प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा में पिछले एक साल में हुई तेज प्रगति को स्पष्ट तौर पर बताया
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदी का दूसरा क्वार्टर विकसित भारत के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर नागरिक महसूस करता है कि देश एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है और उसे पीछे मुड़े बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं के लिए यह अनंत अवसरों का समय है
प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे कितनी भी चुनौतियां हों, हमारे पास 140 करोड़ समाधान हैं
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब पीछे नहीं रहेगा, वह अब आगे बढ़कर नेतृत्व करेगा

आदरणीय सभापति जी,

राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर आभार व्यक्त करने के लिए मैं उपस्थित हुआ हूं।

आदरणीय सभापति जी,

इस धन्यवाद प्रस्ताव पर समर्थन के लिए इस सदन में अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मैं अपना सौभाग्य मानता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

विकसित भारत की यात्रा में बीते वर्ष देश के तेज प्रगति से विकास के वर्ष रहे हैं। जीवन के हर क्षेत्र में, समाज के हर वर्ग को, उनके जीवन में परिवर्तन का एक कालखंड रहा है, एक सही दिशा में, तेज गति से देश आगे बढ़ रहा है। आदरणीय राष्ट्रपति जी ने बहुत ही बढ़िया तरीके से, पूरी संवेदनशीलता के साथ, उन्होंने इस विषय को हम सबके सामने प्रस्तुत किया है।

आदरणीय सभापति जी,

मेरी एक प्रार्थना है, आदरणीय खड़गे जी की उम्र देखते हुए, वो बैठ करके भी नारे बोल सकते हैं, तो अच्छा होगा, ताकि उनको कष्ट ना हो, पीछे नौजवान बहुत लोग हैं, तो खड़गे जी को आप बैठते-बैठते भी नारे वहीं से अनुमति दे दीजिए।

आदरणीय सभापति जी,

राष्ट्रपति जी ने इस देश के मध्यम वर्ग, इस देश के निम्न मध्यम वर्ग, इस देश के गरीब, इस देश के गांव, इस देश के किसान, महिलाएं, विज्ञान हो, प्रौद्योगिकी हो, कृषि हो, सभी विषयों को लेकर के बहुत ही विस्तार से भारत के प्रगति का एक स्वर संसद में गूंजा है। देश के नौजवान भारत के सामर्थ्य को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं, इसकी भी विस्तार से चर्चा की है। हर वर्ग के सामर्थ्य को उन्होंने शब्दांकित किया है, और इतना ही नहीं, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रति एक विश्वास व्यक्त किया है, ये अपने आप में, हम सबके लिए प्रेरक है।

आदरणीय सभापति जी,

21वीं सदी का प्रथम क्वार्टर पूरा हो चुका है, लेकिन ये दूसरा क्वार्टर जैसे पिछली शताब्दी में भारत की आजादी के जंग में दूसरा क्वार्टर बहुत ही निर्णायक रहा था। मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूं कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में ये दूसरा क्वार्टर भी उतना ही सामर्थ्यवान होने वाला है, उतना ही तेज गति से आगे बढ़ने वाला है।

और इसलिए आदरणीय सभापति जी,

राष्ट्र का हर व्यक्ति ये महसूस कर रहा है कि, एक अहम पड़ाव पर हम पहुंच चुके हैं, अब ना हमें रुकना है, ना हमें पीछे मुड़कर के देखना है, अब हमें आगे ही आगे देखना है, और तेज गति से चलना है, और लक्ष्य को प्राप्त करके ही हमें सांस लेनी हैं, उसे दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

वर्तमान में अगर हम देखें तो भारत के भाग्य के अनेक सुयोग एक साथ हमें नसीब हुए हैं। ये अपने आप में बहुत ही उत्तम संयोग है ऐसा मैं मानता हूं। सबसे बड़ी बात है, विश्व के समृद्ध से समृद्ध देश भी बुजुर्ग होते जा रहे हैं, वहां की आबादी उर्म के उस पड़ाव पर पहुंची है, हम जिन्हें बुजुर्ग के रूप में जानते थे। हमारा देश ऐसा है, जो विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है, उसी समय दिनों-दिन हमारा देश युवा होता जा रहा है, युवा आबादी वाला देश है, ये अपने आप में एक बहुत अच्छा सुयोग है।

आदरणीय सभापति जी,

दूसरी तरफ मैं देख रहा हूं, जिस प्रकार से विश्व का भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है, और उसमें भी विश्व भारत के टैलेंट का माहात्म्य समझ रहा है। हमारे पास आज दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण टैलेंट पूल है, युवा टैलेंट पूल है, जिसके पास सपने भी हैं, संकल्प भी है, सामर्थ्य भी है, और इसलिए ये दूसरा सुयोग है, शक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है।

आदरणीय सभापति जी,

भारत आज विश्व में जो चुनौतियां पैदा हो रही हैं, उन चुनौतियों का समाधान देने वाला एक देश आशा की किरण बना हुआ है, और हम समाधान दे रहे हैं। वैसा एक महत्वपूर्ण सुयोग है कि आज मेजर इकोनॉमी में भारत का ग्रोथ बहुत हाई है, और हाई ग्रोथ और लो इन्फ्लेशन, ये बहुत ही यूनिक संयोग है, और ये हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती को प्रदर्शित करता है।

आदरणीय सभापति जी,

हम जिस गति से आगे बढ़ रहे हैं, जब हमें देश की जनता ने सेवा करने का मौका दिया, तब ‘Fragile Five’ के रूप में ये देश जाना जाता था, जब हमें अवसर मिला तब, देश आजाद हुआ तब हम दुनिया में 6 नंबर की इकोनॉमी थे लेकिन इन लोगों ने ऐसे हाल करके रखा कि 11 पर पहुंचा दिया, आज हम तीन पर जाने की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

आज कोई भी सेक्टर देख लीजिए चाहे साइंस हो, चाहे स्पेस हो, चाहे स्पोर्ट्स हो, हर क्षेत्र में आज भारत एक कॉन्फिडेंस के साथ, आत्मविश्वास से भरा हुआ भारत है। कोविड के बाद विश्व में जो स्थितियां पैदा हुई, और ऐसी नई-नई चीजें जुड़ती गई, आज दुनिया संभल नहीं पा रही है, ऐसे में साफ-साफ नज़र आ रहा है कि दुनिया एक नए ग्लोबल ऑर्डर की तरफ, नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ आगे बढ़ रहा है। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद, एक वर्ल्ड ऑर्डर बना था, अब एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ विश्व बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, और सबसे बड़ी खुशी की बात है, सारी घटनाओं का अराजनीतिक तरीके से, निष्पक्ष भाव से विश्लेषण करेंगे, तो झुकाव भारत की तरफ है। विश्व मित्र के रूप में, विश्व बंधु के रूप में, आज भारत अनेक देशों का विश्वस्थ पार्टनर बना है, और हम कंधे से कंधा मिला करके, विश्व कल्याण की दिशा में भी अपनी उचित भूमिका निभा रहे हैं, अपने सामर्थ्य से सहाय भी कर रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

आज पूरा विश्व ग्लोबल साउथ की चर्चा करता है, लेकिन उस चर्चा के सूत्रधार के रूप में आज भारत वैश्विक मंचों पर ग्लोबल साउथ की बुलंद आवाज बन गया है। अनेक देशों के साथ आज भारत ‘फ्यूचर रेडी ट्रेड डील्स’ कर रहा है। पिछले कुछ ही समय में दुनिया के महत्वपूर्ण 9 बड़े देशों के साथ, 9 बड़े, हमारे ट्रेड डील हुए हैं, और उसमें “Mother of all Deals” एक साथ 27 देश के साथ, यूरोपियन यूनियन के साथ। जो लोग थक गए, बेचारे चले गए, लेकिन कभी ना कभी उनको जवाब देना पड़ेगा कि देश की ऐसी हालत कैसे बना कर रखी थे कि दुनिया का कोई देश हमसे डील करने के लिए आगे नहीं आता था। आपने कोशिश की होगी, पीछे-पीछे-पीछे बहुत चक्कर लगाए होंगे, लेकिन किसी ने आपकी तरफ देखा भी नहीं होगा। क्या स्थिति ऐसी पैदा हुई? दुनिया के देश ऐसे ही भारत के साथ डील नहीं कर रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

इसके पीछे सबसे बड़ी बात डेवलप्ड कंट्रीज, एक डेवलपिंग कंट्री के साथ डील करता है ना, वो अपने आप में भी अर्थ जगत के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है और मेरे लिए नई बात नहीं है। जब मुझे गुजरात में सेवा करने का अवसर मिला था, तो मैं एक वाइब्रेंट गुजरात समिट करता था और मेरे लिए गर्व की बात थी कि एक स्टेट, हिंदुस्तान का एक स्टेट, मेरे इस वाइब्रेंट समिट की पार्टनर कंट्री डेवलप कंट्री जापान हुआ करता था। एक राज्य ने यह सामर्थ्य दिखाया था, आज मेरा देश यह सामर्थ्य दिखा रहा है। यह तब होता है, जब आपके पास आर्थिक सामर्थ्य हो, आपके पास आपके नागरिकों के अंदर देशवासियों में एक ऊर्जा हो और खास करके मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम हो, तब जाकर के विश्व आपके साथ डील करने के लिए आगे आता है। वोट बैंक की राजनीति में डूबे हुए लोगों ने कभी भी देश के ऐसे अनेक पहलुओं पर मजबूती देनी चाहिए, यह कभी उनकी प्राथमिकता नहीं रही और उसी का परिणाम है। और जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है, मैं साफ-साफ कहना चाहता हूं और मेरे शब्दों पर भरोसा नहीं है, तो मैं देश के लोगों को कहूं कुछ मत करो, सिर्फ लाल किले से कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के जो भाषण है, सिर्फ उन भाषणों के एनालिसिस कर लो, आपको साफ-साफ लगेगा कि ना उनके पास कोई सोच थी, ना उनके पास कोई विजन था और ना ही कोई इच्छाशक्ति थी और इसका परिणाम है कि देश को इतना भुगतना पड़ा।

आदरणीय सभापति जी,

मैं कोटि-कोटि देशवासियों का आभारी हूं, उन्होंने सेवा करने का अवसर दिया। हमारी काफी शक्ति उनकी गलतियों को ठीक करने में जा रही है। दुनिया के मन में जो उनके समय की छवि है, उस छवि को धोने में मेरी ताकत लगती है। ऐसा बर्बाद करके रखा हुआ था और इस काम के लिए हमने फ्यूचर रेडी पॉलिसीज़ पर बल दिया है और आज आपने देखा होगा, देश नीति के आधार पर चल रहा है, पॉलिसीज़ के आधार पर चल रहा है, adhocism को हमने त्याग कर दिया है और उसके कारण विश्व का विश्वास बनता है। हमने रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म के मंत्र को लेकर के आगे बढ़े और आज स्थिति ऐसी है कि देश रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। हमने स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स किए हैं, प्रोसेस से जुड़े रिफॉर्म्स किए हैं, पॉलिसीज़ में रिफॉर्म किए हैं। हमारा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, हमारी उद्यमी, यह सशक्त हो, भारत की हर चीज का वैल्यू एडिशन हो, उस दिशा में हमने प्रयास किया है और मैं आज विश्वास के साथ कह सकता हूं, आज भारत विश्व के साथ स्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जब मैं विश्व के CEO फोरम की समिट देखता हूं, आज दुनिया हमारे उद्यमियों को समानता के रूप में देखती है, और जब पिछले दिनों सभी दलों के डेलिगेशन विश्व में गए थे, यह भाव उन्होंने भी अनुभव किया और आकर के मुझे सभी दल के माननीय सांसदों ने अपने अनुभव बताएं, वो बड़ा गर्व से कह रहे थे कि हां बराबरी से बात हो रही है। यह हमारे लिए अपने आप में बात है।

आदरणीय सभापति जी,

MSME का बहुत बड़ा नेटवर्क जितना सामर्थ्यवान होता है, वह लंबे अरसे तक इकोनॉमी को एक ताकत देता है। हमने उस दिशा में बल दिया है और हमने कई रिफॉर्म्स किए हैं। आज हमारे MSMEs नेटवर्क पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है। बड़े-बड़े हो सकता है, हम हवाई जहाज नहीं बनाते होंगे, लेकिन कई हवाई जहाज होते है, हवाई जहाज हैं, जिसमें कई पुर्जे मेरे देश के छोटे से छोटे MSMEs बनाते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

देश में हुए इन प्रयासों का नतीजा सबके सामने है। बड़े-बड़े देश भारत के साथ व्यापारिक संबंध बनाने के लिए बहुत ही आतुर है। यूरोपीय संघ का ट्रेड डील हो, अमेरिका के साथ अभी-अभी हुआ, जो ट्रेड डील हो और कल हमारे पीयूष जी ने सदन में विस्तृत जानकारी भी दी है और पूरा विश्व खुल करके इस ट्रेड डील की तारीफ कर रहा है और उसमें जब यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील हुआ, तो विश्व को एक भरोसा हुआ कि अब वैश्विक स्तर पर स्थिरता की संभावना बढ़ेगी। अमेरिका के साथ ट्रेड डील होने के बाद विश्व को और भरोसा हो गया की जो स्थिरता का एहसास हो रहा था, अब गति का भी एहसास होने लगा है और यह विश्व के लिए शुभ संकेत है।

आदरणीय सभापति जी,

इसका सबसे बड़ा लाभ हमारे देश के नौजवानों को होगा और जब मैं नौजवान कहता हूं, तो उसमें मध्यम वर्ग का भी नौजवान होता है, शहर का नौजवान भी होता है, गांव का नौजवान भी होता है। बेटा भी होता है, बेटी भी होती है और इसलिए उसे टुकड़ों में न देखा जाए। मेरे देश के युवा के सामर्थ्य का हमें गौरव करना चाहिए और उनके लिए पूरा विश्व बाजार अब खुल चुका है। अब उनके लिए अवसर ही अवसर हैं और मैं उनको कहता हूं, आइए दोस्तों, मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर के खड़ा हूं, हिम्मत कीजिए! बढ़िए! देश आपके साथ खड़ा है और दुनिया आपका स्वागत करने के लिए इंतजार कर रही है।

आदरणीय सभापति जी,

जिस प्रकार से दुनिया में हमारे युवा प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है, even caregivers की मांग बढ़ रही है। हर कोई मिलता है, हमें इस प्रकार के लोग चाहिए, कुछ लोग तो अपना स्पेशल ऑफिसेज यहां बना रहे हैं रिक्रूट करने के लिए, योग्‍य टैलेंट की खोज के लिए। इसका मतलब हुआ कि भारत के प्रोफेशनल्स के लिए भी विश्व में बहुत बड़े अवसर बन रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

यह संसद का उच्च सदन, यह एक प्रकार से राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है और अब जो चर्चा की बारीकियां मैंने देखीं, मेरा मन कहता है कि थोड़ा स्‍तर इसका ऊपर होना चाहिए था और वहां से तो ज्यादा होना है, वह तो कितने साल तक सरकारों में रहे हैं। वहां से जरा चर्चा का स्तर ऊंचा होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने यह मौका भी गंवा दिया। देश उन पर कैसे भरोसा कर सकता है।

आदरणीय सभापति जी,

मैं कल एक माननीय सदस्य को सुन रहा था, यूं तो वो अपने आप को राजा कहलाने में बहुत गर्व करते हैं, लेकिन वह आर्थिक असमानता की चर्चा कर रहे थे, बताइए! जो खुद को राजा माने और वह आर्थिक असमानता की बात करें, तब लगता है कि क्या यही दिन देखने के बाकी रह गए था क्या?

आदरणीय सभापति जी,

हमारे टीएमसी के साथियों ने काफी कुछ कहा। जरा खुद तो अपने गिरेबान में देखें। निर्मम सरकार, पतन के जितने भी पैरामीटर हैं, उन सब पैरामीटर्स में नए-नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं और यहां उपदेश दे रहे हैं। क्या हल करके रखा हुआ है? ऐसी निर्मम सरकार से वहां के लोगों का भविष्य अंधकार के अंदर डूब रहा है, लेकिन उनका कोई परवाह नहीं है। सत्ता सुख के सिवा कोई आकांक्षा नहीं है और वह यहां उपदेश देते हैं। घुसपैठ दुनिया का समृद्ध से समृद्ध देश भी अपने यहां गैरकानूनी नागरिकों को बाहर निकाल रहा है। हमारे देश में घुसपैठियों को बचाने के लिए अदालतों तक के ऊपर प्रेशर पैदा किया जा रहा है। मेरे देश का नौजवान कैसे ऐसे लोगों को माफ करेगा, जो घुसपैठियों की वकालत करने के लिए ताकत लगा रहे हैं, और घुसपैठिए मेरे देश के नौजवानों के हक छीन रहे हैं, उनकी रोजी-रोटी छीन रहे हैं, आदिवासियों की जमीन छीन रहे हैं, बेटे-बेटियों के जिंदगी पर खतरे पैदा हो रहे हैं, लेकिन उनके लिए महिलाओं पर अत्याचार होते रहे, होते रहे। सत्ता नीति के सिवाय कुछ करना नहीं और वह यहां आकर हमें उपदेश दे रहे हैं और ऐसे चिंताजनक सभी विषयों पर आंखें मूंदकर के बैठे हुए वो लोग हैं। एक हमारे माननीय सदस्य काफी कुछ बोल रहे थे, जिनकी पूरी सरकार शराब में डूब गई हो, जिनके शीशमहल घर-घर में नफरत का कारण बन गए, अब शायद उनको ब्लैक शब्‍द ज्यादा पसंद है, हर एक का अपना-अपना एक भूतकाल होता है। पता नहीं ब्‍लैक के साथ उनका क्या पुराना रिश्ता है।

आदरणीय सभापति जी,

ऐसे सभी साथियों से मैं आज जरूर कहूंगा, तुम कितना दुनिया को धोखा दोगे, तुम कितना दुनिया को धोखा दोगे, आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छुपाओगे? कांग्रेस हो, टीएमसी हो, डीएमके हो, लेफ्ट हो, यह दशकों से केंद्र में सत्ता में रहे हैं, सत्ता के भागीदार रहे हैं। राज्यों में भी उनको सरकारें चलाने का अवसर मिला है, लेकिन उनकी पहचान क्या बनी? आज डील की चर्चा होती है, तो गौरव से कहते हैं, तब डील की चर्चा होती थी, तो बोफोर्स डील याद आता था, यह डील होते थे। उन्होंने सिर्फ जेब भरने का काम किया। नागरिकों के जीवन में बदलाव आना, यह उनके प्राथमिकता नहीं थी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं कुछ उदाहरणों के साथ भी बात बताना चाहता हूं क्‍योंकि यहां चर्चा में यह सारे विषय आए हैं और इसलिए मुझे यह कहना बहुत जरूरी है। अब एक उदाहरण देता हूं मैं बैंकिंग सेक्टर का, बैंकिंग सेक्टर एक प्रकार से अर्थव्यवस्था की एक रीढ होता है। 2014 से पहले, फोन बैंकिंग का कालखंड था। नेता के फोन जाते थे और उसके आधार पर करोड़ों रुपया दे दिए जाते थे और गरीबों को तो बैंकों में दुतकार मिलती थी, नफरत मिलती थी। देश की 50% से ज्यादा आबादी बैंक के दरवाजे तक नहीं देख पाई थी। कांग्रेस के नेताओं के फोन पर अरबों रुपए लोगों को दे दिए गए और जो ले जाते थे, वह अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी मान करके पैसे हजम कर जाते थे, यही खेल चलता रहा। कांग्रेस और यूपीए के राज में और आज जो इंडी एलायंस बनकर के बैठे हैं, उनके राज्य में बैंकिंग व्यवस्था तबाही के कगार पर खड़ी थी। मैं नया-नया प्रधानमंत्री के पद का दायित्व मुझे मिला, मैं एक देश के मुखिया से मैं मिला, ऐसे ही बात कर रहा था। मैंने कहा बैंकिंग की दृष्टि से हमें कुछ आगे बढ़ना चाहिए, उन्होंने कहा पहले एक बार साहब जरा आप अभी नए-नए हो, आपके बैंकों की व्यवस्था का अध्ययन कर लीजिए। हम कैसे हिम्मत करें? एक देश के नेता को यह जानकारियां थी, उसने मुझे बताया। यहां इनको कोई परवाह ही नहीं, यानी एक प्रकार से उन्होंने जिस प्रकार से बैंकिंग व्‍यवस्‍था है, एनपीए के पहाड़ खड़े हो गए थे। जहां भी देखो, चर्चा चलती थी, एनपीए का क्या होगा? एनपीए का क्या होगा? कैसे बचेंगे?

आदरणीय सभापति जी,

चुनौती बड़ी थी, लेकिन हमने समझदारी से काम लिया। बैंकिंग व्‍यवस्‍था के सब कर्ता-धर्ताओं का विश्वास में लिया। रिफॉर्म की आवश्यकता थी, हिम्मत के साथ रिफॉर्म किए। पारदर्शी व्यवस्था बनाई, ढेर सारे बैंकिंग रिफॉर्म्स हुए और जो सरकारी बैंक दुर्बल हो चुकी थी, ठीक नहीं चल पाती थी, उसको हमने बड़े बैंक के साथ मर्जर कर दिया और मुझे याद है, किसी एक महाशय, बड़े अपने आप को विद्वान मानने वाले ने लिखा था, अगर मोदी सरकार बैंकों में यह कर ले, तो हिंदुस्तान का बहुत बड़ा रिफॉर्म हो जाएगा। वह काम मैंने आते ही कर दिए थे।

आदरणीय सभापति जी,

और इन सारी चीजों का नतीजा यह हुआ, बैंकों में जो बीमारी घर कर गई थी, उस बीमारी से बैंकों को मुक्ति मिली। बैंकों का स्वास्थ्य सुधरा, लगातार सुधरा और अभी भी तेजी से आगे दौड़ रहे हैं और बैंकिंग का जब स्वास्थ्य सुधरा, तो लेन-देन का कारोबार भी उनका बढ़ा, लोगों को पैसे मिलने लगे, सामान्य मानवीय व्यक्ति को पैसे मिले। ऐसे-ऐसे गरीब लोगों को लोन मिले, जिनके लिए कभी बैंक के दरवाजे बंद थे, वो बेचारा दूर से देखकर के उनको जाना पड़ता था। आज मुद्रा योजना, मुद्रा योजना जो देश के नौजवान को अपने पैरों पर खड़े रहने की ताकत देता है। मुद्रा योजना जो स्वरोजगार की प्रेरणा देता है, लेकिन स्वरोजगार के भाषण के काम नहीं होता है, उसका हाथ पकड़ना पड़ता है, उसको साथ देना पड़ता है, उसको सहाय देनी पड़ती है और हमने मुद्रा योजना के द्वारा 30 लाख करोड़ रूपया, 30 लाख करोड रुपए से ज्यादा लोन मुद्रा योजना के माध्यम से और बिना गारंटी देश के नौजवानों के हाथ में दिया और उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया और गर्व की बात है, उसमें बहुत बड़ी मात्रा में माताएं-बहने भी हकदार बनी हैं, इसकी लाभार्थी हैं। सेल्फ हेल्प ग्रुप, इन दिनों ग्रामीण महिलाएं बड़े सपने देखती हैं। खुद अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। वूमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप का हमने विस्तार तो किया ही किया, लेकिन 10 करोड़ बहनों को हमने सीधी आर्थिक मदद की व्यवस्था की। हमारे एमएसएमई सेक्टर को हमने भरपूर लोन दी और मैं आज बड़े संतोष के साथ, बड़ी जिम्मेवारी के साथ, इस पवित्र सदन में कहना चाहता हूं। हमने एनपीए जिसके पहाड़ हुआ करते थे, 2014 के पहले, आज इसको हमने नीचे निम्न स्तर पर लाकर के खड़ा कर दिया है। आज एनपीए एक परसेंट से भी नीचे हैं, यह अपने आप में बैंकों के स्वास्थ्य के लिए बहुत उत्तम काम हमने किया है। इतना ही नहीं, हमारे बैंकों का प्रॉफिट आज रिकॉर्ड पर है, हाई रिकॉर्ड है उसके, यह अपने आप में देश की अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होती है, तो बाकी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत मिलती है, उस काम को किया है।

आदरणीय सभापति जी,

मैं एक और उदाहरण देना चाहता हूं। हमारे PSUs, आमतौर पर PSUs के संबंध में यह मान्यता बन चुकी थी, वह बनते ही है बीमार होने के लिए, वह बनते ही हैं बर्बाद होने के लिए, वह बनते ही है बंद होने के लिए, हमने इस पूरी मानसिकता को हकीकतों के आधार पर बदलने में सफलता प्राप्त की है और यह यह लोग PSUs को लेकर के कितनी गलत बातें फैलाते थे। अर्बन नक्सल की तरह, ऐसे PSUs के दरवाजे के बाहर मजदूरों की मीटिंग करके भड़काने का पाप करते थे, गुमराह करने का काम करते थे। इन्होंने LIC, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया और भी HAL ऐसे हर एक को बड़ा भला-बुरा और इतना भद्दे तरीके से, जब उनकी सरकार थी, तब तो यह इन चीजों का संभाल नहीं पाते थे। उसको कुछ कर भी नहीं पाते थे।

आदरणीय सभापति जी,

हमने इसमें भी हिम्मत दिखाई। हमने PSUs के संबंध में भी रिफॉर्म्स किए। रिफॉर्म्स की एक लगातार परंपरा चलाई। आज LIC बेस्ट तरीके से, उसने पूरे कार्यकाल में अपना LIC का जन्म हुआ तब से, उत्तम से उत्तम परफॉर्मेंस का कालखंड उनका गुजरा है। जिन PSUs को कांग्रेस के नेता ताले लगवाने की कगार पर पहुंच चुका था और उसी पर अपनी राजनीतिक रोटीयां सेकने का प्रयास भी किया गया था, आज हमारे PSUs रिकॉर्ड प्रॉफिट पर हैं। इतना ही नहीं, वह अपने परफॉर्मेंस से मेक इन इंडिया को भी गति दे रहे हैं। मेक इन इंडिया का जो सपना है, उसको पूरा करने में वह भी एक बहुत बड़े catalytic agent के रूप में आज भूमिका अदा कर रहे हैं। रिकॉर्ड संख्या में रोजगार बना रहे है। इतना ही नहीं, हमारे कुछ PSUs आज विश्व के अंदर जा रहे हैं। विश्व में भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं। विश्व के साथ जुड़ रहे हैं, दुनिया के कई देशों की विकास यात्रा में वह भागीदार बन रहे हैं। आज हमारे PSUs को बहुत बड़े-बड़े ऑर्डर देश से भी और देश के बाहर से भी मिलने लगे हैं, यह अपने आप में मैं जो कहता हूं ना, एक बहुत महत्वपूर्ण पड़ाव पर यह देश है, यह जो 25 साल है, उसका संकेत यहां नज़र आता है।

आदरणीय सभापति जी,

कांग्रेस ने विश्वासघात करने के विषय में भी हमारे देश का अन्नदाता को भी नहीं छोड़ा। इस देश में 10 करोड़ किसान ऐसे हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है, छोटे किसान हैं। उनकी तरफ कभी परवाह नहीं की गई, उनकी तरफ कभी देखा नहीं गया, ना ही उनके दिमाग में इन छोटे किसानों का कोई माहात्म्य था। उनको लगता है कि कुछ बड़े लोगों को संभाल लिया, तो गाड़ी चल जाएगी और यही राजनीति करते रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

हमारे दिल में छोटे किसान के प्रति एक दर्द था। हम जमीनी हकीकतों से परिचित थे और उसी के कारण हम पीएम किसान सम्मान निधि योजना लेकर के आए हैं और आप इतने कम समय में हमारे छोटे किसानों के खाते में 4 लाख करोड़ रुपया हमने दिया है। 4 लाख करोड़ रूपया आंकड़ा छोटा नहीं होता है आदरणीय सभापति जी और उसने हमारे छोटे किसानों को एक नई ताकत दी है। नए सपने देखने का सामर्थ्य दिया है और मुझे यह पक्का विश्वास है कि हमारा किसान उस दिशा में जरूर भारत की आशा-अपेक्षा के अनुरूप परिणाम देगा।

आदरणीय सभापति जी,

यहां कुछ साथियों ने इंप्लीमेंटेशन के संबंध में शिकायतों का भाषण काफी किए हैं। शायद वह तय करके आए थे कि ऐसा-ऐसा बोलना है, तो इसमें तो उनका एलायंस दिखता था, बाकियों में तो नहीं दिखता है।

आदरणीय सभापति जी,

जब यह इंप्लीमेंटेशन को लेकर के कितनी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। मैं एक जरा किस्सा सुनाता हूं। मैं किसी का भला-बुरा कहने के लिए नहीं कह रहा हूं, मैं सिर्फ हकीकत रख रहा हूं। परेशानी जिनको होगी, उनको होगी, लेकिन तथ्य तो तथ्य ही होते हैं। हमारे देश के एक नेता हिमाचल प्रदेश के दौरे पर गए थे और वहां से आने के बाद उन्होंने खुद ने यह घटना कहीं सुनाई, रिकॉर्ड पर उपलब्ध है। उसमें उन्होंने कहा, उस नेता ने क्या कहा, मैं उन्हीं के शब्द पढ़ रहा हूं। “काफी लंबे समय तक मुझे योजना आयोग से संघर्ष करना पड़ा क्योंकि वह पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं बनाने को तैयार ही नहीं थे, मैं हिमाचल प्रदेश गई थी। जब मैं वापस आई, तो मैंने योजना आयोग में कहा कि हमारे कामदारों को, वर्कर्स को जीप की जरूरत नहीं है बल्कि खच्चरों की आवश्यकता है, ताकि कम से कम उन पर सामान आदि लादा जा सके।” आगे उन्होंने कहा, लेकिन मुझे बताया गया, “हम पैसा तो जीप के लिए ही देंगे क्योंकि खच्‍चरों के लिए पैसे देने की पॉलिसी नहीं है।” इसी भाषण में आगे वह कहती है, “अब वहां सड़के ही नहीं थी”, उनका कहने का कारण यह था कि हिमाचल में जहां वो गईं, वहां सड़के ही नहीं थी। अब वहां सड़के ही नहीं थी, तो फिर उस पर जीप का क्या लाभ हो सकता है? जीप लेकर के कौन जाएगा, जहां रोड नहीं है। लेकिन उस समय योजना आयोग का जोर था या तो जीप या तो कुछ भी नहीं।

आदरणीय सभापति जी,

यह भाषण किसी और का नहीं, यह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भाषण है। कांग्रेस के लंबे शासन काल में यही कार्यशाली रही और जिसको इंदिरा जी खुद जानती भी थी कि यह पाप चल रहा है, लेकिन इस कार्य संस्कृति को सुधारने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया और इंदिरा गांधी जिस प्लानिंग कमिशन की धज्जियां उड़ा रही थी, उसके जन्मदाता उनके स्वयं के पिताजी थे और यह प्लानिंग कमीशन को बना और इंदिरा जी ने जब कहा, उसके बीच में दो दशक बीत चुके थे, लेकिन हाल यही था और 2014 तक, सब दुखी थे, सब परेशान थे, सब गलती देख रहे थे, लेकिन सुधार करने के लिए तैयार ही नहीं। 2014 के बाद, जब आपने हमें मौका और कांग्रेस ने जिस प्रकार से प्लानिंग कमीशन अटकना, लटकाना, भटकना वाले कार्यशाली बना दी थी, 2014 में जब हमें मौका मिला, तो हमने आकर के काम किया। प्लानिंग कमीशन को खत्म कर दिया और नीति आयोग को बनाया। आज नीति आयोग बहुत तेज गति से काम कर रहा है। आप देखिए एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट, वह भी एक बड़ा प्रेरक उदाहरण और मैं तो देख रहा हूं कि डेवलपिंग कंट्रीज़ के लिए विकास के लिए एक मॉडल के रूप में वैश्विक संस्थाएं इसको अनुमोदन दे रही हैं। यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की यह सफलता बनी है। देश के कई जिले ऐसे हैं, जिसको कोई पिछड़े मान करके छोड़ दिया गया था और वहां करोड़ों लोगों की जो मौलिक ज़रूरतें थी, उसको भी नकार दिया गया था। उनको तो ऐसे ही जीने के लिए मजबूर कर दिया गया था और जो पिछड़े इलाके थे, वह और पिछड़े होते गए और बर्बादी आती गई और हालत तो सरकार में ऐसी थी कि जब किसी को पनिशमेंट ट्रांसफर करने होती थी, पनिशमेंट पोस्टिंग देना होता था, तो ऐसे ही जिलों में भेजा जाता था, ताकि और खराब करें वह, यह हाल बन गया था, यह वर्क कल्चर बन गया था। हमने इस स्थिति को बदला, सबसे पहले आकर के यंग होनहार अफसरों को लगाया जाएगा और पूरा तीन साल का मौका उसको दिया जाए काम करने का, एक के बाद एक निर्णय किए और आज देखिए कि सीमाएं छत्तीसगढ़ का हमारा बस्तर एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में था। आज वह बस्तर पूरे देश में बस्तर ओलंपिक के नाम से चर्चा में है। आज विकास की धारा बस्तर के गांव-गांव पहुंच रही है। अभी कुछ गांव में पहली बार बस देखी है। पूरे गांव ने उत्सव बनाया बस्तर में, यह परिस्थितियों छोड़कर के गए हुए हैं लोग और यहां पर पता नहीं किस तरीके से देश को कहां ले जाना चाहते हैं लोग!

आदरणीय सभापति जी,

इंप्लीमेंटेशन क्या होता है, यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट एक बहुत बड़ा शानदार उदाहरण है। ऐसे तो सैकड़ों उदाहरण हें, लेकिन मैं एक कहने के लिए इसको उल्‍लेख कर रहा हूं। कांग्रेस के हमारे साथियों को यह जो बदलाव आ रहा है, उसमें इंप्लीमेंटेशन नजर नहीं आ रहा है और उनका तो एक ही प्लानिंग कमीशन वाला मॉडल है। जीप और खच्चर वाला मॉडल, यही वह लोग जानते हैं। उससे आगे कुछ नहीं जानते और यह इंप्लीमेंटेशन कैसे करते हैं, मेरा जन्म नहीं हुआ था, उसके पहले सरदार वल्लभभाई पटेल ने नर्मदा नदी पर बांध बांधने की कल्पना की, विषय तो पक्का हो गया, सरदार साहब नहीं रहे। खैर, नेहरू जी ने शिलान्यास किया। अब इंप्लीमेंट देखिए इनको, मेरा जन्म नहीं हुआ था, जब इसकी कल्पना की गई थी और प्रधानमंत्री बनने के बाद मैंने इसका उद्घाटन किया, यह हाल है और उनका इंप्लीमेंटेशन देखिए, मुझे मुख्यमंत्री रहते हुए तीन दिन अनशन पर बैठना पड़ा था, नर्मदा सरदार सरोवर डैम के लिए मेरे देश, मेरे राज्य के किसानों के लिए, मैंने अपने आप को दाव पर लगा दिया था, तब जाकर के भारत सरकार को झुकना पड़ा और तब जाकर के सरदार सरोवर डैम की कंस्ट्रक्शन को गति मिली और यहां मैं पहुंचा, तब मुझे इसका उद्घाटन करने का सौभाग्य मिला और आज कच्‍छ तक खावड़ा बीएसएफ के लोग जहां बैठते हैं, वहां तक नर्मदा का शुद्ध पानी पीने के लिए पहुंच रहा है। इंप्लीमेंटेशन क्या होता है और यहां पर इंप्लीमेंटेशन इंप्लीमेंटेशन किसने शब्द पकड़ा दिया, हर एक के मुंह से वही निकल रहा था। हमने कांग्रेस की कार्यशैली को बदलने के लिए जब मैंने देखा, कई ऐसे काम थे, अटके पड़े हुए थे, कोई पूछने वाला नहीं था, फाइलों में और पॉलिटिकल फायदे के लिए अनाउंसमेंट कर दिए, दिए जला दिए, पत्थर लगा दिया, करना कुछ नहीं। आखिरकार मैंने एक टेक्नोलॉजी वाला प्लेटफार्म बनाया यहां आकर के प्रगति के नाम से, यह प्रगति प्लेटफार्म का में उदाहरण देता हूं, आप हैरान हो जाएंगे, मुझे एग्जैक्ट याद नहीं है, लेकिन शायद हिमाचल में एक ट्रेन उन्होंने पार्लियामेंट में घोषित की थी, शायद ऊना, ऊना या और कोई, मेरे आने तक वो कागज पर भी उसका ड्राइंग नहीं बना था, बताओ! और चुनाव जीतने के लिए वह घोषणा कर दी। प्रगति के अंदर मेरे सामने यह विषय आया। ऐसे कई विषय मेरे सामने आए और उस प्रगति के अंदर हमने एक-एक प्रोजेक्ट क्यों अटके हुए, कोस्ट किस डिपार्टमेंट के काम में क्या मुसीबत आई है, किसने गलत तरीके से इसको आगे बढ़ाया और बजट तो बढ़ता ही गया था। जो योजना 900 करोड़ में होनी थी, वह 90 हजार करोड़ तक पहुंचा, यह हाल करके रख दिया था इन्होंने। हमने एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाया, हर महीने बैठा, अभी मैंने 50वां एपिसोड पूरा किया उस मीटिंग का और लगातार काम करते-करते और संबंधित राज्यों को भी बैठाया, उनकी कठिनाइयों को भी समझा। उसके इंप्लीमेंटेशन में कौन मिनिस्ट्री क्‍या पूरा परेशानी हो रही है! किस स्टेट की परेशानी हो रही है! किस कानून की परेशानी हो रही है! हर एक की बारीकी से देखा और आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि इस प्रगति के इंप्लीमेंटेशन को बारीकी से प्रधानमंत्री के स्तर पर देखे जाने के कारण 85 लाख करोड रुपए के काम को गति मिली, 85 लाख करोड रुपए का काम, आप कल्पना कीजिए। देश के कितनी बड़ी शक्ति को अनलॉक किया हमने, इंप्लीमेंटेशन कैसा होता है, यह हमने करके दिखाया है। रेल हो, रोड हो, सिंचाई हो, ग्रामीण को व्यवस्था का काम हो, सारी चीजों को हमने उसमें लिया। अब जैसे जम्मू उधमपुर श्रीनगर बारामुला रेल लाइन, आज यह प्रोजेक्ट पूरा हुआ है और बर्फबारी में इन दोनों आपने देखा एक वीडियो बहुत पॉपुलर हुआ है। बर्फ के बीच में से चारों तरफ बर्फ के चादर छाई हुई है और वंदे भारत ट्रेन निकल रही है और लोग कहते हैं, गलती मत करना, यह विदेश नहीं, यह हिंदुस्तान है। यह रील चल रही हैं बाजार में, लेकिन तीन दशक से यही प्रोजेक्ट लटका हुआ था। तीन दशक 30 साल आप कल्पना कर सकते हैं, दो पीढ़ी आगे बढ़ जाएं, यह यही के अटके पड़े थे। हमारी सरकार ने इसको पूरा किया।

आदरणीय सभापति जी,

मैं असम की बात करता हूं और कोई यह मत सोचो कि चुनाव है, मैं इसलिए बोल रहा हूं। इनके पाप हैं, इसलिए मुझे कहना पड़ रहा है। कांग्रेस सिर्फ इमेजिन करती हैं और इंप्लीमेंट करने का उनका कोई लेना-देना ही नहीं होता है। अब असम का बोगी ब्रिज, बोगीबील ब्रिज, यह बोगीबील ब्रिज अरुणाचल और असम को जोड़ने वाला बहुत महत्वपूर्ण ब्रिज है। कितने ही सालों तक यह प्रोजेक्ट लटका रहा, हमने प्रगति के माध्यम से इसको रिव्‍यू किया और असम सहित पूरे नॉर्थ ईस्ट को बहुत बड़ी सुविधा वाला यह काम हमने पूरा किया।

आदरणीय सभापति जी,

इंप्लीमेंटेशन की बातें जब करते हैं, तो एक बार हमारा और हमारे पास तो तथ्यों के साथ चीजें हैं केि हमने इन चीजों को समय पर पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इन दिनों तो जो काम कर रहे हैं, समय से पहले हो रहा है। हमने पूरी दुनिया को कहा था कि हम 2030 तक यहां पहुंचेंगे, सोलर में हमने वह काम 2025 में कर दिया। हमने एथेनॉल का समय तय किया था, हमने उसमें भी दो-तीन साल पहले ही काम पूरा कर लिया, तो एडवांस में हम काम पूरा करने का, इंप्लीमेंटेशन की ताकत हमारी तो उससे भी ज्यादा है।

आदरणीय सभापति जी,

भाजपा हो, एनडीए हो, हमारा अप्रोच चीजों की तरफ देखने का हमारा दृष्टिकोण, समस्या के समाधान के लिए हमारी सोच और कांग्रेस के बीच में आसमान-जमीन का अंतर है। बहुत फर्क है। मैं आपको उदाहरण देता हूं। हमारी सोच यह है कि 140 करोड़ देशवासी यह इतने सामर्थ्यवान हैं कि वो चुनौतियों को समाधान दे सकते हैं। यह हमारी सोच है। हमारा भरोसा है देशवासियों पर, उनके सामर्थ्य पर हमारा भरोसा है और यही लोकतंत्र की भी सच्ची ताकत होती है। लेकिन कांग्रेस देशवासियों को ही समस्या मानती है। अब मैं इनका इतना बोल करके छोड़ दूंगा, तो आज पता नहीं रात को उनको नींद नहीं आएगी और गालियां कल कैसी दें, उसका प्लानिंग चलेगा। लेकिन मैं उदाहरण के साथ बताना चाहता हूं। किस प्रकार से यह लोग सोचते थे देशवासियों के लिए, देश के लोगों के बारे में नेहरू जी और इंदिरा जी की सोच क्या थी? मैं उसके विषय में बताना चाहता हूं। इंदिरा जी एक बार ईरान गईं थी और ईरान में वह भाषण दे रही थीं और उस भाषण में उन्होंने नेहरू जी के साथ जो बातचीत हुई थी, उसका उल्लेख किया। खुद ने कहा है, उन्होंने कहा और मैं जो इंदिरा जी ने कहा था उसको कोट कर रहा हूं- “जब किसी ने मेरे पिताजी से पूछा यानी नेहरू जी से पूछा कि उनके सामने कितनी समस्याएं हैं? तो उन्होंने उत्तर दिया था - 35 करोड़।” नेहरू जी ने जवाब दिया था कि उनके सामने कितनी समस्या हैं? बोले 35 करोड, उस समय हमारे देश की जनसंख्या थी 35 करोड़। अब आगे देखिए 35 करोड़ देशवासी नेहरू जी को समस्या लगते थे। ऐसा कोई मुखिया हो सकता है क्या जी? और इस बात का उदाहरण देते हुए इंदिरा जी ने आगे कहा कि आज देश की जनसंख्या 57 करोड़ है। इसलिए मेरी समस्याओं की संख्या भी उतनी ही बड़ी है। यानी पिताजी को 35 करोड़ समस्या वाले देशवासी लगते थे। अब 57 करोड़ उनको समस्या, कोई ऐसा हो सकता है, जो अपने ही देशवासियों को समस्या माने? यह फर्क है, उनकी सोच और हमारी सोच में, यह फर्क है उनके अप्रोच और हमारे अप्रोच में। नेहरू जी हों या इंदिरा जी हों या पूरी कांग्रेसी बिरादरी हो, यह लोग भारत के लोगों को समस्या मानते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

मेरे कई कोटेशन मिलेंगे। मैंने दुनिया के सामने कहा है, देश के सामने कहा है और कहा है इसलिए नहीं, यह मेरा कन्विक्शन है। अरे चुनौतियां कितने ही क्यों ना हो, 140 करोड़ समाधान हमारे पास है। हमारे लिए देशवासी समर्थक एक पूंजी है। हमारे लिए हर देशवासी भारत का उज्जवल भविष्य का नियंता है, निर्माता है, कर्ता-धर्ता है। हम उसको समस्या कैसे कह सकते हैं? ऐसी सोच वाले लोग अपने परिवार का ही भला करेंगे और किसका करेंगे?

आदरणीय सभापति जी,

देश के लोगों का अपमान करते रहना, यह कांग्रेस के स्वभाव में पड़ा हुआ है। उनके संस्कारों में पड़ा हुआ है। कांग्रेस ने बीते दिनों राष्ट्रपति जी का अपमान किया। चुनाव के बाद जिस प्रकार से हमारे राष्ट्रपति जी के लिए शब्द कहे गए हैं। शर्मिंदगी महसूस होती है कि यह कैसे लोग हैं? भारत के राष्ट्रपति के लिए क्या बोल रहे हैं यह लोग?

आदरणीय सभापति जी,

कल लोकसभा में भी राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हो पाई। यह राष्ट्रपति पद, उसका घोर अपमान किया है, उनको संविधान शब्द मुंह में बोलने की अधिकार नहीं रहता है। जो लोग गरीबी से निकली हुई एक महिला, आदिवासी परिवार से आई हुई एक महिला, जब आपने लोकसभा में जो व्यवहार किया है। आपने आदिवासी समाज का अपमान किया है, आपने महिला का अपमान किया है, भारत के सर्वोच्च पद पर विराजमान संविधान ने जिनको सर्वोच्च पद दिया है, आपने उनका अपमान किया है, आपने संविधान का अपमान किया है।

आदरणीय सभापति जी,

उनको कुछ भी लगता हो। कांग्रेस को यह गुनाह…

आदरणीय सभापति जी,

समय बढ़ाने के लिए मैं आपका और सदन का बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

बड़ी दर्दनाक लोकसभा की घटना है और शायद हताशा निराशा तो हम समझ सकते हैं, लेकिन इसके लिए देश के पवित्र लोकतंत्र के मंदिर को ही इस रूप में कर देना और उस समय चेयर पर असम के ही हमारे एक माननीय सांसद बैठे थे और उस समय कागज फेंके गए, टेबल पर चढ़ दिया गया। क्या यह नॉर्थ ईस्ट का अपमान नहीं है? क्या असम के नागरिकों का अपमान नहीं है? कल फिर दोबारा किया उन्होंने और उस समय आंध्र के दलित परिवार का बेटा चेयर पर बैठा था। उसने उसको भी अपमानित किया। यानी आपने नॉर्थ ईस्ट का अपमान चेयर में बैठा, अपमान करो। आंध्र के एक दलित परिवार का बेटा चेयर पर बैठा, उसका अपमान करो। सदन ने इनको काम दिया हुआ है। सबने मिलकर के काम दिया हुआ है, लेकिन वो दलित समाज से आते हैं, इसलिए आप अपमान करते हो और ऐसा लगता है, कांग्रेस के लोगों को असम की जनता के प्रति बड़ी नफरत है। उनको लगता है कि उसकी जनता ने उनका साथ छोड़ दिया मतलब उनके दुश्मन हो गए। क्या कभी लोकतंत्र में ऐसे सोचते हैं क्या? मुझे तो तब बहुत पीड़ा हुई थी, जब भारत रत्न भूपेन हजारिका जी जो कि इस देश के बहुत ही सम्मानीय व्यक्तित्व हैं जी। आज भी घर-घर में उनको स्मरण करते हैं लोग। उनके प्रति जो भक्ति का भाव है, आप कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन उनको इसकी भी कोई परवाह नहीं है और जिस प्रकार से और हमारा सौभाग्य था कि हमने भूपेन हजारिका जी के देश के लिए जो उनका योगदान था, नॉर्थ ईस्ट जैसे इलाके से पूरे देश को अपने वाणी से, अपने विचारों से, अपनी अभिव्यक्ति से बांध के रखा था। हमने भारत रत्न देने का निर्णय किया। इस पर भी इनको ऐतराज और मैं तो हैरान हूं, खड़गे जी अगर होते, तो मैं उनकी हाजिरी में कहता यह, इन्होंने जिस प्रकार से देख बोला ना, भारत रत्न की बात, वो वीडियो पर उनका चेहरा देखेंगे ना, आपको लगेगा अरे ये ऐसे लोग हैं, ऐसा व्यवहार करते हैं और ये कहां अरे ये तो एक सिंगर थे, मैं समझता हूं कि यह किसी का भी अपमान करने में कभी भी पीछे नहीं रहते हैं। उन्होंने भूपेन हजारिका जी को भारत रत्न दिया, उसका भी विरोध किया। यह पूरे आसाम का विरोध है, पूरे देश के कला प्रेमियों का विरोध है। और मुझे पक्का विश्वास है, असम कभी भी इस अपमान को भूलने वाला नहीं है।

आदरणीय सभापति जी,

कल जो घटना घटी, इसी सदन के एक माननीय सांसद कांग्रेस के शातिर दिमाग जिनका है, ऐसे युवराज ने उनको गद्दार कह दिया। अहंकार कितने सातवें आसमान पर पहुंच चुका है इनका और कांग्रेस को छोड़कर के कितने ही लोग निकले हैं। कांग्रेस के कितने टुकड़े हुए हैं। कई लोग दूसरे दलों में गए हैं। लेकिन औरों को तो किसी को गद्दार नहीं कहा उन्होंने। लेकिन कल सांसद को गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वो सिख थे। ये सिखों का अपमान था। ये गुरुओं का अपमान था और कांग्रेस के अंदर जो कूट-कूट करके सिखों के प्रति नफरत भरी पड़ी है ना, उसका वो अभिव्यक्ति थी और इसी सदन के माननीय सांसद है वो और उनको जरा भी दर्द नहीं, वरना आज खड़े होकर के कह सकते थे कि कल जो हुआ, इसी संसद के, संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं था, हमें खेद है। एक शब्द तो बोल लेते, लेकिन सिखों के प्रति उनके मन में जो नफरत भरी पड़ी है और इसी के कारण उन्होंने कल और जिसका परिवार देश के लिए शहादत देने वाला परिवार के वो सदस्य हैं, उन्हें अपने राजनीतिक विचारों में परिवर्तन किया, इसलिए गद्दार हो गए और एक गद्दार शब्द छोटा नहीं है। मेरे देशवासी को कोई गद्दार कहे, यह कैसे देश सहन करेगा और वह भी एक सिख हैं, इसलिए गद्दार कहना, बहुत दुर्भाग्य की बात है और ऐसे लोग कांग्रेस को नहीं डूबाएंगे तो क्या करेंगे?

आदरणीय सभापति जी,

एक तरफ यह दृश्य है और दूसरी तरफ हमारे सदानंद जी मास्टर का दृश्य है। राजनीतिक विद्वेष के कारण उनके दोनों पैर काट दिए गए। भरी जवानी में दोनों पैर काट दिए। कटे हुए पैर से जिंदगी गुजार रहे हैं। लेकिन संस्कार इतने ऊंचे हैं कि वाणी में भी अपशब्द नहीं निकलता है। वर्तन में भी कटुता नजर नहीं आती। गर्व होता है और कल जब देश ने जब उनका पहला भाषण हो रहा था सदन में और उन्होंने जब अपने बेंच पर आपसे इजाजत लेकर के अपने कटे हुए पैर के लिए वो जिस लिम्ब का उपयोग करते हैं, आर्टिफिशियल लिम्ब का, उन्होंने जब रखा, वो दृश्य देश के लिए पीड़ादायक था कि इस देश में ऐसा ही बंधारण की बातें करने वाले इंडी एलायंस के लोग और ये इंडिया एलायंस पूरा जिम्मेवार है इसके लिए, वैचारिक असहमति के कारण एक नौजवान के और वो भी एक टीचर शिक्षक के प्रति गर्व से आदर से देखा जाता है, उसके पैर काटते हैं। लेकिन उनको कोई खेद नहीं है। उनको कोई दर्द नहीं है। लेकिन मैं मास्टर सदानंद जी को हृदय से अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने जिस प्रकार से इतने इतनी भयानक हमले के बाद भी देश की सेवा का अपना व्रत जारी रखा और आज देश की नीति निर्धारण में अंदर अपना योगदान दे रहे हैं। यह गर्व की बात है और ऐसे लोगों के सहारे हम राजनीति में जीते हैं, काम करते हैं। देश के लिए जीने मरने की प्रेरणा मिलती है। ये संस्कार हमें पाए हैं। ऐसे लक्ष्यावधि कार्यकर्ताओं के तप से पाए हुए हैं।

आदरणीय सभापति जी,

इन दिनों और वैसे कांग्रेस के हमारे साथियों का मुझ पर जरा विशेष प्रेम है। वो स्पेशल प्रेम है। और जब मैं जिम्मेवारी जो मिली है, उसके तहत और जिम्मेवारी ना मिलती तो भी देश के लिए जीना हमने सीखा है। हम विकसित भारत की जमीन मजबूत कर रहे हैं। उसको एक ताकत दे रहे हैं। एक तरफ देश के युवाओं के लिए मजबूत जमीन तैयार कर रहा हूं, तो कांग्रेस मोदी की कब्र खोदने के कार्यक्रम करवा रही है। और मोहब्बत की दुकान खोलने वाले मोदी तेरी कब्र खुदगी के नारे लगा रहे थे। यह कौन सी मोहब्बत की दुकान है, जो देश के ही किसी नागरिक के कब्र खोदने के सपने देखती हो? यह कौन सा संविधान से उन्होंने सीखा है, जो देश के ही किसी नागरिक के कब्र खोदने की बात करते हो? क्या यह संविधान का अपमान नहीं है? क्या यह मानवता का अपमान नहीं है? क्या यह सार्वजनिक के सार्वजनिक जीवन की मर्यादाओं का अपमान नहीं है? और उनको इसका कोई खेद नहीं है। अगर इसके बाद क्या बयान देंगे, बयान देखो प्रधानमंत्री राज्यसभा में भी रो रहा था। किस प्रकार के संस्कार और वृत्तियों से पले-बड़े लोग हैं यह…

आदरणीय सभापति जी,

मेरे लिए कोई अनुभव मेरा बहुत पुराना है। 2002 से जब वह विपक्ष में थे, तब से और 2004 से जब वो सत्ता में आए, तब से और 2014 से मैं जब यहां आया, तब से, पिछले 25 साल से संसद का एक भी सत्र ऐसा नहीं गया, मोदी संसद का सदस्य नहीं था। एक भी सत्र ऐसा नहीं गया, जिसमें इस सदन के अंदर मोदी को गाली देने का काम ना किया हो इन लोगों ने, 25 साल और मुझे किसी ने पूछा था मोदी जी आपके स्वास्थ्य का क्या राज है? मैंने कहा मैं डेली दो किलो गाली खाता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

यह मोदी की कब्र क्यों खोदना चाहते हैं? यह सिर्फ नारा नहीं है। यह इनके भीतर पड़ी हुई नफरत का प्रतिबिंब है। इसकी अभिव्यक्ति है और वह इसलिए हैं, हमने 370 की दीवार गिरा दी, इसलिए वह मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं। हमने नॉर्थ ईस्ट में बम-बंदूक और आतंक का जो छाया बना रहता था, नॉर्थ ईस्ट में शांति और विकास का राह अपनाई, इसलिए वो मोदी की कब्र खोदने पर सोच रहे हैं। पाकिस्तानी आतंकियों को घर में घुस के जवाब देते हैं, इसलिए मोदी की कब्र खोदने की बात करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर करते हैं, इसकी उनको परेशानी होती है और इसलिए वो मोदी की कब्र खोदते हैं। माओवादी आतंक से देश को मुक्ति दिलाने के लिए साहसपूर्ण कदम उठा रहे हैं, इसलिए मोदी की कब्र खोदनी है आपको। हमने नेहरू जी ने देश के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया था सिंधु जल समझौता करके, उस सिंधु जल समझौते को हमने abeyance में डाल दिया, क्या इसलिए… इसलिए आप मोदी की कब्र खोदने के नारे लगा रहे हो?

आदरणीय सभापति जी,

कांग्रेस की परेशानी कुछ और है। यह पचा नहीं पा रहे कि मोदी यहां तक पहुंचा कैसे? और उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है कि भई पहुंचा तो पहुंचा, लेकिन अब तक टिका क्यों है? और इसलिए वह एक ही रास्ता उनके लिए बचा हुआ लग रहा है कि मोदी तेरी कब्र खुदेगी।

आदरणीय सभापति जी,

यह तो मान करके बैठे थे। उनका लोकतंत्र संविधान का कोई लेना देना नहीं। उनको तो लगता है कि प्रधानमंत्री पद उनके परिवार की जागीर है। उस पर कोई और बैठ नहीं सकता। यह जो उनके भीतर में नफरत पड़ी हुई है ना, मोहब्बत की दुकान में जो आग भरी पड़ी हुई है ना, उसका परिणाम है और इसलिए कोई क्यों बैठा, हमारा पैतृक अधिकार था, इसलिए मोदी की कब्र खोदने का नारा लेकर के वो चल रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

कांग्रेस के शाही परिवार को देश ने दशकों तक अवसर दिया है। ऐसा नहीं है, देश ने आपके लिए भी अपना भविष्य दांव पर लगाया था, लेकिन आपने गरीबी हटाओ के नारे लगाए, गुमराह किया। लाल किले पर से कांग्रेस के एक भी प्रधानमंत्री के भाषण में गरीबी हटाने की बात ना आई हो, ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन किसी भी प्रधानमंत्री ने गरीबी हटाने के लिए क्या किया, वो एक बार भी नहीं आया। और नारे से अधिक कुछ नहीं था उनका और मोदी ने रास्ता अपनाया गरीब को Empower करने का, गरीब को सशक्त करने का और मेरे देश के गरीबों को मैं सलाम करता हूं। उन्होंने देश की योजनाओं को समझा, स्वीकारा और अपने सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए प्रयास किया। मैं देश के गरीबों का गौरव गान करता हूं कि हमारी नीतियों पर भरोसा करके, हमारी नीयत पर भरोसा करके उन्होंने भी अपने आप को खपाने के लिए कोई कमी नहीं रखी और 25 करोड़ मेरे गरीब परिवार के भाइयों ने गरीबी को परास्त किया और खुद गरीबी से बाहर आए हैं। मैं उनको सलाम करता हूं, मेरे 25 करोड़ देशवासी, जो निराशा में पड़े हुए थे, दूर एक आशा की दिखाई दी, उठ खड़े हुए और आज हमारे साथ चल पड़े।

आदरणीय सभापति जी,

2014 के पहले यह इंप्लीमेंटेशन की बातें करते थे। हमारे वहां सैकड़ों लोग रेलवे क्रॉसिंग पर मरते थे। स्कूल की बस रेलवे क्रॉसिंग से जा रही है, 20-20, 25-25 स्कूल के बच्चे मरने की खबरें आती थी। अनमैन रेलवे क्रॉसिंग, वो इतना बड़ा काम नहीं था कि नहीं कर सकते थे। यह काम भी मुझे करना हुआ और हमने सारे अनमैन क्रॉसिंग बंद कर दिए। लाखों लोगों की जिंदगी बचा ली। इसलिए, इसलिए यह मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

2014 से पहले इस देश में 18,000 गांव ऐसे थे, जिनको बिजली का मतलब पता नहीं था। बिजली का कोई तार होता है, कोई बल्ब होता है, कोई लट्टू जलता हुआ, उसमें उजाला निकलता है, पता नहीं था उनको। 18,000 गांव 2014 के बाद जब आपने हमें दायित्व देशवासियों ने दिया, उन 18,000 गांव जिन्होंने कभी बिजली का मुंह तक नहीं देखा था। बिजली का एक शब्द भी कान पे नहीं सुना था। उन गांव में उजाला पहुंचाया। इसलिए, इसलिए इनको मोदी की कब्र खोदने के सिवाय अब कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।

आदरणीय सभापति जी,

वह भी एक वक्त था, जब देश में बार-बार खबरें आती थी। मीडिया में हेडलाइन हुआ करती थी। सरहद की स्थिति के संबंध में बयान आते थे। गोला बारूद नहीं है, बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं है, बर्फ के बीच खड़ा है, बर्फ में खड़े रहने के लिए जो जूते चाहिए, वो जूते तक नहीं उसके पास। यह खबरें आती थी। हमने देश के जवानों के लिए खजाने खोल दिए। देश के जवानों को जो चाहिए वो देने का संकल्प लिया, और इसलिए इसलिए वो चाहते हैं कि अब तो कोई रास्ता बचा नहीं है। बस कब्र खुदेगी मोदी की। यही एक रास्ता उनके लिए बचा है।

आदरणीय सभापति जी,

एक बार उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री जी ने सदन में भाषण करते-करते वह रो पड़े थे। दिमागी बुखार के कारण बच्चे, अनगिनत बच्चे मर रहे थे। इनको कभी सूझा नहीं, इस दिमागी बुखार से मुक्ति दिलाई जा सकती है।

आदरणीय सभापति जी,

आंख की बीमारी ट्रैकोमा, लोग परेशान होते थे। आंखें चली जाती थी और विज्ञान प्रगति कर चुका था, हो सकता था, वह नहीं कर सकते थे। हमने दिमागी बुखार से भी मुक्ति दिलाई और हमने ट्रैकोमा से भी देश के लोगों की आंखें बचाई। यही सफलताएं हैं, यही संवेदनशीलता है, समाज के लिए जीने मरने का यही संकल्प है, पल-पल तिल-तिल समाज के लिए बिताना, घिसना, झलना, वो उनको परेशान कर रहा है। तब जाकर के मोदी तेरी कब्र खुदेगी, यह मंत्र लेकर के चल रहे हैं, यह सपने देख कर के चल रहे हैं और बातें लोकतंत्र की करते हैं। मोहब्बत की दुकान के साइन बोर्ड लगाते हैं। क्या सार्वजनिक जीवन में ऐसी नफरत होती है?

आदरणीय सभापति जी,

इनकी सरकार रिमोट से चलती थी। मेरी सरकार भी रिमोट से चलती है। 140 करोड़ देशवासी मेरा रिमोट है। 140 करोड़ देशवासियों के सपने, 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाएं, देश के नौजवानों के संकल्प, इनके लिए हम जीते हैं, इनके लिए सरकार चलाते हैं। सत्ता हमारे लिए सुख का रास्ता नहीं है, सत्ता हमारे लिए सेवा का माध्यम है। मुद्रा योजना लाखों करोड़ों को मदद मिली, स्वरोजगार को बल दिया। कांग्रेस ने कभी स्टार्टअप कल्चर को प्रमोट ही नहीं किया। कुछ सैकड़ों में स्टार्टअप बेचारे अपने उनको पता भी नहीं था और इनका तो हाल यह है आदरणीय सभापति जी, अपने घर के स्टार्टअप को भी वो लिफ्ट नहीं कर पा रहे। और हमारी सरकार में आज 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप हैं, और जब सफलता एक के बाद एक जनसामान्य के दिलों को जीतती है ना, तब जाकर के उनके पास एक ही रास्ता बचा है, मोदी तेरी कब्र खुदेगी। लेकिन वो जमाना याद कीजिए, BSNL को लेकर के चुटकुले चलते थे, कार्टून बनते थे, आज स्वदेशी 4G स्‍टैक हमने खड़ा कर दिया। 5G दुनिया में सबसे तेज गति से रोल आउट करने का काम हमने कर दिया। कम्युनिकेशन की नई जनरेशन, नई टेक्नोलॉजी, नई सोच इसको हमने आगे बढ़ाया और इसलिए दर्द जुबान पर आ रहा है, मोदी तेरी कब्र खुदी है।

आदरणीय सभापति जी,

गरीब की सेवा, यह मेरा सौभाग्य है। 4 करोड़ गरीबों को पक्के घर देना, मैं जीवन में सुकून मानता हूं। बिजली, पानी, गैस का सिलेंडर, टॉयलेट की सुविधा, मुझे लगता है कि हां परमात्मा ने मुझे सही दिशा में काम करने की प्रेरणा दी है। पहली बार, गांव की महिला गर्व से कह रही है, हां, मैं लखपति दीदी बनी हूं। तो दूसरी कह रही है, इस साल तक मैं लखपति दीदी बन जाऊंगी। जो बन गई हैं, उनको जब पूछता हूं, नहीं बोले साहब अब तो करोड़पति के लिए सोच रहे हैं। यह यह जो मिजाज बदला है, जो आत्मविश्वास बढ़ा है और ऐसे देश के कोटि-कोटि जनों के आशीर्वाद जिस इंसान पर हो, कोटि-कोटि माताओं-बहनों का जिस पर रक्षा कवच हो, नारे कितने ही लगा लो, कब्र तुम नहीं खोद पाओगे। यह देश की शक्ति, आशीर्वाद रूपी कवच, माताओं-बहनों का मेरे प्रति जो भाव रहा है, जिस श्रद्धा भाव से मैंने माताओं-बहनों की सेवा करने का काम किया है, जिनको कोई पूछता नहीं था, उसको मोदी पूजता है। यही कारण है और यह आशीर्वाद ही है, जो इनको चूभते हैं और इसलिए कब्र खोदना चाहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

चोरी करना जिनका पुश्तैनी धंधा है। जिन्होंने एक गुजराती की सरनेम भी चुरा ली। महात्मा गांधी की सरनेम चुरा ली। यह लोग और देश की जनता इतनी समझदार कि ऐसी-ऐसी पटक देती है, ऐसी पटक देती है तुम लोगों को।

आदरणीय सभापति जी,

हम एक विकसित भारत का सपना लेकर के चले हैं और आज वो सपना देश के लोगों की ऊर्जा के कारण संकल्प में बदल चुका है। आज कहीं पर भी जाइए हर कोई यह कहता है कि 2047 तक विकसित भारत बनना है। और मैं हैरान हूं, कुछ हमारे साथी सदन में इतने निराशावादी, इतने जमीन से कटे हुए लोग, बदलती हुई दुनिया से अनभिज्ञ लोग, पता नहीं क्या बोल रहे हैं? वह कहते हैं, मोदी अभी 2047 की क्या बोल रहा है? 2047 किसने देखा है? हमारे देश के लिए आजादी के लिए जो लड़ते थे, जो फांसी के तख्त पर चढ़ जाते थे, जो लाठियां खाते थे, गोलियां खाते थे, जो काला पानी की सजा के लिए अंडमान निकोबार के सेलुलर जेल में जिंदगी बिता देते थे, लक्ष्यावधि नौजवान अपने पढ़ाई का भविष्य का सोचे बिना, कोई परवाह किए बिना सिर्फ देश के लिए सोचने के लिए निकल पड़े थे। क्या उन्होंने कभी यह सोचा होता कि यार हमारे कालखंड में तो आजादी मिलेगी नहीं कि मैं क्यों करूं? तो क्या देश कभी आजाद होता? यह इतने निराशावादी लोग हैं कि, जब मैं डिजिटल इंडिया की बात करता था, मैं फिनटेक की चर्चा करता था, मैं यूपीआई की बात करता था, तो यह कहते थे अरे इस देश में गरीब आदमी मोबाइल फोन पर कैसे पैसों का कारोबार करेगा? तीन साल के भीतर-भीतर देश ने दिखा दिया, ये हो सकता है। और मैं हैरान था, जिस दिन, जिस दिन ऐसा भाषण संसद में हुआ, देश का मीडिया भी में भी ऐसे लोग उनकी जो इकोसिस्टम है, वो नाच रही थी कि देखिए मोदी को तगड़ा जवाब दिया। मोदी ने जवाब नहीं दिया, आपके हाथ में मोबाइल फोन जब यूपीआई से चलता है, काम करता है ना, तो जवाब अपने आप मिल जाता है।

आदरणीय सभापति जी,

कांग्रेस के समय एक व्यंग चला करता था और आमतौर पर और सीरियस नेचर की चर्चा में भी आता था, हंसी मजाक में भी आता था। इंडिया मिस द बस। यह कॉमन वर्ड हो चुका है। भाई मौका गवा दिया। बाजी हाथ से चली गई। इंडिया मिस द बस। ये ये हमेशा होता था।

आदरणीय सभापति जी,

आज भारत कोई बस मिस नहीं कर रहा है। आज भारत काफिले का नेतृत्व कर रहा है।

आदरणीय सभापति जी,

देश का भविष्य उज्जवल बनाना है। वर्तमान भी उज्जवल बनाने के लिए अविरत कार्य करना होता है। हम विकसित भारत के सपने के फ्लाइट में 5 वर्ष की योजना बनाते हैं और हर वर्ष का बजट बनाते हैं और हम दिशा तय करके चलते हैं हम क्योंकि हमारे लिए अगला चुनावी लक्ष्य नहीं होता है। हमारा लक्ष्य है 2047, विकसित। अरे चुनाव तो आएंगे-जाएंगे, मेरा देश अजर अमर रहने वाला है और हम, हम देश की युवा पीढ़ी के हाथ में समृद्ध हिंदुस्तान देने का सपना लेकर के चले हैं। जिन बच्चे, जो आज, जो घर में बालक है ना, उनको भी मैं देखकर के सोचता हूं कि मैं इसके हाथ में ऐसा हिंदुस्तान दे के जाऊं, ताकि हमें अपने काम का संतोष हो। 2047 क्यों, 2047 क्यों यह बातें करते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

आज जिस प्रकार से हमने इनिशिएटिव लिए हैं, चाहे स्पेस हो, साइंस हो, टेक्नोलॉजी हो, समंदर की गहराई हो, जल-थल-नभ, अंतरिक्ष, हर क्षेत्र में नए संकल्प, नई ऊर्जा, नए कदम और नई सिद्धियों को लेकर के देश आज आगे बढ़ रहा है। हम ग्रीन हाइड्रोजन पर काम कर रहे हैं। हम आने वाले युग को समझ पा रहे हैं। हम क्वांटम कंप्यूटिंग की बात कर रहे हैं। हम एआई मिशन को लेकर के चल रहे हैं और आज दुनिया मानने लगी है कि एआई मिशन भारत बहुत कुछ दुनिया को दे सकता है, यह विश्वास आज दुनिया में बना है। आज दुनिया में क्रिटिकल मिनरल रेयर अर्थ राजनीतिक हथियार बन गया है, हम उस पर फोकस कर रहे हैं, ताकि कभी भारत को किसी के पास हाथ फैलाने की नौबत ना आ जाए।

आदरणीय सभापति जी,

ऐसे तो अनगिनत प्रोजेक्ट हैं, जिसमें विदेश का इन्वेस्टमेंट आना ही आना है क्योंकि अब हर किसी को अपना भविष्य भारत की भूमि में नजर आ रहा है, हर किसी को अपना भविष्य भारत के टैलेंट के भरोसे नजर आ रहा है, हर किसी को भविष्य भारत के उज्जवल भविष्य के साथ खुद के उज्जवल भविष्य को जोड़ करके दिखता है और इसलिए दुनिया, इसलिए दुनिया आज भारत विकसित भारत की बात हम क्यों कर रहे हैं, जिनके दिमाग में नहीं पड़ता है, दुनिया को समझ आ रहा है कि भारत ने सही दिशा पकड़ी है, चलो, अब चर्चा वहां चल रही है, कहीं हम बस ना चूक जाए। कल तक चर्चा चलती थी, इंडिया मिस बस मिस करता है, अब दुनिया को लगता है, अब हम लेट ना हो जाए, वहां आने की स्पर्धा चल रही है।

आदरणीय सभापति जी,

आने वाला समय भारत के लिए अवसरों से भरा हुआ है। भारत के नौजवानों के लिए अवसरों से भरा हुआ है। भारत के उज्जवल भविष्य के लिए मैं पूरी संभावनाएं रेखांकित कर सकता हूं। मैं देख सकता हूं और उसके दिशा में नीतियां बना करके हम आगे चल रहे हैं। हम इसको और मैं चाहता हूं, मेरे देशवासियों को निमंत्रण देता हूं और मैं देशवासियों को आज सदन से भी कहना चाहूंगा। मैंने मन की बात में भी इसका उल्लेख किया था, मैं यहां पर सभी माननीय सांसदों से भी कहूंगा कि आप भी अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों को बताइए, जब दुनिया भर में इतने अवसर पैदा हुए हैं, उसको स्‍थायित्‍व तब मिलता है, जब हम उत्तम प्रकार की चीजों को लेकर के जाएं, हम क्वालिटी को कंप्रोमाइज ना करें। मुनाफा कम क्यों ना हो, लेकिन क्वालिटी को हम निरंतर उत्तम करते जाएंगे, इनोवेशन करना पड़ेगा करेंगे, रिसर्च करना पड़ा करेंगे, प्रोडक्ट में मटेरियल बदलना पड़ेगा, तो बदलेंगे। लेकिन हम दुनिया में क्वालिटी की दृष्टि से उत्तम से उत्तम हो तब जाकर के जो आज, राजनीतिक दृष्टि से जो निर्णय होते हैं, उसका बेनिफिट लेने के लिए हमने पीछे नहीं रहना चाहिए। मेरे देशवासियों से मैं आज यही आग्रह करूंगा कि आप क्वालिटी के विषय में मेरा साथ दीजिए। क्वालिटी में कॉम्प्रोमाइज ना करिए। आप देखिए दुनिया सिर्फ और सिर्फ मेड इन इंडिया, मेड इन भारत, मेड इन इंडिया, मेड इन भारत, इसके लिए गीत गाने लग जाएगी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं कांग्रेस के मित्रों का भी आज आभार व्यक्त करता हूं कि कम से कम मुझे उनको पता था, पहले प्रयोग कर चुके थे। पिछले 10 साल में मुझे पांच छ: बार इस प्रकार से बोलने से रोका गया क्योंकि उनको मालूम था, एक बार शुरू होता हूं, तो रुकता नहीं। और मैंने कहा था एक बार एक अकेला, तो अब अनुभव से सीख गए कि इसमें कोई दाल गलने वाली नहीं है, तो समझदारी से काम लिया और ऐसी समझ उनको निरंतर मिलती रहे। यह भी मैं प्रार्थना करता रहूंगा।

आदरणीय सभापति जी,

मैं राष्ट्रपति जी के उद्बोधन में योगदान देने वाले सभी सांसदों का भी आभार व्यक्त करता हूं। जो भी उत्तम विचार यहां प्राप्त हुए हैं, उत्तम विचार देश की प्रगति में जरूर काम आएंगे, ऐसा मैं विश्वास देता हूं और आदरणीय राष्ट्रपति जी का इस संबोधन के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
PM Modi Leads International Yoga Day Event In Kolkata, Says It Has Become 'World's Biggest Festival'

Media Coverage

PM Modi Leads International Yoga Day Event In Kolkata, Says It Has Become 'World's Biggest Festival'
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
PM Modi commissions three indigenously designed and built naval ships – INS Dunagiri, INS Sanshodhak and INS Agray
June 21, 2026
INS Agray, INS Dunagiri, and INS Sanshodhak have been inducted into the Indian Navy: PM
Today, 21 June is also celebrated as World Hydrography Day, And it is a truly remarkable coincidence that on this very day we have commissioned India's most advanced hydrography ship, INS Sandhayak: PM
The country whose maritime strength is robust,its economic and strategic influence will be equally robust; And India understands this reality well, India is preparing itself for this: PM
The journey from INS Vikrant to today is not merely the journey of new warships; It is the journey of India's growing self-reliance, today, INS Agray, INS Dunagiri, and INS Sanshodhak are giving new momentum to that very journey: PM
India has begun to move forward with a new vision for the shipbuilding sector; Special steps have been taken to enhance domestic construction capacity: PM
Shipbuilding, ship repair, and MRO are being viewed as part of a major national mission: PM
India has always regarded the ocean as a medium of cooperation, but India also knows that strength is essential to safeguard peace; Security is necessary to protect prosperity and self-reliance is imperative for building the future: PM
Today, INS Agray, INS Dunagiri, and INS Sanshodhak have joined the Indian Navy as symbols of this very spirit: PM

Prime Minister, Shri Narendra Modi, today commissioned three indigenously designed and built naval ships - INS Dunagiri, an advanced stealth frigate, INS Sanshodhak, a survey vessel (large) and INS Agray, an anti-submarine warfare shallow water craft, at Syama Prasad Mookerjee Port, Kolkata, West Bengal. These inductions will significantly bolster the nation’s operational capabilities, enhance maritime domain awareness, and strengthen the security of our coastal waters against geopolitical threats. All three ships were designed by the Indian Navy’s Warship Design Bureau and constructed in Kolkata by Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE), with extensive participation by Indian industry, including more than 200 MSMEs. With an indigenous content of over 75 percent, these ships are also a testament to India’s commitment to Aatmanirbharta.

Addressing the gathering, the Prime Minister noted that the occasion coincides with the International Day of Yoga being celebrated across the world and expressed happiness at having the opportunity to visit the historic land of Bengal, which has played a pivotal role in shaping India's intellectual, cultural and national renaissance and has connected India with the world through maritime routes for centuries. “The event represented an important milestone in the journey towards an Aatmanirbhar Bharat, a secure India and a developed India”, Shri Modi noted. He pointed out that June 21 is also observed globally as World Hydrography Day and described it as a remarkable coincidence that India's most advanced hydrographic survey vessel, INS Sanshodhak, is commissioned on the same day. Congratulating the Indian Navy, scientists, engineers, workers and all citizens of the country, Shri Modi said the achievement reflected India's growing technological and maritime capabilities. “No nation can emerge as a major power without strong maritime capabilities. Development, security and prosperity are closely linked to the oceans. Most of the world's trade moves through sea routes, while vast global data networks operate beneath the oceans”, Shi Modi stated while emphasizing the importance of maritime strength in the modern world. He further noted that critical minerals, deep-sea resources and future sources of energy will increasingly be connected to the maritime domain. Therefore, he said, a nation's economic and strategic influence is directly linked to the strength of its maritime sector.

Shri Modi stated that India fully understands this reality and is preparing itself accordingly. “The commissioning of the three naval platforms stands as testimony to the country's growing capabilities and skills”, he remarked. Recalling the commissioning of INS Vikrant, he said that it had marked the beginning of a new chapter in India's maritime journey and announced India's growing naval strength to the world. He noted that the journey from INS Vikrant to the commissioning of INS Agray, INS Dunagiri and INS Sanshodhak is not merely a story of new warships but also a reflection of India's increasing self-reliance. “All three vessels symbolize India's commitment to indigenous design, manufacturing and innovation. Designed and built in India, the vessels showcase the talent of Indian industries, the expertise of Indian engineers and the hard work of Indian workers”, Shri Modi underscored.

Shri Modi asserted that India does not wish to remain merely a buyer in the defence sector. “The strength of the nation's military cannot be measured by its dependence on global markets but by its ability to become self-reliant. India seeks to become a producer and a manufacturer, because nations that manufacture become decisive players on the global stage”, he added. Highlighting recent achievements, the Prime Minister noted that more than 40 indigenously built warships and submarines have been inducted into the Indian Navy over the past few years. He remarked that nearly every few weeks the Navy has received a new capability, while 45 major naval platforms are currently under construction. These figures, he said, are not merely statistics but indicators of India's industrial capacity and future potential.

Underlining the immense employment-generating potential of the maritime sector, Shri Modi said, “The Government views the maritime sector not as an isolated industry but as a major engine of employment and economic growth for a developed India. A modern ship requires large quantities of steel, electronics, machinery and thousands of components, creating opportunities across extensive industrial supply chains”. Referring to the three commissioned vessels, he noted that more than 200 MSMEs contributed to their construction, generating substantial employment and economic activity across the country.

Shri Modi stated that the time has come for India to enter the next phase of maritime development, and the Government has adopted a new vision for the shipbuilding sector and has introduced several policy reforms in recent years to enhance domestic manufacturing capabilities. “The ₹70,000 crore incentive package announced for the shipping sector is not merely an economic measure but an investment in India's maritime future and industrial expansion. Initiatives such as Sagarmala reflect this comprehensive vision and are helping reduce logistics costs, accelerate industrial growth and create new opportunities in coastal regions” he stated.

Reflecting on India's transformation in the defence sector, Shri Modi observed that there was a time when India was counted among the world's largest defence importers, creating both strategic and security challenges. Following the formation of the Government in 2014, he said, a determined effort was made to change this situation through major policy reforms and a strong emphasis on self-reliance in defence manufacturing. “These efforts have opened new opportunities in defence design, manufacturing and exports. While India's total defence production stood at around ₹40,000 crore in 2014, it has now risen to nearly ₹1.8 lakh crore, demonstrating the significant progress made towards building a strong, self-reliant and globally competitive defence industry”, he remarked. Shri Modi emphasized that the progress made over the past twelve years demonstrates how transformative change becomes possible when policies are clear, direction is correct, and all stakeholders work together with a shared commitment towards national development.

Referring to India's rich maritime heritage, the Prime Minister said that the name of West Bengal naturally comes to mind whenever the country's maritime legacy is discussed. He observed that Bengal has historically played a crucial role in India's maritime connections with the world. The waters of the Hooghly River, he said, have witnessed changing chapters of history, the growth of trade, and new journeys of development. He also noted that the port bears the name of Dr. Syama Prasad Mookerjee, the son of Bengal and India's first Minister for Industry, making the occasion even more significant. “West Bengal is poised to become a major hub for India's Blue Economy, maritime manufacturing, logistics and coastal development in the years ahead”, Shri Modi stated.

Shri Modi reiterated that India has always viewed the oceans as a medium for cooperation and connectivity. “Security is indispensable for protecting prosperity, while self-reliance is necessary for building the future. INS Agray, INS Dunagiri and INS Sanshodhak embody these very ideals and symbolize a nation that is increasingly aware of its capabilities, confident in its strengths and determined to move forward with renewed energy and purpose in the twenty-first century” he emphasised.

Concluding his address, the Prime Minister extended his best wishes to all personnel of the Indian Navy, scientists, engineers, workers and all citizens for their contribution to these achievements and expressed confidence that India's maritime and defence sectors would continue to strengthen the nation's security, prosperity and global standing.