नेताजी सुभाष चंद्र बोस न सिर्फ़ स्वतंत्रता संग्राम के महान नायक थे, बल्कि स्वतंत्र भारत के दूरदर्शी भी थे। उन्होंने एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना की थी जो आधुनिक होने के साथ-साथ भारत की प्राचीन चेतना से भी जुड़ा हो: प्रधानमंत्री
पराक्रम दिवस की प्रेरणा भारत के विकास के संकल्प को मज़बूत करती रहेगी: प्रधानमंत्री
आज भारत जानता है कि शक्ति कैसे हासिल करनी है, उसे कैसे मैनेज करना है और उसका इस्तेमाल कैसे करना है: प्रधानमंत्री

नमस्कार! अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल एडमिरल डी. के. जोशी जी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आईएनए ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रिगेडियर आर. एस. छिकारा जी, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सहभागी और आईएनए के शाश्वत पुरुष लेफ्टिनेंट आर. माधवन जी,

23 जनवरी की ये गौरवशाली तारीख, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मजयंती, नेताजी का पराक्रम, उनका शौर्य, आज की ये तारीख हमें प्रेरणा भी देती है, हमें नेताजी के प्रति श्रद्धा भाव से भी भरती है।

साथियों,

बीते वर्षों में पराक्रम दिवस, देश की राष्ट्रीय भावना का, नेशनल स्पिरिट का एक अभिन्न पर्व बन गया है। ये एक सुखद संयोग है कि 23 जनवरी को पराक्रम दिवस, 25 जनवरी को मतदाता दिवस, 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस, 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट, और फिर 30 जनवरी को पूज्य बापू की पुण्य तिथि तक, गणतंत्र का महापर्व मनाए जाने की एक नई परंपरा बन गई है। मैं इस अवसर पर, आप सभी को और सभी देशवासियों को पराक्रम दिवस की अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ।

भाइयों बहनों,

साल 2026 में पराक्रम दिवस का मुख्य आयोजन अंडमान निकोबार में हो रहा है। शौर्य, पराक्रम और बलिदानों से ओतप्रोत अंडमान निकोबार का इतिहास, यहाँ की सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर जैसे अनगिनत देशभक्तों की गाथाएँ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस से इसका संबंध, ये बातें पराक्रम दिवस के इस आयोजन को और भी खास बनाती हैं। अंडमान की धरती इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी भी समाप्त नहीं होता। यहाँ कितने ही क्रांतिकारियों को यातनाएं दी गईं, यहाँ कितने ही सेनानियों के प्राणों की आहुति हुई, लेकिन, स्वतन्त्रता संग्राम की चिंगारी बुझने की जगह और तेज होती चली गई। और उसका परिणाम ये हुआ कि, अंडमान निकोबार की यही धरती आज़ाद भारत के प्रथम सूर्योदय की साक्षी बनी। 1947 से भी पहले, 30 दिसंबर 1943 उस दिन यहाँ समंदर की लहरों को साक्षी रखते हुए भारत का तिरंगा फहराया गया। मुझे याद है, साल 2018 में, जब इस महान घटना के 75 साल हुए थे, तब 30 दिसंबर के ही दिन, मुझे अंडमान में उसी स्थान पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला था। राष्ट्रगान की धुन पर समंदर के तट पर, तेज हवाओं में लहराता वो तिरंगा जैसे आह्वान कर रहा था कि देखो, आज कितने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के सपने पूरे हुए हैं।

भाइयों बहनों,

आजादी के बाद अंडमान निकोबार द्वीप समूहों के इस गौरवशाली इतिहास को सहेजा जाना चाहिए था। लेकिन, उस दौर में सत्ता में पहुंचे लोगों के भीतर एक असुरक्षा की भावना थी। वो आज़ादी का श्रेय केवल, केवल एक परिवार तक सीमित रखना चाहते थे। इस राजनैतिक स्वार्थ में देश के इतिहास की उपेक्षा कर दी गई.! अंडमान निकोबार को भी गुलामी की पहचान से जुड़ा रहने दिया गया! इसके द्वीप आज़ादी के 70 साल बाद भी अंग्रेज़ अधिकारियों के नाम से जाने जाते थे। हमने इतिहास के इस अन्याय को खत्म किया। इसलिए पोर्ट ब्लेयर आज श्रीविजयपुरम बन चुका है। श्रीविजयपुरम, ये नया नाम, ये पहचान नेताजी की विजय की याद दिलाती है। इसी तरह, दूसरे अन्य द्वीपों के नाम भी स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और सुभाष द्वीप रखे गए। साल 2023 में अंडमान के 21 द्वीपों के नाम भी भारतीय सेना के जांबाज वीर पुरुष 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गए। आज अंडमान-निकोबार में गुलामी के नाम मिट रहे हैं, आजाद भारत के नए नाम अपनी पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज़ादी की लड़ाई के महानायक के साथ ही, स्वतंत्र भारत के महान स्वप्न-दृष्टा थे। उन्होंने एक ऐसे भारत की संकल्पना की थी, जिसका स्वरूप आधुनिक हो और, उसकी आत्मा भारत की पुरातन चेतना से जुड़ी हो! नेताजी के इस विजन से आज की पीढ़ी को परिचित कराना, हम सभी का दायित्व है। और मुझे खुशी है कि हमारी सरकार इस दायित्व को बखूबी निभा रही है। हमने दिल्ली के लाल किले में नेताजी सुभाष को समर्पित म्यूजियम का निर्माण किया है। इंडिया गेट के समीप नेताजी की विशाल प्रतिमा लगाई गई है। गणतंत्र दिवस की परेड में हिन्द फौज के योगदान को भी देश ने याद किया है। हमने सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी शुरू किए हैं। ये विभिन्न कार्य केवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस का सम्मान ही नहीं हैं। ये हमारी युवा पीढ़ी के लिए, और भविष्य के भी अमर प्रेरणा के स्रोत हैं। अपने आदर्शों का ये सम्मान, उनसे प्रेरणा, यही विकसित भारत के हमारे संकल्प को ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर रहा है।

साथियों,

एक कमजोर राष्ट्र का अपने लक्ष्यों तक पहुंचना मुश्किल होता है। इसलिए नेताजी सुभाष ने हमेशा सशक्त राष्ट्र का सपना देखा। आज 21वीं सदी का भारत भी एक सशक्त और दृढ़ प्रतिज्ञ राष्ट्र के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है। अभी-अभी आपने देखा है, ऑपरेशन सिंदूर, भारत को जख्म देने वालों के घर में घुसकर हमने उन्हें तबाह कर दिया। भारत आज शक्ति बढ़ाना भी जानता है, शक्ति संभालना भी जानता है और उसका इस्तेमाल करना भी जानता है। नेताजी सुभाष के समर्थ भारत के विजन पर चलते हुए, आज हम डिफेंस सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं। पहले भारत सिर्फ विदेशों से हथियार मंगाने पर आश्रित रहता था। आज हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 23 हजार करोड़ को पार कर चुका है। भारत में बनी ब्रह्मोस और दूसरी मिसाइलें, कितने ही देशों का ध्यान खींच रही हैं। हम स्वदेशी की ताकत से भारत की सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

भाइयों बहनों,

आज हम 140 करोड़ देशवासी, विकसित भारत के संकल्प के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं। विकसित भारत का ये रास्ता आत्मनिर्भर भारत अभियान से मजबूत होता है, इसे स्वदेशी के मंत्र से ताकत मिलती है। मुझे विश्वास है, विकसित भारत की इस यात्रा में पराक्रम दिवस की प्रेरणा हमें निरंतर इसी तरह बल देती रहेगी। मैं एक बार फिर आप सभी को नेताजी सुभाष की जन्मजयंती की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

भारत माता की जय!

वंदे मातरम !

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प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी के कार्यक्रम में जाने और वापस आने के दौरान अपनी मेट्रो यात्रा के पल साझा किए
September 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एसआरसीसी के कार्यक्रम में जाने और वापस आने के दौरान अपनी मेट्रो यात्रा की झलकियां साझा कीं।

एक्स पर एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने जानकारी दी:

“मेट्रो यात्रा के पल…

एसआरसीसी के कार्यक्रम में जाते और वापस आते समय।”