10 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में धनराशि अंतरण किया
2800 करोड़ रुपए से अधिक की रेलवे परियोजनाओं का शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित किया
1000 करोड़ रुपए से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास किया
पीएमएवाई के 26 लाख लाभार्थियों के गृह-प्रवेश समारोह में भाग लिया
अतिरिक्त परिवारों के सर्वेक्षण के लिए आवास+2024 ऐप शुभांरभ किया
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) 2.0 के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए
"इस राज्य ने हम पर बहुत विश्वास जताया है और हम लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे"
"केंद्र में एनडीए सरकार के 100 दिनों की अवधि के दौरान, गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं"
"कोई भी देश व राज्य तभी प्रगति करता है जब उसकी आधी आबादी, यानि हमारी महिला शक्ति, उसके विकास में समान भागीदारी करती है"
"प्रधानमंत्री आवास योजना भारत में महिला सशक्तिकरण का प्रतिबिंब है"
"सरदार पटेल ने असाधारण इच्छाशक्ति के बल पर देश को एकजुट किया"

जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!

ओडिशा के गवर्नर रघुबर दास जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन मांझी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी जुएल ओराम जी, धर्मेंद्र प्रधान जी, अन्नपूर्णा देवी जी, ओडिशा के डिप्टी सीएम के. वी. सिंहदेव जी, श्रीमती प्रभाती परीडा जी, सांसदगण, विधायकगण, देश के कोने-कोने से आज हमारे साथ जुड़े हुए सभी अन्य महानुभाव और ओडिशा के मेरे भाइयों और बहनों।

ओडिशा-रो प्रिय भाई ओ भौउणी मानंकु,

मोर अग्रिम सारदीय सुभेच्छा।

भगवान जगन्नाथ की कृपा से आज एक बार फिर मुझे ओडिशा की पावन धरती पर आने का सौभाग्य मिला है। जब भगवान जगन्नाथ की कृपा होती है, जब भगवान जगन्नाथ जी का आशीर्वाद बरसता है, तब भगवान जगन्नाथ की सेवा के साथ ही जनता जनार्दन की सेवा का भी भरपूर अवसर मिलता है।

साथियों,

आज देश भर में गणेश उत्सव की धूम है, गणपति को विदाई दी जा रही है। आज अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व भी है। आज ही विश्वकर्मा पूजा भी है। दुनिया में भारत ही ऐसा देश है, जहां श्रम और कौशल को विश्वकर्मा के रूप में पूजा जाता है। मैं सभी देशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की भी शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

ऐसे पवित्र दिन अभी मुझे ओडिशा की माताओं-बहनों के लिए सुभद्रा योजना का शुभारंभ करने का अवसर मिला है। और ये भी महाप्रभु की कृपा है कि माता सुभद्रा के नाम से योजना का आरंभ हो और स्वयं इंद्र देवता आशीर्वाद देने के लिए पधारे हैं। आज देश के 30 लाख से ज्यादा परिवारों को यहीं भगवान जगन्नाथ जी की धरती से देशभर के अलग-अलग गांवों में लाखों परिवारों को पक्के घर भी दिये गए हैं। इनमें से 26 लाख घर हमारे देश के गांवों में और 4 लाख घर हमारे देश के अलग-अलग शहरों में ये घर दिए गए हैं। यहां ओडिशा के विकास के लिए हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। मैं आप सबको, ओडिशा के सभी लोगों को, सभी देशवासियों को इस अवसर पर बधाई देता हूँ।

भाइयों-बहनों,

ओडिशा में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनते समय मैं शपथ ग्रहण समारोह में आया था। उसके बाद ये मेरी पहली यात्रा है। जब चुनाव चल रहे थे, तब मैंने आपसे कहा था, यहां डबल इंजन की सरकार बनेगी तो ओडिशा विकास की नई उड़ान भरेगा। जो सपने यहाँ के गाँव-गरीब, दलित-आदिवासी ऐसे हमारे वंचित परिवारों ने देखे हैं, जो सपने हमारी माताओं, बहनों, बेटियों ने, महिलाओं ने, जो सपने हमारे नौजवानों ने, हमारे नौजवान बेटियों ने, जो सपने हमारे मेहनतकस मध्यम वर्ग ने देखे हैं, उन सबके सपने भी पूरे होंगे, ये मेरा विश्वास है और महाप्रभु का आशीर्वाद है। आज आप देखिए जो वादे हमने किए थे, वो अभूतपूर्व गति से पूरे हो रहे हैं। हमने कहा था, हम सरकार बनते ही भगवान जगन्नाथ के मंदिर के चारों द्वार खोलेंगे। सरकार बनते ही हमने भगवान जगन्नाथ मंदिर परिसर के बंद द्वार खुलवा दिये। जैसा हमने कहा था, मंदिर का रत्न भंडार भी खोल दिया गया। भाजपा सरकार दिन रात जनता-जनार्दन की सेवा के लिए काम कर रही है। हमारे मोहन जी, के. वी. सिंह देव जी, बहन प्रभाती परीडा जी, और सभी मंत्रियों के नेतृत्व में सरकार खुद जनता के पास जा रही है, उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास कर रही है। और मैं इसके लिए यहां की मेरी पूरी टीम की, मेरे सभी साथियों की भरपूर प्रशंसा करता हूं, मैं उनकी सराहना करता हूं।

भाइयों-बहनों,

आज का ये दिन एक और वजह से भी विशेष है। आज केंद्र की एनडीए सरकार के 100 दिन भी हो रहे हैं। इस दौरान, गरीब, किसान, नौजवान और नारीशक्ति के सशक्तिकरण के लिए बड़े-बड़े फैसले लिए गए हैं। बीते 100 दिन में तय हुआ कि गरीबों के लिए 3 करोड़ पक्के घर बनाएंगे। बीते 100 दिनों में नौजवानों के लिए 2 लाख करोड़ रुपए का पीएम पैकेज घोषित किया गया है। युवा साथियों को इसका बहुत लाभ होगा। इसके तहत प्राइवेट कंपनियों में नौजवानों की पहली नौकरी की पहली सैलरी सरकार देने वाली है। ओडिशा सहित पूरे देश में 75 हज़ार नई मेडिकल सीटें जोड़ने का भी फैसला किया गया है। कुछ दिन पहले ही 25 हज़ार गांवों को पक्की सड़क से जोड़ने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इसका फायदा मेरे ओडिशा के गांवों को भी होगा। बजट में जनजातीय मंत्रालय के बजट में करीब दोगुनी बढ़ोतरी की गई है। देशभर में करीब 60 हज़ार आदिवासी गांवों के विकास के लिए विशेष योजना की घोषणा की गई है। बीते 100 दिनों में ही सरकारी कर्मचारियों के लिए एक शानदार पेंशन योजना की भी घोषणा की गई है। जो कर्मचारी हैं, जो दुकानदार हैं, मध्यम वर्ग के उद्यमी हैं, उनके इनकम टैक्स में भी कमी की गई है।

साथियों,

बीते 100 दिन में ही ओडिशा सहित पूरे देश में 11 लाख नई लखपति दीदी बनी हैं। हाल में ही धान किसानों, तिलहन और प्याज किसानों के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। विदेशी तेल के आयात पर शुल्क बढ़ाया गया है, ताकि देश के किसानों से ज्यादा कीमत पर खरीद हो। इसके अलावा बासमती के निर्यात पर लगने वाला शुल्क घटाया गया है। इससे चावल के निर्यात को बल मिलेगा और बासमती उगाने वाले किसानों को ज्यादा फायदा होगा। खरीफ की फसलों पर MSP बढ़ाया गया है। इससे देश के करोड़ों किसानों को करीब 2 लाख करोड़ रुपए का फायदा होगा। बीते 100 दिन में सबके हित में ऐसे कई बड़े कदम उठाए गए हैं।

साथियों,

कोई भी देश, कोई भी राज्य तभी आगे बढ़ता है, जब उसके विकास में उसकी आधी आबादी यानि हमारी नारीशक्ति की बराबर भागीदारी होती है। इसलिए, महिलाओं की उन्नति, महिलाओं का बढ़ता सामर्थ्य, ये ओडिशा के विकास का मूलमंत्र होने वाला है। यहाँ तो भगवान जगन्नाथ जी के साथ देवी सुभद्रा की मौजूदगी भी हमें यही बताती है, यही सिखाती है। मैं यहां देवी सुभद्रा स्वरूपा सभी माताओं-बहनों-बेटियों को आदरपूर्वक नमन करता हूं। मुझे खुशी है कि भाजपा की नई सरकार ने अपने सबसे शुरुआती फैसलों में ही सुभद्रा योजना की सौगात हमारी माताओं-बहनों को दी है। इसका लाभ ओडिशा की 1 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिलेगा। इस योजना के तहत महिलाओं को कुल 50 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। ये पैसा समय-समय पर आपको मिलता रहेगा। ये राशि सीधे माताओं-बहनों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, बीच में कोई बिचौलिया नहीं, सीधा आपके पास। RBI की डिजिटल करेंसी के पायलट प्रोजेक्ट से भी इस योजना को जोड़ा गया है। इस डिजिटल करेंसी को आप सभी बहनें, जब मन आए डिजिटल तरीके से खर्च भी कर पाएंगी। देश में डिजिटल करेंसी की अपनी तरह की इस पहली योजना से जुड़ने के लिए मैं ओडिशा की माताओं, बहनों, बेटियां सभी महिलाओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। सुभद्रा जोजोना मा ओ भौउणी मानंकु सशक्त करू, मा सुभद्रांक निकट-रे एहा मोर प्रार्थना।

भाइयों-बहनों,

मुझे बताया गया है, सुभद्रा योजना को ओडिशा की हर माता-बहन-बेटी तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में कई यात्राएं भी निकाली जा रही हैं। इसके लिए माताओं-बहनों को जागरूक किया जा रहा है। योजना से जुड़ी सारी जानकारी दी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के, भाजपा के लाखों कार्यकर्ता भी इस सेवा अभियान में पूरे जोर-शोर से जुटे हैं। मैं इस जनजागरण के लिए सरकार, प्रशासन के साथ-साथ भाजपा के विधायक, भाजपा के सांसद और भाजपा के लाखों पार्टी कार्यकर्ताओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

भारत में महिला सशक्तिकरण का एक और प्रतिबिंब है- प्रधानमंत्री आवास योजना। इस योजना के कारण छोटे से छोटे गाँव में भी अब संपत्ति महिलाओं के नाम होने लगी है। आज ही यहाँ देश भर के लगभग 30 लाख परिवारों का गृहप्रवेश करवाया गया है। अभी तीसरे कार्यकाल में हमारी सरकार के कुछ महीने ही हुए हैं, इतने कम समय में ही 15 लाख नए लाभार्थियों को आज स्वीकृति पत्र भी दे दिए गए हैं। 10 लाख से ज्यादा लाभार्थियों के बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, ये शुभ काम भी हमने ओडिशा की, महाप्रभु की इस पवित्र धरती से किया है, और इसमें बड़ी संख्या में मेरे ओडिशा के गरीब परिवार भी शामिल हैं। जिन लाखों परिवारों को आज पक्का घर मिला है, या पक्का घर मिलना पक्का हुआ है, उनके लिए ये जीवन की नई शुरुआत है और पक्की शुरूआत है।

भाइयों-बहनों,

यहाँ आने से पहले मैं हमारे एक आदिवासी परिवार के गृहप्रवेश के कार्यक्रम में उनके घर भी गया था। उस परिवार को भी अपना नया पीएम आवास मिला है। उस परिवार की खुशी, उनके चेहरों का संतोष, मैं कभी नहीं भूल सकता। उस आदिवासी परिवार ने मुझे मेरी बहन ने खुशी से खीरी भी खिलाई! और जब मैं खीरी खा रहा था तो स्वाभाविक था कि मुझे मेरी मां की याद आना, क्योंकि जब मेरी मां जीवित थी तो मैं जन्मदिन पर हमेशा मां के आशीर्वाद लेने जाता था, और मां मेरे मुंह में गुड़ खिलाती थी। लेकिन मां तो नहीं है आज एक आदिवासी मां ने खीर खिलाकर मुझे जन्मदिन का आशीर्वाद दिया। ये अनुभव, ये अहसास मेरे पूरे जीवन की पूंजी है। गाँव-गरीब, दलित, वंचित, आदिवासी समाज के जीवन में आ रहा ये बदलाव, उनकी ये खुशियाँ ही मुझे और मेहनत करने की ऊर्जा देती हैं।

साथियों,

ओडिशा के पास वो सब कुछ है, जो एक विकसित राज्य के लिए जरूरी होता है। यहाँ के युवाओं की प्रतिभा, महिलाओं का सामर्थ्य, प्राकृतिक संसाधन, उद्योगों के लिए अवसर, पर्यटन की अपार संभावनाएं, क्या कुछ यहाँ नहीं है? पिछले 10 वर्षों में केवल केंद्र में रहते हुये ही हमने ये साबित किया है कि ओडिशा हमारे लिए कितनी बड़ी प्राथमिकता है। 10 वर्ष पहले केंद्र की तरफ से ओडिशा को जितना पैसा मिलता था, आज उससे तीन गुना ज्यादा पैसा मिलता है। मुझे खुशी है कि अब ओडिशा में वो योजनाएं भी लागू हो रही हैं, जो पहले लागू नहीं थीं। आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज का लाभ अब ओडिशा के लोगों को भी मिलेगा। और इतना ही नहीं, अब तो केंद्र सरकार ने 70 साल के ऊपर के बुजुर्ग के लिए भी 5 लाख रुपए का इलाज मुफ्त कर दिया है। आपकी आय चाहे कितनी ही हो, आपके घर में अगर 70 साल के ऊपर के बुजुर्ग हैं, उनकी उम्र 70 साल से ऊपर है तो उनके इलाज की चिंता मोदी करेगा। लोकसभा चुनाव के समय मोदी ने आपसे ये वायदा किया था और मोदी ने अपनी गारंटी पूरी करके दिखाई है।

साथियों,

गरीबी के खिलाफ भाजपा के अभियान का सबसे बड़ा लाभ ओडिशा में रहने वाले दलित, वंचित और आदिवासी समाज को मिला है। आदिवासी समाज के कल्याण के लिए अलग मंत्रालय बनाना हो, आदिवासी समाज को जड़-जंगल-जमीन के अधिकार देने की बात हो, आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर देना हो या ओडिशा की आदिवासी महिला को देश की माननीय राष्ट्रपति बनाना हो, ये काम पहली बार हमने किए हैं।

साथियों,

ओडिशा में कितने ही ऐसे आदिवासी इलाके, कितने ऐसे जनजातीय समूह थे, जो कई-कई पीढ़ियों तक विकास से वंचित थे। केंद्र सरकार ने जनजातियों में भी सबसे पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना शुरू की है। ओडिशा में ऐसी 13 जनजातियों की पहचान की गई है। जनमन योजना के तहत सरकार इन सभी समाजों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। आदिवासी क्षेत्रों को सिकल सेल एनीमिया से मुक्त करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। पिछले 3 महीने में इस अभियान के तहत 13 लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।

भाइयों और बहनों,

आज हमारा देश पारंपरिक कौशल के संरक्षण पर भी अभूतपूर्व रूप से फोकस कर रहा है। हमारे यहां सैकड़ों-हजारों वर्षों से लोहार, कुम्हार, सुनार, मूर्तिकार जैसे काम करने वाले लोग रहे हैं। ऐसे 18 अलग-अलग पेशों को ध्यान में रखते हुए पिछले साल विश्वकर्मा दिवस पर विश्वकर्मा योजना शुरू की गई थी। इस योजना पर सरकार 13 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। अभी तक 20 लाख लोग इसमें रजिस्टर हो चुके हैं। इसके तहत विश्वकर्मा साथियों को ट्रेनिंग दी जा रही। आधुनिक औज़ार खरीदने के लिए हज़ारों रुपए दिए जा रहे हैं। साथ ही बिना गारंटी का सस्ता लोन बैंकों से दिया जा रहा है। गरीब के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा से लेकर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तक की ये गारंटी, उनके जीवन में आ रहे ये बदलाव, यही विकसित भारत की असली ताकत बनेंगे।

साथियों,

ओडिशा के पास इतना बड़ा समुद्री तट है। यहाँ इतनी खनिज सम्पदा है, इतनी प्राकृतिक सम्पदा है। हमें इन संसाधनों को ओडिशा का सामर्थ्य बनाना है। अगले 5 साल में हम ओडिशा को रोड और रेलवे की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। आज भी, यहाँ रेल और रोड से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया है। आज मुझे लांजीगढ़ रोड-अंबोदला-डोइकालू रेल लाइन देश को समर्पित करने का सौभाग्य मिला है। लक्ष्मीपुर रोड-सिंगाराम-टिकरी रेल लाइन भी आज देश को समर्पित की जा रही है। इसके साथ ही ढेंकनाल-सदाशिवपुर-हिंडोल रोड रेल लाइन भी राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है। पारादीप से कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी आज काफी काम शुरू हुए हैं। मुझे जयपुर-नवरंगपुर नई रेलवे लाइन की आधारशिला रखने का सौभाग्य भी मिला है। इन प्रोजेक्ट्स से ओडिशा के युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। वो दिन दूर नहीं जब पुरी से कोणार्क रेलवे लाइन पर भी तेजी से काम शुरू होगा। हाइटेक ‘नमो भारत रैपिड रेल’ भी बहुत जल्द ही ओडिशा को मिलने वाली है। ये आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर ओडिशा के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगा।

साथियों,

आज 17 सितंबर को देश हैदराबाद मुक्ति दिवस भी मना रहा है। आज़ादी के बाद हमारा देश जिन हालातों में था, विदेशी ताक़तें जिस तरह देश को कई टुकड़ों में तोड़ना चाहती थीं। अवसरवादी लोग जिस तरह सत्ता के लिए देश के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए तैयार हो गए थे। उन हालातों में सरदार पटेल सामने आए। उन्होंने असाधारण इच्छाशक्ति दिखाकर देश को एक किया। हैदराबाद में भारत-विरोधी कट्टरपंथी ताकतों पर नकेल कसकर 17 सिंतबर को हैदराबाद को मुक्त कराया गया। इसलिए हैदराबाद मुक्ति दिवस, ये केवल एक तारीख नहीं है। ये देश की अखंडता के लिए, राष्ट्र के प्रति हमारे दायित्वों के लिए एक प्रेरणा भी है।

साथियों,

आज के इस अहम दिन हमें उन चुनौतियों पर भी ध्यान देना है जो देश को पीछे धकेलने में जुटी हैं। आज जब हम गणपति बप्पा को विदाई दे रहे हैं तो मैं एक विषय इसी से जुड़ा उठा रहा हूं। गणेश उत्सव, हमारे देश के लिए केवल एक आस्था का पर्व ही नहीं है। गणेश उत्सव ने हमारे देश की आज़ादी में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। जब सत्ता की भूख में अंग्रेज़ देश को बांटने में लगे थे। देश को जातियों के नाम पर लड़वाना, समाज में जहर घोलना, ‘बांटो और राज करो’, ये अंग्रेजों का हथियार बन गया था, तब लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव के सार्वजनिक आयोजनों के जरिए भारत की आत्मा को जगाया था। ऊंच-नीच, भेदभाव, जात-पात, इन सबसे ऊपर उठकर हमारा धर्म हमें जोड़ना सिखाता है, गणेश उत्सव इसका प्रतीक बन गया था। आज भी, जब गणेश उत्सव होता है, हर कोई उसमें शामिल होता है। कोई भेद नहीं, कोई फर्क नहीं, पूरा समाज एक शक्ति बनकर के, एक सामर्थ्यवान बनकर के खड़ा होता है।

भाइयों और बहनों,

‘बांटो और राज करो’ की नीति पर चलने वाले अंग्रेजों की नज़रों में उस समय भी ‘गणेश उत्सव’ खटकता था। आज भी, समाज को बांटने और तोड़ने में लगे सत्ता के भूखे लोगों को गणेश पूजा से परेशानी हो रही है। आपने देखा होगा काँग्रेस और उसके ecosystem के लोग पिछले कुछ दिनों से इसलिए भड़के हुए हैं, क्योंकि मैंने गणपति पूजन में हिस्सा लिया था। और तो और कर्नाटक में, जहां इनकी सरकार है, वहाँ तो इन लोगों ने और भी बड़ा अपराध किया। इन लोगों ने भगवान गणेश की प्रतिमा को ही सलाखों के पीछे डाल दिया। पूरा देश उन तस्वीरों से विचलित हो गया। ये नफरत भरी सोच, समाज में जहर घोलने की ये मानसिकता, ये हमारे देश के लिए बहुत खतरनाक है। इसलिए ऐसी नफरती ताकतों को हमें आगे नहीं बढ़ने देना है।

साथियों,

हमें साथ मिलकर अभी कई बड़े मुकाम हासिल करने हैं। हमें ओडिशा को, अपने देश को, सफलता की नई ऊंचाइयों पर लेकर जाना है। ओड़िसा बासींकरो समर्थनो पाँईं मूँ चीरअ रुणी, मोदी-रो आस्सा, सारा भारत कोहिबो, सुन्ना-रो ओड़िसा। मुझे विश्वास है, विकास की ये रफ्तार आने वाले समय में और तेज होगी। मैं एक बार फिर आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मेरे साथ बोलिए-

जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's sugar output rises 10.5% to 26.21 MT in 2025-26 season: ISMA

Media Coverage

India's sugar output rises 10.5% to 26.21 MT in 2025-26 season: ISMA
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s remarks in the Rajya Sabha
March 18, 2026
In politics, there are no full stops; your experience and contribution will forever remain a part of the nation’s life: PM
There is much to learn from these senior leaders about staying entirely committed to the responsibilities given by society: PM
The legacy here is a continuous process that enriches our parliamentary system: PM
Parliamentary system gains immense strength from the concept of a second opinion; This second opinion is a massive contribution to our democracy that we must cherish: PM
The six years spent here are invaluable for shaping one's contribution to the nation and for self-growth: PM
The invaluable contributions of the retiring members to nation-building would continue to be felt whether they serve within the formal system or through independent social work: PM

इस विशेष अवसर पर आपने मुझे अपनी भावनाएं प्रकट करने के लिए जो अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

आदरणीय सभापति जी,

सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन आज जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर के हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है, क्या? ये हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर के समाज जीवन में कुछ ना कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं है, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा-हमेशा बना रहेगा।

आदरणीय सभापति जी,

इस सदन में, जो भी सदस्य माननीय हमारे विदाई ले रहे हैं, कुछ सदन सदस्य ऐसे हैं, जिनको शायद उस समय जाने का समय कार्यकाल आएगा जब सदन नहीं चलता होगा, कुछ है जिनको ऑलरेडी सदन के दरमियान ही विदाई मिल रही है। लेकिन ये जाने वाले सभी माननीय सांसदों का बहुत ही उत्तम योगदान है, इसलिए, लेकिन मैं जरूर कहूंगा, आदरणीय देवगोड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी, ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है, और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, जो भी हमसे-उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना, यानी समाज में से जो जिम्मेवारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखने जैसा है। और मैं उनके योगदान की भूरी-भरी सराहना करूंगा, क्योंकि इतना लंबा कार्यकाल छोटा नहीं होता जी, बहुत महत्वपूर्ण है। उसी प्रकार से हमारे उपसभापति जी, हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेवारी निभाने का अवसर मिला है। बहुत ही मृदुभाषी, सदन को चलाने में सबका विश्वास जितने का निरंतर जिन्होंने प्रयास किया और मैंने देखा है कि संकट के समय ज्यादातर उपसभापति के ही जिम्मे आ जाता है कि भाई आप संभाल लेना जरा, तो उनको एक लंबा एक्सपीरियंस होता है, सबको जान भी लेते हैं, भली-भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। और जब भी, और मैंने देखा कि जब सदन का समय नहीं होता है, तो देश के कोने में, कोने में, कहीं ना कहीं वो यूथ के साथ मिलना- जुलना, देश की परिस्थितियों के संबंध में उनको अवगत कराना, उनमें एक देश के प्रति संवेदनाएं पैदा करना, वो भी निरंतर काम है। वो कलम के धनी तो है ही है, लेकिन कर्म कठोर के नाते भी मैं कहूंगा कि उन्होंने भारत के हर कोने में जाकर के अपना काम किया है।

आदरणीय सभापति जी,

कभी-कभी किसी समय हम सुनते थे कि सदन में बहुत ही हास्य विनोद व्यंग का अवसर मिलता रहता है। इन दिनों शायद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, क्योंकि 24x7 मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉनशियस रहता है, लेकिन हमारे अठावले जी, है जी, सदा बहार है, अठावले जी जा रहे हैं, लेकिन यहां पर किसी को खोट महसूस नहीं होगी, वो व्यंग विनोद भरपूर परोसते रहेंगे, ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।

आदरणीय सभापति जी,

सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है, लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको बाकी जो लंबे समय से, चार साल से बैठे हुए साथी हैं, अनुभव है, नए लोगों को तुरंत उनसे कुछ ना कुछ सीखने का अवसर मिलता है, और इसलिए एक प्रकार से यहां की जो विरासत है, वो कंटिन्यू प्रोसेस हमेशा रहती है, यह बहुत बड़ा लाभ होता है। मुझे पक्का विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, वो भी जो नए माननीय सांसद आएंगे, उनको, उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

आदरणीय सभापति जी,

हम लोग जानते हैं कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है, तो परिवार के लोग बैठकर के मन बना लेते हैं कि ऐसा करना है, लेकिन फिर भी कहते हैं, अरे ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लीजिए, एक सेकेंड ओपिनियन ले लीजिए, किसी वरिष्ठ से और घर में वरिष्ठ कहेंगे, मोहल्ले में देखो भाई, वो काफी अनुभवी है, जरा उनसे पूछ लो, एक बार उनका मन क्या करता है। अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो, सेकेंड ओपिनियन का बहुत महत्व होता है। मैं समझता हूं, हमारे संसदीय प्रणाली में इस सेकेंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है। एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है, सेकेंड ओपिनियन के लिए। अगर इस सदन में होता है, तो उस सदन में जाता है सेकेंड ओपिनियन के लिए, और ये सेकेंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारे निर्णय प्रक्रिया को एक बहुत बड़ा नया आयाम दे देती है, और वो मैं समझता हूं कि हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। तो इसलिए, सदन में जो माननीय सांसद बैठते हैं, उनके लिए एक खुलापन रहता है कि भाई चलो इस सदन में नहीं तो, उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन नया आएगा, उस सदन में नहीं तो, इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा। तो ये सेकेंड ओपिनियन, ये हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, जो जिस विरासत को हमें संभालना, हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है, और इसके लिए भी मैं उनका साधुवाद करता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

जो हमारे माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, बहुत आने वाले दिनों में तो शायद ये अवसर रहने वाला ही नहीं है, लेकिन ये माननीय सांसद ऐसे हैं कि जिनको पुराने संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए संसद भवन में भी बैठने का मौका मिला। उनको दोनों इमारतों में, उनको राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला है, और उनके कार्यकाल में ही, उनको इस नए सदन के निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है, ये एक विशेष उनके जीवन में याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी माननीय सांसदों के और मैं मानता हूं कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, राष्ट्र जीवन की कई बारीकियों से परिचित होने का अवसर सदन में प्राप्त होता है। एक प्रकार से हमारे यहां शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है। ये 6 साल यहां जो रहने का अवसर मिलता है, वो जीवन को गढ़ने का, राष्ट्र जीवन के गढ़तम्य योगदान का तो महत्व है ही है, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वयं के जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है। और इसलिए जब माननीय सांसद यहां आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है, जब जाते हैं, तो अनेक गुना वो बढ़ती है, उसका विस्तार होता है, और अनुभव की एक बहुत बड़ी ताकत होती है। अब तब जाकर के जाने के बाद राष्ट्र जीवन का उनका निरंतर योगदान बना रहे हैं। वो अपने तरीके से व्यवस्था के तहत हो सकते हैं, व्यवस्था के तहत ना भी हो सके, लेकिन उनका अमूल्य योगदान मिलता ही रहे, राष्ट्र जीवन के निर्माण में उनका अनुभव हमेशा-हमेशा उपयोगी हो, ये मेरी उन सभी माननीय सांसदों को मेरी शुभकामनाएं हैं। और मैं फिर से एक बार सभी माननीय सांसदों के योगदान का गौरव गान करता हूं, साधुवाद करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।