राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
हमारी सरकार सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन में विश्वास करती है; देश तेजी से सुधार के मार्ग पर कदम बढ़ा रहा है : प्रधानमंत्री
भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

नमस्कार साथियों!

कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था और 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवा, उनके एस्पिरेशन को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन, सभी सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक बातें भी, कल आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सदन में सबके सामने रखी हैं। सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही, आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रूप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा और यह सत्र अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण सत्र होता है। यह बजट सत्र है, 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है, यह दूसरी चौथाई का प्रारंभ हो रहा है, और 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है और यह दूसरे क्वार्टर का, इस शताब्दी के दूसरे क्वार्टर का यह पहला बजट आ रहा है और वित्त मंत्री निर्मला जी, देश की पहली वित्त मंत्री ऐसी हैं, महिला वित्त मंत्री ऐसी हैं, जो लगातार 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही है। यह अपने आप में एक गौरव पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में रजिस्टर हो रहा है।

साथियों,

इस वर्ष का प्रारंभ बहुत ही पॉजिटिव नोट के साथ शुरू हुआ है। आत्मविश्वास से भरा हिंदुस्तान आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है, आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय यूनियन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आने वाली दिशाएं कितनी उज्ज्वल हैं, भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्ज्वल है, उसकी एक झलक है। यह फ्री ट्रेड फॉर एंबिशियस भारत है, यह फ्री ट्रेड फॉर एस्पिरेशनल यूथ है, यह फ्री ट्रेड फॉर आत्मनिर्भर भारत है और मुझे पक्का विश्वास है, खास करके जो भारत के मैन्युफैक्चरर्स हैं, वे इस अवसर को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। और मैं सभी प्रकार के उत्पादकों से यही कहूंगा कि जब भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसको कहते हैं, वैसा समझौता हुआ है तब, मेरे देश के उद्योगकार, मेरे देश के मैन्युफैक्चरर्स, अब तो बहुत बड़ा बाजार खुल गया, अब बहुत सस्ते में हमारा माल पहुंच जाएगा, इतने भाव से वो बैठे ना रहे, यह एक अवसर है, और इस अवसर का सबसे पहले मंत्र यह होता है, कि हम क्वालिटी पर बल दें, हम अब जब बाजार खुल गया है तो उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के बाजार में जाएं और अगर उत्तम से उत्तम क्वालिटी लेकर के जाते हैं, तो हम यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के खरीदारों से पैसे ही कमाते हैं इतना ही नहीं, क्वालिटी के कारण से उनका दिल जीत लेते हैं, और वो लंबे अरसे तक प्रभाव रहता है उसका, दशकों तक उसका प्रभाव रहता है। कंपनियों का ब्रांड देश के ब्रांड के साथ नए गौरव को प्रस्थापित कर देता है और इसलिए 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता, हमारे देश के मछुआरे, हमारे देश के किसान, हमारे देश के युवा, सर्विस सेक्टर में जो लोग विश्व में अलग-अलग जगह पर जाने के उत्सुक हैं, उनके लिए बहुत बड़े अवसर लेकर के आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है, एक प्रकार से कॉन्फिडेंस कॉम्पिटेटिव और प्रोडक्टिव भारत की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।

साथियों,

देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है, लेकिन इस सरकार की यह पहचान रही है- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। और अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चल पड़े हैं, बहुत तेजी से चल पड़े हैं और मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं, इस रिफॉर्म एक्सप्रेसवे को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति को लगा रहे हैं और उसके कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को भी लगातार गति मिल रही है। देश लॉन्ग टर्म पेंडिंग प्रॉब्लम अब उससे निकल करके, लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के मार्ग पर मजबूती के साथ कदम रख रहा है। और जब लॉन्ग टर्म सॉल्यूशंस होते हैं, तब predictivity होती है, जो विश्व में एक भरोसा पैदा करती है! हमारे हर निर्णय में राष्ट्र की प्रगति यह हमारा लक्ष्य है, लेकिन हमारे सारे निर्णय ह्यूमन सेंट्रिक हैं। हमारी भूमिका, हमारी योजनाएं, ह्यूमन सेंट्रिक है। हम टेक्नोलॉजी के साथ स्पर्धा भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी को आत्मसात भी करेंगे, हम टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को स्वीकार भी करेंगे, लेकिन उसके साथ-साथ हम मानव केंद्रीय व्यवस्था को जरा भी कम नहीं आकेंगे, हम संवेदनशीलताओं की महत्वता को समझते हुए टेक्नोलॉजी की जुगलबंदी के साथ आगे बढ़ने के व्यू के साथ आगे सोचेंगे। जो हमारे टिकाकार रहते हैं साथी, हमारे प्रति पसंद ना पसंद का रवैया रहता है और लोकतंत्र में बहुत स्वाभाविक है, लेकिन एक बात हर कोई कहता है, कि इस सरकार ने लास्ट माइल डिलीवरी पर बल दिया है। योजनाओं को फाइलों तक नहीं, उसे लाइफ तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। और यही हमारी जो परंपरा है, उसको हम आने वाले दिनों में रिफॉर्म एक्सप्रेस में नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ आगे बढ़ाने वाले हैं। भारत की डेमोक्रेसी और भारत की डेमोग्राफी, आज दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है, तब इस लोकतंत्र के मंदिर में हम विश्व समुदाय को भी कोई संदेश दें, हमारे सामर्थ्य का, हमारे लोकतंत्र के प्रति समर्पण का, लोकतंत्र की प्रक्रियाओं के द्वारा हुए निर्णय का सम्मान करने का यह अवसर है, और विश्व इसका जरूर स्वागत भी करता है, स्वीकार भी करता है। आज जिस प्रकार से देश आगे बढ़ रहा है आज समय व्यवधान का नहीं है, आज समय समाधान का है। आज प्राथमिकता व्यवधान नहीं है, आज प्राथमिकता समाधान है। आज भूमिका व्यवधान के माध्यम से रोते बैठने का नहीं है, आज हिम्मत के साथ समाधानकारी निर्णयों का कालखंड है। मैं सभी माननीय सांसदों से आग्रह करूंगा कि वे आएं, राष्ट्र के लिए आवश्यक समाधानों के दौर को हम गति दें, निर्णयों को हम शक्ति दें और लास्ट माइल डिलीवरी में हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ें, साथियों आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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2026 बजट सत्र के प्रारंभ में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का संबोधन
January 29, 2026
राष्ट्रपति का संबोधन 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाता है: प्रधानमंत्री
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता युवाओं, किसानों और निर्माताओं के लिए व्यापक अवसर खोलता है : प्रधानमंत्री
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भारत का लोकतंत्र और जनसांख्यिकी विश्व के लिए आशा की किरण है: प्रधानमंत्री
यह समाधानों, सशक्त निर्णय और सुधारों में तेजी लाने का समय है : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज संसद परिसर में 2026 के बजट सत्र के प्रारंभ से पहले मीडिया को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण 140 करोड़ नागरिकों के विश्वास की अभिव्यक्ति, उनके परिश्रम का प्रमाण और युवाओं की आकांक्षाओं का सटीक प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सत्र और वर्ष 2026 की शुरुआत में ही सभी सांसदों के समक्ष कई मार्गदर्शक बिंदु रखे हैं। श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्राध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति द्वारा सरल शब्दों में व्यक्त की गई अपेक्षाओं को सभी सांसदों ने गंभीरता से लिया होगा, जिससे यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट सत्र 21वीं सदी की पहली तिमाही के समापन और दूसरी तिमाही के प्रारंभ का प्रतीक है। उन्होंने रेखांकित किया कि 2047 तक एक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले 25 वर्ष महत्वपूर्ण हैं और यह बजट सदी की दूसरी तिमाही का पहला बजट है। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जो देश की पहली महिला वित्त मंत्री हैं, लगातार नौवीं बार संसद में बजट पेश कर रही हैं, जो भारत के संसदीय इतिहास में एक गौरवपूर्ण क्षण है।

श्री मोदी ने उल्लेख किया कि वर्ष की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही है, एक आत्मविश्वासी भारत विश्व के लिए आशा की किरण और आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इस तिमाही की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और आगे की आशाजनक दिशाओं को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह समझौता महत्वाकांक्षी भारत, आकांक्षावान युवाओं और आत्मनिर्भर भारत के लिए मुक्त व्यापार है। प्रधानमंत्री ने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि भारत के निर्माता अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इस अवसर का लाभ उठाएंगे। उन्होंने सभी उत्पादकों से आग्रह किया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए इस समझौते, जिसे "सभी समझौतों की जननी" कहा जा रहा है, के साथ अब एक विशाल बाजार खुल गया है और भारतीय सामान वहां कम लागत पर पहुंचेंगे। उन्होंने उद्योग जगत प्रमुखों और निर्माताओं को आगाह किया कि वे आत्मसंतुष्ट न हों, बल्कि गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ इस खुले बाजार में प्रवेश करने से न केवल 27 यूरोपीय संघ देशों के खरीदारों से लाभ प्राप्त होगा, बल्कि उनका विश्वास भी जीता जाएगा, जिससे दशकों तक दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के ब्रांड के अनुरूप कंपनियों के ब्रांड नई प्रतिष्ठा स्थापित करेंगे। श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता भारत के मछुआरों, किसानों, युवाओं और सेवा क्षेत्र में कार्यरत उन लोगों के लिए अपार अवसर लेकर आया है जो वैश्विक स्तर पर अवसर तलाशने के इच्छुक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह एक आत्मविश्वासपूर्ण, प्रतिस्पर्धी और उत्पादक भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यद्यपि राष्ट्रीय ध्यान स्वाभाविक रूप से बजट की ओर जाता है, फिर भी इस सरकार की पहचान सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन रही है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि देश अब सुधार की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस सुधार यात्रा को गति देने में अपना सकारात्मक योगदान देने वाले सभी सांसदों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश दीर्घकालिक लंबित समस्याओं से हटकर दीर्घकालिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है, जो पूर्वानुमान योग्य हैं और वैश्विक विश्वास का निर्माण करते हैं। श्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय प्रगति के उद्देश्य से लिया गया प्रत्येक निर्णय मानव-केंद्रित रहेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत प्रौद्योगिकी के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा, उसे आत्मसात करेगा और उसकी शक्ति को स्वीकार करेगा, लेकिन सरकार मानव-केंद्रित प्रणालियों पर कभी समझौता नहीं करेगी और संवेदनशीलता के साथ प्रौद्योगिकी को संतुलित करने की दृष्टि से आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि आलोचक भी अंतिम छोर तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और उन्हें केवल कागजों तक सीमित न रखकर लोगों के जीवन तक पहुंचाने पर सरकार के फोकस को स्वीकार करते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सुधार की राह पर अगली पीढ़ी के सुधारों के साथ यह परंपरा जारी रहेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र और जनसंख्या आज विश्व के लिए एक बड़ी उम्मीद है और लोकतंत्र के इस मंदिर में, भारत के पास शक्ति, लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से लिए गए निर्णयों के प्रति सम्मान का संदेश देने का अवसर है—ऐसे संदेश जिनका वैश्विक स्तर पर स्वागत और स्वीकृति हो। श्री मोदी ने कहा कि यह समय व्यवधान का नहीं, बल्कि समाधानों का है, बाधाओं का नहीं, बल्कि संकल्पों का है। उन्होंने सभी सांसदों से समाधानों के युग को गति देने, निर्णयों को सशक्त बनाने और अंतिम छोर तक सफल डिलीवरी सुनिश्चित करने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने सभी को हार्दिक धन्यवाद और शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन का समापन किया।

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