बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है: प्रधानमंत्री
आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है: प्रधानमंत्री
छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं, स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं: प्रधानमंत्री
अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां इस दशक के बड़े संकटों में से एक है: प्रधानमंत्री
जिस तरह हमने मिलकर महामारी का सामना किया था, उसी तरह हम पश्चिम एशिया संकट पर भी निश्चित रूप से विजय प्राप्त करेंगे: पीएम मोदी
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है कि पश्चिम एशिया युद्ध संकट का हमारे नागरिकों पर प्रभाव न्यूनतम रहे: प्रधानमंत्री
पहले, जब भी देश किसी बड़े संकट का सामना करता था, प्रत्येक नागरिक सरकार के आह्वान पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए आगे आता था: प्रधानमंत्री
आज एक बार फिर जरूरत है कि हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें: प्रधानमंत्री
हमें आयातित उत्पादों का उपयोग कम करना चाहिए और विदेशी मुद्रा खर्च को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए: प्रधानमंत्री
आज समय की मांग है कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं: प्रधानमंत्री
हमें स्थानीय उत्पादों को अपनाना चाहिए और अपने गांवों, शहरों और राष्ट्र के उद्यमियों को सशक्त बनाना चाहिए: प्रधानमंत्री

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी जी, केंद्रीय मंत्री और संस्थापक ट्रस्टी मनसुख भाई मांडविया, सरदार धाम के अध्यक्ष गागजी भाई सुतारिया जी, दुष्यंत भाई पटेल, पंकज भाई पटेल, राज्य भाजपा अध्यक्ष भाई जगदीश विश्वकर्मा, मंच पर उपस्थित गजुरात सरकार के सभी मंत्री, सभी दाता श्री, ट्रस्टी श्री, अन्य महानुभाव और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

आज का ये दिन किसी पुण्य पर्व से कम नहीं है। यहां आने से पहले मैं सोमनाथ मंदिर में था। सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं। सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना, ये सपना सरदार पटेल के संकल्प से ही पूरा हुआ था। इस अवसर पर, प्रभास पाटन में सोमनाथ अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। और उसी दिन, यहाँ वडोदरा में सरदार धाम से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी हो रहा है। डॉ. दुष्यंत और दक्षा पटेल कॉम्पलेक्स का लोकार्पण, शिक्षण सहाय योजना का शुभारंभ, नई परियोजनाओं का भूमिपूजन, ये सभी कार्य, भविष्य में राष्ट्र निर्माण के प्रभावी प्रकल्प साबित होंगे। एक तरह से, ये संस्थान युवाओं के लिए भविष्य के करियर के launching pad का काम करेंगे। मैं आप सभी को, समाज के सभी लोगों को इस पुण्य कार्य के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक औऱ बात की खुशी है। बंगाल, असम और पुडुचेरी के नतीजों ने पूरे देश में ही उत्साह का माहौल बना दिया है। और उसके साथ-साथ आप सबने भी मिलकर एक इतिहास बनाया है, गुजरात निकाय और पंचायत चुनावों के परिणाम भी बहुत शानदार रहे, और इसकी भी चर्चा पूरे देश में हो रही है।

साथियों,

गुजरात के लोगों ने हमेशा राजनीतिक स्थिरता को महत्व दिया है। ये यहां के लोगों की राजनीतिक दूरदर्शिता है, वो जानते हैं कि राजनीतिक स्थिरता का माहात्म्य क्या होता है, और जहां राजनीतिक स्थिरता होती है, वहाँ अर्थव्यवस्था की गति और तेज हो जाती है। गुजरात ने ये बात बहुत पहले समझ ली थी। उसके परिणाम आज हमें गुजरात की ग्रोथ में भी दिख रहे हैं, और, एक के बाद एक चुनावी नतीजों में भी दिख रहे हैं।

साथियों,

आप सभी के बीच आना, आपके कार्यक्रमों का हिस्सा बनना, मेरे लिए हमेशा ही बहुत सुखद होता है और लगता है घर में आया हूं। क्योंकि आपके बीच आकर समाज की शक्ति का ऐहसास होता है। हम सभी जानते हैं कि जब भी कहीं पर वास्तविक बदलाव होता है, वो समाज की सामूहिक ताकत से ही होता है। खासकर, जिन-जिन समाजों ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है, शिक्षा में समान भागीदारी को अपना लक्ष्य बनाया है, वो समाज हमेशा आगे बढ़े हैं, उन्होंने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

इसीलिए भाइयों बहनों,

सरदारधाम के हर प्रयास में, जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं हमेशा आपके साथ खड़े होने का प्रयास करता हूँ। अभी गगजी भाई बड़े विस्तार से बता रहे थे, साल 2021 में, मैं सरदारधाम अहमदाबाद के कार्यक्रम में आया था। तब गर्ल्स हॉस्टल का भूमिपूजन हुआ था। पिछले वर्ष उसका लोकार्पण भी हो गया। आज वहां हजारों बेटियां शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं। सूरत, राजकोट, भुज, मेहसाणा और दिल्ली, सरदारधाम के ऐसे कई संस्थान युवाओं का भविष्य गढ़ने में जुटे हैं। आज भी अमदाबाद के निकोल में 1 हजार बेटियों के लिए नए छात्रावास का भूमिपूजन हुआ है।

साथियों,

बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों, इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है। इसीलिए, आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है। आज युवाओं की राह से रोड़े हटाए जा रहे हैं। भाषा के आधार पर होने वाला भेदभाव खत्म हो रहा है। आज ज़ोर केवल किताबों और डिग्रीयों पर ही नहीं है। स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन को पढ़ाई का हिस्सा बनाया गया है। रिसर्च में रुचि रखने वाले युवाओं को उसके लिए माहौल मिल रहा है। हमारे युवा डिग्री पूरी करके अनुभव न होने के कारण भटकें ना, इसके लिए अप्रेंटिसशिप के मौके उन्हें दिये जा रहे हैं। आप सोच सकते हैं, आने वाले समय में देश को इतना बड़ा skilled वर्कफोर्स मिलेगा। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के manufacturing सेक्टर को होगा।

साथियों,

हमारे गुजरात के युवाओं में उद्यम की स्वाभाविक शक्ति होती है। आज Startup India मिशन इन युवाओं के सपने साकार कर रहा है। छोटे शहरों के युवा भी उद्यमी बन रहे हैं। छोटे शहरों से बड़े-बड़े स्टार्टअप्स सामने आ रहे हैं। स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। पहले जिन सेक्टर्स को रिस्की माना जाता था, वो अब युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं। पिछले 10-12 वर्षों में स्पोर्ट्स से लेकर स्पेस टेक्नालजी तक देश की कामयाबी इसका सबसे बड़ा सबूत है। और इसका बहुत बड़ा लाभ गुजरात के हमारे बेटे-बेटियों को भी हो रहा है।

साथियों,

समाज में प्रगति का सबसे बड़ा आधार होता है- उसकी आधी आबादी की भागीदारी! गुजरात ने इसे 2 दशक पहले ही समझ भी लिया था, और, इस दिशा में मजबूती से कदम भी उठाए थे।

साथियों,

आज गुजरात मॉडल की वही सफलता देश में दोहराई जा रही है। देश में करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। शौचालय, नल से जल, गैस कनेक्शन की सुविधाएं दी गईं। आज मुद्रा योजना के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। परिवार में महिलाएं स्वस्थ रहें, इसके लिए आयुष्मान भारत और मातृ वंदना जैसी योजनाएं कवच बनकर काम कर रहीं हैं।

साथियों,

पहले कितने ही क्षेत्रों में बेटियों के लिए दरवाजे ही बंद होते थे। आज उन्हीं सेक्टर्स में बेटियां लीडरशिप रोल में सामने आ रही हैं। आज National Defence Academy में महिला कैडेट्स, training ले रही हैं। हमारी बेटियां फाइटर पायलट बन रही हैं। राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहा है। नारीशक्ति वंदन संशोधन के जरिए हमने इसके लिए एक और प्रयास किया था। राजनीतिक कारणों से वो पास नहीं हो पाया, लेकिन मैं आपको आश्वस्त करूंगा, देशभर की महिलाओं को आश्वस्त करूंगा, हम इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहेंगे।

साथियों,

महिलाओं के लिए सभी क्षेत्रों में संभावनाओं के द्वार खुलें, ये केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी ज़िम्मेदारी है। और मुझे खुशी है, सरदारधाम ये दायित्व पूरी निष्ठा से उठा रहा है। मैं इन प्रयासों के लिए विशेष रूप से आप सबका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

साथियों,

गुजरात की एक बहुत बड़ी विशेषता रही है। यहां समाज हमेशा समय की दिशा को जल्दी पहचानता है। परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना, और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरू करना, ये गुजरात की कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है। आज जब दुनिया future technologies की ओर बढ़ रही है, तब गुजरात भी नई गति के साथ आगे बढ़ रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, एडवांस्ड इंजीनियरिंग, ग्रीन एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हर क्षेत्र में गुजरात अपनी नई पहचान बना रहा है। साणंद में made-in-India सेमीकंडक्टर्स बन रहे हैं। केन्स सेमीकंडक्टर प्लांट में भी प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। धोलेरा और सूरत में भी नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

हमारा भारत, हमारा गुजरात ग्लोबल सप्लाइ चेन का बड़ा केंद्र बने, हम इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। आने वाले समय में वडोदरा की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आज यहां बने metro coaches दूसरे देशों तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं। सावली में आधुनिक रेल सिस्टम का, कोचेस का निर्माण हो रहा है। Engineering, heavy machinery, Chemicals और Pharma, Power equipment और MSMEs, ऐसे कई सेक्टर्स में आज वडोदरा manufacturing का मजबूत केंद्र बन चुका है। यहां की गतिशक्ति यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्ट और logistics की फील्ड में professionals तैयार कर रही है। अब एयरोस्पेस सेक्टर में भी वडोदरा नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां एयरक्राफ्ट manufacturing project तेजी से आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

गुजरात और देश में विकास के प्रयासों के बीच, एक और विषय संवेदनशील होता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां, इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।

सरकार भी लगातार ये प्रयास कर रही है, कि देश के लोगों, देश के सामान्य नागरिक पर इन सारी विपरीत परिस्थितियों का कम से कम असर हो। लेकिन ऐसे समय में, देश को जनभागीदारी की शक्ति की बहुत बड़ी आवश्यकता है। हमें भारत के नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देनी होगी। इससे पहले के दशकों में भी जब-जब देश युद्ध या किसी और अन्य बड़े संकट से गुजरा है, सरकार की अपील और उस अपील पर हर नागरिक ने ऐसे ही अपना दायित्व निभाया है। आज भी जरूरत है कि, हम सब मिलकर अपना दायित्व निभाएं, देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करें। आप भी जानते हैं कि भारत कितने ही उत्पादों को मंगाने के लिए लाखों करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा खर्च करता है। इसी समय विदेश से आने वाले उत्पादों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं और सप्लाई चेन भी पूरी तरह तहस नहस हो चुकी है। और इसलिए देश पर ये दोहरा संकट है। जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही हमें हर छोटे-बड़े प्रयास से ऐसे उत्पादों का उपयोग कम करना है जो विदेश से आते हैं, और ऐसे व्यक्तिगत कामों से भी बचना है जिसमें विदेशी मुद्रा खर्च होती हो।

साथियों,

भारत के इंपोर्ट का बहुत बड़ा हिस्सा, क्रूड ऑयल है। और दुर्भाग्य से, जिस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल मिलता है, आज वही क्षेत्र संघर्ष और युद्ध की स्थिति में उलझा हुआ है। और इसलिए, जब तक हालात सामान्य नहीं होते, हम सबको मिलकर छोटे-छोटे संकल्प लेने होंगे। मैंने कल कर्नाटका और तेलंगाना में भी इस बारे में चर्चा की है, मैं आज गुजरात में भी अपने आग्रहों पर फिर जोर दे रहा हूं। और आप पर तो मेरा ज्यादा हक है, इसलिए जरा हक से कहने वाला हूं, मेरी देश के हर नागरिक से अपील है, जहां संभव हो, पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें। कार-पूलिंग को बढ़ावा दें। जिनके पास कार है, वे एक गाड़ी में ज्यादा लोगों को साथ लेकर चलें। जिनके पास ईवी है, वे भी दूसरों की मदद के लिए आगे आएं।

साथियों,

डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब इतना कुछ आसान बना दिया है। टेक्नोलॉजी की मदद भी हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगी। ये जरूरी है कि सरकारी और प्राइवेट, दोनों ही दफतरों में, वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जाए। मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा, कि कुछ समय के लिए ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था पर काम करें।

साथियों,

सिर्फ ईंधन ही नहीं, खाने के तेल पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर हम थोड़ा संयम बरतें, तेल की खपत कम करें, खाने के तेल की, तो इससे देश और हमारी सेहत, दोनों को लाभ होगा। और सूरत वालों को मैं खास कहता हूं। इसी तरह मैं आज समाज के सभी भाई बहनों से, मैं आपके परिवार का सदस्य हूं, इसलिए आग्रह से कहता हूं, और इसमें तो आगे आकर आपको मेरी मदद करनी पड़ेगी। सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। मैं आप सबसे, देशवासियों से आग्रह करूंगा, कि जब तक हालात सामान्य न हों, हम सोने की खरीद को टालें, गोल्ड की जरूरत नहीं है।

साथियों,

आज समय की मांग है, कि हम “वोकल फॉर लोकल” को एक जन आंदोलन बनाएं। विदेशी सामान की जगह, लोकल उत्पादों को अपनाएं। अपने गांव, अपने शहर, अपने देश के उद्यमियों को हम ताकत दें। यहां लोग बैठे हैं, बहुत अच्छी चीजें बनाते हैं, श्रेष्ठ चीजों का उत्पादन करते हैं।

साथियों,

हमारे में से ज्यादातर, खेती के कारोबार की दुनिया से पैदा होकर के यहां आए हैं। खेती में, स्वदेशी खाद को बढ़ावा मिले, नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा मिले। डीजल पंप की जगह सोलर पंप्स का उपयोग बढ़े, और हम तो किसान के बेठे हैं, किसान की बेटियां हैं, हमें अपना खेत सबसे पहले बचाना है, हमें अपनी धरती मां को बचाना है, हमें केमिकल फर्टिलाइजरों से अपनी धरती मां को मारना नहीं चाहिए। हमारे खेत को बचाना है, हमारी धरती मां को बचाना है। और इसलिए मैं आप सबसे आग्रह करूंगा, कि आप अपने गांव में हर किसान भाई-बहन को केमिकल फर्टिलाइजर से मुक्ति का रास्ता बताइये, नैचुरल फार्मिंग की तरफ ले जाइये।

साथियों,

एक और भी अहम विषय, और वो भी आप में से बहुतों को लागू होता है, बुरा मत मानना। फैशन हो गई है, जैसे ही वेकेशन हुआ, बच्चों के हाथ में विदेश की टिकट पकड़ा देते हैं। विदेश में जाकर वेकेशन करते है। गर्मी की छुट्टियां आ रही हैं, आजकल विदेश घूमने, वहां पर डेस्टिनेशन वेडिंग, ये मैं यहां से बहुत सारे लोग हैं, मुझे निमंत्रण नहीं भेजते हैं, पहले भेजते थे, क्योंकि विदेश में ही शादी करते थे, अब बंद कर रहे हैं। ये विदेश में वेडिंग इनका फैशन खूब बढ़ रहा है। लेकिन इस पर भी बहुत विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

साथियों,

आप सोचिये, क्या भारत में ऐसी जगह नहीं है? जो हम अपनी वेकेशन वहां मनाए, हमारे बच्चों को हमारा इतिहास पढ़ाएं। हम अपने स्थानों पर गर्व करें। और जरूरी है कि भारत में ही अपनी वेकेशन मनाएं, और वेडिंग के लिए भी, मैं नहीं मानता हूं कि भारत से अधिक कोई अच्छी पवित्र जगह हो सकती है। जब यहां वेडिंग करते हैं ना, तो हमारे पूर्वजों की मिट्टी भी हमें आशीर्वाद देती है। और वेडिेंग के लिए भी, भारत के ही अनेक स्थान हैं, उसको हम चुनें। हमारे गुजरात में तो वैसे भी एक से बढ़कर एक स्थान हैं। और मैं तो आप सब पाटीदार भाईयों को तो कहूंगा, आपको तो अब शादी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वहीं पर जाकर करनी चाहिए। आपकी हर शादी में सरदार साहब खुद आाशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे। और वहीं पर आपने जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश में आप शांति के लिए जगह बना रहे हैं ना, वैसे ही आप स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में शादी के लिए जगह बना दीजिए। मैं पंकज भाई को कहूंगा, उसके लिए भी कुछ करें। जैसे हाल के वर्षो में सरदार साहब की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, हमारा एकता नगर पर्यटन का इतना बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। क्या हम ये तय कर सकते हैं, हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्टेचू ऑफ पर यूनिटी लेकर के जाएं। विदेशें में हमारे बहुत लोग रहते हैं, मैं उनको कहता हूं, कि आपका दायित्व है कम से कम विदेशी परिवारों को, भारत देखने के लिए लेकर के आइये आप। देश विदेश में हमारे संपर्क का कोई भी परिवार, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी नहीं गया है ना, उसको वहां ले जाने के लिए प्रेरित करें। हम उसे कम से कम एक ट्रिप के लिए मोटिवेट करें। डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए भी एकता नगर एक बहुत शानदार विकल्प हो सकता है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में इतनी शानदार व्यवस्थाएं हैं, और गर्व है, दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू, वो भी सरदार वल्लभ भाई पटेल का। इस देश का कोई नागरिक ऐसा नहीं हो सकता है, कि जिसको इसके लिए गर्व न हो दोस्तों। और मैं आपसे आग्रह करता हूं, आप सभी इसका फायदा उठाइये, इसका लाभ उठाइए।

साथियों,

ये मैंने छोटे-छोटे प्रयास आपको, कोई मुश्किल काम नहीं बताए आपको। लेकिन आप मानकर चलिए, ये प्रयास छोटे भले लग सकते हों, लेकिन छोटे प्रयास भी, जब 140 करोड़ लोग, एक साथ संकल्प लेते हैं, 140 करोड़ लोग एक कदम आगे बढ़ते हैं इस दिशा में, 140 करोड़ कदम देश आगे बढ़ता है। तो वही छोटे प्रयास, राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं। और इसलिए फिर एक बार, हमें एकजुट होना होगा, ताकि ये संकट, किसी भी तरह हमारी प्रगति को, हमारे विकास को प्रभावित ना करे। मुझे विश्वास है, हम सब साथ मिलकर इन संकल्पों को पूरा करेंगे, और देश को मजबूती देंगे।

और दूसरी बात मुझे गजजी भाई से करनी है, आपने मुझे सरदार गौरव रत्न से सन्मानित किया। जिस पुरस्कार के साथ सरदार साहब का नाम जुड़ा हो न, तब जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। यानी एक प्रकार से गगजी भाई ने बहुत चतुराई से मुझे बाँध लिया है, कि आगे पीछे मत होना। और शायद मेरे नसीब में लिखा हुआ है, कि सरदार साहब के जो भी सपने थे, उन्होंने जो भी काम शुरु किए थे, वे सब पूरे करने का काम मेरे ही नसीब में आया है। और आज जब आपने यह सम्मान, यह पुरस्कार एवॉर्ड दिया है तो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, कि सरदार साहब के सपने पूरे करने में आप सभी के आशीर्वाद से मुझे जो भी शक्ति मिली है, संस्कार मिले हैं, गुजरात की मिट्टी ने मुझे जो सिखाया है, उसके भरोसे पर मैं कहता हूं, कि वो सपने पूरे करने के लिए परिश्रम में मैं पीछे नहीं हटूंगा। और मेरे स्वभाव को गुजरात भलीभांति जानता है, कि पीछे हटना मुझे आता नहीं है। लेकिन आपने यह सम्मान किया है, यह मेरे लिए बहुत ही बड़ी बात है। एक बार मैंने एक किस्सा पढा था, कि जनरल करिअप्पा, उनके गाँव में उनके सम्मान का कार्यक्रम होने वाला था। वह अत्यंत आनंदित थे, तो लोगो ने पूछा तो उन्होंने कहाँ, कि मैं दुनियाभर में जाता हूं, पूरी दुनिया के सारे सैन्य के रीत-रिवाज के साथ मुझे सब सैल्यूट करते हैं, बहुत मान-सम्मान मिलता है। दुनिया में जो मिलता है वो मिले, पर जब घर में मिलता है न, तब उसका आनंद अलग होता है।

भारत के प्रधानमंत्री का दुनिया में सम्मान होता है, कारण भारत सामर्थ्यवान हो रहा है, और आज जब घर में, घर के बेटे को, घर के लोग जब आशीर्वाद देते हैं, तो काम करने की शक्ति बहुत बढ़ जाती है। मेरे लिए, मेरे परिवारजनो ने, आप सभी ने इस सरदार रत्न के रूप में जो आशीर्वाद दिये हैं, उसके बदले मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। और इस ऋण का स्वीकार करता हूं। फिर एक बार आप सभी को जो संकल्प लेकर आप चले हैं, जो सपने लेकर आप चले हैं, उसके लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। सरदार साहब के आशीर्वाद निरंतर आपके उपर बने रहें, और पंकज भाई जैसे साथी आपको मिलते रहें। यहाँ हम तीन ऐसे लोग बैठे हैं कि जिनका विशेष नाता है, एक पंकज भाई, दूसरे नरहरि अमीन। हम सभी नवनिर्माण की औलादें है, तो मुझे खुशी हुई, कि आज पंकज भाई ने भी बडी जिम्मेदारी ली है। आप सभी का बहुत बहुत आभार।जय सरदार, जय सरदार, धन्यवाद। धन्यवाद।

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August 10, 2026

प्रधानमंत्री – मेरे यहां, मुझे यहां लगभग 12-13 साल हो गए इसी मकान में, अगर मैंने regularly और हर बार किसी को रिसिव किया है, किसी को मैं मिला हूं, तो खिलाड़ी हैं। पिछले 10-12 साल हो गए, आप लोगों के पुरुषार्थ के कारण, भारत को लगातार विजय दिलाने के आपके प्रयासों के कारण और उत्तरोत्तर सफलता में नई ऊंचाईयां पार करने की परंपरा के कारण, जो काम शायद हम स्कूलों में जाकर कहें कि नहीं नहीं भई खेलना चाहिए, ये करना चाहिए, वो काम स्कूलों में जाकर के हम कर सकते थे, उससे ज्यादा आपका मेडल उनको inspire करता है।

प्रधानमंत्री – तुमने मुझे वादा किया था पिछली बार कि तुम्हारी दोनों बेटियां खिलाड़ी बन जाएंगी?

खिलाड़ी - हाँ जी अभी वे उमर की छोटी हैं, अगले कॉमनवेल्थ में एक घर में तीन मेडल लाकर दिखाएंगी।

प्रधानमंत्री – पक्का।

खिलाड़ी – हाँ जी।

खिलाड़ी – जब मैं दौड़ रहा था, जब मेरा इवेंट था 29 को, तो उस दिन गुरुपूर्णिमा थी, तो उस दिन मेरे गुरू को मैंने एक गिफ्ट दे दिया।

प्रधानमंत्री – बड़ी शान बढ़ाई आपने। इतनी आंसू टपक रहे थे, मुझे लगता है कि आंसू के हर बूंद से जैसे गोल्ड मेडल टपक रहा है।

खिलाड़ी – मैं बहुत ज्यादा खुशी थी, इमोशनल भी थे उसी दिन, खुशी ज्यादा था और मैं इसलिए रोई थी कि मेरा पेरिस आलंपिक में मेरा 1 Kg में मेडल रह गई थी और एक प्लेयर्स की लाइफ में क्या क्या हमको फेस करना पड़ता है। तो ये 4 साल के अंदर में कितना क्या क्या कुछ मैंने फेस किया था, हर टाइम injury ही चल रहे थे और family problem, वो सब हो रहा था। तो बहुत मुश्किल से मैं ये 4 साल फेस किया था। तो वो सब जब पोडियम में जब मैं खड़ी थी सर और हमारी जो फ्लैग ऊपर जाते हैं और हमारे नेशनल एंथम जब बजते हैं तो सर हम रुक नहीं सकते सर, अपना आप आंसू निकलते हैं।

प्रधानमंत्री – बहुत बहुत बढ़िया

प्रधानमंत्री – आपके इस अचीवमेंट को सिर्फ आपका अचीवमेंट मानता हूं, ऐसा नहीं है, ये आपका विजय आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा बन जाता है।

खिलाड़ी – सब डर रहे थे हमसे कि इंडिया के साथ फाइट आ गई, अब तो हम पहली फाइट ही हार जायेंगे, हमारा मेडल भी नहीं आयेगा।

प्रधानमंत्री – यानी मान के चलते हैं।

खिलाड़ी – हाँ सर।

प्रधानमंत्री – क्या हुआ, वो restaurant वालों से झगड़ा कर रही थी?

खिलाड़ी – हम लोगों का जो इतना अच्छा परफॉर्मेंस था, लास्ट डे था और सब जीत के गए थे और पूरा इंडिया के लोग थे। तो थोड़ा सा मुझे बुरा लग रहा। तो मैंने उनको अच्छे से बोला रिक्वेस्ट किया था सर, फिर उन्होंने मान भी लिया, अभी चेंज भी हो गया सर।

प्रधानमंत्री – इस विजय की परिस्थिति खुशी, आनंद, अपने साथियों के साथ और गेम पूरे हो चुके हैं। तो हसी मजाक मस्ती का मूड ऐसे समय उस मैप पर नजर जाना और उसको रजिस्टर करना और तुरंत सिर्फ मेडल लेते समय देश खड़ा हो जाता है ऐसा नहीं, भीतर से देश का भाव मैं सच बताता हूँ ये वीडियो सामान्य नहीं है आपका, लंबे समय तक लोगों को याद रहेगा। ये बॉक्सिंग वालों से भी दुनिया के खिलाड़ी अब डरने लगे हैं।

खिलाड़ी – जरूर सर, पुरे सभी डरे हुए थे। एक के बाद एक गोल्ड मेडल गोल्ड मेडल आ रहे थे और मतलब पूरा लास्ट में ऐसे धमाका जैसा हो गया बिल्कुल। जिस तरीके से हम लोगों को सपोर्ट मिल रहा है, हमें बैक टू बैक कंपटीशन मिल रहा है वो एक बहुत बड़ी बात है और हमारे जितने भी यंग एथलीट है वो लोग सभी जैसे खेलो इंडिया स्कीम से आए हुए हैं और ये एक बहुत बड़ा changes ला रहा है पूरे स्पोर्ट्स में ही।

प्रधानमंत्री – अगर आप लोग खेलो इंडिया की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और प्रतिष्ठा सिर्फ वहां जाकर के रिबिन काटने से नहीं होगी। आप वैसे ही खेलेंगे जैसे एक छोटा विद्यार्थी, एक छोटा नौजवान, छोटा खिलाड़ी खेलता है। यह बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन करेगा। क्योंकि अभी तो हमें बहुत आगे जाना है, बहुत मेडल लाना है। कारगिल विजय दिवस पर किसकी विजय हुई थी?

खिलाड़ी – उस दिन कारगिल डे था वैसे और जिस दिन मैंने पाकिस्तान के साथ फाइट किया था सर, वो उसी दिन का था। तो मैं एक इंडियन आर्मी से हूं, तो मैंने उस दिन मैं पहले से बहुत वो था कि सर पाकिस्तान को हराना है। तो मैंने वो पाकिस्तान एक तरफ मैंने 5-0 से हराया, तो मैंने हमारा इंडियन आर्मी का कारगिल हीरोज़ को मैंने डेडिकेट किया किया था सर।

प्रधानमंत्री – आपको यह याद रहना और आप स्वयं फौज से हैं तो, मैं जरूर मानता हूं कि देश के वीर जवानों को आपने जो भाव प्रकट किया ना कि, मैं कारगिल के विजेताओं को मेरा मेडल समर्पित करता हूं। उसने उस विजय पर चार चांद लगा दिए और जिसको पराजित करना था उसी को किया आपने।

खिलाड़ी – वो पाकिस्तान की बात चल रही है, मुझे किस्सा याद आ गया सर। 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे और मेरी पाकिस्तान के साथ पहली फाइट आ गई थी और वर्ल्ड मिलिट्री गेम थे तो मिलिट्री वाले के फोन आए कि भई पाकिस्तान से नहीं हारना है। तो फिर मैं फर्स्ट राउंड 4-1 से जीत गया। सेकंड राउंड 3-2 से जीत गया, पर दोनों के सर लग गए आपस में, तो दोनों के लग गए कट और फाइट तो मैं जीत गया।

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – उसके बाद फिर दोनों चले गए हॉस्पिटल में टांके लगवाने के लिए। फिर 2014 में आप फर्स्ट टाइम प्रधानमंत्री जी बने थे और जो हमारे साथ आर्मी का कोच गया हुआ था उसका नाम नरेंद्र राणा था और फिर वो कई देर तक सोच के मेरे को बोला कि भाईजान एक बात बोलूं, मैं हां बोलो, बोला भाईजान आपका नाम नरेंद्र है। आपके कोच का नाम नरेंद्र है, आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है, तो मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।

प्रधानमंत्री – सिर्फ आपने मेडल की संख्या बढ़ाई ऐसा नहीं है। आपने एक पीढ़ी को तैयार किया।

खिलाड़ी – मेरे मन में भी धक-धक धक-धक हो रहा है सर।

प्रधानमंत्री – आप चिंता मत कीजिए।

खिलाड़ी – पर..

प्रधानमंत्री – आप चाहें तो आपको बोलने में भी मेडल मिलने वाला है।

खिलाड़ी – मेरे फ्रेंड सर्कल में किसी ने बोला था कि मैं उनको कुछ बोलती थी भई तुम्हारे अच्छे के लिए तुम करो। तो अक्सर मुझे वो बोलते थे कि तू के मोदी ते मिल रही है?

प्रधानमंत्री – हाँ

खिलाड़ी – हरियाणवी में बोल देते हैं सर कि क्या तू मोदी से मिली हुई है, कि तेरी बात माने। तो आज मैं आपसे मिली हूं सर। मैं उनको बोल पाऊंगी कि हां मैं मोदी जी से मिली हूं।

खिलाड़ी – कॉमनवेंल्थ गेम्स में मैंने सिल्वर मेडल जीता, फिर मैंने क्रेडिट साहब को दिया, सपना तो था एक बार मेडल जीत के लेके आने के लिए, बट ट्रेनिंग का सेंटर नहीं था, मैंने SAI आने के बाद मैं बहुत ट्रेनिंग करके मेडल जीत पा रहा, इसलिए बहुत खुशी से मैंने सर को क्रेडिट दिया था क्योंकि बहुत इंप्रूव हुआ।

प्रधानमंत्री – मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान का विषय है, मेहनत आपने की और मुझे याद किया, मैं आपका बहुत आभारी हूं दोस्त।

प्रधानमंत्री – वाराणसी में खेल तुम प्रैक्टिस कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – कैसा बना है स्टेडियम?

खिलाड़ी – सर अच्छा बना है, वहां पर मैं 10-12 दिन के लिए ट्रेनिंग करने गई थी, क्योंकि मैं मंदिर गई थी तो वहां पर ही ट्रेनिंग करके आई थी। और मैं वहां पे मतलब सेटल भी होना चाहती हूं क्योंकि मुझे काशी विश्वनाथ बहुत अच्छा लगता है सर।

प्रधानमंत्री – भोपाल में ट्रेनिंग कर रही थी ना?

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – तो उज्जैन जाते थे कि नहीं?

खिलाड़ी – जी सर उज्जैन भी गई थी सर।

प्रधानमंत्री – अच्छा महाकाल के पास भी गई।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – काशी विश्वनाथ के पास हो आई एक बार।

खिलाड़ी – जी सर।

प्रधानमंत्री – सावन महीना तो अभी है।

खिलाड़ी – वहां घर जाके फिर उसके बाद जाऊंगी सर।

प्रधानमंत्री – ठीक है।

खिलाड़ी – साई ने भी सर बहुत सपोर्ट किया है मुझे। इसके कारण ही मैं यहां तक पहुंची हूं सर। और मैं खेलो इंडिया स्कीम में भी थी 2018 में जो फर्स्ट खेलो इंडिया हुआ था, उसमें मेरा सिल्वर मेडल था, वहां पे भी मैंने आपको देखा था ओपनिंग सेरेमनी में, तो उसमें मेरा मेडल था, तो मेरे को स्कीम भी मिल गया और मैं यहां तक पहुंची हूं सर।

प्रधानमंत्री – स्पोर्ट्स व्यवस्था एक बात है, लेकिन देश मेडल तब प्राप्त करता है जब देश में स्पोर्ट्स कल्चर बनता है। दोस्तों आपने बहुत बड़ा काम किया है। देश का नाम रोशन किया है। आपको मैं बहुत बधाई देता हूं और आप विश्वास कीजिए आगे भी आप विजयी होंगे और फिर से एक बार यहीं पर हम मिलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

प्रधानमंत्री – ये लगातार तीसरी बार देश को मेडल दिलवाया है।

खिलाड़ी – थैंक यू सर।

प्रधानमंत्री – बहुत आशीर्वाद बेटा।

खिलाड़ी – और थैंक यू सो मच मैं सर के हाथ से लड्डू खा रही मेरा कल बर्थडे था तो आज सर के हाथ से…

प्रधानमंत्री – बहुत बधाई वाह।

प्रधानमंत्री – मुस्कुराओ यार ।

प्रधानमंत्री – जो खेलेगा वो खिलेगा।