गुवाहाटी से कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा योजनाएं शुरू की जा रही हैं, जो असम के विकास को गति देंगी और पूरे राज्य के लोगों को लाभ पहुंचाएंगी: प्रधानमंत्री
पीएम किसान सम्मान निधि योजना देश के छोटे किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा का माध्यम बन गई है: प्रधानमंत्री
एमएसपी, किफायती ऋण, फसल बीमा और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं किसानों के लिए बड़ा संबल बन गई हैं: प्रधानमंत्री
हमने यह सुनिश्चित किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने वाले संकटों का कृषि और खेती पर कोई असर न पड़े: प्रधानमंत्री
अक्षय ऊर्जा से जुड़ी देश की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असम बड़ी भूमिका निभा रहा है; लोअर कोपिली जलविद्युत परियोजना असम के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को लाभ पहुंचाएगी: प्रधानमंत्री
देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग का विकास हमारी प्राथमिकता है; इसी भावना के साथ, आज असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए बड़ी पहल की गई है: प्रधानमंत्री
असम आज हमारे पूर्वोत्तर क्षेत्र - 'अष्टलक्ष्मी' - के नए भविष्य के लिए आदर्श बन रहा है; यहां हो रही प्रगति समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र को नई गति प्रदान कर रही है: प्रधानमंत्री

मुर मरोमोर गुवाहाटी बाशी राइज, आपुनालोकक मोई मुर, आंतोरिक नमोश्कार जोनाइशु।

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी सर्बानंद सोनोवाल जी, उपस्थित राज्य सरकार के सभी मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण, देश भर से टेक्नोलॉजी के माध्यम से, इस कार्यक्रम में जुड़े हमारे सभी अन्नदाता साथी, टी-गार्डन में काम करने वाले मेरे भाई-बहन, और मैं देख रहा हूं कि काफी सीनियर हमारे सभी मुख्यमंत्री जी भी आज हमारे साथ इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने में से जुड़े हुए हैं, मेरा सबको नमस्कार।

भाइयों और बहनों,

आज मुझे नवरात्रि के पहले, मां कामाख्या की इस पावन भूमि पर, आप सभी के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। मां कामाख्या के आशीर्वाद से, थोड़ी देर पहले, यहां से साढ़े 19 हज़ार करोड़ रुपए के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। असम को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने वाले प्रोजेक्ट्स से लेकर असम आने वाले लोगों की सुविधा के लिए जसे काम हुए हैं, ढेर सारे प्रोजेक्ट्स आज असम को मिले हैं। आज देश के किसानों और असम में टी गार्डन में काम करने वाले साथियों के लिए भी बहुत बड़ा दिन है। कुछ क्षण पहले, पूरे देश में पीएम किसान सम्मान निधि के तहत, 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि, हमारे करोड़ों अन्नदाताओं के खातों में भेजी गई है। इसके अलावा, असम के चाय बागानों से जुड़े अनेक परिवारों को आज भूमि के पट्टे भी दिए गए हैं। मैं असम के लोगों को, यहां के सभी परिवारों को और देशभर के किसानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज देशभर से किसान साथी, मां कामाख्या की इस धरती से जुड़े हैं। थोड़ी देर पहले करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान निधि जमा होने के मैसेज, हर एक के मोबाइल में पहुंच चुके हैं। ये योजना वाकई अद्भुत है। एक क्लिक से करोड़ों किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसा जमा होता है। दुनिया के विकसित देशों में भी ऐसा संभव नहीं है। और मुझे विदेश के मेहमान जब मिलते हैं और इस विषय में इतने सवाल पूछते हैं जानकारी के लिए इतने उत्सुक रहते हैं, कि ये सब कैसे संभव हो रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े देश के बड़े-बड़े नेताओं को भी ये बहुत अजूबा लगता है, और ये मेरे वही किसान भाई-बहन हैं, जिनमें से अधिकांश के पास 2014 से पहले न मोबाइल फोन था और न ही बैंक में उनका कोई खाता था। आज ऐसे करोड़ों किसानों के खाते में, अब तक सवा चार लाख करोड़ रुपए से अधिक पैसा जमा हो चुका है। इस में असम के भी करीब 19 लाख किसान हैं, जिनको अभी तक लगभग आठ हज़ार करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

साथियों,

मुझे याद है, जब पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू हुई, तो अफवाहें फैलाने में, झूठ बोलने में माहिर कांग्रेस वाले कहते थे कि इस योजना का पैसा आज भले मोदी देता है, लेकिन चुनाव के बाद वापस करना पड़ेगा, ये झूठ बोलने में ऐसे एक्सपर्ट हैं। लेकिन आज सम्मान निधि की ये योजना, देश के छोटे किसानों के लिए, सामाजिक सुरक्षा का एक माध्यम बन गई है।

साथियों,

बीजेपी-एनडीए सरकार के लिए किसान हित से बड़ा और कुछ नहीं। जब किसानों को पैसे देने की बात आती थी, कांग्रेस वालों की सांस अटक जाती थी। मैं आपको एक और उदाहरण देता हूं। 2014 से पहले केंद्र में 10 साल तक कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस सरकार के 10 साल में किसानों को MSP के रूप में साढ़े 6 लाख करोड़ रुपए मिले थे, 10 साल में साढ़े 6 लाख करोड़। जबकि हमारी सरकार के 10 साल में, किसानों को MSP के रूप में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं।

साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश के किसान के इर्द-गिर्द बीजेपी-एनडीए सरकार ने एक मजबूत सुरक्षा कवच बुना है। MSP हो, सस्ता ऋण हो, फसल बीमा हो, पीएम किसान सम्मान निधि हो, ये योजनाएं किसानों का बहुत बड़ा संबल बनी हैं। इतना ही नहीं, हमने इस बात का ध्यान रखा है कि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट का असर खेती-किसानी पर ना पड़े। अब जैसे कोरोना और उसके बाद जो युद्ध हुए हैं, उसके कारण, अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में खाद की कीमतें कई गुणा बढ़ गई थीं। विदेशी बाजारों में खाद मिलनी भी मुश्किल हो गई थी। लेकिन केंद्र सरकार ने इस संकट को रोकने के लिए भरपूर कोशिश की। यूरिया की जो बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 हजार रुपए में मिलती है, वही बोरी हमारी सरकार ने अपने किसानों को सिर्फ 300 रुपए में दी है। इस पर सरकार ने अपने खज़ाने से 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं, ताकि मेरे किसानों पर बोझ न पड़े। ये बोझ सरकार अपने कंघों पर उठा रही है।

साथियों,

बीते दशक में भाजपा-NDA सरकार ने, एक और बहुत बड़ा काम आत्मनिर्भरता को लेकर किया है। हमने कृषि को बाहरी संकटों से बचाने के लिए आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन दिया है। हमने आज़ाद भारत में बार-बार देखा है, कि दुनिया के दूसरों हिस्सों में लड़ाइयां होती हैं, कहीं सप्लाई चेन में दिक्कत आती है, तो परेशानी हमारे किसान को होती थी। कभी खाद महंगी हो जाती थी, कभी डीज़ल और ऊर्जा की कीमत बढ़ जाती है। क्योंकि दशकों तक कांग्रेस पार्टी ने देश को दूसरे देशों पर निर्भर रखा। इससे खेती की लागत भी बढ़ जाती थी।

साथियों,

किसानों की खेती नई तकनीक से जुड़े, उन्हें सिंचाई के नए तरीकों से जोड़ा जाए, और फसलों को भी लाभ मिले, इस मंशा से हमारी सरकार ने Per Drop More Crop की नीति बनाई, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया। इससे सिंचाई भी बेहतर हुई और लागत भी कम हो गई। आज सरकार, आपके खेतों को सोलर पंप से जोड़ने के लिए काम कर रही है, और हमारी कोशिश है कि डीजल पर आपका खर्चा कम से कम हो। केंद्र ने जो कुसुम योजना बनाई है, वो इसीलिए है। आज बहुत सारे किसान, ना सिर्फ सोलर पंप लगाकर सिंचाई कर रहे हैं बल्कि उससे बिजली बनाकर, पैसे भी कमा पा रहे हैं। और इसलिए मैं कहता हूं, अन्नदाता ऊर्जादाता बने।

साथियों,

हमारा निरंतर प्रयास है, कि खाद और कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता भी कम हो। कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण, देश के पांच बड़े खाद कारखाने बंद हो गए थे। हमने उन खाद कारखानों को फिर से शुरु करवाया। साथ ही, किसानों को नैनो यूरिया से जोड़ने के लिए भी कई काम किए। आज देश के किसान को इसका लाभ मिल रहा है। अब बीजेपी-NDA सरकार देश के किसानों को, प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहन दे रही है। किसान जब बहुत बड़े स्तर पर प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे तो मिट्टी भी सुरक्षित रहेगी और हमारे अन्नदाता वैश्विक संकटों से भी सुरक्षित रहेंगे।

साथियों,

एक तरफ बीजेपी-NDA सरकार किसानों को लेकर काम कर रही है, हम देश को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं, वहीं आज कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो किसी भी स्थिति में देश के प्रति ईमानदार नहीं है। आज युद्ध से बने संकटों के बीच भी कांग्रेस सिर्फ अफवाहें फैलाने और अप-प्रचार करने में जुटी है। और मैं जरा कांग्रेस के साथियों से कहना चाहता हूं, एक काम करिए, लालकिले पर से 15 अगस्त को पंडित नेहरू जी ने जो भाषण दिए हैं, जरा भाषण सुनिए, आप सुनकर के हैरान हो जाओगे। लालकिले से 15 अगस्त को एक बार कह रहे हैं पंडित जी, कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में लड़ाई चल रही है, इसलिए भारत में महंगाई बढ़ रही है। अब उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया कहां है और यहां पर महंगाई बढ़ने की बात नेहरू जी कह रहे थे। और आज कांग्रेस के लोग देश को गुमराह करने में लगे हैं। वैश्विक संकटों का प्रभाव क्या होता है, ये आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

बीजेपी- एनडीए की सरकार ने हमारी रिफाइनरीज के विकास के लिए, रिफाइनिंग कैपिसिटी के विस्तार के लिए काम किया है। आज भारत दुनिया का वो देश है, जो अपनी ही नहीं, बल्कि विश्व की ऊर्जा ज़रूरतों का भी ध्यान रख सकता है। यहां असम में जो हमारी रिफाइनरीज़ हैं उनको भी बीते वर्षों में expand किया गया है। असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट में गैस पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है। नुमालीगढ़-सिलीगुड़ी पाइपलाइन के अपग्रेडेशन का काम भी पूरा हो चुका है। और असम के गोलाघाट में दुनिया का पहला सेकंड जेनरेशन बायो-एथेनॉल प्लांट भी स्थापित किया गया है। इन सारे प्रोजेक्ट्स का बहुत बड़ा फायदा इस पूरे क्षेत्र को होगा।

साथियों,

रेलवे की विदेशों पर निर्भरता कम हो, हमें विदेशों से कम तेल मंगाना पड़े, इसके लिए एक दशक में बहुत बड़ा काम हुआ है। पिछले दस साल में, आज देश का करीब करीब पूरा रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिक रूट से जुड़ चुका है। और जल्द ही, हम 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य भी पूरा कर रहे हैं। इस इलेक्ट्रिफिकेशन के काऱण देश में करीब करीब पौने दो सौ करोड़ लीटर डीजल की बचत हो रही है। असम में भी रेलवे नेटवर्क का तेज़ी से बिजलीकरण हो रहा है। आज भी यहां रेलवे के बिजलीकरण से जुड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है।

साथियों,

असम, देश में रीन्यूएबल एनर्जी से जुड़े संकल्पों की सिद्धि में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। लोअर कोपिली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट को फायदा होगा। और सबसे बड़ी बात, जो ये हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाएं असम में शुरू हुई हैं, वो असम के युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बना रही हैं, असम की समृद्धि बढ़ा रही हैं।

साथियों,

बीजेपी-NDA की डबल इंजन सरकार की पहचान संवेदनशीलता से है, सुशासन से है। देश के हर क्षेत्र, हर वर्ग का विकास, ये हमारी प्राथमिकता है। इसी भाव के साथ, आज असम के टी-गार्डन में काम करने वाले साथियों के लिए बहुत बड़ी पहल हुई है। जिनकी मेहनत से असम की वैश्विक पहचान को बल मिला, जिनकी उगाई चाय की खुशबू दुनियाभर में भारत की पहचान बनी, आज उन साथियों को बीजेपी-NDA सरकार सम्मान भी दे रही है और सहायता भी दे रही है। कांग्रेस की सरकारों ने इन साथियों को पूछा तक नहीं, इनके पास जमीन के कानूनी दस्तावेज़ तक नहीं थे। मैं हिमंता जी और उनकी पूरी टीम को बधाई दूंगा, आपने टी-गार्डन से जुड़े इन परिवारों के लिए बहुत बड़ा काम किया है। आज असम की सरकार इस ऐतिहासिक अन्याय को खत्म करने का काम कर रही है। अब इन परिवारों को उनकी अपनी जमीन मिली है, और इनके लिए पक्के घर मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है। इससे टी-गार्डन में रहने वाली बहनों को विशेष रूप से बहुत फायदा होगा। मैं चाहूंगा कि अब टी-गार्डन में काम करने वाले परिवारों के बच्चे भी अच्छे से पढ़ाई करें और आगे बढ़ें। और बीजेपी सरकार ने इसके लिए भी पूरी सुविधाएं बना दी है। इसलिए ही तो हर टी-गार्डन वर्कर कह रहा है- आको एबार, बीजेपी शोरकार! और मेरे लिए तो, ये मेरे टी गार्डन के मजदूरों का सम्मान करना मतलब, मैं खुद एक कर्ज उतार रहा हूं, क्योंकि आप चाहे बागान में काम करते थे, दूर-सुदूर गुजरात में मेरे गांव में वो चाय की पत्ती पहुंचती थी, और मैं चाय बेच बेचकर यहां तक पहुंच गया। अब मुझे बताइये कि ये टी गार्डन वालों के आशीर्वाद नहीं होते, तो मैं यहां पहुंचता क्या? ये टी गार्डन वालों की टी मेरे यहां पहुंची और मैं आज आपके बीच पहुंचा। और देखिये मां कामाख्या की कैसी कृपा है, कि मुझे आज मेरे टी गार्डन के भाईयों का कर्ज उतारने का मौका, मां कामाख्या देवी ने मुझे दिया।

साथियों,

आज से प्रसिद्ध निमाती घाट और बिश्वनाथ घाट पर आधुनिक क्रूज टर्मिनल बनाने का काम भी शुरू हुआ है। ये सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, ये असम में टूरिज्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला काम है। बीजेपी सरकार ने टूरिज्म को सिर्फ दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि उसे रोजगार और विकास के बड़े अवसर के रूप में देखा है। इसी सोच के साथ ब्रह्मपुत्र नदी में भी, वॉटर टूरिज्म की संभावनाएं बढ़ाई जा रही हैं। क्रूज टर्मिनल बनने से ब्रह्मपुत्र पर क्रूज चलाने का काम आगे बढ़ेगा और देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए असम तक पहुंचना और आसान होगा। जब क्रूज टूरिज्म बढ़ेगा, तो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को नया बाजार मिलेगा। छोटे दुकानदारों, नाविकों, होटल और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी। यानी असम में टूरिज्म अब सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, यह स्थानीय विकास और जन-समृद्धि का एक नया इंजन बन रहा है।

साथियों,

असम, आज हमारे नॉर्थ ईस्ट यानी अष्टलक्ष्मी के नए भविष्य का एक मॉडल बन रहा है। यहां की प्रगति पूरे नॉर्थ ईस्ट को नई गति दे रही है। असम में जो बदलाव बीते एक दशक में बीजपी-NDA सरकार ने किया है, उसका प्रभाव पड़ोस में पश्चिम बंगाल में भी दिख रहा है। वहां भी लोग बीजेपी-एनडीए का ऐसा ही सुशासन चाहते हैं। इसलिए मैं असम के हर युवा, हर परिवार से कहूंगा, कि हमें मिलकर विकसित असम के लिए काम करते रहना है। ताकि असम, देश में एक मॉडल स्टेट बनकर उभरे। इसी आग्रह के साथ, मैं जब सभी मुख्यमंत्री महोदय, इस समारोह में हमारे साथ जुड़े हुए हैं, तो मैं उनसे एक आग्रह करना चाहता हूं, यहां जो पीएम एकता मॉल का उद्धघाटन हुआ है, आप अपने राज्य की चीजें भी यहां बेचने की व्यवस्था कीजिए। आप कुछ जगह यहां लीजिए और असम में किसी को केरल की चीज चाहिए, तो यहीं से मिलनी चाहिए, महाराष्ट्र की कुछ चीज चाहिए, यहीं से मिल जानी चाहिए, गुजरात की कोई चीज चाहिए यहां से मिल जाए, राजस्थान की चाहिए यहां मिल जाए, यानी पूरी देश की एकता का दर्शन हो। इस मॉल में हिन्दुस्तान के सभी राज्यों की उपस्थिति हो, इस मॉल में असम के हर डिस्ट्रिक्ट की उपस्थिति हो। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट, यानी एक प्रकार से कोई भी व्यक्ति एकता मॉल में जाए, तो उसको वहां पूरा हिन्दुस्तान मिल जाना चाहिए। और मुझे विश्वास है कि असम की धरती से पूरे देश को एक मॉडल मिलेगा और ये सफलता पूर्वक देश के हर राज्य में एकता मॉल तैयार हो जाएंगे। आप सबको फिर से एक बार विकास की परियोजनाओं की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। देशभर से जो किसान साथी हमारे साथ जुड़े रहे हैं, मैं उनका भी फिर से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं और मैं मां कामाख्या से प्रार्थना करता हूं, कि कुछ ही दिनों के बाद जब नवरात्रि का प्रारंभ हो रहा है, मां कामाख्या की कृपा सभी देशवासियों पर बनी रहे और हम सारे संकटों को पार करते हुए नए विश्वास, नए सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ें, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Lakshadweep Tourist Numbers Soar After PM Modi’s Appeal, Maldives Sees Sharp Dip In Indian Visitors

Media Coverage

Lakshadweep Tourist Numbers Soar After PM Modi’s Appeal, Maldives Sees Sharp Dip In Indian Visitors
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत-इटली संयुक्त घोषणा
May 20, 2026

इटली गणराज्य की मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा और 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत यात्रा के बाद हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया।

राजनीतिक संवाद

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की शानदार प्रगति का स्वागत किया और बहुपक्षीय आयोजनों के इतर बैठकों समेत नेताओं की वार्षिक बैठकें आयोजित करने के साथ-साथ नियमित मंत्रिस्तरीय और संस्थागत-स्तरीय बैठकें करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2024 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी बैठक में दोनों नेताओं द्वारा अपनाई गई 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' के विभिन्न स्तंभों में हासिल की गई ठोस प्रगति की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा और विशेष रणनीतिक साझेदारी को रणनीतिक दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र (मैकेनिज्म) स्थापित करने पर सहमति जताई।

आर्थिक सहयोग और निवेश

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की बढ़ती गतिशीलता पर संतोष व्यक्त किया, जिसके तहत पिछले वर्ष से अब तक तीन उच्च स्तरीय व्यापार मंच (बिजनेस फोरम) आयोजित किए जा चुके हैं। भारत के तीव्र एवं सतत आर्थिक विकास से पैदा होने वाले अवसरों और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ताओं के सफल समापन के आधार पर, दोनों पक्षों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य की फिर से पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश में हुई वृद्धि का स्वागत किया और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए उद्योगों को औद्योगिक और तकनीकी साझेदारियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से वस्त्र, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों (क्लीन टेक), सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण कच्चे माल, इस्पात, बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश की संभावनाओं का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने उद्योगों को दोनों देशों में लागू नीतिगत प्रोत्साहनों और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जो व्यापारिक संबंधों और उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास करती हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने शेयर बाजारों, निवेश कोषों, वेंचर कैपिटल, बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई।

उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए लघु एवं मध्यम उद्योगों के बीच औद्योगिक साझेदारी को सुगम बनाने पर सहमत व्यक्त की। दोनों नेताओं ने आने वाले महीनों में आपसी हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय मिशनों को प्रोत्साहित किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानि महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सतत विकास और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर विशेष ध्यान देते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों के एक अभिन्न अंग के रूप में, ई-कचरे और खनन अवशेषों जैसे असामान्य स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कृषि और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में संबंधित मंत्रालयों और संस्थानों के बीच सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

कनेक्टिविटी

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया स्वरूप देने वाली परिवर्तनकारी पहल बताया। परियोजना पर प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने 2026 में आयोजित होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रीस्तरीय बैठक में ठोस कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने नौवहन और बंदरगाहों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और अपने संबंधित मंत्रालयों/विभागों को जल्द से जल्द इस समझौता ज्ञापन को लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने का निर्देश दिया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने पुनः पुष्टि की कि नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत-इटली साझेदारी के प्रमुख प्रेरक हैं।

उन्होंने भारत में स्थित “INNOVIT India” नामक नवाचार केंद्र की स्थापना की घोषणा की जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना, स्टार्टअप कार्यक्रमों, बाजार पहुंच, संयुक्त अनुसंधान, विश्वविद्यालय सहयोग और प्रतिभा गतिशीलता को बढ़ावा देना है। यह फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 में दिल्ली में आयोजित भारतीय और इतालवी विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच उद्घाटन 'विज्ञान और नवाचार संवाद' का स्वागत किया और इस वर्ष के अंत में इटली में इसके अगले संस्करण के आयोजन की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण आईसीटी वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जो नवाचार और आर्थिक विकास के लिए एक सक्षम कारक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में इटली की रचनात्मक भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने मानव-केंद्रित, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वे तीसरे देशों सहित इस क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।

2025–2027 वैज्ञानिक सहयोग कार्यकारी कार्यक्रम के आधार पर दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सतत ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन के जारी क्रियान्वयन और अनुसंधान परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए संयुक्त प्रस्ताव आमंत्रण शुरू किए जाने का भी स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारतीय शिक्षा जगत और ट्राएस्टे स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' (आईसीटीपी) के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग को स्वीकार किया और भारतीय वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इटली के ट्राइएस्टे स्थित एलेट्रा सिंक्रोट्रोन केंद्र के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह भारतीय शोधकर्ताओं के लिए एलेट्रा की सिंक्रोट्रोन रेडिएशन सुविधा तक पहुंच से संबंधित गतिविधियों के समर्थन हेतु किया गया है।

अंतरिक्ष

इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (एएसआई) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों नेताओं ने पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन), हेलियोफिज़िक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण पर साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई जिसमें केंद्रित विषयगत जुड़ाव शामिल है। साथ ही अंतरिक्ष तक पहुंच और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के संरक्षण पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी। उन्होंने अपने संबंधित अंतरिक्ष उद्योग प्रतिनिधिमंडलों की हालिया पारस्परिक यात्राओं पर संतोष जताया और तीसरे देशों में भी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के माध्यम से वाणिज्यिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई।

रक्षा

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय आदान-प्रदान, सेनाओं के बीच संबंधों, बंदरगाह दौरों सहित रक्षा सहयोग मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जो तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। इनमें हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने औद्योगिक मजबूती के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसंरचना और उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।

दोनों पक्ष संयुक्त रक्षा समिति और सैन्य सहयोग समूह के काम के पूरक के रूप में एक वार्षिक उच्च स्तरीय सैन्य संरचित संवाद स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करने और संयुक्त अभ्यास तथा अंतर-बल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग, समन्वय और समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने के उद्देश्य से समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

सुरक्षा

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवादियों, आतंकवादी समूहों और उनके सहयोगियों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध व्यवस्था में सूचीबद्ध लोग शामिल हैं, के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादी नेटवर्क को रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए काम जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए भारत और इटली के बीच स्थायी टास्क फोर्स की पहली बैठक तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की आगामी बैठक का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने इटली की 'गार्डिया डी फिनान्ज़ा' और भारत के 'प्रवर्तन निदेशालय' (ईडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन के संपन्न होने का स्वागत किया और वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौते तथा पुलिस सहयोग को मजबूत करने पर समझौते के शीघ्र संपन्न होने की उम्मीद जताई। उन्होंने प्रत्यर्पण संधि और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि समेत अन्य समझौतों पर चल रही चर्चाओं का भी स्वागत किया।

प्रवासन और गतिशीलता

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आवाजाही बढ़ाने तथा श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई। इसमें भारत से इटली जाने वाली नर्सों की आवाजाही को सुगम बनाने संबंधी विशेष संयुक्त आशय घोषणा भी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने संबंधित एजेंसियों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर जारी चर्चाओं का स्वागत किया।

उन्होंने "आईसीआई- इटली कॉल्स इंडिया: ए यूनिवर्सिटी-एंटरप्राइज टैलेंट ब्रिज" पहल की शुरुआत का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य इतालवी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की प्रतिभा को मार्गदर्शन, उपयुक्त अवसरों से जोड़ने और इतालवी उद्यमों में योग्य एकीकरण के ठोस रास्ते उपलब्ध कराकर बढ़ावा देना है।

उन्होंने सुरक्षित और कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए अनियमित प्रवासन, श्रम शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए सहयोग को मजबूत करने की संभावना पर भी चर्चा की।

संस्कृति और शैक्षिक आदान-प्रदान

दोनों नेताओं ने संस्कृति को द्विपक्षीय संवाद के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया और लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने 2026 में वेनिस कला बिएनले (वेनिस आर्ट बिएनले) में भारतीय राष्ट्रीय पवेलियन की सराहना की। दोनों नेताओं ने 2027 को “भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की मंशा व्यक्त की। इसके तहत विभिन्न पहलों का व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और भारत तथा इटली के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर एक बड़े प्रदर्शनी आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसे दोनों देशों के संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

दोनों नेताओं ने संस्थाओं, विशेषज्ञों और रचनात्मक उद्योगों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने के लिए एक इटली-भारत सांस्कृतिक मंच के संगठन को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारतीय और इतालवी स्थलों के बीच ट्विनिंग कार्यक्रम (ट्विनिंग प्रोग्राम) की शुरुआत की सराहना की, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करना है।

दोनों नेता दोनों देशों के बीच फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग को और विकसित करने पर सहमत हुए, जो उनके उद्योगों की ताकत और नवीन क्षमताओं तथा द्विपक्षीय सह-उत्पादन समझौते द्वारा प्रदान किए गए कानूनी ढांचे पर आधारित है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा दोहराई और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान पर भारत-इटली रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के विश्वविद्यालयों और उत्कृष्ट संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध

नेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में सहमति व्यक्त किए गए नए संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडे और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत किया। यह समझौता बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और विविधीकृत मूल्य श्रृंखलाओं तथा नए बाजार अवसरों के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा और मजबूती को सुदृढ़ कर संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

उन्होंने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद को मजबूत करने के समर्थन की पुनर्पुष्टि की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी का स्वागत किया और गतिशीलता सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की, जिसमें व्यापक गतिशीलता ढांचे पर समझौता ज्ञापन भी शामिल है।

बहुपक्षीय सहयोग

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रतिनिधिक और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए उसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद की रक्षा करने और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र और जी20 सहित अन्य वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।

अफ्रीका को दोनों देशों द्वारा दी जाने वाली रणनीतिक प्राथमिकता को स्वीकार करते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अफ्रीका में भारत की विकास साझेदारी और इटली की 'मैट्टेई योजना' के अनुरूप डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कनेक्टिविटी तथा बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय पहलों में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप, एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि की। उन्होंने भारत-प्रशांत महासागर पहल के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग स्तंभ में अपनी निरंतर साझेदारी की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति और उसके क्षेत्र तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक आपूर्ति के सामान्य प्रवाह को फिर से शुरू करने का भी आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जो लगातार अत्यधिक मानवीय पीड़ा और नकारात्मक वैश्विक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति जताई।

निष्कर्ष

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।