"डिजिटल अर्थव्यवस्था पर चर्चा के लिए बेंगलुरु से बेहतर कोई स्‍थल नहीं"
"भारत का डिजिटल परिवर्तन नवाचार में अटूट विश्वास और त्‍वरित कार्यान्वयन के प्रति इसकी प्रतिबद्धता से प्रेरित है"
"शासन में बदलाव लाने और इसे अधिक कुशल, समावेशी, त्‍वरित और पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्र प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहा है"
"भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा वैश्विक चुनौतियों के लिए व्‍यवहार्य, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रदान करता है"
'इस तरह की विविधता के साथ, भारत समाधान के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला है; भारत में सफल हुए समाधान को दुनिया में कहीं भी सरलता से लागू किया जा सकता है
"एक सुरक्षित, भरोसेमंद और लचीली डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जी-20 उच्च स्तरीय सिद्धांतों पर आम सहमति बनाना महत्वपूर्ण है"
प्रधानमंत्री ने कहा- 'मानवता के समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों का पूरा इकोसिस्‍टम तैयार किया जा सकता है, इसे हमसे केवल चार सी अर्थात् दृढ़ विश्वास, प्रतिबद्धता, समन्वय और सहयोग की आवश्यकता है’

महानुभावों, देवियों और सज्जनों, नमस्कार!

मैं 'नम्मा बेंगलुरु' में आपका स्वागत करता हूं। यह एक ऐसा शहर है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता की भावना का घर है। डिजिटल अर्थव्यवस्था पर चर्चा करने के लिए बेंगलुरु से बेहतर कोई स्‍थल नहीं है!

मित्रो

पिछले नौ वर्षों में भारत का डिजिटल परिवर्तन अभूतपूर्व है। यह सब 2015 में हमारी डिजिटल इंडिया पहल के शुभारंभ के साथ शुरू हुआ। यह नवाचार में हमारे अटूट विश्वास से संचालित है। यह तेजी से कार्यान्वयन के लिए हमारी प्रतिबद्धता से प्रेरित है और यह समावेश की हमारी भावना से प्रेरित है, किसी को भी पीछे नहीं छोड़ता है। इस परिवर्तन का पैमाना, गति और दायरा कल्पना से परे है। आज, भारत में 850 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जो दुनिया में सबसे सस्ती डेटा लागतों का आनंद ले रहे हैं। हमने शासन को अधिक कुशल, समावेशी, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है। हमारा विशिष्ट डिजिटल पहचान मंच, आधार, हमारे तीन अरब से अधिक लोगों को कवर करता है। हमने भारत में वित्तीय समावेशन में क्रांति लाने के लिए जेएएम ट्रिनिटी- जन धन बैंक खातों, आधार और मोबाइल की शक्ति का उपयोग किया है। हर महीने, लगभग 10 बिलियन लेन-देन यूपीआई पर होते हैं, जो हमारी तत्काल भुगतान प्रणाली है। वैश्विक वास्तविक समय में भुगतान का 45 प्रतिशत से अधिक भारत में होता है। सरकारी सहायता के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से कमियों को दूर किया जा रहा है और इसने 33 बिलियन डॉलर से अधिक की बचत की है। कोविन पोर्टल ने भारत के कोविड टीकाकरण अभियान का समर्थन किया। इसने डिजिटल रूप से सत्यापन योग्य प्रमाणपत्रों के साथ 2 बिलियन से अधिक वैक्सीन खुराक की डिलीवरी में मदद की। गति-शक्ति मंच बुनियादी ढांचे और रसद को मैप करने के लिए प्रौद्योगिकी और स्थानिक योजना का उपयोग करता है। यह योजना बनाने, लागत कम करने और वितरण की गति बढ़ाने में सहायता कर रहा है। हमारे ऑनलाइन सार्वजनिक खरीद मंच- गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी लाई है। डिजिटल कॉमर्स के लिए खुला नेटवर्क ई-कॉमर्स का लोकतंत्रीकरण कर रहा है। पूरी तरह से डिजिटल कराधान प्रणाली पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है। हम एआई संचालित भाषा अनुवाद मंच 'भाषिनी' का निर्माण कर रहे हैं। यह भारत की सभी विविध भाषाओं में डिजिटल समावेशन का समर्थन करेगा।

महानुभावों,

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर वैश्विक चुनौतियों के लिए स्केलेबल, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रदान करता है। भारत असाधारण रूप से विविध देश है। हमारे पास दर्जनों भाषाएं और सैकड़ों बोलियां हैं। यह दुनिया के हर धर्म और असंख्य सांस्कृतिक प्रथाओं का घर है। प्राचीन परंपराओं से लेकर नवीनतम तकनीकों तक, भारत में सभी के लिए कुछ न कुछ है। इस तरह की विविधता के साथ, भारत समाधान के लिए एक आदर्श परीक्षण प्रयोगशाला है। एक समाधान जो भारत में सफल होता है, उसे दुनिया में कहीं भी आसानी से लागू किया जा सकता है। भारत दुनिया के साथ अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार है। हमने कोविड महामारी के दौरान वैश्विक कल्‍याण के लिए अपने कोविन प्लेटफॉर्म की पेशकश की। अब हमने एक ऑनलाइन ग्लोबल पब्लिक डिजिटल गुड्स रिपॉजिटरी- इंडिया स्टैक बनाया है। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के हमारे भाइयों और बहनों के साथ कोई भी पीछे न छूटे।

महानुभावों,

मुझे खुशी है कि आप जी-20 वर्चुअल ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी बनाने के लिए काम कर रहे हैं। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए समान प्रारूप पर प्रगति सभी के लिए एक पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष डिजिटल इको-सिस्टम बनाने में मदद करेगी। मैं डिजिटल कौशल की एक-दूसरे देशों में तुलना को सुविधाजनक बनाने के लिए एक रोडमैप विकसित और डिजिटल कौशल पर उत्कृष्टता का एक वर्चुअल केंद्र स्थापित करने के आपके प्रयासों का भी स्वागत करता हूं। ये एक कार्यबल की जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास हैं जो भविष्य के लिए तैयार है। जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था विश्व स्तर पर फैलेगी, इसे सुरक्षा खतरों और चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस संदर्भ में, एक सुरक्षित, विश्वसनीय और लचीली डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जी-20 उच्च स्तरीय सिद्धांतों पर आम सहमति बनाना महत्वपूर्ण है।

मित्रो

प्रौद्योगिकी ने हमें आज इस तरह से जोड़ा है जैसा पहले कभी नहीं हुआ। यह सभी के लिए समावेशी और सतत विकास का वादा करती है। जी-20 में हमारे पास एक समावेशी, समृद्ध और सुरक्षित वैश्विक डिजिटल भविष्य की नींव रखने का एक अनूठा अवसर है। हम डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से वित्तीय समावेशन और उत्पादकता को आगे बढ़ा सकते हैं। हम किसानों और छोटे व्यवसायों द्वारा डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। हम एक वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्‍टम बनाने के लिए रूपरेखा स्थापित कर सकते हैं। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए एक एक प्रारूप भी तैयार कर सकते हैं। वास्तव में, हम मानवता के समक्ष आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों का एक संपूर्ण इको-सिस्टम बना सकते हैं। इसे हमसे केवल चार सी-दृढ़ विश्वास, प्रतिबद्धता, समन्वय और सहयोग की आवश्यकता है और मुझे कोई संदेह नहीं है कि आपका समूह हमें उस दिशा में आगे ले जाएगा। मैं आप सभी के लिए एक बहुत ही रचनात्‍मक चर्चा की कामना करता हूं। धन्यवाद! बहुत-बहुत धन्यवाद

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प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा पर नेशनल डिपार्टमेंटल समिट के समापन सत्र की अध्यक्षता की
September 02, 2026
यह टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप आयोजित शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने ठोस और समयबद्ध नतीजों पर अमल करने के लिए लगातार समीक्षा और फॉलो-अप की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया
जन भागीदार पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जल उत्सव को बढ़ावा देने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने और दुनिया भर के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए पानी से जुड़े डेटा का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की
प्रधानमंत्री ने पानी से जुड़े मुद्दों पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों की भागीदारी वाले राज्यों के बीच व्यवस्थित अध्ययन-दौरों का सुझाव दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पानी पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। यह शिखर सम्मेलन टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर सहयोग के ज़रिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरुप विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन है। इसमें भारत की जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित चर्चा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ एक मंच पर थे।

प्रधानमंत्री ने दो दिनों तक चली गहन चर्चा की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि शिखर सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समय-सीमा वाले कार्य बिंदुओं की समीक्षा और सीखने की निरंतर प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इसकी समीक्षा व फॉलो अप की निरंतर प्रक्रिया का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों, जैसे आबादी का बढ़ना और भविष्य में पानी की ज़रूरतों के बारे में शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने पर ज़ोर दिया और उनके लिए भी ऐसे ही चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीकों को ज़्यादा अपनाने की बात कही। उन्होंने भारतीय निर्माताओं और संबंधित लोगों को असरदार समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करने के लिए खास प्रदर्शनियों और कार्यशालाएं, जिनमें दुनिया भर के बेहतरीन तरीकों की जानकारी भी शामिल हो, आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

जन भागीदारी पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने लोगों में ज़्यादा जागरूकता लाने के लिए "जल उत्सव" को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने गाद निकालने के काम को एक नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए साफ नियम और मानक संचालन प्रक्रिया बनाने को कहा। बांध की सुरक्षा के मामले में, उन्होंने हर मॉनसून से पहले पूरी तैयारी रखने, तय सावधानियों का पालन करने और स्कूली छात्रों में जागरूकता पैदा करने पर ज़ोर दिया, जिसमें शिक्षा के पाठ्यक्रम में इसे सही ढंग से शामिल करना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जल प्रबंधन और शासन के बारे में जानकारी और क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित किए जाएं, ताकि व्यावहारिक सीख मिल सके और सफल उपायों को दूसरी जगहों पर भी अपनाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने मज़बूत जल डेटा गवर्नेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें जल-क्षेत्र से जुड़े डेटा को एक साथ लाया जाए, उसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित किया जाए और उसका विश्लेषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। उन्होंने एक समान प्रारूप के माध्यम से डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए एआई के उपयोग की भी सिफारिश की। उन्होंने कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित पानी के उचित उपयोग के ज़रिए पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना बनाने पर भी ज़ोर दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सही योजना, पक्के इरादे, ज़रूरी संसाधन तथा काबिल अधिकारियों को लगाकर पानी की कमी की समस्या को एक अवसर में बदला जा सकता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार मुख्य नतीजों पर ज़ोर दिया: पानी से जुड़ी ढ़ांचागत परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करना, जल संरक्षण को लोगों के एक लगातार चलने वाले आंदोलन के तौर पर मज़बूत करना, पीने योग्य पानी के स्रोतों की लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करना और गांवों में पीने के पानी की योजनाओं के असरदार संचालन और रखरखाव को संस्थागत रूप देना।