“योग के प्रति जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा आज दिखा उत्साह और प्रतिबद्धता का दृश्‍य जीवंत बना रहेगा”
“योग स्वाभाविक रूप से आना चाहिए और जीवन का सहज हिस्सा बनना चाहिए”
“ध्यान आत्म-सुधार का एक उत्‍कृष्‍ट साधन है”
“योग स्वयं के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण, अनिवार्य और सक्षम है जितना समाज के लिए”

साथियों,

आज ये जो दृश्य है, ये पूरे विश्व के मानस पटल पर चिरंजीव रहने वाला दृश्‍य है। अगर बारिश न होती तो शायद इतना ध्यान नहीं जाता जितना बारिश के बावजूद भी, और जब श्रीनगर में बारिश होती है तो ठंड भी बढ़ जाती है। मुझे भी स्वेटर लगाना पड़ा। आप लोग तो यहीं के हैं, आप आदी हैं, आपके लिए कोई तकलीफ का विषय नहीं होता है। लेकिन बारिश के कारण थोड़ा विलंब हुआ, हमें इसे दो-तीन हिस्सों में बांटना पड़ा। उसके बावजूद भी विश्‍व समुदाय को सेल्‍फ के लिए और सोसायटी के लिए योगा का क्‍या महात्‍मय है, योग जिंदगी की सहज प्रवृत्ति कैसे बने। जैसे टूथब्रश करना हमेशा का क्रम बन जाता है, बाल संवारना हमेशा का क्रम बन जाता है, उतनी ही सहजता से योग जीवन से जब जुड़ता है एक सहज क्रिया बन जाता है, तो वो प्रतिपल उसका बेनिफिट देता रहता है।

कभी-कभी जब ध्‍यान की बात आती है जो योग का हिस्‍सा है तो ज्‍यादातर लोगों के मन में ऐसा रहता है कि कोई बड़ी spiritual journey है। कोई अल्‍लाह को प्राप्‍त करने का, या ईश्‍वर को प्राप्‍त करने या गॉड को प्राप्‍त करने का, साक्षात्‍कार करने का ये कार्यक्रम है। और जब जो है कि लोग...अरे भई ये तो मेरे से से नहीं हो सकता मैं तो सामर्थ्य से बाहर ही हूं, वो रुक जाता है। लेकिन अगर इसको सरलता से समझना है तो ध्‍यान को, जो बच्‍चे स्‍कूल में पढ़ते होंगे...हम भी जब स्‍कूल में पढ़ते थे, दिन में दस बार हमारे टीचर कहते थे- भई ध्‍यान रखो जरा, ध्‍यान से देखो, ध्‍यान से सुनो, अरे तुम्‍हारा ध्‍यान कहां है। ये ध्‍यान जो है ना वो हमारे concentration, हमारा कितना फोकस है चीजों पर, हमारा मन कितना केंद्रित है, उससे जुड़ा विषय है।

आपने देखा होगा, बहुत से लोग याद शक्ति बढ़ाने के लिए, memory बढ़ाने के लिए एक टेक्‍नीक डेवलप करते हैं, टेक्‍नीक सिखाते हैं। और जो लोग उसको बराबर फॉलो करते हैं तो धीरे-धीरे उनका memory power बढ़ता जाता है। वैसे ही ये किसी भी काम में मन लगाने की आदत, ध्‍यान केंद्रित करने की आदत, फोकस-वे में काम करने की आदत उत्तम से उत्‍तम परिणाम देती है, स्‍वयं का उत्तम से उत्तम विकास करती है और कम से कम थकान से ज्‍यादा से ज्‍यादा संतोष मिलता है।

एक काम करते हुए दस जगह पर जो दिमाग भटकता है उसकी थकान होती है। अब इसलिए ये जो ध्‍यान है, spiritual journey को अभी छोड़ दीजिए, उसका जब समय आएगा तब कर लेना। अभी तो अपने व्‍यक्तिगत जीवन में ध्‍यान केंद्रित करने के लिए, अपने-आप को ट्रेंड करने के लिए योगा का एक हिस्‍सा है। अगर इतना सहज रूप से आप इसको जोड़ेंगे, मैं पक्‍का मानता हूं साथियों आपको बहुत लाभ होगा, आपकी विकास यात्रा का एक बड़ा मजबूत पहलू बन जाएगा।

और इसलिए योग सेल्‍फ के लिए जितना जरूरी है, जितना उपयोगी है, जितनी ताकत देता है, उसका विस्‍तार सोसायटी को भी फायदा करता है। और जब सोसायटी को लाभ होता है तो सभी मानव जाति को लाभ होता है, विश्‍व के हर कोने में लाभ होता है।

मैं अभी दो दिन पहले मैंने एक वीडियो देखा, मिस्र ने एक competition organize किया। और उन्‍होंने टूरिज्‍म से जुड़े हुए जो आइकॉनिक सेंटर्स थे, वहां पर जो बेस्‍ट योगा की फोटो निकालेगा या वीडियो निकालेगा, उसको अवार्ड दिया। और वो जो तस्‍वीरें मैंने देखीं, मिस्र के बेटे-बेटियां, सारे आइकॉनिक पिरामिड वगैरह के पास खड़े रह करके अपने योगा की मुद्राएं कर रहे थे। इतना आकर्षण पैदा कर रहे थे। और कश्‍मीर के लिए तो लोगों के लिए बहुत बड़ा रोजगार का जरिया बन सकता है। टूरिज्‍म के लिए बड़ा आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

तो मुझे आज बहुत अच्छा लगा, ठंड बढ़ी, मौसम ने भी थोड़ी चुनौतियां पैदा की, फिर भी आप डटे रहे। मैं देख रहा था कि हमारी कई बेटियां ये दरी को ही अपने...जो योगा मैट था उसी को बारिश से बचाने के लिए उपयोग कर रही थीं, लेकिन गई नहीं, डटी रहीं। ये अपने-आप में बहुत बड़ा सुकून है।

मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

Thank You.

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प्रधानमंत्री ने धैर्य और दृढ़ता की शक्ति को उजागर करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
July 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि साहस किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि साहस देश को कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए भी एकजुट रहने और प्रगति, समृद्धि तथा आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया।

“चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।

कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।। ”

यह सुभाषितम बताता है कि प्रलय के समय तूफानी हवाओं से घिरे पहाड़ भी कांप उठते हैं और गतिमान हो जाते हैं, फिर भी सबसे गंभीर परीक्षाओं के बीच भी दृढ़ व्यक्ति का मन अविचल और स्थिर रहता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखाः

"धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।"

चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।

कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।"