिस भी sincerely करती हैं। हमारे यहां प्राकृतिक रूप से माताओं-बहनों में संघर्ष करने का सामर्थ्य, सृजन करने का सामर्थ्य, संस्कार करने का सामर्थ्य, संपत्ति पैदा करने का सामर्थ्य, यानी इतनी बड़ी ताकत है, जिसका हम कोई हिसाब नहीं लगा सकते। मैं समझता हूं कि यह सामर्थ्य जो है, वो देश को बहुत लाभ करेगा।

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प्रधानमंत्री 1 अगस्त को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के दौरे पर जाएंगे
July 31, 2026
प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला और उनका उद्घाटन कर राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री भोगपुरम में अत्याधुनिक अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उद्घाटन करेंगे
5,640 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का उद्देश्य हवाई संपर्क को मजबूत करना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है
हवाई अड्डे के टर्मिनल का डिज़ाइन आंध्र प्रदेश के चुट्टिलू कॉटेज, अरकु घाटी और फ्लाइंग फिश से प्रेरित है
प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री मैसूरु के श्री रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र -विवेक स्मारक का भी उद्घाटन करेंगे
विवेक स्मारक का निर्माण स्वामी विवेकानंद की नवंबर 1892 में मैसूरु की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में किया गया है
विवेक स्मारक मूल्य-आधारित शिक्षा, नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करेगा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 1 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की यात्रा पर जाएंगे। प्रधानमंत्री सुबह लगभग 11 बजे आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे। लगभग 11:30 बजे, प्रधानमंत्री मोदी हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे और भोगपुरम में 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वे सभा को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद, दोपहर लगभग 3:30 बजे, प्रधानमंत्री मैसूरु स्थित श्री रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र-विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वे सभा को संबोधित भी करेंगे।

आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आंध्र प्रदेश के भोगपुरम में अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत 5,640 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को प्रति वर्ष 60 लाख यात्रियों को संभालने के लिए तैयार किया गया है।

यात्री टर्मिनल भवन को भी आधुनिक, सुगम और कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हवाई अड्डे में उन्नत बुनियादी ढांचा, अत्याधुनिक तकनीकें और दीर्घकालिक विशेषताएं शामिल हैं ताकि परिचालन दक्षता को बढ़ाया जा सके और भविष्य की विमानन आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

हवाई अड्डे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम), एयरसाइड 4.0 तकनीक, एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (एपीओसी), बायोमेट्रिक यात्री प्रसंस्करण, स्वचालित बैगेज हैंडलिंग सिस्टम और इंटेलिजेंट ऑपरेशनल मॉनिटरिंग सॉल्यूशंस जैसी उन्नत तकनीकों से सुसज्जित किया गया है। इन प्रणालियों से परिचालन दक्षता में वृद्धि, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा में सुधार तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग की आशा है।

इस परियोजना में ऊर्जा-कुशल हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) सिस्टम, ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था, 5 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन, स्मार्ट बिल्डिंग प्रबंधन प्रणाली, अपशिष्ट प्रबंधन पहल, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण निगरानी उपायों सहित कई सतत विकास संबंधी विशेषताएं शामिल हैं। टर्मिनल को हरित भवन मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और यह यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (यूएसजीबीसी) में पंजीकृत है।

हवाई अड्डे का वास्तुशिल्प डिज़ाइन आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल की छत का आकार पारंपरिक चुट्टिलू झोपड़ियों और अरकु घाटी के परिदृश्यों को दर्शाता है, जबकि इसका प्रवाहमय रूप उड़ती हुई मछली की मनमोहक गति का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय वास्तुशिल्प विशेषताओं को समकालीन हवाई अड्डे के डिज़ाइन के साथ मिश्रित करता है। आशा है कि यह हवाई अड्डा आंध्र प्रदेश में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा और साथ ही क्षेत्र में हवाई संपर्क को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री विशाखापत्तनम में 460 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से विकसित की जा रही एएसआईपी सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस संयंत्र का विकास एएसआईपी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दक्षिण कोरिया की एपीएसीटी के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। यह आंध्र प्रदेश का पहला सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र है जिसे भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत स्वीकृति मिली है। यह संयंत्र प्रतिवर्ष लगभग 96 मिलियन सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेगा और उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा करेगा, साथ ही सेमीकंडक्टर विनिर्माण को समर्थन देने के लिए एक मजबूत सहायक इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा।

प्रधानमंत्री कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (आरईएच) के एकीकरण के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम- चरण-I (4.5 गीगावाट) की आधारशिला रखेंगे, जिसे पावरग्रिड द्वारा एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से लगभग 5,550 करोड़ रुपए के निवेश के साथ कार्यान्वित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री लगभग 3,550 करोड़ रुपये की लागत से कार्यान्वित कुरनूल पवन ऊर्जा क्षेत्र/सौर ऊर्जा क्षेत्र (आंध्र प्रदेश)-भाग ए और भाग बी के लिए पारेषण प्रणाली और पावरग्रिड द्वारा 820 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कार्यान्वित अनंतपुरम (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) में सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए पारेषण योजना का भी उद्घाटन करेंगे।

इन पारेषण परियोजनाओं से कुरनूल और अनंतपुरम के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों से उत्पन्न बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से देश भर के लाभार्थियों तक पहुंचाना संभव होगा। इनसे ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा को एकीकृत करने में सुविधा होगी, मांग केंद्रों के लिए स्वच्छ बिजली की उपलब्धता में सुधार होगा और जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम करके भारत के ऊर्जा परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों में योगदान मिलेगा।

प्रधानमंत्री 1,880 करोड़ रुपये से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला राष्ट्र को समर्पित करेंगे। समर्पित की जाने वाली परियोजनाओं में एनएच-365बीजी के रेचेरला से गुरुवायगुडेम खंड तक का चार लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग, गुरुवायगुडेम से देवरापल्ले खंड तक का चार लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग और एनएच-67 पर चार लेन वाला ताडीपत्री बाईपास शामिल हैं। प्रधानमंत्री एनएच-565 के पेंचलाकोना-येरपेडु खंड पर लिंगसमुद्रम में उच्च स्तरीय पुल की आधारशिला भी रखेंगे। इन परियोजनाओं से विजयवाड़ा और कई अन्य शहरों में यातायात जाम कम होगा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, विशाखापत्तनम और हैदराबाद के बीच यात्रा की दूरी और समय कम होगा और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा।

कर्नाटक में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कर्नाटक के मैसूरु में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र-विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे।

विवेक स्मारक स्वामी विवेकानंद की भारत यात्रा के दौरान नवंबर 1892 में मैसूरु की ऐतिहासिक यात्रा स्मृति में बनाया गया है। अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने प्रवचन दिए, विद्वानों और भक्तों से बातचीत की और महाराजा श्री चामराजेंद्र वाडियार-एक्स का संरक्षण प्राप्त किया, जिनके समर्थन से वे 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में भाग ले सके।

ऐतिहासिक निरंजन मठ में स्थापित विवेक स्मारक 81,000 वर्ग फुट से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें एक मुख्य भवन और एक संलग्न ब्लॉक शामिल है। इसमें एक 4-डी अनुभव केंद्र, एक प्रदर्शनी हॉल, लगभग 700 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एम्फीथिएटर, कक्षाएं, सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय, वाचनालय, ध्यान और योग कक्ष तथा पुस्तक स्टॉल स्थित हैं। केंद्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

स्वामी विवेकानंद के जीवन, संदेश और आदर्शों को समर्पित, यह सांस्कृतिक युवा केंद्र मूल्य-आधारित शिक्षा, नेतृत्व विकास और व्यक्तित्व निर्माण के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में कार्य करने का लक्ष्य रखता है। उम्मीद है कि स्वामी विवेकानंद के राष्ट्र निर्माण और चरित्र विकास के दर्शन से प्रेरित व्याख्यानों, कार्यशालाओं, अल्पकालिक पाठ्यक्रमों और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से यह केंद्र आसपास के शिक्षण संस्थानों के 10,000 से अधिक छात्रों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण युवाओं को लाभान्वित करेगा।