नेशनल स्पेस डे, भारत के युवाओं में उत्साह और आकर्षण का अवसर बन गया है, जो देश के लिए गर्व की बात है; मैं स्पेस सेक्टर से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएँ देता हूँ: पीएम
अंतरिक्ष क्षेत्र में एक के बाद एक उपलब्धि हासिल करना अब भारत और उसके वैज्ञानिकों का स्वाभाविक गुण बन गया है: प्रधानमंत्री मोदी
भारत breakthrough technologies में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बहुत जल्द हम गगनयान मिशन लॉन्च करेंगे। आने वाले वर्षों में, भारत अपना स्वयं का स्पेस स्टेशन बनाएगा: पीएम
फसल बीमा और मछुआरों की सुरक्षा से लेकर डिजास्टर मैनेजमेंट और PM गति शक्ति मास्टर प्लान तक, स्पेस टेक्नोलॉजी; भारत में गवर्नेंस का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है: पीएम
अंतरिक्ष में भारत की प्रगति अब आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने में सीधे योगदान दे रही है:पीएम

केंद्रीय कैबिनेट के साथी, इसरो और स्पेस सेक्टर के सभी वैज्ञानिक एवं इंजीनियर्स, और मेरे प्यारे देशवासियों!

आप सभी को नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। इस बार Space Day की थीम है-आर्यभट्ट से गगनयान तक! इसमें अतीत का आत्मविश्वास भी है, और भविष्य का संकल्प भी है। आज हम देख रहे हैं, इतने कम समय में ही, नेशनल स्पेस डे हमारे युवाओं में उत्साह और आकर्षण का अवसर बन गया है। ये देश के लिए गर्व की बात है। मैं स्पेस सेक्टर से जुड़े सभी लोगों को, वैज्ञानिकों को, सभी युवाओं को नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। अभी भारत ने International Olympiad on Astronomy and Astrophysics, उसकी मेज़बानी भी की है। इस competition में दुनिया के साठ से ज्यादा देशों से लगभग 300 युवाओं ने हिस्सा लिया। भारत के युवाओं ने मेडल भी जीते, ये Olympiad स्पेस सेक्टर में भारत की उभरती लीडरशिप का प्रतीक है।

साथियों,

मुझे ख़ुशी है कि युवा साथियों में स्पेस के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए, ISRO द्वारा भारतीय अंतरिक्ष हैकाथोन और Robotics Challenge जैसी पहल भी की गई है। मैं इन प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाले स्टूडेंट्स और विजेताओं को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

Friends,

स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक नए माइल स्टोन गढ़ना, ये भारत और भारत के वैज्ञानिकों का स्वभाव बन गया है। दो साल पहले ही भारत पहला ऐसा देश बना था, जिसने चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने का इतिहास रचा। हम स्पेस में docking-undocking की क्षमता रखने वाले दुनिया के चौथे देश भी बन गए हैं। अभी तीन दिन पहले ही मेरी ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात हुई है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तिरंगा फहराकर हर भारतीय को गर्व से भर दिया। जब वो तिरंगा मुझे दिखा रहे थे, वो जो पल थी, वो जो अनुभूति थी, वो शब्दों से परे है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु से हुई चर्चा में मैंने नए भारत के युवा के असीम हौसले और अनंत सपनों को देखा है। इन सपनों को आगे बढ़ाने के लिए हम भारत का “Astronaut Pool” भी तैयार करने जा रहे हैं। मैं आज स्पेस डे पर अपने युवा साथियों को भारत के सपनों को उड़ान देने के लिए, इस Astronaut Pool से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ।

साथियों,

आज भारत semi-cryogenic engine और electric propulsion जैसी breakthrough technology में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जल्द ही, आप सब वैज्ञानिकों की मेहनत से, भारत गगनयान की उड़ान भी भरेगा, और आने वाले समय में भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा। अभी हम मून और मार्स तक पहुंचे हैं। अब हमें गहरे अन्तरिक्ष में उन हिस्सों में भी झांकना है, जहां मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं! Beyond galaxies lies our horizon!!!

साथियों,

अनंत अन्तरिक्ष हमें हमेशा ये एहसास दिलाता है कि वहां कोई भी पड़ाव अंतिम पड़ाव नहीं है। मैं मानता हूं, स्पेस सेक्टर में, पॉलिसी लेवेल पर भी, कहीं कोई आखिरी ठहराव नहीं होना चाहिए। और इसीलिए, मैंने लालकिले से कहा था, हमारा रास्ता Reform, Perform और Transform का रास्ता है। इसलिए बीते 11 वर्षों में देश ने स्पेस सेक्टर में एक के बाद एक लगातार बड़े reforms किए हैं। एक समय था, जब स्पेस जैसे futuristic सेक्टर को देश में अनेक पाबंदियों से बांध दिया गया था। हमने इन बेड़ियों को खोला। हमने प्राइवेट सेक्टर को स्पेस-टेक में परमीशन दी। और आज देखिए, देश में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्पेस-टेक में innovation और acceleration का इंजन बनकर उभर रहे हैं। इस कार्यक्रम में भी उनकी बढ़-चढ़कर के उपस्थिति दिख रही है। हमारे प्राइवेट सेक्टर द्वारा बनाया गया पहला PSLV रॉकेट भी जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। मुझे खुशी है कि भारत की पहली private communication satellite भी बनाई जा रही है। Public Private Partnership के जरिए Earth Observation Satellite Constellation भी लॉन्च करने की तैयारी है। आप कल्पना कर सकते हैं, स्पेस सेक्टर में भारत के युवाओं के लिए बहुत बड़ी संख्या में अवसर बनने जा रहे हैं।

साथियों,

मैंने 15 अगस्त को लाल किले से ऐसे अनेक क्षेत्रों का जिक्र किया था, जिसमें भारत को आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। मैंने हर सेक्टर को अपने लक्ष्य तय करने को कहा है। आज स्पेस डे के दिन, मैं देश के स्पेस स्टार्टअप्स से कहूंगा, क्या हम स्पेस सेक्टर में अगले पांच वर्षों में पांच यूनिकॉर्न खड़े कर सकते हैं? अभी हम भारत की धरती से साल में 5-6 बड़े लॉन्च देखते हैं। मैं चाहूंगा कि प्राइवेट सेक्टर आगे आए और अगले 5 साल में हम उस स्थिति में पहुंचे की हर साल पचास रॉकेट लॉन्च कर पाएं। हर सप्ताह एक, इसके लिए देश को जिन next gen reforms की जरूरत है, वो करने का सरकार का इरादा भी है और इच्छाशक्ति भी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ, सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी है।

Friends,

भारत, स्पेस टेक्नोलॉजी को scientific exploration के साथ ही Ease of Living का भी माध्यम मानता है। आज स्पेस-टेक भारत में गवर्नेंस का भी हिस्सा बन रही है। फसल बीमा योजना में satellite based आकलन हो, मछुआरों को satellite से मिल रही जानकारी और सुरक्षा हो, Disaster management हो या PM Gati Shakti National Master Plan में geospatial data का इस्तेमाल हो, आज स्पेस में भारत की प्रगति सामान्य नागरिकों का जीवन आसान बना रही है। इसी दिशा में, केंद्र और राज्यों में स्पेस-टेक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कल National Meet 2.0 का आयोजन भी हुआ है। मैं चाहूँगा, ऐसे प्रयास आगे भी चलते रहें। हमारे स्पेस स्टार्टअप्स भी नागरिकों की सेवा के लिए नए solutions दें, नए इनोवेशन्स करें। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में अन्तरिक्ष में भारत की यात्रा नई ऊंचाइयों को छुएगी। इसी विश्वास के साथ, आप सभी को एक बार फिर नेशनल स्पेस डे की बहुत-बहुत बधाई। धन्यवाद!

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प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को आत्मसात करने पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
January 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो ज्ञान की विशालता के बीच केवल उसके सार पर ध्यान केंद्रित करने की शाश्वत बुद्धिमत्ता पर जोर देता है।

संस्कृत श्लोक-

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

यह सुभाषित इस भाव को व्यक्त करता है कि यद्यपि ज्ञान प्राप्ति के लिए असंख्य शास्त्र और विविध विद्याएँ उपलब्ध हैं, किंतु मानव जीवन समय की सीमाओं और अनेक बाधाओं से बंधा हुआ है। अतः, मनुष्य को उस हंस के समान बनना चाहिए जो दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध को अलग करने की क्षमता रखता है अर्थात, हमें भी अनंत सूचनाओं के बीच से केवल उनके सार—उस परम सत्य को पहचानना और ग्रहण करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा:

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”