“भारत की फिनटेक क्रांति वित्तीय समावेशन को बेहतर बनाने के साथ-साथ नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है”
“भारत की फिनटेक विविधता सभी को चकित कर रही है”
“जन धन योजना का वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में प्रमुख योगदान है”
“यूपीआई भारत की फिनटेक सफलता का एक अच्छा उदाहरण है”
“जन धन कार्यक्रम ने महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला रखी है”
“भारत में फिनटेक द्वारा लाया गया परिवर्तन केवल प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सामाजिक प्रभाव भी दूरगामी है”
“फिनटेक ने वित्तीय सेवाओं के लोकतंत्रीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है”
“भारत का फिनटेक इकोसिस्टम पूरी दुनिया के जीवन को आसान बनाएगा, हमारा सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है”

नमस्कार!

RBI के गवर्नर श्रीमान शक्तिकांत दास जी, क्रिस गोपालकृष्णन जी, मेम्बर्स ऑफ रेग्यूलेटर्स, फाइनेंस इंडस्ट्री के लीडर्स, फिनटेक और स्टार्ट-अप वर्ल्ड के मेरे साथी, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

ये भारत में त्योहारों का मौसम है, अभी-अभी जन्माष्टमी हमने मनाई हैं। और खुशी देखिए हमारी इकोनॉमी और हमारे मार्केट में भी उत्सव का माहौल है। इस फेस्टिव मूड में, ये ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल हो रहा है। औऱ वो भी सपनों की नगरी मुंबई में। मैं देश और दुनिया से यहां आए सभी मेहमानों का, अभिनंदन करता हूं, स्वागत करता हूं। यहां से आने से पहले मैं अलग-अलग एक्जीबीशन्स देखकर के आया हूं, काफी साथियों से गप्पे लगाकर करके आया हूं। हमारे नौजवानों के इनोवेशन का और फ्यूचर की संभावनाओं का एक पूरा नया संसार वहां दिखाई दे रहा है। चलिए आपके काम के लिए मैं शब्द बदलता हूं, एक पूरी नई दुनिया दिखाई दे रही है। मैं इस फेस्टिवल के आयोजकों को, सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

यहां बड़ी संख्या में विदेशों से हमारे मेहमान भी आए हैं। एक समय था, जब लोग भारत आते थे, तो हमारी Cultural Diversity देखकर दंग रह जाते थे, हैरान हो जाते थे। अब लोग भारत आते हैं, तो हमारी Fintech Diversity को देखकर भी हैरान होते हैं। एयरपोर्ट पर land करने से लेकर street food और shopping experience तक, भारत की फिनटेक क्रांति चारों तरफ दिखती है। पिछले 10 साल में फिनटेक स्पेस में 31 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ है। 10 साल में हमारे फिनटेक स्टार्टअप्स में 500 परसेंट वृद्धि हुई है। सस्ते मोबाइल फोन, सस्ते डेटा और ज़ीरो बैलेंस जनधन बैंक खातों ने भारत में कमाल कर दिया है। आपको याद होगा, कुछ लोग पहले पूछते थे, पार्लियामेंट में खड़े होकर के पूछते थे और अपने आप को बहुत विद्वान मानने वाले लोग पूछते थे। सरस्वती जब बुद्धि बाँट रही थी तो वो रास्ते में पहले ही खड़े थे। और क्या कहते थे?, वो पूछते थे कि भारत में बैंक, इतनी ब्रांचेस नहीं हैं, गांव-गांव बैंक available नहीं है। इंटरनेट नहीं है, यहां तक पूछ लेते थे-बिजली भी तो नहीं है, recharging कहाँ होगा, फिनटेक क्रांति कैसे होगी? ये पूछा जाता था और मुझ जैसे चाय वाले को पूछा जाता था। लेकिन आज देखिए एक दशक में ही भारत में ब्रॉडबैंड यूज़र- 60 मिलियन यानि 6 करोड़ से बढ़कर 940 मिलियन यानि करीब 94 करोड़ हो गए हैं। आज 18 वर्ष से ऊपर का शायद ही कोई भारतीय हो, जिसके पास उसकी डिजिटल आइडेन्टिटी, आधार कार्ड नहीं है। आज 530 मिलियन यानि 53 करोड़ से अधिक लोगों के पास जनधन बैंक खाते हो गए हैं। यानि 10 साल में हमने एक प्रकार से पूरी यूरोपियन यूनियन के बराबर आबादी को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा है।

साथियों,

जनधन-आधार-मोबाइल की इस त्रिनिटी ने एक और ट्रांसफॉर्मेशन को गति दी है। कभी लोग कहते थे कि Cash is King. आज दुनिया का करीब-करीब आधा रियल टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में होता है। पूरी दुनिया में भारत का UPI फिनटेक का बहुत बड़ा उदाहरण बन गया है। आज गांव हो या शहर, सर्दी हो या गर्मी, बारिश हो या बर्फ गिर रही हो, भारत में बैकिंग सर्विस 24 घंटे, सातों दिन, 12 महीने चलती रहती है। कोरोना के इतने बड़े संकट के दौरान भी भारत दुनिया के उन देशों में था, जहां हमारी बैंकिंग सर्विस बिना किसी दिक्कत के चलती रही।

साथियों,

अभी 2-3 दिन पहले ही जनधन योजना के 10 साल पूरे हुए हैं। जनधन योजना, Women Empowerment का बहुत बड़ा माध्यम बनी है। जनधन योजना के चलते करीब 290 मिलियन यानि 29 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खाते खुले हैं। इन खातों में महिलाओं के लिए सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट्स के लिए नए अवसर बनाए हैं। इन्हीं जनधन खातों की philosophy पर हमने माइक्रोफाइनेंस की सबसे बड़ी स्कीम, मुद्रा लॉन्च की। इस स्कीम से अभी तक 27 ट्रिलियन रुपए से अधिक का क्रेडिट दिया जा चुका है, 27 ट्रिलियन। इस स्कीम की करीब 70 परसेंट बेनिफिशरी महिलाएं हैं। जनधन खातों ने महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को भी बैंकिंग से जोड़ा। इसका फायदा आज देश की 10 करोड़ rural women को मिल रहा है। यानि जनधन प्रोग्राम ने, महिलाओं के financial empowerment की एक मज़बूत नींव रखी है।

साथियों,

पूरी दुनिया के लिए parallel economy एक बड़ी चिंता का विषय रही है। फिनटेक ने parallel economy पर भी चोट की है और बधाई के पात्र आप लोग हैं। आपने ये भी देखा है कि कैसे हम भारत में डिजिटल टेक्नॉलॉजी से ट्रांसपेरेंसी लेकर आए हैं। आज सरकार की सैकड़ों स्कीम्स के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर किया जाता है। इससे सिस्टम से लीकेज बंद हुई है। आज लोगों को फॉर्मल सिस्टम से जुड़ने में अपना लाभ नज़र आता है।

साथियों,

भारत में फिनटेक की वजह से जो transformation आया है, वो सिर्फ technology तक ही सीमित नहीं है। इसका social impact बहुत व्यापक है। इससे गांव और शहर की खाई को ब्रिज करने में मदद मिल रही है। कभी हमारे यहां, बैंक की सर्विस लेने में ही एक पूरा दिन लग जाता था। एक किसान के लिए, एक मछुआरे के लिए, एक मिडिल क्लास परिवार के लिए ये बहुत बड़ी मुसीबत थी। फिनटेक ने इस समस्या को दूर किया। कभी बैंक सिर्फ एक बिल्डिंग तक सीमित हुआ करते थे। आज बैंक हर भारतीय के मोबाइल में सिमट गए हैं।

साथियों,

फिनटेक ने financial service को democratic बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। Loan, क्रेडिट कार्ड, investment, insurance जैसे प्रोडक्ट, सबके लिए आसानी से सुलभ हो रहे हैं। फिनटेक ने Access To Credit को भी आसान और inclusive बना दिया है। मैं एक उदाहरण देता हूं। आप जानते हैं भारत में street vendors की एक पुरानी परंपरा है। लेकिन वो फॉर्मल बैंकिंग से बाहर थे। फिनटेक ने इस स्थिति को भी बदल दिया है। आज वो पीएम स्वनिधि योजना से Collateral Free Loan ले पा रहे हैं, डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड के आधार पर उनको बिजनेस बढ़ाने के लिए और लोन मिलता रहता है। कभी शेयर और म्यूच्यल फंड जैसे, प्रोडक्ट्स में इन्वेस्टमेंट, बड़े शहरों में ही संभव था। आज गांव और कस्बों में भी इन्वेस्टमेंट के इस avenue को बड़ी संख्या में explore किया जा रहा है। आज कुछ ही मिनटों में घर बैठे ही डीमैट अकाउंट खुल रहे हैं, इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट्स ऑनलाइन मिल रही है। आज बड़ी संख्या में भारतीय रिमोट हेल्थकेयर सर्विस ले रहे हैं, डिजिटली, ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं, स्किल्स सीख रहे हैं, ये भी फिनटेक्स के बिना संभव नहीं था। यानि भारत की फिनटेक क्रांति, Dignity of Life, Quality of Life उसको बेहतर बनाने में भी बड़ा रोल निभा रही है।

साथियों,

भारत की फिनटेक क्रांति की उपलब्धि सिर्फ इनोवेशन्स के लिए ही नहीं है, बल्कि adoption लेकर के भी है। भारत की जनता ने, जिस स्पीड और स्केल पर फिनटेक को adopt किया है, उसका उदाहरण कहीं और नहीं मिल सकता। इसका एक बड़ा क्रेडिट हमारे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर-DPI को भी जाता है और हमारे फिनटेक्स को भी जाता है। देश में इस टेक्नॉलॉजी को लेकर ट्रस्ट पैदा करने के लिए अद्भुत इनोवेशन किए गए हैं। QR Codes के साथ-साथ साउंड बॉक्स का उपयोग, ऐसा ही इनोवेशन है। हमारे फिनटेक सेक्टर को सरकार के बैंक सखी कार्यक्रम का भी अध्ययन करना चाहिए। और मैं सब फिनटेक वाले नौजवानों को कहना चाहता हूं ये बैंक सखी है क्या? मैं अभी जलगांव आया था एक दिन तो मैं ऐसे ही बहन सखियों से मिला तो बड़े गर्व से कहती है कि मैं एक दिन डेढ़ करोड़ रूपए का कारोबार करती हूं। क्या confidence, और एक गाँव की महिला थी वो। हमारी बेटियों ने गांव-गांव में बैंकिंग को, digital awareness को जिस प्रकार फैलाया है, उससे फिनटेक को एक नया बाज़ार मिला है।

साथियों,

21वीं सदी की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। करेंसी से QR कोड्स तक की यात्रा में सदियां लग गईं, लेकिन अब हर रोज हम नए इनोवेशन देख रहे हैं। Digital Only Banks और Neo-Banking जैसे कॉन्सेप्ट हमारे सामने हैं। Digital Twins जैसी टेक्नॉलॉजी डेटा आधारित बैंकिंग को next level पर ले जा रही है। इससे risk management, fraud detection और customer experience, सब कुछ बदलने वाले हैं। मुझे खुशी है कि भारत भी लगातार नए Fintech Products launch कर रहा है। हम ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार कर रहे हैं, जो local हैं, लेकिन उनकी application global है। आज ONDC यानि Open Network For Digital Commerce, online shopping को inclusive बना रहा है। ये छोटे बिजनेस, छोटे enterprises को बड़े अवसरों से जोड़ रहा है। Account एग्रीगेटर्स, लोगों और कंपनियों का कामकाज आसान करने के लिए डेटा को यूज़ कर रहे हैं। ट्रेड्स Platform की मदद से छोटी संस्थाओं की liquidity और cash flow बेहतर हो रहे हैं। E-rupi एक ऐसा डिजिटल वाउचर बना है, जिसे कई रूपों में इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत के ये products विश्व के दूसरे देशों के लिए भी उतने ही उपयोगी हैं। और इसी सोच के साथ हमने G-20 Presidency के दौरान Global Digital Public Infrastructure रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे G-20 मेंबर्स ने खुले दिल से स्वीकार किया था। मैं AI के दुरुपयोग से जुड़ी आपकी चिंताओं को भी समझता हूं। इसलिए, भारत ने AI के ethical use के लिए Global Framework बनाने का भी आह्वान किया है।

साथियों,

फिनटेक सेक्टर की मदद के लिए सरकार पॉलिसी लेवल पर हर ज़रूरी बदलाव कर रही है। हाल में हमने Angel Tax को हटाया है। ठीक नहीं किया? नहीं। ठीक किया है ना? हमने देश में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक लाख करोड़ रुपए का फंड बनाने की घोषणा की है। हमने डेटा प्रोटेक्शन कानून बनाया है। मेरी हमारे रेगुलेटर्स से भी कुछ अपेक्षाएं हैं। हमें Cyber Fraud को रोकने के लिए और Digital Literacy के लिए और बड़े कदम उठाने होंगे। Cyber Fraud स्टार्ट अप्स की, Fin-Techs की ग्रोथ में रुकावट न बनें, ये ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है।

साथियों,

पहले के जमाने में बैंक डूबने वाली है या बैंक डूबी है या डूब जाएगी, ये बात फैलते हुए impact होते-होते 5-7 दिन निकल जाते थे। आज अगर किसी व्यवस्था में पता चला कि इस पर cyber fraud है, एक मिनट में मामला पूरा, वो कंपनी गई। फिनटेक के लिए बहुत जरूरी है। और cyber solution उसकी बालमृत्यु बहुत जल्दी हो जाती है। कोई भी cyber solution निकालिए उसका बेईमान लोग तोड़ निकालने में देर नहीं करते, तो उस solution की बालमृत्यु हो जाती है, फिर आपको नया solution लेकर आना पड़ता है।

साथियों,

आज Sustainable Economic Growth ये भारत की प्राथमिकता है। हम strong, transparent, और efficient systems बना रहे हैं। हम Financial Markets को advanced technologies regulatory frameworks से मजबूत कर रहे हैं। हम Green Finance से sustainable growth को सपोर्ट कर रहे हैं। हम financial inclusion के, उस inclusion के saturation पर बल दे रहे हैं। मुझे विश्वास है भारत का फिनटेक इकोसिस्टम, भारत के लोगों को quality lifestyle, देने के मिशन में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। मुझे विश्वास है भारत का फिनटेक इकोसिस्टम, पूरी दुनिया की ease of living बढ़ाएगा। और मुझे मेरे देश के युवाओं के टेलेंट पर इतना भरोसा है, इतना भरोसा है और मैं कहता हूं, बड़े विश्वास से कहता हूं – Our Best Is Yet To Come.

ये आपका 5वां समारोह है ना...तो 10वें में मैं आऊंगा। और तब आपने भी कल्पना नहीं की होगी, वहां पर आप भी पहुंचे होंगे दोस्तों। आज अभी मैं आपके कुछ स्टार्ट-अप्स यूनिट वालों को मिला, सबसे तो नहीं मिल पाया, लेकिन कुछ लोगों से मिला। लेकिन हर एक को 10-10 होमवर्क देकर के आया हूं, क्योंकि मैं समझ सकता हूं कि ये बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला क्षेत्र है साथियों। एक बहुत बड़ा revolution हो रहा है और उसकी मजबूत नींव यहां हम देख रहे हैं। इसी भरोसे के साथ, आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं! बहुत बहुत धन्यवाद!

ये कृष्णगोपाल जी के कहने पर हमने फोटो निकाली, लेकिन आपको लगेगा इसका क्या मतलब है, मैं फायदा बताता हूं– मैं AI की दुनिया से जुड़ा हुआ इंसान हूं, तो आप अगर नमो ऐप पर जाएंगे तो नमो ऐप पर फोटो डिवीजन पर जाएंगे, वहां अपनी सेल्फी रखेंगे और आज कहीं पर भी आप मेरे साथ नजर आते हैं तो आपको अपनी वो फोटो मिल जाएगी।

Thank You!

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नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!