प्रधानमंत्री ने कहा- माइक्रोन के सेमीकंडक्टर केंद्र का उद्घाटन प्रौद्योगिकी नेतृत्व की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है
प्रधानमंत्री ने कहा- लंबे समय से सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अपनी शक्ति के लिए जाना जाने वाला भारत अब हार्डवेयर क्षेत्र में भी अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा - आज भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला का अभिन्न अंग बन रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा - यह शताब्दी एआई क्रांति की है
प्रधानमंत्री ने कहा - यदि पिछली सदी में तेल नियामक था, तो इस सदी में माइक्रोचिप नियामक होंगे
प्रधानमंत्री ने कहा - दुनिया भर के निवेशकों के लिए भारत का सिर्फ एक ही संदेश है: भारत तैयार है, भारत विश्वसनीय है, भारत परिणाम देता है
प्रधानमंत्री ने कहा - यह संदेश दुनिया तक स्पष्ट रूप से पहुंच गया है: भारत सक्षम है, भारत प्रतिस्पर्धी है, भारत प्रतिबद्ध है

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्र में मेरे सहयोगी अश्विनी वैष्ण्व, Micron Technology के CEO संजय मेहरोत्रा जी, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी जी, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

विश्व की सबसे बड़ी और सफल AI समिट के बाद, आज हम यहां एक और ऐतिहासिक पड़ाव के साक्षी बन रहे हैं। AI समिट ने जहां दुनिया को भारत के AI सामर्थ्य से परिचित कराया, वहीं आज का ये दिन टेक्नोलॉजी लीडरशिप को लेकर भारत के कमिटमेंट का एक और प्रमाण है।

साथियों,

बहुत दूर की बात नहीं है, 10-11 वर्ष पहले तक भारत में डेटा और चिप की चर्चा बहुत ही closed circles में ही होती थी। जब टेक्नॉलॉजी की बात आती थी, तो अक्सर हमारी चर्चा, largely आईटी सर्विसेज़ के इर्द-गिर्द ही रहती थी। और आज देखिए, सॉफ्टवेयर के लिए जाना जाने वाला भारत, अब हार्डवेयर के क्षेत्र में भी अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है। आज साणंद में हम नए भविष्य का उदय होते देख रहे हैं। माइक्रोन की इस ATMP Facility में Commercial Production की शुरुआत, ग्लोबल टेक्नॉलॉजी वैल्यू चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करने वाली है।

साथियों,

आज भारत बहुत तेजी से ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहा है। मैं Micron की पूरी टीम को, भूपेंद्र भाई के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार को, सभी Engineers, Technicians और Workers को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

माइक्रोन की ये फैसिलिटी भारत के नए मिज़ाज की भी, उसका भी एक शानदार उदाहरण है। आज का भारत, पॉलिसी से लेकर प्रोडक्शन तक किस अप्रोच के साथ आगे बढ़ रहा है, वो यहां दिखता है। आप याद करिए, जून 2023, इस फैसिलिटी के लिए MoU साइन हुआ। इसके बाद सितंबर 2023, साणंद में इस फैसिलिटी की ग्राउंडब्रेकिंग हुई। फिर फरवरी 2024, यहां पायलट Facility में मशीनें लगने लगीं। और आज फरवरी 2026 में इस फैसिलिटी में कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरु हो गया।

साथियों,

जो भी इस सेक्टर को देखते हैं, समझते हैं, वो इस स्पीड के मायने जान सकते हैं। दुनिया के विकसित देशों में भी, एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट जैसे टैक्स समझौतों को 3 से 5 साल लग जाते हैं। ये बहुत complicated प्रोसेस होती है। लेकिन भारत ने कुछ ही महीनों में इसको क्लीयर कर दिया। जब नीयत साफ हो, निष्ठा देश के तेज़ विकास के प्रति हो, तब नीति भी स्पष्ट बनती है और निर्णयों में भी गति आ ही जाती है।

साथियों,

मैं माइक्रोन की लीडरशिप का भी आभार व्यक्त करता हूं, मेरे मित्र संजय को मैं जितनी बधाई दूं, उतनी कम है। आज मुझे संजय ने चौंका दिया, क्योंक संजय जब मिलते हैं, तो बहुत कम बोलते हैं, आज भाषण सुनकर के मुझे एक और संजय का परिचय हो गया। उन्होंने भारत पर निरंतर भरोसा किया। मैं भाई संजय जी की विशेष प्रशंसा करुंगा, मुझे याद है कि बीते वर्षों में जब भी हम मिले हैं, तो ये भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को लेकर बहुत ही अधिक उत्साहित रहे हैं। आज इनकी लीडरशिप, भारत पर इनका भरोसा, यहां एक नई ऊंचाई प्राप्त करता दिख रहा है। भारत में नियुक्ति के बाद, एंबेसेडर गोर भी, शायद पहली बार गुजरात आए हैं। और वो विधिवत रूप से एंबेसडर बनने के बाद, आज मेरी पहली मुलकात है और वो भी मेरी कर्मभूमि में हो रही है। मुझे विश्वास है कि आप हमारी मेहमान-नवाज़ी का भरपूर आनंद लेंगे।

साथियों,

माइक्रोन की ये फैसलिटी, आज का ये कार्यक्रम, ये भारत और अमेरिका के बीच मजबूत सहयोग और साझेदारी का भी प्रमाण है। खासतौर पर AI और चिप जैसी टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में, भारत और अमेरिका की साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण है। आज पूरा विश्व मानवता के बेहतर भविष्य से जुड़ी, इन दोनों टेक्नोलॉजीस की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना चाहता है। और दुनिया की दो बड़ी डेमोक्रेसीज, भारत और अमेरिका इसके लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। AI समिट के दौरान, भारत और अमेरिका के बीच हुआ पैक्स सिलिका से जुड़ा समझौता, इसी दिशा में किया गया एक और प्रयास है। हमारे साझा प्रयास, क्रिटिकल मिनरल्स की ग्लोबल सप्लाई चेन को भी अधिक सुरक्षित, अधिक विश्वसनीय बनाएंगे।

साथियों,

20वीं सदी तक दुनिया ने Industrial Revolution का दौर देखा है। उस समय जो देश, factories, machines और mass production में आगे थे, उन्होंने तेज़ी से तरक्की की। लेकिन ये सदी, AI Revolution की शताब्दी है। Semiconductor इसी बदलाव का बड़ा ब्रिज है। छोटी सी chip, Industrial Revolution और AI Revolution, दोनों को जोड़ने वाला माध्यम है। अगर पिछली शताब्दी का regulator, ऑयल था, तो इस शताब्दी का regulator, micro-chip होने वाली है।

साथियों,

इसी सोच के साथ, भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ने का फैसला किया था। आप याद कीजिए, जब दुनिया कोविड के कहर से जूझ रही थी, तब भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन की घोषणा की थी। उस दौरान यहां बैठे अनेक साथी, अलग-अलग टीमें, एक के बाद एक मीटिंग्स कर रही थीं। During the pandemic, everything felt like it was falling apart. But the seeds we planted with conviction are now growing and bearing fruit.

साथियों,

अभी तक सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत, कुल 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से माइक्रोन के अलावा, तीन और प्रोजेक्ट्स भी बहुत जल्द प्रोड्क्शन शुरु करने वाले हैं। और हम जो सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बना रहे हैं, वो किसी एक रीजन तक सीमित नहीं है, ये पैन इंडिया है। यानी विकसित भारत के नए टेक हब्स देश के हर हिस्से में विकसित किए जा रहे हैं। यहां साणंद के अलावा धोलेरा में भी बहुत बड़े स्तर पर काम चल रहा है। कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी नई फैसिलिटी पर काम शुरु हुआ है। असम, ओडिशा और पंजाब में भी सेमीकंडक्टर यूनिट्स पर काम चल रहा है।

साथियों,

आज पूरी दुनिया के इन्वेस्टर्स के लिए भारत का एक ही मैसेज है, India is ready. India is reliable and India delivers.

साथियों,

आप जानते हैं कि सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का मतलब सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं होता है। ये इकोसिस्टम, मशीन बनाने वाले, डिज़ाइन इंजीनियर, रिसर्च इंस्टीट्यूशन्स, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, और skilled technicians, ऐसे अनेक लेयर्स से मिलकर के बनता है। सबके तालमेल से एक चिप तैयार होती है। भारत भी, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहा है। इस वर्ष के बजट में हमने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की है। इसका मकसद भी यही है। जैसे-जैसे प्रोडक्शन बढ़ेगा, वैसे-वैसे भारत में ही materials, components और services की मांग बढ़ेगी। यही सबसे बड़ा अवसर है।

साथियों,

भारत का एक और बड़ा एडवांटेज, हमारी मैन्युफेक्चरिंग एंबिशन्स हैं। भारत की एक बहुत बड़ी आबादी है, जो गैजेट्स की फर्स्ट टाइम यूज़र बनती जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स हो, ऑटोमोबाइल हो, या फिर अन्य टेक्नॉलॉजी, भारत में डिमांड लगातार बढ़ती ही जा रही है। यानी मेक इन इंडिया, अब फुल स्विंग में आगे बढ़ रहा है। आप हमारा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ही देखिए, बीते 11 वर्षों में इलेकट्रॉनिक्स प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट कई गुणा बढ़ा है। अब भारत, कंपोनेंट्स से लेकर फिनिश्ड प्रोडक्ट तक, देश में ही बनाने में जुटा है। जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफेक्चरिंग का दायरा बढ़ता जाएगा, तो सेमीकंडक्टर्स की डोमेस्टिक डिमांड भी उतनी ही बढ़ती जाएगी। यानी भारत में इन्वेस्ट करने वालों के लिए डोमेस्टिक मार्केट और ग्लोबल opportunities, दोनों सामने खड़ी हैं।

साथियों,

साणंद के इस पूरे क्षेत्र से मेरा विशेष लगाव रहा है। साणंद तो वो धरती है, जो मिट्टी को भी सोना बना देती है। ये मैं आपको अपने अनुभव से बता रहा हूं। यहां जो थोड़े लोग अगर साणंद के बैठे होंगे, एक वक्त था, जब मैं कभी बस से यहां आता था, और साइकिल पर यहां की गलियों में घूमता रहता था, ये छोटा सा कस्बा था, यहां से साइकिल लेकर के ऊपर तक जाता था, यानी एक प्रकार से ये मेरा कार्यक्षेत्र रहा है, लंबे अरसे तक। और मैंने अपनी आंखों के सामने साणंद को बदलते हुए देखा है। किसी जमाने का एक छोटा कस्बा, आज एक बहुत बड़े शहर में कनवर्ट हो रहा है। और शुरू कहां से हुआ एक रूपये का एसएमएस, एक रूपये का। मैंने रतन टाटा जी को एक एसएमएस किया था, वेलकम, स्वागतम, मैंने लिखा था स्वागतम। एक रूपये का इंवेस्टमेंट, ये गुज्जू क्या कर सकता है देख लीजिए।

साथियों,

साणंद को मैंने एक कार फैक्ट्री से, देश का बड़ा ऑटोमोबाइल हब बनते हुए अपनी आंखों से देखा है। और मुझे याद है, जब यहां बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी आई थी, तो उसके साथ पूरा ecosystem विकसित हुआ था। एक कंपनी के आने से, यहां इतनी सारी Ancillary units आईं। Supplier network खड़ा हुआ, Local industry मजबूत हुई, और रोज़गार और निवेश दोनों बढ़े। और मैं यहां, जो साथी देश और दुनिया से काम करने के लिए आ रहे हैं। ये बात सही है कि छोटा सा कस्बा, अचानक ग्लोबल मैप पर उसने अपने जगह बना ली है। विकास और व्यवस्थाएं जो चाहिए, शायद आज भी आपके मन में रहता होगा, कि ये होता तो अच्छा होता, ये होता तो अच्छा होता।

मैं आपको विश्वास दिलाता हूं साथियों,

आप जिस लाईफ स्टाईल चाहते हैं, आप जो सोशल लाईफ चाहते हैं, आप जिस प्रकार से जिंदगी जीना चाहते हैं, ये गुजरात है, वो भी बनाकर के देगा। आपको कोई कमी हम महसूस नहीं होने देंगे। अब उसी तरह, Micron की ये पायनीयर facility भी, एक नए इकोसिस्टम का विस्तार करने वाली है। मुझे पूरा विश्वास है, आने वाले समय में सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी साणंद अपनी सफलता का एक नया अध्याय लिखेगा।

साथियों,

माइक्रोन की D-RAM और NAND solutions, दुनिया भर के data centres, AI applications, mobile devices, और advanced computing systems को शक्ति देती हैं। अब ये यहीं, इसी साणंद की धरती पर बनेंगे। यहाँ advanced wafers को high-quality memory और storage products में बदला जाएगा। इस प्लांट में अभी सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है। आने वाले समय में इसमें और अधिक विस्तार होगा।

साथियों,

यहां आप जो क्लीनरूम स्पेस बना रहे हैं, वो दुनिया के सबसे बड़े A.T.M.P. क्लीनरूम्स में से एक होने जा रहा है। ये प्लांट, प्रगति और प्रकृति के तालमेल का भी बेहतरीन उदाहरण है। पानी कम से कम खर्च हो, इसके लिए जो व्यवस्थाएं आपने की हैं, वो भी सराहनीय है।

साथियों,

मैं गुजरात सरकार की नीतियों की भी प्रशंसा करुंगा। गुजरात ने Semiconductor Sector के लिए जो नीतियां बनाई थीं, उनका फायदा अब जम़ीन पर दिख रहा है। भूपेंद्र भाई की सरकार की प्रोएक्टिव अप्रोच के कारण, गुजरात टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। Approvals हों, land allotment की बात हो, utilities जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाना हो, इससे गुजरात पर निवेशकों का भरोसा मजबूत हो गया है। धोलेरा और साणंद आज पश्चिमी भारत के semiconductor clusters के रूप में विकसित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए जो Inputs चाहिए, उससे जुड़ी इंडस्ट्री भी गुजरात में विकसित की गई हैं। जैसे chemical और petrochemical industry, skill centres और training initiatives, इन सब पर गुजरात में साथ-साथ काम हो रहा है।

साथियों,

ये भारत के नौजवानों के लिए अवसरों का नया गेट खोल रहा है। आज हमने पहला कदम रखा है। जैसे-जैसे भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के 10 projects, production में आएंगे, तो यह multiplier effect MSMEs तक, startups तक, electronics industry की पूरी value chain तक पहुँचेगा। दुनिया तक संदेश पहुंच चुका है कि, India is Capable, India is Competitive, India is Committed. मैं भारत के पार्टनर्स को, ग्लोबल इन्वेस्टर्स को भरोसा देता हूं, कि भारत सरकार हो, राज्य सरकारें हों, हम सब आपके साथ हैं।

साथियों,

जब भावी पीढ़ियां इस दशक को पीछे मुड़कर देखेंगी, तो वो गर्व से कहेंगी की इस दशक में भारत ने कितनी ऊंची छलांग लगाई। यही वो दशक होगा, जो भारत के टेक फ्यूचर का टर्निंग प्वाइंट सिद्ध होगा। एक बार फिर माइक्रोन की पूरी team को, गुजरात सरकार को, आप सबको मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। धन्यवाद !

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प्रधानमंत्री 5 जून को सूरत और दमन के दौरे पर जाएंगे
June 04, 2026
प्रधानमंत्री सूरत में लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री 8-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के प्रमुख पैकेज राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री एनएच-56 के महत्वपूर्ण खंडों को चार-लेन बनाने की आधारशिला रखेंगे; यह परियोजना जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पहुंच को सुगम बनाएगी
प्रधानमंत्री दमन में लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री दमन में नमो हवाई अड्डा का नया टर्मिनल भवन राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए 885 करोड़ रुपये की बंदरगाह परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 5 जून, 2026 को गुजरात और दमन का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 2:30 बजे, सूरत जिले के हजीरा में चल रहे औद्योगिक कार्यों और अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री शाम लगभग 4:15 बजे, सूरत में लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री दमन के लिए रवाना होंगे, जहां शाम लगभग 6:15 बजे वे दमन स्थित नामो हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद दमन में स्थित नामो अस्पताल राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। फिर सायं लगभग 7:15 बजे प्रधानमंत्री दमन में लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, समर्पण और शिलान्यास करेंगे। वे लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए लगभग 885 करोड़ रुपये की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भी शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर वे जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

सूरत में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों में फैली 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे।

प्रधानमंत्री वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज VI और VII राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे गुजरात और महाराष्ट्र के बीच उच्च गति परिवहन, लॉजिस्टिक्‍स दक्षता और आर्थिक संपर्क में सुधार होगा। प्रधानमंत्री प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनमें जनजातीय क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए राष्‍ट्रीय राजमार्ग-56 के महत्वपूर्ण खंडों को चार लेन का बनाना शामिल है।

प्रधानमंत्री सूरत में 200 बिस्तरों वाले ईएसआईसी अस्पताल का भी उद्घाटन करेंगे, जो प्रमुख स्‍पेशियलिटिज में आधुनिक माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा। साथ ही, यह एक केंद्रीय प्रयोगशाला और आवश्यक सहायक सेवाओं से भी सुसज्जित होगा। इसमें व्यावसायिक चोटों और चिकित्सा आपात स्थितियों के समय पर प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए 24/7 आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल की सुविधा भी है। प्रधानमंत्री अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली के तहत बिजली निकासी क्षमता बढ़ाने के लिए गुजरात में ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार सहित महत्वपूर्ण उपयोगिता केन्‍द्रों और औद्योगिक अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री गुजरात सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलों का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें वलसाड में संशोधित सुधार-आधारित वितरण सेक्‍टर स्‍कीम के तहत आधुनिक बिजली वितरण उन्नयन, दहेज पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) और सारिगाम गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) में उन्नत अपशिष्ट निपटान और उपचार अवसंरचना एवं जंबूसर बल्क ड्रग पार्क में आवश्यक लेआउट उपयोगिता केन्‍द्र शामिल हैं।

दमन में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री दमन में लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे। ये परियोजनाएं स्वास्थ्य सेवा, नागरिक उड्डयन, पर्यटन, अवसंरचना, कनेक्टिविटी और जन कल्याण सहित विभिन्न सेक्‍टरों से संबंधित हैं। इनसे दादरा और नगर हवेली तथा दमन एवं दीव केंद्र शासित प्रदेशों के समग्र विकास को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री दमन में लगभग 1,340 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनमें नामो हवाई अड्डे का नया टर्मिनल भवन और नामो अस्पताल शामिल हैं। नया हवाई अड्डा टर्मिनल क्षेत्रीय हवाई संपर्क को अत्‍यधिक सुदृढ़ करेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगा। दमन जिले का जिला अस्पताल नामो अस्पताल प्रतिदिन लगभग 1,500 ओपीडी रोगियों की देखभाल के लिए विकसित किया गया है। इससे लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

प्रधानमंत्री लगभग 1,630 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। प्रमुख परियोजनाओं में आइकॉनिक ब्रिज, दमन कन्वेंशन सेंटर और दमन स्थित एनआईएफटी परिसर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

प्रधानमंत्री लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए लगभग 885 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। इन परियोजनाओं में कलपेनी द्वीप और कदमत द्वीप दोनों के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर बंदरगाह सुविधाओं का विकास शामिल है। इन बहुउद्देशीय घाटों के विकास से 300 मीटर तक की लंबाई वाले क्रूज जहाजों सहित बड़े यात्री जहाजों के लिए साल भर आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी। ये परियोजनाएं यात्रियों और माल की सुरक्षित एवं कुशल आवाजाही को सक्षम बनाएंगी। साथ ही मछली प्रबंधन, ईंधन वितरण, बर्फ आपूर्ति और नाव मरम्मत के लिए एकीकृत सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये पहल समुद्री कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेंगी, स्थानीय मछुआरों की आजीविका में सहायता करेंगी, पर्यटन को बढ़ावा देंगी और द्वीपों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देंगी।