आईआईटी धारवाड़ राष्ट्र को समर्पित किया
दुनिया में सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म श्री सिद्धारूढ़ा स्वामीजी हुबली स्टेशन का लोकार्पण किया
पुनर्विकसित होसपेटे स्टेशन का लोकार्पण किया गया, जो हम्पी स्मारकों के समान डिजाइन किया गया है
धारवाड़ बहु-ग्राम जलापूर्ति योजना की आधारशिला रखी गई
हुबली-धारवाड़ स्मार्ट सिटी की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
"डबल इंजन सरकार प्रदेश के हर जिले, गांव, कस्बे के पूर्ण विकास के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयासरत है"
“धारवाड़ विशेष है। यह भारत की सांस्कृतिक जीवंतता का प्रतिबिंब है”
“धारवाड़ में आईआईटी का नया परिसर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा प्रदान करेगा। यह बेहतर कल के लिए युवा प्रतिभाओं को तैयार करेगा”
“शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक, डबल इंजन की सरकार निरंतर तेजी से काम करती है”
“अच्छी शिक्षा हर जगह और सभी तक पहुंचनी चाहिए। बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण संस्थान अधिक लोगों तक अच्छी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करेंगे”
"प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और बेहतर शासन हुबली-धारवाड़ क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा"
"आज हम युवाओं को अगले 25 वर्षों में उनके संकल्पों को साकार करने के लिए सभी संसाधन दे रहे हैं"
"आज भारत सबसे शक्तिशाली डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक है"
“भारत के लोकतंत्र की जड़ें हमारे सदियों पुराने इतिहास से जुड़ी हैं। दुनिया की कोई ताकत भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकती”
"कर्नाटक हाई-टेक इंडिया का इंजन है"

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

जगद्गुरु बसवेश्वर अवरिगे नन्ना नमस्कारगळु।

कले, साहित्य मत्तू संस्कृतिया इ नाडिगे,

कर्नाटक दा एल्ला सहोदरा सहोदरीयारिगे नन्ना नमस्कारगळु।

साथियों,

मुझे इस साल की शुरुआत में भी हुबली आने का सौभाग्य मिला था। जिस तरह हुबली के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर मुझे आशीर्वाद दिया, वो पल मैं कभी भूल नहीं सकता हूं इतना प्यार, इतने आशीर्वाद। बीते समय में मुझे कर्नाटक के अनेक क्षेत्रों में जाने का अवसर मिला है। बेंगलुरू से लेकर बेलागावी तक, कलबुर्गी से लेकर शिमोगा तक, मैसूर से लेकर तुमकुरू तक, मुझे कन्नड़िगा लोगों ने जिस तरह का स्नेह दिया है, अपनापन दिया है, एक से बढ़कर एक, आपका ये प्यार, आपके आशीर्वाद अभिभूत करने वाले हैं। ये स्नेह आपका मुझ पर बहुत बड़ा ऋण है, कर्ज है और इस कर्ज को मैं कर्नाटक की जनता की लगातार सेवा करके चुकाउंगा। कर्नाटक के प्रत्येक व्यक्ति का जीवन खुशहाल हो, यहां के नौजवानों को आगे बढ़ने के, रोजगार के लगातार नए अवसर मिलें, यहां की बहन-बेटियां और सशक्त हों, इसी दिशा में हम मिलकर काम कर रहे हैं। भाजपा की डबल इंजन की सरकार, कर्नाटक के हर जिले, हर गांव, हर कस्बे के पूर्ण विकास के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रही है। आज धारवाड़ की इस धरा पर विकास की एक नई धारा निकल रही है। विकास की ये धारा हुबली, धारवाड़ के साथ ही, पूरे कर्नाटक के भविष्य को सींचने का काम करेगी, उसे पुष्पित और पल्लवित करने का काम करेगी।

साथियों,

सदियों से हमारा धारवाड़ मलेनाडु और बयालू सीमे इसके बीच गेटवे टाउन, यानी द्वार के रूप में जाना जाता रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों के यात्रियों के लिए ये नगर एक पड़ाव होता था। इसने हर किसी का दिल खोलकर के स्वागत किया, और हर किसी से सीखकर खुद को समृद्ध भी किया। इसीलिए धारवाड़ केवल एक गेटवे ही नहीं रहा, बल्कि ये कर्नाटक और भारत की जीवंतता का एक प्रतिबिंब बन गया। इसे कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। धारवाड़ की पहचान साहित्य से रही है, जिसने डॉ डी. आर. बेंद्रे जैसे साहित्यकार दिये हैं। धारवाड़ की पहचान समृद्ध संगीत से रही है, जिसने पंडित भीमसेन जोशी, गंगूभाई हंगल और बासवराज राजगुरु जैसे संगीतज्ञ दिये हैं। धारवाड़ की धरती ने पंडित कुमार गंधर्व, पंडित मल्लिकार्जुन मानसुर, जैसे महान रत्नों को दिया है। और धारवाड़ की पहचान यहाँ के स्वाद से भी है। ऐसा कौन होगा, जिसने एक बार ‘धारवाड़ पेड़ा’ का स्वाद लिया हो और फिर उसका मन उसे दोबारा खाने का ना किया हो। लेकिन हमारे साथी प्रहलाद जोशी मेरे स्वास्थ्य का बहुत ख्याल रखते हैं, इसलिए उन्होंने आज मुझे पेड़ा तो दिया, लेकिन बंद बॉक्स में दिया।

साथियों,

आज धारवाड़ में IIT के इस नए कैम्पस की दोहरी खुशी है। यहां हिंदी समझ में आता है इस तरफ। ये कैंपस, धारवाड़ की पहचान को और मजबूत करने का काम करेगा।

साथियों,

यहाँ आने से पहले मैं अभी मंड्या में था। मंड्या में मुझे ‘बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेस वे’ कर्नाटक की और देश की जनता को समर्पित करने का सौभाग्य मिला। ये एक्सप्रेस वे कर्नाटक को दुनिया के सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी हब के रूप में और आगे ले जाने का रास्ता तैयार करेगा। अभी कुछ ही दिन पहले बेलागावी में कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ था। शिमोगा में कुवेम्पु एयरपोर्ट का inauguration भी हुआ था। और, अब धारवाड़ में IIT का ये नया कैम्पस कर्नाटक की विकासयात्रा में नया अध्याय लिख रहा है। एक इंस्टीट्यूट के रूप में यहां की high-tech facilities IIT-धारवाड़ को वर्ल्ड के बेस्ट institutes के बराबर पहुँचने की प्रेरणा देंगे।


साथियों,

ये संस्थान, भाजपा सरकार की संकल्प से सिद्धि का भी उदाहरण है। 4 साल पहले फरवरी 2019 में मैंने इस आधुनिक इंस्टीट्यूट का शिलान्यास किया था। बीच में कोरोना काल था, काम करने में अनेक दिक्कतें थी। लेकिन उसके बावजूद भी मुझे खुशी है कि 4 साल के भीतर-भीतर IIT-धारवाड़ आज एक futuristic institute के रूप में तैयार हो चुका है। शिलान्यास से लोकार्पण तक, डबल इंजन सरकार इसी स्पीड से काम करती है और मेरा तो संकल्प रहता है जिसका शिलान्यास हम करेंगे उसका उद्घाटन भी हम ही करेंगे। होती है, चलती है शिलान्यास करो पत्थर रखो और भूल जाओ वो वक्त चला गया है।

साथियों,

आजादी के बाद कई दशकों तक हमारे यहां यही सोच रही कि अच्छे शिक्षण संस्थाओं का विस्तार होगा तो उसके ब्रांड पर असर पड़ेगा। इस सोच ने देश के युवाओं का बहुत नुकसान किया है। लेकिन अब नया भारत, नौजवान भारत, इस पुरानी सोच को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहा है। अच्छी शिक्षा हर जगह पहुंचनी चाहिए, हर किसी को मिलनी चाहिए। जितने ज्यादा उत्तम इंस्टीट्यूट होंगे, उतने ज्यादा लोगों तक अच्छी शिक्षा की पहुंच होगी। यही वजह है कि बीते 9 वर्षों में भारत में अच्छे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की संख्या लगातार बढ़ रही है। हमने AIIMS की संख्या तीन गुना कर दिया। आजादी के बाद 7 दशकों में जहां देश में सिर्फ 380 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं पिछले 9 वर्षों में 250 मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। इन 9 वर्षों में देश में अनेकों नए IIM और IIT खुले हैं। आज का ये कार्यक्रम भी भाजपा सरकार की इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

साथियों,

21वीं सदी का भारत, अपने शहरों को आधुनिक बनाते हुए आगे बढ़ रहा है। भाजपा सरकार ने हुबली-धारवाड़ को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया था। आज इसके तहत यहां अनेक स्मार्ट परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है। इसके अलावा एक स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की आधारशिला रखी गई है। टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट गवर्नेंस की वजह से आने वाले दिनों में हुबली धारवाड़ का ये क्षेत्र विकास की नई ऊंचाई पर जाएगा।

साथियों,

पूरे कर्नाटक में श्री जयदेव हॉस्पिटल ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट पर भी बहुत भरोसा किया जाता है। इसकी सेवाएं बेंगलुरु, मैसूर और कलबुर्गी में मिलती हैं। आज हुबली में इसके नए ब्रांच की आधारशिला रखी गई है, इसके बनने के बाद इस क्षेत्र के लोगों को बहुत बड़ी सुविधा हो जाएगी। ये क्षेत्र पहले से ही Health Care Hub है। अब नए अस्पताल से यहां के और ज्यादा लोगों को फायदा होगा।

साथियों,

धारवाड़ और उसके आसपास के क्षेत्र में पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने के लिए भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत यहां एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की योजना का शिलान्यास हुआ है। इसके द्वारा रेणुका सागर जलाशय और मालाप्रभा नदी का जल, नल के जरिए सवा लाख से ज्यादा घरों तक पहुंचाया जाएगा। धारवाड़ में जब नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार होगा तो इससे पूरे जिले के लोगों को फायदा होगा। आज तुपरीहल्ला फ्लड डैमेज कंट्रोल प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखी गई है। इस प्रोजेक्ट के द्वारा बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

साथियों,

आज मुझे एक और बात की बहुत प्रसन्नता है। कर्नाटक ने कनेक्टिविटी के मामले में आज एक और माइलस्टोन को छू लिया है। और कर्नाटक को ये गौरव दिलाने का सौभाग्य हुबली को मिला है। अब सिद्धरूधा स्वामीजी स्टेशन पर दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। लेकिन ये सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, ये सिर्फ एक प्लेटफॉर्म का विस्तार नहीं है। ये विस्तार है उस सोच का, जिसमें हम इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हैं। होसपेट–हुबली–तिनाईघाट सेक्शन का इलेक्ट्रिफिकेशन और होसपेट स्टेशन का अपग्रेडेशन हमारे इसी विजन को ताकत देता है। इस रूट से बड़े पैमाने पर उद्योगों के लिए कोयले की ढुलाई होती है। इस लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद डीजल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण की सुरक्षा होगी। इन सारे प्रयासों से क्षेत्र के आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

भाइयों और बहनों,

अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिर्फ आंखों को अच्छा लगने के लिए नहीं होता, ये जीवन को आसान बनाने वाला होता है। ये सपनों को साकार करने का रास्ता बनाता है। जब हमारे यहां अच्छी सड़कें नहीं थीं, अच्छे अस्पताल नहीं थे, हर वर्ग, हर आयु के लोगों को कितनी परेशानी होती थी। लेकिन आज जब नए भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, तो सभी को इसका लाभ मिल रहा है। अच्छी सड़कों से स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवाओं को आसानी होती है। आधुनिक हाईवे से किसानों को, मज़दूरों को, व्यापार करने बिजनेस वाले को, दफ्तर आने वाले लोगों को, मिडिल क्लास को, हर किसी को लाभ होता है। इसलिए हर कोई अच्छा-आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर चाहता है। और मुझे खुशी है कि बीते 9 वर्षों से देश लगातार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम कर रहा है। पिछले 9 वर्ष में देश के गांवों में पीएम सड़क योजना के माध्यम से सड़कों का नेटवर्क दोगुना से अधिक हो चुका है। नेशनल हाइवे नेटवर्क में 55% से अधिक वृद्धि हो चुकी है। सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि देश में आज एयरपोर्ट और रेलवे का भी अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। पिछले 9 वर्षों में देश में एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है।

साथियों,

साल 2014 से पहले देश में इंटरनेट की, भारत की डिजिटल ताकत की चर्चा बहुत कम होती थी। लेकिन आज भारत दुनिया की सबसे ताकतवर डिजिटल इकॉनॉमीज़ में से एक है। ये इसलिए हुआ क्योंकि हमने सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराया, गांव-गांव इंटरनेट पहुंचाया। पिछले 9 वर्षों में हर दिन औसतन ढाई लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन दिए गए हैं, प्रतिदिन ढाई लाख कनेक्शन।

इंफ्रा के विकास में ये गति इसलिए आ रही है, क्योंकि आज देश और देशवासियों की ज़रूरत के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। पहले राजनीतिक लाभ-हानि देखकर ही रेल, रोड ऐसे प्रोजेक्ट्स की घोषणा होती थी। हम पूरे देश के लिए पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान लेकर आए हैं, ताकि जहां-जहां भी देश में ज़रूरत है, वहां तेज़ गति से इंफ्रास्ट्रक्चर बन सके।

साथियों,

आज देश में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। साल 2014 तक देश की एक बड़ी आबादी के पास पक्का घर नहीं था। टॉयलेट के अभाव के कारण हमारी बहनों को कितने कष्ट उठाने पड़ते थे। लकड़ी-पानी के इंतजाम में ही बहनों का पूरा समय चला जाता था। गरीब के लिए अस्पताल की कमी थी। अस्पताल में इलाज महंगा था। हमने एक-एक करके इन समस्याओं का समाधान किया। गरीब को अपना पक्का घर मिला, बिजली-गैस कनेक्शन मिला, टॉयलेट मिला। अब हर घर नल से जल की सुविधा मिल रही है। घर-गांव के निकट अच्छे अस्पताल बन रहे हैं, अच्छे कॉलेज-यूनिवर्सिटी बन रहे हैं। यानि आज हम अपने युवाओं को हर वो साधन दे रहे हैं, जो आने वाले 25 साल के संकल्प सिद्ध करने में उनकी मदद करेंगे।


साथियों,

आज जब मैं भगवान बसवेश्वर की धरती पर आया हूं तो खुद को और धन्य महसूस कर रहा हूं। भगवान बसवेश्वर के अनेक योगदानों में सबसे प्रमुख है-अनुभव मंडपम की स्थापना। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था का दुनिया भर में अध्ययन होता है। और ऐसी अनेक बातें है, जिसके कारण हम दावे के साथ कहते हैं भारत सिर्फ largest democracy नहीं, भारत mother of democracy भी है। ये मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कुछ वर्ष पूर्व लंदन में भगवान बसवेश्वर की प्रतिमा के लोकार्पण का अवसर मिला। लंदन में भगवान बसवेश्वर, लोकतंत्र की मजबूत नींव का प्रतीक अनुभव मंडपम। वो भगवान बसवेश्वर लंदन की धरती पर उनकी मूर्ति लेकिन ये दुर्भाग्य है कि लंदन में ही भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाने का काम किया गया। भारत के लोकतंत्र की जड़ें, हमारे सदियों के इतिहास से सींची गई हैं। दुनिया की कोई ताकत भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। बावजूद इसके कुछ लोग भारत के लोकतंत्र को लगातार कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। ऐसे लोग भगवान बसवेश्वर का अपमान कर रहे हैं। ऐसे लोग कर्नाटक के लोगों का, भारत की महान परंपरा का, भारत के 130 करोड़ जागरूक नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। ऐसे लोगों से कर्नाटक के लोगों को भी सतर्क रहना है।

 

साथियों,

कर्नाटक ने बीते वर्षों में जिस तरह से भारत को tech-future के रूप में पहचान दिलाई है, ये समय उसे और आगे बढ़ाने का है। कर्नाटक हाइटेक इंडिया का इंजन है। इस इंजन को डबल इंजन की सरकार की पावर मिलनी बहुत जरूरी है।

साथियों,

एक बार फिर हुबली-धारवाड़ के लोगों को विकास के प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत-बहुत बधाई, बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मेरे साथ बोलें– भारत माता की जय। दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए – भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM’s address during inauguration of the Swami Vivekananda Cultural Youth Centre-Viveka Smaraka in Mysuru
August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।