"पीएम-जनमन महाअभियान का लक्ष्य आदिवासी समुदाय के प्रत्येक सदस्य को सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान करना है"
"आज देश में ऐसी सरकार है जो सबसे पहले निर्धनों के बारे में सोचती है"
"श्री राम की कथा माता शबरी के बिना संभव नहीं"
"मोदी उन लोगों तक पहुंचे जिनकी ओर कभी ध्यान नहीं दिया गया"
"केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे आकांक्षी जिला कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी मेरे आदिवासी भाई-बहन हैं"
"आज आदिवासी समाज यह देख और समझ रहा है कि हमारी सरकार आदिवासी संस्कृति और उनके सम्मान के लिए कैसे काम कर रही है"

नमस्कार।

जोहार, राम-राम। इस समय देश में उत्सव का माहौल है। उत्तरायण, मकर संक्रांति, पोंगल, बीहू, कितने ही त्योहारों की उमंग चारों तरफ छाई हुई है। इस उत्साह को आज का ये आयोजन और शानदार, जानदार बना दिया। और आप से बात कर मेरा भी उत्सव बन गया। आज एक ओर जब आयोध्या में दिपावली मनाई जा रही है, तो दूसरी ओर एक लाख अति-पिछड़े मेरे जनजातीय भाई-बहन, जो मेरे परिवार के ही सदस्य हैं। मेरे इन जनजातीय परिवार, अति-पिछड़े जनजातीय परिवार, उनके घर दिवाली मन रही है, ये अपने आप में मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी है। आज उनके बैंक खाते में पक्के घर के लिए पैसे ट्रांसफर किए जा रहे हैं। मैं इन सभी परिवारों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं, मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देता हूं, और मुझे ये पुण्य कार्य करने के लिए निमित बनने का अवसर मिलता है, ये भी मेरे जीवन में बहुत आनंद की बात है।

साथियों,

आज, आज से आपके घरों का काम शुरु होने जा रहा है। मुझे विश्वास है कि इस साल की दीपावली आप अपने घरों में जरूर मनाएंगे। तो जल्दी से जल्दी मकान का काम कीजिए, बीच में बारिश आ जाए तो भी अभी से तैयारी कर लिजिए। पक्का कर लिजिए कि इस बार दिवाली अपने पक्के, नए घर में मनानी है। देखिए, अभी कुछ दिनों के बाद 22 जनवरी को रामलला भी अपने भव्य और दिव्य मंदिर में हमें दर्शन देंगे। और मेरा सौभाग्य है कि मुझे अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में बुलाया है, तो ये आप सबके आशीर्वाद से ऐसा सौभाग्य मिलता है। इन दिनों, ये जब इतना बड़ा काम है, आपने इतना बड़ा मुझे दायित्व दिया है, तो मैंने भी 11 दिन व्रत-अनुष्ठान का एक संकल्प किया हुआ है, श्री राम का ध्यान स्मरण कर रहा हूं। और आप तो जानते ही है, जब आप प्रभु राम का स्मरण करेंगे तो माता शबरी की याद आना बहुत स्वाभाविक है।

साथियों,

श्री राम की कथा माता शबरी के बिना संभव ही नहीं हैं। अयोध्या से जब राम निकले थे, तब तो वो राजकुमार राम थे, लेकिन राजकुमार राम मर्यादा पुरुषोत्तम इस रूप में हमारे सामने आए क्योंकि माता शबरी हो, केवट हो, निषादराज हो, ना जाने कौन-कौन से लोग, जिनके सहयोग, जिनके सानिध्य ने राजकुमार राम को प्रभु राम बना दिया। दशरथ पुत्र राम, दीनबंधु राम तभी बन सके जब उन्होंने आदिवासी माता शबरी के बेर खाए। रामचरित मानस में कहा गया है- कह रघुपति सुनु भामिनि बाता। मानउँ एक भगति कर नाता॥ यानी भगवान श्रीराम ने अपने भक्त से सिर्फ भक्ति के संबंध को सबसे बड़ा कहा है। त्रेता में राजाराम की कथा हो या आज की राज कथा, बिना गरीब, बिना वंचित, बिना वनवासी भाई-बहनों के कल्याण के संभव ही नहीं है। इसी सोच के साथ हम लगातार काम कर रहे हैं। हमने 10 साल गरीबों के लिए समर्पित किए, 10 साल में गरीबों को 4 करोड़ से पक्के घर बनाकर दिए हैं। जिनको कभी किसी ने पूछा नहीं, उनको मोदी आज पूछता भी है, पूजता भी है।

साथियों,

सरकार आप तक पहुंचे, सरकार की योजनाएं अति-पिछड़े मेरे जनजातीय भाई-बहन तक पहुंचें, यही पीएम जनमन महाअभियान का उद्देश्य है। और सिर्फ 2 महीने में ही पीएम जनमन महा-अभियान ने वो लक्ष्य हासिल करने शुरू कर दिए हैं, जो पहले कोई नहीं कर सका। मुझे याद है जब ठीक दो महीने पहले भगवान बिरसा मुंडा की जन्मजयंती पर सरकार ने ये अभियान शुरू किया था, तो हम सबके सामने चुनौती कितनी बड़ी थी। हमारे अति-पिछड़े मेरे जनजातीय साथी, जो दूर-सुदूर जंगलों में रहते हैं, जो दूर ऊंचे पहाड़ों पर मुश्किल परिस्थितियों में रहते हैं, जो बॉर्डर के, सीमा के क्षेत्रों में रहते हुए दशकों से विकास का इंतजार कर रहे हैं, जिन तक पहुंचना भी सरकारी मशीनरी के लिए बहुत कठिन होता है, उन लोगों तक पहुंचने के लिए इतना बड़ा अभियान हमारी सरकार ने शुरू किया है। और मैं जिले के सभी सरकारी अधिकारी, राज्यों के सरकारी अधिकारी उन सबको सच्चे दिल से बहुत बधाई देता हूं कि इतना बड़ा काम जो 75 साल तक हम नहीं कर पाते थे, अफसरों ने मन बना लिया, मेरी बात का साथ दिया और आज गरीब के घर दिवाली की संभावना पैदा हुई है। देश में बहुत से लोग कल्पना तक नहीं कर सकते कि हमारे ये भाई-बहन कितनी कठिनाइयों में रहते हैं। प्रदूषित पानी की वजह से आप लोग कैसी-कैसी बीमारियों का शिकार होते हैं, आपके बच्चों पर संकट रहा है, इस पर जितना ध्यान देना चाहिए, उतना नहीं दिया गया। बिजली नहीं होने से कभी सांप, कभी बिच्छू, कभी जंगली जानवर का खतरा...गैस कनेक्शन ना होने से रसोई में लकड़ी के धुएं से होने वाला नुकसान...गांव तक सड़क ना होने से कहीं पर भी आना-जाना बहुत बड़ा सिरदर्द होता था। इस संकट, इस परेशानी से ही तो मुझे अपने इन गरीब जनजातीय भाई-बहनों को बाहर निकालना है। अब ऐसी मुसीबतों में आपके मां-बाप को रहना पड़ा, आपके पूर्वजों को रहना पड़ा, मैं आपको ऐसी मुसीबत में रहने नहीं दूंगा। आपके आने वाले पीढ़ी के लिए भी ऐसी मुसीबत में जीना पड़े ये स्थिति हमें मंजूर नहीं है। और आप जानते हैं, इस अभियान का नाम जनमन क्यों रखा गया है? जन मतलब आप सभी जनता जनार्दन...जो मेरे लिए ईश्वर का रूप है। आप सभी जनजातीय भाई-बहन और मन यानि आपके मन की बात। अब मन मारकर नहीं रहना है, अब आपके मन की बात पूरी होगी और इसके लिए सरकार ने भी मन बना लिया है, ठान लिया है। इसलिए सरकार, पीएम जनमन महा-अभियान पर 23 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने जा रही है।

साथियों,

हमारे देश का विकास तभी हो सकता है जब समाज में कोई छूटे नहीं, हर किसी तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे। हमारे अति-पिछड़े जनजातीय समुदाय के भाई-बहन देश के करीब-करीब 190 जिलों में रहते हैं। सिर्फ दो महीने के भीतर सरकार ने ऐसे 80 हजार से ज्यादा अति-पिछड़े मेरे जनजातीय परिवारजन, मेरे भाई-बहनों को खोज कर के उन्हें आयुष्मान कार्ड दिया, जो अब तक उन तक पहुंचा ही नहीं था। इसी तरह सरकार ने अति-पिछड़े जनजातीय समुदाय के करीब 30 हजार किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि से जोड़ा है। इस अभियान के दौरान 40 हजार ऐसे साथी भी मिले, जिनके पास अब तक बैंक खाता ही नहीं था। अब सरकार ने इनके बैंक खाते भी खुलवाए है। ऐसे ही 30 हजार से ज्यादा वंचितों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं, करीब 11 हजार को वन अधिकार एक्ट के तहत जमीन के पट्टे दिए गए हैं। और ये आंकड़े अभी पिछले दो महीनों के ही हैं। अभी तो हर दिन इस संख्या में वृद्धि हो रही है। सरकार पूरी ताकत लगा रही है कि हमारे अति-पिछड़े जनजातीय भाई-बहनों तक सरकार की हर योजना जल्द से जल्द पहुंचे। मेरा कोई अति-पिछड़ा भाई-बहन अब सरकार की योजना के लाभ से छूटेगा नहीं। मैं आपको ये विश्वास दिलाता हूं और ये मोदी की गारंटी है। और आप जानते हैं कि मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

इसी कड़ी में आज आप सभी अति-पिछड़े जनजातीय भाई-बहनों को पक्के मकान देने की शुरुआत हुई है। अभी इस कार्यक्रम में एक लाख जनजातीय लाभार्थियों के बैंक खातों में पक्के घर बनाने के लिए सरकार ने सीधे पैसे ट्रांसफर किए हैं। आपको अपना घर बनाने के लिए लगभग एक-एक घर के लिए ढाई लाख रुपए सरकार से मिलेंगे। और हां, बस घर ही नहीं मिलेगा, इतने से बात रूकने वाली नहीं है, बिजली का कनेक्शन मिलेगा ताकि आपके बच्चे पढ़ सकें, आपके सपने पूरे हो सकें। आपके नए घर में साफ पानी की व्यवस्था हो ताकि कोई बीमारी हमारे घर में ना आए, और वो कनेक्शन भी मुफ्त दिया जाएगा। माताओं बहनों को बाहर खुले में शौच जाना पड़ता है, उनके लिए वो कितनी मुसीबत होती है, अंधेरे का इंतजार करना पड़े, सुबह सूरज निकलने से पहले जाना पड़े, और सम्मान को भी चोट पहुंचे। हर मेरी माताओं-बहनों को सम्मान मिले इसलिए हर घर में शौचालय भी होगा। खाना बनाने के लिए रसोई गैस का कनेक्शन भी होगा। और ये सब कुछ मकान तो मिलेगा ही, साथ-साथ ये व्यवस्थाएं भी मिलेंगी। और मेरी माताएं-बहने जरा सुनिए ये तो अभी शुरूआत हुई है। आज 1 लाख लाभार्थियों को अपने घर का पैसा मिला है। एक-एक कर हर लाभार्थी तक, चाहे वो कितनी भी दूर क्यों ना हो, हमारी सरकार उस तक जरूर पहुंचेगी। और ये जब मैं कह रहा हूं तो मैं फिर एक बार आपको कहता हूं ये मोदी की गारंटी है। और आज मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से आप सबको, हर अति-पिछड़े जनजातीय लाभार्थी को एक और भरोसा देना चाहता हूं। आपको अपना घर बनाने के लिए, इसका पैसा पाने के लिए किसी को भी एक भी रुपए नहीं देना है। कोई भी आपसे पैसे मांगे, तो पैसा केंद्र सरकार भेज रही है उसमें से हिस्सा मांगे, तो आप एक भी रुपया किसी को मत देना।

मेरे भाइयों-बहनों,

ये पैसों पर हक आपका है, कोई बिचौलिए का नहीं है। मेरी बहनों और भाइयों मेरे जीवन का बहुत लंबा वक्त आप सभी मेरे आदिवासी भाई-बहनों के बीच गुजरा है। मुझे आपके बीच रहने का सौभाग्य मिला है, शहरों-कस्बों से दूर, घनी आबादी से दूर रहते हुए आप सब जनजातीय लोग जिस तरह की मुश्किलों का सामना करते हैं, इसका मुझे भली-भांति एहसास है। पीएम जनमन महाअभियान शुरू करने में मुझे इन अनुभवों से बहुत मदद मिली। इसके उपरांत, इस अभियान को शुरू करने में मुझे बहुत बड़ा मार्गदर्शन, हमारे देश की राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी से मिला है। हमारी राष्ट्रपति आदरणीय द्रोपदी मुर्मू जी, आप आदिवासी भाई-बहनों के बीच से ही आई हैं। उन्होंने भी आप लोगों के बीच पूरा जीवन बिताया है। उनसे मुलाकात के दौरान वो अक्सर मुझसे आप सभी लोगों के बारे में विस्तार से बताया करती थीं। और इसलिए ही हमने पीएम जनमन महाअभियान शुरू करके आपको हर परेशानी से मुक्त करने का संकल्प लिया है।

मेरे परिवारजनों,

आज देश में वो सरकार है जो सबसे पहले आप के बारे में, आप जैसे मेरे गरीब भाई-बहनों के बारे में, दूर-सुदूर जंगलों में रहने वाले मेरे भाई-बहनों के बारे में सोचती है। आज देश में वो सरकार है जो गरीबों की मुश्किलें कम करने के लिए काम करती है। जिनके पास कुछ नहीं है सबसे पहले हम उनके सुख-दुख की चिंता कर रहे हैं, जिसका कोई नहीं मोदी उसके लिए खड़ा है। पहले सरकारी योजनाओँ से जुड़े नियम इतने कठिन होते थे कि योजनाओं का पैसा और योजनाओं का लाभ आप तक पहुंच ही नहीं पाता था। और एक दिक्कत ये थी कि योजना कागजों पर चलती रहती थी और असली लाभार्थी को ये पता ही नहीं चलता था कि ऐसी कोई योजना शुरू भी हुई है। जिसको योजना का पता चल भी जाता था, उसे लाभ पाने के लिए कितनी मुश्किलें आती थीं। यहां अगूंठा लगाओ, फलाने के साइन लाओ.. ये पर्चा दिखाओ, आज नहीं कल आओ...ना जाने क्या-क्या सुनना पड़ता था। अब पीएम जनमन महाअभियान में हमारी सरकार ने ऐसे सभी नियम बदल दिए हैं जिससे आपको परेशानी होती थी। पिछड़ी जनजातियों के गांवों तक आसानी से सड़क बने, इसके लिए सरकार ने पीएम ग्राम सड़क योजना के नियम बदल दिए। जब सड़कें बनती हैं तो स्कूल जाना भी आसान हो जाता है। बीमारी के समय कोई मुसीबत आ जाए, अस्पताल पहुंचना है तो अगर रास्ता है तो जिंदगी बच जाती है। सरकार ने मोबाइल मेडिकल यूनिट से जुड़ा नियम भी बदल दिया। पिछड़ी जनजातियों के हर परिवार तक बिजली पहुंचे, इसके लिए विशेष तौर पर उन्हें सौलर पावर वाले कनेक्शन दिए जा रहे हैं। आपके क्षेत्र में युवाओं को, दूसरे लोगों को तेज इंटरनेट कनेक्शन मिलता रहे, इसके लिए सैकड़ों नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं।

साथियों,

हम अब जो कर रहें है उसमें आपकी हर चिंता का खयाल रखा जा रहा है। आपको भोजन की दिक्कत ना हो इसके लिए अब मुफ्त राशन वाली योजना को 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। आपके बच्चों की अच्छी पढ़ाई हो सके, वो कुछ काम सीख सकें और अपना जीवन अच्छा कर सकें, उन्हें नौकरी मिल जाए, इन सबके लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है। जनजातीय इलाकों में सरकार की सुविधाएं एक ही इमारत में देना भी उतना ही जरूरी होता है। इसलिए सरकार की कोशिश ऐसे एक हजार केंद्र बनाने की है जहां एक ही जगह आपको कई योजनाओं का लाभ मिल जाए। टीका लगाने का काम हो, दवाइयां लेनी हो, डॉक्टर को दिखाना हो, रोजगार-स्वरोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग हो, आँगनवाड़ी भी वहीं हो तो आपको इधर-उधर भटकने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। पिछड़ी जनजातियों के नौजवान अच्छे से पढ़ाई कर सकें, इसके लिए सरकार, नए हॉस्टल बनवा रही है। पिछड़ी जनजातियों के लिए सैकड़ों नए वन-धन विकास केन्द्रों को भी बनाने का काम शुरू किया जा रहा है।

मेरे परिवारजनों,

आजकल आप देख रहे हैं कि मोदी की गारंटी वाली गाड़ी, गांव-गांव पहुंच रही है। ये गाड़ी देश के आप जैसे लोगों को, विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए ही चलाई जा रही है। केंद्र सरकार जो आकांक्षी जिला, Aspirational District Programme चला रही है उसका सबसे बड़ा लाभ हमारे आदिवासी भाई-बहनों को ही मिला है। हमने आदिवासी इलाक़ो तक बिजली और सड़क पहुंचायी। हमने ऐसी व्यवस्था की है कि एक राज्य का राशन कार्ड दूसरे राज्य में भी चल जाए। ऐसे ही आयुष्मान भारत योजना है। इस योजना के तहत आपको देश भर में कहीं पर भी मुफ्त इलाज़ मिलेगा ही मिलेगा।

साथियों,

सिकल सेल अनीमिया के खतरों से आप सभी अच्छी तरह परिचित हैं। इस बीमारी से आदिवासी समाज की कई-कई पीढ़ियां प्रभावित रहीं हैं। अब सरकार कोशिश में जुटी है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाने वाली ये बीमारी जड़ से ही समाप्त हो। इसलिए हमारी सरकार ने देश भर में एक अभियान शुरु किया है। इसलिए विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान भी सिकल सेल की जांच की जा रही है। पिछले 2 महीनों में 40 लाख से ज्यादा लोगों का सिकल सेल परीक्षण किया जा चुका है।

मेरे परिवारजनों,

हमारी सरकार, अपने जनजातीय भाई-बहनों के सपनों को पूरा करने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रही। अनुसूचित जनजाति से जुड़ी योजनाओं का बजट हमारी सरकार ने 5 गुना ज्यादा बढ़ा दिया है। आपके बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले जो छात्रवृत्ति मिलती थी, अब उसका कुल बजट भी ढाई गुना से ज्यादा कर दिया गया है। 10 साल पहले तक हमारे देश में आदिवासी बच्चों के लिए केवल 90 एकलव्य मॉडल स्कूल थे। जबकि हमने बीते 10 साल में 500 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल स्कूल बनाने का काम शुरू किया है। आदिवासी बच्चे सिर्फ स्कूली पढ़ाई करके रुक जाएं, ये सही नहीं। अति-पिछड़े जनजातीय समाज के बच्चे जब MA, BA और बड़ी क्लास की पढ़ाई पूरी करेंगे, बड़ी कंपनियों में काम करने के लिए जिस पढ़ाई की ज़रूरत होती है वो पढ़ाई करेंगे तब हमारे लिए खुशी की बात होगी। इसके लिए आदिवासी इलाकों में कक्षाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है, उच्च शिक्षा के केंद्र बढ़ाए जा रहे हैं।

साथियों,

पूरे आदिवासी समाज की आमदनी कैसे बढ़े, income कैसे बढ़े, इसके लिए हम हर स्तर पर कोशिश कर रहे हैं। आदिवासी साथियों के लिए वन-उपज बहुत बड़ा सहारा है। 2014 से पहले करीब 10 वन उपजों के लिए ही MSP तय की जाती थी। हम लगभग 90 वन उपजों को MSP के दायरे में लाए हैं। वन उपजों के अधिक से अधिक दाम मिले, इसके लिए हमने वनधन योजना बनाई। आज इस योजना के लाखों लाभार्थियों में बहुत बड़ी संख्या बहनों की है। बीते 10 वर्षों में आदिवासी परिवारों को 23 लाख पट्टे जारी किए जा चुके हैं। हम जनजातीय समुदाय के हाट बाजार को भी बढ़ावा दे रहे हैं। हमारे आदिवासी भाई जो सामान हाट-बाजार में बेचते हैं, वही सामान वो देश के दूसरे बाजारों में भी बेच पाएं इसके लिए भी कई अभियान चलाए जा रहे हैं।

साथियों,

मेरे आदिवासी भाई बहन, भले ही दूर दराज के इलाक़ों में रहते हों लेकिन दूरदृष्टि कमाल की होती है, अभी-अभी हमने अनुभव किया जिन लोगों से बात किया। आज आदिवासी समाज देख और समझ रहा है कि कैसे हमारी सरकार जनजातीय संस्कृति और उनके सम्मान के लिए काम कर रही है। हमारी ही सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। हमारी ही सरकार पूरे देश में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के 10 बड़े संग्रहालय बना रही है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, आपके मान-सम्मान, आपके सुख-सुविधा के लिए हम ऐसे ही पूरे समर्पण भाव से लगातार काम करते हैं, करते रहेंगे। एक बार फिर इतनी बड़ी तादाद में आप मेरे आदिवासी भाई-बहन मुझे आशीर्वाद देने आए, ऐसा लग रहा है जैसे माता शबरी के आशीर्वाद मुझे मिल रहे हैं। मैं आप सबको प्रणाम करता हूं। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद !

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
PM Modi urges people to take 9 pledges on health, saving water, others

Media Coverage

PM Modi urges people to take 9 pledges on health, saving water, others
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
महिलाओं की भागीदारी ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है: लोकसभा में पीएम मोदी
April 16, 2026

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह से चर्चा प्रारंभ हुई है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है, उसको तथ्यों से और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। और इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता, उस पाल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसे ही पल हैं। आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब से यह विचार सामने आया, आवश्यकता महसूस हुई, हम इसको लागू कर देते और हम आज उसको काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते हैं। और आवश्यकता के अनुसार उसमें समय-समय पर सुधार भी होते और यही तो लोकतंत्र की ब्‍यूटी होती है। हमारी, हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी हैं। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की एक विकास यात्रा रही है, और उस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर सदन के हम सभी साथियों को मिला है। और मैंने प्रारंभ में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह हम लोगों के लिए सौभाग्य है और मैं चाहता हूं कि मेरे सभी माननीय सांसद, मैं इधर-उधर की आज बात नहीं करना चाहता हूं, हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने ना दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति की भी, उसके रूप स्वरूप को तो तय करने ही करने वाला है, लेकिन यह देश की दिशा और दशा भी तय करने वाला है, इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर हम खड़े हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति हम सब महसूस कर रहे हैं और यह हम सबके लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है, और इस समय को हमने एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। और मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल उत्तम प्रकार के रेल, रास्ते, इंफ्रास्ट्रक्चर या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से ही विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम लोग नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत, जिसके नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कोई भी होंगे, जिम्‍मेवार कोई भी होंगे, लेकिन इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा कि जब हम अकेले मिलते हैं, तब मानते हैं हां यार! लेकिन जब सामूहिक रूप से मिलते हैंं, मुझे याद है जब इसकी प्रक्रिया चली थी, सभी दलों से मिलना हुआ है, एक दल को छोड़कर के, जिन-जिन से मिलना हुआ है, हर एक ने सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है। बाद में जाकर के जो कुछ भी हुआ होगा, राजनीतिक दिशा पकड़ी जा रही है। लेकिन जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं, मैं उनको भी एडवाइस करना चाहूंगा, एक मित्र के रूप में एडवाइस करता हूं और सबको काम आएगी। हमारे देश में जबसे वूमेन रिजर्वेशन को लेकर चर्चा हुई है और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, जिस-जिस ने विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से बुरा किया है। लेकिन यह भी देखिए कि 24 का चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? यह इसलिए नहीं हुआ कि 24 में सबने सहमति से इसको पारित किया, तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी के पक्ष में पॉलिटिकल फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। सहज रूप से जो मुद्दे थे, उन मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, क्योंकि 24 में सब साथ में थे। कुछ लोग यहां हैं, कुछ लोग नहीं है, लेकिन सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं, अगर हम सब साथ में जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश के सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उसके यश के हकदार होंगे। ना ट्रेजरी बैंक इसका हकदार रहेगा, ना मोदी उसका हकदार रहेगा, यहां बैठे हुए सब हकदार रहेंगे और इसलिए जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वह खुद के परिणामों को पिछले 30 साल में देख लें। फायदा उनका भी इसी में है, रास्ता दिखा रहा हूं कि इसी में फायदा है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे और इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे याद है, तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था, मैं एक एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए यह कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है, तो बहुत आराम से दे देते हैं। लेकिन पंचायतों में आरक्षण देना है, तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है, हम सुरक्षित है यार, वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले यह कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए, क्यों? क्योंकि उनका कुछ जाएगा और इसलिए और बाकी पंचायत का हो जाता है, 50% तक पहुंच गए।

मैं राजनीतिक दृष्टि से और भी एक बात समझाना चाहता हूं साथियों,

आज से 25 साल, 30 साल पहले जिसने भी विरोध किया, तो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना, पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर के आई हुई बहनों में एक political consciousness है, वह ओपिनियन मेकर हैं ग्रास रूट लेवल पर, 30 साल पहले वह शांत रहती थी, बोलती नहीं थी, समझती थी, बोलती नहीं थी। आज वह वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो जो लाखों बहनें कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, प्रतिनिधित्व कर चुकी है, जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है, वह आंदोलित है। वह कहती हैं कि झाड़ू-कचरा वाले काम में तो हमें जोर देते हो, वह तो परिवार में भी पहले होता था, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती हैं। और इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी संसद की बात करता हूं, किसी भी एमलए की बात करता हूं, यह दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33% का नहीं, वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी, लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए राजनीतिक समझदारी भी इसी में है कि हम ग्रास रूट लेवल पर महिलाओं की जो पॉलिटिकल लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको आपने अब कंसीडर करना पड़ेगा। यहां मैंने सुना, हमारे मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला रहे हैं, उनके परिवार वाले भी चला रहे हैं। आप देश की बहनों पर भरोसा करो ना, उनकी समझदारी पर भरोसा करो, एक बार 33% बहनों को यहां आने दो, आकर के उनको निर्णय करने दो, किसको देना है, किसको नहीं देना है, इस वर्ग को देना है, उस वर्ग को देना है, करेंगे वह निर्णय, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों करते हैं भाई? एक बार आने तो दो! उनको आने तो दो! जब आएंगे, तो 34 में और धर्मेंद्र जी, धर्मेंद्र जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है, मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं। यह बात सही है कि मैं अति पिछडे समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सबको साथ लेकर के चलने का है और यही मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है और इसलिए और यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को इतना बड़ा दायित्व देश ने दिया है। और इसलिए मैं तो देशवासियों का ऋणी हूँ और मैं तो संविधान निर्माताओं का ऋणी हूँ कि जिसके कारण आज मैं यहां हूं।

लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी!

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जीवन के हर एक क्षेत्र में हम देखें कि नारी शक्ति देश के गौरव को बढ़ाने वाले, परचम लहराने में कहीं पीछे नहीं हैं जी। हम गर्व कर सकें, इस प्रकार से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आज हमारी माताएं-बहनें बहुत बड़ा योगदान, हमारी बेटियां तो कमाल कर रही हैं, जीवन के हर क्षेत्र में! इतना बड़ा सामर्थ्‍य, उसको हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं जी, उनके जुड़ने से सामर्थ्‍य बढ़ने वाला है और इसलिए मैं आज अपील करने आया हूं आपके पास कि इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिये। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज का हमारा यह, हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर के, एक दिशा में सोच करके विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागीदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है और मैंने जैसा पहले भी कहा कि आज पूरा देश और विशेष करके नारी शक्ति, हमारे निर्णय तो देखेंगी, लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। और इसलिए हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से एक प्रकार से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना, उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे और इसलिए वह कभी राजनीतिक इशू भी नहीं बना, एक अच्छी स्थिति है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसको रोकना है, अब यहां जो लोग जनसंख्या वगैरा के विषय उठाते हैं, क्या आपको मालूम नहीं है, मैं चाहूंगा कि अमित भाई अपने भाषण में इन सारी चीजों को उल्‍लेख करेंगे, जब कि हमने जनगणना के संबंध में कब-कब क्या-क्या किया था, बाद में कोविड आया, उसके कारण क्या मुसीबत आई, कैसे रुकावटें आई। यह सारी बात हम सबके सामने हैं, इसमें कोई विषय नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब हम 23 में चर्चा कर रहे थे, तब भी व्यापक रूप से बात यह थी कि इसको जल्दी करो, हर कोई कह रहा था जल्दी करो। अब 24 में संभव नहीं था क्योंकि इतने कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 29 में हमारे पास अवसर है, अगर हम उन 29 में भी नहीं करते, तो स्थिति क्या बनेगी, हम कल्पना कर सकते हैं, तो फिर हम देश की माताओं-बहनों को यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में यह प्रयास सच्चे अर्थ से कर सकते हैं। और इसलिए समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब ना करें, इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकार लोगों से, जो महिलाओं में एक्टिविस्ट के नाते काम करने वाले, ऐसे लोगों से भी कई चर्चाएं हुई, कुछ लोगों ने खुद होकर के भी सुझाव दिए। सारा मंथन करते-करते यहां भी सभी दलों से लगातार बातें करके होती रही हैं। स्ट्रक्चरल वे में भी हुई है, इनफॉर्मल वे में भी हुई है और उसमें से आखिर बनाए हुए यह कुछ रास्ता निकालना होगा, ताकि हम हमारी माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा। यहां बैठ करके हमें किसी को संविधान ने देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। जो शपथ लेकर के हम बैठे हैं ना, हम सबको एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व बनता है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम टुकड़ों में ना सोच सकते हैं, ना टुकड़ों में हम निर्णय कर सकते हैं। और इसलिए निराधार रूप में, जिसमें कोई सच्चाई नहीं, रत्ती भर सच्चाई नहीं, सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए जो बवंडर खड़ा किया जा रहा है, मैं आज बड़ी जिम्मेवारी के साथ इस सदन में इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं, क्या यह दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हो, बड़े राज्य हो, मैं आज यह जिम्मेवारी से कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी, भूतकाल में जो सरकारें रहीं और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, तो उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात पर होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए, तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो, तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो, तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जब नियत साफ है, तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं आज सदन के सभी साथियों को यह भी कहना चाहता हूं कि साथियों, हम भ्रम में ना रहे, हम उस अहंकार में ना रहे हैं और मैं हम शब्द का उपयोग कर रहा हूं। मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं, हम इस भ्रम में ना रहें कि हम देश की नारी शक्ति को हम कुछ दे रहे हैं, जी नहीं। उसका हक है; और हमने, हमने कई दशकों से उसको रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित करके हमें उस पाप में से मुक्ति पाने का यह अवसर है। हम सब जानते हैं, हर एक ने कैसे चालाकी की हर बार, चतुराई की, बिल्कुल हम तो इसके पक्ष में ही है, लेकिन; हम इसके साथ ही हैं, लेकिन; हर बार कोई ना कोई टेक्निकल पूंछ लगा दी इसको और इसको रोका गया है। हर बार ऐसे ही चीजें लाई गई हैं। हिम्मत नहीं हैं कि हम 33% महिलाओं के आरक्षण का विरोध कर पाए, वह तो जमाना चला गया, आपको करना नहीं है, लेकिन कहने की हिम्मत भी नहीं है। और इसलिए टेक्निकल बहानेबाजी, यह करो तो यह, वो करो तो वो, ढिकना करो तो, अब देश की नारी को यह नहीं समझा पाओगे, सदन में नंबर का खेल क्या होता है, वह तो समय तय करेगा, लेकिन यह पक्का है कि अब इन भांति-भांति के बहानेबाजी, भांति-भांति टेक्निकल मुद्दों के आधार पर चीजों को उलझा करके तीन दशक तक इसको अड़ंगे डालें हमने फंसा-फंसा कर रखा, आपने जो अचीव करना था, कर लिया, अब छोड़ दो ना भाई! तीन दशक कम पढ़ते हैं क्या रोकने में, तीन दशक तक आपने रोका, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं ना कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अरे भाई, इनको बोलने दीजिए, वहां पर बेचारे के मुंह पर ताला लगा हुआ है, वहां बंगाल में कोई बोलने नहीं देता उसको।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देखिए इसका अगर विरोध करेंगे, तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे, तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर रखो। किसी को नहीं होगा, क्योंकि फिर अलग पहलू हो जाता है, फिर किसी को फायदा नहीं होता। और इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं कल advertisement दे करके सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हूं, क्रेडिट आप ले लो चलो! क्रेडिट की चिंता है क्या जी? ले लो ना क्रेडिट, आपको जिसकी फोटो छपवानी है, सरकारी खर्चे से हम करवा देंगे। सामने से, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारी संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी यह सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार, इतना सीमित नहीं है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, यह सांस्कृतिक कमिटमेंट है और इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी और अब तो 20 से अधिक राज्‍यों में 50% हुआ है और हमने अनुभव किया है, मुझे लंबे अरसे तक, मुझे लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता ने अवसर दिया और उसी कालखंड में ग्रासरूट लेवल पर वूमेन लीडरशिप को मैंने देखा है। मेरा अनुभव है कि संवेदनशीलता के साथ समस्याओं के समाधान में उनका कमिटमेंट बहुत ही परिणामकारी रहते थे, विकास की यात्रा को गति देने में रहते थे और उस अनुभव के आधार पर मैं कहता हूं कि इस सदन में उनकी आवाज नई शक्ति बनेगी, नई सोच जुड़ेगी, देश की दिशा में एक संवेदनशीलता जुड़ेगी, तथ्य और तर्क के आधारों पर अनुभव जब जुड़ता है, तब मैं समझता हूं उसका सामर्थ्य अनेक गुना बढ़ जाता है और सदन कितना समृद्ध होता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्यवान में कोई कमी नहीं है, हम भरोसा करें, वह कंट्रीब्यूट करेंगी, बहुत अच्छा कंट्रीब्यूट करेंगी और आज भी जितनी हमारी बहनें यहां हैं, जब भी उनको अवसर मिला है, उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात बताई है, सदन को समृद्ध किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज देश में वर्तमान में, देश में 650 से ज्यादा पंचायत हैं, डिस्ट्रिक्ट पंचायत, करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व कर रही हैं और केंद्र के कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा उनके पास जिम्मेदारी और धन और व्यवस्था होती है, काम करती हैं जी। करीब 6700 ब्लॉक पंचायतों में 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिसका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में मेयर्स हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली बहनें हैं, उनकी ताकत है। और मैं मानता हूं कि आज देश जो प्रगति कर रहा है, उस प्रगति में इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, उस ऋण को हमें स्वीकार करने का यह अवसर है। और जब यह अनुभव सदन के साथ जड़ेगा, तब वह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

एक लंबी प्रतीक्षा यानी एक प्रकार से हम सबके लिए यह सवालिया निशान पैदा हो, ऐसी परिस्थिति हम ही लोगों ने पैदा की है। यह अवसर है कि हम पुरानी जो कुछ भी मर्यादा रही होंगी, मुश्किलें रही होंगी, उससे बाहर निकले, हिम्मत के साथ हम आगे बढ़े और नारी शक्ति का राष्ट्र के विकास में उनकी सहभागिता को हम सुनिश्चित करें और मैं पक्का मानता हूं कि अगर आज हम मिलकर के निर्णय करते हैं और मैं तो आग्रह करूंगा कि हमें सर्व सहमति से इसको को आगे बढ़ना चाहिए और जब सर्वसम्मति से बढ़ता है, तो ट्रेजरी बैंक पर एक दबाव रहता है जी, उनको भी लगता है कि नहीं भाई सबको सबका इसमें हक है, हर एक की बात मान के चलो, कोई नुकसान नहीं है। सामूहिक शक्ति से तो अनेक परिणाम हमें अच्छे मिलते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं ज्यादा समय न लेते हुए इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से ना तोलें। हम जब भी कुछ निर्णय करने जा रहे हैं, तो देश के, इतने बड़े देश का आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कोई हक बनता है यहां आने का, हमें रोकना नहीं चाहिए। और दूसरा संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी एक मत पहले से बनता आया था, चर्चा थी कि साहब यह जो है, इनका कम मत करो, अधिक कर दो, तो जल्दी हो जाएगा। वह अधिक वाला विषय अब आया है कि चलो भाई पहले जो संख्या थी 33% और बढ़ा दो, ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि मेरा हक चला गया। एक नई शक्ति जुड़ेगी, अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और अब सदन के रचना भी तो अब, जो पहले से हमने सोच कर रखा है, जगह तो बना ली है।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं लाइटर वे में जरूर कहना चाहूंगा, हर एक के अपने राजनीतिक कारण होते हैं और पराजय का डर जरा हैरान करने वाला होता है। लेकिन अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसको नजर ना लग जाए, इसलिए काला टीका लगाने की परंपरा है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए!

बहुत-बहुत धन्यवाद!