आज नवरात्र और नव वर्ष के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के तीन लाख गरीब परिवार अपने नए घर में प्रवेश कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
सरकार गरीब आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिंतित है: प्रधानमंत्री
सरकार आदिवासी समाज के विकास के लिए विशेष अभियान चला रही है: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

छत्तीसगढ़ महतारी की जय!

रतनपुर वाली माता महामाया की जय!

कर्मा माया की जय! बाबा गुरु घासीदास की जय!

जम्मो संगी-साथी-जहुंरिया,

महतारी-दीदी-बहिनी अउ सियान-जवान,

मन ला जय जोहार !

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका जी, यहां के लोकप्रिय और ऊर्जावान मुख्‍यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी मनोहर लाल जी, इसी क्षेत्र के सांसद और केंद्र में मंत्री तोखन साहू जी, छत्तीसगढ़ विधानसभा के स्‍पीकर मेरे परम मित्र रमन सिंह जी, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा जी, अरुण साहू जी, छत्तीसगढ़ सरकार के सभी मंत्री गण, सांसद गण और विधायक गण और दूर-दूर से यहां आए मेरे भाइयों और बहनों!

आज से नववर्ष शुरू हो रहा है। आज पहला नवरात्रि है और ये तो माता महामाया की धरती है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका है। ऐसे में मातृशक्ति के लिए समर्पित इन नौ दिन छत्तीसगढ़ के लिए बहुत ही विशेष रहते हैं और मेरा परम सौभाग्य है कि नवरात्रि के पहले दिन मैं यहां पहुंचा हूं। अभी कुछ दिन पहले भक्त शिरोमणि माता कर्मा के नाम पर डाक टिकट भी जारी हुआ है। मैं आप सभी को इसकी बधाई देता हूं।

साथियों,

नवरात्रि का ये पर्व रामनवमी के उत्सव के साथ संपन्न होगा और छत्तीसगढ़ की तो, यहां की राम भक्ति भी अद्भुत है। हमारा जो रामनामी समाज है, उसने तो पूरा शरीर राम नाम के लिए समर्पित किया है। मैं प्रभु राम के ननिहाल वालों को, आप सभी साथियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। जय श्री राम!

साथियों,

आज के इस पावन दिवस पर मुझे मोहभट्टा स्वयंभू शिवलिंग महादेव के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ के विकास को और गति देने का अवसर मिला है। थोड़ी देर पहले 33 हजार 700 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसमें गरीबों के घर हैं, स्‍कूल हैं, रोड है, रेल है, बिजली है, गैस की पाइप लाइन हैं। यानी ये सारे प्रोजेक्‍ट्स छत्तीसगढ़ के नागरिकों को सुविधा देने वाले हैं। यहां नौजवानों के लिए नए रोजगार बनाने वाले हैं। आप सभी को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई।

साथियों,

हमारी परंपरा में किसी को भी आश्रय देना एक बहुत बड़ा पुण्य माना जाता है। लेकिन जब किसी के घर का सपना पूरा होता है, तो उससे बड़ा आनंद भला क्‍या हो सकता है। आज नवरात्रि के शुभ दिन, नव वर्ष पर छत्तीसगढ़ के तीन लाख गरीब परिवार अपने नए घर में गृह प्रवेश कर रहे हैं। मुझे अभी यहां तीन लाभार्थियों से मिलने का अवसर मिला और मैं देख रहा था उनके चेहरे पर खुशी नहीं समा रही थी और वो मां तो अपना यहां आनंद रोक ही नहीं पा रही थी। मैं इन सभी परिवारों को, तीन लाख परिवार साथियों, एक नए जीवन के लिए बहुत शुभकामनाएं देता हूं। इन गरीब परिवारों के सिर पर पक्की छत आप सभी की वजह से ही संभव हो पाई है। ये मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आपने मोदी की गारंटी पर भरोसा किया। छत्तीसगढ़ के लाखों परिवारों के पक्के घर का सपना पहले की सरकार ने फाइलों में गुमा दिया था और तब हमने गारंटी दी थी, ये सपना हमारी सरकार पूरा करेगी। और इसलिए विष्‍णु देव जी की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट में 18 लाख घर बनाने का निर्णय लिया गया। आज उसमें से तीन लाख घर बनकर तैयार हैं। मुझे खुशी इस बात की भी है, इसमें बहुत सारे घर हमारे आदिवासी क्षेत्रों में बने हैं। बस्तर और सरगुजा के अनेक परिवारों को भी अपने पक्के घर मिले हैं। जिन परिवारों की अनेक पीढ़ियों ने झोपड़ियों में बेहाल जीवन बिताया है, उनके लिए ये कितना बड़ा उपहार है, ये हम समझ सकते हैं और जो नहीं समझ सकते हैं, मैं उनको समझाना चाहता हूं। आप अगर रेलवे में या बस में यात्रा कर रहे हैं, जगह नहीं मिल रही है, खड़े-खड़े जा रहे हैं और अगर थोड़ी सी एकाध सीट मिल जाए, आपका आनंद कितना बड़ा रह जाता है, पता है न! एक-दो-तीन घंटे की यात्रा में बैठने की जगह मिल जाए, तो आपकी खुशियां अनेक गुना बढ़ जाती हैं। आप कल्पना कीजिए कि इन परिवारों ने पीढ़ी दर पीढ़ी झोपड़ी में जिंदगी गुजारी। आज जब उनको पक्का घर मिल रहा है, आप कल्‍पना कीजिए, उनकी जीवन की खुशियां कितनी उमंग से भरी होंगी। और जब ये सोचता हूं, ये देखता हूं, मुझे भी नई ऊर्जा मिलती है। देशवासियों के लिए रात-दिन काम करने का मन मजबूत हो जाता है।

साथियों,

इन घरों को बनाने के लिए भले ही सरकार ने मदद दी है। लेकिन घर कैसा बनेगा, ये सरकार ने नहीं, हर लाभार्थी ने खुद तय किया है। ये आपके सपनों का घर है और हमारी सरकार सिर्फ चारदीवारी ही नहीं बनाती, इन घरों में रहने वालों की जिंदगी भी बनाती है। इन घरों को Toilet, बिजली, उज्ज्वला की गैस, नल से जल, सभी सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास है। यहां मैं देख रहा हूं कि बहुत बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आई हैं। ये जो पक्के घर मिले हैं, इनमें से अधिकतर की मालिक हमारी माताएं-बहनें ही हैं। हजारों ऐसी बहनें हैं, जिनके नाम पर पहली बार कोई संपत्ति रजिस्टर हुई है। मेरी माताओं-बहनों, आपके चेहरे की ये खुशी, आपका ये आशीर्वाद, ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी है।

साथियों,

जब इतने सारे घर बनते हैं, लाखों की संख्या में घर बनते हैं, तो इससे एक और बड़ा काम होता है। अब आप सोचिए कि ये घर बनाता कौन है, इन घरों में लगने वाला सामान कहां से आता है, ये छुट-पुट का सामान कोई दिल्ली-मुंबई से थोड़ा आता है, जब इतने सारे घर बनते हैं, तो गांव में हमारे राज मिस्त्री, रानी मिस्त्री, श्रमिक साथी, सभी को काम मिलता है और जो सामान आता है, उसका फायदा भी तो स्‍थानीय छोटे-छोटे दुकानदारों को होता है। जो गाड़ी में, ट्रक में सामान लाते हैं, उनको होता है। यानी लाखों घरों ने छत्तीसगढ़ में बहुत सारे लोगों को रोजगार भी दिया है।

साथियों,

भाजपा सरकार, छत्तीसगढ़ के लोगों से किए गए, हर वादे को पूरा कर रही है। और अभी मुख्‍यमंत्री जी बता रहे थे कि पिछले दिनों जो स्‍थानिक स्‍वराज संस्थाओं के चुनाव हुए, त्रिस्‍तीय चुनाव और उसमें भी आपने जिस प्रकार से आशीर्वाद दिए हैं, आज मैं आया हूं, तो इसके लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

यहां बहुत बड़ी संख्या में अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थी आए हैं। आप सभी ने अनुभव किया है कि हमारी सरकार कितनी तेज़ी से अपनी गारंटियां पूरी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ की बहनों से हमने जो वादा किया था, वो पूरा कर के दिखाया। धान किसानों को 2 साल का बकाया बोनस मिला है, बढ़े हुए MSP पर धान की खरीदी की गई है। इससे लाखों किसान परिवारों को हज़ारों करोड़ रुपए मिले हैं। कांग्रेस की सरकार में यहां भर्ती परीक्षाओं में भी खूब घोटाले हुए, भाजपा सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में हुए घोटालों को लेकर जांच बिठाई है। और हमारी सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं करवा रही है। इन ईमानदार प्रयासों का नतीजा है कि भाजपा पर जनता का भरोसा बढ़ता जा रहा है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद अब निकाय चुनाव में भी यहां भाजपा का परचम लहराया है। छत्तीसगढ़ की जनता भाजपा सरकार के प्रयासों को अपना भरपूर समर्थन दे रही है।

साथियों,

छत्तीसगढ़ को राज्य बने 25 साल हो रहे हैं, ये वर्ष छत्तीसगढ़ का रजत जयंती वर्ष है, संयोग से यह साल अटल जी का जन्म शताब्दी वर्ष भी है। छत्तीसगढ़ सरकार, 2025 को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मना रही है। हमारा संकल्प है– हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के जितने भी प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, वो इसी संकल्प का हिस्सा है।

साथियों,

छत्तीसगढ़ को अलग राज्य इसलिए बनाना पड़ा था, क्योंकि यहां विकास का लाभ नहीं पहुंच पा रहा था। कांग्रेस के राज में यहां विकास का काम नहीं हो पाता था और जो काम होते भी थे, उसमें कांग्रेस वाले घोटाले कर देते थे। कांग्रेस को कभी आपकी चिंता नहीं रही। आपके जीवन की, आपकी सुविधाओं की, आपके बच्चों की चिंता हमने की है। हम विकास की योजनाओं को छत्तीसगढ़ के गांव-गांव तक ले जा रहे हैं। वहां एक बेटी कोई एक पेंटिंग बना के लाई है, बेचारी कब से हाथ ऊपर रख के खड़ी है। मैं जरा security वालों से कहूंगा जरा उस बेटी को, जरा पीछे बेटा नाम-पता लिख देना, मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा। जरा इसको कोई collect करके मेरे तक पहुंचा दे। बहुत-बहुत धन्यवाद बेटा, बहुत धन्यवाद। आज आप देखिए, यहां दूर-सूदूर के आदिवासी क्षेत्रों में भी अच्छी स़ड़कें पहुंच रही हैं। कई इलाकों में पहली बार ट्रेन पहुंच रही है, अभी मैंने यहां एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। अब यहां कहीं पहली बार बिजली पहुंच रही है, कहीं पाइप से पानी पहली बार पहुंच रहा है, कहीं नया मोबाइल टावर पहली बार लग रहा है। नए स्कूल-कॉलेज-अस्पताल बन रहे हैं। यानि हमारे छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी बदल रही है, तकदीर भी बदल रही है।

साथियों,

छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां शत-प्रतिशत रेल नेटवर्क बिजली से चलने लगा है। ये बहुत बड़ी उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ में इस समय करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए के रेल प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इस साल के बजट में भी छत्तीसगढ़ के लिए 7 हज़ार करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इससे छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में अच्छी रेल कनेक्टिविटी की मांग पूरी होगी। इससे आसपास के राज्यों से कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

साथियों,

विकास के लिए बजट के साथ-साथ नेक-नीयत भी ज़रूरी है। अगर कांग्रेस की तरह मन और मस्तिष्क में बेईमानी भरी हो, तो बड़े से बड़े खज़ाने भी खाली हो जाते हैं। यही स्थिति हमने कांग्रेस के शासन के दौरान देखी है। इस कारण, आदिवासी अंचलों तक विकास नहीं पहुंच पाया। हमारे सामने कोयले का उदाहरण है। छत्तीसगढ़ में बहुत बड़ी मात्रा में कोयला है। लेकिन यहां आपको जरूरत भर की बिजली नहीं मिल पाती थी। कांग्रेस के समय में बिजली की हालत खस्ताहाल थी, यहां पर बिजली के कारखानों पर उतना काम ही नहीं किया गया। आज हमारी सरकार यहां नए बिजली कारखाने लगवा रही है।

साथियों,

हम यहां सौर ऊर्जा से बिजली बनाने पर भी बहुत अधिक जोर दे रहे हैं। और मैं आपको एक और बड़ी शानदार योजना के बारे में बताऊंगा। मोदी ने एक ऐसी योजना शुरू की है, जिसमें आपका बिजली बिल जीरो हो जाएगा और घर में बिजली पैदा करके आप कमाई भी कर सकेंगे। इस योजना का नाम है- पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना। इसके लिए हमारी सरकार हर घर को सोलर पैनल लगाने के लिए 70-80 हजार रुपए की मदद दे रही है। यहां छत्तीसगढ़ में भी 2 लाख से ज्यादा परिवारों ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में अपना रजिस्ट्रेशन करा दिया है। आप भी इस योजना से जुड़ेंगे तो आपको बहुत लाभ होगा।

साथियों,

नेक नीयत का एक और उदाहरण, गैस पाइपलाइन भी है। छत्तीसगढ़ समंदर से दूर है। तो यहां तक गैस पहुंचाना इतना आसान नहीं है। पहले जो सरकार थी, उसने गैस पाइपलाइन पर भी जरूरी खर्च नहीं किया। हम इस चुनौती का भी समाधान कर रहे हैं। हमारी सरकार, यहां गैस पाइप लाइनें बिछा रही है। इससे पेट्रोलियम से जुड़े उत्पादों को ट्रकों से ट्रांसपोर्ट करने की मजबूरी कम होगी। ये चीज़ें कम कीमत में आप लोगों को मिलने लगेंगी। गैस पाइपलाइन आने से, यहां CNG से गाड़ियां चल पाएंगी। इसका एक और फायदा होगा। घरों में खाना बनाने की गैस अब पाइप से भी आ पाएगी। जैसे पाइप से पानी आता है किचन में, वैसे ही अब गैस आएगा। हम अभी 2 लाख से ज्यादा घरों में सीधे पाइप से गैस पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। गैस उपलब्ध होने से यहां छत्तीसगढ़ में नए उद्योग लगाना भी संभव हो पाएगा। यानि बड़ी संख्या में यहीं पर रोजगार बनेंगे।

साथियों,

बीते दशकों में कांग्रेस की नीतियों की वजह से छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक राज्यों में नक्सलवाद को बढ़ावा मिला। देश में जहां-जहां अभाव रहा, जो-जो क्षेत्र विकास से पीछे रहे, वहां-वहां नक्सलवाद फलता-फूलता रहा। लेकिन जिस दल ने 60 साल सरकार चलाई, उसने क्या किया? उसने ऐसे जिलों को पिछड़ा घोषित कर, अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। हमारे नौजवानों की अनेक पीढ़ियां खप गईं। अनेक माताओं ने अपने लाडले खो दिए। अनेक बहनों ने अपना भाई खो दिया।

साथियों,

उस समय की सरकारों की ये उदासीनता, ये आग में घी डालने जैसा था। आपने तो खुद सहा है, देखा है, छत्तीसगढ़ में कितने ही जिलों में सबसे पिछड़े आदिवासी परिवार रहते थे। उनकी कांग्रेस सरकार ने कभी सुध नहीं ली। हमने गरीब आदिवासियों के शौचालय की चिंता की, स्वच्छ भारत अभियान चलाया, हमने गरीब आदिवासियों के इलाज की चिंता की, 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना चलाई, हमने आपके लिए सस्ती दवा की चिंता की, अस्सी परसेंट छूट देने वाले पीएम जन औषधि केंद्र खोले।

साथियों,

जो लोग सामाजिक न्याय पर झूठ बोलते हैं, उन्हीं लोगों ने आदिवासी समाज को भुला रखा था। इसलिए तो मैं कहता हूं, जिसको किसी ने नहीं पूछा, उसको मोदी पूजता है। हम आदिवासी समाज के विकास के लिए भी विशेष अभियान चला रहे हैं। हमने आपके लिए धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान शुरू किया है। इसके तहत करीब 80 हज़ार करोड़ रुपए आदिवासी क्षेत्रों में खर्च किए जा रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ के करीब 7 हज़ार आदिवासी गांवों को फायदा हो रहा है। आप भी जानते हैं कि आदिवासियों में भी अति पिछड़ी आदिवासी जनजातियां होती हैं। पहली बार हमारी सरकार ने ऐसे अति पिछड़े आदिवासियों के लिए पीएम जनमन योजना बनाई है। इसके तहत, छत्तीसगढ़ के 18 जिलों में 2 हज़ार से अधिक बसाहटों में काम किए जा रहा हैं। देशभर में पिछड़ी जनजातियों की बस्तियों में करीब 5 हज़ार किलोमीटर की सड़कें स्वीकृत की गई हैं। इनमें से करीब आधी सड़कें, छत्तीसगढ़ में ही बनाई जानी हैं, यानि ढाई हजार किलोमीटर की सड़कें यहां पीएम जनमन योजना के तहत बनेंगी। आज इस योजना के तहत ही यहां अनेक साथियों को पक्के घर भी मिले हैं।

साथियों,

आज डबल इंजन सरकार में छत्तीसगढ़ की स्थिति तेज़ी से बदल रही है। जब सुकमा जिले के एक स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र मिलता है, तो नया विश्वास जगता है। जब कई सालों बाद दंतेवाड़ा में फिर से स्वास्थ्य केंद्र शुरू होता है, तो नया विश्वास जगता है। ऐसे ही प्रयासों के कारण, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थाई शांति का नया दौर नज़र आ रहा है। अभी दिसंबर में जब मन की बात हुई, तो मैंने बस्तर ओलंपिक की चर्चा की थी। आपने भी वो मन की बात जरूर सुना होगा, बस्तर ओलंपिक में जिस प्रकार हज़ारों नौजवानों ने हिस्सा लिया, वो छत्तीसगढ़ में आ रहे बदलाव का प्रमाण है।

साथियों,

मैं छत्तीसगढ़ के नौजवानों का एक शानदार भविष्य अपनी आंखों के सामने देख रहा हूं। छत्तीसगढ़ जिस प्रकार, नई शिक्षा नीति को लागू कर रहा है, वो बहुत ही शानदार काम हो रहा है। देशभर में 12 हज़ार से अधिक आधुनिक पीएम श्री स्कूल शुरु हो चुके हैं। इनमें से करीब साढ़े तीन सौ, छत्तीसगढ़ में हैं। ये पीएम श्री स्कूल, दूसरे स्कूलों के लिए आदर्श बनेंगे। इससे राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था का स्तर ऊपर उठेगा। छत्तीसगढ़ में दर्जनों एकलव्य मॉडल स्कूल पहले से ही शानदार काम कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अनेक स्कूल फिर से शुरू किए गए हैं। आज छत्तीसगढ़ में विद्या समीक्षा केंद्र की भी शुरुआत हुई है। ये भी देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा कदम है। इससे स्कूलों में शिक्षा का स्तर और अच्छा होगा, क्लास में शिक्षकों की, विद्यार्थियों की रियल टाइम में मदद भी हो पाएगी।

साथियों,

हमने आपसे किया एक और वादा पूरा किया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत, यहां हिंदी में भी मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हो रही है। अब मेरे गांव, गरीब, आदिवासी परिवारों के युवाओं के सपनों को पूरा करने में भाषा कोई बाधा नहीं बनेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में मेरे मित्र रमन सिंह जी ने जो मजबूत नींव रखी थी, उसे वर्तमान सरकार और सशक्त कर रही है। आने वाले 25 वर्षों में हमें इस नींव पर विकास की एक भव्य इमारत बनानी है। छत्तीसगढ़ संसाधनों से भरपूर है, छत्तीसगढ़ सपनों से भरपूर है, छत्तीसगढ़ सामर्थ्य से भरपूर है। 25 साल बाद, जब हम छत्तीसगढ़ की स्थापना के 50 वर्ष मनाएं, तो छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में हो, इस लक्ष्य को हम पाकर के ही रहेंगे। मैं आपको फिर विश्वास दिलाऊंगा, यहां विकास का लाभ, छत्तीसगढ़ के हर परिवार तक पहुंचे, इसके लिए हम कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे। एक बार फिर आप सभी को इतने सारे विकास कार्यों के लिए और नव वर्ष के आरंभ में ही बहुत बड़े सपने लेकर के जो यात्रा आरंभ हो रही है, उसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद!

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आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन और विकास में अहम भूमिका निभाई: पीएम मोदी
January 28, 2026
Ayurveda in India has transcended time and region, guiding humanity to understand life, achieve balance and live in harmony with nature: PM
We have consistently focused on preventive health, the National AYUSH Mission was launched with this vision: PM
We must adapt to the changing times and increase the use of modern technology and AI in Ayurveda: PM

नमस्कारम !

केरला के गवर्नर श्रीमान राजेंद्र आर्लेकर जी,आर्य वैद्य शाला से जुड़े सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

आज इस गरिमामय अवसर पर, आप सभी से जुड़ना मेरे लिए खुशी का अवसर है। आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में, आर्य वैद्यशाला का महत्वपूर्ण योगदान है। अपने 125 वर्षों की यात्रा में इस संस्था ने, आयुर्वेद को इलाज की एक सशक्त व्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। आज इस अवसर पर, मैं आर्य वैद्यशाला के संस्थापक,वैद्यरत्नम पी एस वरियर जी के योगदानों को याद करता हूं। आयुर्वेद के प्रति उनकी approach और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण, आज भी हमें प्रेरित करता है।

साथियों,

केरला की आर्य वैद्यशाला, भारत की उस उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या एक क्षेत्र में सीमित नहीं रहा। हर दौर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने, और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का रास्ता दिखाया है। आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में संस्था के अस्पताल, आयुर्वेदिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के मरीज शामिल होते हैं। आर्य वैद्यशाला ने ये भरोसा अपने काम से बनाया है। जब लोग कष्ट में होते हैं, तो आप सभी उनके लिए बहुत बड़ी उम्मीद बनते हैं।

साथियों,

आर्य वैद्यशाला के लिए सेवा, केवल एक विचार नहीं है,ये भावना उनके Action, Approach और Institutions में भी दिखाई देती है। संस्था का Charitable Hospital पिछले 100 वर्षों से, 100 वर्ष ये कोई कम समय नहीं है, 100 वर्षों से निरंतर लोगों की सेवा में जुटा है। इसमें अस्पताल से जुड़े सभी लोगों का योगदान है। मैं अस्पताल के वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी लोगों का भी अभिनंदन करता हूं। चैरिटेबल अस्पताल की 100 वर्षों की यात्रा पूरी करने के लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। केरला के लोगों ने आयुर्वेद की जिन परंपराओं को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। आप उन परंपराओं का संरक्षण भी कर रहे हैं, संवर्धन भी कर रहे हैं।

साथियों,

देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को साइलो में देखा जाता रहा। पिछले 10-11 वर्षों में इस अप्रोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को होलिस्टिक नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक Umbrella के नीचे लाए हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। हमने preventive health पर निरंतर फोकस किया है। इसी सोच के साथ, नेशनल आयुष मिशन लॉन्च किया गया, 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए, इन सेंटर्स में योग, preventive care, community health services, ये सब कुछ उपलब्ध कराई जाती हैं। हमने देश के अन्य अस्पतालों को भी आयुष सेवाओं से जोड़ा, आयुष दवाओं की regular supply पर भी ध्यान दिया। इसका उद्देश्य साफ है, कि भारत के परंपरागत चिकित्सा इस ज्ञान का लाभ, देश के कोने-कोने के लोगों को मिले।

साथियों,

सरकार की नीतियों का स्पष्ट प्रभाव आयुष सेक्टर पर दिखाई दिया है। AYUSH manufacturing sector तेज़ी से आगे बढ़ा है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए, सरकार ने Ayush Export Promotion Council की स्थापना की है। हमारी कोशिश है कि AYUSH products और services को, global markets में बढ़ावा मिल सके। इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव भी हम देख रहे हैं। साल 2014 में भारत से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होते थे। वहीं अब भारत से 6500 करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा फायदा देश के किसानों को भी हो रहा है।

साथियों,

भारत आज AYUSH based Medical Value Travel के लिए, एक भरोसेमंद destination के रूप में भी उभर रहा है। इसलिए हमने, AYUSH Visa, जैसे कदम भी उठाए हैं। इससे विदेशों से आने वाले लोगों को आयुष चिकित्सा की बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

साथियों,

आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति को प्रमोट करने के लिए, सरकार हर बड़े मंच पर इसे गर्व से आगे रख रही है। चाहे ब्रिक्स देशों का सम्मेलन हो, या जी-20 देशों की बैठक हो, जहां भी अवसर मिला, मैंने आयुर्वेद को होलिस्टिक हेल्थ के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। गुजरात के जामनगर में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन- WHO के Global Traditional Medicine Centre की स्थापना भी की जा रही है। जामनगर में ही Institute of Teaching and Research in Ayurveda, इसने काम करना शुरू कर दिया है। आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, गंगा नदी के किनारों पर औषधीय खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

साथियों,

आज मैं आप सभी से देश की एक और उपलब्धि साझा करना चाहता हूं। आप सभी जानते हैं कि अभी European Union के साथ trade agreement की ऐतिहासिक घोषणा हुई है। मुझे ये बताते हुए खुशी है कि ये trade agreement, Indian traditional medicine services और practitioners को एक बड़ा boost देगा। EU member states में जहाँ regulations मौजूद नहीं हैं, वहाँ हमारे AYUSH practitioners, भारत में हासिल की गई अपनी professional qualifications के आधार पर, अपनी services प्रदान कर सकेंगे। इसका बहुत बड़ा लाभ आयुर्वेद और योग से जुड़े हमारे युवाओं को होगा। इस एग्रीमेंट से यूरोप में आयुष wellness centers की स्थापना में भी मदद मिलेगी। आयुर्वेद-आयुष से जुड़े आप सभी महानुभावों को मैं इस एग्रीमेंट की बधाई देता हूं।

साथियों,

आयुर्वेद के माध्यम से भारत में सदियों से इलाज का काम होता रहा है। लेकिन ये भी दुर्भाग्य रहा है कि, हमें देश में और ज्यादातर विदेशों में, लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह है, एविडेंस बेस्ड रिसर्च की कमी, रिसर्च पेपरर्स की कमी, जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। इसलिए मुझे इस बात की खुशी है कि, आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद को साइंस और रिसर्च की कसौटी पर लगातार परखा है। ये CSIR और I.I.T जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है। Drug Research, Clinical Research और कैंसर केयर पर भी आपका फोकस रहा है। आयुष मंत्रालय के सहयोग से, Cancer Research के लिए Centre of Excellence की स्थापना करना, इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साथियों,

अब हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलजी और AI का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए, अलग-अलग पद्धितियों से इलाज के लिए, काफी कुछ इनोवेटिव किया जा सकता है।

साथियों,

आर्य वैद्यशाला ने दिखाया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ चल सकती हैं, और स्वास्थ्य सेवा लोगों के जीवन में भरोसे का आधार बन सकती है। इस संस्था ने आयुर्वेद की पुरानी समझ को सहेजते हुए, आधुनिक जरूरतों को अपनाया है। इलाज को व्यवस्थित बनाया गया है और मरीजों तक सेवाएं पहुंचाई गई हैं। मैं आर्य वैद्यशाला को इस प्रेरक यात्रा के लिए फिर से बधाई देता हूं। मेरी कामना है कि यह संस्था आने वाले वर्षों में भी, इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाती रहे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कारम।