मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना की आधारशिला रखी
3400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न सड़क उन्नयन परियोजनाओं की आधारशिला रखी
खेल औरचिकित्सा अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए परियोजनाओं की आधारशिला रखी
‘‘मां कामाख्या के दर्शनों के लिए भक्तों की संख्या में बढ़ोतरी के साथ असम,पूर्वोत्तर में पर्यटन का प्रवेश द्वार बन जाएगा’’
‘‘हमारे तीर्थ स्थआल, मंदिर और आस्था स्थल हमारी सभ्यता की हजारों वर्षों की अनरवत यात्रा के अमिट प्रमाण हैं’’
‘‘जीवनयापन में आसानी वर्तमान सरकार की प्राथमिकता’’
‘‘ऐतिहासिक प्रासंगिकता वाले स्थानों के विकास के लिए केंद्र सरकार नई परियोजनाओंका शुभारंभ करेगी’’
‘मोदी की गारंटी अर्थात गारंटी पूरा होने की गारंटी’
‘‘सरकार ने इस साल बुनियादी ढांचे पर 11 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया है’’
‘‘मोदी ने दिन-रात काम करने और किए गए वादों को पूरा करने का संकल्प लिया है’’
‘‘हमारा लक्ष्य भारत और भारतीयों के लिए एक खुशहाल और समृद्ध जीवन बनाना, भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनाना और 2047 तक भारत को विकसित भारत में परिवर्तित करना है’’

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया जी, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा जी, मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी सर्बानंद सोनोवाल जी, रामेश्वर तेली जी, असम सरकार के मंत्री, सांसद और विधायकगण, विभिन्न काउंसिल के प्रमुख, और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!

आपूनालोक होको लू के मोर,

ऑन्तोरीक हुबेस्सा ज्ञापोन कोरिलू।

आज मुझे एक बार फिर मां कामाख्या के आशीर्वाद से, असम के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स आपको सौंपने का सौभाग्य मिला है। थोड़ी देर पहले यहां 11 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। ये सारे प्रोजेक्ट, असम और नॉर्थ ईस्ट के साथ ही, दक्षिण एशिया के दूसरे देशों के साथ इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेंगे। ये प्रोजेक्ट असम में टूरिज्म सेक्टर में नए रोजगार पैदा करेंगे और स्पोर्टिंग टैलेंट को भी नए अवसर देंगे। ये मेडिकल एजुकेशन और हेल्थ केयर सेंटर के रूप में भी असम की भूमिका का भी विस्तार करेंगे। मैं असम के, नॉर्थ ईस्ट के अपने सभी परिवारजनों को इन परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं कल शाम को यहां आया, जिस प्रकार से गुवाहाटी के लोगों ने रोड पर आ कर स्वागत सम्मान किया और बाल, वृद्ध सभी हमें आशीर्वाद दे रहे थे। मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मैंने टीवी पर देखा कि आप लोगों ने लाखों दीप जलाए। आपका ये प्‍यार, आपका ये अपनापन, ये मेरी बहुत बड़ी अमानत है। ये आपका स्नेह, आपका आशीर्वाद मुझे निरंतर ऊर्जा देते रहते हैं। मैं जितना आप सबका आभार व्यक्त करूँ उतना कम है।

भाइयों और बहनों,

बीते कुछ दिनों में मुझे देश के अनेक तीर्थों की यात्रा करने का अवसर मिला है। अयोध्या में भव्य आयोजन के बाद मैं अब यहां मां कामाख्या के द्वार पर आया हूं। आज मुझे यहां मां कामाख्या दिव्यलोक परियोजना का शिलान्यास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दिव्यलोक की जो कल्पना की गई है, मुझे उसके बारे में विस्तार से बताया गया है। जब ये बनकर पूरा होगा, तो ये देश और दुनिया भर से आने वाले मां के भक्तों को असीम आनंद से भर देगा। मां कामाख्या दिव्यलोक परियोजना के पूरा होने के बाद हर साल और ज्यादा श्रद्धालु यहां आकर दर्शन कर सकेंगे। और मैं देख रहा हूँ कि मां कामाख्या के दर्शन की संख्या जितनी ज्यादा बढ़ेगी उतना ही पूरे नॉर्थ-ईस्‍ट में ये टूरिज्‍म का प्रवेश द्वार बन जाएगा। जो भी यहां आएगा, पूरे नॉर्थ-ईस्‍ट के टूरिज्म की ओर बढ़ेगा। एक प्रकार से ये उसका प्रवेश द्वार बन जाने वाला है। इतना बड़ा काम इस दिव्‍यलोक के साथ जुड़ा हुआ है। मैं हिमंता जी और उनकी सरकार की इस शानदार प्रोजेक्ट के लिए सराहना करता हूं।

साथियों,

हमारे तीर्थ, हमारे मंदिर, हमारी आस्था के स्थान, ये सिर्फ दर्शन करने की ही स्थली है, ऐसा नहीं हैं। ये हज़ारों वर्षों की हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियां हैं। भारत ने हर संकट का सामना करते हुए कैसे खुद को अटल रखा, ये उसकी साक्षी हैं। हमने देखा है कि एक समय में जो सभ्यताएं बहुत समृद्ध हुआ करती थीं, आज उनके खंडहर ही बचे हैं। दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद जिन्होंने लंबे समय तक देश में सरकारें चलाईं, वो भी आस्था के इन पवित्र स्थानों का महत्व समझ नहीं पाए। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए अपनी ही संस्कृति, अपने ही अतीत पर शर्मिंदा होने का एक ट्रेंड बना दिया था। कोई भी देश, अपने अतीत को ऐसे मिटाकर, ऐसे भुलाकर, अपनी जड़ों को काटकर कभी विकसित नहीं हो सकता। मुझे संतोष है कि बीते 10 वर्षों में अब भारत में स्थितियां बदल गई हैं। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने विकास और विरासत को अपनी नीति का हिस्सा बनाया है। इसका परिणाम आज हम असम के अलग-अलग कोनों में भी देख रहे हैं। असम में आस्था, अध्यात्म और इतिहास से जुड़े सभी स्थानों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। विरासत को संजोने के इस अभियान के साथ ही विकास का अभियान भी उतनी ही तेजी से चल रहा है। बीते 10 वर्षों को देखें, तो हमने देश में रिकॉर्ड संख्या में कॉलेज बनाएं हैं, यूनिवर्सिटी बनाई हैं। पहले बड़े संस्थान सिर्फ बड़े शहरों में ही होते थे। हमने IIT, AIIMS, IIM जैसे संस्थानों का नेटवर्क पूरे देश में फैलाया है। बीते 10 वर्षों के दौरान देश में मेडिकल कॉलेज की संख्या करीब-करीब डबल हो चुकी है। असम में भी, भाजपा सरकार से पहले 6 मेडिकल कॉलेज थे, आज 12 मेडिकल कॉलेज हैं। असम आज नॉर्थ ईस्ट में कैंसर के इलाज का एक बहुत बड़ा केंद्र बन रहा है।

साथियों,

देशवासियों का जीवन आसान हो, ये हमारी सरकार की प्राथमिकता रही है। हमने 4 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों के पक्के घर बनाए हैं। हमने घर-घर पानी, घर-घर बिजली पहुंचाने का अभियान भी चलाया है। उज्ज्वला योजना ने आज असम की लाखों बहनों-बेटियों को धुएं से मुक्ति दी है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने शौचालयों ने असम की लाखों बहनों-बेटियों की गरिमा की रक्षा की है।

साथियों,

विकास और विरासत पर हमारे इस फोकस का सीधा लाभ देश के नौजवानों को हुआ है। आज देश में पर्यटन और तीर्थ यात्रा को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। काशी कॉरिडोर बनने के बाद, वहां रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बीते एक वर्ष में साढ़े आठ करोड़ लोग काशी गए हैं। 5 करोड़ से अधिक लोगों ने उज्जैन में महाकाल महालोक के दर्शन किए। 19 लाख से अधिक लोगों ने केदार धाम की यात्रा की है। अयोध्या धाम में प्राण प्रतिष्ठा को अभी कुछ ही दिन हुए हैं। 12 दिन में ही अयोध्या में 24 लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं। मां कामाख्या दिव्यलोक बनने के बाद यहां भी हम ऐसा ही दृश्य देखने वाले हैं।

साथियों,

जब तीर्थ यात्री आते हैं, श्रद्धालु आते हैं, तब गरीब से गरीब भी कमाता है। रिक्शे वाले हों, टैक्सी वाले हों, होटल वाले हों, रेहड़ी-पटरी वाले हों, सभी की आमदनी बढ़ती है। इसलिए इस वर्ष के बजट में भी हमने पर्यटन पर बहुत बल दिया है। केंद्र की भाजपा सरकार पर्यटन से जुड़े ऐतिहासिक स्थानों के विकास के लिए नया अभियान शुरू करने जा रही है। असम में, नॉर्थ ईस्ट में तो इसके लिए भरपूर संभावनाएं हैं। इसलिए भाजपा सरकार नॉर्थ ईस्ट के विकास पर विशेष जोर दे रही है।

साथियों,

बीते 10 वर्षों से नॉर्थ ईस्ट में रिकॉर्ड संख्या में टूरिस्ट आए हैं। आखिर ऐसे कैसे हुआ? ये पर्यटन के केंद्र, नॉर्थ ईस्ट के खूबसूरत इलाके तो पहले भी यहां थे। लेकिन तब इतने टूरिस्ट यहां नहीं आते थे। हिंसा के बीच, साधन-संसाधनों के अभाव के बीच, सुविधाओं की कमी के बीच, आखिर कौन यहां आना पसंद करता? आप भी जानते हैं कि 10 साल पहले असम समेत पूरे नॉर्थ ईस्ट में क्या स्थिति थी। पूरे नॉर्थ ईस्ट में रेल यात्रा और हवाई यात्रा, बहुत ही सीमित थी। सड़कें संकरी भी थी और खराब भी थी। एक राज्य से दूसरे राज्य में आना-जाना तो छोड़िए, एक जिले से दूसरे जिले में आने-जाने में भी कई-कई घंटे लग जाते थे। इन सारी परिस्थितियों को आज भाजपा की डबल इंजन सरकार ने, एनडीए सरकार ने बदला है।

साथियों,

पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार ने यहां विकास पर होने वाले खर्च को 4 गुणा बढ़ाया है। 2014 के बाद, रेलवे ट्रैक की लंबाई 1900 किलोमीटर से ज्यादा बढ़ाई गई। 2014 से पहले की तुलना में रेल बजट करीब-करीब 400 प्रतिशत बढ़ाया गया है। और तब तो प्रधानमंत्री आपके असम से चुन के जाते थे, उससे ज्यादा काम ये आपका साथी कर रहा है। 2014 तक यहां सिर्फ 10 हजार किलोमीटर नेशनल हाइवे हुआ करते थे। पिछले 10 वर्षों में ही हमने 6 हजार किलोमीटर के नए नेशनल हाईवे बनाए हैं। आज, दो और नई सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ है। इससे अब ईटानगर तक कनेक्टिविटी औऱ बेहतर होगी, आप सभी लोगों की मुश्किलें और कम होंगी।

साथियों,

आज पूरा देश कह रहा है कि मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी। मैंने गरीबों को, महिलाओं को, युवा और किसान को मूल सुविधा देने की गारंटी दी है। आज इनमें से अधिकतर गारंटियां पूरी हो रही हैं। हमने विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान भी देखा है। जो भी सरकारी योजनाओं से वंचित थे, उन तक पहुंचने के लिए मोदी की गारंटी वाली गाड़ी पहुंची है। पूरे देश में करीब-करीब 20 करोड़ लोग सीधे तौर पर विकसित भारत संकल्प यात्रा में शामिल हुए हैं। बड़ी संख्या में असम के लोगों को भी इस यात्रा का लाभ मिला है।

साथियों,

भाजपा की डबल इंजन सरकार हर लाभार्थी तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य हर नागरिक का जीवन आसान बनाने का है। यही फोकस, 3 दिन पहले जो बजट आया है, उसमें भी दिखता है। बजट में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का संकल्प लिया है। ये कितनी बड़ी राशि है, इसका अनुमान एक और आंकड़े से लगाया जा सकता है। 2014 से पहले के 10 वर्षों में, ये आंकड़ा याद रखना मेरे भाई-बहन, 2014 के पहले 10 वर्षों में कुल 12 लाख करोड़ रुपए इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट रहा, 10 साल में 12 लाख करोड़। यानि जितना पहले की केंद्र सरकार ने अपने 10 साल में खर्च किया था, करीब-करीब उतनी राशि हमारी सरकार अगले एक साल में खर्च करने जा रही है। आप कल्पना कर सकते हैं कि देश में कितने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य होने जा रहा है। और जब इतनी बड़ी राशि निर्माण कार्यों में लगती है तो नए रोजगार बनते हैं, उद्योगों को नई गति मिलती है।

साथियों,

इस बजट में एक और बहुत बड़ी योजना की घोषणा हुई है। बीते 10 वर्षों में हमने हर घर तक बिजली पहुंचाने का अभियान चलाया। अब हम बिजली का बिल, असम के भाइयों-बहनों और देशवासी भी, मैं बहुत महत्वपूर्ण काम आपके सामने रख रहा हूँ, अब बिजली का बिल भी ज़ीरो करने के लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। बजट में सरकार ने रूफटॉप सोलर की बहुत बड़ी योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत प्रारम्भ में एक करोड़ परिवारों को सोलर रूफ टॉप लगाने के लिए सरकार मदद करेगी। इस से उनका बिजली का बिल भी ज़ीरो होगा और साथ ही सामान्य परिवार अपने घर पर बिजली पैदा करके, बिजली बेचकर के कमाई भी करेगा।

साथियों,

मैंने देश की 2 करोड़ बहनों को लखपति बनाने की गारंटी दी थी। बीते वर्षों में जब मैंने हिसाब-किताब लगाना शुरू किया तो मुझे प्राथमिक जानकारी मिली हैं की अब तक हमारी 1 करोड़ बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। हमारे देश में सेल्‍फ हेल्‍प ग्रुप में काम करने वाली 1 करोड़ बहनें जब लखपति दीदी बनती हैं तो नीचे धरती कितनी बदल जाती है दोस्तों। अब इस बजट में हमने लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को और बढ़ा दिया है। अब 2 करोड़ के बजाय 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाया जाएगा। इसका लाभ असम की मेरी हज़ारों-लाखो बहनों को भी ज़रूर होने वाला है। यहां स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सभी बहनों के लिए अवसर ही अवसर आने वाले हैं और इतनी बड़ी माताएं-बहनों यहां आई हैं, जरूर उसमें भी मेरी लखपति दीदी आई ही होंगी। हमारी सरकार इस बजट में आंगनवाड़ी और आशा बहनों को भी अब आयुष्मान योजना के दायरे में ले आई है। इससे उन्हें भी अब 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिल गई है। जब बहनों-बेटियों का जीवन आसान बनाने वाली सरकार हो, संवेदनशीलता से काम होता है।

भाइयों और बहनों,

मोदी जो गारंटी देता है न उसे पूरा करने के लिए दिन-रात एक करने का हौसला भी रखता है। इसलिए आज नॉर्थ ईस्ट को मोदी की गारंटी पर भरोसा है। आज असम में देखिए, सालों-साल से जो इलाके अशांत थे, वहां अब स्थाई शांति स्थापित हो रही है। राज्यों के बीच सीमा विवाद हल हो रहे हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद यहां 10 से ज्यादा बड़े शांति समझौते हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में नॉर्थ ईस्ट में हजारों युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास का रास्ता चुना है। मैंने कई वर्षों तक असम में मेरी पार्टी के संगठन का काम किया है। मैं यहां हर इलाके में घुमा हुआ इंसान हूँ और मुझे याद है उस समय जाने-आने में एक रुकावट ये होती थी कि रोड ब्लॉक के कार्यक्रम, बंद के कार्यक्रम और गुवाहाटी तक के अंदर बम ब्लास्ट की घटनाएं मैं अपनी आंखों से देखता था। आज वो भूतकाल बनता चला गया है दोस्तों, लोग शांति से जी रहे हैं। असम के 7 हजार से ज्यादा नौजवानों ने भी हथियार छोड़े हैं, देश के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया है। कई जिलों में AFSPA हटाया गया है। जो क्षेत्र हिंसा प्रभावित रहे हैं, आज वो अपनी आकांक्षाओं के अनुसार अपना विकास कर रहे हैं और सरकार उनकी पूरी मदद कर रही है।

साथियों,

छोटे लक्ष्य रखकर कोई भी देश, कोई राज्य, तेज विकास नहीं कर सकता। पहले की सरकारें ना बड़े लक्ष्य तय करती थीं और ना ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उतनी मेहनत करती थीं। हमने पहले की सरकारों की इस सोच को भी बदल दिया है। मैं नॉर्थ ईस्ट को उसी तरह विकसित होते देख रहा हूं, जैसा पूर्वी एशिया को दुनिया देखती है। आज नॉर्थ ईस्ट होते हुए, दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया की कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। आज यहां साउथ एशिया सब-रीजनल इकॉनॉमिक कोऑपरेशन, उसके कोऑपरेशन के तहत भी अनेक सड़कों को अपग्रेड करने का काम शुरू हुआ है। आप कल्पना कीजिए, जब कनेक्टिविटी के ऐसे सभी प्रोजेक्ट पूरे होंगे, तो ये हिस्सा व्यापार-कारोबार का कितना बड़ा केंद्र बनेगा। मैं जानता हूं कि असम के, नॉर्थ ईस्ट के हर युवा का भी यही सपना है कि वो भी पूर्वी एशिया जैसा विकास यहां देखें। मैं असम के, नॉर्थ ईस्ट के हर युवा को बताना चाहता हूं- मेरा युवा साथियों, आपका सपना, आपका सपना मोदी का संकल्प है। और आपके सपने पूरे हों, इसके लिए मोदी अपनी तरफ से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा। और ये मोदी की गारंटी है।

भाइयों और बहनों,

ये जो भी काम आज हो रहे हैं, इनका एक ही लक्ष्य है। लक्ष्य है, भारत और भारतीयों का सुखी और समृद्ध जीवन। लक्ष्य है, भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने का। लक्ष्य है, 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का। इसमें असम की, नॉर्थ ईस्ट की बहुत बड़ी भूमिका है। एक बार फिर आप सभी को इन विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई। और अब तो मां कामाख्या के आशीर्वाद बहुत बढ़ने वाले हैं, बहुत बढ़ने वाले हैं। और इसलिए मैं भव्य, दिव्य असम की तस्‍वीर साकार होती देख रहा हूँ साथियों। आपके सपने पूरे होंगे, ये हम अपनी आंखों से देखेंगे, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ। फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। दोनों हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!