"शिक्षा के क्षेत्र में सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रयास हम सभी को प्रेरित करते हैं"
“भारत की वर्तमान राष्ट्रपति, जो एक शिक्षक भी हैं, उनसे सम्मानित होना और भी महत्वपूर्ण है”
"एक शिक्षक की भूमिका किसी व्यक्ति को सही राह दिखाना है। एक शिक्षक ही सपने देखना और उन सपनों को संकल्प में बदलना सिखाता है"
"राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इस तरह से आत्मसात करने की आवश्यकता है कि यह सरकारी दस्तावेज छात्रों के जीवन का आधार बन जाए"
"पूरे देश में ऐसा कोई छात्र नहीं होना चाहिए जिसके पास 2047 के लिए सपना न हो"
"दांडी यात्रा और भारत छोड़ो के दौरान देश में व्याप्त हुए उत्साह को फिर से जगाने की जरूरत है"

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी धर्मेंद्र जी, अन्नपूर्णा देवी जी और देशभर से आए मेरे सभी शिक्षक साथियों और आपके माध्‍यम से एक प्रकार से मैं आज देश के सभी शिक्षकों से भी बात कर रहा हूं।

देश आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति और शिक्षाविद् डॉक्‍टर राधाकृष्णन जी को उनके जन्म दिवस पर आदरांजलि दे रहा है और ये हमारा सौभाग्‍य है कि हमारे वर्तमान राष्‍ट्रपति भी टीचर हैं। उनका जीवन का प्रारंभिक काल उन्‍होंने शिक्षक के रूप में काम किया और वो भी दूर-सुदूर उड़ीसा के interior इलाके में और वहीं से उनकी जिंदगी अनेक प्रकार से हमारे लिए सुखद संयोग है और ऐसे टीचर राष्‍ट्रपति के हाथ से आपका सम्‍मान हुआ है तो ये और आपके लिए गर्व की बात है।

देखिए, आज जब देश आज़ादी के अमृतकाल के अपने विराट सपनों को साकार करने में जुट चुका है, तब शिक्षा के क्षेत्र में राधाकृष्णन जी के प्रयास हम सभी को प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर मैं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त आप सभी शिक्षकों को, राज्‍यों में भी इस प्रकार के पुरस्‍कार दिए जाते हैं, उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

अभी मुझे अनेक शिक्षकों से बातचीत करने का मौका मिला। सब अलग-अलग भाषा बोलने वाले हैं, अलग-अलग प्रयोग करने वाले लोग हैं। भाषा अलग होगी, क्षेत्र अलग होगा, समस्‍याएं अलग होंगी, लेकिन ये भी है कि इनके बीच में आप कितने ही क्‍यों न हों, आप सबके बीच में एक समानता है और वो है आपका कर्म, आपका विद्यार्थियों के प्रति समर्पण, और ये समानता आपके अंदर जो सबसे बड़ी बात होती है और आपने देखा होगा जो सफल टीचर रहा होगा वो कभी भी बच्‍चे को ये नहीं कहता कि चल ये तेरे बस का रोग नहीं है, नहीं कहता है। टीचर की सबसे बड़ी जो स्‍ट्रेंथ होती है, वो पॉजिटिविटी होती है, सकारात्‍मकता। कितना ही बच्‍चा पढ़ने में-लिखने में पूरा हो…अरे करो बेटे हो जाएगा। अरे देखो उसने किया है तुम भी करो, हो जाएगा।

यानी आप देखिए उसको पता भी नहीं है, लेकिन टीचर के गुणों में होता है। वो हर बार पॉजिटिव ही बोलेगा, वो कभी‍ किसी को नेगेटिव कमेंट करके निराश कर देना, हताश करना तो उसके नेचर में नहीं है। और एक टीचर की भूमिका ही है जो व्यक्ति को रोशनी दिखाने का काम करती है। वो सपने बोती है, टीचर जो है ना वो हर बच्‍चे के अंदर सपने बोता है़ और उसको संकल्‍प में परिवर्तित करने की ट्रेनिंग देता है कि देख ये सपना पूरा हो सकता है, तुम एक बार संकल्प लो, लग जाओ। आपने देखा होगा कि वो बच्‍चा सपनों को संकल्‍प में परिवर्तित कर देता है और टीचर ने जो रास्‍ता दिखाया है, उसे वो सिद्ध करके रहता है। यानी सपने से सिद्धि तक की ये पूरी यात्रा उसी प्रकाश पुंज के साथ होती है, जो किसी टीचर ने उसकी जिंदगी में सपना बोया था, दीया जलाया था। जो उसको कितनी ही चुनौतियों और अंधेरों के बीच में भी रास्‍ता दिखाता है।

और अब देश भी आज नए सपने, नए संकल्‍प ले करके एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है कि आज जो पीढ़ी है, जो विद्यार्थी अवस्‍था में है, 2047 में हिन्‍दुस्‍तान कैसा बनेगा, ये उन्‍हीं पर तय होने वाला है। और उनका जीवन आपके हाथ में है। इसका मतलब हुआ कि 2047 को देश गढ़ने का काम आज जो वर्तमान में टीचर हैं, जो आने वाले 10 साल, 20 साल सेवाएं देने वाले हैं, उनके हाथ में 2047 का भविष्‍य तय होने वाला है।

और इसीलिए आप एक स्‍कूल में नौकरी करते हैं, ऐसा नहीं है, आप एक क्‍लासरूम में बच्‍चों को पढ़ाते हैं, ऐसा नहीं है, आप एक सिलेबस को अटेंड करते हैं, ऐसा नहीं है। आप उसके साथ जुड़ करके, उसकी जिंदगी बनाने का काम और उसकी जिंदगी के माध्‍यम से देश बनाने का सपना ले करके चलते हैं। जो टीचर का सपना खुद का ही छोटा होता है, उसके दिमाग में 10 से 5 का ही भरा रहता है, आज चार पीरियड लेने हैं, वही रहता है। तो वो, उसके लिए वो भले तनख्‍वाह लेता है, एक तारीख का वो इंतजार करता है, लेकिन उसको आनंद नहीं आता है, उसको वो चीजें बोझ लगती हैं। लेकिन जब उसके सपनों से वो जुड़ जाता है, तब ये कोई चीज उसको बोझ नहीं लगती है। उसको लगता है कि अरे! मेरे इस काम से तो मैं देश का इतना बड़ा कंट्रीब्‍यूशन करूंगा। अगर मैं खेल के मैदान में एक खिलाड़ी तैयार करूं और मैं सपना संजोऊं कि कभी न कभी मैं उसको दुनिया में कहीं न कहीं तिरंगे झंडे के सामने खड़ा हुआ देखना चाहता हूं...आप कल्‍पना कर सकते हैं, आपको उस काम का आनंद कितना आएगा। आपको रात-रात जागने का कितना आनंद आएगा।

और इसलिए टीचर के मन में सिर्फ वो क्‍लासरूम, वो अपना पीरियड, चार लेने हैं, पांच लेने हैं, वो आज आया नहीं तो उसके बदले में भी मुझे जाना पड़ रहा है, ये सारे बोझ से मुक्‍त हो करके…मैं आपकी कठिनाइयां जानता हूं, इसलिए बोल रहा हूं...उस बोझ से मुक्‍त हो करके अगर हम इन बच्‍चों के साथ, उनकी जिंदगी के साथ जुड़ जाते हैं।

दूसरा, अल्टीमेटली हमें बच्‍चे को पढ़ाना तो है ही है, ज्ञान तो देना है, लेकिन हमें उसका जीवन बनाना है। देखिए, आइसोलेशन में, साइलोज में जीवन नहीं बनते। क्‍लासरूम में वो एक देख लें, स्‍कूल परिसर में कुछ और देखें, घर परिवेश में कुछ और देखें तो बच्‍चा conflict और contradiction में फंस जाता है। उसको लगता है, मां तो ये कह रही थी और टीचर तो ये कह रहे थे और क्‍लास में बाकी जो लोग थे, वो तो ऐसा बोल रहे थे। उस बच्‍चे को दुविधा की जिंदगी से बाहर निकालना ही हमारा काम है। लेकिन उसका कोई इंजेक्‍शन नहीं होता है कि चलो आज ये इंजेक्‍शन ले लो, तुम दुविधा से बाहर। टीका लगा दो, दुविधा से बाहर, ऐसा तो नहीं है। और इसके लिए टीचर के लिए बहुत जरूरी है कि कोई integrated approach हो उसका।

कितने टीचर हैं, जो स्‍टूडेंट्स के परिवार को जानते हैं, कभी परिवार को मिले हैं, कभी उनसे पूछा है कि घर आकर क्‍या करता है, कैसा करता है, आपको क्‍या लगता है। और कभी ये बताया कि देखिए भाई, मेरी क्‍लास में आपका बच्‍चा आता है, इसमें ये बहुत बढ़िया ताकत है। आप थोड़ा इसको घर में भी जरा देखिए, बहुत आगे निकल जाएगा। मैं तो हूं ही हूं, टीचर के नाते मैं कोई कमी नहीं रखूंगा, लेकिन आप थोड़ी मेरी मदद कीजिए।

तो उन घर के लोगों के अंदर भी एक सपना बो करके आप आ जाते हैं और वो आपके सहयात्री बन जाते हैं। फिर घर भी अपने-आप में पाठशाला संस्‍कार की बन जाती है। जो सपने आप क्‍लासरूम में बोते हैं, वो सपने उस घर के अंदर फुलवारी बन करके पुलकित होने की शुरूआत कर देते हैं। और इसलिए क्‍या हमारी कोशिश है क्‍या, और आपने देखा होगा एकाध स्‍टूडेंट आपको बड़ा ही परेशान करने वाला दिखता है, ये ऐसा ही है, समय खराब कर देता है, क्‍लास में आते ही पहली नजर वहीं जाती है तो आधा दिमाग वहीं खराब हो जाता है। मैं आपके भीतर से बोल रहा हूं। और वो भी वैसा होता है कि पहली बेंच पर ही बैठेगा, उसको भी लगता है कि ये टीचर मुझे पसंद नहीं करते हैं तो पहले सामने आएगा वो। और आपका आधा समय वो ही खा जाता है।

ऐसे में उन बाकी बच्‍चों पर अन्याय हो जाए…कारण क्‍या है, मेरी पसंद-नापसंद। सफल टीचर वो होता है, जिसकी बच्‍चों के संबंध में, स्‍टूडेंट्स के संबंध में न कोई पसंद होती है, न कोई नापसंद होती है। उसके लिए वो सबके सब बराबर होते हैं। मैंने ऐसे टीचर देखे हैं, जिनकी अपनी संतान भी उसी क्‍लासरूम में है। लेकिन वे टीचर क्‍लासरूम में खुद की संतान को भी वही ट्रीटमेंट देते हैं, जो सब स्‍टूडेंट्स को देते हैं।

अगर चार लोगों को पूछना है, उसकी बारी आई तो उसको पूछते हैं, स्पेशियली उसको कभी नहीं कहते कि तुम ये बताओ, तुम ये करो, कभी नहीं। क्योंकि उनको मालूम है कि उसको एक अच्‍छी मां की जरूरत है, एक अच्‍छे पिता की जरूरत है, लेकिन अच्‍छे टीचर की भी जरूरत है। तो वो भी कोशिश करते हैं कि घर में मैं मां-बाप का रोल पूरा करूंगा, लेकिन क्‍लास में तो मुझे उसको टीचर-स्‍टूडेंट का ही मेरा नाता रहना चाहिए, वो घर वाला रिश्‍ता यहां आना नहीं चाहिए।

ये टीचर का बहुत बड़ा त्‍याग होता है, तब संभव होता है जी। ये अपने-आपको संभाल करके इस प्रकार से काम करना, ये तब संभव होता है। और इसलिए हमारी जो शिक्षा व्‍यवस्‍था है, भारत की जो परंपरा रही है वो किताबों तक सीमित कभी नहीं रही है, कभी नहीं रही है। वो तो एक प्रकार से एक सहारा है हमारे लिए। हम बहुत सी चीजों...और आज टेक्‍नोलॉजी के कारण ये बहुत संभव हुआ है। और मैं देख रहा हूं कि टेक्‍नोलॉजी के कारण बहुत बड़ी मात्रा में हमारे गांव के टीचर भी जो स्‍वयं टेक्‍नोलॉजी में उनकी पढ़ाई नहीं हुई है, लेकिन करते-करते वो सीख गए। और उन्‍होंने भी सोचा कि भई, क्‍योंकि उसके दिमाग में स्‍टूडेंट भरा पड़ा है, उसके दिमाग में सिलेबस भरा पड़ा है, तो वो चीजें, प्रॉडक्‍ट तैयार करता है जो उस बच्‍चे के काम आती हैं।

यहां सरकार में बैठे हुए लोगों के दिमाग में क्‍या रहता है, आंकड़े रहते हैं कि भई कितने टीचर भर्ती करना बाकी है, कितने स्‍टूडेंट का ड्रॉप आउट हो गया, बच्चियों का एनरोलमेंट हुआ कि नहीं हुआ, उनके दिमाग में वो रहता है, लेकिन टीचर के दिमाग में उसकी जिंदगी रहती है...बहुत बड़ा फर्क होता है। और इसलिए अगर टीचर इन सारी जिम्‍मेदारियों को ढंग से उठा लेता है।

अब हमारी जो राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति आई है, इसकी इतनी तारीफ हो रही है, इतनी तारीफ हो रही है, क्‍यों हो रही है, उसमें कुछ कमियां नहीं होंगी, ऐसा तो मैं दावा नहीं कर सकता हूं, कोई नहीं दावा कर सकता है। लेकिन जो लोगों के मन में पड़ा था, उनको लगा यार, ये कुछ रास्‍ता दिख रहा है, ये कुछ सही दिशा में जा रहे हैं। चलिए, इस रास्‍ते पर हम चलते हैं।

हमें पुरानी आदतें इतनी घर कर गई हैं कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति को एक बार पढ़ने-सुनने से बात बनने वाली नहीं है जी। महात्‍मा गांधी जी को कभी एक बार किसी ने पूछा था कि भई आपको कुछ मन में संशय हो, समस्‍याएं हों तो क्‍या करते हैं। तो उन्‍होंने कहा, मुझे भागवत गीता से बहुत कुछ मिल जाता है। इसका मतलब वो बार-बार उसको पढ़ते हैं, बार-बार उसके अर्थ बदलते हैं, बार-बार नए अर्थ दिखते हैं, बार-बार नया प्रकाशवान पुंज सामने खड़ा हो जाता है।

ये राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति भी, जब तक शिक्षा जगत के लोग उससे हर समस्‍या का समाधान उसमें है क्‍या, दस बार पढ़ें, 12 बार पढ़ें, 15 बार पढ़ें, सॉल्‍यूशन इसमें है क्‍या। उसको उस रूप में हम देखेंगे। एक बार आया है, चलो सर्कुलर आता है, वैसे देख लिया तो नहीं होगा। उसको हमें हमारी रगों में उतारना पड़ेगा, हमारे जेहन में उतारना पड़ेगा। अगर ये प्रयास होता है तो मुझे पक्‍का विश्‍वास है कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति बनाने में हमारे देश के टीचर्स का बहुत बड़ा रोल रहा है। लाखों की तादाद में टीचर्स ने कंट्रीब्यूट किया है, इसको बनाने में।

पहली बार देश में इतना बड़ा मंथन हुआ है। जिन टीचर्स ने इसे बनाया है, उन टीचर्स का काम है कि सरकारी भाषा वगैरह बच्‍चों के लिए काम नहीं आती है, आपको माध्‍यम होना होगा कि ये जो सरकारी डॉक्‍यूमेंट हैं, वो उनके जीवन का आधार कैसे बनें। मुझे उसको ट्रांसलेट करना है, मुझे उसको फुलस्‍टॉप, कौमा के साथ पकड़ते हुए भी उसको सहज, सरल रूप में उसको समझाना है। और मैं मानता हूं कि जैसे कुछ नाट्य प्रयोग होते हैं, कुछ essay righting होता है, कुछ व्यक्तित्व स्‍पर्धाएं होती हैं, बच्‍चों को राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चाएं करनी चाहिए। क्योंकिं टीचर उनको तैयार करेगा, जब वो बोलेंगे तो एकाध चीज नई भी उभर करके आएगी। तो ये एक प्रयास करना चाहिए।

आपको मालूम है कि अभी मैंने 15 अगस्‍त को आजादी के 75 साल का ये मेरा भाषण था तो उसका एक अपना अलग मेरा मिजाज भी था। तो मैंने 2047 को ध्‍यान में रख करके बातें कीं। और उसमें मैंने आग्रह किया कि पंच प्रण की चर्चा की। क्‍या उन पंच प्रण, हमारे क्‍लासरूम में इसकी चर्चा हो सकती है क्‍या। असेम्‍बली जब होती हैं, चलिए भई आज फलाना विद्यार्थी और फलाना टीचर पहले प्रण पर बोलेंगे, मंगल को दूसरे प्रण पर, बुधवार को तीसरे प्रण पर, शुक्रवार को पांचवें प्रण पर और फिर अगले सप्‍ताह फिर पहले प्रण पर ये टीचर-ये टीचर। यानी सालभर, उसका अर्थ क्‍या है, हमें क्‍या करना है, ये पंच प्रण हमारे, हमारा भी तो प्रण तत्‍व होना चाहिए, हर नागरिक का होना चाहिए।

इस प्रकार से अगर हम कर सकते हैं तो मैं समझता हूं उसकी सराहना हो रही है, सब लोग कह रहे हैं हां भई, ये पांच प्रण ऐसे हैं कि हमारे आगे जाने का रास्‍ता बना देते हैं। तो ये पांच प्रण उन बच्‍चों तक कैसे पहुंचें, उनके जीवन में कैसे आएं, इसको जोड़ने का काम कैसे करें।

दूसरा, हिन्‍दुस्‍तान में अब कोई स्‍कूल में बच्‍चा ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसके दिमाग में 2047 का सपना न हो। उसको कहना चाहिए, बताओ भई तुम, 2047 में तुम्‍हारी उम्र क्‍या होगी, उसको पूछना चाहिए। हिसाब लगाओ, तुम्‍हारे पास इतने साल हैं, तुम बताओ इतने सालों में तुम तुम्‍हारे लिए क्‍या करोगे और देश के लिए क्‍या करोगे। हिसाब लगाओ, 2047 के पहले तुम्‍हारे पास कितने साल हैं, कितने महीने हैं, कितने दिन हैं, कितने घंटे हैं, तुम एक-एक घंटे को जोड़ करके बताओ, तुम क्‍या करोगे। तुरंत इसका एक पूरा कैनवास तैयार हो जाएगा कि हां, आज एक घंटा चला गया, मेरा 2047 तो पास आ गया। आज दो घंटे चले गए, मेरा 2047 पास आ गया। मुझे 2047 में ऐसे जाना है, ऐसे करना है।

अगर ये भाव हम बच्‍चों के मन-मंदिर में भर देते हैं, एक नई ऊर्जा के साथ, एक नई उमंग के साथ, तो बच्‍चे लग जाएंगे इसके पीछे। और दुनिया में, प्रगति उन्‍हीं की होती है जो बड़े सपने देखते हैं, बड़े संकल्‍प लेते हैं और दूर की सोच करके जीवन को खपा देने के लिए तैयार रहते हैं।

हिन्‍दुस्‍तान में 1947 के पहले एक प्रकार से डांडी यात्रा-1930 और 1942, अंग्रेजो भारत छोड़ो, ये जो 12 साल...आप देखिए, पूरा हिन्‍दुस्‍तान उछल पड़ा था, सिवाय आजादी कोई मंत्र नहीं था। जीवन के हर काम में आजादी, स्‍वतंत्रता, ऐसा एक मिजाज बन गया था। वैसा ही मिजाज, सुराज, राष्‍ट्र का गौरव, मेरा देश मुझे यहां पर, ये समय है हमें ये पैदा करने का।

और मेरा भरोसा हमारे शिक्षक बंधुओं पर ज्‍यादा है, शिक्षा जगत पर ज्‍यादा है। अगर आप इस प्रयास में जुट जाएं, मुझे पक्‍का विश्‍वास है हम उन सपनों को पार कर सकते हैं और आवाज गांव-गांव से उठने वाली है जी। अब देश रुकना नहीं चाहता है। अब देखिए दो दिन पहले- 250 साल तक जो हम पर राज करके गए थे, 250 साल तक...उनको पीछे छोड़ करके हम दुनिया की इकोनॉमी में आगे निकल गए। 6 नंबर से 5 नंबर पर आने का जो आनंद होता है, उससे ज्‍यादा आनंद इसमें हुआ, क्‍यों। 6 से 5 होते तो होता थोड़ा आनंद, लेकिन ये 5 स्‍पेशल है। क्‍योंकि हमने उनको पीछे छोड़ा है, हमारे दिमाग में वो भाव भरा है, वो तिरंगे वाला, 15 अगस्‍त का।

15 अगस्‍त के तिरंगे का जो आंदोलन था, उसके प्रकाश में ये 5वां नंबर आया है और इसलिए उसके अंदर वो जिद भर गई है कि देखा, मेरा तिरंगा और फहरा रहा है। ये मिजाज बहुत आवश्‍यक है और इसलिए 1930 से 1942 तक देश का जो मूड था, देश के लिए जीने का, देश के लिए जूझने का, और जरूरत पड़ी तो देश के लिए मरने का, आज वो मिजाज चाहिए।

मैं मेरे देश को पीछे नहीं रहने दूंगा। हजारों साल की गुलामी से बाहर निकले हैं, अब मौका है, हम रुकेंगे नहीं, हम चल पड़ेंगे। ये मिजाज पहुंचाने का काम, सभी हमारे शिक्षक वर्ग के द्वारा हो तो ताकत अनेक गुना बढ़ जाएगी, अनेक गुना बढ़ जाएगी।

मैं फिर एक बार, आप इतना काम कर-करके अवार्ड प्राप्‍त किए हैं, लेकिन अवार्ड प्राप्‍त किए हैं, इसलिए मैं ज्‍यादा काम दे रहा हूं। जो काम करता है, उसी को काम देने का मन करता है, जो नहीं करता है, उसको कौन देता है। और शिक्षक का मेरा भरोसा रहा है कि वो जिम्‍मा लेता है तो पूरा करता है। तो इसलिए मैं आप लोगों को कहता हूं, मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

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भारत- फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का मजबूत स्तंभ बन रही है: पीएम मोदी
June 18, 2026

नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।