संत रविदास की नई प्रतिमा का अनावरण किया
संत रविदास जन्म स्थली के आसपास विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास किया
संत रविदास संग्रहालय और पार्क के सौंदर्यीकरण की आधारशिला रखी
"भारत का इतिहास रहा है, जब भी देश को जरूरत हुई है, कोई न कोई संत, ऋषि, महान विभूति भारत में जन्म लेते हैं"
"संत रविदास जी भक्ति आंदोलन के महान संत थे, जिन्होंने कमजोर और विभाजित भारत को नई ऊर्जा दी"
"संत रविदास जी ने समाज को आज़ादी का महत्व बताया और सामाजिक विभाजन को पाटने का भी काम किया"
“रविदास जी सबके हैं और सब रविदास जी के हैं”
"सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर चलते हुए संत रविदास जी की शिक्षाओं और आदर्शों को आगे बढ़ा रही है"
"हमें जातिवाद की नकारात्मक मानसिकता से बचना होगा और संत रविदास जी की सकारात्मक शिक्षाओं का पालन करना होगा"

जय गुरु रविदास।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, पूरे भारत से यहां पधारे सम्मानित संत जन, भक्त गण और मेरे भाइयों एवं बहनों,

आप सभी का मैं गुरु रविदास जी जन्म जयंती के पावन अवसर पर उनकी जन्मभूमि में स्वागत करता हूँ। आप सब रविदास जी की जयंती के पर्व पर इतनी-इतनी दूर से यहां आते हैं। खासकर, मेरे पंजाब से इतने भाई-बहन आते हैं कि बनारस खुद भी ‘मिनी पंजाब’ जैसा लगने लगता है। ये सब संत रविदास जी की कृपा से ही संभव होता है। मुझे भी रविदास जी बार बार अपनी जन्मभूमि पर बुलाते हैं। मुझे उनके संकल्पों को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, उनके लाखों अनुयायियों की सेवा का अवसर मिलता है। गुरु के जन्मतीर्थ पर उनके सब अनुयायियों की सेवा करना मेरे लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं।

और भाइयों और बहनों,

यहां का सांसद होने के नाते, काशी का जन-प्रतिनिधि होने के नाते मेरी विशेष ज़िम्मेदारी भी बनती है। मैं बनारस में आप सबका स्वागत भी करूं, और आप सबकी सुविधाओं का खास ख्याल भी रखूं, ये मेरा दायित्व है। मुझे खुशी है कि आज इस पावन दिन मुझे अपने इन दायित्वों को पूरा करने का अवसर मिला है। आज बनारस के विकास के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास होने जा रहा है। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा और सुखद और सरल होगी। साथ ही, संत रविदास जी की जन्मस्थली के विकास के लिए भी कई करोड़ रुपए की योजनाओं का लोकार्पण हुआ है। मंदिर और मंदिर क्षेत्र का विकास, मंदिर तक आने वाली सड़कों का निर्माण, इंटरलॉकिंग और ड्रेनेज का काम, भक्तों के लिए सत्संग और साधना करने के लिए, प्रसाद ग्रहण करने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं का निर्माण, इन सबसे आप सब लाखों भक्तों को सुविधा होगी। माघी पूर्णिमा की यात्रा में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक सुख तो मिलेगा ही, उन्हें कई परेशानियों से भी छुटकारा मिलेगा। आज मुझे संत रविदास जी की नई प्रतिमा के लोकार्पण का सौभाग्य भी मिला है। संत रविदास म्यूज़ियम की आधारशिला भी आज रखी गई है। मैं आप सभी को इन विकास कार्यों की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूं। मैं देश और दुनिया भर के सभी श्रद्धालुओं को संत रविदास जी की जन्मजयंती और माघी पूर्णिमा की हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

आज महान संत और समाज सुधारक गाडगे बाबा की जयंती भी है। गाडगे बाबा ने संत रविदास की ही तरह समाज को रूढ़ियों से निकालने के लिए, दलितों वंचितों के कल्याण के लिए बहुत काम किया था। खुद बाबा साहब अंबेडकर उनके बहुत बड़े प्रशंसक थे। गाडगे बाबा भी बाबा साहब से बहुत प्रभावित रहते थे। आज इस अवसर पर मैं गाडगे बाबा के चरणों में भी श्रद्धापूवर्क नमन करता हूं।

साथियों,

अभी मंच पर आने से पहले मैं संत रविदास जी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित करने, उन्हें प्रणाम करने भी गया था। इस दौरान मेरा मन जितनी श्रद्धा से भरा था, उतनी ही कृतज्ञता भी भीतर महसूस कर रहा था। वर्षों पहले भी, जब मैं न राजनीति में था, न किसी पद पर था, तब भी संत रविदास जी की शिक्षाओं से मुझे मार्गदर्शन मिलता था। मेरे मन में ये भावना होती थी कि मुझे रविदास जी की सेवा का अवसर मिले। और आज काशी ही नहीं, देश की दूसरी जगहों पर भी संत रविदास जी से जुड़े संकल्पों को पूरा किया जा रहा है। रविदास जी की शिक्षाओं को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए नए केन्द्रों की स्थापना भी हो रही है। अभी कुछ महीने पहले ही मुझे मध्यप्रदेश के सतना में भी संत रविदास स्मारक एवं कला संग्रहालय के शिलान्यास का सौभाग्य भी मिला था। काशी में तो विकास की पूरी गंगा ही बह रही है।

साथियों,

भारत का इतिहास रहा है, जब भी देश को जरूरत हुई है, कोई न कोई संत, ऋषि, महान विभूति भारत में जन्म लेते हैं। रविदास जी तो उस भक्ति आंदोलन के महान संत थे, जिसने कमजोर और विभाजित हो चुके भारत को नई ऊर्जा दी थी। रविदास जी ने समाज को आज़ादी का महत्व भी बताया था, और सामाजिक विभाजन को भी पाटने का काम किया था। ऊंच-नीच, छुआछूत, भेदभाव, इस सबके खिलाफ उन्होंने उस दौर में आवाज़ उठाई थी। संत रविदास एक ऐसे संत हैं, जिन्हें मत मजहब, पंथ, विचारधारा की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। रविदास जी सबके हैं, और सब रविदास जी के हैं। जगद्गुरु रामानन्द के शिष्य के रूप में उन्हें वैष्णव समाज भी अपना गुरु मानता है। सिख भाई-बहन उन्हें बहुत आदर की दृष्टि से देखते हैं। काशी में रहते हुए उन्होंने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की शिक्षा दी थी। इसलिए, काशी को मानने वाले लोग, मां गंगा में आस्था रखने वाले लोग भी रविदास जी से प्रेरणा लेते हैं। मुझे खुशी है कि आज हमारी सरकार रविदास जी के विचारों को ही आगे बढ़ा रही है। भाजपा सरकार सबकी है। भाजपा सरकार की योजनाएं सबके लिए हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’, ये मंत्र आज 140 करोड़ देशवासियों से जुड़ने का मंत्र बन गया है।

साथियों,

रविदास जी ने समता और समरसता की शिक्षा भी दी, और हमेशा दलितों, वंचितों की विशेष रूप से चिंता भी की। समानता वंचित समाज को प्राथमिकता देने से ही आती है। इसीलिए, जो लोग, जो वर्ग विकास की मुख्यधारा से जितना ज्यादा दूर रह गए, पिछले दस वर्षों में उन्हें ही केंद्र में रखकर काम हुआ है। पहले जिस गरीब को सबसे आखिरी समझा जाता था, सबसे छोटा कहा जाता था, आज सबसे बड़ी योजनाएं उसी के लिए बनी हैं। इन योजनाओं को आज दुनिया में सबसे बड़ी सरकारी योजनाएं कहा जा रहा है। आप देखिए, कोरोना की इतनी बड़ी मुश्किल आई। हमने 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन की योजना चलाई। कोरोना के बाद भी हमने मुफ्त राशन देना बंद नहीं किया। क्योंकि, हम चाहते हैं कि जो गरीब अपने पैरों पर खड़ा हुआ है वो लंबी दूरी तय करे। उस पर अतिरिक्त बोझ न आए। ऐसी योजना इतने बड़े पैमाने पर दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। हमने स्वच्छ भारत अभियान चलाया। देश के हर गांव में हर परिवार के लिए मुफ्त शौचालय बनाया। इसका लाभ सबसे ज्यादा दलित पिछड़े परिवारों को, खासकर हमारी SC, ST, OBC माताओं बहनों को ही हुआ। इन्हें ही सबसे ज्यादा खुले में शौच के लिए जाना पड़ता था, परेशानियां उठानी पड़ती थीं। आज देश के गांव- गांव तक साफ पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन चल रहा है। 5 वर्षों से भी कम समय में 11 करोड़ से ज्यादा घरों तक पाइप से पानी पहुंचाया गया है। करोड़ों गरीबों को मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड मिला है। उन्हें पहली बार ये हौसला मिला है कि अगर बीमारी आ भी गई, तो इलाज के अभाव में जिंदगी खत्म नहीं होगी। इसी तरह, जनधन खातों से गरीब को बैंक जाने का अधिकार मिला है। इन्हीं बैंक खातों में सरकार सीधे पैसा भेजती है। इन्हीं खातों में किसानों को किसान सम्मान निधि जाती है, जिनमें से करीब डेढ़ करोड़ लाभार्थी हमारे दलित किसान ही हैं। फसल बीमा योजना का लाभ उठाने वाले किसानों में बड़ी संख्या दलित और पिछड़े किसानों की ही है। युवाओं के लिए भी, 2014 से पहली जितनी स्कॉलर्शिप मिलती थी, आज हम उससे दोगुनी स्कॉलर्शिप दलित युवाओं को दे रहे हैं। इसी तरह, 2022-23 में पीएम आवास योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए दलित परिवारों के खातों में भेजे गए, ताकि उनका भी अपना पक्‍का घर हो।

और भाइयों बहनों,

भारत इतने बड़े-बड़े काम इसलिए कर पा रहा है क्योंकि आज दलित, वंचित, पिछड़ा और गरीब के लिए सरकार की नीयत साफ है। भारत ये काम इसलिए कर पा रहा है, क्योंकि आपका साथ और आपका विश्वास हमारे साथ है। संतों की वाणी हर युग में हमें रास्ता भी दिखाती हैं, और हमें सावधान भी करती हैं।

रविदास जी कहते थे-

जात पात के फेर महि, उरझि रहई सब लोग।

मानुष्ता कुं खात हई, रैदास जात कर रोग॥

अर्थात्, ज़्यादातर लोग जात-पांत के भेद में उलझे रहते हैं, उलझाते रहते हैं। जात-पात का यही रोग मानवता का नुकसान करता है। यानी, जात-पात के नाम पर जब कोई किसी के साथ भेदभाव करता है, तो वो मानवता का नुकसान करता है। अगर कोई जात-पात के नाम पर किसी को भड़काता है तो वो भी मानवता का नुकसान करता है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

आज देश के हर दलित को, हर पिछड़े को एक और बात ध्यान रखनी है। हमारे देश में जाति के नाम पर उकसाने और उन्हें लड़ाने में भरोसा रखने वाले इंडी गठबंधन के लोग दलित, वंचित के हित की योजनाओं का विरोध करते हैं। और सच्चाई ये है कि ये लोग जाति की भलाई के नाम पर अपने परिवार के स्वार्थ की राजनीति करते हैं। आपको याद होगा, गरीबों के लिए शौचालय बनाने की शुरुआत हुई थी तो इन लोगों ने उसका मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने जनधन खातों का मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने डिजिटल इंडिया का विरोध किया था। इतना ही नहीं, परिवारवादी पार्टियों की एक और पहचान है। ये अपने परिवार से बाहर किसी भी दलित, आदिवासी को आगे बढ़ते नहीं देना चाहते हैं। दलितों, आदिवासियों का बड़े पदों पर बैठना इन्हें बर्दाश्त नहीं होता है। आपको याद होगा, जब देश ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के लिए महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी चुनाव लड़ रही थीं, तो किन किन लोगों ने उनका विरोध किया था? किन किन पार्टियों ने उन्हें हराने के लिए सियासी लामबंदी की थी? वे सब की सब यही परिवारवादी पार्टियां ही थीं, जिन्हें चुनाव के समय दलित, पिछड़ा, आदिवासी अपना वोट बैंक नज़र आने लगता है। हमें इन लोगों से, इस तरह की सोच से सावधान रहना है। हमें जातिवाद की नकारात्मक मानसिकता से बचकर रविदास जी की सकारात्मक शिक्षाओं का पालन करना है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

आज देश के हर दलित को, हर पिछड़े को एक और बात ध्यान रखनी है। हमारे देश में जाति के नाम पर उकसाने और उन्हें लड़ाने में भरोसा रखने वाले इंडी गठबंधन के लोग दलित, वंचित के हित की योजनाओं का विरोध करते हैं। और सच्चाई ये है कि ये लोग जाति की भलाई के नाम पर अपने परिवार के स्वार्थ की राजनीति करते हैं। आपको याद होगा, गरीबों के लिए शौचालय बनाने की शुरुआत हुई थी तो इन लोगों ने उसका मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने जनधन खातों का मज़ाक उड़ाया था। इन्होंने डिजिटल इंडिया का विरोध किया था। इतना ही नहीं, परिवारवादी पार्टियों की एक और पहचान है। ये अपने परिवार से बाहर किसी भी दलित, आदिवासी को आगे बढ़ते नहीं देना चाहते हैं। दलितों, आदिवासियों का बड़े पदों पर बैठना इन्हें बर्दाश्त नहीं होता है। आपको याद होगा, जब देश ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के लिए महामहिम द्रौपदी मुर्मू जी चुनाव लड़ रही थीं, तो किन किन लोगों ने उनका विरोध किया था? किन किन पार्टियों ने उन्हें हराने के लिए सियासी लामबंदी की थी? वे सब की सब यही परिवारवादी पार्टियां ही थीं, जिन्हें चुनाव के समय दलित, पिछड़ा, आदिवासी अपना वोट बैंक नज़र आने लगता है। हमें इन लोगों से, इस तरह की सोच से सावधान रहना है। हमें जातिवाद की नकारात्मक मानसिकता से बचकर रविदास जी की सकारात्मक शिक्षाओं का पालन करना है।

साथियों,

रविदास जी कहते थे-

सौ बरस लौं जगत मंहि जीवत रहि करू काम।

रैदास करम ही धरम है करम करहु निहकाम॥

अर्थात्, सौ वर्ष का जीवन हो, तो भी पूरे जीवन हमें काम करना चाहिए। क्योंकि, कर्म ही धर्म है। हमें निष्काम भाव से काम करना चाहिए। संत रविदास जी की ये शिक्षा आज पूरे देश के लिए है। देश इस समय आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। पिछले वर्षों में अमृतकाल में विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव रखी जा चुकी है। अब अगले 5 साल हमें इस नींव पर विकास की इमारत को और ऊंचाई देनी है। गरीब वंचित की सेवा के लिए जो अभियान 10 वर्षों में चले हैं, अगले 5 वर्षों में उन्हें और भी अधिक विस्तार मिलना है। ये सब 140 करोड़ देशवासियों की भागीदारी से ही होगा। इसलिए, ये जरूरी है कि देश का हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करे। हमें देश के बारे में सोचना है। हमें तोड़ने वाले, बांटने वाले विचारों से दूर रहकर देश की एकता को मजबूत करना है। मुझे विश्वास है कि, संत रविदास जी की कृपा से देशवासियों के सपने जरूर साकार होंगे। आप सभी को एक बार फिर संत रविदास जयंती की मैं बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !

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Prime Minister highlights India’s strong conservation efforts on World Elephant Day
August 12, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi today stated that on World Elephant Day, we celebrate the majestic elephant, which has remained an integral part of India’s ecological heritage. He expressed gladness that India is home to over 60% of the world’s wild Asian elephants.

The Prime Minister noted that our nation has 33 Elephant Reserves, which provide habitats for elephants and strengthen our efforts towards their long-term conservation. Shri Modi also expressed pride in all forest personnel, scientists, veterinarians, mahouts, and the local communities who are integral to all such efforts.

In a post on X, the Prime Minister shared:

"On World Elephant Day, we celebrate the majestic elephant which has remained an integral part of India’s ecological heritage. It is gladdening that India is home to over 60% of the world’s wild Asian elephants. Our nation has 33 Elephant Reserves, which provide habitats for elephants and strengthen our efforts towards their long-term conservation. We are also proud of all forest personnel, scientists, veterinarians, mahouts and the local communities who are integral to all such efforts."